करणी प्रेस इंडिया

शनिवार, 18 अप्रैल 2026

सूरतगढ़. आवासन मंडल सड़क अतिक्रमण एक दिन टूटेंगे. बड़े लोग खुद हटालें तो ईज्जत रहेगी!

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 18 अप्रैल 2026.

गंगानगर में सड़कों के अतिक्रमण हटाने की मांग उठ गई है। सड़क हमारी यानि जनता की है और उस पर चलने का अधिकार केवल जनता को है। अतिक्रमणकारियों को नहीं जो अच्छे पदों पर नौकर हैं या अच्छे पदों से रिटायर हुए लोग हैं जिन्होंने सूरतगढ़ में आवासन मंडल कालोनी में सड़कों को रोक रखा है। इनमें नेता भी हैं। अतिक्रमणकारियों ने बेशरमी की चादर ओढ रखी है। स्थानीय  प्रशासन पर ऊफर से आदेश हुआ और प्रशासन  अतिक्रमण तोड़ने शुरू करेगा उस दिन सभी की चादर फट जाएगी और  नाम उजागर हो जाएंगे। 

नगरपालिका प्रशासन ने नोटिस दिए थे कि तीन दिन में खुद अतिक्रमण हटालें अन्यथा नगरपालिका द्वारा हटा दिए जाएंगे। ये नोटिस 58 मकान मालिकों को 9 अप्रैल 2026 को दिए गए थे। अतिक्रमण करने वाले बड़ी गलतफहमी में हैं कि उनके सड़क अतिक्रमण नहीं टूटेंगे। यदि अतिक्रमण कारी सोचते हैं कि ईओ पूजा शर्मा नालों को पानी निकासी अवरोध गंदगी को देख गई है नाले साफ हो जाएंगे और सड़कों तक किए अतिक्रमण बच जाएंगे तो वे गलतफहमी में हैं। उच्चाधिकारियों का कलेक्टर, संभागीय आयुक्त आदि का सख्त आदेश आया तो यह ईओ ही खड़े रहकर अपनी मौजूदगी में अतिक्रमण ध्वस्त कराएगी। जब ईओ नालों का निरीक्षण कर रही थी तब अतिक्रमण कारी राजनैतिक पदाधिकारी लोग साथ रहे।


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भाजपा अपने में सर्वप्रथम नारी आरक्षण लागू कर प्रेरणादायक बने.दुनिया में इतिहास रचे.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *


 भारतीय जनता पार्टी यानी एनडीए की सरकार का 33% महिला आरक्षण संविधान संशोधन विधेयक  सदन में पारित नहीं हो सका। संविधान संशोधन के लिए दो तिहाई मत चाहिए जो मिल नहीं पाए।

भारतीय जनता पार्टी का 33 प्रतिशत नारी आरक्षण का सोच पक्का है तो इसे अपनी पार्टी में 

सर्वप्रथम लागू करके ऐतिहासिक शुरुआत करनी चाहिए। भाजपा का नारी सम्मान का  इरादा  पक्का है तो इसे अपनी पार्टी में सच्च बनाना चाहिए। बड़ी पार्टी शुरुआत कर देगी तो प्रतिपक्षी पार्टियों को अपनी अपनी पार्टियों में इसे लागू करना पड़ जाएगा। इस प्रक्रिया से 33 प्रतिशत महिला आरक्षण की परंपरा बन जाएगी और  संविधान में संशोधन की आवश्यकता भी नहीं होगी। नारी आरक्षण विधेयक पारित कराने का श्रेय भाजपा लेना चाहती थी वह नहीं मिला लेकिन सबसे पहले नारी आरक्षण लागू करने का श्रेय तो मिल ही जाएगा।

 भारतीय जनता पार्टी विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है। यदि इसके नेताओं का मन एकदम साफ है तो सबसे पहले 33% प्रतिशत नारी आरक्षण का कार्य अपनी पार्टी से शुरू करके देश में प्रेरणादायी बने और विश्व में इतिहास रचे। 

राज्य विधानसभाओं,लोकसभा और राज्य राज्यसभा में और भारत सरकार के एवं राज्यों के मंत्रिमंडल में भाजपा पार्टी अपने में 33 प्रतिशत नारी आरक्षण को लागू करे जो भविष्य के लिए परंपरा बने।

