करणी प्रेस इंडिया

गुरुवार, 26 फ़रवरी 2026

अवैध मार्केट काम्पलेक्स निर्माण और अधिकारियों की मिलीभगत. सूरतगढ़.

 
० भाजपा के नेताओं लोगों पर आरोप है और कांग्रेस के नेता चुप हैं।

सूरतगढ़ 26 फरवरी 2026.

नगरपालिका प्रशासन की मिलीभगत से अवैध शोपिंग काम्पलेक्स और दुकानों का निर्माण हो रहा है।  नगरपालिका प्रशासन के अधिकारी इन अवैध निर्माणों पर कार्वाई करके नगरपालिका को आय कराने के बजाय अपना घर भरने में लगे हैं। आवासीय भूखंडों पर अवैध व्यावसायिक निर्माण पर मिलीभगत। नगरपालिका की जमीन पर अतिक्रमण और उस पर भी व्यावसायिक निर्माण। इन अवैध निर्माणों के अनेक के सचित्र समाचार भी छपे हैं लेकिन नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी की ओर से जानकारी मिल जाने पर भी कार्वाई नहीं की गई। नगरपालिका की ओर से तुरन्त ही निर्माण रूकवाने और जब्ती की कार्रवाई की जाने के बजाय नोटिस दिए जाकर ऊपर ही रकम लेकर मामले दबा दिए जाते हैं। अनेक मामले हैं जिनमें नोटिस दिए गये।जेबें भरी गई और फिर कोई कार्वाई नहीं हुई। नेशनल हाईवे के होटल निर्माण पर नोटिस कार्वाई नहीं। एक कालोनी में गलत निर्माण पर नोटिस मगर गुपचुप लेनदेन और मामला बस्ते में बंद।



 एक स्कूल संचालक (शर्मा बाल मंदिर) को अवैध निर्माण पर 1 लाख से अधिक की शास्ति का नोटिस ईओ के हस्ताक्षर और डिस्पैच नंबर लगाने के बाद गुपचुप मामले को दबा दिया गया। नगरपालिका कोष को एक लाख से अधिक रू.का नुकसान का स्पष्ट भ्रष्टाचार हो गया। इसमें बचाव भी नहीं। ऐसे अनेक मामले हैं। अतिक्रमण तोड़ने के मामलों में गरीबों की सामग्री ईंटें लोह सामान जब्त लेकिन नेताओं के अतिक्रमण में कार्वाई करनी भी पड़े तो लाखों की सामग्री जब्त नहीं, ताकि वह दुबारा अतिक्रमण कर सके। ताजा मामला निरंकारी भवन के पीछे एक बड़े अतिक्रमण का है जिसे हटाया गया मगर सामग्री ज्यों की त्यों जानबूझकर छोड़ दी गई। इस मामले में जानबूझकर की गई इस गड़बड़ी से उपखंड अधिकारी को अवगत कराने की सूचना है। ०0०






का. हेतराम बेनीवाल को सूरतगढ़ में श्रद्धांजलि 27 को.

 

* करणी प्रेस इंडिया *

सूरतगढ़ 26 फरवरी 2026.

कामरेड हेतराम बेनीवाल को यहां श्रद्धांजलि अर्पण कार्यक्रम 27 फरवरी अपरान्ह 3 बजे शुरू होगा। बीकानेर रोड पर स्थित अरोड़ वंश धर्मशाला भवन में यह कार्यक्रम रखा गया है। किसान मजदूर और गरीब के लिए जीवन भर संघर्ष करने वाले पूर्व विधायक हेतराम बेनीवाल को सदा याद किया जाएगा। हेतराम बेनीवाल का 23 फरवरी 2026 रात्रि 10-30 बजे के करीब 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। कामरेड को विभिन्न स्थानों पर श्रद्धांजलि देने के कार्यक्रम हो रहे हैं।०0०






माखण खालो बनवारी,मत मारो पिचकारी. धमाल-कविता, करणीदानसिंह राजपूत.


