बुधवार, 30 नवंबर 2016

मोदी जी कालाधन बैंक में नहीं बोरियों में जमीनों में सोने में होता है:


आपकी घोषणा से तो आज ही सांसद और विधायक बेदाग हुए:

 क्या सच में आप अकेले बुद्धिमान हैं और बाकी सभी बुद्धिहीन: 

- करणीदानसिंह राजपूत -
 
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कालेधन और नोट बंदी के बाद भाजपा के समस्त सांसदों व विधायकों को निर्देशित किया है कि वे अपने बैंक खातों की रिपोर्ट पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सौंपें।
मोदी जी की यह घोषणा ही स्पष्ट है कि सभी सांसद और विधायक आज ही बेदाग हो गए हैं। कैसे बेदाग हुए तो जानलें कि आगे क्या होने वाला है? इसके अलावा अन्य कोई संभावना नहीं हो सकती?
1. प्रधानमंत्री ने बैंक खातों की रिपोर्ट पार्टी अध्यक्ष को सौंपने का कहा है और कोई भी पार्टी अध्यक्ष कोई गड़बड़ निकल भी गई तब अपनी पार्टी के सांसद विधायक को आरोपित करके पार्टी को संकट में क्यों खड़ा करेगा? यह रिपोर्ट सरकार को सौंपने का नहीं कहा है।
2. प्रधानमंत्री ने पूरे देश को ही महामूर्ख समझा है लेकिन ऐसा है नहीं। प्रधानमंत्री जी को मालूम है कि कालाधन बैंकों में कोई नहीं रखता। वह बोरियों में,जमीनों की खरीद में या फिर सोने की खरीद में इस्तेमाल होता है।
3. देश का साधारण नागरिक तक यह बात जानता है कि कालाधन कहां पर रखा जाता है और उसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है?

भाजपा सांसदों विधायकों को बैंक खातों की जानकारी का देने का तरीका:



- करणीदानसिंंह राजपूत -
नरेन्द्र मोदी ने भाजपा के समस्त सांसदों व विधायकों को अपने समस्त खातों की जानकारी देनी होगी। भाजपा सांसदों व विधायकों को जानकारी देने का तरीका बतलाया गया है। बीजेपी नेताओं को इस ब्यौरे में अपना नाम, लोकसभा या विधानसभा क्षेत्र, किस बैंक खाता है, कुल कितने खाते हैं, खाता का प्रकार, खाता नंबर, अकाउंट में कुल पैसे, 9 नवंबर से 31 दिसंबर तक जमा रकम और निजी या व्यावसायिक आमदनी की पूरी जानकारी देनी होगी. इसको लेकर बीजेपी कार्यालय से सभी सांसदों और विधायकों को एक निर्देश जारी किया गया है.

मोदी का आदेश-भाजपा सांसद विधायक बैंक बैलेंस सौंपें।




- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 29 नवम्बर 2016 को भाजपा के सांसदों व विधायकों को अपना बैंक बैलेंस राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को सौंपने का आदेश दिया है। नोट बंदी के तारीख 8 नवम्बर से 31 दिसम्बर तक की रिपोर्ट 1 जनवरी 2017 को सौंपनी है। भाजपा के विरोधी नेताओं ने मोदी की नोटबंदी पर आरोप लगाया हुआ है कि नोटबंदी से पहले भाजपा कार्यकर्ताओं को सूचना थी जिसके कारण उन्होंने काला धन इधर उधर कर दिया व जमीने खरीद ली। इस आरोप को दूर करने के लिए यह हिदायत दी गई है। यह माना जा रहा है।

रविवार, 27 नवंबर 2016

मील परिवार की करोड़ों की जमीन के पंप हटाने के आदेश



लोकायुक्त राजस्थान 28 नवम्बर को श्रीगंगानगर मुख्यालय पर बैठक लेंगे जिनमें पैंडिंग पड़े प्रकरणों पर भी विचार होगा।
यह रिपोर्ट पहले 17-4-2016 को छपी थी।


मील की जमीन पर कार्यवाही में किसी न किसी स्तर पर रहे 3 एसडीएम और 9 तहसीलदार भी घेरे में हैं।

वसुंधराराजे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा कर भाजपा छोडऩे वाले गंगाजल मील आरोपों में फंसे हैं।

स्पेशल न्यूज-करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़।
लोकायुक्त के आदेश से हुई गहन जाँच में मील परिवार के पैट्रोल पंप की जमीन को अतिक्रमण मानते हुए संभागीय आयुक्त कार्यालय से अप्रेल में आदेश जारी हुआ जिसके अखबारों में छपने के बाद से राजनैतिक तूफान मचा है। पूर्व विधायक गंगाजल मील का आरोप है कि सरकार उनका नाम जबरदस्ती घसीट रही है और सूरतगढ़ के ऐटा सिंगरासर माइनर के आँदोलन को कुचलने के लिए बदले की कार्यवाही में लगी है। वर्तमान में यह आंदोलन राकेश बिश्रोई के संयोजन में मार्च 2016 से शुरू हुआ और अन्य जो कोई भी इसमें शामिल हुए वे बाद में शामिल हुए और होते गए।
 मील परिवार के पंप की जमीन को अतिक्रमण मानते हुए 1 साल पहले अप्रेल 2015 में आदेश जारी हुआ लेकिन उस समय अतिक्रमण हटाया नहीं जा सका। उस समय ऐटा सिंगरासर माइनर के वर्तमान आंदोलन की कहीं भनक तक नहीं थी। मील परिवार और कांग्रेस पार्टी इस आँदोलन में किस प्रकार की भूमिका व सहयोग कर रही है वह न किए जाने के बराबर ही दिखाई पड़ रहा है।
मील इसे बदले की कार्यवाही बताना चाहें या आंदोलन को कुचलने की कार्यवाही बतलाना चाहें तो उनको कई सवालों के उत्तरों के साथ असलीयत उजागर करनी चाहिए।
1.राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 सूरतगढ़ शहर में से गुजरता है और इसके आसपास की जमीनें मुंह बोलती कीमतों तक यानि कि कई कई करोड़ रूपए तक एक एक दुकान या शोरूम पहुंच गया है। सरकार इसे अतिक्रमण क्यों मान रही है और मील परिवार इसे सही जमीन कैसे मान रहा है?
2.मील परिवार की यह जमीन राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर एकदम सही स्थान पर है तब सरकार ने राजस्व विभाग के 3 एसडीएम और 9 तहसीलदारों को आरोपों के घेरे में क्यों ले लिया है? इन सभी पर अनियमितताएं बरतने व नियम तोड़ कर गैर कानूनी कार्यवाहियां करने तथा मील के जमीन को बचाने के आरोप हैं। इनको सभी को नोटिस जारी हो चुके हैं। आरोपों के घेरे में फंसे से दो जने इसी अप्रेल 2016 में सेवानिवृत होंगे। एक मुस्ताक वर्तमान में सब रजिस्ट्रार है और तहसीलदार के पद पर रह चुके हैं। एक लिपिक प्रह्लादसिंह एसडीएम कार्यालय में हैं जो पहले तहसील में लिपिक पद रह चुके हैं।
गंगाजल मील कह रहे हैं कि बदले से हो रहा है लेकिन यह कार्यवाही तो सरकार की तरफ से नहीं हुई बल्कि लोकायुक्त को शिकायत हुई और उनके आदेश से कराई गई जाँच में गोलमाल सामने आया। सरकार केवल बदले की कार्यवाही करने वाली होती तो 3 एसडीएम और 9 तहसीलदार पर कार्यवाही नहीं होती। मील के विरूद्ध जब भी कोई शिकायत हुई तो वह अंतिम परिणाम तक नहीं पहुंच पाई।
अब अतिक्रमण हटाने के आदेश बीकानेर संभागीय आयुक्त कार्यालय से जारी हुए हैं जो जिला कलक्टर के पास पहुंचे और वहां से सूरतगढ़ पहुंच गए हैं। एसडीएम ने आदेश की पालना के लिए यह राजस्व तहसीलदार को सौंप दिए ।





इस बार आदेश का सख्ती से पालन होने की संभावना है। जहां तक सवाल है वर्तमान भाजपा विधायक राजेन्द्रसिंह भादू का तो, वे पंप के मामले में कहीं नजर नहीं आ रहे। मील भी राजेन्द्र भादू की सड़क के बीच में बने भव्य कोठी,राजेन्द्र के पिता बीरबल भादू की कोठी जिसके चारों ओर की सड़कें शामिल कर ली गई व अब कटला बनाए जाने के प्रयास हैं। इसके अलावा चौ.मनफूलसिंह के सिनेमा स्थल का कटला। तीनों स्थल आरोपों के घेरों में हें मगर गंगाजल मील और कांग्रेस पार्टी के नेता सब चुप हैं। एक प्रकार का समझौता सा लग रहा है। गंगाजल मील एक बार पत्रकार वार्ता में इन पर बोले मगर कार्यवाही करने में आगे नहीं आए। संभव है कि अब मील परिवार के पंप पर जेसीबी चले तो मील इन करोड़ों रूपयों के स्थलों पर मुकद्दमें करवाएं।
यह भी संभाना है कि पंप के प्रकरण में मील परिवार अदालत में जाएं और कार्यवाही को स्थगित करवाएं।


17~4~2016.
UP DATED  27-11-2016.