 भाजपा लोकसभा चुनाव सन् 2029 से पहले विभिन्न राज्यों में विधानसभाओं के चुनाव होंगे उनमें 33 प्रतिशत सीटें नारी सदस्यों के लिए आरक्षित कर सकती है। इससे भी पहले जो छोटे चुनाव हैं पंचायत के चुनाव नगर निकायों के चुनाव जहां भी होने वाले हैं उनमें 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दे। इस तरह से महिलाओं को आगे बढ़ाने का कार्य करे तो अन्य पार्टियों को ऐसा करने के लिए बाध्य होना पड़ जाएगा। जब यह 33 प्रतिशत सीटें नारी आरक्षण की परंपरा बन जाएगी तो संविधान संशोधन की आवश्यकता भी नहीं पड़ेगी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृहमंत्री अमित शाह और पार्टी की संसदीय कार्य समिति पार्टी का राजनीतिक संगठन इसमें कदम बढ़ाए तो भारतीय जनता पार्टी अपने आप में देश में प्रेरणादाई बनेगी विश्व मंच पर एक इतिहास बनाएगी। भारतीय जनता पार्टी में महिला संगठन इस कदम के लिए अपने-अपने क्षेत्र में आवाज़ उठाएं तो यह काम पार्टी के अंदर ही आसानी से हो सकेगा।०0०

सामयिक लेख. 18 अप्रैल 2026.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता 62 वर्ष,

(राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार)

मो.94143 81356.

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भ्रष्टाचारियों का सजा काल,जेल में बुढापा.बुरे दिन!

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचार करने वालों पर खुला लिखने की अनेक की आदत है। उनकी कोशिश यही रहती है कि घटनाओं की फोटो लगाई जाए, तथ्य लगाए जाएं, तथ्य दिए जाएं,दस्तावेज भी हों उनका उल्लेख भी हो,और यह  लगभग रिपोर्ट में होता है।

*नेता लोग जो अपनी-अपनी दुकानें चलाते हैं, वे भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों पर चुप रहते हैं। उनकी दुकान जिस तरीके से चले केवल उस एक सब्जेक्ट को अपनी जरूरत के हिसाब से लेते हैं। उसे जोड़ते हैं बाकी जनता का अहित होता रहे, भ्रष्टाचारी लोग जनता को लूटते रहें, उस विषय पर उन घटनाओं पर समाचारों पर नेता चुप रहते हैं। 


 किसी भी पार्टी  का नेता हो नेतियां हों भ्रष्टाचार पर चुप ही रहते हैं।उनके रवैये से ऐसा महसूस होता है कि उनका गरीब और पीड़ित से कोई लेना-देना नहीं है। पीड़ित की सेवा करना, समाज सेवा करना जो कुछ कहते हैं वह केवल हवाई बातें हैं। 

कोई ठोस कार्य किया हो भ्रष्टाचारियों को सजा दिलाई हो तो नेताजी की डायरी पूरी तरह से खाली मिलती है। जनता की पीड़ाओं पर नेता और नेतियां किसी दफ्तर में साथ नहीं जाते,काम नहीं करवाते। उनके भरोसे पीड़ित गरीब चक्कर काट काट करके थक जाता है। नेताओं को गरीबों के मंच चाहिए। गरीब पीड़ाओं में जब मंच लगता है, धरना लगाता है,प्रदर्शन करता है तब अचानक कोई नेता और कोई नेता वहां जरूर पहुंच जाते हैं। अनेक धरना और प्रदर्शन तो ऐसे होते हैं जिनके विषय के बारे में नेता नेतियों को पूरा पता नहीं होता लेकिन वे वहां एक साथ अनेक भी पहुंच जाते हैं। विभिन्न पार्टियों के एक साथ पहुंच जाते हैं। जब सवाल आता है कि अगले दिन किसी दफ्तर में जाना है, किसी अधिकारी से मिलना है, किसी अधिकारी के भ्रष्टाचार पर उसको फटकारना है तो नेताओं का बहाना होता है कि उनका काम निकल आया और वे शहर से बाहर चले गए। गरीब के साथ लगभग ऐसा होता रहता है। गरीब पीड़ित के साथ दफ्तरों मैं बैठे अधिकारी कर्मचारी तो ठगी करते ही हैं लेकिन नेता नेतियां भी ठगी करते शर्म नहीं करते।

गरीब को लूटने वाले गरीब को ठगने वाले धोखा देने वाले भ्रष्टाचारियों के विरुद्ध लिखना अनेक चाटुकारों को बुरा लगता है लेकिन आश्चर्य यह है कि उनको भ्रष्टाचार करना बुरा नहीं लगता और भ्रष्टाचारी भी बुरा नहीं लगता। अनेक मामलों में नेता नेतियां भ्रष्टाचारियों के साथ खड़े होकर फोटो खिंचवाने में अपने आप को आनंदित महसूस करते हैं। 

* यह प्रमाणित मानकर चलना चाहिए कि राजस्थान में लगभग रोजाना ही कोई ना कोई भ्रष्टाचारी रंगे हाथों भ्रष्टाचार निरोधक टीम के द्वारा किसी न किसी जगह पकड़ा जाता है।