आयो होली रो तिंवार
लाओ रंग गुलाल
मारी मारी पिचकारी
घेरो डाल्यो रै बनवारी
गोप्यां करै मनवार
जोड़े हाथ बारंबार
मत मारो पिचकारी
छोड़ो छोड़ो रे बनवारी।
गोप्यां आई पनघट
घड़िया भरिया लबालब
पूठी घरां नै बै चाली
घेरो डाल्यो बनवारी
मारी रंगभरी पिचकारी।
अंधेरे अंधेरे गोप्यां माखण ले रे चाली
झुरमुटां रै बीच रस्ता रोक्या बनवारी
गोप्यां करै मनवार
माखण खाल्यो बनवारी
मत मारो पिचकारी।
गोपाला गुलाल लाया
चंग जोरां सूं बजाया
मारी रंगभरी पिचकारी
चूनर लाल कर डाली।
आयो होली रो तिंवार
लाओ रंग गुलाल
मारी मारी पिचकारी
घेरो डाल्यो रै बनवारी।

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करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़.
94143 81356.
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अपडेट. 12 मार्च 2025.

अपडेट 26 फरवरी 2026.












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पेटीकोट- कहानी - करणी दान सिंह राजपूत*

 
जज रायचंद डागा ने मेरी ओर देखा और आरोप सुनाया।
 तुम अपनी पत्नी का पेटिकोट धोते हो।
मैं बोला। सर मेरी रिक्वेस्ट सुनें।
 मैं आगे बोलने वाला ही था कि उन्होंने बीच में टोक दिया। तुमसे जो पूछा जाय केवल उसका जवाब केवल हां ना में दें।ज्यादा बोलने की जरूरत तुम्हें एक बार कह दिया।दो बार कह दिया। अक्ल है कि नहीं है ? तुम केवल हां या ना में जवाब दो। पत्नी का पेटीकोट धोया था या नहीं? धोया था  तो बोलो हां। नहीं धोया  था तो बोलो ना।
मैं चुप हो गयी। मैं डर गया।मैं बताना चाहता था,मगर रायचंद डागा जी की अदालत कोई अलग नहीं थी। वही प्रक्रिया थी जो आम अदालतों में अपनाई जाती है।
काले कोट वाले वकील ने कहा जज साहब क्या कह रहे हैं?क्या पूछ रहे हैं? उसका जवाब दो। तुमने पत्नी का पेटीकोट धोया था या नहीं?
लकील भी वही वाक्य वही शब्द बोला जो जज ने कहा था।
वकील ने पुनः पूछा। तुमने पत्नी का पेटीकोट धोया था या नहीं? केवल हां या ना में जवाब दो। धोया था तो हां कहो नहीं धोया था तो ना कहो।
 मैं वकील का मुंह देखने लगा। कोई सुनने को तैयार नहीं था।
अदालत में वकील प्रश्न पर प्रश्न करते जाते हैं और पूरी बात जानने की कोशिश नहीं करते। अपने आरोपों  को साबित करने के लिए कठघरे में खड़े आरोपित से केवल हां या ना में ही उत्तर चाहते हैं।
मैं आरोपी था।मैं चुप था।
मैं क्या बोलता।पत्नी का पेटीकोट धोया था, मगर क्या हालत थी.....अभी बखान करने की सोच ही रहा था कि हां कहूं या ना कहूं।अगर ना कहता हूं तो चल जाएगा। लेकिन घर में जो ठप्पा है, जनता में जो ठप्पा है सच बोलने का उसका क्या होगा?मेरी आत्मा में ग्लानी होगी। अदालत में झूठ बोला।
मैंने निर्णय किया मन ही मन में  कि इस सच को बोल दूं।
मैं सोच रहा था कि जज रायचंद डागा ने मुझे घूरा और कहा कि जल्दी बोलो।अदालत का वक्त जाया करने की जरूरत नहीं है। जल्दी से बोलो पत्नी का पेटीकोट धोया था या नहीं धोया था? केवल हां और ना में जवाब देना।
जज ने जल्दी से बोला और मैंने जल्दी से उत्तर दे दिया।
हां।
उसके साथ ही मेरे मुंह से पूरा वाक्य निकल गया।धोया था पत्नी का पेटिकोट।
पूरी अदालत में हंसी के फव्वारे छूट पड़े।
हंसी का शोर अदालत के कमरे में गूंज उठा।
जज रायचंद डागा ने मेज पर हथौड़ी बजाई। कुछ देर में अदालत के कमरे में शांति  छा गई।
 सामने खड़े काले कोट वाले वकील ने मेरे से कहा तो तुम स्वीकार करते हो की पत्नी का पेटीकोट धोया था। तुम पर किसी ने दबाव नहीं डाला है।तुम्हें डराया नहीं, धमकाया नहीं।
तुम अपनी इच्छा से यह स्वीकार करते हो की तुमने पत्नी का पेटीकोट धोया। तम्हें इसकी सजा दी जाएगी। वकील चुप हुआ।
