करणी प्रेस इंडिया

शनिवार, 29 अगस्त 2026

कासनिया ने की थी बगावत. कासनिया की राह पर भाजपा कार्यकर्ता.कांग्रेस में भी बगावत.

  

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 29 अगस्त 2026.

रामप्रताप कासनिया को सन् 2003 के विधानसभा चुनाव में पीलीबंगा से भाजपा की टिकट नही मिली तब उन्होंने भाजपा से विद्रोह कर सफेद झंडे से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उस समय भाजपा की टिकट पीलीबंगा से गंगाजल मील को मिली थी। कासनिया ने कहा था कि मील को टिकट गलत दी गई है असली हकदार मैं हूं और सामने चुनाव लड़ूंगा। उस चुनाव में कासनिया जीते थे और भाजपा से अलग नहीं हुए थे।

आज ऐसी स्थिति सूरतगढ़ नगरपालिका चुनाव में है।भाजपा के अनेक कार्यकर्ता पूछ नहीं होने, सामान्य वार्ड में अन्य वर्गों को टिकट देने व बाहरी उम्मीदवार को टिकट देने से नाराज होकर कासनिया की सीख पर निर्दलीय मार्ग और

सफेद झंडा उठाने को एकजुट हो रहे हैं।

जो कार्यकर्ता हक छिन जाने से क्रोधित हैं वे भाजपा के घोषित किए जा रहे नाम की भनक पड़ते ही सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में एकजुट हो रहे हैं। वे भाजपा की टिकट को वार्ड से हराकर लौटा देंगे। आगे उनकी मर्जी रहेगी कि वे बोर्ड बनाने में भाजपा के साथ रहेंगे या कोई नया ग्रुप बनाकर बोर्ड बनाने को आगे बढेंगे। ऐसी स्थिति बदली परिस्थिति में भाजपा को चेयरमैन पद जाने तक का खतरा हो सकता है। अभी तो भाजपा नेताओं को सब असंभव लगता है। लेकिन राजनीति में बहुत कुछ संभव है।

* सन् 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले स्पष्ट हो गया था कि सूरतगढ़ के सीटिंग विधायक रामप्रताप कासनिया का जबरदस्त विरोध है तथा हर हालत में हार होगी। इसके बावजूद कासनिया को भाजपा ने टिकट दिया। कासनिया को नाराज कार्यकर्ताओं ने जनता से मिलकर धूल चटा दी और गुस्से में कांग्रेस को साथ देकर डुंगरराम गेदर को विधायक चुन लिया। भाजपा के लिए और कासनिया के लिए वह बहुत बड़ी सीख थी। अब कासनिया भाजपा की टिकट निर्धारित करने वालों में हैं और उनकी तय की हुई टिकटें हराकर वापस करने को भाजपा कार्यकर्ता एकजुट होकर निर्दलीय रूप से किसी एक को साथ देकर जिताएंगे। 

* जिन नामों का भारी विरोध हो रहा है उनमें कृष्ण छींपा, श्रीमती संतोष गिरी, आरती शर्मा, रजनी मोदी के नाम प्रमुख हैं। अभी और नाम भी हैं। शनिवार 29 अगस्त को विभिन्न स्थानों पर एकजुटता के प्रयास हो रहे थे जो रविवार 30 अगस्त को भी जारी रहेंगे।

👌कासनिया की सीख और अब उसी तरीके से यह चोट कासनिया को कैसे रहेगी। जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह नगर मंडल अध्यक्ष गौरव बलाना पूर्व अध्यक्ष नगर मंडल सुरेश मिश्रा के लिए भी यह चोट कैसी रहेगी जब भाजपा प्रत्याशी हारेगा और भाजपा से विद्रोही बागी निर्दलीय होकर भी जीत जाएगा। 

👌 ऐसे ही हालात कांग्रेस खेमे में भाजपा से भी बढ कर हो रहे हैं। कांग्रेस में भी विधायक डुंगरराम गेदर को सबक सिखलाने के लिए नाराज कार्यकर्ता निर्दलीय का साथ देंगे।

*  अनेक भाजपा व कांग्रेस के कार्यकर्ता पार्टी का और एक निर्दलीय का फार्म भर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ जाए तो निर्दलीय चुनाव लड़ लें।

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निर्वाचन अधिकारी को दी जाने वाली सूची अधिकृत सूची होगी. प्रत्याशियों को मौखिक फोनिक तैयारी करो खेल बन जाएगा..