* भ्रष्टाचार का अंत निश्चित रूप से होता है। भ्रष्टाचारी के अंतिम दिन जो लगभग अधेड़ अवस्था या वृद्धावस्था में होते हैं वे दिन जेल के अंदर बीतते हैं और बहुत बुरे हालातो में बीतते हैं। अब जो भ्रष्टाचार कर रहे हैं। जनता को पीड़ित कर रहे हैं। वे चाहे स्त्री हों या पुरुष हों, किसी भी पद पर हों उनका अंत भी किसी न किसी दिन अवश्य आएगा। कभी ना कभी वे निश्चित रूप से गिरफ्तार होंगे, तब उनको रोना आएगा और उनके चाटुकार हैं वे एक भी उनके पास नहीं आएंगे।

भ्रष्टाचारी किसी भी पद पर हो आय से अधिक संपत्ति में पकड़ा जाता है। उसकी जांच होती है तो वर्षों का खाया पिया लूटा हुआ धन एकदम से उजागर हो जाता है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो जांच में कभी कमी नहीं रखता। वह छुपाए हुए हर चल अचल संपत्ति को खोज ही लेता है। उसे जब्त कर लेता है। भ्रष्टाचारी अपने आप को बहुत शातिर समझते हैं, बुद्धिमान समझते हैं, भ्रष्टाचार में पैसे लेने के नए-नए तरीके आजमाते हैं,लेकिन फिर भी पकड़ लिए जाते हैं।

 आज जो अपनी कुर्सियों पर बैठे भ्रष्टाचार करते हुए इतराते हैं। अपने जाति और वर्ग के कुछ लोगों का समर्थन देख इतराते हैं,उनका भविष्य भी  बुरे दिनों की ओर बढ़ रहा है।०0०

18 अप्रैल 2026.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता 62 वां वर्ष,

स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत आजीवन) सूरतगढ़.

94143 81356.

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जानलेवा चाइनीस मांझा बिक्री उपयोग. पुलिस की गिरफ्तारी से बचें.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

 चाइनीस मांझा जानलेवा है जिससे ( हर साल पतंगे उड़ने वाले लोग चाहे जो हो )हर साल हजारों लोग घायल होते हैं हजारों पक्षी घायल होते हैं। हजारों पक्षी हर साल मौत का शिकार होते हैं। चाइनीस मांझा राजस्थान में प्रतिबंधित है। किसी भी समारोह में किसी भी उत्सव में पतंगबाजी में इसका उपयोग नहीं किया जा सकता लेकिन  इसका उपयोग और बिक्री हो रही है।

* चाइनीज मांझा खरीदने वालों को बेचने वाली दुकानों का मालुम होता है, लेकिन आश्चर्य यह है कि अपने ही शहर में अपनी ही पुलिस को बिक्री स्थान का पता नहीं होता, बेचने वाले का पता नहीं होता।  पुलिस सहमति से मिली भगत से यह सब होता है।

 एक छोटे शहर में पतंग बेचने वालों  की ज्यादा से ज्यादा 5 या 10 दुकान होती हैं। दुकानों का पता आम लोगों को जो पतंगबाजी करते हैं उनको मालुम होता है। वहां से पतंग और चाइनीज मांझा भी खरीदते हैं लेकिन इस शहर की पुलिस को पता नहीं होता। यह सब पैसे का खेल है या फिर पुलिस की गंभीर लापरवाही है,जिसके कारण जालेवा घटनाएं होती है।

 प्रतिबंधित चाइनीज मांझा बेचने और उपयोग करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो तभी इसका उपयोग और बिक्री रुक सकती है।

* सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब भी मकर संक्रांति और अक्षय तृतीया आती है तब चाइनीज मांझे का उपयोग सबसे अधिक होता है। पतंगबाजी में पतंग के काटने पर या लूटने पर जब मांझे को तेजी  से खींचा जाता है और उस समय कोई व्यक्ति इसकी लपेट में आ जाता है या गर्दन आ जाती है तो कटने में देरी नहीं लगती। मांझे की काट बहुत घातक होती है और चिकित्सालय पहुंचने तक घायल व्यक्ति जिंदा नहीं रह पाता। ऐसी घटनाएं सोशल मीडिया के माध्यम से आम लोगों तक पहुंचती है फिर भी लोग गैरकानूनी कार्य करते हैं।

 राजस्थान में चाइनीज मांझा प्रतिबंधित है। पुलिस को जानलेवा घटनाएं होने से राजस्थान को बचाना है तो तुरंत ही आज ही चाइनीज मांझा बेचने वाली दुकानों पर कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसी दुकानें सीज कर देनी चाहिए। दुकानदारों को जो चाइनीस मांझा बेचते हैं उनको कानूनी कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया जाना चाहिए। चाइनीज मांझे का इस्तेमाल करने वालों पर भी सख्त कानूनी कार्रवाई करते हुए गिरफ्तारियां करनी चाहिए।०0०








शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026

किसकी बनेगी एसीबी न्यूज! इस शहर में!!

