सोमवार, 21 मई 2018

श्रीगंगानगर:नहरों में आ रहा मटमेला पानी पेयजल की डिग्गियों में नहीं डाला जाए- जिला कलक्टर

श्रीगंगानगर, 20 मई। नहरों में आ रहे मटमेले पानी को पेयजल के लिए उपयोग में नही लिया जाएगा।

जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम ने पेयजल विभाग के अधीक्षण अभियन्ता को निर्देशित किया है कि आगामी 2-3 दिनों तक ऐसा ही पानी आता रहे, तब तक पेयजल की डिग्गियों में इसका भण्डारण नही किया जाए। जिला कलक्टर ने पेयजल विभाग एवं चिकित्सा विभाग को लगातार समय-समय पर पेयजल के नमूने लेने के निर्देश दिए है। इसी की अनुपालना में आज विभिन्न समय पर पेयजल विभाग द्वारा 3 नमूने लिए गए। 


पेयजल विभाग के अधीक्षण अभियन्ता श्री वी.के. जैन ने बताया कि जिला कलक्टर के निर्देशानुसार आ रहे मटमेले पानी को पेयजल की डिग्गियों में नही डाला जाएगा। इसके लिए सभी पेयजल परियोजनाओं के प्रभारियों को निर्देशित कर दिया गया है तथा सभी आउट लेट बंद रखने के निर्देश दिए है। श्री जैन ने बताया कि पेयजल परियोजनाओं में पानी का पर्याप्त भण्डारण है, फिर भी ऐतिहास के तौर पर पेयजल वितरण व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए पानी वितरण के समय में थोडी कमी करने के निर्देश दिए गए है।

रविवार, 20 मई 2018

बेचारे येदुरप्पा:तीसरी बार भी 5 साल पूरे नहीं कर पाए-

 *तीसरी बार का कार्यकाल बहुत कम तीसरे दिन ही खत्म हो गया*

- करणीदानसिंह राजपूत -

हाई-वोल्‍टेज राजनीतिक नाटक के बीच आखिरकार गुरुवार 17-5-2018 को सुबह बीएस येदुरप्‍पा ने तीसरी बार कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ले ली। 

मगर 19-5-2018 को विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया।

*येदुरप्‍पा पहली बार 2007 में, दूसरी बार 2008 में और अब तीसरी बार 2018 में सीएम बने।

येदुरप्‍पा कर्नाटक के कितने बड़े नेता हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह अपने दम पर दो बार बीजेपी को लगभग बहुमत के करीब लेकर आए, लेकिन किस्‍मत ने उनके साथ हर बार खेल किया।

1. येदुरप्‍पा  पहले 2007 में जनता दल-सेक्‍युलर के समर्थन से पहली बार कर्नाटक के सीएम बने थे, लेकिन तब उनके हाथ सत्‍ता केवल 7 दिन तक रह सकी थी। येदुरप्‍पा ने 12 नवंबर 2007 को सीएम पद की शपथ और 19 नवंबर 2007 को उन्‍होंने पद से इस्‍तीफा दे दिया था।

-7 दिन सीएम रहने के बाद येदुरप्‍पा को ज्‍यादा इंतजार नहीं करना पड़ा।

2. 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी। इसके बाद येदुरप्‍पा ने दूसरी बार कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ली और 3 साल 62 दिन तक मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर रहे।

-येदुरप्‍पा ने दूसरी बार सीएम पद की शपथ 2008 में ली। वह जब दूसरी बार सीएम बने तब बीजेपी 110 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से 3 सीटें उस वक्‍त भी कम ही रह गईं।

-30 मई 2008 को दूसरी बार सीएम बनने के बाद येदुरप्‍पा 3 और 62 दिन तक मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर रहे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के आरोप लगने के बाद उन्‍हें पद से इस्‍तीफा देना पड़ा।

-येदुरप्‍पा के दूसरे कार्यकाल में अवैध खनन के मामले ने तूल पकड़ा और आरोपों की आंच येदुरप्‍पा तक जा पहुंची। लोकायुक्‍त ने जुलाई 2011 में रिपोर्ट सबमिट कराई, जिसमें येदुरप्‍पा की भूमिका की बात कही गई।

-भ्रष्‍टाचार के आरोपों के दायरे में येदुरप्‍पा के परिवार के सदस्‍यों का भी नाम आया। आरोप लगे कि परिवार के सदस्‍यों ने भी डोनेशन के नाम पर खनन कंपनियों से पैसा लिया।

-भ्रष्‍टाचार के आरोपों के बाद येदुरप्‍पा को कर्नाटक के सीएम पद से इस्‍तीफा देना पड़ा। 2011 में पद छोड़ने के बाद येदुरप्‍पा को बीजेपी से वैसा सपोर्ट नहीं मिला, जिसकी उन्‍हें उम्‍मीद थी और येदुरप्‍पा ने पार्टी के खिलाफ ही बगावत का बिगुल बजा दिया। उन्‍होंने कर्नाटक जनता पक्ष नाम से नई पार्टी तक बना डाली।