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

(29 अगस्त 2026)

राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में राजनैतिक पार्टियों ने मौखिक, फोनिक कहा कि तुम्हारी टिकट पक्की है, तैयारी करो के बावजूद नाम कटना,बदलाव होना खेला होगा। ये कथन पूर्ण पक्के नहीं। निर्वाचन अधिकारी को दी जाने वाली सूची अधिकृत सूची होगी। 

* पार्टी ने मौखिक या फोनिक कह दिया कि तुम्हारा नाम है तैयारी करो। बाद में पता चला कि उक्त जीत नहीं सकता, विरोध से परिणाम परिवर्तन होगा पार्टी की शतप्रतिशत हार होगी तब अचानक नाम बदल जाने का ओप्शन पार्टी के पास होगा। पार्टी नया नाम तय कर लेगी और वह निर्वाचन अधिकारी को दी जाने वाली सूची में जोड़ देगी। कार्यकर्ता को तो मौखिक और फोन पर कहा था,और नाम बदल जाने पर वह किसके सामने कहेगा कि इस तरह से उसके साथ धोखा सा हो गया है। पार्टी की तरफ से कहा जाएगा तुम्हारा जबरदस्त विरोध है, सीट नहीं निकाल सकोगे तब वह कैसे प्रमाणित करेगा कि सीट निकाल देगा।

* इस प्रकार से बदलाव होने की आशंका प्रबल है। भाजपा और कांग्रेस ने जिन तरीकों से प्रत्याशियों के नाम तय किए हैं उन पर जबरदस्त विरोध हो रहे हैं। नाम बदले जा सकते हैं, यह सभी के ध्यान में होना चाहिए।

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भाजपा में नाराजगी से तूफान.23 प्लस प्लान से हालात 15 प्लस पर खिसका.क्या होगा?

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 29 अगस्त 2026.

भाजपा के प्रत्याशियों के नामों की भनक से उपजे हालात बिगड़ कर रक्षाबंधन त्यौहार के दिन व्यस्तता में विरोध के स्वर अब वार्डों में फैले हैं उनसे बोर्ड बनाने का दावा कर रही भाजपा की स्थिति डाउन होने की चर्चा से कुछ वार्डों में निर्दलीय का माहौल बनने लगा है। सामान्य वार्डों में ओबीसी,सामान्य वार्ड में बाहरी,फील्ड वर्कर के बजाय अन्य को टिकट फाईनल के होने की भनक से भाजपा में फूट का उफान है। यह टिकट वितरकों को दिखाई नहीं देता। 

मेरा अभी दो दिन पहले रिपोर्ट थी कि भाजपा 23 प्लस की नीति से चुनाव लड़ने की तैयारी पर है। इसके बाद भाजपा के कदावर नेता ने चर्चा में कहा कि 23 प्लस से और आगे भाजपा 30 प्लस की योजना के अनुसार चुनाव लड़ने पर है और आज जब विभिन्न वार्डों में विरोध के स्वर उठ रहे हैं और भाजपा की ताकत कमजोर हो रही है तब खिसकती हालत में भाजपा अब 15 प्लस पर है। बहुत बार सत्ता का नशा और अकड़ काम नहीं आती और यह स्थिति दो चार दिन में भाजपा नेताओं और विद्रोह वाले वार्डों में थोपे जाने वाले प्रत्याशियों को असली वोट का आईना दिखा देगी।

* वार्ड नं 30 सामान्य घोषणा के तुरंत बाद सुशील तावणिया ने भाजपा टिकट की दावेदारी और चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। वहां ओबीसी वर्ग से कृष्ण छींपा ने भी भाजपा टिकट की दावेदारी और चुनाव लड़ना है कि घोषणा कर दी। कृष्ण छींपा का परिवार पिता सत्यनारायण व माता  ही काफी सालों से चुनाव लड़ते रहे हैं। अब टिकट कृष्ण छींपा को टिकट दिए जाने की चर्चा हो रही है। इसके साथ ही विरोध भी शुरू हो गया है कि सामान्य वर्ग फिर कब चुनाव लड़ेगा,जब नंबर आए हुए भी टिकट नहीं मिले। सुशील कुमार तावणियां ब्राह्मण जाति से हैं और भाजपा के प्रसिद्ध कार्यकर्ता हैं। विरोध शुरू होने से कृष्ण छींपा की जीत और खुशियां प्रभावित होंगी।

* वार्ड नं 45 सामान्य वार्ड है जहां पूर्व पार्षद श्रीमती संतोष गिरी को फिर से भाजपा  टिकट दिए जाने की चर्चा से नाराजगी शुरू है। संतोष गिरी ओबीसी वर्ग की है। इस वार्ड में सामान्य वर्ग के कई लोग चुनाव मैदान में हैं।

* वार्ड नं 19 सामान्य है। भाजपा यहां श्रीमती रजनी मोदी को चुनाव में उतारने की तैयारी में है। जबकि इस वार्ड के क्षेत्र में रिंकु सिद्दीकी परिवार की पकड़ मजबूत है। सिद्दीकी परिवार विकास कार्यों का  ताकतवर नेता है जबकि रजनी मोदी फील्ड में किसी भी विकास से जुड़ी हुई नहीं है। यहां रजनी मोदी को चुनाव में उतार दिया जाता है तो कांग्रेस की जीत की संभावना बढ जाती है। यहां कांग्रेस हरीश दाधीच निवृत हुए पार्षद को चुनाव में उतार रही है। हरीशदाधीच पिछले चुनाव में भाजपा से थे और अब भाजपा नेताओं से नाराजगी की वजह से कांग्रेस में चले गये।

