करणी प्रेस इंडिया
सोमवार, 31 अगस्त 2026
सूरतगढ़. भाजपा प्रत्याशियों की अधिकृत सूची.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 31 अगस्त 2026.
नगरपालिका सूरतगढ़ के चुनाव में भाजपा की अधिकृत सूची प्रदेश कार्यालय से जारी हुई है। नगरपालिका के समस्त 45 वार्डों में से कुल 44 वार्डों के प्रत्याशी घोषित किए गये हैं। भाजपा ने वार्ड नं 15 में अपना प्रत्याशी घोषित नहीं किया। यह वार्ड नं 15 ओबीसी (महिला) के लिए आरक्षित है। कांग्रेस ने वार्ड नं 15 में कविता पत्नी राहुल सहारण को टिकट दी है। भाजपा द्वारा यहां प्रत्याशी घोषित नहीं करना बड़ी चर्चा बन गया है।
सूरतगढ़: भाजपा की सूची जयपुर की स्वीकृति को भेजी. बगावत के डर से जयपुर को भेजी.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 31 अगस्त 2026.
नगरपालिका सूरतगढ़ के चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक होने के दो घंटे बाद तक भाजपा की सूची सार्वजनिक नहीं होने से यहां अनेक सवाल उठने लगे हैं कि भाजपा सूची सार्वजनिक करने से डर रही है कि नामों पर विरोध हो सकता है। जबकि नामों के आभास और भनक पड़ते ही 30 अगस्त से विरोध के स्वर उठने लग चुके हैं।
* भाजपा के जिला प्रभारी दशरथसिंह शेखावत, जिला अध्यक्ष शरणपालसिंह मान सूची जारी करते और अब सार्वजनिक होने में देरी से लोग इन पर निशाना साध रहे हैं। सूची निर्वाचन अधिकारी को यहां सौंप दी गई, फिर सार्वजनिक करने में कोई अड़चन नहीं होनी चाहिए।
👍 भाजपा की प्रत्याशी सूची को लेकर बड़ा सस्पेंस खड़ा हो गया है। पार्टी ने दोपहर करीब 2:30 बजे अधिकृत प्रत्याशियों की सूची निर्वाचन अधिकारी को सौंप दी थी। लेकिन इसके बाद भी तीन घंटों तक सूची को सार्वजनिक नहीं किया गया। सवाल सीधा है—जब सूची तय है, निर्वाचन अधिकारी को सौंप दी गई है तो फिर भाजपा उसे जनता और मीडिया से छिपा क्यों रही है? आखिर डर किस बात का है?
इधर कांग्रेस ने अपने सभी 45 वार्डों के प्रत्याशियों की सूची एसडीएम एवं निर्वाचन अधिकारी को सौंपने के साथ ही मीडिया को उपलब्ध करवा दी। कांग्रेस की ओर से जहां चुनावी तस्वीर साफ करने में कोई देर नहीं की गई, वहीं भाजपा की सूची पर रहस्य का पर्दा डाल दिया गया।
सबसे हैरान करने वाली बात तो यह रही कि सूची को लेकर जानकारी लेने के लिए मीडिया कर्मियों ने भाजपा नेताओं से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन फोन उठाने की बजाय कई नेता ‘मौन’ हो गए। मीडिया के सवालों से बचने की यह कोशिश अब खुद भाजपा के लिए नए सवाल खड़े कर रही है। भाजपा आखिर किस ‘तूफान’ से बचने की कोशिश कर रही है?
सूत्रानुसार भाजपा की सूची जयपुर की नजरों में डाली जाने के बाद सार्वजनिक की जाएगी। पहले ऐसे ही समाचार थे। सूरतगढ़ में कोई विरोध हो तो कहा जा सके कि जयपुर से यस होने के बाद मीडिया को दी गई। ०0०
सूरतगढ़. कांग्रेस प्रत्याशियों की सूची सार्वजनिक हुई.
* करणी प्रेस इंडिया *
सूरतगढ़ 31 अगस्त 2026.
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने नगरपालिका सूरतगढ़ के चुनाव के लिए समस्त 45 वार्डों में अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची आम वोटरों व जनता के लिए सार्वजनिक कर दी।
रविवार, 30 अगस्त 2026
भाजपा में टिकट फाईनल की जबरदस्त नाराजगी.निर्दलीय पड़ेंगे भारी. कौन जीत रहा.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ लेटेस्ट 30 अगस्त 2026.