एक बार फिर अदालत में शोर हुआ।
जज रायचंद डागा ने फिर मेज पर हथोडा बजाया।
जज साहेब बोले।
शांत।शांत। अगर किसी ने शोर किया तो अदालत से बाहर निकाल दूंगा। सभी चुप बैठे रहें।अदालत का कमरा एक दम शांत हो गया।
सब चुप हो गए।
जज रायचंद डागा ने मेरी तरफ देखा और कहा कि तुमने भरी अदालत में यह आरोप पत्नी का पेटीकोट धोते हो स्वीकार किया है। तुम्हे इसके लिए दंड मिलेगा। तुमने समाज के नियमों को तोड़ा है। तुम्हें इसकी सजा जरूर और जरूर सुनाई जायेगी। समाज के नियम तोड़ना बहुत गंभीर अपराध है।अब तुम सजा सुनने के लिए तैयार हो।
मैंने अदालत के पूरे कमरे में नजर घुमाई कि कोई तो मेरे साथ होगा लेकिन कोई भी मेरे साथ नहीं था। सब मुझे हंसी का पात्र बनाने में मजा ले रहे थे। सभी के चेहरों से लग रहा था कि वे सब मुझे दंडित होते हुए देखना चाहते थे। मैं क्या कहूं? क्या बखान करूं? मेरे मित्र उनमें थे। कुछ अड़ोस पड़ोस के लोग भी थे। 
राजनीतिक कार्यकर्ता,सामाजिक कार्यकर्ता, अनेक प्रतिष्ठित जन मौजूद थे। उनमें वे लोग भी थे जिनके मैंने बहुत काम करवाए  व खुद ने किए थे।उनकी समस्याओं का हल किया था, लेकिन आज सभी भरी अदालत में मुझे दंडित होते हुए देखने को उतावले हो रहे थे।
आखिर जज ने एक बार फिर हथोड़ा बजाया और मेरा नाम लेकर कहा। तो तुम अब सजा सुनने के लिए तैयार हो?
मैंने जज साहब से हाथ जोड़कर निवेदन किया। आप मुझे पत्नी का पेटीकोट धोने की जो सजा देंगे वह मुझे मंजूर होगी। लेकिन आप एक बार मेरी बात को सुनलें।
जज ने मेरी तरफ देखा और रहम किया। बोलो तुम क्या बोलना चाहते हो, लेकिन यह ध्यान रखना तुम्हारे बोलने से अदालत प्रभावित नहीं होगी। अदालत भावनाओं में नहीं बहेगी। तुम्हें जो सजा सुनाई जाएगी। वह सुनाई ही जाएगी और जरूर सुनाई जाएगी। अदालत को भावनाओं में बहाने की कोशिश मत करना। अदालतें भावनाओं में फैसले नहीं करती। तुम्हारा अपराध तुमने खुद ने भरी अदालत में स्वीकार कर लिया है। तुमने पत्नी का पेटीकोट धोया था। अब बोलो तुम क्या कहना चाहते हो?
मैंने जज रायचंद डागा की तरफ देखा।
एक बार पुनःअदालत में बैठे महानुभावों को देखा और फिर मैं बोला।
जज साहब हमारे घर में वाशिंग मशीन है जिस पर घटना वाले दिन पत्नी कपड़े धोने में लगी हुई थी। वाशिंग मशीन चल रही थी।वाशिंग मशीन मैं कपड़े धुल रहे थे।
इतने में डोर बेल बजी। दरवाजे पर कोई आया है। पत्नी ने मुझे पुकारा मैं दूसरे कमरे बैठक में बैठा था।
पत्नी की आवाज आई- सुनते हो, थोड़ा मशीन पर आना।मैं दरवाजा खोलने जा रही हूं। कपड़े निकाल कर ड्रायर में डाल देना।
 मैं मशीन पर गया। मुझे मालूम नहीं था कि मशीन में क्या धुल रहा है।
मैने मशीन को रोका और टब में से कपड़े निकाल कर ड्रायर में डालने लगा।
इतने में ही पत्नी के साथ मशीन के पास पड़ोसन आ गई।मैं कपड़े निकाल कर ड्रायर में डाल रहा था,उन कपड़ों में पत्नी का पेटीकोट  भी था।मेरे सफेद कपड़ों पर पड़ोसन की नजर गई या नहीं गई लेकिन लाल रंग के पेटीकोट पर नजर चली गई। 
पड़ोसन ने उस समय हंसी में पत्नी से कहा ,अरे तुम्हारी तो मौज। तुम अपने पति से कपड़े धुलवाती हो और पेटीकोट भी।
पड़ोसन ने यह बात पड़ोस में फैला दी। बस इतनी सी बात थी जिसका पहले मोहल्ले में हल्ला हुआ फिर समाज में हुआ और मैं दोषी बना दिया गया। समाज के जाने माने लोगों ने पूछा तो मैंने हां कर दी। इसमें ना करने जैसी कोई बात मुझे नजर नहीं आई।
 जज साहब मैं यह ध्यान दिलाना चाहता हूं। किसी पर आरोप नहीं लगा रहा, लेकिन केवल जानना चाहता हूं कि घर में पति-पत्नी दो ही हो और पत्नी बीमार हो जाए। तब उसके कपड़े कौन धोएगा? फिर आजकल तो थापी सोटे से कोई कपड़े नहीं धोता।वाशिंग मशीन में डाल देते हैं और बिजली का बटन दबा देते हैं। कपड़े धुल जाते हैं।