* वार्ड नं 40 यहां भाजपा के पुराने सरावगी परिवार से सुमन पत्नी सुशील कुमार सरावगी भाजपा की टिकट की प्रबल दावेदार है लेकिन यहां दूसरे वार्ड की निवासी पूर्व पालिका अध्यक्ष आरतीशर्मा को चुनाव में उतारने की संभावना से विद्रोह पनप रहा है। आरतीशर्मा का चेयरमैन काल 1994 से 1999 तक रहा था। आरती शर्मा यहां बाहरी होने के कारण चर्चाओं में तीसरे क्रम पर मानी जा रही है। लोगों का आकलन है कि करीब एक सौ वोटों से पीछे रहेगी। आरतीशर्मा का वार्ड इस बार ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। आरतीशर्मा खुद को फिर से चेयरमैन का दावेदार मानती हुई सामान्य वार्ड नं 40 में घुस गई। सुमन सरावगी के समर्थक ताल ठोक रहे हैं कि यहां नियम के विपरीत जाकर भाजपा बाहरी आरतीशर्मा को टिकट देती है तो वे सरावगी परिवार को पीछे नहीं हटने देंगे और सुमन को चुनाव मैदान में निर्दलीय लड़ाएंगे। कुछ भी हो यहां  से चुनाव लड़ना आरतीशर्मा को हानिकारक रहेगा।  चेयरमैन पद के लोभ में वर्तमान स्थिति को आलोचना का शिकार बना देगी। सबसे विपदा उन भाजपा नेताओं पर आएगी जो आरतीशर्मा का चुनाव दूसरे वार्ड से समर्थन करने वालों में हैं। जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह, नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना और नगरमंडल के पूर्व अध्यक्ष सुरेश मिश्रा का क्या होगा? 

* वार्ड नं 27 से भाजपा नेता विजय गोयल अपनी पत्नी सरोज गोयल को भावी चेयरमैन के पद के लिए पार्षद का चुनाव लड़ा रहे हैं। यहां समाजसेवी पूर्व पार्षद चरणजीत सिंह टंडन चन्नी अपनी पत्नी सुनीता टंडन को चुनाव लड़ा रहे हैं जो भाजपा पर बहुत भारी हैं।

* वार्ड नं 43 से श्रीमती वीना पत्नी प्रवीण छाबड़ा भावी चेयरमैन पद की आशा में पार्षद का चुनाव भाजपा टिकट से लड़ रही है जिनकी टक्कर कांग्रेस प्रत्याशी से है। कांग्रेस यहां भाजपा से कुछ अधिक ताकतवर है और भाजपा के पसीने निकालने वाले चुनाव है।

* भाजपा में विष्णु तरड़ अपनी पत्नी दीपा तरड़ को भावी चेयरमैन के चुनाव के लिए पार्षद का चुनाव लड़ा रहे हैं। चेयरमैन पद के लिए भाजपा किसको टिकट देगी यह अभी कुछ कहा नहीं जा सकता। 

* वार्ड नं 41 की हालत।

भाजपा में टिकटों को लेकर और वार्डों में भी विरोध अभी चल रहा है वह संकट पैदा करने वाला है।आरोप है कि पुराने कार्यकर्ता परिवारों को जानबूझकर पीछे धकेला जा रहा है। वार्ड नं 41 के पुराने परिवारों में है डिम्मी सचदेवा परिवार। सचदेवा परिवार अपनी बेटी के लिए भाजपा की टिकट मांग रहे हैं और वहां किसी और को टिकट थमाने की तैयारी चल रही है। ०0०






गुरुवार, 27 अगस्त 2026

भाजपा के नगर निकाय चुनाव के नियम और असली नीति कालिमा भरी. पार्टी में नाराजगी.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने पार्षद चुनाव आवेदन में नियम और असलियत में भेद होने के कारण आवेदन प्रक्रिया के बीच कार्यकर्ता तथा समर्थकों में असंतोष फैल रहा है। इस असंतोष का असर भाजपा के पक्ष में मतदान पर पड़ सकता है। असंतुष्ट कार्यकर्ता व समर्थक पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं करके कांग्रेस प्रत्याशी या शक्तिशाली निर्दलीय के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। इससे भाजपा प्रत्याशी को मत कम मिलने से जीत खटाई में जा सकती है। 

* आवेदन प्रपत्र में वार्ड में निवास और वोट होना आवश्यक बताया गया। ऐसी स्थिति में अन्य वार्ड के निवासी से आवेदन प्रपत्र मना होने चाहिए थे। हां,वार्ड में कोई आवेदक नहीं हो तो बाहरी वार्ड वासी को टिकट देने के लिए ऐसे आवेदन लेने में कोई प्रतिबंध नहीं हो सकता। लेकिन वार्ड में आवेदक हो तब बाहरी पर विचार की नीति शून्य रखनी चाहिए थी। वार्ड पैनल में वार्ड वासी और बाहरी दोनों को ही शामिल कर लिया गया।

अब बाहरी आवेदक को पार्टी की टिकट दी जाती है तो विद्रोह होने की प्रबल आशंका रहेगी। बाहरी को वोट नहीं मिलेंगे, कम मिलेंगे तो हार निश्चित होगी। 

