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बुधवार, 22 जुलाई 2026

देश में ज्वालामुखी फूटेगा: कविता- करणीदानसिंह राजपूत




मेरा देश बोलेगा

मेरा देश देखेगा

मेरा देश सुनेगा 

सब कुछ होगा।



 मेरे देश में 

घटनाओं पर घटनाएं

कुछ भी हो जाए 

ऐसा सदा नहीं चलेगा


 मेरे देश के आँखें हैं

 मेरे देश के कान भी हैं

मेरे देश के मुंह भी है।


अरे। घमंडी अत्याचारियों

इसका विशाल रूप

ताकत का स्वरूप

कंकाल नहीं हुआ है।

मेरे देश में बदलाव आएगा


आएगा वह दिन आएगा

जब मेरा देश गौर से देखेगा

जब मेरा देश गौर से सुनेगा

जब मेरा देश उदघोष करेगा।


मेरे देश के दिल में 

मेरे देश के दिमाग में

हलचल मचेगी और

ज्वालामुखी फूटेगा।


भ्रष्टाचार के विरूद्व

तानाशाही के विरूद्ध

हर गली हर मोड़ से

क्रांतिकारियों के चौक से

तूफान उठेगा।


ठहर नहीं पाएंगे

भाग जाएंगे

सफेदपोश भ्रष्टाचारी दुराचारी 

ऐसा दिन आएगा?

हां,ऐसा भी दिन आएगा।


 चप्पे चप्पे से

भारत मां का जयघोष

जोरों से गूंजेगा।


क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं

स्मारकों से निकल कर

संसद में बैठेंगी

सीमा पर सैनिक बन

दुश्मन को मार भगाएंगी

आएगा जल्दी वह दिन।


जब हम और तुम 

एक दिल एक जान

एक सोच से 

मशाल उठा कर

शक्तिशाली बन जाएंगे

भारत बन जाएंगे।

*********
रचना 24 जून 2018.
अपडेटेड. 15 फरवरी 2021.
अपडेट. 15 जनवरी 2024.
अपडेट 10 अप्रैल 2024.
अपडेट 9 फरवरी 2026.
अपडेट 22 जुलाई 2026.

------------------------------

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

पत्रकारिता 62 वां वर्ष.

सूरतगढ़ ( राजस्थान) 

94143 81356

***०००००😊










रविवार, 21 जून 2026

हाथ जोड़े वे नजर आ रहे हैं




कविता चुनाव काल:

हाथ जोड़े फेस बुक पर
नित नए नए पोज में
नए नए परिधान में
वे नजर आ रहे हैं।
गौर करके देखें
वे खास वार्ड को अपना नमस्कार
दिखला रहे हैं।
वार्ड नं पर ध्यान दें
वहां से पालिका चुनाव का
मानस बना रहे हैं।
फेस बुक पर मुस्कुराता मुखड़ा,
गली में मिले तो कर लेते हैं किनारा
चुनाव का खर्च तो
सरकारी खाते से करने का
बंदोबस्त तो बहुत पहले से
कर चुके हैं।
नगरपालिका का भूखंड
करोड़ों का इनके कब्जे में है।
गौर करेंगे तो अनेक पाएंगे।
आपकी हमारी नजरों में
ये अतिक्रमण हैं
मगर उनकी नजरों में
यह बिना लागत
बिना किसी छीजत का
व्यवसाय है।
घाटा तो कभी हुआ नहीं
खरीदा लाख दो लाख में
बेचा आठ दस लाख में।
समाजसेवी भी पक्के
स्कूल चला रहे हैं तो
कहीं समाजसेवी संस्था
चला रहे हैं।
चरित्र एकदम साफ सुथरा
बेदाग उज्जवल
बगुले के पंख सरीखा।
पार्षद बन कर करेंगे
सेवा।
खुद जीमेंगे और आपको भी
जिमाऐंगे होशियार हुए तो।
हाथ जोड़े वे नजर आ रहे हैं।
गौर करें
पुरूष भी हैं
स्त्री भी हैं
तीसरा लिंग भी है।
वोट आपका है
उसका कोई लिंग नहीं
किसी को भी दिया जा सकता है।
चाहे हाथ जोड़े चरित्रवान को
चाहे उस दूर खड़े नजर आ रहे को
जो धूर्त चालाकियों में नजर नहीं आता
हो सकता है,
उसके पास आपको हमको जाना पड़े।
घर से खींच कर लाना भी पड़े।
लेकिन क्या आप और हम
ऐसा कर पाऐंगे।
इतनी मेहनत कौन करे?
जो हाथ जोड़े मुस्कुरा रहे हैं।
हम सब उन पर ही गुलाल उछालेंगे
उनको ही मालाएं पहनाऐंगे।
यही तो वर्षों से करते रहे हैं।
पहले चरित्रवान को चुनेंगे
और बाद में वे अपना चरित्र दिखलाऐंगे
तब हम पीड़ाओं के हरने की
अर्जी लगाऐंगे।
-
करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार,
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत,
सूरतगढ़।   94143 81356