भाजपा के प्रत्याशियों के नामों की भनक से उपजे हालात बिगड़ कर विरोध के स्वर अब वार्डों में फैले हैं। नगरपालिका में बोर्ड बनाने का दावा कर रही भाजपा की स्थिति डाउन होने की हालत से कुछ वार्डों में निर्दलीय का माहौल बन गया है। सामान्य वार्डों में ओबीसी,सामान्य वार्ड में बाहरी,फील्ड वर्कर के बजाय अन्य को टिकट फाईनल के होने से भाजपा में फूट का उफान है। यह टिकट वितरकों को दिखाई नहीं देता। टिकट वितरण में जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान और पूर्व नगर मंडल अध्यक्ष का दबाव रहा जिसमें पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया की नहीं चली बल्कि उनके कहने पर भी कुछ मेहनती फील्ड में जूझते रहे कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं दी गई। कासनिया को खत्म करने की सोच से टिकटें नहीं दी गई।
* भाजपा 23 प्लस की नीति से चुनाव लड़ने की तैयारी पर थी जिससे 45 वार्डों में बहुमत के बाद भाजपा का बोर्ड आसानी से बनता हुआ नजर आ रहा था।
अब विभिन्न वार्डों में विरोध के स्वर उठ रहे हैं और भाजपा की ताकत कमजोर हो रही है। अब नीचे खिसकती हालत में भाजपा 15 प्लस पर है। बहुत बार सत्ता का नशा और अकड़ काम नहीं आती और यह स्थिति दो चार दिन में भाजपा नेताओं और विद्रोह वाले वार्डों में थोपे जाने वाले प्रत्याशियों को असली वोट का आईना दिखा देगी।
* वार्ड नं 30 सामान्य घोषणा के तुरंत बाद सुशील तावणिया ने भाजपा टिकट की दावेदारी और चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। वहां ओबीसी वर्ग से कृष्ण छींपा ने भी भाजपा टिकट की दावेदारी और चुनाव लड़ना है कि घोषणा कर दी। कृष्ण छींपा का परिवार पिता सत्यनारायण व माता ही काफी सालों से चुनाव लड़ते रहे हैं। अब टिकट कृष्ण छींपा को टिकट दिए जाने से विरोध भी शुरू हो गया है कि सामान्य वर्ग फिर कब चुनाव लड़ेगा,जब नंबर आए हुए भी टिकट नहीं मिले। सुशील कुमार तावणियां ब्राह्मण जाति से हैं और भाजपा के प्रसिद्ध कार्यकर्ता हैं। विरोध शुरू होने से कृष्ण छींपा की जीत और खुशियां प्रभावित होंगी। यहां सामान्य वर्ग ने दया शंकर शर्मा को निर्दलीय प्रत्याशी तय किया है और अब वोट दयाशंकर को देना तय किया गया है।
* वार्ड नं 45 सामान्य वार्ड है जहां पूर्व पार्षद श्रीमती संतोष गिरी को फिर से भाजपा टिकट दिए जाने की चर्चा से नाराजगी शुरू है। संतोष गिरी ओबीसी वर्ग की है। इस वार्ड में सामान्य वर्ग के कई लोग चुनाव मैदान में हैं।
* वार्ड नं 19 सामान्य है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने उपरी सिफारिश पर श्रीमती रजनी मोदी को टिकट देना फाईनल किया। कासनिया रिंकु सिद्दीकी को टिकट के पक्ष में थे और उनकी नहीं चली। यहां इसी परिवार की यासमीन सिद्दीकी पार्षद रही।
इस वार्ड के क्षेत्र में रिंकु सिद्दी परिवार की पकड़ मजबूत है। सिद्दीकी परिवार विकास कार्यों का ताकतवर नेता है जबकि रजनी मोदी फील्ड में किसी एक भी विकास से जुड़ी हुई नहीं है। यहां सिद्दीकी परिवार ने टिकट नहीं मिलने पर अपने परिवार के साहिर सिद्दीकी को निर्दलीय खड़ा कर दिया है। यहां कांग्रेस ने हरीश दाधीच निवृत हुए पार्षद को चुनाव में उतारा है । हरीशदाधीच पिछले चुनाव में भाजपा से पार्षद था। अब भाजपा नेताओं से नाराजगी की वजह से कांग्रेस में चले गये। हरीशदाधीच यहां बाहरी माना गया है। वार्ड में निर्दलीय साहिर सिद्दीकी सब पर भारी है और यहां भाजपा की रजनी मोदी तीसरे क्रम पर मानी जा रही है।
