शनिवार, 11 जनवरी 2025
शुक्रवार, 10 जनवरी 2025
भाजपा नेता बाबूसिंह खीची की पत्नी का निधन
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 10 जनवरी 2025.
भाजपा नेता बाबूसिंह खीची की धर्मपत्नी श्रीमती भंवर कंवर का करीब 65 वर्ष की उम्र में
हृदयाघात से 9 जनवरी को निधन हो गया।
बाबूसिंह खीची को यह दुखद सूचना जयपुर में मिली तब वे तुरंत ही रवाना हुए।
भंवर कंवर का अंतिम संस्कार निजी खेत में चक 2 आर.जे.डी ( रोझड़ी डिस्ट्रीब्यूटरी) में किया गया। अंतिम रस्म 19 जनवरी को होगी।(सूरतगढ़ छतरगढ रोड पर छतरगढ से पहले यह चक 2 आर.जे.डी आता है।)
श्री खीची करीब 45 सालों से सूरतगढ़ क्षेत्र में सक्रिय हैं। पैंसठ वर्षीय खीची सूरतगढ़ के विधायक रहे गुरूशरण छाबड़ा के संघर्षों के साथी और मंत्री किरोड़ी लाल मीणा के चुनावों के साथी रहे हैं। छाबड़ा के शराबबंदी आंदोलन के बाद अब पिछले कुछ वर्षों से पूजा छाबड़ा के शराबबंदी आंदोलन में और समाजसेवा व राजनीति में सक्रिय हैं।
* मुझे भंवर कंवर के निधन का यह दुखद समाचार देरी से आज रात्रि में मिला तब श्री खीची से बात की।
* परमब्रह्म भंवर कंवर को मोक्ष प्रदान करें।
* नमन.
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार, सूरतगढ़।०0०
गुरुवार, 9 जनवरी 2025
सूरतगढ़:जनसुनवाई में आया नाली प्रकरण आंखें खोलने वाला
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 9 जनवरी 2025.
नगरपालिका प्रशासन की घोर लापरवाही का एक नाली प्रकरण जनसुनवाई में आया जिसमें पीड़ा जनक स्थिति यह थी कि समाजसेवी कमल पारीक के घर से नाली मुख्य नाली तक पड़ोसियों ने बनाने नहीं दी और नगरपालिका दबाव से झूठ रचती रही। अधिशाषी अधिकारी को मौका देख कर ठेकेदार से तुरंत निर्माण कराना था जो पड़ोसियों ने ठेकेदार को करने नहीं दिया।
* जनसुनवाई में आज यह मामला कमल पारीक की ओर से पेश हुआ। अतिरिक्त जिलाकलेक्टर कन्हैयालाल सोनगरा के आदेश पर नायब तहसीलदार ने मौका निरीक्षण कर रिपोर्ट दी है।
* इस नाली प्रकरण के बारे में कमल पारीक ने सोशल मीडिया पर वह शिकायत पेश की है जो जनसुनवाई में दी। यह शिकायत नगरपालिका प्रशासन के साथ जनसुनवाई की लापरवाही को भी उजागर करती है कि वहां भी महीनों तक कार्यवाही नहीं होती और नगरपालिका झूठे जवाब देती है। नगरपालिका की जो कार्यवाही और जवाब थे उनकी भी जांच होनी चाहिए। नगरपालिका से कौन झूठे जवाब दे देता है?