* कुछ नेताओं के विचार हैं कि बाहरी बड़े नेता की इससे हेकड़ी यानि अकड़ निकल जाएगी जब वह हारेगा। वह हार के बाद अच्छी तरह से भविष्य के लिए भी टिक जाएगा। इस तरह से पार्टी में बड़े कार्यकर्ता को हरा कर घर बैठा देने की गुप्त नीति भी चलती है।

* सामान्य वार्ड में आरक्षित वर्ग के कार्यकर्ता को टिकट देने के लिए पैनल में नाम लिखा जाना भी खतरनाक है। सामान्य वर्ग की शिकायत है कि अब हमारा नंबर है और बाद में न जाने कितने वर्ष और बीत जाएं। सामान्य वर्ग में लड़ने को तो कोई भी,आरक्षित वर्ग का व्यक्ति भी लड़ सकता है। लेकिन सामान्य वर्ग के कार्यकर्ता की पीड़ा को भी समझा जाना चाहिए था। ऐसे में सामान्य वार्ड में भाजपा द्वारा आरक्षित वर्ग से आवेदन प्रपत्र लिया ही नहीं जाना चाहिए था। भाजपा की इस तरह की नीति से आम कार्यकर्ता नाराज हो रहा है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढती है तब तो जीत का खेल हार में बदल सकता है। एक सच्च यह है कि भाजपा में छोटे कार्यकर्ता की न सुनवाई होती है न कोई पूछ होती है। ऐसी स्थिति में गुस्से से वोट  किसी दूसरी पार्टी के प्रत्याशी की ओर खिसक जाता है। 27 अगस्त 2026.






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बुधवार, 26 अगस्त 2026

भाजपा बनाएगी नगरपालिका बोर्ड. सूरतगढ़ में 23 प्लस नीति. लेटेस्ट.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 26 अगस्त 2026.भाजपा की आज प्रातः शुरू हुई बैठकें सूरतगढ़ और जिला मुख्यालय पर सूरतगढ़ में पूर्ण बहुमत 23 + से नगरपालिका बोर्ड बनाने की रणनीति पर हुई। पैंतालीस वार्डों में बोर्ड बनाने के लिए 23 वार्डों में जीत चाहिए लेकिन भाजपा यहां कांग्रेस की कमजोरी के मध्यनजर 23 से भी अधिक वार्डों में जीत की नीति पर चुनावी संघर्ष हर वार्ड में लड़ने को है। जिला प्रभारी दशरथ सिंह शेखावत और चुनाव प्रभारी जसवंत सिंह ईंदा,निवृत हुए नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा और भाजपा जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह की संपूर्ण टीम लगी है। दशरथसिंह शेखावत को अनेक चुनावों का अनुभव है।

* भाजपा बोर्ड बनाने की ओर होने का मतलब है कि कांग्रेस कमजोर है। कांग्रेस के नेता हार से डर कर चुनाव में खड़े होने से डर रहे हैं। ऐसे भयभीत कांग्रेसियों के घेरे में विधायक डुंगरराम गेदर जीत से बहुत दूर हैं। कुछ वार्डों में कांग्रेस की टिकट लेने वाले नहीं है। वहां व्यक्ति ढूंढ ढूंढ कर टिकट दी जाने की कसरत हो रही है। राठी स्कूल के पीछे का वार्ड इस बार ओबीसी रिजर्व हो जाने के बाद भाजपा मजबूत है। यहां भाजपा की टिकट प्रेमसिंह खारवाल (राठौड़) ने मांगी हुई है। प्रेमसिंह की स्थिति बहुत मजबूत है। यह परिवार करीब 40 सालों से भी अधिक समय से भाजपा परिवार का वरिष्ठ परिवार है। यहां कांग्रेस की टिकट लेने से लोग खिसक गये। अब एक व्यक्ति को टिकट लेने के लिए मनाया गया है।

* धर्मदास सिंधी पहले की पावर में नहीं हैं। 

* कांग्रेस में गंगाजल मील ताकतवर थे जिन्होंने 2009 के बाद 2019 में कांग्रेस के बोर्ड बना दिए थे। (हालांकि 2019 में चेयरमैन बने ओमप्रकाश कालवा ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली)। कांग्रेस के पास अब गंगाजल मील के स्वर्ग वास के बाद उतना पावरफुल चेहरा नहीं जो जोड़तोड़ बिठा ले। भाजपा के पास रामप्रताप कासनिया पावरफुल है जो आवश्यकता पड़ने पर निर्दलीय  पार्षदों को भाजपा में लेजा सकता है। ऐसी ताकत कांग्रेस के विधायक डुंगरराम गेदर में नहीं कि किसी निर्दलीय पार्षद को कांग्रेस के खेमे में ले जाए। 



* चेयरमैन कुर्सी महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा के पास इस पद के लिए कई चेहरे हैं लेकिन कांग्रेस के पास अभी तक कोई चेहरा सामने नहीं आया है। भाजपा की ताकत इस चुनाव में प्रतिदिन कुछ बढ रही है। ०0०








मंगलवार, 25 अगस्त 2026

सूरतगढ़: भाजपा में टिकट विद्रोह होने की गर्माहट.पार्टी को बड़े नुकसान की आशंका.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 25 अगस्त 2026.