* वार्ड नं 40 यहां भाजपा के पुराने सरावगी परिवार से सुमन पत्नी सुशील कुमार सरावगी भाजपा की टिकट की प्रबल दावेदार है लेकिन यहां दूसरे वार्ड की निवासी पूर्व पालिका अध्यक्ष आरतीशर्मा को चुनाव में उतारने से विद्रोह पनप रहा है। आरतीशर्मा का चेयरमैन काल 1994 से 1999 तक विवादों से घिरा रहा था। आरती शर्मा यहां बाहरी होने के कारण चर्चाओं में तीसरे क्रम पर मानी जा रही है। लोगों का आकलन है कि करीब एक सौ वोटों से पीछे रहेगी। आरतीशर्मा का वार्ड इस बार ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। आरतीशर्मा खुद को फिर से चेयरमैन का दावेदार मानती हुई सामान्य वार्ड नं 40 में घुस गई। सुमन सरावगी के समर्थक ताल ठोक रहे हैं कि यहां नियम के विपरीत जाकर भाजपा ने बाहरी आरतीशर्मा का टिकट फाईनल किया है जो सहन नहीं है। अब सरावगी परिवार को पीछे नहीं हटने देंगे और सुमन को चुनाव मैदान में निर्दलीय लड़ाएंगे। कुछ भी हो यहां से चुनाव लड़ना आरतीशर्मा को हानिकारक रहेगा। चेयरमैन पद के लोभ में वर्तमान स्थिति को आलोचना का शिकार बना देगी। सबसे विपदा उन भाजपा नेताओं पर आएगी जो आरतीशर्मा का चुनाव दूसरे वार्ड से समर्थन करने वालों में हैं। जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह, नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना और नगरमंडल के पूर्व अध्यक्ष सुरेश मिश्रा का क्या होगा?
* वार्ड नं 27 से भाजपा नेता विजय गोयल अपनी पत्नी सरोज गोयल को भावी चेयरमैन के पद के लिए पार्षद का चुनाव लड़ा रहे हैं। सरोज गोयल कभी फील्ड वर्कर नहीं रही।
यहां समाजसेवी पूर्व पार्षद चरणजीत सिंह टंडन चन्नी अपनी पत्नी सुनीता टंडन को चुनाव लड़ा रहे हैं जो भाजपा पर बहुत भारी हैं। यहां भाजपा का जीतना असंभव है।
* वार्ड नं 43 से श्रीमती वीना पत्नी प्रवीण छाबड़ा भावी चेयरमैन पद की आशा में पार्षद का चुनाव भाजपा टिकट से लड़ रही है जिनकी टक्कर कांग्रेस प्रत्याशी से है। सूत्रानुसार यहां तिकड़म से वीना छाबड़ा की जीत की संभावना है और तिकड़म हो चुकी है जो जीत का नया राजनैतिक तरीका होगा।
* भाजपा में विष्णु तरड़ अपनी पत्नी को भावी चेयरमैन के चुनाव के लिए पार्षद का चुनाव लड़ा रहे हैं। चेयरमैन पद के लिए भाजपा किसको टिकट देगी यह अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।भाजपा में टिकटों को लेकर और वार्डों में भी विरोध अभी चल रहा है वह संकट पैदा करने वाला है।आरोप है कि पुराने कार्यकर्ता परिवारों को जानबूझकर पीछे धकेला जा रहा है।
* वार्ड नं 41 में भाजप के पुराने परिवारों में है डिम्मी सचदेवा परिवार। सचदेवा परिवार अपनी बेटी के लिए भाजपा की टिकट मांग रहे हैं और वहां किसी और को टिकट थमाने की तैयारी चल रही है।
*भाजपा के जीतने वाले चेहरों में पूर्व पार्षदों में ओम अठवाल वार्ड 31, राजेंद्र ताखर,जगदीश मेघवाल के नाम चर्चाओं में हैं। भाजपा के नरेन्द्र कालरा (मोनू कालरा) वार्ड नं 26 से जीत का चेहरा है। भाजपा ने पूर्व पार्षद प्रदीप चौहान को चुनाव में उतारा है जहां उनकी टक्कर कांग्रेस के योगेश मेघवाल से है। अभी मेघवाल भारी माने जा रहे हैं।