शुक्रवार, 25 नवंबर 2016

करणी प्रेस इंडिया की पाठक संख्या 600000 पार:बधाई शुभकामनाएं-

- विशेष समाचार -
करणी प्रेस इंडिया 25 नवंबर की रात के 10:30 बजे का समय और पाठक संख्या 6 लाख को स्पर्श करती हुई बढ़ती हुई और ऊंचाइयों को छूने निकल पड़ी। करणी प्रेस इंडिया की यह सफलता सम्माननीय पाठकों के अपार सहयोग से हुई है। देश और विदेश में हर पल हर क्षण दिन और रात करणी प्रेस इंडिया को पढ़ने वाले अपने समय और श्रम का अमूल्य सहयोग करते रहे हैं।
 यह सहयोग हर किसी को संभव नहीं है लेकिन करणी प्रेस इंडिया की सजगता से दिए जाने वाले समाचार रिपोर्ट समीक्षाएं सामाजिक विचार राजनीतिक विचार बिना भय के अन्य समाचार वेबसाइटों से अलग होते हैं। इस विशेषता के कारण हर क्षेत्र के लोग करणी प्रेस इंडिया को पढ़ना चाहते हैं। देखना चाहते हैं। बड़ी खुशी की बात है कि अनेक पाठक ताजातरीन जानकारी के लिए दिन भर में कई बार करणी प्रेस इंडिया को पढ़ना चाहते हैं।
हमारी कोशिश भी यह रहती है कि जहां तक हो सके पाठकों की रुचि को सच के प्रयास के साथ बनाई हुई रखी जा सके। अनेक अखबार और पत्रकार सत्य से मुंह मोड़ लेते हैं तब करणी प्रेस इंडिया सच को सामने रखने की हिम्मत रखता है। यह हिम्मत कोई एक संचालक नहीं कर सकता।  इसमें पाठकों का अपार सहयोग और हिम्मत साथ में रही है।
आगे भी कोशिश रहेगी की पाठकों की आशाओं पर आन बान शान के साथ मौजूद रहेंं।

 इस अपार हर्ष की घड़ी पर सभी पाठकों को बहुत-बहुत धन्यवाद।
 आपका सभी का साथी शुभचिंतक,
 करणीदानसिंह राजपूत,
 पत्रकार,
सूरतगढ़  राजस्थान इंडिया

पंजाब की तरफ से नहरों में आता है रसायनयुक्त गंदा पानी :संसद में निहालचंद-


श्रीगंगानगर, 25 नवम्बर।
 सांसद श्री निहालचंद ने शुक्रवार को संसद में जोरदार तरीके से नहरों में आ रहे गंदे पानी की समस्या को सदन में रखा।
श्री निहालचंद ने कहा कि पंजाब से राजस्थान में आने वाली नहरों में अक्सर गंदा पानी आता है। नहरों के किनारे बसे औद्योगिक क्षेत्रों का गंदा रसायन भी इन नहरों में डाला जाता है। राजस्थान के निवासी इन नहरों में आने वाले पानी को पीने के उपयोग में लेते है, जिससे नागरिकों के जीवन पर विपरीत असर पडता है। उन्होने बताया कि पंजाब के उद्योगों से रसायनयुक्त गंदा जल राजस्थान के निवासियों का जन जीवन तहस-नहस कर रहा है। 
श्री निहालचंद ने संसद में बताया कि सतलुज तथा अन्य डेम का पानी स्वच्छ होता है, लेकिन पंजाब क्षेत्र में गुजरने के कारण विभिन्न प्रकार के अपशिष्ट इन नहरों में डाले जाते है, जिससे यह पानी पीने लायक नही रह जाता। इस गंदे पानी को पीने से बीमारियां तथा नहाने से चरम रोग उत्पन्न हो जाते है। पंजाब से आ रहे रसायनयुक्त पानी से श्रीगंगानगर व हनुमानगढ जिलों के हजारों नागरिक अपना स्वास्थ्य खराब कर चुके है तथा गंभीर रोगों के शिकार होकर दम तोड रहे है। हमारे इलाके में कैंसर रोग इसी रसासनयुक्त जल के कारण हमारे इलाके में पैर पसार चुका है। घर-घर में कोई न कोई नागरिक कैसंर रोग से पीड़ित है। उन्होने आग्रह किया कि मानव जीवन से जुडी इस गंभीर समस्या का समाधान किया जाए तथा पंजाब से रसायनयुक्त आ रहे पानी को स्वच्छ करने के पुख्ता इंतजाम किए जाए। उन्होने कहा कि आम नागरिकों के अलावा पशुओं के जीवन पर भी यह खतरनाक पानी बुरा असर डाल रहा है। दुधारू पशु रसायनयुक्त गंदे जल से विभिन्न बीमारियों के शिकार हो जाते है।

अमरपुरा ( सूरतगढ.) में निशुल्क नशा मुक्ति शिविर एवं जन जागृति कार्यशाला का आयोजन-



श्रीगंगानगर, 25 नवम्बर। जिला पुलिस अधीक्षक राहुल काटोकी के निर्देशानुसार स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के सहयोग से जिले भर में चलाए जा रहे नशा मुक्ति अभियान के अन्तर्गत शुक्रवार को राजकिय माध्यमिक विद्यालय अमरपुरा में पुलिस थाना सूरतगढ. सदर द्वारा निशुल्क नशा मुक्ति शिविर एव कार्यशाला का आयोजन किया गया। 


गुरुवार, 24 नवंबर 2016

बैंकों में रकम रखना बहुत सुरक्षित माना जाता था और अब पागलपन माना जाएगा:



~ करणीदानसिंह राजपूत ~
बेंकों में रकम रखना बहुत सुरक्षित समझा जाता था और सरकार भी यही विश्वास देती थी। हालात ने बैंकों व सरकार पर भरोसा खत्म ही कर दिया है।
आज व्यक्ति नोट बंदी और काले धन पर चर्चा नहीं कर रहा,अपनी गाढ़ी कमाई की चिंता कर रहा है जो उसने पूरे भरोसे पर बैंक में जमा करवाई थी कि घर परिवार में उत्सव में या फिर अचानक आई बीमारी या संकट में काम आएगी। यह भरोसा बैंक ने नोट पर छपवा कर दिया भी था और इस भरोसे के लिए विगत की सरकारें पूर्ण निष्ठा से पालन भी करती रहीं।
कहा जाता था कि किसी व्यक्ति को दिया हुआ धन हड़पा जा सकता है और ऐसी घटनाएं होती भी रहती थी। लेकिन बैंक में जमा खुद की रकम ही व्यक्ति जरूरत के समय नहीं निकाल पाएगा
और बैंक के आगे दम तोडऩा पड़ेगा। यह तो किसी ने भी नहीं सोचा होगा।
अगर बैंक ही पैसा न दे या ऊंट के मुंह में जीरा जितना दे तब हालात अच्छे तो नहीं समझे जा सकते।
अपने ही नोट मांगने वालों को सीमा पर तेनात जवान का हवाला देकर चुप कराया जा रहा है,हड़काया जा रहा है। दोनों की अपनी अपनी स्थिति है और उसकी तुलना नहीं की जानी चाहिए।
एक सबसे बड़ा सवाल है कि जब भी नोट बंदी पर कोई राजनेता व पार्टी विरोध में बयान जारी करती है तब तब उसको राजनीति की तरफ मोडऩे की कसरत शुरू हो जाती है।
भाजपा अन्य राजनैतिक दलों के द्वारा बयान जारी करने पर राजनीति करने लगती है जबकि जो बयान आ रहे हैं वे केवल व्यक्ति को आसानी से उसकी रकम देने के लिए होते हैं। किसी व्यक्ति की जमा रकम देने में रोक लगाई जा रही है, या अंकुश लगाया जा रहा हे तब क्या कोई बोल भी नहीं सकता?
बैंक के खातेदार सम्मानित व्यक्ति माने जाते रहे हैं लेकिन उनको लाइनों लगाया जाना और लाठियां चलवाया जाना तो बर्बता का प्रतीक है। हम इक्कीसवीं शताब्दी में जी रहे हैं और हमारे जीने का ढंग कबीलों से भी गया गुजरा हो तो बोलना लिखना बयान देना कहीं गलत नहीं है।
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घोड़ों पर हों गधे सवार,कैसी होगी देश की चाल।


Dated 18-7-2016.
up dated 24-11-2016.

राजस्थान सरकार बिजली उत्पादन में अपनी जिम्मेवारियां समझ कर काम करें

 सूरतगढ़ 24 नवंबर।
जनहित सिविल सोसाइटी के अध्यक्ष दिलात्मप्रकाश जैन ने राजस्थान सरकार के मंत्री अरुण चतुर्वेदी के बयान पर टिप्पणी की है। अरुण चतुर्वेदी ने बिजली दरों में बढ़ोतरी किए जाने का आरोप पूर्ववर्ती सरकार के कार्यों पर लगाया जिसके कारण बिजली दरों में बढ़ोतरी करनी पङी। दिलात्मप्रकाश जैन ने बयान दिया है कि राजस्थान की  वर्तमान सरकार को जनता ने चुनकर सत्ता सौंपी पर वर्तमान सरकार के कार्यकाल में ताप बिजलीघर बार-बार बंद हो रहे हैं। बिजली उत्पादन ठप हो रहा है इसलिए पूर्ववर्ती सरकार को कोसने के बजाए वर्तमान सरकार को अपनी जिम्मेदारी समझते हुए कार्य करना चाहिए।

बुधवार, 23 नवंबर 2016

कंवरपुरा में नशा मुक्ति शिविर -

श्रीगंगानगर, 22 नवम्बर। जिला पुलिस अधीक्षक श्री राहुल कोटोकी के निदेशानुसार मंगलवार को रा उ मा वि कंवरपुरा में नशा मुक्ति जनजागृति कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यालय के साथ-साथ  रा बा उ प्रा वि कवंरपुरा के छात्र छात्राओंं ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डिप्टी एसपी  श्रीकरणपुर श्री सुनील कुमार पवांर ने अपने सम्बोधन में कहा कि आजकल समाज में जो दुघर्टनाएं हो रही है। विवाह विच्छेद अत्याचार पारीवारिक कलह बलात्कार जैसे संगीन अपराध का कारण भी नशा ही है। आज की युवा पीढी को नशे से दुर रहने व नशा ना करने के लिये प्रेरित करें।
मुख्य वक्ता नशा मुक्ति परामर्श एवंम उपचार केन्द्र के प्रभारी डॉ रविकान्त गोयल ने उपस्थित सभी छात्र छात्राओंं व जनप्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुये कहा कि नशा किसी भी अवस्था में छूट सकता है। नशा छोड़ने से ना तो व्यक्ति की मौत होती है ना ही लक्वा होता है और ना ही नपुंसकता आती है। हजारोंं व्यक्ति जिन्होने नशा छोड़ा है वे इसके प्रत्यक्ष प्रमाण हैंं। ऐसे व्यक्तियों ने पाया कि नशा छोड़ने से उनमें ऊर्जा का नया सचांर हुआ है। उनकी कार्यक्षमता बढी है उनके परिवारों में खुशियां लौट आई हैं व समाज में उनकी प्रतिष्ठा बढी है। 
डॉ गोयल ने छात्र छात्राओंं को नशे के प्रभावों की वैज्ञानिक जानकारी देते हुये ”हम नशा नहीं करेंगे और नशा छुडवायेंगे“ की सामुहिक शपथ दिलवाई।
थाना अधिकारी गजसिंहपुर श्री श्यामसुन्दर ने कहा की नशा हमारा वर्तमान कष्टमय व भविष्य अन्धकारमय बना देता है। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य श्री ओमप्रकाश सहु ने अपने सम्बोधन में कहा कि शिक्षा विभाग भी इस मुहिम में शामिल है तथा सुबह प्रार्थना के समय प्रतिदिन नशा ना करने की शपथ दिलवायी जायेगी।
कार्यक्रम में श्रीगगांनगर के समाजसेवी बलवंन्त सिंह व विजय किरोडीवाल ने उपस्थित छात्रा छात्राओ को नशे दुष्प्रभाव के बारे में अवगत करवाया। कार्यक्रम के अन्त में डॉ रविकान्त गोयल ने शिविर में आये नशा पीड़ित लोगो  की जाचॅ की उचित परामर्श प्रदान किया। कार्यक्रम का मचं सचांलन  रा उ मा वि कवंरपुरा के  श्री जितेन्द्र शर्मा लि0 ग्रेड पप ने किया। 

मोदी की नोट बंदी अच्छी है तो आपका विधायक जनता के बीच आकर बोलता क्यों नहीं?