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

दूर की गिरफ्तारी पर खुश शहर के नागरिक मीडिया बुद्धिमान लेकिन अपने ही शहर में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी अधिकारियों पर सभी चुप। बस, यह एक कारण यानि यह एक मृतजीवन  ने शहर का बेड़ा गर्क कर दिया है। भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों पर नहीं बोलने,विरोध नहीं करने पर भ्रष्टाचार बढ रहा है और भ्रष्टाचारी अधिकारियों की मनमानी बढ रही है जिससे आम आदमी लुट रहा है। आम आदमी के काम रुक रहे हैं। आम आदमी की फाईलों को अधिकारी कर्मचारी दबा देते हैं और पूछने पर अनेक चक्कर काटने पर फाईल नहीं मिलने का जवाब मिलता है।   बार बार चक्कर काटने पर कह दिया जाता है कि काम नहीं होगा। कोई नियम नहीं बताते कि क्यों नहीं होगा? बस नहीं होगा। जरूरतमंद पीड़ित भी कहाँ जाए? नेता नेतियां मरे हुए वे कभी साथ नहीं देते। गरीब का काम कराना हो तो वे दिन में दस बारह बार मर जाते हैं। नेता नेतियां काम कराने के लिए साथ नहीं जाते बल्कि फोन भी नहीं करते। मरे हुए हों तब फोन कैसे करें? युवाओं में जोश होता है और वे भ्रष्टाचारियों से भिड़ जाते हैं लेकिन इस शहर में युवाओं की हालत तो बुड्ढों से बदतर है। नेताओं नेतियों के कुछ रूप कागजी जोश के हैं। उनके जोश कागजी हैं तो उनके भाषण संघर्ष आदि भी कागजी ही हैं जिन पर पीड़ित भरोसा कैसे करे कि इनके कहने से कभी काम तो होगा नहीं। पीड़ित जरूरतमंद का तब एक बड़ा सहारा उसकी जेब ही होता है। आम आदमी के काम रिश्वत देने पर हो पाते हैं। 

👍 मरे नेताओं नेतियों वाले शहर में कोई ऐसा भी होता है जो मरना नहीं चाहता। वह एसीबी की तरफ आगे बढता है तब कभी कभी एसीबी की कार्वाई और भ्रष्टाचारी की गिरफ्तारी की न्यूज बन जाती है। ऐसी न्यूज का इंतजार है। किसकी न्यूज बनेगी? हां,अपने शहर में बनेगी। ( अपने शहर का नाम सोच लें,भ्रष्टाचारी का नाम भी सोच लें)

17 अप्रैल 2026.

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गुरुवार, 16 अप्रैल 2026

एसडीएम काजल मीना रिश्वत लेते गिरफ्तार. वरिष्ठ सहायक प्रवीण धाकड़,रीडर दिनेश सैनी भी गिरफ्तार.

  



* करणी प्रेस इंडिया * 16 अप्रैल 2026.

एसीबी मुख्यालय जयपुर के निर्देश पर एसीबी सवाई माधोपुर इकाई द्वारा कार्यवाही करते हुये काजल मीना उप खण्ड अधिकारी, उपखण्ड नादोती, रीडर दिनेश कुमार सैनी,प्रवीण धाकड वरिष्ठ सहायक के मारफत रिश्वत लेते गिरफ्तार किया।

 परिवादी से उसकी भूमि की तकाशनामें की फाईनल डिक्री जारी करने की एवज में 60 हजार रू. की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। 

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक पुलिस गोविन्द गुप्ता के अनुसार एसीबी चौकी सवाई माधोपुर को एक शिकायत इस आशय कि मिली कि परिवादी से उसकी भूमि की फाईनल डिक्री जारी करने की एवज में एसडीएम काजल मीना अपने रीडर दिनेश सैनी के मार्फत 50,000 रूपये रिश्वत राशि की मांग कर परेशान किया जा रहा है। परिवादी ने यह भी बताया पूर्व में एक लाख रूपये रिश्वत की मांग कर 50,000/- रूपये रिश्वत राशि लेने पर सहमत हुये। परिवादी द्वारा आज दिनांक 16.04.2026 को रिश्वत मांग का गोपनीय सत्यापन करवाया तो काजल मीना एसडीएम के रीडर द्वारा परिवादी की भूमि की फाईनल डिक्री जारी करने की एवज में 50,000/- रूपये एसडीएम काजल मीना व 10,000/- रूपये स्वंय के लिये मांग की गई। 