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सेवा में
अतिरिक्त जिला कलेक्टर महोदय
सूरतगढ़
विषय:- नगरपालिका को नाली निर्माण कराने के लिए निर्देश देने बाबत
मान्यवर जी
निवेदन यह है कि प्रार्थी स्थानीय वार्ड 30, पुराना बाजार का निवासी है। प्रार्थी ने अपने नए आवास में गत वर्ष में रहना शुरू किया तो प्रार्थी को मकान में से निकलने वाले वर्षाजनित, साफ-सफाई, बाथरूम-टॉयलेट, आदि के पानी निकासी संबंधी दिक्कत होने पर प्रार्थी ने मकान के पश्चिमी तरफ चिपती नाली में अपना पानी डालना चाहा तो पडौसी गिरधारी जी चांडक ने यह कहते हुए नाली में निकासी नहीं होने दी कि यह हमारी निजी नाली है आप दूसरी तरफ से अपनी नई नाली बना लो। प्रार्थी ने अपने पूर्वी तरफ की नाली में मिलाने हेतु सड़क पर नाली निर्माण शुरू करवाया तो दूसरे पडौसी हेमंत जी चांडक ने यह कहते हुए मुझे मना कर दिया कि मेरे घर के सामने से नाली नहीं निकालने दूंगा। आखिर हारकर प्रार्थी ने नगरपालिका में जाकर अपनी समस्या से अवगत करवाया तो अधिकारियों ने आजकल-आजकल के आश्वासन देते हुए चक्कर कटवाए।फिर प्रार्थी ने 5 अगस्त 2024 को लिखित में पहली बार प्रार्थना पत्र दिया तो पालिका अधिकारीयों ने कहा कि हमने टेंडर कॉल कर लिए हैं और शीघ्र ही आपको परेशानी से निजात मिल जाएगी आप थोड़े दिन और रुक जाओ। प्रार्थी एकबार फिर से इंतजार करने लगा। महीना भर बीतने पर प्रार्थी ने अधिशासी अधिकारी जी से मुलाकात की तो उन्होंने कहा कि आपके वहां नाली निर्माण करना है लेकिन हमारे कनिष्ठ अभियंता के कान का पर्दा फट जाने की वजह से वो अभी काम नहीं कर पा रहे है आप थोड़े दिन और रुक जाओ। मानवता के नाते प्रार्थी फिर से चुप बैठ कर प्रतीक्षा करने लगा। काफी दिन बीत जाने के बाद प्रार्थी ने फिर से पालिका अधिकारीयों से निवेदन किया तो पालिका ने मौके पर ईंटें भिजवा ठेकेदार को नाली निर्माण हेतु मौखिक रूप से कह दिया। ठेकेदार के कार्मिकों ने जैसे ही नाली निर्माण हेतु सड़क पर खुदाई शुरू की तो दोनो पड़ोसियों ने वहीं अपनी बात मिस्त्री को कही और काम करने से मना कर दिया।
तब से लेकर आज तक स्थिति जस की तस है। मेरे द्वारा जन सुनवाई में 14 नवम्बर, 12 दिसंबर, 20 दिसंबर व 26 दिसंबर को प्रार्थना पत्र दिए गए हैं जिनका स्थानीय नगरपालिका द्वारा झूठा निस्तारण दिखा कर परिवाद को बंद कर दिया जाता है।
अब पालिका प्रशासन प्रभावशाली लोगों के दबाव में आकर मुझे कह रहा है कि नई नाली भी नहीं बनेगी और न ही मकान के चिपती नाली में निकासी होगी बल्कि आप सीवरेज में अपना कनेक्शन जुड़वा लें, श्रीमान जी मेरे मोहल्ले में एक भी सीवरेज कनेक्शन नही है फिर नगरपालिका द्वारा मेरे साथ यह अन्याय करने पर क्यों आमादा है ?
श्रीमान जी मेरी समझ में यह बात नहीं आ रही कि सार्वजनिक सड़क और चौक में बनी हुई नाली किसी की निजी कैसे हो सकती है, वहीं कोई व्यक्ति अपने घर के सामने सड़क पर नाली निर्माण करने से प्रशासन को कैसे रोक सकता है ?