- करणीदानसिंह राजपूत -
भाजपा के विधायक मोदी की नोट बंदी पर घबराए हुए चुप हैं। उनकी हिम्मत नहीं हो रही है कि नोटों की मारामारी में जनता के बीच में पहुंच कर अपनी सरकार का प्रधानमंत्री का पक्ष रखें। आप गौर करें कि आपका विधायक मोदी के नोअ बंदी निर्णय पर बोला है या नहीं बोला? मेदी जी का निर्णय बहुत अच्छा है तब विधायकों को बोलने में संकोच क्यों हो रहा है? वे जनता के बीच में बोल क्यों नहीं रहे? इस निर्णय को अच्छा बतलाते हुए उनको घबराहट क्यों हो रही है?
सोशल मीडिया में फेस बुक पर बहुत सीमित लोग ही अपने विचार प्रगट करते हुए निर्णय को अच्छा दूरगामी बतलाते हैं लेकिन वे तर्क पर और मौजूदा हालात पर सवाल किए जाने पर चुप हो जाते हैं। इन विचारों के प्रगट करने वालों में विधायक क्यों नहीं हैं? भाजपा के नगर मंडलों के या जिले के पदाधिकारी चुप क्यों हैं?
मोदी जी का निर्णय बहुत अच्छा है तो फिर भाजपा राज को घोटने वाले इन विधायकों को बोलना क्यों नहीं चाहिए? इनको चुप क्यों रहना चाहिए?
मोमला गंभीर है कि मोदी जी ने सार्वजनिक रूप से कह दिया कि एनकी हत्या करवाई जा सकती है। जब मामला इतना गंभीर हो प्रधानमंत्री को खुद को हत्या की आशंका हो,तब भी विधायकों को चुप रहना शोभा नहीं देता। क्या विधायक इतने स्वार्थी हो गए हैं कि मोदी जी की हत्या होने की आशंका पर भी अपना मुंह नहीं खोलना चाहते?
विधायकों के चुप रहने का सही कारण यह है कि मोदी जी का यह निर्णय जल्दबाजी में उठाया हुआ गलत कदम हैं? इससे आम जनता परेशान हो रही है तथा विधायक जनता के बीच में मोदी के निर्णय को अच्छा बतला कर अपने ऊपर कोई खतरा ओढऩा नहीं चाहते चाहे वह किसी वाद विवाद का हो या फिर राजनैतिक हो।
क्या यह डर लग रहा है कि जनता बैंको के आगे मौके पर चलने का कह सकती है?
क्या विधायक इसलिए डर रहे हैं कि लोग सीधे विधायक से भी सहायता के लिए कह सकते हैं?
अगर विधायक को परेशानी दूर करने का कह दिया गया तब विधायक के पास में भागने के अलावा कोई अन्य तरीका नहीं होगा?
विधायकों को यह डर लग रहा हो कि भविष्य में किसी चुनाव में लोगों के बीच में कैसे जा पाऐंगे?
राजस्थान में 163 विधायक भाजपा के हैं और आपके पास का विधायक भी भाजपा का होगा।
आपका विधायक नोट बंदी पर मोदी के पक्ष में बोला या नहीं? पन्द्रह दिन बीत गए और एक एक कर और बीतते रहेंगे।
विधायक इस कारण से भी डर रहे हों कि बैंक के आगे लाईन में खड़ा कोई मर मरा गया तो उसकी अंतिम संस्कार के लिए ही पैसा सहायता न देनी पड़ जाए?
लेकिन हिंदुस्तान की जनता को मैं जानता हूं कि वह अंतिम संस्कार के लिए किसी विधायक से सहायता नहीं लेगी। इतनी खुदगर्ज हिम्मती आन बान वाली तो जनता है।

नारायणगढ़ (बुधसिंहवाला) में आयोजित रात्रि चौपाल -



जिला कलक्टर मंगलवार को गांव नारायणगढ़ (बुधसिंहवाला) में आयोजित रात्रि चौपाल में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक किसान के पास मृदा स्वास्थ्य कार्ड होना चाहिए। उसी के अनुरूप खाद का प्रयोग करना चाहिए। किसान को बिना जरूरत अंधाधुंध खाद नही डालनी चाहिए। गांव नारायणगढ़ में 1440 किसानों ने मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाये है। जिला कलक्टर ने कहा कि किसान अपनी बेटियों को कृषि विषय की पढ़ाई करवावें। 12 वीं कक्षा में अध्ययनरत छात्रों को 5 हजार रूपये, कृषि में स्नातक करने पर प्रतिवर्ष 12 हजार रूपये तथा पीएचडी करने पर 15 हजार रूपये प्रतिवर्ष प्रोत्साहन राशि दी जायेगी। 

अनाया सिंह नरम गुदगुदे खिलौनों संग मुस्कुराती:


खिलौनों से बतियाती,खिलौने नहीं मुस्कुराते,

मंगलवार, 22 नवंबर 2016

बेनामी संपत्ति वालों की सूचना देने में मोदी भक्त डर रहे हैं।


बेनामी संपत्ति वाले तो आसपास ही हैं,दो उनकी सूचना:मोदी का स्वच्छ राज उसके बिना कैसे आ पाएगा?
- करणीदानसिंह राजपूत -
मोदी भक्तों की ओर से फेस बुक आदि पर लोगों से कहा जा रहा है कि सैनिक सीमा पर डटे हैं और आप नोट बदलने की लाइन में खड़े नहीं हाते हुए परेशान हो रहे हो। मोदी के नोट बदलने का कार्य राष्ट्रधर्म है उसमें सहयोग करें। लोगों को उलाहना दिया जा रहा है। अगर मोदी का साथ नहीं दिया तो राष्ट्रभक्त नहीं।
मोदी भक्त केवल बैंक की लाइन बाबत संदेश दे रहे हैं और उलाहने दे रहे हैं। जो मोदी का साथ नहीं देना चाहते उनको कोस रहे हैं।
मोदी जी ने तो बेनामी संपत्ति वालों पर भी सख्त कार्यवाही करने की घोषणा कर दी लेकिन आश्चर्य है कि इस घोषणा के सहयोग पर कोई भी भक्त नहीं बोल रहा है।
मोदी भक्तों के आसपास हर शहर गांव में बेनामी संपत्ति वाले होंगे ही और उनके नाम पत्ते आयकर विभाग व अन्य विभाग को सौंपना परम कर्तव्य होना चाहिए। केवल नोट बदलने से तो भ्रष्टाचार समाप्त नहीं हो पाएगा। मोदी जी ने बेनामी संपत्ति पर जो घोषणा की है उसके बाद से किसी भक्त ने अभियान नहीं छेड़ा। एक भक्त एक बेनामी संपत्ति का ही उल्लेख कर दे तो मोदी के हाथ मजबूत ही होंगे।
यहां पर ऐसा लग रहा है कि मोदी भक्त बेनामी संपत्ति वालों से दोस्ती रखना चाह रहे हैं या फिर डरते हैं। कायर हैं।

सोमवार, 21 नवंबर 2016

डिजीटल प्रेस कार्ड नवीनीकरण जिला मुख्यालयों पर करने का आग्रह:

सूरतगढ, 21 नवम्बर।
राजस्थान के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशक से आग्रह किया गया है कि अधिस्वीकृत पत्रकारों के डिजीटल प्रेस कार्ड जयपुर मुख्यालय पर बनाए गए थे जिनका नवीनीकरण अब जिला सूचना एवं जनसंपर्क कार्यालयों पर किया जाए। इससे जयपुर आने जाने का श्रम व खर्च की बचत होगी।
जिला मुख्यालयों पर पत्रकार एक ही दिन में पहुंच कर कार्ड का नवीनीकरण करवा सकेंगे। वरिष्ठ पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत ने निदेशक से यह आग्रह किया है।
 प्रेस के डिजीटल कार्डों का नवीनीकरण दिसम्बर 2016 में किया जाने वाला है। राजपूत ने आग्रह किया है कि जिला मुख्यालय पर संभव न हो सके तो संभाग पर यह सुविधा दी जाए ताकि एक ही दिन में यह कार्य करवाया जा सके।
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शनिवार, 19 नवंबर 2016

एसडीएम रामचन्द्र पोटलिया पर 3 जाँचे: एसीबी की फाइनल रिपोर्ट दुबारा अवलोकन:


आय से अधिक संपति जाँच श्रीगंगानगर: अवकाश प्रकरण जयपुर में:
एसडीएम पर एसीबी में प्रकरण दर्ज कराने गोधा राम पर भी पुलिस में मुकद्दमा:
जमीन के मालिक दलीपसिंह मानेवाला ने मुखत्यारनामा व इकरारनामा फर्जी बताया:सूरतगढ़ 19 नवम्बर 2016.
एसडीएम रामचन्द्र पोटलिया के विरूद्ध एसीबी में दर्ज प्रकरण की जाँच पर रंगे हाथ गिरफ्तारी कुछ न होने व टेप में भी रिश्वत मांगने की बात नहीं होने पर पत्रावली जयपुर सीएमओ में मंगवाई जाने के बाद फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाने की सूचना है मगर इसके बाद इस फाइल को दुबारा जाँच के लिए बीकानेर से अन्यत्र चुरू अधिकारी के पास भिजवाया गया है।
पोटलिया के विरूद्ध सीधी गिरफ्तारी न होने के बाद आय से अधिक संपत्ति की जांच शुरू रखी गई जिसे भी पर्वतसिंह अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ब्युरो चौकी बीकानेर से बदल कर श्रीगंगानगर भिजवा दिया गया। एसडीएम पोटलिया के अवकाश प्रकरण जाँच जयपुर में विचाराधीन है।

एसडीएम पोटलिया को शिकायत कर फंसाने वाले गोधाराम पर जमीन के मालिक दलीपसिंह पुत्र लटकनसिंह मानेवाला ने एसीजेएम अदालत सूरतगढ़ में 22 अगस्त को एक इस्तगासा पेश कर न्याय की मांग की थी। गोधाराम पर दस्तावेज फर्जी कूट रचना से बनाने का आरोप लगाया हुआ हे जो उसने एसीबी में पेश किए थे। इस प्रकरण में दलीपसिंह के बयान पुलिस में हो चुके हैं।

बनवारीलाल व सिपाही रोहताश यौन शोषण मुकद्दमा: उच्च न्यायालय में 24 नवम्बर तारीख:


सूरतगढ़, 19 नवम्बरर।
कांग्रेसी नेता पूर्व पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल, ओम साबनिया व सिपाही रोहताश पर अनुसूचित जाति की महिला ने यौन शोषण का आरोप लगाया था का मामला कई महीनों से राजस्थान उच्च न्यायालय में है। अब इसकी आगामी तारीख 24 नवम्बर की सूचना है। उच्च न्यायालय में पत्रावली कई बार तारीखों पर आई लेकिन उस तक सुनवाई नहीं हो पाई थी।
 इस मामले में पुलिस ने दो बार अंतिम रिपोर्ट लगाकर सूरतगढ़ की अदालत में पेश की और दोनों बार चुनौती दी गई जिस पर अदालत ने प्रसंज्ञान लिया। बनवारीलाल ने श्रीगंगानगर अदालत में भी सूरतगढ़ की अदालत के प्रसंज्ञान लिए जाने को चुनौति देते हुए अपील की थी।
सूरतगढ़ की अदालत द्वारा अभियुक्तों के वारंट जारी होने वाले थे कि बनवारीलाल ने राजस्थान उच्च न्यायालय में पुनर्विचार रिट लगादी।  उसके बाद रोहताश ने भी अलग से उच्च न्यायालय में पुनर्विचार रिट लगादी। ओम साबनिया की रिट नहीं है।
पीडि़ता खुद दो तीन बार उच्च न्यायालय में तारीख पेशी पर मौजूद रही थी। सूत्रानुसार पीडि़ता इस तारीख पर उच्च न्यायालय में हाजिर होगी।
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सूरतगढ़ में कौन लोग और राजनीति हो सकते हैं काला धंधा धनकुबेर बेनामी संपत्तियों के मालिक

 - करणीदान सिंह राजपूत -
प्रधानमंत्री ने काला धन बालों का पता करने के लिए पहले 500 और हजार रुपए के नोटों की बंद की घोषणा की और अब बेनामी संपत्तियों के मालिकों का मालूम करने के लिए आयकर विभाग को खोजबीन में लगा दिया गया है। आयकर विभाग को विशेषकर राष्ट्रीय राजमार्गों पर और महत्वपूर्ण स्थलों पर खोज करने का निर्देश दिया गया है। सूरतगढ़ अनेक प्रकार से महत्वपूर्ण है तथा यहां की जमीनों की कीमतें  अन्य स्थानों से अधिक रही है राष्ट्रीय उच्च मार्ग और अनेक मुख्य स्थलों पर तथा नगरपालिका की कीमती जमीन पर धन्ना सेठों राजनेताओं और भूमाफियों के कब्जे हैं अधिकांश कब्जों को नगर पालिका मिली भक्ति से  पट्टे जारी कर चुकी है। लोकायुक्त को शिकायत हुई थी तब पहली सूची में 137 नाम आए थे जो घटते-घटते या नगरपालिका ने अपने स्तर पर प्रभाव से मेलजोल से हटा दीजिए। अधिकांश मामलों में शिकायत के बावजूद और अब चर्चा है कि केवल 17 मामले बचे हैं। इन पर भी अतिक्रमणों को हटाने की कार्यवाही नहीं की जा रही। पालिका अध्ययक्ष इन को हटवाने के लिए जेसीबी मशीन और स्टाफ भेजना नहीँ चाहती। शहर में बनी हुई कई कालोनियां काले धंधे के कुबेरों की है और नगर पालिका ने उनको पूर्ण निर्माण के बावजूद अपने अधिकार में ले लिया। सूरतगढ़ के आसपास कृषि भूमि पर कॉलोनियों का निर्माण गैर कानूनी रुप से धन्ना सेठों ने अपने पैसे के बलबूते पर करवाया जिनमें कुछ की जांच भी भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में चल रही है मगर उसे रेंगना कहना चाहिए। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पास स्टाफ नहीं है और वह किसी पर अभियोजन स्वीकृति मांगता है तो उस विभाग के उच्च अधिकारी खासकर जयपुर स्वायत्त शासन निदेशालय के अधिकारी मंजूरी नहीं देते बिना मंजूरी के अदालत में चालान नहीं हो सकता। ऐसी स्थिति में अनेक लोगों ने अधिकारियों ने राजनेताओं के बलबूते पर बेनामी संपत्तियों का कब्जा कर रखा है। शहर में और आवासन मंडल में अनेक भूखंड नीलामी में लेकर 10- 15 साल से खाली छोड़ रखे हैं। यह सब भूखंड बड़े-बड़े काला धंधा करने वालों के हैं। नियम तो यह है कि दो-तीन साल में भूखंडों पर दुकान या मकान का निर्माण हो जाना चाहिए लेकिन उनके निर्माण न करने के बावजूद सरकारी अधिकारी भूखंडों का निरस्तीकरण नहीं करते जबकि कानून उन को यह अधिकार देता है।
 प्रधानमंत्री ने निर्देश दिए हैं देखना है कि उनके तहत सूरतगढ़ में कितने लोग सरकार की लिस्ट में दर्ज होते हैं।
करणी प्रेस इंडिया में  तीन-चार सालों में ऐसे अनेकों भूखंडो कॉलोनियों आदि का वर्णन है। अनेक मुख्यय सङकों के नाम हैं जहां पर धनकुबेरों ने अपने काले धन से निर्माण कर रखे हैं। जरुरत हुई और हमारे सामने नाम आए तब हम जनता के सामने रखने का पूरा प्रयास करेंगे।

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

सावंतसर में पुलिस थाना पदमपुर द्वारा निशुल्क नशामुक्ति जनजाग्रति कार्यशाला


श्रीगंगानगर, 18 नवम्बर। जिला पुलिस अधीक्षक श्री राहुल कोटोकी के निर्देशानुसार पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे नशामुक्ति के अर्न्तगत शुक्रवार को रा.उ.मा.वि.सावंतसर में पुलिस थाना पदमपुर द्वारा निशुल्क नशामुक्ति जनजाग्रति कार्यशाला प्रशिक्षण एंव परामर्श श्विर का आयोजन किया गया। 
राजकीय परामर्श एंव उपचार केन्द्र श्रीगंगानगर के प्रभारी डा. रविकांत गोयल ने मुख्यवक्ता के रूप में अपने सम्बोधन में कहा कि नशा आज तेजी से बढ रहा हैं। स्कूल एंव कॉलेज विधार्थी भी नशे के गिरफत में आ रहें हैं तथा महिला भी इस लत की शिकार हो रही हैं। इसको देखते हुए यदि समाज में नशा मुक्ति की अलख घर घर में ना जगाई गई तो निकट भविष्य में हर घर में नशा करने वाले पाए जाऐंगे। इसलिए हर व्यक्ति को इसे अपना व्यक्तिगत कार्य मानकर नशामुक्ति अभियान को सफल बनाने में जुटना होगा तभी हम नशे के जाल से मुक्त हो पाऐंगे। डा. गोयल ने नशे से बचने व अन्य को बचाने के सरल वैज्ञानिक उपाय बताते हुए उपस्थित विधार्थियों ग्रामिणो व जन प्रतिनिधियों को जीवनभर नशा ना करने व नशा छुडाने की शपथ दिलाई !
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डिप्टी एसपी करनपुर श्री सुनिल के पंवारजी ने अपने सम्बोधन में विधार्थियों को नशे की बुराईयों को समझा कर इससे दूर रहते हुए अपने माता पिता व गुरजनो के दिखाए सदमार्ग पर चलते हुए एक आदर्श जीवन जीने के लिए प्रेरित किया तथा जिले में चल रहे नशामुक्ति अभियान की जानकारी दी।
इस अवसर पर थाना अधिकारी पदमपुर श्रीदलीप खतरी ने कहा कि नशे सर्वाधिक मार महिलाओं पर पडती हैं अतः महिला वर्ग को जगरूक होकर व एक कदम आगे बढकर समाज से नशे को समाप्त करने में अपना योगदान देना चाहिए, जिससे समाज को नशे की मार से बचाया जा सके। 
कार्यक्रम में पुलिस कर्मी श्री श्योपत रामजी समाज सेवी सरदार बलवंत सिंह एंव ग्रामिणों जनप्रतिनिधियों व स्थानीय विधालय व रा.बा.मा.वि. तथा विधा मैमोरियल सै.वि. के विधार्थियों व अध्यापक गणो ने भाग लिया।
इस अवसर पर स्थानीय विधालय के प्रधानाचार्य श्री राजेन्द्र प्रसाद मुंझाल ने अपने सम्बोधन में कहा कि विधार्थी यदि समाज से नशे को मिटाने की ठान लें व दिन दूर नही जब हमारा देश नशामुक्त हो जाऐगा। अतः विधार्थियों को इस नेक कार्य में पुरी ताकत से जुट जाना चाहिए । इस अवसर डा. गोयल ने रोगियों की मौके पर ही जॉंच की व परामर्श प्रदान किया। 


सूरतगढ़ थर्मल आवासीय कॉलोनी व ग्रामों में सांस लेना मुश्किल:


- स्पेशल रिपोर्ट -करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ सुपर पावर थर्मल की राख खुले में ढुलाई होने से थर्मल आवासीय कॉलोनी सहित आसपास के ग्रामों पर संकट छाया हुआ है तथा वृद्धों का बीमारों का सांस लेना मुश्किल है और विभिन्न बीमारियां फैल रही है। थर्मल राख खुले वाहनों में ढुलाई होने के विरोध में पहले कई बार आवाजें उठी हैं। क्षेत्रीय विधायक राजेन्द्रसिंह भादू को भी अवगत कराया गया। इँटक यूनियन कई बार पत्र दिए। बसपा के जिला परिषद के सदस्य डूंगरराम गेदर ने विशेष पत्र लिखा जिसमें विस्तृत हवाला था। थर्मल के उच्चाधिकारियों की ओर से कुछ भी नहीं कहा गया न कोई व्यवस्था स्थाई रूप से की गई।
पिछले कई महीनों से खुले वाहनों में सीमेंट कंपनिया राख की ढुलाई करवा रही है। असल में तो उनमें राख का लदान ही नहीं करवाया जाना चाहिए।
अब हालात खराब हो रहे हैं तब एक बार फिर थर्मल की इंटक यूनियन ने चेताया है।
यूनियन के अध्यक्ष श्याम सुंदर और महामंत्री बलीराम मेघवाल ने विद्युत निगम के जयपुर उच्चाधिकारी को सूचित किया जिसमें चेतावनी है। 


बुधवार, 16 नवंबर 2016

तोप मुकाबिल हो अखबार निकालो:अखबारों की ताकत अब कहां गई?