* रामप्रताप कासनिया को सन् 2003 के विधानसभा चुनाव में पीलीबंगा से भाजपा की टिकट नही मिली तब उन्होंने भाजपा से विद्रोह कर सफेद झंडे से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उस समय भाजपा की टिकट पीलीबंगा से गंगाजल मील को मिली थी। कासनिया ने कहा था कि मील को टिकट गलत दी गई है असली हकदार मैं हूं और सामने चुनाव लड़ूंगा। उस चुनाव में कासनिया जीते थे और भाजपा से अलग नहीं हुए थे।
आज ऐसी स्थिति सूरतगढ़ नगरपालिका चुनाव में है।भाजपा के अनेक कार्यकर्ता पूछ नहीं होने, सामान्य वार्ड में अन्य वर्गों को टिकट देने व बाहरी उम्मीदवार को टिकट देने से नाराज होकर कासनिया की सीख पर निर्दलीय मार्ग और
सफेद झंडा उठाने को एकजुट हो रहे हैं। जो कार्यकर्ता हक छिन जाने से क्रोधित हैं वे भाजपा के घोषित किए जा रहे नाम की भनक पड़ते ही सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में एकजुट हो रहे हैं। वे भाजपा की टिकट को वार्ड से हराकर लौटा देंगे। आगे उनकी मर्जी रहेगी कि वे बोर्ड बनाने में भाजपा के साथ रहेंगे या कोई नया ग्रुप बनाकर बोर्ड बनाने को आगे बढेंगे। ऐसी स्थिति बदली परिस्थिति में भाजपा को चेयरमैन पद जाने तक का खतरा हो सकता है। अभी तो भाजपा नेताओं को सब असंभव लगता है। लेकिन राजनीति में बहुत कुछ संभव है।
* सन् 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले स्पष्ट हो गया था कि सूरतगढ़ के सीटिंग विधायक रामप्रताप कासनिया का जबरदस्त विरोध है तथा हर हालत में हार होगी। इसके बावजूद कासनिया को भाजपा ने टिकट दिया। कासनिया को नाराज कार्यकर्ताओं ने जनता से मिलकर धूल चटा दी और गुस्से में कांग्रेस को साथ देकर डुंगरराम गेदर को विधायक चुन लिया। भाजपा के लिए और कासनिया के लिए वह बहुत बड़ी सीख थी। अब कासनिया भाजपा की टिकट निर्धारित करने वालों में हैं और उनकी तय की हुई टिकटें हराकर वापस करने को भाजपा कार्यकर्ता एकजुट होकर निर्दलीय रूप से किसी एक को साथ देकर जिताएंगे। भाजपा का एक खेमा इस चुनाव में कासनिया को नीचा दिखाने को तत्पर है जिसकी शहर में चर्चा गर्म है।
👌 जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह नगर मंडल अध्यक्ष गौरव बलाना पूर्व अध्यक्ष नगर मंडल सुरेश मिश्रा के लिए भाजपा से बागी हुए निर्दलीयों की जीत गहरी चोट होगी। ०0०
शनिवार, 29 अगस्त 2026
कासनिया ने की थी बगावत. कासनिया की राह पर भाजपा कार्यकर्ता.कांग्रेस में भी बगावत.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 29 अगस्त 2026.
रामप्रताप कासनिया को सन् 2003 के विधानसभा चुनाव में पीलीबंगा से भाजपा की टिकट नही मिली तब उन्होंने भाजपा से विद्रोह कर सफेद झंडे से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उस समय भाजपा की टिकट पीलीबंगा से गंगाजल मील को मिली थी। कासनिया ने कहा था कि मील को टिकट गलत दी गई है असली हकदार मैं हूं और सामने चुनाव लड़ूंगा। उस चुनाव में कासनिया जीते थे और भाजपा से अलग नहीं हुए थे।
आज ऐसी स्थिति सूरतगढ़ नगरपालिका चुनाव में है।भाजपा के अनेक कार्यकर्ता पूछ नहीं होने, सामान्य वार्ड में अन्य वर्गों को टिकट देने व बाहरी उम्मीदवार को टिकट देने से नाराज होकर कासनिया की सीख पर निर्दलीय मार्ग और
सफेद झंडा उठाने को एकजुट हो रहे हैं।
जो कार्यकर्ता हक छिन जाने से क्रोधित हैं वे भाजपा के घोषित किए जा रहे नाम की भनक पड़ते ही सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में एकजुट हो रहे हैं। वे भाजपा की टिकट को वार्ड से हराकर लौटा देंगे। आगे उनकी मर्जी रहेगी कि वे बोर्ड बनाने में भाजपा के साथ रहेंगे या कोई नया ग्रुप बनाकर बोर्ड बनाने को आगे बढेंगे। ऐसी स्थिति बदली परिस्थिति में भाजपा को चेयरमैन पद जाने तक का खतरा हो सकता है। अभी तो भाजपा नेताओं को सब असंभव लगता है। लेकिन राजनीति में बहुत कुछ संभव है।