मेरे परिवार को यह समस्या झेलते हुए सात आठ महीने हो चुके हैं, मुझे यह लिखते हुए भी बड़ी शर्म महसूस हो रही है कि हम परिवारजन नहाने धोने और मल मूत्र करने दूसरे घर में जाते हैं।
श्रीमान जी आपसे एक आशा व उम्मीद के साथ प्रार्थना है कि आप मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय नगरपालिका को नाली निर्माण कराने हेतु निर्देश जारी करें। महोदय मेरी इस परेशानी का प्रशासन द्वारा जल्द ही सकारात्मक तरीके से समाधान नही किया गया तो मुझे धरना प्रदर्शन या अदालती कार्यवाही का सहारा लेना पड़ेगा।
सहयोग हेतु मैं आपका सदैव आभारी रहूंगा।
भवदीय,
कमल पारीक,
मोबाईल नंबर 9414332673
पुराना बाजार, वार्ड 30
नज़दीक जैन मंदिर
सूरतगढ़।
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बुधवार, 8 जनवरी 2025
भाजपा श्रीगंगानगर जिला.22 मंडल अध्यक्षों की घोषणा.नया जिलाध्यक्ष 15 जनवरी के पास घोषित होगा.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 8 जनवरी 2025.
भारतीय जनता पार्टी के नगर और देहात मंडल अध्यक्षों के चयन की सूचियां जारी होने में जबरदस्त दबाव और सिफारिशों के होते हुए देरी होते आज 22 मंडलों के अध्यक्षों की घोषणा हो पाई है। श्रीगंगानगर के संगठन चुनाव प्रभारी दशरथ सिंह जी ने जयपुर पहुंचने के बाद यह सूची जारी की। जहां सर्वसम्मति नहीं हो पाई वहां की घोषणा नहीं हुई।
👌 जिन मंडलों के अध्यक्ष घोषित नहीं हो पाए हैं उनका निर्णय नये जिलाध्यक्ष द्वारा किया जाएगा की संभावना है। अभी एक और सूची आने की कोई संभावना नहीं है। जिलाध्यक्ष की घोषणा 15 जनवरी के पास होने की संभावना है।
सूरतगढ़ में कुल 5 मंडल है जिनमें केवल एक राजियासर मंडल ( देहात) की ही घोषणा हो पाई है। नगर मंडल में गुटबंदियों से भारी दबाव और अलग अलग नाम रहे,इसलिए एकमत नहीं हुए और यह घोषणा नहीं हुई।०0०
सूरतगढ़:गैस प्लांट के अवैध निर्माण के विरोध में प्रदर्शन
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 8 जनवरी 2025.
शहर में आबादी क्षेत्र में स्वीकृति बिना अवैध निर्माण किए जा रहे रिलायंस के गैस प्लांट का विरोध बढ रहा है। आज माकपा की ओर से प्रदर्शन किया गया व शहर के लिए खतरा बताते हुए बंद कराने की मांग की गई।
पिछले 10 माह से शहर की आबादी के सटते रिलायंस के बायो गैस प्लांट का निर्माण बिना किसी स्वीकृति से,बिना किसी प्रशासन के डर से अवैध रूप से चल रहा है स्थानीय नगर पालिका प्रशासन से इस बायो गैस प्लांट की निर्माण स्वीकृति नहीं लेकर अवैध रूप से इस प्लांट को बनाया जा रहा है। इस अवैध निर्माण को रुकवाने की मांग को लेकर आज माकपा कार्यकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन के उपखण्ड कार्यालय पर प्रदर्शन करके उस समय मौजूद अधिकारी नायब तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
इस गैस प्लांट के निर्माण से शहर की जनता की सुरक्षा खतरे में है।
पिछले दिनों जयपुर के भांकरोटा गैस दुःखांतिका त्रासदी के बाद पूरे क्षेत्र के लोग इस प्लांट निर्माण से भयभीत हो गए हैं।
दिनांक 23 दिसंबर को भी माकपा ने ज्ञापन प्रशासन को दिया था लेकिन आज तक कोई कार्यवाही नहीं हुई।