 जज साहब पत्नी की बीमारी में मैंने पहले थापी सोटे से जब कपड़े धोए तब कोई बवाल नहीं मचा। किसी ने देखा नहीं था।
 जज साहब।क्या अदालत  जितने लोग बैठे हैं, इन्होंने कभी अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोया होगा। लेकिन यह आरोपित नहीं है। एक बार अदालत में शोर सा हुआ।
जज ने कहा तुम्हें किसी भी व्यक्ति पर आरोप लगाने की कटाक्ष करने की इजाजत नहीं है। तुम केवल और केवल अपनी बात कहो जिसकी इजाजत दी गई है।
जज साहब मैंने जाने अनजाने में यह कहा है लेकिन यह सच्च तो है। मैं माफी चाहता हूं।
मैं स्वीकार करता हूं। एक बार फिर कहा मैंने पत्नी का पेटीकोट धोया था। आप जो चाहे सजा सुनाएं। मुझे वह सजा कबूल होगी मंजूर होगी। मैं सजा का पालन करने का वादा करता हूं ।
जज रायचंद डागा नामी जज बड़े सुलझे हुए मगर जज की कुर्सी पर बैठने के बाद उनका रुतबा ही कुछ और हो जाता था।
सारे इलाके में रायचंद डागा का नाम और उनकी सजा से सभी डरते थे।
मैं उनके सामने सजा सुनने को तैयार खड़ा था।
उन्होंने एक बार हथोड़ा बजाया।
अदालत में शांति छा गई और अदालत में उपस्थित सभी लोग एकटक जज की तरफ देखने लगे।
मैं भी सजा सुनने के लिए तैयार था।
रायचंद डागा जज ने सजा सुनाई।
तुम पत्नी का पेटीकोट धोने का आरोप स्वीकार कर चुके हो।अब तुम्हें जो सजा सुनाई जा रही है वह ध्यान से सुनो, और उस पर कोई सवाल जवाब की इजाजत नहीं होगी।
 जज ने सजा सुनाई "तुम आगे कभी अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोओगे।
मैं जज साहब को देखने लगा।
मैंने रिक्वेस्ट की सर इस निर्णय से तो मेरी बदनामी होगी।मेरा निवेदन सुनें। अदालत में शोर होने लगा जल्दी ने फिर हथोड़ा बजाया। अदालत में शांति हुई।
मैंने रिक्वेस्ट की।जज साहब मैं आपसे बार-बार हाथ जोड़कर निवेदन करना चाहता हूं कि इस फैसले से तो मैं कहीं का नहीं रहूंगा। मेरी बदनामी होगी। आपने यह कैसा फैसला सुना दिया?
 आप ने सुनाया है कि आगे से कभी अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोऊं।
जज साहब मेरा एक निवेदन है। आप इस वाक्य में से केवल एक शब्द "अपनी" बस यही शब्द काटने का रहम करें। जज साहब मैं आपके निर्णय पर कोई आपत्ति नहीं करना चाहता लेकिन आपने जो निर्णय दिया कि मैं आगे से अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोऊंगा। इससे लोग यह निर्णय निकालेंगे कि मुझे दूसरों की पत्नियों का पेटीकोट धोने की मनाही नहीं है।मेरे पर रहम फरमाएं।
जज ने कड़ी नजरों से मेरी तरफ देखा और कहा कि तुम्हें कितनी बार समझाया गया है। तुम अदालत के फैसले पर आपत्ति कर रहे हो। अदालत जो फैसला दे चुकी है वह आज और इसी समय से लागू हो गया है। तुम्हें जो कुछ कहना है तो बड़ी अदालत में अपील में कहना। तुम्हें अपील करने की इजाजत दी जाती है।
 इस अदालत का यही निर्णय है कि तुम आगे कभी अपनी पत्नी का पेटीकोट नहीं धोओगे।
मैं नोटबंदी में फंस गया। बैंक में बचत खाते में से भी खुद की ही रकम निकाल नहीं पाया। शर्म मरते किसी दोस्त से भी रूपये मांग नहीं पाया।मैं बड़ी अदालत में अपील में नहीं जा पाया।
जज रायचंद डागा का फैसला लागू रह गया कि मैं "अपनी"  पत्नी का पेटीकोट नहीं धो सकता।
***************** काल्पनिक **************
 *होली की शुभकामनाएं सहित यदि आपको मसखरी -हास्य पसंद है तो आगे शेयर करें।
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करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
 सूरतगढ़।
मो 94143 81356.
***************"
प्रथम - 17 मार्च 2017.
अपडेट 26 फरवरी 2026.