अकबर इलाहाबादी का जन्म दिवस 16 नवम्बर पर


विशेष:
 

- करणीदानसिंंह राजपूत -
 तोप का मुकाबला करना हो तो अखबार निकालो का यह संदेश अखबार की ताकत बतलाने वाले शायर अकबर इलाहाबादी का जन्म 16 नवम्बर 1846 को हुआ था। आज उनके जन्मदिवस 16 नवम्बर पर उन्हें याद करते हुए लिखना जरूरी है कि आज अखबारों में ताकत नजर क्यों नहीं आती?  आज अखबारों के मालिक संपादक आदि स्वार्थी पैसे के लोभी होकर भ्रष्टाचार का साथ देते हुए भ्रष्टाचारी और काला बाजार के पोषक रक्षक बनते हुए उसी रूप में खुद भी रम गए हैं।
देश के स्वतंत्रता संग्राम में पत्रकारों व साहित्यकारों ने अहम भूमिका अदा की थी लेकिन आज अखबार कहीं संघर्ष करना हो तो उससे दूर भगते हैं और सुविधा भोगी हो गए हैं। वेे यह भी नहीं सोचते की सुविधा कौन दे रहा है? भ्रष्आचारियों से सुविधा लेते हुए भी परहेज नहीं है कोई शर्म नहीं है।
    अकबर इलाहाबादी ने कितनी बड़ी ताकत बताया था और आज यह ताकत कितने किस किस अखबार में है और किसमें नहीं है? आज के लोग जानते हैं अब केवल सुविधाभोगी पत्रकारों को त्यागने की जरूरत है।
 
इस अवसर पर प्रसिद्ध लेखक अंकुर जैन का एक लेख यहा दिया जा रहा है। यह लेख उन्होंने 6 अगस्त 2013 को स्वतंत्रता दिवस पर छपने के लिए लिखा था।

मंगलवार, 15 नवंबर 2016

क्या सच्च में देश के लिए काम करने वाले पहले प्रधानमंत्री हैं नरेन्द्र मोदी? उत्तर न दें पढें जरूर:

मोदी जी ने देश के लिए घर बार छोड़ा या आरएसएस के लिए छोड़ा था? 
सैनिकों को देश के लिए घरबार छोडऩे वालों में गिनोगे या नहीं?
- मोदी जी ने पैदा किया बहस का नया मुद्दा-
- करणीदानसिंह राजपूत -
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोआ में अपने भाषण में कहा कि उन्होंने देश के लिए घर बार सब कुछ छोड़ दिया। वे आँसू छलका गए। इस बयान पर बहस शुरू है चर्चा शुरू है कि मोदी ने जो कुछ कहा उसमें कितना सच्च है? मोदी ने यह वाक्य या बात कह कर खुद ने ही बहस का मुद्दा बना दिया है।
1.क्या देश के लिए काम करने वाले मोदी जी पहले प्रधानमंत्री हैं? इनसे पहले के प्रधानमंत्रियों ने देश के लिए काम नहीं किया था?
2. सैनिक देश के लिए सीमा पर खड़ा है जान हथेली पर लिए सदा मंडराती मौत में। क्या उसकी गणना नहीं होनी चाहिए? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सैनिक जितना खतरा नहीं है। उनकी सुरक्षा का व्यापक प्रबंध है,लेकिन सैनिक की सुरक्षा कितनी है?
3. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जब अपना घर बार सब कुछ छोड़ा तब वे आरएसएस के सेवक थे और उसी के लिए सब कुछ हुआ था? आरएसएस में भी मोदी अकेले नहीं है जिन्होंने अपना घर बार छोड़ा हो। उनसे पहले हजारों संघ सेवकों ने अपनी कुबार्नियां दी हैं। जनता की भावना को प्रभावित करने के लिए दिया हुआ भाषण ही माना जाना चाहिए।
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सोमवार, 14 नवंबर 2016

नगरपालिका सूरतगढ़ में महा घोटाला: 500 करोड़ से ज्यादा की भूमी पर कब्जे करवा दिए:



नगरपालिका सूरतगढ़ में महा घोटाला: 500 करोड़ से ज्यादा की भूमी पर कब्जे करवा दिए:
मानकसर रोड,मुख्य सडक़ों के कब्जे तुड़वाए वहीं पर फिर से अतिक्रमण-
करोड़ों रूपए के काम बिना टेंडरों के करवाने के बाद टेंडर अखबारों में छपवाए:



31-12-2012.
update 14-11-2016.
नगरपालिका सूरतगढ़ में प्रतिदिन घोटाले चल रहे हैं और उससे लगता है कि राज नाम की कोई पावर नहीं है। यहां पर पालिका के अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ के आने के बाद कुछ ही महीनों में नगरपालिका की मुख्य सडक़ों के पास की बेशकीमती जमीनों पर कब्जे करवा दिए गए जिनकी मार्केट वेल्यू 500 करोड़ रूपयों से भी अधिक है। नगरपालिका मानकसर रोड के अतिक्रमण जेसीबी से हटवा कर अखबारों में विज्ञप्तियां छपवाई थी कि पालिका की करोड़ों रूपए की जमीनें अतिक्रमियों से मुक्त करवाई गई हैं। अब उन्हीं जमीनों पर पिछले कुछ दिनों से खुले रूप से दुबारा अतिक्रमण करवा दिए गए हैं। अतिक्रमण करने वालों को शह होती है कि शनिवार रविवार के अवकाश उमें अतिक्रमण करें,ताकि शिकायत भी ना की जा सके। मानकसर रोड पर सामुदायिक भवन के पास में कुछ समय पहले ही अतिक्रमण तोड़े गए थे और अब 29 दिसम्बर को वहां पर दिन रात अतिक्रमण हो गए। पालिका प्रशासन की शह के बिना ये अतिक्रमण दुबारा हो ही नहीं सकते। इनके ताजा फोटो यहां दिए जा रहे हैं। कुछ जगह निर्माण किया जा रहा है तथा कुछ जगह तो ऊंची चारदीवारी बना दी गई है।
इसके अलावा नई आवासन मंडल का्लोनी के पश्चिम में जलदाय विभाग की टंकी के पास में बहुत बड़े क्षेत्र में पालिका ने अतिक्रमण हटवाए थे वहां पर भी अतिक्रमण दुबारा खुले आम हुए। उस समय के फोटो आदि समाचारों के साथ में छपे,मगर पालिका की मिली भगती के कारण वहां पर चार दिवारियां बनाई गई और कमरे भी बनवा दिए गए।
राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 के आसपास भी बहुत बड़े निर्माण चल रहे हैं। शहर में करीब सैंकड़ों नोहरे बन गए हैं और आवासन मंडल कॉलोनी में घरों के बाहर सडक़ों के साथ में खुली छोड़ी गई जमीनों पर गैर कानूनी कब्जे हो गए हैं। आवास से अधिक की भूमि पर ये अतिक्रमण हुए हैं तथा अभी हो रहे हैं।
नगरपालिका में करोड़ों के काम अभी दिसम्बर में करवा लिए गए हें जो बिना टैंडरों के अपने चहेते ठेकेदारों से करवाए गए हें जिनके टेंडर अखबारों में अभी छपे हैं तथा उनकी जमा करवाने की तिथियां तो अभी कुछ दिन बाद नए साल में जनवरी माह में आऐंगी। इतनी अधिक अंधेरगर्दी पहले नहीं हुई। ये निर्माण कई करोड़ के हैं। निर्माण में भी घटिया ईंटें और सडक़ों पर तारकोल कंक्रीट की परत के बजाय लगता है कि सडक़ों पर काला किया जा रहा है।
नगरपालिका के महा घोटोले में पार्षदों की भी मिली भगती है जिसके कारण लूट मची है। सभी ने यह सोचा है कि चुनावी साल शुरू हो चुका है इसके पांच सात महीनों में जितना बना सकें बनालो। इसलिए सभी चुप हैं। पार्षदों के दिमाग में है कि हम लोगो को ही पालिका बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव पारित कर सच्चे झूठे भगतानों पर मोहर लगानी है। इसके बाद कोई जांच नहीं कांई आंच नहीं। लेकिन पालिका बोर्ड भी इस गलतफहमी में है,कि उसके पारित कर दिए जाने पर कोई जांच नहीं होगी या हम नहीं फंसेंगे? घोटोलों के बिलों को पारित करने वाले भी कानून के शिकंजे में आने पर सरकार सारा उगलवा भी लेती है।
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अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ कानून से बड़े:
सरकार की सख्त रोक के बावजूद उदघाटन शिलान्यास पट्टों पर लिखाया खुद का नाम
सूरतगढ़। राज्य सरकार ने एक सख्त आदेश जारी कर रखा है कि उदघाटन और शिलान्यास पट्टों पर कोई अधिकारी अपना नाम नहीं लिखवाएगा और कोई अधिकारी ऐसा कार्य करेगा तो उसके विरूद्ध कार्यवाही की जाएगी।
अधिशाषी अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ सरकार के इस आदेश को क्यों ठुकरा रहे हैं। ये बात तो वे ही जान सकते हैं लेकिन उनका यह कार्य उनको संकट में डालने वाला साबित हो सकता है।
नगरपालिका के नए कार्यालय भवन के शिलान्यास पट्ट पर उनका नाम अंकित है और इससे पूर्व सूरतगढ़ सिटी थाने के मुख्य द्वार पर सीसीटीवी कैमरों के उदघाटन दिवस पर लगाए गए पट्ट पर भी पृथ्वीराज जाखड़ का नाम अंकित है।
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मामा की गोदी में इतराऊं

मैं नन्ही माही, पल में जागूं, पल में सोऊं, मुस्काते करूं मनन, मामा की गोदी मिले, इतराऊं इठलाऊं।
शब्द चित्र- करणीदानसिंह राजपूत
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पाँच वर्षीय माधव उपाध्याय का चंचल मन करता चित्रकारी


-रिपोर्ट - करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़। बचपन की चंचलता में बच्चे खेलकूद चित्रकारी गायन नृत्य नाटक जो उनके सामने आता है उस ओर खिंचते जाते हैं। उनको शिक्षा संस्थान में चाहे घर पर और चाहे टीवी आदि में दृश्य के रूप में जो बात दिल को छू जाती है उसी को करने की ठान लेते हैं। इसी प्रकार के बचपन से निकले कलाकार बाद में नाम कमाते हैं और लोगों के दिल दिमाग में बस जाते हैं। उनको यह परवाह नहीं होती कि उनके बचपन की इन कलाकारियों को लोग किस मन से देखते हैं। वे अपनी धुन में खोए हुए काम करते हैं।
ऐसे ही एक बालक माधव उपाध्याय पर मेरी नजर पड़ी। वह बड़ी तन्मयता से अपने सामने के चित्र को देख कर रेखांकन करता और उनमें रंग भरता जा रहा था।
श्रीमती पूजा एवं दीपक उपाध्याय का पाँच वर्षीय पुत्र माधव सरस्वती उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रांगण में अपनी धुन में रमा था। उसकी चित्रकारी को देखकर पूछा तो उसने बताया कि वह कक्षा दो में पढ़ता है। उसके जवाब से मालूम पड़ा कि चित्रकारी करना और उनमें रंग भरना अपने आप मन में ही उपजा। किसी ने उसको खास खास चित्र बनाना और उनमें खास खास रंग भरना नहीं सिखलाया और न ऐसा करने को कहा। माधव के दादा अध्यापक राजेन्द्र शर्मा ने भी कहा कि उसके मन में आता है उसी का चित्र बनाता है और रंग भरता है।
बालमन में उपजा यह चित्रकारी का शौक उसे किस और ले जाएगा। यह वक्त बताएगा। फिलहाल उसके कुछ रंग भरे हुए चित्र यहां पर प्रकाशित किए जा रहे हैं। 