सामान्य वार्डों में आरक्षित वर्गों ओबीसी व एसी के टिकटार्थियों के फार्म भरे जाने,और दूसरे वार्ड में फार्म भरे जाने के बाद से भाजपा के सामान्य वर्ग के टिकटार्थियों में तथा असली वार्डवासी टिकटार्थियों मेंअग्रिम रोष की चर्चा है। भाजपा में टिकट वितरण में राजनैतिक सूझबूझ हुई तो तय नियमों के अनुसार ही सबकुछ होगा। बाहरी टिकटार्थी को टिकट नहीं दी जाएगी। 

भाजपा में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड से चुनाव की तैयारी से यह असंतोष अधिक हो रहा है। आरती शर्मा का वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। आरतीशर्मा पड़ोसी वार्ड से चुनाव की तैयारी में लग गई जहां वार्ड वासी सरावगी परिवार की महिला भाजपा टिकट की प्रबल दावेदार है। सरावगी परिवार पुराना भाजपा कार्यकर्ता परिवार है और पूर्ण भाजपा भक्त है।

भाजपा के जिला प्रभारी दशरथ सिंह, चुनाव प्रभारी जसवंतसिंह ईंदा और स्थानीय शासन संचालक पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया व समिति में जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान चुनाव में कहीं भी विघ्न नहीं चाहेंगे तो आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड से टिकट नहीं देंगे। आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड में टिकट दी जाने की गलती की जाती है तो वार्ड वासी अब नहीं तो फिर बाद में कब चुनाव लड़ेंगे। कभी नंबर आने की उम्मीद ही नहीं होगी।

आरतीशर्मा तो चेयरमैन पद की लालसा में हार की कल्पना नहीं कर रही मगर समझदार नेताओं को इस राजनैतिक विवाद को फैलने से पहले प्रथम कदम पर ही रोक देना चाहिए। 

* मान लें कि आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड में टिकट देने की गलती कर दी जाती है और वहां असंतोष व विद्रोह हो जाता है आरतीशर्मा जीत नहीं पाई तब क्या होगा? आरतीशर्मा की और टिकट देने वालों की हालत क्या होगी? पार्टी के पुराने कार्यकर्ता छिन्न भिन्न होंगे। सीधे रूप में पार्टी को नुकसान होगा जो वार्ड में संकेत मिल रहे हैं। आरती शर्मा दूसरे वार्ड में जीत की स्थिति में नजर नहीं आ रही। 

* आरतीशर्मा पूर्व में सन् 1994 से 1999 तक चेयरमैन रही। वह काल नये लोगों को नेताओं को मालुम नहीं मगर चुनाव में उसकी चर्चा होने लगी है। वह संपूर्ण  काल विवादों में आरोपों में घिरा रहा। सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति करने में आरोप लगा। आंदोलन हुआ। उस काल में आरतीशर्मा ने एक और बहुत बड़ी गलती की जो असामान्य है। भाजपा संगठन को कोई गलती टिकट में नियम बना कर नहीं करनी चाहिए जब असंतोष का मालुम पड़ रहा है। 

* वार्ड नं 30 सामान्य है और यह स्थिति सालों बाद आई है। पहले ओबीसी वर्ग के लोग ही चुनाव लड़ते रहे। अब सामान्य वर्ग के कार्यकर्ता टिकट मांग रहे हैं और ओबीसी भी। ओबीसी को वहां टिकट दी जाती है तो असंतोष फैलेगा।

* सूर्योदय नगरी यानि लाईन पार के वार्डों में शहर की तरफ के लोग टिकटार्थी क्यों बन रहे हैं जबकि उन्होंने कभी एक दिन भी वहां काम नहीं किया।

* भाजपा में टिकटों के आवेदनों व तैयारियों से ही असंतोष झलकने लगा है और टिकटों में सबकुछ ठीक हो जाएगा की तर्ज पर गड़बड़ हुई तो भाजपा नेताओं की गलतियों से बड़ा नुकसान होगा। 

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सोमवार, 24 अगस्त 2026

चुनावों में गर्म कासनिया का अवैध होटल निर्माण.कांग्रेस नेताओं में नहीं हिम्मत!

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 24 अगस्त 2026.

नगरपालिका चुनावों में कासनिया के अवैध बनाए जा रहे होटल और कांग्रेस नेताओं में निर्माण रुकवाने की हिम्मत नहीं होने की चर्चा गर्म है। कांग्रेस के सूरतगढ़ विधायक डुंगरराम गेदर,ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया व किसी नेता में हिम्मत नहीं होने की चर्चा नगरपालिका चुनाव में होने से आम जनता में यह संदेश फैल रहा है कि कांग्रेस कमजोर है। 

* पूजा शर्मा ईओ थी तब सवाल किया गया था कि उक्त होटल अवैध बनाया जा रहा है। सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि नहीं स्वीकृति है, दो मंजिल की। साथ में यह भी बताया कि होटल संदीपकासनिया बनवा रहा है। ईओ पूजा शर्मा को कहा गया कि होटल दो मंजिल से अधिक ऊंचा बन रहा है और अंडरग्राउंड निर्माण भी हुआ है, तब उन्होंने कहा कि अंडरग्राउंड की परमिशन तो नहीं है, वह बीकानेर उपनिदेशक कार्यालय से मिलती है।