बुधवार, 25 फ़रवरी 2026

सूरतगढ़ में नया ईओ कौन.पूजा शर्मा की सीएम को शिकायत.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 25 फरवरी 2026.

नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा की एक बड़ी शिकायत मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सौंपी गई थी जिस पर कार्वाई के खुफिया संकेत हैं। सूत्रानुसार यह शिकायत  भाजपा नेता पूजा छाबड़ा ने स्वयं उपस्थित होकर दी। 

सूत्र के अनुसार शिकायत गंभीर है और उस पर कार्वाई होना लाजिमी है। सूत्र के अनुसार कार्वाई में ईओ पूजा शर्मा को यहां से हटाया जाना निश्चित है। 

एक दुसरे सूत्र अनुसार किसी अन्य ईओ को यहां लाए जाने की डिजायर भी हो चुकी है। अभी ईओ के स्थानांतरण पर प्रतिबंध है जिसके हटते ही आदेश होंगे। पवन चौधरी की आने की भनक है जो पहले भी कुछ दिनों के लिए यहां ईओ पद पर कार्य कर चुके हैं।

* एक तीसरे सूत्र की सूचना के अनुसार ईओ पूजा शर्मा यहां सूरतगढ़ में ही रहने के लिए अपने प्रयास में पूरा जोर लगाए हुए है। पूजा शर्मा पर कोई भी कार्वाई होती है तो उससे पहले पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया की जानकारी में लाया जाएगा। प्रशासनिक राय कासनिया की ही चलती है।

पूजा शर्मा का सूरतगढ़ में दो साल का कार्यकाल 18 फरवरी को पूरा हो चुका है। पूजा शर्मा ने यहां 20 फरवरी 2024 को कार्यभार ग्रहण किया था।०0०






एसडीएम की सख्ती से प्रभावी अतिक्रमण ध्वस्त. सूरतगढ़ की बड़ी खबर.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ 25 फरवरी 2026.

उपखंड अधिकारी भरत जयप्रकाश मीणा की सख्ती से सार्वजनिक उपभोग की बीसियों लाख रू के कीमती भूखंड से नगरपालिका ने पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमण ध्वस्त किया। मौके पर रजनी नामक एक स्त्री बार बार विरोध करती हुई जेसीबी के आगे खड़ी हो रही थी। पुलिस ने समझाईस की और नहीं मानने पर उसे कालिका महिला पुलिस ने पकड़ कर हटाया और हिरासत में लिया। मौके पर अनेक भू माफिया व्यक्ति भी भीड़ में मौजूद थे। पहले जब फोर्स पूरी नहीं थी तब अतिक्रमण ध्वस्त शुरू नहीं हुआ तब लोगों में चर्चा हो रही थी कि यह कब्जा तोड़ना आसान नहीं है और टूटेगा भी नहीं। नगरपालिका प्रशासन ईओ स्तर तक बड़ा दबाव होने की चर्चा हो रही थी। जब ध्वस्त की कार्वाई शुरू नहीं हुई तब उपखंड अधिकारी को यह शिकायत की गई। उपखंड अधिकारी ने ध्वस्त करने का आदेश दे दिया था और कार्वाई नहीं होने पर वे मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे और सख्त आदेश देकर लौटे। इसके बाद पुलिस का जाब्ता महिला पुलिस के साथ पहुंचा तब शाम को 6- 45 बजे के लगभग कार्वाई शुरू हुई। अतिक्रमण के पीछे ताकत होने और ऐसी स्थिति में ध्वस्त होने की कार्वाई को देखने को आसपास भारी भीड़ एकत्रित हो गई थी। कई  जनें इसका विडिओ बनाने लगे। अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा मौके पर नहीं थी और बताया जाता है कि आज कार्यालय में भी नहीं थी। अतिक्रमण ध्वस्त की चर्चा और हर जगह उपखंड अधिकारी भरतजयप्रकाश मीणा की सख्ती की चर्चा हो रही थी।