उक्त मांग के अनुसरण में रिश्वत राशि 60 हजार रूपये आज दिनांक 16.04.2026 को परिवादी से कार्यालय उपखण्ड अधिकारी नादोती में बुलाकर प्राप्त करना एवं रिश्वत राशि 60,000/- रूपये प्राप्त कर प्रवीण धाकड वरिष्ठ सहायक को देकर रवाना करना एवं वक्त कार्यवाही आरोपी रीडर दिनेश सैनी रिश्वत राशि एसडीएम काजल मीना के लिये लेना बताने पर जरिये मोबाईल काजल मीना की रीडर दिनेश सैनी से वार्ता करवाई गई। रिश्वत राशि की सहमति देना एवं रीडर दिनेश सैनी से जरिये मोबाईल प्रवीण धाकड वरिष्ठ सहायक को जरिये मोबाईल सूचित कर रिश्वत राशि सहित कार्यालय में उपस्थित होने की कहने पर प्रवीण धाकड वरिष्ठ सहायक एसडीएम कार्यालय मय बैग के उपस्थित हुआ। 

उक्त बैग में रिश्वत राशि 60,000 रुपये बरामद होना एवं उक्त बैग में संदिग्ध राशि 4 लाख रूपये बरामद होने पर उक्त सुश्री काजल मीना एसडीएम, दिनेश सैनी रीडर, प्रवीण धाकड वरिष्ठ सहायक को रंगे हाथों पकड़ा गया।

एसीबी के उप महानिरीक्षक पुलिस डॉ. रामेश्वर सिंह के सुपरविजन में ज्ञान सिंह चौधरी, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, एसीबी सवाई माधोपुर द्वारा ट्रेप कार्यवाही करते हुये काजल मीना एसडीएम, दिनेश सैनी रीडर, प्रवीण धाकड वरिष्ठ सहायक को परिवादी से 60 हजार रुपये रिश्वत राशि लेते हुये रंगे हाथों डिटेन किया गया है व अन्य संदिग्ध राशि 4 लाख रूपये भी बरामद हुये है। उक्त संदिग्ध राशि के सम्बन्ध में भी पूछताछ जारी है।

ए.सी.बी. की अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस स्मिता श्रीवास्तव के सुपरविजन एवं एस परिमला महानिरीक्षक पुलिस के निर्देशन में आरोपी से पूछताछ तथा कार्यवाही जारी है। ०0०






अरोड़वंश कल्याण समिति अध्यक्ष की शिकायत.वित्तीय आरोप.चुनाव तक प्रशासक लगाने की मांग.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 16 अप्रैल 2026.

अरोड़वंश कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक भाटिया और कार्यकारिणी पर वित्तीय गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए रजिस्ट्रार संस्थाएं श्रीगंगानगर को शिकायत की गई है। समिति के आजीवन सदस्य दर्शन चुघ ने शिकायत में लिखा है कि दीपक भाटिया अध्यक्ष व कार्यकारिणी का कार्यकाल सन् 2023 तक था जो खत्म हो चुका है। दीपक भाटिया और कार्यकारिणी सदस्य अपने पदों का व धन संपदा का दुरूपयोग कर रहे हैं। समिति के आय व्यय का विवरण सदस्यों के समक्ष प्रस्तुत नहीं कर रहे और रजिस्ट्रार संस्थाएं को भी प्रस्तुत नहीं किया है। 

* रजिस्ट्रार संस्थाएं को की गई शिकायत में वित्तीय लेनदेन की जांच करने की मांग है।

* दर्शन चुघ ने नये चुनाव कराने की मांग की है। यह मांग भी है कि नये चुनाव होने तक समिति पर प्रशासक नियुक्त किया जाए। दर्शन चुघ ने स्वयं उपस्थित होकर लिखित में शिकायत की है।

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बुधवार, 15 अप्रैल 2026

भाजपा में बिरमा नायक सामान्य व ओबीसी में पूजा छाबड़ा.पुरूष नाम. परिस्थितियों में नाम.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 15 अप्रैल 2026.

आगामी परिसीमन में सूरतगढ़ सीट महिला आरक्षित हुई तो भाजपा से टिकट मिलने की संभावनाओं में जिनके नाम किसी न किसी तरह से आगे आते हैं उनमें पूजा छाबड़ा और बिरमादेवी नायक अभी पहले क्रम पर नजर आ रही हैं।

* अनुसूचित जाति महिला के लिए सीट आरक्षित हुई तो बिरमादेवी अधिक चर्चा में है। बिरमा पंचायत समिति के प्रधान पद पर रह चुकी हैं। बिरमादेवी का कार्यकाल बिना किसी विवाद परेशानियों के अच्छा रहा था। सन् 2014 से प्रधान पद का कार्यकाल पूरा करने के बाद भी बिरमा पार्टी के कार्यक्रमों में सर्वाधिक लगभग हर कार्यक्रम में उपस्थित देखी गई हैं। इसके अलावा सामाजिक कार्यक्रमों में उपस्थिति होने से लोकप्रिय है। माना जाता है कि बिरमादेवी का ग्रामीण जनसंपर्क सबसे अधिक है।