👍 इस होटल के अवैध निर्माण की शिकायते व समाचार मीडिया में आने पर भी नगरपालिका ईओ गणपतराम द्वारा निर्माण बंद करवा कर होटल सीज नहीं किया गया है।

👍 नगरपालिका चुनाव की गहमागहमी और हर ओर अवैध होटल निर्माण का आम लोगों को मालुम होने के बावजूद विधायक डुंगरराम गेदर किसी कमजोरी के कारण उच्च अधिकारियों, जिला प्रशासन को शिकायत नहीं कर रहे। आम लोगों का मानना है कि विधायक शिकायत करे तो ईओ और प्रशासक को तुरंत ताले लगाने पड़ेंगे।०0०


कांग्रेस में चेयरमैन चेहरों में कौन महिला होगी? एक भी महिला का बैठक के मंच पर न होना कमजोरी.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 24 अगस्त 2026.

नगरपालिका सूरतगढ़ में इस बार चेयरमैन पद महिला के लिए आरक्षित हुआ है और ऐसी प्रमाणिक स्थिति में कांग्रेस की रविवार 23 अगस्त की बैठक के मंच पर एक भी महिला नेता कार्यकर्ता का न होना कमजोरी का संकेत है। कांग्रेस के सूरतगढ़ ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया के वाट्सएप से मीडिया को मिले समाचार में मंच की फोटो में पुरूषों की भीड़ है और महिला एक भी नहीं। इस हालात पर मालुम हुआ कि एक महिला कुछ मिनटों के लिए मंच पर जरूर रही। कांग्रेस के पास चेयरमैन पद के लिए चेहरे होते तो वे मंच पर जरूर होते व संबोधन भी होता। 

* विधायक डुंगरराम गेदर का बैठक में भाषण था लेकिन उसमें भी कोई ईशारा नहीं था। हो सकता है कि गेदर ने किसी परिवार को चेयरमैन पद के लिए किसी नेता को कह रखा हो। 

* सूत्रानुसार वलीमोहम्मदपरिवार  व पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष मोहम्मद इकबाल कुरैशी परिवारों में से कोई महिला अध्यक्ष पद की प्रत्याशी हो सकती है। वलीमोहम्मद के पुराने निवास स्थान के वार्ड में वलीमोहम्मद की पत्नी की चर्चा जोरों पर है। सूत्रानुसार जो चर्चा चल रही है उसमें दम है। हमारी इस बाबत 24 अगस्त को टेलिफोनिक बात भी हुई है।

 * आरक्षण से पहले दो वरिष्ठ पत्रकारों से लम्बी बातचीत में वलीमोहम्मद ने कहा था कि मौका मिला तो शहर की सुनियोजित कायापलट कर चमन सुंदर विकसित रूप दिया जाएगा। 

* अभी विधायक डुंगरराम गेदर की केवल हां ही होनी है। यदि कोई अन्य परिवार भी है तो 25 अगस्त को होने वाली कांग्रेस की बैठक में कुछ साफ होगा कि कौन है कांग्रेस का चेहरा?

* कांग्रेस में गुटबाजी है या भूल होती है कि महत्वपूर्ण बैठकों की न्यूज विज्ञप्ति में सीनीयर लीडर बलराम वर्मा का नाम गायब होता है। 23 अगस्त रविवार की बैठक में बलराम वर्मा और ओबीसी के जिलाध्यक्ष राजाराम गोदारा मौजूद थे मगर समाचार में नाम नहीं थे। करणीप्रेस में फोटो देखकर नाम जोड़े गये।०0०




रविवार, 23 अगस्त 2026

सूरतगढ़:जनता के आशीर्वाद से कांग्रेस बोर्ड बनाएगी-डुंगरराम गेदर की घोषणा.

* करणी प्रेस इंडिया *

सूरतगढ़ 23 अगस्त 2026

नगरपालिका चुनाव को लेकर विधायक डूंगर राम गेदर की अध्यक्षता में महाराजा पैलेस सूरतगढ़ में कांग्रेस की बैठक आयोजित हुई। बैठक में आगामी नगरपालिका चुनाव को लेकर कांग्रेस की चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई।

विधायक ने कहा कि सूरतगढ़ शहर के विकास के लिए ईमानदार, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त नगरपालिका बोर्ड जरूरी है। जनता के आशीर्वाद से कांग्रेस बोर्ड बनाएगी।

विधायक डूंगर राम गेदर ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार आमजन को बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाने में विफल रही है। स्कूलों के हालात खराब हैं तथा शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का भी बुरा हाल है।





पूर्व विधायक राजेंद्र भादू ने कहा कि सूरतगढ़ के विकास के लिए मजबूत और जवाबदेह नगरपालिका बोर्ड की आवश्यकता है। कांग्रेस कार्यकर्ता पूरी एकजुटता के साथ जनता के बीच जाकर पार्टी की नीतियों और विकास के विजन को पहुंचाएं तथा शहरहित में कांग्रेस का बोर्ड बनाने के लिए मेहनत करें।


ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया ने कहा कि इस बार शहर के विकास के लिए कांग्रेस का बोर्ड बनाया जाएगा। चुनाव में हुई देरी के कारण शहर के कई विकास कार्य ठप पड़े थे, जिन्हें कांग्रेस का बोर्ड बनने के बाद ईमानदारी और प्राथमिकता के साथ पूरा करवाया जाएगा।

बैठक में कांग्रेस पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर नगरपालिका में कांग्रेस का बोर्ड बनाने का संकल्प लिया।

बैठक में पूर्व चेयरमैन मोहम्मद इकबाल कुरैशी ,राजियासर ब्लॉक अध्यक्ष गिरधारी स्वामी, संभाग प्रतिनिधि अमित कड़वासरा, पूर्व पार्षद हरीश सेखसरिया,शहर अध्यक्ष जेपी गहलोत एवं गगन विंडिंग ने विचार रखे।

इस अवसर पर वरिष्ठ नेता बलराम वर्मा,पूर्व पार्षद राजाराम गोदारा,मनदीप सिंह, बलवंत पंवार, बनवारी थोरी, योगेश मेघवाल, कृष्ण गोदारा, शिक्षा विद अनिल धानुका, एडवोकेट महफ़ूज़ आलम, राधा सोनी, पालाराम सैन एवं साहबराम छींपा सहित कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।०0





पूर्वराज्यमंत्री कासनिया टीम, कांग्रेस विधायक गेदर टीम और निर्दलीयों की कड़ी टक्कर.खुली रिपोर्ट.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 23 अगस्त 2026.

 पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया नगरपालिका सूरतगढ़ में भाजपा का बोर्ड बनाएंगे और यह उनकी अबकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी बन गई है। नगरपालिका चेयरमैन पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद अनेक लोग चुनाव मैदान से कन्नी काट निकल गये कुछ भी हो किसी का भी बोर्ड बने कोई भी चेयरमैन बने उनको कुछ भी लेनादेना नहीं। लेकिन शासकीय संचालन यहां कासनिया के पास है इसलिए भाजपा नगरपालिका बोर्ड बना कर भजनलाल शर्मा की भाजपा सरकार को सौंपना है। इसके तुरंत काबाद पंचायत समिति में भी प्रधान भाजपा का बनाने की भी जिम्मेदारी कासनिया की है। नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड बनने के बाद इस हवा के प्रभाव से पंचायतों में जीत कर प्रधान बनाने में उत्साह रहेगा। भाजपा की संगठानत्मक योजनाएं भी शुरू हो चुकी है और चुनाव प्रभारी जसवंत सिंह ईंदा,जिला प्रभारी दशरथसिंह व अन्य  की देखरेख और नेतृत्व में बैठकें और कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं। 

भाजपा और उसके राजनैतिक तथा विभिन्न क्षेत्रों में फैले अग्रिम संगठन भी सक्रिय हो चुके हैं। सभी जानते हैं कि भाजपा के विभिन्न संगठनों की संख्या और शक्ति कांग्रेस संगठनों से अधिक प्रभावी है और अधिक शक्तिशाली भी है।

* नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना से जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान,पूर्व विधायक अशोक नागपाल व नगर के पदाधिकारी तथा जिला कार्यकारिणी के स्थानीय पदाधिकारी सब बैठकों और फील्ड में सक्रिय हो चुके हैं। 

* पिछले नगरपालिका चुनाव में भाजपा ने 45 वार्डों में से 44 में प्रत्याशी उतारे जिनमें 12 ही जीत पाए थे। उस समय कांग्रेस का बोर्ड बना। कांग्रेस के 22 पार्षद जीते जो बहुमत से 1 कम रहे मगर ओमप्रकाश कालवा अध्यक्ष चुने गये। कालवा ने बाद में रामप्रताप कासनिया की अगुवाई में भाजपा की सदस्यता ले ली और बोर्ड भाजपा की अध्यक्षता का बन गया। अब ओमप्रकाश कालवा भी भाजपा की जीत और भाजपा का बोर्ड बनाने को सक्रिय हैं। पिछले चुनाव से अब स्थिति काफी बदल चुकी है। 