माकपा सचिव एडवोकेट सखी मोहम्मद व माकपा नेता मदन ओझा ने अपने संबोधन में कहा कि हमारी पार्टी इस अवैध रूप से बिना निर्माण स्वीकृति से बन रहे बायो गैस प्लांट का विरोध करती है व हमारी पार्टी मांग करती है कि इस निर्माण कार्य को अतिशीघ्र बंद करवाया जाए। माकपा नेताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि गैस प्लांट के निर्माण को रुकवाने के लिए क्षेत्रवासियों को साथ लेकर जन-आंदोलन बनाया जाएगा, जिससे अगर अशांति का माहौल बनता है तो उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन की होगी।
आज के प्रदर्शन में लक्ष्मण शर्मा,जवाहर छींपा,कामरेड मुमताज खान,विक्रम सिंह,सूरज भारतीय,कामरेड राजविंदर सिंह,लक्ष्मी सहाय,रामाशीष,महीराम,राजू वर्मा,राजकुमार बनोटा,नदीम खान,आरिफ़ छींपा,विमल सिंह आदि उपस्थित रहे।
विदित रहे कि विधायक डुंगरराम गेदर ने भी इस अवैध निर्माण को रुकवाने का ज्ञापन दिया हुआ है। बसंत आनंद संगम विहार कालोनियां जो पास में है उनके ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेश चड्ढा और बसंत विहार कालोनी वासियों की तरफ से एडवोकेट पूनम शर्मा ने भी एक ज्ञापन दे रखा है। नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी की तरफ से भी बंद करने का अंतिम नोटिस दिया जा चुका है लेकिन अवैध निर्माण जारी है। मांग उठ रही है कि बिजली पानी के कनेक्शन कटवाए जाएं व सीज किया जाए।०0०
मंगलवार, 7 जनवरी 2025
सूरतगढ़:1केएसआर में अधिकारियों की अनदेखी से डिग्गी की सालों से दुर्दशा.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 7 जनवरी 2025.
सूरतगढ़ तहसील में चक 1 केएसआर की करीब 2000 की आबादी और करीब 250 घर हैं जो सभी पक्के हैं मगर पंचायत की सार्वजनिक डिग्गी ( जोहड़) बुरी तरह से जीर्ण हालात में हैं। यह डिग्गी ही साबित करती है कि विकास अधिकारी सहित सरपंच आदि सभी लापरवाही से अनदेखी करते रहे। गांव में सभी घर पक्के हैं तो कुछ दो मंजिला भी हैं। सुनकर आश्चर्य हुआ कि गाय भैंसों पशुओं के कोठे भी पक्के हैं बस दुर्दशा सार्वजनिक डिग्गी की है। इस डिग्गी के चारदीवारी नहीं होना तो बहुत ज्यादा खतरनाक। कोई बच्चा बच्ची भी गिर सकते हैं। डिग्गी की ईंटे खुर जाने मसाला उतर जाने की हालत तो यह बयान करती है कि जब यह डिग्गी बनाई गई तब न ईंटे सही थी और न मसाला सही था। सभी गुणवत्ता हीन थे। जो मसाला अभी ईंटों पर लगा है उसकी प्रयोगशाला जांच करवाई जानी चाहिए ताकि स्पष्ट हो जाए कि कितना घटिया निर्माण हुआ था। डिग्गी के मरम्मत आदि निर्माण के लिए बजट आया तो फिर उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ?
* डिग्गी के पास में ही सार्वजनिक धर्मशाला बनी है जिसमें सुविधाओं का अभाव है इसलिए कोई भी इसका उपयोग नहीं कर पाता। धर्मशाला में रसोई, नहानघर,शौचालय आदि का प्रबंध होता है तब उसका उपयोग हो सकता है।
विकास अधिकारी को तो तुरंत ही निरीक्षण कर निर्णय लेना चाहिए।०0०
सोमवार, 6 जनवरी 2025
कैलाश भसीन जी ने मुझे "समर्पण को अर्पण" पुस्तक भेंट की.करणीदानसिंह राजपूत.