* सन् 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले स्पष्ट हो गया था कि सूरतगढ़ के सीटिंग विधायक रामप्रताप कासनिया का जबरदस्त विरोध है तथा हर हालत में हार होगी। इसके बावजूद कासनिया को भाजपा ने टिकट दिया। कासनिया को नाराज कार्यकर्ताओं ने जनता से मिलकर धूल चटा दी और गुस्से में कांग्रेस को साथ देकर डुंगरराम गेदर को विधायक चुन लिया। भाजपा के लिए और कासनिया के लिए वह बहुत बड़ी सीख थी। अब कासनिया भाजपा की टिकट निर्धारित करने वालों में हैं और उनकी तय की हुई टिकटें हराकर वापस करने को भाजपा कार्यकर्ता एकजुट होकर निर्दलीय रूप से किसी एक को साथ देकर जिताएंगे।
* जिन नामों का भारी विरोध हो रहा है उनमें कृष्ण छींपा, श्रीमती संतोष गिरी, आरती शर्मा, रजनी मोदी के नाम प्रमुख हैं। अभी और नाम भी हैं। शनिवार 29 अगस्त को विभिन्न स्थानों पर एकजुटता के प्रयास हो रहे थे जो रविवार 30 अगस्त को भी जारी रहेंगे।
👌कासनिया की सीख और अब उसी तरीके से यह चोट कासनिया को कैसे रहेगी। जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह नगर मंडल अध्यक्ष गौरव बलाना पूर्व अध्यक्ष नगर मंडल सुरेश मिश्रा के लिए भी यह चोट कैसी रहेगी जब भाजपा प्रत्याशी हारेगा और भाजपा से विद्रोही बागी निर्दलीय होकर भी जीत जाएगा।
👌 ऐसे ही हालात कांग्रेस खेमे में भाजपा से भी बढ कर हो रहे हैं। कांग्रेस में भी विधायक डुंगरराम गेदर को सबक सिखलाने के लिए नाराज कार्यकर्ता निर्दलीय का साथ देंगे।
* अनेक भाजपा व कांग्रेस के कार्यकर्ता पार्टी का और एक निर्दलीय का फार्म भर रहे हैं ताकि जरूरत पड़ जाए तो निर्दलीय चुनाव लड़ लें।
०0०
निर्वाचन अधिकारी को दी जाने वाली सूची अधिकृत सूची होगी. प्रत्याशियों को मौखिक फोनिक तैयारी करो खेल बन जाएगा..
* करणीदानसिंह राजपूत *
(29 अगस्त 2026)
राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में राजनैतिक पार्टियों ने मौखिक, फोनिक कहा कि तुम्हारी टिकट पक्की है, तैयारी करो के बावजूद नाम कटना,बदलाव होना खेला होगा। ये कथन पूर्ण पक्के नहीं। निर्वाचन अधिकारी को दी जाने वाली सूची अधिकृत सूची होगी।
* पार्टी ने मौखिक या फोनिक कह दिया कि तुम्हारा नाम है तैयारी करो। बाद में पता चला कि उक्त जीत नहीं सकता, विरोध से परिणाम परिवर्तन होगा पार्टी की शतप्रतिशत हार होगी तब अचानक नाम बदल जाने का ओप्शन पार्टी के पास होगा। पार्टी नया नाम तय कर लेगी और वह निर्वाचन अधिकारी को दी जाने वाली सूची में जोड़ देगी। कार्यकर्ता को तो मौखिक और फोन पर कहा था,और नाम बदल जाने पर वह किसके सामने कहेगा कि इस तरह से उसके साथ धोखा सा हो गया है। पार्टी की तरफ से कहा जाएगा तुम्हारा जबरदस्त विरोध है, सीट नहीं निकाल सकोगे तब वह कैसे प्रमाणित करेगा कि सीट निकाल देगा।
* इस प्रकार से बदलाव होने की आशंका प्रबल है। भाजपा और कांग्रेस ने जिन तरीकों से प्रत्याशियों के नाम तय किए हैं उन पर जबरदस्त विरोध हो रहे हैं। नाम बदले जा सकते हैं, यह सभी के ध्यान में होना चाहिए।
०0०
भाजपा में नाराजगी से तूफान.23 प्लस प्लान से हालात 15 प्लस पर खिसका.क्या होगा?
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 29 अगस्त 2026.