* भाजपा की चुनावी टक्कर किससे है यह जानलेना भी जरूरी है। भाजपा की टक्कर कांग्रेस से है बड़े रूप में यही दिखता है लेकिन जनता की चर्चाओं में आ रहा है कि लगभग 10 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों से टक्कर होगी। पिछले चुनाव में भी निर्दलीय काफी जीते लेकिन अधिकांश अध्यक्ष के साथ हो गये थे। आकलन अभी भी यह आ रहा है कि जो संभावित 10 निर्दलीय जीतेंगे,उनमें से अधिक भाजपा के साथ होंगे। वैसे भी सत्ता धारी पार्टी के साथ रहकर ही हर कार्य कराने में सफलता मिलती है और यही रास्ता अपनाने की बुद्धिमत्ता व चतुरता होती है। भाजपा से चेयरमैन के लिए प्रयासरत आरती शर्मा अपना वार्ड आरक्षित होने के बाद दूसरे वार्ड से ईच्छुक है लेकिन वहां सबसे बड़ा प्रश्न भी लोगों में घूम रहा है कि जो परिवार सामने खड़े हैं,कुछ कांग्रेस की टिकट मांग रहे हैं, तब उनमें वोटों के बंटवारे में आरती शर्मा को जीत के वोट कहां से मिलेंगे? जो लोग आरती शर्मा ( नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष 1994-1999)को अपने वार्ड से लड़ाना चाहते हैं वे कांग्रेस के वोट नहीं तोड़ सकते। भाजपा वार्डवासी टिकटार्थी को टिकट नहीं देकर बाहरी वार्ड की आरती शर्मा को टिकट देने से नाराजगी होगी और वह घातक होगी व आरतीशर्मा के विरूद्ध जाएगी। इससे पहले भाजपा नेता पहले लोगों को राजी करें। यदि राजी नहीं कर पाते हैं तो वहां आरतीशर्मा को भाजपा की टिकट पर सभी भाजपाई मिल कर भी जीता नहीं पाएंगे। आरतीशर्मा के लिए बड़ा विचारणीय काल है और देखते हैं उनका अपना निर्णय क्या होता है। नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष काजल छाबड़ा भी इस चुनाव में चेयरमैन की आशा में हैं लेकिन उनको भी अपने वार्ड में कड़ी टक्कर कांग्रेस से है। वैसे चेयरमैन पद के लिए और परिवार भी प्रयास में हैं लेकिन उनकी प्रसिद्धि नहीं है।

* भाजपा की टक्कर कांग्रेस से होगी और उस कांग्रेस में नगरपालिका के इस चुनाव की गतिविधियों में कितनी तूफानी है? ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस में बैठकें तो हुई हैं मगर काम ढीला ढाला सा दिखाई दे रहा है। कुल 45 वार्डों में से 30 में टिकट फार्म भरने के प्रति कुछ उत्साह है और 10-12 में खामोशी सी चल रही है। जहां तेजी लाना बहुत जरूरी है, तेजी नहीं लाई जाती है तो यह बड़ी कमजोरी रहेगी।

कांग्रेस में टिकट विधायक डुंगरराम गेदर बांटेंगे। गेदर ने पिछले विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा के प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया को मोटे तौर पर 55 हजार से अधिक वोटों से हराया था। लेकिन गेदर जीत के वे हालात कायम नहीं रख पाए। ये क्या कारण रहे, उनमें कुछ विचारणीय हैं जो गेदर की स्थिति का परदा हटाते हैं।

रामप्रताप कासनिया के पुत्र संदीपकासनिया की अध्यक्षता का विवेकानंद स्कूल को हुई भूमि आवंटन के बाद मौके पर भूमि दिए जाने के नगरपालिका बैठक में कुछ कांग्रेस पार्षदों ने प्रस्ताव का साथ दिया और कुछ बैठक से अनुपस्थित रहे थे। कांग्रेस की व्हिप का उल्लंघन हुआ। कांग्रेस के सदस्यों से जवाब तलब किया गया लेकिन उन्होंने उत्तर तक नहीं दिया। गेदर ने इस पर कहा था कि प्रस्ताव का पक्ष करने वाले पार्षदों और बैठक से अनुपस्थित रहने वालों को भविष्य में चुनावों में कांग्रेस की टिकट नहीं दी जाएगी। नगरपालिका चुनाव आते ही यह मुद्दा फिर उठ गया। वे प्रस्ताव का साथ देने वाले इतने ताकतवर हैं कि उनकी अपनी कांग्रेस है। वे अपने दम पर जीतते हैं। उनको कांग्रेस की टिकट की जरूरत नहीं। वे निर्दलीय जीत जाएंगे। असल में कांग्रेस को उनकी जरूरत है। विवेकानंद स्कूल को जमीन दिए जाने के प्रस्ताव पर डुंगरराम गेदर की यह घोषणा कितनी कारगर होगी? परसराम भाटिया ने भूमि प्रकरण में विरोध में राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में रिट लगाई और चुपचाप एक तारीख में ही वापस ले ली। डुंगरराम गेदर को भी रिट वापसी का नहीं बताया न सलाह ली। परसराम भाटिया हर समय गेदर के साथ रहते हैं। भाटिया कांग्रेस के सूरतगढ़ ब्लॉक के अध्यक्ष हैं। क्या गेदर भाटिया के विरूद्ध भी कोई  निर्णय करेंगे। टिकट नहीं देंगे जैसा कोई और निर्णय ले पाएंगे? 

*  भाजपा और कांग्रेस की 23 अगस्त 2026 को चुनावी बड़ी बैठकें हुई है। दोनों बैठकों में नेताओं में जोश और टिकटार्थियों की भीड़ रही है। सबसे बड़ा प्रमाण यह भी है कि भाजपा टिकट के लिए लोगों की भीड़ कासनिया की कोठी और उस गली में रोजाना पहुंच रही है। यह भीड़ कांग्रेस से अधिक देखी जा रही है। दि 23 अगस्त 2026.

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