24-1-2016.
Update 14-11-2016.
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शनिवार, 12 नवंबर 2016

वैभवशाली नोएडा की गंदगी में सांस लेना भी मुश्किल:कैसे जीते हैं लोग:


- करणीदानसिंह राजपूत -
दिल्ली से मिला हुआ उत्तरप्रदेश का नव विकसित नोएडा वैभवशाली नगरी है। अनेक आवासीय ब्लॉकों में ऊंचे आलीशान भवन और भवनों के आगे सड़क किनारे कारों की कतारें और हरियाले पेड़ पौधों की सजावट। हर भवन की दीवार के पास में दो तीन चार कारें खड़ी दर्शाती है कि रहने वाले हर सदस्य के पास में अपनी अलग कार है। भवनों में कारें खड़ी करने की जगह होना संभव नहीं सो सड़क के किनारे किनारे कारें खड़ी कर दी जाती है। भवनों में हरियाले पौधे लताएं और बाहर भी हरियाली। भवनों के बाहर हरियाली सुंदर लगती है। नोएडा में गाय भैंस आदि पशु नहीं है इसलिए हरियाली को खा जाने कुतर जाने का खतरा नहीं है। हां,यहां पर गाय नहीं है मगर दो चार कुत्ते जरूर दिखाई पड़ जाते हैं। इनको रोटी मिल जाती है और गाय को ग्रास देने के श्रद्धालुओं के लिए गौ शाला का रिक्सा वाहन आता है जिसमें जो देना चाहें वह दे सकते हैं।
कारोबार के लिए विकसित हुए वैभवशाली नोएडा व्यवसाय व बैंक आदि में नौकरी करने वाले तथा रहने बसने वाले सभी उच्च शिक्षित हैं तो वहां गंदगी कचरा कौन फैलाता है। वहां गंदगी और कचरे में लोग रहते कैसे हैं? यहां पर एक टिप्पणी बीच में ही करना उचित है कि उच्च शिक्षित हैं मगर सुशिक्षित नहीं है। यहां के ही लोग गंदगी कचरा फैलाते हैं कोई बाहर से कचरा फैलाने तो नहीं आता होगा?


रविवार, 6 नवंबर 2016

दिल्ली में जानलेवा खतरनाक धुंद से बचाओ वास्ते चेतावनी नासा ने धुंद के फोटो जारी किए

- करणीदान सिंह राजपूत नोएडा से -
खतरनाक धुंध से बचाव के लिए दिल्ली सरकार ने कई कदम उठाने की घोषणा की है। इन कदमों के तहत दिल्ली के समस्त स्कूल 3 दिन के लिए बंद करने की घोषणा हुई है।दिल्ली के भीतर समस्त निर्माण कार्य 5 दिन के लिए बंद कर दिए गए हैं। दिल्ली में एक बार फिर  सम विषम वाहनों के चलाने की योजना है। इसके अलावा कृत्रिम वर्षा कराने की योजना है। दिल्ली के मथुरा रोड पर बदरपुर ताप बिजलीघर  को 10 दिन के लिए बंद करने की योजना बनाई जा रही है। इस बिजलीघर में   कुल 705 मेगावाट बिजली का उत्पादन होता है अगर इसको बंद किया जाता है तो बिजली का संकट भी पैदा होगा। दिल्ली के अलावा आसपास का जो इलाका है नोएडा और गाजियाबाद उसमें भी खतरनाक धुंध का असर बना हुआ है। दिल्ली के मुख्यमंत्री दिल्ली क्षेत्र में कृत्रिम वर्षा कराने के लिए सोच रहे हैं। दिल्ली में मुख्य कारण पड़ोसी राज्य हरियाणा से चावलों की पराली घास के जलाए जाने का धुआँ भी है। जो हवा के साथ निरंतर दिल्ली की ओर बढ़ रहा है। नासा ने दिल्ली पर मंडराते हुए धुंध के चित्र प्रसारित किए हैं। 


मेडिकल दुकानों में जहां फेस मास्क मिल रहे हैं वहां खरीदारों की भीड़ लगी हुई है। हर परिवार अपने बच्चों के लिए फेस मास्क खरीदना चाहता है। दिल्ली के बड़े निजी चिकित्सालय का मानना है दमें व श्वांस रोगियों की संख्या करीब तीन गुनी हो गई है।

पूनम अंकुर छाबड़ा का आमरण अनशन शनिवार को समझौते के बाद खत्म हुआ

 - करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। राजस्थान में संपूर्ण शराब बंदी और सशक्त लोकपाल की  नियुक्त किए जाने की मांग को लेकर शहीद गुरुशरण छाबड़ा के साथ सरकार द्वारा किए समझौते को लागू किए जाने की मांग को लेकर छाबड़ा जी की पुत्रवधू पूनम अंकुर छाबड़ा ने 3 नवंबर को जयपुर में  शहीद स्मारक पर आमरण अनशन शुरू किया था।  5 नवंबर शनिवार शाम को राज्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में पूनम अंकुर छाबड़ा से अनशन स्थल पर आबकारी आयुक्त ओ पी यादव अतिरिक्त आबकारी आयुक्त रश्मी गुप्ता संयुक्त सचिव एमके जुनेजा ने वार्ता की और लिखित में विश्वास दिया। उसके बाद पूनम अंकुर छाबड़ा का आमरण अनशन खत्म हुआ।   3 नवंबर 2015 को पूर्व विधायकी गुरुशरण छाबड़ा का आमरण अनशन के दौरान स्वर्गवास हो गया था। राज्य सरकार ने गुरुशरण छाबड़ा के साथ पूर्व में शराबबंदी को लेकर कुछ समझौते किए थे। जिनके लागू न होने पर गुरुशरण छाबड़ा ने आमरण अनशन शुरु किया था। अब गुरुशरण छाबड़ा के साथ हुए समझौते लागू कराने के लिए छाबड़ा जी की पुत्रवधू पूनम छाबड़ा और पूजा छाबड़ा अलग अलग दो टीमें बना कर अभियान चला रखे हैं। 

कथावाचक मोरारजी बापू ने धरती धोरां री गीत को भजन बताते हुए और महान बना दिया-

- करणी दान सिंह राजपूत -
राजस्थान की धरती को अमर साहित्यकार कन्हैयालाल जी सेठिया ने धरती धोरां री गीत लिखकर इस धरती के कण-कण को साहित्य में और जनमानस में अमर कर दिया। इस धरती की अनूठी व्याख्या कन्हैयालाल जी ने की वैसी व्याख्या अन्य कोई साहित्यकार आज तक नहीं कर पाया। धरती धोरां को रणबांकुरे और देवी देवताओं की रमण करने वाली धरती बताया गया। इसके कण-कण में लोगों के विश्वास और जीवन पर गीत के रूप में कन्हैयालाल जी ने जो संदेश दिया वह बहुत व्यापक है। उस पर सही रूप में व्याख्या की जाए तो हजारों पृष्ठ कम पड़ जाएंगे। कन्हैयालाल जी ने सरल राजस्थानी में यह गीत लिखा जो आज संपूर्ण भारत देश में और अन्य देशों में समारोह में गाया जाता है। इस गीत से समारोह में जान आकर प्रसिद्धि बढ जाती है। राजस्थान के अंदर राष्ट्रीय समारोह पर व अन्य समारोहों में धरती धोरां री गीत का प्रस्तुतीकरण विशेष रुप से कराया जाता है। यह गीत और इसके रचनाकार कन्हैयालाल जी सेठिया दोनों ही अमर हो गए। इस गीत को महान कथावाचक मोरारजी बापू ने भजन की उपमा देकर जनमानस में और महान तथा अमर बना दिया। मोरारजी बापू रामदेवरा में कथा वाचन कर रहे थे तब उन्होंने श्रद्धालुओं से विशेष अनुरोध किया कि सभी लोग इस गीत धरती धोरांं री को गायें यह तो भजन है। सच में यह गीत इस रूप में समारोहों में गाया जाता है। उससे यही प्रमाणित होता है। मोरारजी बापू ने जो उपमा दी है वह अक्षरक्ष: सत्य है।

राजस्थान में भी छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है- ध्यान रखने योग्य बातें-

- करणीदानसिंह राजपूत -
छठ पूजा का पर्व राजस्थान में भी धूमधाम से मनाया जाता है जहां पर पूर्वांचल के लोग बसे हुए हैं। वे लोग छठ पूजा करते हैं और राजस्थान के स्थानीय निवासी उनका भरपूर सहयोग करते हैं तथा इस धार्मिक आयोजन में शामिल भी होते हैं। छठ पूजा का पर्व सूरतगढ़ क्षेत्र में धूमधाम से मनाया जाता है। इसका कारण यह है कि सूरतगढ़ इलाके में भारत भर के लोग बसे हुए हैं। सूरतगढ़ क्षेत्र को मिनी भारत भी कहां जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। छठ पूजा का पर्व 4 नवंबर को शुरू हुआ है और यह 4 दिन चलेगा। इस धार्मिक आयोजन में भाग लेने वाले और व्रत करने वालों के लिए कुछ खास ध्यान में रखने योग्य नियम हैं जिनका पालन किया जाए तो छठ पूजा का लाभ अत्यधिक मिल सकता है,क्योंकि यह आयोजन धार्मिक है इसलिए इसमें पूजा-पाठ और  व्रत का मनाने का तरीका महत्वपूर्ण है। इस धार्मिक त्यौंहार में किन-किन बातों का ध्यान रखा जाए जरा इन पर गौर करें।
 ये नियम यहां दिए जा रहे हैंं।
इस साल 2016 में चार दिनों तक चलने वाली छठ पूजा 4 नवंबर से शुरू हो गई है। बिहार में छठ पर्व को  हिंदू धर्म में मान्यता है कि छठ देवी सूर्यदेव की बहन हैं इसलिए इस पर्व पर छठ देवी को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव को खुश किया जाता है। 
महापर्व के दौरान हिंदू धर्मावलंबी भगवान भास्कर (सूर्य देव) को जल अर्पित कर आराधना करते हैं। ऋग्वैदिक काल से सूर्योपासना होती आ रही है।
छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ का व्रत करते समय व्रतियों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
छठ पूजा के दौरान इन नियमों ध्यान में रखना चाहिए।
– रसोई स्थान में प्याज और लहसुन बिल्कुल नहीं रखना चाहिए।