भाजपा के प्रत्याशियों के नामों की भनक से उपजे हालात बिगड़ कर रक्षाबंधन त्यौहार के दिन व्यस्तता में विरोध के स्वर अब वार्डों में फैले हैं उनसे बोर्ड बनाने का दावा कर रही भाजपा की स्थिति डाउन होने की चर्चा से कुछ वार्डों में निर्दलीय का माहौल बनने लगा है। सामान्य वार्डों में ओबीसी,सामान्य वार्ड में बाहरी,फील्ड वर्कर के बजाय अन्य को टिकट फाईनल के होने की भनक से भाजपा में फूट का उफान है। यह टिकट वितरकों को दिखाई नहीं देता।
मेरा अभी दो दिन पहले रिपोर्ट थी कि भाजपा 23 प्लस की नीति से चुनाव लड़ने की तैयारी पर है। इसके बाद भाजपा के कदावर नेता ने चर्चा में कहा कि 23 प्लस से और आगे भाजपा 30 प्लस की योजना के अनुसार चुनाव लड़ने पर है और आज जब विभिन्न वार्डों में विरोध के स्वर उठ रहे हैं और भाजपा की ताकत कमजोर हो रही है तब खिसकती हालत में भाजपा अब 15 प्लस पर है। बहुत बार सत्ता का नशा और अकड़ काम नहीं आती और यह स्थिति दो चार दिन में भाजपा नेताओं और विद्रोह वाले वार्डों में थोपे जाने वाले प्रत्याशियों को असली वोट का आईना दिखा देगी।
* वार्ड नं 30 सामान्य घोषणा के तुरंत बाद सुशील तावणिया ने भाजपा टिकट की दावेदारी और चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। वहां ओबीसी वर्ग से कृष्ण छींपा ने भी भाजपा टिकट की दावेदारी और चुनाव लड़ना है कि घोषणा कर दी। कृष्ण छींपा का परिवार पिता सत्यनारायण व माता ही काफी सालों से चुनाव लड़ते रहे हैं। अब टिकट कृष्ण छींपा को टिकट दिए जाने की चर्चा हो रही है। इसके साथ ही विरोध भी शुरू हो गया है कि सामान्य वर्ग फिर कब चुनाव लड़ेगा,जब नंबर आए हुए भी टिकट नहीं मिले। सुशील कुमार तावणियां ब्राह्मण जाति से हैं और भाजपा के प्रसिद्ध कार्यकर्ता हैं। विरोध शुरू होने से कृष्ण छींपा की जीत और खुशियां प्रभावित होंगी।
* वार्ड नं 45 सामान्य वार्ड है जहां पूर्व पार्षद श्रीमती संतोष गिरी को फिर से भाजपा टिकट दिए जाने की चर्चा से नाराजगी शुरू है। संतोष गिरी ओबीसी वर्ग की है। इस वार्ड में सामान्य वर्ग के कई लोग चुनाव मैदान में हैं।
* वार्ड नं 19 सामान्य है। भाजपा यहां श्रीमती रजनी मोदी को चुनाव में उतारने की तैयारी में है। जबकि इस वार्ड के क्षेत्र में रिंकु सिद्दीकी परिवार की पकड़ मजबूत है। सिद्दीकी परिवार विकास कार्यों का ताकतवर नेता है जबकि रजनी मोदी फील्ड में किसी भी विकास से जुड़ी हुई नहीं है। यहां रजनी मोदी को चुनाव में उतार दिया जाता है तो कांग्रेस की जीत की संभावना बढ जाती है। यहां कांग्रेस हरीश दाधीच निवृत हुए पार्षद को चुनाव में उतार रही है। हरीशदाधीच पिछले चुनाव में भाजपा से थे और अब भाजपा नेताओं से नाराजगी की वजह से कांग्रेस में चले गये।
* वार्ड नं 40 यहां भाजपा के पुराने सरावगी परिवार से सुमन पत्नी सुशील कुमार सरावगी भाजपा की टिकट की प्रबल दावेदार है लेकिन यहां दूसरे वार्ड की निवासी पूर्व पालिका अध्यक्ष आरतीशर्मा को चुनाव में उतारने की संभावना से विद्रोह पनप रहा है। आरतीशर्मा का चेयरमैन काल 1994 से 1999 तक रहा था। आरती शर्मा यहां बाहरी होने के कारण चर्चाओं में तीसरे क्रम पर मानी जा रही है। लोगों का आकलन है कि करीब एक सौ वोटों से पीछे रहेगी। आरतीशर्मा का वार्ड इस बार ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। आरतीशर्मा खुद को फिर से चेयरमैन का दावेदार मानती हुई सामान्य वार्ड नं 40 में घुस गई। सुमन सरावगी के समर्थक ताल ठोक रहे हैं कि यहां नियम के विपरीत जाकर भाजपा बाहरी आरतीशर्मा को टिकट देती है तो वे सरावगी परिवार को पीछे नहीं हटने देंगे और सुमन को चुनाव मैदान में निर्दलीय लड़ाएंगे। कुछ भी हो यहां से चुनाव लड़ना आरतीशर्मा को हानिकारक रहेगा। चेयरमैन पद के लोभ में वर्तमान स्थिति को आलोचना का शिकार बना देगी। सबसे विपदा उन भाजपा नेताओं पर आएगी जो आरतीशर्मा का चुनाव दूसरे वार्ड से समर्थन करने वालों में हैं। जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह, नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना और नगरमंडल के पूर्व अध्यक्ष सुरेश मिश्रा का क्या होगा?