माननीय कैलाश भसीन जी ने आज "समर्पण को अर्पण" पुस्तक मुझे भेंट की जो मेरा सम्मान है और अतुलनीय है। भसीन जी की नस नस में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ समाया है या ये संघ में समाये हैं के बारे में कह सकता हूं कि एकाकार हैं। मैं भसीन जी को सुनता तो एकटक देखता रहता कि एक एक शब्द सुनने वाले को अदृश्य डोरी से बांधते चलता है। समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में भी पढता रहा। विचार किया कि श्रीगंगानगर जाकर निवास पर मिलूं। आज यह अवसर मिल ही गया।
भसीन जी के निवास का प्रवेश आंगन। एक तरफ ऊंचाई को दर्शाती पेड़ियां और तुलसी माता के समक्ष यह पुस्तक मुझे भेंट हुई। "समर्पण को अर्पण" को पढना है और फिर लिखना है एक महान व्यक्तित्व के कर्म पर जो अनेक संघर्षों से भरा एक इतिहास है।
*6 जनवरी 2025.
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ़ ( राजस्थान)
94143 81356
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रविवार, 5 जनवरी 2025
नवजात बच्चे को पालने में छोड़ दें फेंके नहीं.जाट क्लब.सूरतगढ़
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 5 जनवरी 2025.
जाट क्लब सूरतगढ़ ने राजकीय चिकित्सालय में पालना लगाया है ताकि अनावश्यक समझे जाने वाले नवजात बच्चों के जीवन को बचाया जा सके। फेसबुक से यह कार्य शुरू करने की जानकारी सामने आई। लोग इस पोस्ट पर कमेंट्स कर रहे हैं और सराहना कर रहे हैं तो अनेक अच्छा कार्य बता रहे हैं।०0०
28 जनों को उम्र कैद:चंदन गुप्ता मौत: नाम सूची.
( मीडिया रिपोर्ट्स.3 जनवरी 2025.)
उत्तर प्रदेश के कासगंज में 26 जनवरी 2018 को दर्जनों मोटरसाइकिल सवार तिरंगा यात्रा पर निकले जब वे बद्दुनगर मुस्लिम बहुल इलाके में पहुँचे तब यात्रा के दौरान विवाद हुआ। पत्थरबाज़ी हुई और फिर हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। गोलियां भी चलीं और यात्रा में शामिल चंदन गुप्ता को एक गोली लगी। इसके बाद चंदन गुप्ता की मौत हो गई थी।चंदन की मौत के बाद इलाक़े में तनाव फ़ैल गया था और दुकानों के साथ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था. तब 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया था और तीन दिन तक इंटरनेट बंद था।
घटना के लगभग सात साल बाद इस मामले में अदालत का फ़ैसला आया है. लखनऊ में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने गुरुवार 2 जनवरी 2025 को 28 अभियुक्तों को दोषी ठहराया।
अगले दिन शुक्रवार 3 जनवरी 2025 को अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सभी दोषियों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई।
एनआईए के अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने 28 अभियुक्तों को आईपीसी की कई धाराओं के तहत दोषी पाया, जिनमें 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), और 147 (दंगा), 149 (ग़ैर-क़ानूनी सभा में शामिल होने) शामिल हैं। इसके अलावा अभियुक्तों पर आईपीसी की धारा 124 ए (राजद्रोह) लगाई गई थी और मामला एनआईए की अदालत में चला गया था।
एसआईटी ने 31 अभियुक्तों के विरूद्ध जुलाई 2018 में आरोपपत्र दाखिल किया था लेकिन एक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।
28 जनवरी 2018 को घटना को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट के मुताबिक़, जहां हिंसा हुई वहां दोनों ही पक्षों के पास तिरंगा था और झगड़ा रास्ते को लेकर हुआ था।
घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंदन गुप्ता के परिवार को मुआवज़े के तौर पर 20 लाख रुपये देने की घोषणा की थी।
कासगंज पहले एटा ज़िले में आता था लेकिन 2008 में बीएसपी की सरकार में इसे अलग ज़िला बना दिया गया। उस वक़्त इसका नाम कांशीराम नगर कर दिया गया था, लेकिन 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस शहर का पुराना नाम वापस लौटा दिया।
इस दौरान जब ये लोग शहर के बद्दू नगर इलाक़े में पहुंचे थे तो यहां स्थानीय लोगों से झड़प हो गई थी.