..............................
17-10-2014.
Up date 27-1-2017.
Up date 21- 6- 2026.




संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ



संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश
तूं चलते जाना निर्भय
बिना रूकेे बिना झुके
विचलित करने को
राह बदलने को
भटकाने को
बीच राह में
मखमली चट्टाईयों के
मोड़ बनाऐ होंगे
मगर,तूं कांटों भरे कंकड़ीले पथ पर
सीधे बढ़ते जाना
जो पहुंचाएगा
जन जन के बीच

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

जन जन के दुख पीड़ाओं को
झेलना तूं
कभी इनकार न करना
तेरा नाम दान सार्थक करना,

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

तूं पाए जो संघर्ष का फल
और जो मिले पुण्य प्रताप
उसे कभी अपना मत कहना
उसे दान करते रहना
तूं मालिक मत बनना
उसकी मालिक जनता को
अर्पण करते चलना

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

सत्ता के ऊंचे ऊंचे पद
विशाल अट्टालिकाएं
लोभ लालच मोह के
फंदों में राजनेता
धनपति जनपथ से
भटकाने को ना जाने कैसे कैसे
स्वांग भरेंगे,मीठे बोलेंगे।
तूं सबको छोड़ता
आगे बढ़ते रहना


संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

 ये देश हमारा गौरवशाली
 इसको बनाने में
तेरे से पहले असंख्य दे गए कुर्बानी
किसी ने आह तक नहीं की
फांसी का फंदा चूमा हंसते
गोली सीने में खाई
या झेली यातनाएं काला पानी
तूं कांटों वाले कंकड़ीले राह
पर चलने का एहसान मत जता देना।

संघर्ष का पथ ही है असली जनपथ
हीरा रतन जननी जनक दे गए संदेश

सत्यम् शिवम् सुंदरम् को
अपने भीतर रखते
सत्यमेव जयते को
सदा याद करते
तूं चलते जाना निर्भय
बिना रूकेे बिना झुके
बस बोलते जाना
उदघोष करते जाना
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
सत्यम् शिवम् सुंदरम्
सत्यमेव जयते
सत्यमेव जयते

़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

जननी माँ हीरा जनक पिता रतनसिंह  जी को समर्पित।
़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़़

कविता-   

  
करणीदानसिंह राजपूत,


राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत पत्रकार,
 
23 करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ़. मो.       94143 81356

^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
8-1-2015.
update  18-10-2016.
up date 21-3-2017.
up date 21-6-2026.