* वार्ड नं 27 से भाजपा नेता विजय गोयल अपनी पत्नी सरोज गोयल को भावी चेयरमैन के पद के लिए पार्षद का चुनाव लड़ा रहे हैं। यहां समाजसेवी पूर्व पार्षद चरणजीत सिंह टंडन चन्नी अपनी पत्नी सुनीता टंडन को चुनाव लड़ा रहे हैं जो भाजपा पर बहुत भारी हैं।
* वार्ड नं 43 से श्रीमती वीना पत्नी प्रवीण छाबड़ा भावी चेयरमैन पद की आशा में पार्षद का चुनाव भाजपा टिकट से लड़ रही है जिनकी टक्कर कांग्रेस प्रत्याशी से है। कांग्रेस यहां भाजपा से कुछ अधिक ताकतवर है और भाजपा के पसीने निकालने वाले चुनाव है।
* भाजपा में विष्णु तरड़ अपनी पत्नी दीपा तरड़ को भावी चेयरमैन के चुनाव के लिए पार्षद का चुनाव लड़ा रहे हैं। चेयरमैन पद के लिए भाजपा किसको टिकट देगी यह अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।
* वार्ड नं 41 की हालत।
भाजपा में टिकटों को लेकर और वार्डों में भी विरोध अभी चल रहा है वह संकट पैदा करने वाला है।आरोप है कि पुराने कार्यकर्ता परिवारों को जानबूझकर पीछे धकेला जा रहा है। वार्ड नं 41 के पुराने परिवारों में है डिम्मी सचदेवा परिवार। सचदेवा परिवार अपनी बेटी के लिए भाजपा की टिकट मांग रहे हैं और वहां किसी और को टिकट थमाने की तैयारी चल रही है। ०0०
गुरुवार, 27 अगस्त 2026
भाजपा के नगर निकाय चुनाव के नियम और असली नीति कालिमा भरी. पार्टी में नाराजगी.
* करणीदानसिंह राजपूत *
राजस्थान नगर निकाय चुनाव में भाजपा ने पार्षद चुनाव आवेदन में नियम और असलियत में भेद होने के कारण आवेदन प्रक्रिया के बीच कार्यकर्ता तथा समर्थकों में असंतोष फैल रहा है। इस असंतोष का असर भाजपा के पक्ष में मतदान पर पड़ सकता है। असंतुष्ट कार्यकर्ता व समर्थक पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं करके कांग्रेस प्रत्याशी या शक्तिशाली निर्दलीय के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। इससे भाजपा प्रत्याशी को मत कम मिलने से जीत खटाई में जा सकती है।
* आवेदन प्रपत्र में वार्ड में निवास और वोट होना आवश्यक बताया गया। ऐसी स्थिति में अन्य वार्ड के निवासी से आवेदन प्रपत्र मना होने चाहिए थे। हां,वार्ड में कोई आवेदक नहीं हो तो बाहरी वार्ड वासी को टिकट देने के लिए ऐसे आवेदन लेने में कोई प्रतिबंध नहीं हो सकता। लेकिन वार्ड में आवेदक हो तब बाहरी पर विचार की नीति शून्य रखनी चाहिए थी। वार्ड पैनल में वार्ड वासी और बाहरी दोनों को ही शामिल कर लिया गया।
अब बाहरी आवेदक को पार्टी की टिकट दी जाती है तो विद्रोह होने की प्रबल आशंका रहेगी। बाहरी को वोट नहीं मिलेंगे, कम मिलेंगे तो हार निश्चित होगी।
* कुछ नेताओं के विचार हैं कि बाहरी बड़े नेता की इससे हेकड़ी यानि अकड़ निकल जाएगी जब वह हारेगा। वह हार के बाद अच्छी तरह से भविष्य के लिए भी टिक जाएगा। इस तरह से पार्टी में बड़े कार्यकर्ता को हरा कर घर बैठा देने की गुप्त नीति भी चलती है।
* सामान्य वार्ड में आरक्षित वर्ग के कार्यकर्ता को टिकट देने के लिए पैनल में नाम लिखा जाना भी खतरनाक है। सामान्य वर्ग की शिकायत है कि अब हमारा नंबर है और बाद में न जाने कितने वर्ष और बीत जाएं। सामान्य वर्ग में लड़ने को तो कोई भी,आरक्षित वर्ग का व्यक्ति भी लड़ सकता है। लेकिन सामान्य वर्ग के कार्यकर्ता की पीड़ा को भी समझा जाना चाहिए था। ऐसे में सामान्य वार्ड में भाजपा द्वारा आरक्षित वर्ग से आवेदन प्रपत्र लिया ही नहीं जाना चाहिए था। भाजपा की इस तरह की नीति से आम कार्यकर्ता नाराज हो रहा है। कार्यकर्ताओं की नाराजगी बढती है तब तो जीत का खेल हार में बदल सकता है। एक सच्च यह है कि भाजपा में छोटे कार्यकर्ता की न सुनवाई होती है न कोई पूछ होती है। ऐसी स्थिति में गुस्से से वोट किसी दूसरी पार्टी के प्रत्याशी की ओर खिसक जाता है। 27 अगस्त 2026.