 * निरंकारी सत्संग भवन के पीछे सार्वजनिक उपभोग का भूखंड और गली नक्शे में आरक्षित होते हुए भी चारदीवारी का अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया गया था।

नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा लिखित सूचना पर 2 बार मौके गयी थी।  सेवानिवृत्त अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी गौरीशंकर यादव ने 18 फरवरी को नगरपालिका की ईओ पूजा शर्मा को उपस्थित होकर लिखित शिकायत की। सरकार के प्लान के नक्शे भी शामिल किए।यह शिकायत उपखंड अधिकारी जो नगरपालिका के प्रशासक हैं, उनको भी उसी दिन कर दी गई। 

अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा दो बार मौके पर देखने गई लेकिन अतिक्रमण तुड़वाया नहीं तब गौरीशंकर यादव ने एक और शिकायत कर दी थी।  अतिक्रमण करने में रजनी  के नाम का उल्लेख भी कर दिया था। ०0०








मंगलवार, 24 फ़रवरी 2026

सूरतगढ़:होटल,व्यावसायिक भवनों की अवैध मंजिलें. नगरपालिका प्रशासन की सैटिंग.


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 24 फरवरी 2026. 

सूरतगढ़ में राजनैतिक दलों के नेताओं, कार्यकर्ताओं,समाज सेवकों और बड़े लोगों के अवैध निर्मित होटल और व्यावसायिक संस्थान,और आवास  मुख्य सड़कों पर खड़े हैं।

 अधिकांश होटल व्यावसायिक संस्थानों घरों के निर्माण की मंजूरी केवल दो मंजिल तक है लेकिन ग्राउंड फ्लोर और एक ऊपर लेकिन यहां दूसरी तीसरी यानी टोटल चार और पांच मंजिलों तक के होटल व्यावसायिक स्थल और घरेलू मकान बने हुए हैं। अनेक ने भूमिगत निर्माण भी अवैध कर रखे हैं।

 * ये विशाल निर्माण अवैध तो हैं और अधिकांश में अग्निशमन की कोई व्यवस्था उपकरण नहीं है। अधिकांश भवन हरवक्त अग्नि दुर्घटना के खतरे में है। निर्माण में भी यह घटियापन है कि उंचे निर्माण में अंदर तो प्लास्टर है सज्जा है लेकिन बाहर कोई प्लास्टर नहीं,केवल ईंटें ही दिखाई देती है।

👍 नगर पालिका अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा से आज रेलवे स्टेशन के पास बन रहे एक  होटल के निर्माण की वैधता के बारे में पूछा गया कि वह अवैध बन रहा है। तब उन्होंने कहा कि दो मंजिल की स्वीकृति है। उन्हें बताया गया कि वह चार मंजिल तक बन चुका है। 

* नगर पालिका की स्थिति यह है कि उसकी जानकारी में आने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं होती।

* अवैध निर्माण की कार्रवाई पर नगर पालिका नोटिस जारी करती है तो अवैध निर्माण करता और नगर पालिका प्रशासन के बीच में आपसी समझौता हो जाता है,नगर पालिका को निर्माण के जो रुपए शुल्क मिलना चाहिए वह नगर पालिका प्रशासन के अधिकारी और निर्माता के बीच में ही सेटल हो जाता है।नगर पालिका को इस प्रकार से नोटिस देकर कार्रवाई नहीं करने पर भवन निर्माण के शुल्क के रूप में मिलने वाले लाखों रुपए हर माह चोट पहुंचती है। नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही और मिलीभगत से नगर पालिका को यानि सरकार को बहुत बड़ी ठगी का शिकार होना पड़ रहा है। नगर पालिका ने अनेक नोटिस जारी किए लेकिन इसके बाद में उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्पष्ट स्थिति सामने आ रही है कि इस प्रकार के आपसी समझौते में नगरपालिका के स्टाफ की जेबें भर्ती है या वे किसी दबाव में नगरपालिका कोष को हानि पहुंचाते हैं।