शनिवार, 20 जून 2026

योग दिवस पर नेता:कविता


योग दिवस पर अनेक नेता
कसमसा रहे थे।
अपने तम्बूरे से पेट पर
हाथ फिरा फिरा
मन की बात
अपने ही मन से
कर रहे थे।
खाली पेट
कैसे करें योग,
हर समय खाते
रहे हैं और
खा खा कर पेट
तम्बूरा बना चुके हैं।
अब मोदी जी के
कहने पर
पेट को खाली
कैसे करें?
इसमें तो
सारा धन दौलत
जमा हैं।
नोटों की कितनी गड्डियां,
कितनी खदानें
कितनी फाईलें
कितने दफ्तर
पेट में भरे हैं।
कैसे करें योग
पेट को कैसे करें खाली?
मानलें मन की बात भी
मगर पेट को खाली करना
इतना आसान नहीं।
पेट
कैसे हो सकता है खाली
हर वक्त कोई न कोई
आ जाता है
और ठूंस जाता है
पेटी खोका।
कैसे समझाऐं
पी एम को
पार्टी के माननीयों
को भी भेंट चढाने
होते हैं
पेटी और खोके।
पार्टी का जन्म,
सत्ता के साल
हर साल की सफलता
के समारोह तो
खुशियों खुशियों में
कर जाते हैं
करोड़ों के वारे न्यारे।
सच्चे मन से भी
खाली करना शुरू
करें पेट आज से
तो भी
कई साल लग जाऐंगे।
भरे पेट से योग नहीं होता
लेकिन भरे पेट से
मन की बात हो जाती है।
बड़े विचित्र है
मन और तन
भरे पेट हो तो
दोनों
सब समझ जाते हैं
अब कैसे समझाऐं
कि खाली पेट
रहो योग करने को।
एक दिन के वास्ते
आदत बदलनी
कितनी होगी
खतनाक।
ऊपर वाले ने
मांग ली पेटी
या मांग लिया खोका
तो वह कैसे मानेगा कि
हम योग करने लगे हैं
और खाली पेट रहने लगे हैं।
तब आप कैसे बचाऐंगे?
फंस गए या फंसा दिए गए
तब क्या होगा?
कितनी गजब ढाऐगी
वह दशा
जब फंदे से छूटने के लिए
अलग से भेंट
चढ़ानी होगी?
मोदी जी
एक काम करो
देश को पेपर लैस
करने में लगे हो।
सरकारी इन्सान को
हैंड लैस करदो।

ना लेना होगा
ना देना होगा
लुढ़कता हुआ
योग करता रहेगा।
........

सर्जन 21 जून 2016.
अपडेट 21 जून 2024.
अपडेट 20 जून 2025.
अपडेट 20 जून 2026.





करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।

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बुधवार, 10 जून 2026

और अधिक अच्छे दिन दें.हिंद के मालिक

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

अच्छे दिन चल रहे हैं।

हर रोज कुछ नया अच्छा मिल रहा है।

हिंद के हर प्रदेश में प्रसन्नता है।

हिंद के हर शहर गांव में लोग आपको याद करते हैं मालिक।

सुबह शाम को आपके नाम की माला और आरती।

शहर शहर गांव गांव शुरू हो चुकी है।

जो लोग बाकी थे,वे भी पूजन अर्चन शुरू कर रहे हैं। 

जो सवाल जवाब करते हैं उनसे हां कराने वाली टोलियां भी बन चुकी है, मालिक।

मालिक, आप किसी प्रकार की चिंता न करें।

आप तो और अच्छे दिन देने की सोचते रहें।

और अच्छे दिन जल्दी जल्दी देते रहें। 

मालिक.

10 जून 2026.

करणीदानसिंह राजपूत,

94143 81356.

०0०






गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

माखण खालो बनवारी,मत मारो पिचकारी. धमाल-कविता, करणीदानसिंह राजपूत.


आयो होली रो तिंवार
लाओ रंग गुलाल
मारी मारी पिचकारी
घेरो डाल्यो रै बनवारी
गोप्यां करै मनवार
जोड़े हाथ बारंबार
मत मारो पिचकारी
छोड़ो छोड़ो रे बनवारी।
गोप्यां आई पनघट
घड़िया भरिया लबालब
पूठी घरां नै बै चाली
घेरो डाल्यो बनवारी
मारी रंगभरी पिचकारी।
अंधेरे अंधेरे गोप्यां माखण ले रे चाली
झुरमुटां रै बीच रस्ता रोक्या बनवारी
गोप्यां करै मनवार
माखण खाल्यो बनवारी
मत मारो पिचकारी।
गोपाला गुलाल लाया
चंग जोरां सूं बजाया
मारी रंगभरी पिचकारी
चूनर लाल कर डाली।
आयो होली रो तिंवार
लाओ रंग गुलाल
मारी मारी पिचकारी
घेरो डाल्यो रै बनवारी।

**
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़.
94143 81356.
*****
अपडेट. 12 मार्च 2025.

अपडेट 26 फरवरी 2026.