* ओबीसी महिला के लिए सीट आरक्षित हुई तो प्रसिद्ध नामों में पूजा छाबड़ा है जो पैदायशी सिंधी हैं,मगर पूजा सामान्य में अधिक चर्चित है और टिकट का दावा सामान्य में अवश्य करेगी। यहां ओबीसी में एकदम नया चेहरा हो सकता है। जाट और कुम्हार लीडर किसी भी परिवारों में टिकट मांगेंगे।

* महिला सामान्य हुई तब जिनके नाम चर्चा में आते हैं  उनमें पूजा छाबड़ा, काजल छाबड़ा और आरती शर्मा हैं। काजल छाबड़ा और आरती शर्मा नगरपालिका सूरतगढ़ की अध्यक्ष रह चुकी हैं। मगर पूजा सामान्य में अधिक चर्चित है और टिकट का दावा सामान्य में अवश्य करेगी।

* विधानसभा सीट के लिए पुरूषों में अभी पूरी तैयारियों में सबसे आगे संदीप कासनिया है जो शहर और ग्रामों के आम कार्यक्रमों में सबसे अधिक उपस्थिति में आते हैं। विभिन्न कार्यक्रमों में सबसे अधिक संबोधन संदीप कासनिया के हैं। शांत तैयारियों में ओमप्रकाश कालवा भी हैं जो अपने वर्ग को मजबूत बनाने में जुटे हैं ताकि उनका बड़ा सहयोग मिले। कालवा को अभी तो रामप्रताप कासनिया के नजदीक माना जाता है और उनके साथ ही कार्यक्रमों में उपस्थित होते हैं। आगे कौन कहां अधिक चर्चा में रहते हैं यह आगे विभिन्न परिस्थितियों में कुछ भी हो सकता है। 

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सोमवार, 13 अप्रैल 2026

सूरतगढ़.सफाई कर्मी: वाल्मीकि सफाई पर और स्वर्ण दफ्तर के एसी रूम में। वाल्मीकि के हक पर कौन नेता चुप हैं?



* करणीदानसिंह राजपूत * 

सूरतगढ़ 13 अप्रैल 2026.

नगरपालिका प्रशासन ने सफाई कर्मचारियों के प्रति दो तरह के नियम बना रखे हैं जिनसे वाल्मीकि कर्मचारियों से भेदभाव हो रहा है और उनकी आवाज को प्रशासक भरत जयप्रकाश मीणा ( उपखंड अधिकारी) और अधिशाषी अधिकारी पूजा शर्मा दोनों ही दबा रहे हैं। उच्च स्तरीय जांच हुई तो इन दोनों अधिकारियों के विरुद्ध जानबूझकर भेदभाव करने पर कार्वाई हो सकती है। 

* नगरपालिका में जो सफाई कर्मचारी स्वर्ण जाति वर्ग के हैं, उनको फील्ड में सफाई के लिए न भेजकर दफ्तर में वातानुकूलित कमरों में बिठाया हुआ है और सरकारी आदेश के विरूद्ध दूसरे काम सौंपे हुए हैं। वाल्मीकि वर्ग के ही कर्मचारियों को नाले सफाई कचरा मैला उठाने हटाने पर लगाया हुआ है।

अधीशाषी अधिकारी पूजा शर्मा की प्रशासनिक देखरेख में संविधान और राज्य सरकार की नीति के विरूद्ध यह भेदभाव चलाया जा रहा है। अनेक समाचार, मांगपत्र दिए जाने के बावजूद भी यह भेदभाव खत्म नहीं किया गया है, जबकि सफाई कर्मचारियों ने कुछ माह पूर्व अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा के हाथों में मांगपत्र दिया था कि दफ्तर में लगाए सफाई कर्मचारियों को फील्ड में लगाया जाए ताकि सफाई व्यवस्था में सुधार हो सके। यही मांग पत्र प्रशासक ( उपखंड अधिकारी) भरतजयप्रकाश मीणा को भी हाथों में सौंपा गया था। भरतजयप्रकाश मीणा आईएएस अधिकारी हैं और वे भी तुरंत एक्शन करने के बजाय ईओ की गलत भेदभाव पूर्ण व्यवस्था पर चुप हैं। कर्मचारियों का मांगपत्र कहां दब गया है,यह किसी जांच में ही सामने आ सकेगा। फिलहाल उपखंड अधिकारी और अधीशाषी अधिकारी दोनों ही इस व्यवस्था के दोषी हैं। 