– व्रत रखने वाली महिलाओं को बिस्तर नहीं सोना चाहिए। व्रती महिला को जमीन पर सोना चाहिए

– छठ व्रतियों को पूजा में शराब या सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए।

– पूजा का सामान इधर-उधर नहीं रखना चाहिए। किसी का पैर पूजा के सामान पर नहीं लगना चाहिए।

– व्रत के दौरान घर में मांसाहारी खाना बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए।

– व्रत में साधारण नमक का सेवन नहीं किया जाए।सिर्फ सेंचार दिनों तक चलने वाली छठ पूजा 4 नवंबर से शुरू हो गई है। बिहार में छठ पर्व को विशेष महत्व दिया जाता है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि छठ देवी सूर्यदेव की बहन हैं इसलिए इस पर्व पर छठ देवी को प्रसन्न करने के लिए सूर्य देव को खुश किया जाता है। छठ महापर्व के दौरान हिंदू धर्मावलंबी भगवान भास्कर (सूर्य देव) को जल अर्पित कर आराधना करते हैं। ऋग्वैदिक काल से सूर्योपासना होती आ रही है। छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ का व्रत करते समय व्रतियों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
छठ पूजा के दौरान इन बातों को रखें खास ख्याल
– किचन में प्याज और लहसुन बिल्कुल नहीं रखना चाहिए।

– व्रत रखने वाली महिलाओं को बेड पर नहीं सोना चाहिए। व्रती महिला को जमीन पर सोना चाहिए

– छठ व्रतियों पूजा में शराब या सिगरेट का सेवन नहीं करना चाहिए।

– पूजा का सामान इधर-उधर नहीं रखना चाहिए। जिससे की किसी का पैर पूजा के सामान पर नहीं लगना चाहिए।

– व्रत के दौरान घर में मांसाहारी खाना बिल्कुल भी नहीं रखना चाहिए।

– व्रत में साधारण नमक का सेवन कतई न करें। आप  सेंधा नमक खाना चाहिए।
सूर्यदेव की आराधना के लिए इन मंत्रों का जाप करें

नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्।

दिवीकरं रविं भानुं मार्तण्ड भास्करं भगम्।।

इन्दं विष्णु हरिं हंसमर्क लोकगुरूं विभुम्।


त्रिनेत्रं र्त्यक्षरं र्त्यडंग त्रिमूर्ति त्रिगति शुभम्।।
हिन्दू धर्म के पंच देवों में से एक सूर्य देव की पूजा से ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद, सफलता, प्रसिद्धि आदि की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन पूजा करने से व्यक्ति में आस्था और विश्वास पैदा होता है। सूर्य की पूजा मनुष्य को निडर और बलवान बनाती है। इससे अंहकार, क्रोध, लोभ, इच्छा, कपट और बुरे विचारों का नाश होता है। मानव परोपकारी स्वभाव का बनता है तथा आचरण कोमल और पवित्र होता है।धा नमक खा सकते हैं।
सूर्यदेव की आराधना के लिए इन मंत्रों का जाप करें

नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्।

दिवीकरं रविं भानुं मार्तण्ड भास्करं भगम्।।

इन्दं विष्णु हरिं हंसमर्क लोकगुरूं विभुम्।

त्रिनेत्रं र्त्यक्षरं र्त्यडंग त्रिमूर्ति त्रिगति शुभम्।।
हिन्दू धर्म के पंच देवों में से एक सूर्य देव की पूजा से ज्ञान, सुख, स्वास्थ्य, पद, सफलता, प्रसिद्धि आदि की प्राप्ति होती है। प्रतिदिन पूजा करने से व्यक्ति में आस्था और विश्वास पैदा होता है। सूर्य की पूजा मनुष्य को निडर और बलवान बनाती है। इससे अंहकार, क्रोध, लोभ, इच्छा, कपट और बुरे विचारों का नाश होता है। मानव परोपकारी स्वभाव का बनता है तथा आचरण कोमल और पवित्र होता है।

शुक्रवार, 4 नवंबर 2016

लोगों का सांस पीती खतरनाक दिल्ली - पीवणा सांप बनी दिल्ली - लोगों में डर बनी दिल्ली-

 - करणीदान सिंह राजपूत -
दिल्ली और आसपास का इलाका खतरनाक प्रदूषण का बना हुआ है और यहां लोगों का सांस लेना मुश्किल हो रहा है। दिल्ली के कई स्कूलों ने बच्चों के स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने के लिए अवकाश घोषित कर दिए हैं। अनेक लोग मुंह नाक पर मास्क लगाकर घरों से बाहर निकल रहे हैं या अपने कार्य स्थलों पर जा रहे हैं।  दिल्ली की वायु इतनी खतरनाक हो गई है की भोर में घूमने वालों को मनाही करते हुए सलाह दी जा दी गई है की 8:00 बजे के बाद में घूमना सुरक्षित है।दीपावली पर फोड़े गए पटाखों के धुएं और कोहरे को मिलकर बना धुंध दिल्ली और आसपास के व्यावसायिक इलाकों में व आकाश में छाया हुआ है।दीपावली को इस बार पटाखे 50% ही फोङे गए लेकिन फिर भी वायु प्रदूषण बहुत अधिक बढ़ा हुआ है।सूचना मिल रही है कि सामान्य वायु प्रदूषण से वर्तमान वायु प्रदूषण 4 गुना अधिक है जिससे वृद्ध बीमार दमे के लोग और बच्चों पर बुरा असर पङ रहा है। दीपावली को बीते हुए 5 दिन हो गए हैं मगर यह खतरनाक धुआं और कोहरा फिर भी आकाश में छाया हुआ है। इसका बुरा असर घरों और सड़कों पर भी है। इस खतरनाक वायु प्रदूषण में दिल्ली के आसपास के प्रदेशों में धान की पराली जलाने से भी धुआँ और अधिक शामिल हो रहा है। हरियाणा में खेतों में जहां चावल की फसल प्राप्त कर ली गई है वहां खेतों में पराली को जलाया जा रहा है। यह धुआँ भी दिल्ली को प्रभावित कर रहा है। दिल्ली नोएडा और अन्य व्यावसायिक इलाकों में वायु प्रदूषण का खतरा बहुत बढा हुआ है तथा लोगों को भयभीत कर रहा है। लोगों का मानना है कि इस वायु प्रदूषण से गंभीर बीमारियां फैल सकती है इसलिए सलाह दी जा रही है और उसके अनुरूप लोग मास्क लगाकर घरों से बाहर निकल रहे हैं।दिल्ली और आसपास के इलाकों में गंदगी और कचरे के ढेर पहले से ही वायु प्रदूषण फैला रहे थे अब उसमें यह दीपावली के पटाखों का धुआं और कोहरा मिलकर वायुमंडल को अधिक बिगाड़ रहे हैं।
दिल्ली का यह खतरनाक वातावरण राजस्थान के पीवणा सांप जैसा खतरनाक हो रहा है। राजस्थान के मरू इलाके खासकर बीकानेर के जंगलों में पाए जाने वाले पीवणे सांप जैसा। पीवणे सांप के बारे में कहा जाता है कि वह सोते हुए व्यक्ति के सीने पर बैठकर सांस पी लेता है जिससे व्यक्ति की मौत हो जाती है। पीवणा सांप व्यक्ति के ऊपर से जाते वक्त फुंकार मार कर या पूंछ की चोट मारकर जगा जाता है मगर  व्यक्ति की हालत उठने जैसी भी नहीं रहती। कोई आस-पास होता है और बेहोश व्यक्ति को देख लेता है तब इलाज होने की उम्मीद होती है अन्यथा व्यक्ति मर जाता है। वर्तमान में दिल्ली इस पीवणा सांप जैसी हो रही है जो लोगों की सांसो को पी रही है तथा बेदम कर के मौत की तरफ धकेल रही है। दिल्ली से  जो सावधान होकर बचाव  करने में सफल होते हैं वे जानलेवा बीमारियों का शिकार होने से बच पाते हैं तथा अपने बच्चों को भी बचा लेते हैं। दिल्ली आकर वापस जाने वाले  न जाने कितने लोग दिल्ली के वायु प्रदूषण का शिकार होकर जाते हैं, यह उनको कई दिन बाद मालूम पड़ता है।

गुरुवार, 3 नवंबर 2016

संघ की राजस्थान सरकार का आचरण नैतिकता और गुरुशरण छाबड़ा का शराबबंदी को लेकर बलिदान

- करणीदान सिंह राजपूत -
संघ के प्रमुख सदा नैतिकता और शुद्ध आचरण पर सीख देते रहे हैं। मैं उनकी किसी भी सीख पर कोई कटाक्ष नहीं करना चाहता लेकिन जहां जहां संघ के सहयोग से  सरकारें बनी हैं

नशाबंदी अनशन में शहीद गुरुशरण छाबड़ा की याद में सूरतगढ़ में कार्यक्रम।

-  राजकीय चिकित्सालय के समीप गुरुशरण छाबड़ा की प्रतिमा पर माल्यार्पण -
- करणीदान सिंह राजपूत -
सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरुशरण छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर जयपुर में शहीद स्थल पर आमरण अनशन शुरू किया था ।पुलिस उनको जबरन उठाकर ले गई और राजकीय चिकित्सालय में भर्ती करा दिया था। राजकीय चिकित्सालय एसएमएस में भी उनका आमरण अनशन जारी उसी दौरान 3 नवंबर 2015 को भोर में छाबड़ा जी का निधन हो गया। उनकी शहादत पर अब राजस्थान भर में अनेक स्थानों पर यह मांग प्रबल रूप से उठ रही है कि राजस्थान सरकार ने छाबड़ा जी के साथ जो वादे किए थे उनको पूरा करें । सूरतगढ़ में गुरुशरण छाबड़ा जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के साथ ही छाबड़ा जी की मांगों को पूरा करने के लिए वक्तव्य दिए गए छाबड़ा जी के प्रतिमा स्थल पर आयोजित कार्यक्रम में पूर्व विधायक सरदार हरचंद सिंह सिद्धू पूर्व विधायक अशोक नागपाल बलराम वर्मा बसपा नेता जिला परिषद सदस्य डूंगर राम गेदर बसपा के  शहर अध्यक्ष पवन सोनी व्यापार मंडल के पूर्व अध्यक्ष ललित सिडाना पूर्व पार्षद पूर्णचंद्र कवातङा श्याम मोदी पार्षद श्रीमती राजेश सिडाना एडवोकेट भागीरथ बिश्नोई एडवोकेट एनडी सेतिया समाजसेवी रमेश चंद्र माथुर क्रांतिकारी महावीर प्रसाद भोजक प्रसिद्ध व्यवसायी जनकराज गुंबर  पार्षद सत्यनारायण छींपा राजस्थानी साहित्यकार मनोज स्वामी सहित अनेक लोगों ने भाग लिया।