*******


रविवार, 25 जनवरी 2026

मेरा तिरंगा आज भी ऊंचा-कविता-करणीदानसिंह राजपूत





कविता

 मेरा तिरंगा आज भी ऊंचा
   -  करणीदानसिंह राजपूत


मेरा तिरंगा आज भी ऊंचा
मेरे नाम की चतुर्दिक गूंज
मैं प्रगति की ओर निरंतर
आगे बढ़ता जा रहा

तुम्हारी ओछी सोच
मुझे गिराने की
मेरा नाम मिटाने की
तुम लेते रहो सपने
और एक दिन
तीर उल्टा जब खाओगे
नेस्तनाबूद हो जाओगे

तुमने कितनी बार टक्करें ली
हर बार मुंह की खाई
बेशर्मी तुम्हारे जेहन में
मात खाने को पागलपन का
कीड़ा तुम्हारे कुलबुलाने लगता है

सच, तम्हारे में अक्ल नहीं
मोल उधार भी तो मिलती नहीं
तुम्हारा जन्म हुआ बुद्धिहीन अवस्था में
और तुम भी तो
बुद्धि वाले पैदा नहीं कर पाए

नापाक तुम और नापाक इरादे
कच्चे कोठे से ढह जायेंगे
तुम्हे तो मरना है
आत्महत्या करके
मुझे छेड़ कर
यही तो कर रहे हो
नशे की खेप भेजना बंद करो
ड्रोन भेजना बंद करो
हमने आंखें तरेरी तब
संसार के नक्शे में नहीं रहोगे।
--------------------

करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
( राजस्थान सरकार से अधिकृत मान्यता आजीवन)
विजयश्री करणीभवन, सूर्यवंशी स्कूल के पास,मिनी मार्केट.सूर्योदय नगरी.
सूरतगढ़ (राजस्थान)
94143 81356
------------------------------------------------------------
पाठकवृंद 13-8-2011 को यह कविता लिखी गई और ब्लॉग व फेस बुक पर डाली गई थी।
आज भी परिस्थितियां बदली नहीं है।
अपडेट 25 जनवरी 2026
********************



 


मैं हूं हिन्दुस्तान, नशे में पाकिस्तान



मैं हूं हिन्दुस्तान, 
नशे में पाकिस्तान
पगलाया पाकिस्तान
हिन्दुस्तान का जब हो नाम
तब पगलाए पाकिस्तान
मेरा तिरंगा चूमे आकाश
तब पगलाए पाकिस्तान
संसार में गूंजे मेरा नाम
तब तड़पे पाकिस्तान
कहीं अध्यक्षता हो मेरी
दारूमें बहके पाकिस्तान
मेरा नारा लोग लगाएं
जमीं पर लोटे पाकिस्तान
मेरा नाम जब जब गूंजे
गरळावै पाकिस्तान
हिन्दुस्तान को सब माने
नशे में बहके पाकिसतान
मेरे साथ सूरज चमके
अंधियारे में पाकिस्तान
मैं हूं हिन्दुस्तान
पगलाया पाकिस्तान
मेरा नाम मित्रता तगड़ी


दारू में पगलाया पाकिस्तान।
मैं जब चाहूं थप्पड़ से
रसातल जाए पाकिस्तान
मैं हूं हिन्दुस्तान
नशे में मरता पाकिस्तान
पगलाया पाकिस्तान।


 

- करणीदानसिंह राजपूत
विजयश्री करणी भवन,
सूर्योदयनगरी,मिनी मार्केट
सूरतगढ़।

^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^^
4-1-2016.

Update.   26-2-2019.
Update.   26-1-2021.
update.   25- 1-2026.

*******************





रविवार, 19 अक्टूबर 2025

हे दीप,देश को भ्रष्टाचार अनाचार से मुक्त करते रहना: कविता:- करणीदानसिंह राजपूत.

 



हे दीप,

देश को रोशन करते रहना 

भ्रष्टाचार अनाचार से 

मुक्त करते रहना। 


अनेक भ्रष्टाचारी अत्याचारी

फैलाते रहते हैं अंधकार

तुम्हारी ज्योति से होता रहे

उन सब का अंतिम संस्कार।


तुम जलते रहना देश में चहुंओर 

तुम रोशन करते रहना 

देश की हर डगर

जहां से गुजरे नौजवान 

देशभक्ति की अलख जगाते

सीमा पर पहुंचते रहें

सैनिक रक्षक बनकर।


हे दीप,

देश को रोशन करते रहना

तुम्हें नमन करते हैं 

देश के सभी नर नारी।


तुम ही हो शांति प्रिय

असल उद्धारक 

देश में अमृत प्रकाश

फैलाने वाले।


तुम्हारी ज्योति ही

दिखलाएगी

सच्च का मार्ग

तुम्हारी ज्योति ही 

जयघोष के साथ 

लाएगी रामराज्य!