* वाल्मीकि सफाई कर्मचारियों के साथ अन्याय और भी हो रहे हैं। जो सेवा निवृत हो गये हैं उनकी पेंशन,ग्रेच्युटी आदि सालों तक नहीं दी जाती। अभी भी अनेक वाल्मीकि कर्मचारियों के लाखों रूपये नगरपालिका प्रशासन ने नहीं दिए। यहां तक कि समय पर वेतन नहीं दिया जाता।  👍अनेक बेगार पर लगाए हुए हैं जिनकी उपस्थिति नगरपालिका में लगती है और वेतन नगरपालिका देती है। इससे शहर की सफाई चौपट हो रही है। 

👍 नगरपालिका प्रशासन की इस गलत नीति और वाल्मीकि वर्ग के कर्मचारियों से अन्याय भेदभाव के जानकर होते हुए भी ये सब सुधार नहीं करवा रहे। ईओ को लिखित में देना नहीं चाहते।  नगरपालिका पिछले बोर्ड में (भाजपा नेता) अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ( मेघवाल) हैं और अपने ही वर्ग के प्रति अन्याय देख रहे हैं। परसराम भाटिया (मेघवाल) 120 दिन अध्यक्ष रहे। कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष हैं। जगदीश (मेघवाल) भी कुछ दिन अध्यक्ष रहे हैं और भाजपा नेता हैं। इन तीनों ने कभी कोई लिखित में शिकायत नहीं की। 

* वर्तमान विधायक डुंगरराम गेदर जो बसपा में थे तब अनुसूचित जाति के प्रति आवाज उठाते थे और कांग्रेस से विधायक बनने के बाद नगरपालिका में हो रहे अन्याय पर चुप हैं।

👍 पूर्व विधायक रामप्रताप कासनिया, उनके पुत्र संदीप कासनिया भी ईओ पूजा शर्मा के गलत कार्वाई पर चुप हैं। 

* पूजा शर्मा ने वाल्मीकि को मिल रहे प्रमोशन के बजाय अपनी सग्गी भाभी बबीता शर्मा को अवैध रुप से प्रमोशन दिया, अनुचित लाभ दिया और नगरपालिका को हानि पहुंचाई। दस्तावेज गलत बनाए। एक वाल्मीकि का हक मारा। उस समय ओमप्रकाश कालवा अध्यक्ष थे जो मालुम होने के बाद आजतक चुप हैं और सरकार को शिकायत नहीं करते।

इस पर ये सभी राजनेता,नेता चुप हैं और शिकायत नहीं कर रहे। अनुसूचित वर्ग के लिए संघर्ष करने वाले संगठन, बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के नाम लेवा भी वाल्मीकि कर्मचारियों पर हो रहे अत्याचार पर चुप हैं। 👍 पूर्व विधायक अशोक नागपाल, पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू भी चुप हैं। ये सभी नेता नगरपालिका में हो रहे भेदभाव पर जांच कराने पर 14 अप्रैल को कोई संकल्प लेकर अगले दिन से कार्वाई कराएंगे!०0०








रविवार, 12 अप्रैल 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आसपास का भारत,गरीबी में तड़पता जीवन! रोटी के संकट में उनके सपने!

 





* करणीदानसिंह राजपूत *

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का करोड़ों का गरीब निवास और और गगनचुंबी इमारतों का ऐश्वर्य भरा अमीर भारत वहीं आसपास एक अकाट्य सच्च धरती चूमती गंदगी कीचड़ कचरे झोंपड़ का दुर्गंध भरा गरीब भारत! 

👌प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दिन के चौबीस घंटों में अठारह घंटे काम करते हैं,देश के लिए काम करते हैं। मोदी है तो हर कुछ मुमकिन है। ये जो धरती से जुड़े  मजबूरी का जीवन जीते लोग परिवार हैं, ये तो चौबीस घंटों में हर घंटे काम पर ही होते हैं।इनकी कब होती है छुट्टी! आदमी खपता है तो औरत भी खपती है। छोट्टे छोट्टे बालक बालिका भी खपते हैं। कहां हैं इनके स्कूल और शिक्षा ? इन परिवारों में बुड्ढे बुड्ढी भी मरते दम तक खपते हैं,तब कहीं रोटी नसीब होती है। इन गरीबों को फिंगरप्रिंट के बिना मुफ्त अन्नाज का भी सहयोग नहीं और नेताओं के खास साहूकार करोड़ों रू.बैंकों से ले विदेश भाग गये। गरीब ईमानदार है तो भी भरोसेमंद नहीं है, वह चोर है लुटेरा है,बिना अपराध के अपराधी है। अमीर बेईमान है तो भी भरोसेमंद हैं क्योंकि वह सत्ताधारी नेताओं में किसी न किसी का हमप्याला हमनिवाला है इसलिए साहूकार है। आचरण हमप्याला हमनिवाला से भी आगे ऊंची पसंद का है तो वह और अधिक खास है  और वह राजनेता बन जाता है, मंत्री भी बन जाता है। अमीर को बैंक करोड़ों रूपये घर जाकर दे देते हैं लेकिन गरीब को कच्चे घर के लिए भी कर्ज नहीं मिल पाता। प्रधानमंत्री आवास योजना में दो लाख रू तक की सहायता है कि जमीन हो तो यह सहायता पक्का मकान बनाने के लिए है। गरीब के पास जमीन कहां से होगी? जमीन तो सरकार की है। अमीर गगनचुंबी इमारतें बना सकते हैं तो सरकार ऐसी ही गगनचुंबी इमारतें गरीबों के लिए बनाकर दे दे। गरीबों के लिए बना दें लेकिन महानगरों में जमीन नहीं है। यह कह दिया जाता है। गरीब एक एक झोंपड़ी बना कर जितने घेरे क्षेत्रफल की जमीन पर बसे हैं, वहां उतने से कम क्षेत्रफल में गगनचुंबी इमारतें बनाई जाएं तो और अधिक  गरीब बसाए जा सकते हैं तथा अधिक जमीन की आवश्यकता शायद नहीं पड़ेगी, लेकिन इस पर विचार कौन करे? 