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बुधवार, 26 अगस्त 2026
भाजपा बनाएगी नगरपालिका बोर्ड. सूरतगढ़ में 23 प्लस नीति. लेटेस्ट.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 26 अगस्त 2026.भाजपा की आज प्रातः शुरू हुई बैठकें सूरतगढ़ और जिला मुख्यालय पर सूरतगढ़ में पूर्ण बहुमत 23 + से नगरपालिका बोर्ड बनाने की रणनीति पर हुई। पैंतालीस वार्डों में बोर्ड बनाने के लिए 23 वार्डों में जीत चाहिए लेकिन भाजपा यहां कांग्रेस की कमजोरी के मध्यनजर 23 से भी अधिक वार्डों में जीत की नीति पर चुनावी संघर्ष हर वार्ड में लड़ने को है। जिला प्रभारी दशरथ सिंह शेखावत और चुनाव प्रभारी जसवंत सिंह ईंदा,निवृत हुए नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा और भाजपा जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह की संपूर्ण टीम लगी है। दशरथसिंह शेखावत को अनेक चुनावों का अनुभव है।
* भाजपा बोर्ड बनाने की ओर होने का मतलब है कि कांग्रेस कमजोर है। कांग्रेस के नेता हार से डर कर चुनाव में खड़े होने से डर रहे हैं। ऐसे भयभीत कांग्रेसियों के घेरे में विधायक डुंगरराम गेदर जीत से बहुत दूर हैं। कुछ वार्डों में कांग्रेस की टिकट लेने वाले नहीं है। वहां व्यक्ति ढूंढ ढूंढ कर टिकट दी जाने की कसरत हो रही है। राठी स्कूल के पीछे का वार्ड इस बार ओबीसी रिजर्व हो जाने के बाद भाजपा मजबूत है। यहां भाजपा की टिकट प्रेमसिंह खारवाल (राठौड़) ने मांगी हुई है। प्रेमसिंह की स्थिति बहुत मजबूत है। यह परिवार करीब 40 सालों से भी अधिक समय से भाजपा परिवार का वरिष्ठ परिवार है। यहां कांग्रेस की टिकट लेने से लोग खिसक गये। अब एक व्यक्ति को टिकट लेने के लिए मनाया गया है।
* धर्मदास सिंधी पहले की पावर में नहीं हैं।
* कांग्रेस में गंगाजल मील ताकतवर थे जिन्होंने 2009 के बाद 2019 में कांग्रेस के बोर्ड बना दिए थे। (हालांकि 2019 में चेयरमैन बने ओमप्रकाश कालवा ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली)। कांग्रेस के पास अब गंगाजल मील के स्वर्ग वास के बाद उतना पावरफुल चेहरा नहीं जो जोड़तोड़ बिठा ले। भाजपा के पास रामप्रताप कासनिया पावरफुल है जो आवश्यकता पड़ने पर निर्दलीय पार्षदों को भाजपा में लेजा सकता है। ऐसी ताकत कांग्रेस के विधायक डुंगरराम गेदर में नहीं कि किसी निर्दलीय पार्षद को कांग्रेस के खेमे में ले जाए।
* चेयरमैन कुर्सी महिला के लिए आरक्षित होने के बाद भाजपा के पास इस पद के लिए कई चेहरे हैं लेकिन कांग्रेस के पास अभी तक कोई चेहरा सामने नहीं आया है। भाजपा की ताकत इस चुनाव में प्रतिदिन कुछ बढ रही है। ०0०
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