***

दीपावली की शुभकामनाएं!

प्रथम 24 अक्टूबर 2022.

अपडेट 19 अक्टूबर 2025.


करणीदानसिंह राजपूत,

विजय श्री करणी भवन,

सूर्यवंशी स्कूल के पास,

मिनी मार्केट,

सूरतगढ़।

94143 81356.

****


बुधवार, 30 अक्टूबर 2024

आओ,फिर हम दीप जलाएं: कविता.

 


आओ फिर हम दीप जलाएं

घर घर रोशन कर जाऐगा 

चाहे वो हो ज्ञान का दीप

या हो रब की रहमत का।


हर सामाजिक बुराई को 

जड़ से मिटाएं हम

आओ फिर हम दीप जलाएं 

घर घर रोशन कर जाएगा।


घर घर हम प्रेम कीअलख जगाएं

भटके हुओं को राह दिखाऐं

बैर भाव के भेदभाव को दूर हटाएं

इन्सानियत को जग में फैलाएं।

* दीप्ती कौर

गाज़ियाबाद ( भारत)

💐💐💐💐💐💐💐








बुधवार, 5 जून 2024

बरखा की बयार कहती पेड़ लगाओ पौधे रोपो - काव्य करणीदानसिंह राजपूत




आओ!आओ!!