राजनैतिक नेताओं की सोच सरकार से बाहर होती है तब कुछ और होती है तथा जब सरकार बन जाती है तब सोच बदल जाती है। 

गरीब तो मकान और बच्चों को शिक्षा की सोच ही नहीं पाता। रोटी कमाने में ही सारा समय निकल जाता है। मतलब 24 घंटे में वह केवल रोटी ही कमा पाता है,मकान शिक्षा के रूपये तो इकट्ठे हो ही नहीं पाते। महानगरों में गरीबों की कालोनियों के लिए भूमि नहीं ( लेख में सुझाव है कि गगनचुंबी इमारतें सरकार बनाए) लेकिन जो छोटे नगर हैं, नगरपालिकाएं ग्राम पंचायतें हैं और वहां जमीन है तो वहां गरीबों के लिए बहुमंजिली कालोनियां बना कर दी ही जा सकती है। 

राजधानी में भारतीय जनता पार्टी के विशाल कार्यालय के लिए करोड़ों रूपये मिल गये और जमीन भी मिल गई। यह विशाल कार्यालय भवन आंखों के आगे है। इसे देखकर ही प्रश्न उत्पन्न होते हैं। भाजपा के अग्रिम संगठनों के भी भवन हैं और उनके निर्माण के लिए जमीन भी मिली और धन भी मिला। गरीबों की कालोनियों के लिए  प्रयास किया होता तो सफलता मिलने की उम्मीद होती। 


भारतीय जनता पार्टी का राज जिसमें भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जुड़े हुए हैं। अनेक विचार समय समय पर आते हैं। महा भारत! हिंदू राष्ट्र! राम राज! मोदी का भारत! मोदी है तो सब मुमकिन है! मोदी का स्वच्छ भारत अभियान कहां गुम हो गया? देश की राजधानी दिल्ली के परिक्षेत्र में भयानक गंदगी तो है लेकिन स्वच्छ भारत का कहीं नारा भी नहीं दिखता। गगनचुंबी इमारतों के आसपास झुग्गी झोंपड़ी का गरीब दिखता है। गरीबी का जीवन दिखता है। यह सच्च देश भर में है। स्वच्छ भारत मिशन गायब है। भाजपा नेता और संघ के कार्यकर्ताओं में इतनी हिम्मत नहीं कि इस अभियान को कुचलने वाले अधिकारियों से बात कर सकें। यह अभियान केवल दीवार लेखन और कागजों मे सीमित कर दिया गया है। लाखों रूपये हर शहर में अधिकारी डकार रहे हैं। भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कार्वाई करना तो बहुत दूर कल्पना से भी परे है।

राम राज का सच्च गरीब के लिए होता तो सन् 2014 ईसवी से 2026 तक गरीब को हर शहर में अपना घर मिल गया होता। अभी जो बजट बनते रहे हैं उनमें ऐसी योजनाएं होती हैं जिनका उपयोग पैसे वाले ही कर सकते हैं। 








* गरीब को मुफ्त का अन्नाज दे देने और उसका प्रचार कर श्रेय लेना राजनीति है और वह वोट लेने तक पहुंच कर खत्म हो जाती है। आज का गरीब युवा गरीबी का मुफ्त अन्नाज नहीं चाहता। युवा काम मांग रहा है। युवा रोजगार मांग रहा है। वह चाहता है कि अपने परिश्रम से जीवन को बदल कर आगे बढें। भारत के असली निर्माण करने वाले गरीब मजदूर किसान आदि हैं जिनके लिए कोई ठोस नीति नहीं बनती जो जितनी जल्दी बनाई जाए उतना ही भविष्य के लिए अच्छा होगा।०0०

12 अप्रैल 2026. ( दिल्ली राजधानी परिक्षेत्र से)

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,पत्रकारिता 62 वां वर्ष.

94143 81356.

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