* प्रमुख सड़कों के किनारे बाजारों में बने विशाल होटल और व्यावसायिक संस्थानों में संपूर्ण निर्माण की जांच के बाद में शास्ति लगनी चाहिए जिससे नगर पालिका को लाखों रुपए की आय हो सकती है। जिन व्यवसायिक होटल और संस्थान ने अवैध रूप से तीसरी चौथी पांचवी मंजिल तक निर्माण किया है उन्हें कानूनी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी करके अवैध बनाई गई मंजिलें ध्वस्त की जानी चाहिए। संबंधित भवन के मालिक स्वयं अवैध निर्माण नहीं हटाते हैं तो नगर पालिका की ओर से होटल भवन जो भी है उसको सीज कर सील मोहर किया जाना चाहिए। अनेक भवनों के आगे सड़क पर सीढियां या ढलान अवैध निर्माण हैं। अवैध निर्माण और नगरपालिका की सैटलमेंट  लूट पर सभी राजनैतिक दल,उनके पदाधिकारी भी किसी तरह से समझोतों में दबे हैं या चुप हैं। मतलब कि सभी का रवैया एक जैसा है।

अभी नगर पालिका पूरी तरह से इस आवश्यक काम को जो कि आम जनता के साथ कभी भी भयानक दुर्घटना हो सकती है के मामले में लापरवाही बरत रहा है। 

*  इसके अलावा नगर पालिका अग्निशमन ब्रांच की ओर से समस्त होटल और बड़े व्यावसायिक सेंटरों पर जांच की जानी चाहिए।  अग्नि शमन की सुविधा वहां है या नहीं है? अग्निशमन उपकरण अनिवार्य रूप से लगाने का नोटिस जारी होना चाहिए और बार-बार जांच होनी चाहिए। 

*बड़े होटलों, बड़े व्यावसायिक संस्थानों का कचरा निस्तारण भी देखा जाना चाहिए। नगर पालिका क्षेत्र में अनेक प्राइवेट चिकित्सालय खुल गए हैं उनका मेडिकल कचरा कहां निस्तारित होता है? इसकी जांच नगर पालिका को करनी चाहिए कि वह कहां फेंका जा रहा है? यह आम जनजीवन की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। चिकित्सालयों से नोटिस के जरिए पूछताछ होनी चाहिए।

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कॉमरेड हेतराम बेनीवाल 95 वर्ष में निधन.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

24 फरवरी 2026.

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ( मार्क्सवादी) के दिग्गज नेता पूर्व विधायक कामरेड हेतराम बेनीवाल का 23 फरवरी रात में करीब 10-30 पर श्रीगंगानगर के प्राईवेट चिकित्सालय में निधन हो गया। वे काफी समय से अस्वस्थ थे।

बेनीवाल श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ जिलों के लगभग हर आंदोलन से और राजस्थान के प्रमुख आंदोलनों से जुड़े रहे।  दलित, दमित, वंचित, शोषित, किसान, मजदूर के हितों के  लिए आजीवन लड़ते रहने वाले क्षेत्र के संघर्षशील कद्दावर मार्क्सवादी नेता, जन आँदोलनों की बेजोड़ नेतृत्वकारी शख्सियत पूर्व विधायक कॉमरेड हेतराम बेनीवाल की संसार से विदाई से बहुत बड़ी क्षति हो गई है। 


किसानों की हर समस्या से जूझते रहे। संगरिया से विधायक भी रहे। 

इंदिरा गांधी के द्वारा लगाए आपातकाल 1975-77 में मीसा में बीकानेर जेल में बंद रहे। जीवनकाल में अनेक मुकदमे बने लेकिन उन्होंने कभी भी परवाह नहीं की।

प्राथमिक खबरों के अनुसार उनका अंतिम संस्कार उनके गांव 8 एल एन पी ( श्रीगंगानगर जिला) में दोपहर बाद किया जाएगा।०0०



सोमवार, 23 फ़रवरी 2026

सूरतगढ़:गली का अतिक्रमण नहीं हटाया. एक और बड़ा मामला.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 23 फरवरी 2026.