सब मिल आओ।

पेड़ लगाएं  पौधे रोपें 

मैं गड्ढे खोदूं तुम पानी लाओ।

सरपंच जी को बुलाओ

 स्कूल की घंटी बजाओ 

लड़के लड़कियों को पुकारो

आवाज देकर नाम लेकर।


कोई नीम लगाओ कोई बरगद

कोई पीपल खेजड़ी लगाओ

तालाब के किनारे कतार में रोपें।

गौशाला की चारदीवारी

पाठशाला का परिसर

कोई स्थान बाकी न बचे

कोई जमीन खाली न बचे।


ग्राम पंचायत का परिसर 

स्वास्थ्य केंद्र की भूमि

सब में हो हरियाली।


हंसते हंसते गाते गाते

पौधे रोप डालो पौधे रोप डालो 

मां बहन बेटी करेंगी सिंचाई

पौधे बनेंगे पेड़।

कोई देगा फल तो कोई देगा छाया।


कोई दादा कोई पोता पोती

कहीं नाना तो कहीं दोयता दोयती

इनकी छाया में सुस्ताएंगे।


बच्चे बच्चियां खेलेंगे नाचेंगे
गाएंगे और धूम मचाएंगे।


गायें भैंसे रंभाएंगी छाया में और

भेड़ बकरियां मिमयाएंगी।


पेड़ों के पत्ते डालिया करेंगे प्रेम

लिपट चिपट कर इठलाते।

मंदिर की घंटियां टन्नाएंगी 

ढोल नगाड़े ढमा ढम होंगे 

मन हर्षित होगा तन हर्षित होगा।


एक पुकार होगी एक आवाज होगी

 आओ आओ सब मिल आओ 

पेड़ लगाओ पौधे रोपो।


सावन का महीना कितना सुहाना 

बरखा की रिमझिम बूंदों का 

धरती से मधुर मिलन।


सुनो,सब सुनो।

बरखा की बयार कहती 

पेड़ लगाओ पौधे रोपो 

वह ऊंचा आसमान छूता

सोनेरी बालू रेत का टिब्बा

कितना मीठा मीठा पुकार रहा

आओ आओ सब आओ।

मेरे सोनेरी रूप में 

हरियाला सिंगार करो

पेड़ लगाओ पौधे रोपो।


देखो समझो गांव की रीत 

तीज मनाती लड़कियां 

नाचती गाती गीत।

गड्ढे खोदती लड़कियां

पौधे रोपती लड़कियां

पानी देती लड़कियां।


कितना सुहावना मौसम 

और कितना अनूठा संयोग है

वो पुराने पेड़ पुकार रहे 

सुनो ध्यान से कान लगाकर

कुछ कह रहे हैं 

इशारा भी कर रहे हैं।

हमारे तनों के पास देखो 

जमीन पर निहारो। 

हमारे वंश को देखो।

छोटे-छोटे बहुत पौधे 

उगे हैं अपने आप

ये मर नहीं  जाएं।

इनको भी संभालो।

मिट्टी को साथ रखते गट्टे निकालो।

 इनके गट्टों को भी कहीं दूर लगादो।

ये बच्चे हैं हमारे, 

प्राणों से ज्यादा प्यारे 

इनको कहीं लगा दो

इनके प्राण बचालो

इनका जीवन भी होगा बलिदानी 

जब ये पेड़ बनेंगे फल देंगे खट्टे मीठे

और छाया देंगे सुहानी।

मन हरसाएगा गीत गाएगा

जब पक्षी घोंसले बनाएंगे।

उनके अंडों से निकलेंगे चूजे

चहचहाहट होगी उनकी।


मंद मंद बहती सुगंधित हवा

प्यार का संदेश देगी।

धरती बोलेगी मधुर वाणी

आओ आओ सब मिल आओ

पौधे रोपो पेड़ लगाओ।००

*****

करणी दान सिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ़ (राजस्थान)

( यह कविता 2006-7 के आसपास रची गई। आकाशवाणी केन्द्र सूरतगढ़ में रिकॉर्ड हुई और प्रसारित हुई।*

*अपडेट 5 जून 2024.

********









मंगलवार, 16 अप्रैल 2024

💐 इनके घरों से निकली आवाज हिला देगी देश की संसद..





काव्य:करणीदानसिंह राजपूत.


रोटी के लिए

नन्हे बाल बालिका का श्रम

विकास की ऊंचाईयां छूता महान भारत

कोसता हूं उनको तो देशद्रोही बता देंगे

लेकिन मैं नमन करता हूं उनको 

सदा

नमन से ही राष्ट्र भक्त होने का प्रमाण

मैं रखता हूं सदा अपने साथ।


मैं तो बना रहूंगा भक्त

मगर कच्चे घरों की बस्तियां

ध्वस्त कर देती है पक्की हवेलियां

भूखे पेट की ताकत नहीं समझते

उड़ा देती है फौलादी सत्ता !


इनके घरों से निकली आवाज 

हिला देगी देश की संसद.

तुम्हारे विकास को नमन करते

कच्ची बस्तियों में 

भूखे पेट लोग बढ रहे हैं।

***

27 जून 2023.प्रातः काल. 

अपडेट 16 अप्रैल 2024.




करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

*********








मंगलवार, 9 अप्रैल 2024

उड़ादो फूंक से अत्याचारी सरकारें: कविता- करणीदानसिंह राजपूत,




एको राखो,

चेतो राखो,

शासन प्रशासन ने,

सेके राखो,

ना माने 

सरकार तो,

टेके राखो.


ताकतवर सरकारों को

हिलाने हटाने के लिए

यह आह्वान 

यह अपील

काफी है।

यह अपील

बहुत 

शक्तिशाली है।


अपने आपको

प्रचंड बहुमत से

शक्तिशाली

मानकर

नादिरशाही 

व्यवहार करने

वाली

अत्याचारी

सरकारें

जनता की

एकता की

फूंक से

उड़

जाती हैं।


इतिहास की

पुस्तकें

भरी हैं 

ऐसे

परिवर्तनों से।


तो फिर

झुको नहीं

रूको नहीं

पलट डालो

तख्त ताज

राजगद्दी

तानाशाही की।


लोकतंत्र में 

मत का

ताकतवर

हथियार

तुम्हारे

पास है।


करो

तैयारी

अब

सुदर्शन जैसा

कालचक्र

तुम्हें ही

चलाना है।


समय

आ पहंचा है

रणभेरी

बजाने का।

*****

करणीदानसिंह राजपूत, 

उम्र 78.

पत्रकारिता 60 वर्ष.

सूरतगढ,

(राजस्थान)

94143 81356.