बुधवार, 2 नवंबर 2016

देश का हृदय दिल्ली मलमुत्र की गंदगी और कचरे से भरा

- करणीदान सिंह राजपूत-
 देश का हृदय दिल्ली मलमुत्र की गंदगी और कचरे की सड़ांध से भरा है।
 यहां खुले में शौच करते और मुत्र त्याग करते लोगों को देखा जा सकता है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संपूर्ण भारत के  स्वच्छ भारत मिशन को दिल्ली ही नहीं मान रही।दिल्ली प्रशासन की व्यवस्था इतनी लचर है की पूरे देश के संदेश को यहां लागू करने में नाकामी मिल रही है। दिल्ली लोगों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान को जानबूझकर खराब किया जा रहा है यह तो नहीं कहा जा सकता लेकिन दिल्ली राज के जो अधिकारी हैं वे देश के स्वास्थ्य और स्वच्छता मिशन को चलाने में असफल हैं।दिल्ली के अनेक इलाकों में सड़कों पर फैली गंदगी को कचरे के ढेरों को देखा जा सकता है। सड़कों पर लगे कचरा पात्रों पात्रों के भर जाने पर तुरंत कचरा ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं है। लोग कचरा पात्रों के बाहर कचरा फेंक देते हैं यह लोगों की मजबूरी है। दिल्ली के स्टेशन और किशनगंज रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्मों पर तथा आसपास कचरा गंदगी मलबे के ढेर लगे हुए देखे जा सकते हैं। उनको देखने से मालूम पड़ता है कि इन कचरा ढेरों को लगे हुए महीनों बीत चुके हैं। रेलवे लाइनों पर भयानक गंदगी प्लास्टिक का कचरा बिखरा हुआ सफाई संदेशों को चिढ़ाता है। रेलवे ओवरब्रिज के आसपास की बस्तियों वाले पुलों के पास रेल लाइन पर कचरा डालते हैं जिन को रोकने टोकने और दंडित करने की कोई व्यवस्था नहीं है। रेल लाइनों के पास बसे झुग्गी झोपड़ी वाले निवासी सुबह सवेरे और रात्रि में रेल लाइनों के आसपास ही मलमुत्र त्यागते हैं। सुबह सवेरे जो रेलें दिल्ली में प्रवेश करती हैं उनके यात्रियों को मल मूत्र त्याग करते लोगों के दृश्य देखने पड़ते हैं। दिल्ली के आसपास के इलाके हरियाणा व उत्तर प्रदेश के हैं उनमें भी भयानक गंदगी पड़ी है और उसको हटाने की कोई व्यवस्था नजर नहीं आती। नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान को देशभर में लागू करने की अपील को राज्य सरकारों ने छोटे छोटे कस्बों में घरों में और सार्वजनिक स्थानों पर लागू कराने की व्यवस्था की। छोटे गांव में भी शौचालयों का निर्माण करवाया गया।लेकिन आश्चर्य है कि देश की राजधानी दिल्ली देश के हृदय स्थल दिल्ली और आसपास के हरियाणा उत्तर प्रदेश के व्यावसायिक इलाकों में सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण नहीं करवाया गया। इसी कारण से दिल्ली और आसपास के इलाकों में मल मूत्र और कचरे की सङांध वाली हवा में लोगों को मजबूरी में सांस लेना पड़ रहा है। इस गंदगी और सङांध से जो बीमारियां फैल रही है। दिल्ली से बीमारियां लेकर लोगबाग अन्य राज्यों में जा रहे हैं उनको रोकना संभव नहीं है।

दिल्ली और आसपास के व्यावसायिक इलाकों की गंदगी और कचरे के ढेरों पर एक मजाक किया जा सकता है यहां के मलमुत्र मैं सुगंध और कचरे के ढेरों में सजावट इसलिए यहां के राज चलाने वाले इस सुगंध को और सजावट को दूर करना नहीं चाहते

मंगलवार, 1 नवंबर 2016

आपातकाल के जिंदा शहीद भाजपा की सरकार में कीड़े मकोड़े पशु समान:


लोकतंत्र की रक्षा करने वाले सेनानियों की कुर्बानियों पर सत्ता में आई भाजपा के मंत्री करते तिरस्कार:
सरदार पटेल की जयंती 31 अक्टूबर पर विशेष लेख-

करणीदानसिंह राजपूत=

आपातकाल के अत्याचारों को झेलते हुए जिन लोगों ने स्वतंत्रता व लोकतंत्र की रक्षा में अपना सब कुछ न्यौछावर कर देने की मंशा लेकर अत्याचारी कांग्रेस की इंदिरा सरकार का मुकाबला किया। वे लोग जेलों में बंद रहे और उनके परिवार भी यात्नाएं झेलते रहे।उन लोकतंत्र सेनानियों में अब चंद लोग जीवित बचे हैं। राजस्थान में आपातकाल के जिंदा शहीदों की यह संख्या अब पांच सौ भी नहीं है। इन जीवित शहीदों में अनेक लोगों की उम्र 80 से 90 वर्ष के करीब है। वैसे भी साठ की आयु पार करने के बाद कोई काम करने वाली उम्र नहीं रहती लेकिन अनेक इस उम्र में अपने जीवन यापन के लिए मजदूरी चौकीदारी जैसे कार्य करने को मजबूर हैं। इस मेहनत में भी दो हजार से तीन हजार रूपए तक की मजदूरी मिल पाती है जिसमें पेट भरने को आटा ले पाते हैं और इसी रकम में वृद्धावस्था की रोज रोज की स्थाई बिमारियों का ईलाज कर पाते हैं। चाहे कैसी भी दुरावस्था हो इन लोकतंत्र के जीवित शहीदों से मरा भी नहीं जाता।
सन् 1975 के आपातकाल में अपनी कुर्बानियां देने वाले लोकतंत्र सेनानियों व लोकतंत्र शहीदों के कारण ही राज में आए लोग आज आपातकाल के जीवित लाशों के रूप लिए शहीदों का तिरस्कार करते हुए जरा भी शर्म नहीं करते।
राजस्थान की भाजपा सरकार ने आपातकाल में रासुका व मीसा बंदी रहे लोगों को पेंशन व ईलाज सुविधा के प्रतिमाह पेंशन के 13 हजार 200 रूपए देने शुरू किए। आपातकाल में शांतिभंग में पकड़े गए लोगों को भी जेलों में बंद कर दिया गया था व सजाएं दी गई थी। उनके घर परिवार भी अत्याचार सहने वालों में थे व बरबाद हुए थे। वसुंधरा राजे की सरकार ने उनक लिए पेंशन के नियम नहीं बनाए। या तो किसी को भी पेंशन नहीं दी जाती और दी जाने लगी तो शांतिभंग में बंदी रहे इन जीवित शहीदों को टालना नहीं था। सरकार पर खर्च का कोई भार नहीं होता। सरकार करोड़ों रूपए अनेक कार्यक्रमों में लगाती है।
लेकिन इन जीवित शहीदों ने जब जब सरकार से पेंशन के लिए आवेदन किया या समूह के रूप में मिले तब तब तिरस्कार झेलना पड़ा।  राजस्थान में अब आपातकाल के जीवित शहीद बचे हैं उनकी संख्या पांच सौ भी नहीं है। सरकार चाहे तो गृहमंत्रालय दो चार दिनों में ही संपूर्ण आंकड़े प्राप्त कर सकता है।
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने शांतिभंग में बंदी रहे कार्यकर्ताओं को भी पेंशन दिए जाने बाबत एक प्रावधान तैयार करवाया था वह रिपोर्ट फाईल राजे के पास पड़े हुए दो साल होने वाले हैं। उस पर निर्णय नहीं किया जा रहा है।
आपातकाल में शांतिभंग में जेलों में बंदी रहे देशभक्त प्रतिफल व तोहफे के रूप में पेंशन मांगते तो 1977-78 में जनता पार्टी राज में ही मांग लेते। आप विचार करें कि आज कई लोग 80-90 आयु के हो चुके हैं और काम कर नहीं सकते। क्या उनके घरों में दो वक्त की रोटी भी नहीं होनी चाहिए?
आज चपरासी का वेतन उस पेंशन से अधिक है जो आपातकाल वालों को मिल रही है। इस देश में मंत्रियों सांसदों विधायकों को प्रतिमाह लाखों रूपए वेतन मिलना चाहिए और उनको कई कई हजार रूपए पेंशन भी मिलनी चाहिए। सरकारी कर्मचारियों अधिकारियों को अच्छा खासा वेतन और तीस चालीस हजार रूपए पेंशन मिलनी चाहिए। मिल ही रही है। चाहे जब वेतन भत्ते बढ़ाते रहते हैं।
आपातकाल के बदियों की पेंशन तो चपरासी के वेतन से भी कम है कुल प्रतिमाह 13,200 है। उस पर भी एतराज है। देश भक्ति के प्रतिफल शब्द का उपयोग ही गलत है और तोहफा शब्द और ज्यादा गलत। क्या सरकार को अपनी तरफ से ही उनके शेष जीवन के बारे में नहीं सोचना चाहिए? अनेक लोग संसार छोड़ गए और उनकी पत्नियां 60 से अधिक आयु में है,उनके बारे में सोचा है?स्वतंत्रता सेनानियों को पेंशन आदि दी जाने लगी तो क्या वह प्रतिफल व तोहफे में दी जा रही है?
अब आगे बात रह गई सम्मान की तो कभी सोचा कि जिन लोगों ने सब कुछ दांव पर लगा दिया कभी उनको भी याद किया जाए?
आपातकाल में शांतिभंग में जेलों में बंद रहे बचे हुए इन जीवित शहीदों की कुर्बानियों को कम नहीं समझना चाहिए व इनकी पेंशन तुरंत शुरू किए जाने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए।
शांतिभंग में बंदी रहे लोग जब जब मंत्रियों से मिले हैं तब तब उनको तिरस्कार मिला है। जिनकी कुर्बानियों के कारण आज राज भोगने वालों को असल में राज का तोहफा मिला हुआ है और वे इस राज में खोए सद् आचरण करना भी भूल गए।
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-करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ़
94143 81356.

श्री बिजयनगर को श्रीविजनगर नहीं लिखा जा सकता।

-करणी दान सिंह राजपूत -
श्री बिजय नगर को नगर पालिका के विज्ञापनों में श्रीविजयनगर छपवाया जा रहा है जो कानूनी गलत है। नगरपालिका के अध्यक्ष व अधिशाषी अधिकारी दोनों पर कानूनी कार्य वाही हो सकती है। बीकानेर रियासत के काल में राजकुमार बिजयसिंह के नाम पर इसका नाम करण किया गया था। नाम राज्य सरकार ही बदल सकती है। कोई भी व्यक्ति विज्ञापनों का भुगतान रुकवा सकता है। पालिका को संशोधन छपवाना चाहिए। दीपावली के विज्ञापनों में अभी ताज़ा गलती हुई है।

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