अतिक्रमण से सार्वजनिक उपभोग के लिए आरक्षित भूखंड सहित गली रोकने के निर्माण को नगरपालिका प्रशासन प्रेशर में ध्वस्त नहीं कर रहा।  ईओ पूजा शर्मा दो बार निरीक्षण कर चुकी है और नगरपालिका के पास सभी दस्तावेज और भूखंड व गली की संपूर्ण मापजोख होते हुए कार्वाई नहीं हो रही। इस अतिक्रमण की शिकायत 18 फरवरी को ईओ और उपखंड अधिकारी को हुई थी।

सूत्रानुसार उपखंड अधिकारी ने नगरपालिका  ईओ को अतिक्रमण ध्वस्त करने का निर्देश दे दिया लेकिन किसी नेता के दबाव में किसी बहाने की कार्यवाही से अतिक्रमण को बचाया जाने के लिए ईओ स्तर से कार्वाई नहीं की गई। नगरपालिका प्रशासन इस अतिक्रमण को तोड़ने के बजाय दबाव में अलग कार्वाई पर चल रहा है। यह एक अतिक्रमण नहीं है बल्कि अन्य में भी ध्वस्त की कार्वाई नहीं की जा रही है। शहर के सबसे अधिक चर्चित खसरा नं 315/2 के पास की सड़क भूमि पर अतिक्रमण कर दुकानों के निर्माण का मामला भी अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा की जानकारी में काफी दिनों से है। यह अतिक्रमण लाखों रू. कीमत की जमीन पर है। सड़क की जमीन पर तो किसी भी हालत में एक दिन भी अतिक्रमण रहना नहीं चाहिए मगर नगरपालिका सूरतगढ़ में सभी गलत कार्य हो रहे हैं।०0०








रविवार, 22 फ़रवरी 2026

सूरतगढ़:अतिक्रमण से गली व सार्वजनिक भूखंड पर कब्जा.प्रशासन दबाव में,कार्वाई नहीं

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ 22 फरवरी 2026.

सार्वजनिक उपभोग का भूखंड और गली नक्शे में आरक्षित होते हुए भी अवैध निर्माण से कब्जा करने की चारदीवारी बनाली गई। निरंकारी सत्संग भवन के पीछे वार्ड नं 26 में भूखंड ही बीसियों लाख रू कीमत का है। 

नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा लिखित सूचना पर 2 बार मौके गयी। नगरपालिका प्रशासन को 18 फरवरी को लिखित शिकायत मिलने पर अतिक्रमण रोधी स्टाफ से अतिक्रमण ध्वस्त कर ईंटे सामग्री पालिका के कब्जे में ले लिया जाना अनिवार्य है। यहां चर्चा है कि किसी नेता के प्रेशर से यह अतिक्रमण हटाने में अभी तक कार्वाई नहीं की गई। गली बंद किए जाने और सार्वजनिक उपभोग की जमीन पर अतिक्रमण होने से आमजन प्रभावित है। वहां एक सेवा निवृत अधिकारी के घर के दरवाजे और एसी उपकरण की रोक हो गई। प्रभावित सेवानिवृत्त अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी गौरीशंकर यादव ने 18 फरवरी को नगरपालिका की ईओ पूजा शर्मा को उपस्थित होकर लिखित शिकायत की। सरकार के प्लान के नक्शे भी शामिल किये।


यह शिकायत उपखंड अधिकारी जो नगरपालिका के प्रशासक हैं, उनको भी उसी दिन कर दी गई। 

अधिशासी अधिकारी पूजा शर्मा दो बार मौके पर देखने गई लेकिन अतिक्रमण तुड़वाया नहीं। गौरीशंकर यादव ने एक और शिकायत कर दी है जिसमें अतिक्रमण करने में एक औरत के नाम का उल्लेख है जिससे पुलिस भी जानकारी रखती है। पुलिस को भी सूचना दी गई तब पुलिस भी पहंची। लेकिन अतिक्रमण तोड़ने और सामग्री जब्त करने की जिम्मेदारी नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी की है और वहां देरी हो रही है। सोमवार यानि 23 फरवरी तक अतिक्रमण ध्वस्त नहीं किया जाता है तो न्यूसेंस का यह गंभीर मामला बन जाने का मजबूत आधार होगा।०0०








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