************
लेखन- 24 मार्च 2018.
अपडेट - 24 अक्टूबर 2020.
अपडेट 9 अप्रैल 2024.
*********



सच्च बोलने लिखने का आनन्द खुशी हर्ष- कविता- करणीदानसिंह राजपूत:

तिरंगे के नीचे 
खड़े होकर
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे के सानिध्य में 
 मैं करणीदानसिंंह राजपूत एवं
 पत्नी श्रीमती विनीता सूर्यवंशी।
सोच व संकल्प को दोहराने का स्थान-

 दिल्ली पालिका बाजार के पास पार्क में
 लगे विशाल तिरंगे के पास में।
समय
शाम 4-14, 5 नवम्बर 2016.
पुराने संकल्प व सोच को
दोहराया मन ही मन
सच्च के साथ रहने का
प्रयास करें।


सच्च लिखने बोलने के
प्रयास में गुजर गए
कई वर्ष आनन्ददायी
संघर्ष और अनुभव के।


ऐसा आनन्द
जो कम नहीं होता,
ऐसा आनन्द जो
खत्म नहीं होता।
असीम आनन्द की
खुशी और हर्ष
में डूबा

चलाता रहा
कलम कम्प्यूटर
निरंतर अब तक।


और आगे भी चलेंं

चलते रहेंं
यह सोच व विश्वास से
मन में मगन

और भी पक्का
बनता गया।
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करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
संपर्क 94143 81356.
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प्रथम- 14 नवंबर 2016.
अपडेट 9 अप्रैल 2024.


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शनिवार, 30 मार्च 2024

देश नै ताकत देवै आपणो राजस्थान अर आपणी राजस्थानी :कविता:


देश नै ताकत देवै
आपणो राजस्थान
अर आपणी राजस्थानी।
जीणै रा आधार दोनूं
राजस्थान अर राजस्थानी।
डूंगरा मांय आवाज गूंजे
धोरिया सोने सिरखा चमकै
हरा हरा खेतां री महक
जीणै रा आधार दोनूं।
देश रै कण कण मांय
राजस्थान बोलै
बठै बठै राजस्थानी
सगळा नै जोडै़।
राजस्थानी गळै मिलावै
सागै सागै कदम बढावै
देश री शान है राजस्थान
देश री ताकत है राजस्थानी।
राजस्थान मांय उपजै
नुंई नुंई उम्मीदां
अर बिंयानै सींचै
सरचै राजस्थानी।
राजस्थानी सूं
सज्योड़ौ है
साहित्य संसार,
वीर रस सगळौ
राजस्थानी भरयौ
सीनो चोड़ौ
करै राजस्थानी।
देश नै ताकत देवै
आपणो राजस्थान
अर आपणी राजस्थानी।


                                     
करणीदानसिंह राजपूत 
स्वतंत्र पत्रकार,
                                              

सूरतगढ़।
                                         

94143 81356                               
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5-12-2015.
updated 30-3-2017.
Updated 15 फरवरी 2021.
अपडेट 30 मार्च 2024.





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गुरुवार, 25 जनवरी 2024

*यहां फांसी चूमे सेनानी चप्पे-चप्पे में बलिदानी* कविता: करणीदानसिंह राजपूत*



यह देश हमारा भारत
दुनिया में सबसे न्यारा
यहां फांसी चूमे सेनानी
चप्पे-चप्पे में बलिदानी।

आओ फूलों से महकाएं
गीत वीरों के हम गायें
बलिदानों की गाथा
कभी भूले न बिसराएं।

यह देश हमारा भारत..

स्वर्ग सिरमौर  कश्मीर हमारा
हिम शिखरों  बीच में  छाया
गंगा यमुना का निर्मल जल
अमृत बन कर सबको भाया।

आजादी का जश्न मनाएं
गीत तिरंगे के हम गाएं
वीर जनों की कुर्बानी
सब गाएं और दोहराएं।

फूलों से महकाएं....

आधी शती का विकास हमारा
कुछ नया करने की ठानें
इलाका रहे न कोई खाली
सब और करें हरियाली।

आकाश ऊंचाइयां छूते रहें
मन साफ रहे घर साफ रहे
भाई भाई का प्यार रहे
जन जन में प्रीत संचार रहे।

यह देश हमारा भारत...