इस दौरान फायरिंग हुई और इसमें शहर के नदरई गेट निवासी एक युवक अभिषेक गुप्ता उर्फ़ चंदन को गोली लग गई थी. घटना के बाद घायल चंदन को ज़िला अस्पताल ले जाया गया और यहां उनकी मौत हो गई.
चंदन की मौत के बाद इलाक़े में तनाव फ़ैल गया था और दुकानों के साथ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था. तब 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया था और तीन दिन तक इंटरनेट बंद था.
28 जनवरी 2018 को घटना को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी. रिपोर्ट के मुताबिक़, जहां हिंसा हुई वहां दोनों ही पक्षों के पास तिरंगा था और झगड़ा रास्ते को लेकर हुआ था.
रिपोर्ट की माने तो बद्दू नगर के स्थानीय मुसलमानों ने गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा फहराने की तैयारियां की थीं और कुर्सियां रखी थीं.
वहीं बाइकों पर निकल रही तिरंगा रैली में शामिल युवाओं ने कुर्सियां हटाकर रैली वहीं से निकालने के लिए कहा था.
घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंदन गुप्ता के परिवार को मुआवज़े के तौर पर 20 लाख रुपये देने की घोषणा की थी.
कासगंज पहले एटा ज़िले में आता था लेकिन 2008 में बीएसपी की सरकार में इसे अलग ज़िला बना दिया गया। उस वक़्त इसका नाम कांशीराम नगर कर दिया गया था, लेकिन 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस शहर का पुराना नाम वापस लौटा दिया।
*राज्य सरकार के वकील एमके सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया, "सभी दोषियों को धारा 302 की सज़ा मिली है। इसमें दो ही सज़ा हैं, या तो मौत की सज़ा है या आजीवन कारावास. आजीवन कारावास की सज़ा दी गई है।"
एनआईए कोर्ट ने कुल 28 अभियुक्तों को दोषी ठहराया।
इनके नाम हैं- सलीम, वसीम, नसीम, जाहिद, आशिक क़ुरैशी, असलम क़ुरैशी, अकरम, तौफ़ीक, खिल्लन, शादाब, राहत, सलमान, मोहसिन, आसिफ, शाकिब, बबलू, निशू, वासिफ, इमरान, शमशाद, जफ़र, साकिर, खालिद परवेज़, फैज़ान, इमरान क़य्यूम, शाकिर सिद्दीकी, मुनाज़िर और आमिर।
सलीम, वसीम, नसीम, मोहसिन, राहत, बबलू और सलमान को शस्त्र अधिनियम के तहत भी दोषी करार दिया गया है क्योंकि चार्ज़शीट के मुताबिक़, घटना के दौरान ये लोग हथियार लेकर गए थे।
दो अभियुक्तों नसीरुद्दीन और असीम क़ुरैशी को बरी कर दिया गया है. दोनों को सबूतों के अभाव में बरी किया गया है। इनके अलावा अजीजुद्दीन नामक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। एमके सिंह का कहना है कि बरी हुए लोगों पर हम लोग जजमेंट की कॉपी मिलने के बाद फ़ैसला करेंगे।
















