गांवों की चौपालों पर
नगरों के चौराहों पर
देशभक्ति का भान रहे
तिरंगे की शान रहे।

सीमा पर सीना ताने सैनिक
सुरक्षा का भार लिए
आने नहीं देंगे संकटकाल
खतरे में बन जाएं खुद हथियार।

अग्नि नाग और पृथ्वी
प्रक्षेपास्त्रों में नए निराले
अर्जुन टैंक की है दूर मार
दुश्मन की देते आंख निकाल।


भाभा का परमाणु ज्ञान 
अब्दुल कलाम का शस्त्र विज्ञान
भारत को दी नई रोशनी
विश्व में मिला ऊंचा स्थान।

यह देश हमारा..

गांधी चरखा यहां चलता
कल कारखानों में माल है बनता
नित नित नए-नए उत्पादन
विश्व में नाम कमाते जाते।

पंचशील की नीति हमारी
सत्यमेव जयते का नारा
अहिंसा का संदेश हमारा
दुनिया में है भारत न्यारा।

फूलों से महकाएं..

सूर्य चंद्र और असंख्य तारे
मीठी सुगंध रंगीन नजारे
रंग रंगीली धरती प्यारी
जगह जगह की छटा निराली।

छह ऋतुओं का देश हमारा
मीठे झरने मधुर समीरा
वन जंगल में मोर नाचते
राजस्थान में सोनचिड़ी गाती।

यह देश हमारा...

तेतीस कोटि हैं देवी देवता
दसो दिशाओं में पूजे जाते
वाहन इनके जीव जंतु हैं
सब लोको में जाते आते।

रामायण गीता संदेश सुनाते
कर्म गति का उपदेश बताते
घर में है पूजे जाते
चहुं ओर कीर्ति फैलाते।

फूलों से महकाएं..
भाई-बहन का स्नेह अनोखा
रक्षाबंधन का त्यौहार मनोरम
मीठे खीर बताशे मीठे
स्नेह बंधन में मिश्री घोले।

नाना भेष आंखों को भाए
नाना बोलियां कर्ण सुहाए
उच्च संस्कृति ऊंचे आदर्श
चरण स्पर्श और अभिवादन।

यह देश हमारा भारत...

कबीर रसखान नानक हुए यहां
मीरा ने है कृष्ण नाम पुकारा
प्रताप शिवा से वीर यहां पर
पन्ना को है सब ने गाया।

पद्मिनी के जौहर की याद
रानी लक्ष्मी की कुर्बानी
आल्हा उदल हुए यहां पर
कैसे भुलाए उनकी कुर्बानी।

फूलों से महकाएं...
भगत सिंह सुखदेव राजगुरु
फांसी के फंदे हंस हंस चूमे
आजाद की सिंह दहाड़ से
अंग्रेजों के दिल भी कांपे।

नेता सुभाष का जय हिंद नारा
लाल बहादुर ने जय किसान पुकारा
राम मोहन की चेतन आवाज
विधवाओं की हो सार संभाल।

यह देश हमारा भारत...

बुध का शीतल प्रकाश
महावीर की मीठी वाणी
जीव जंतु से करो प्यार
धर्म नीति संदेश सुनाती।

मंदिरों में होती है आरती
मस्जिदों में होती है कुरान
चर्चों में बंटता है यीशु संदेश
गुरुद्वारों में गूंजे है गुरुवाणी।

फूलों से महकाएं...

यह देश हमारा भारत
दुनिया में सबसे न्यारा
यहां फांसी चूमे सेनानी
चप्पे-चप्पे बलिदानी।

ये देश हमारा भारत...

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भारत की स्वतंत्रता 15 अगस्त 1947 को हुई। स्वतंत्रता की अर्धशती 1997-98 में मनाई गई तब यह कविता रची थी। आकाशवाणी के सूरतगढ़ केन्द्र से इसका प्रसारण हुआ। इसकी अवधि पंक्तियों के पुन: दोहराए बिना ही 14 मिनट 20 सैकंड रिकॉर्ड हुई। एक चंक दस मिनट में आठ मिनट देते हैं और दो मिनट उदघोषणा आदि में लगते हैं। इस कविता के लिए विशेष अवधि 15 मिनट दी गई थी। आकाशवाणी के विशेष सहयोग से यह प्रसारित हुई।*
अपडेट.14 अगस्त 2023.
अपडेट.25 अगस्त 2024.


करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ़.
94143 81356.
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