-मई 2013 में वह शिकारीपुरा सीट से येदुरप्‍पा एक बार फिर विधानसभा पहुंचे।

-नई पार्टी बनाने के बाद भी येदुरप्‍पा बीजेपी के शीर्ष नेताओं के संपर्क में रहे और 2 जनवरी 2014 मतलब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्‍होंने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय करा दिया। यही वही समय जब बीजेपी में मोदीयुग की शुरुआत हो रही थी। अमित शाह की रणनीति में येदुरप्‍पा काफी अहम थे। लोकसभा चुनाव में येदुरप्‍पा शिमोगा से चुनाव लड़े और विपक्षी उम्‍मीदवार को करीब साढ़े तीन लाख वोटों से मात दी।

-2014 लोकसभा चुनाव में येदुरप्‍पा की वापसी से बीजेपी को काफी फायदा हुआ।

-2018 में भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन इस बार भी बहुमत से 8 सीट कम हैं। हैरानी की बात यह रही कि येदुरप्‍पा ने 2018 चुनाव के नतीजे आने से पहले ही कह दिया था कि वह 17 मई को सीएम पद की शपथ ले लेंगे। हुआ भी ऐसा ही राज्‍यपाल ने उन्‍हें 17 मई को शपथ का न्‍योता भेजा और येदुरप्‍पा ने गुरुवार सुबह तीसरी बार सीएम पद की शपथ ले ली। लेकिन यह तीसरा कार्यकाल बहुत कम रहा। इस बार राज गया और भाजपा की बदनामी ज्यादा कर गया।

इसका राजनैतिक परिणाम राजस्थान के चुनाव पर भी असर डालेगा। वैसे भी राजस्थान की भाजपा सरकार से जनता बेहद नाराज है और केवल मतदान दिवस का इंतजार कर रही है।

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शनिवार, 19 मई 2018

सूरतगढ के सीसीटीवी कैमरे लावारिस हालत मैं खराब :कैसे पकड़ेंगे अपराध

* 129 करोड़ रुपए बजट वाली नगरपालिका के पास 10 लाख  रुपए भी नहीं है*

  -  करणीदानसिंह राजपूत -

सूरतगढ़ शहर में लगे हुए सीसीटीवी कैमरों पर भरोसा करना खतरे से खाली नहीं होगा।

 एक अप्रैल 2018 से कैमरों का रखरखाव और मेंटेनेंस आदि सभी बंद हैं और 2-3 स्थानों को छोड़कर सभी जगहों के कैमरे खराब पड़े हैं। 

 शहर में सन 2012 में कैमरे लगाए गए थे और उसके बाद उनके उपकरण आदि में बदलाव नहीं हुआ और बैटरियां भी नहीं बदली गई। सामान्य रूप से बैटरी 3 साल तक ही चल पाती है लेकिन 5 साल बीतने के बावजूद उन्हीं बैटरियां से काम चलाया जा रहा है।  पिछले वर्ष सीसीटीवी कैमरों के रखरखाव का ठेका 31 हजार रू प्रतिमाह का था लेकिन नए ठेके में न्यूनतम रकम 51हजार रुपए प्रतिमाह की आई। उसके बाद नए ठेकेदार को आदेश ही नहीं दिया गया। पुराने ठेकेदार का कार्य 31 मार्च को समाप्त हो गया था। प्रतिमाह रकम अधिक होने का कारण  आदेश जारी नहीं किए गए। रकम अधिक होने का कारण यह है कि पुरानी मशीनरी में रखरखाव बढ जाता है। नगरपालिका के पिछले ईओ जुबेर खान ने मशीनरी में बदलाव के लिए जानकारी ली तब ठेकेदार ने करीब 3:50 लाख रूपय की रकम बताई थी। लेकिन यह रकम भी उपलब्ध नहीं हुई।  इस रकम के अलावा नया ठेका 6 लाख 12 हजार वार्षिक माने तो रकम 10 लाख रुपए के करीब बनती है। आश्चर्य यह है कि नगरपालिका का वार्षिक बजट 125 करोड़ के करीब है और इतने बजट वाली नगरपालिका के पास साल भर में सीसीटीवी कैमरे रखरखाव के लिए 10 लाख रुपए भी उपलब्ध नहीं है। 

पुलिस और पूरा शहर आपराधिक मामलों में सीसीटीवी कैमरों पर भरोसा करता है लेकिन रखरखाव के अभाव में आधे से ज्यादा कैमरे खराब हो चुके हैं और अब लावारिस हालत में उनका कोई रखरखाव भी नहीं हो रहा।

 नगरपालिका सूरतगढ़ की ओर से मानकसर चौक, इंदिरा सर्किल,  सुभाष चौक,महाराणा प्रताप चौक, बडोपल रोड का पीपल चौक, चेतक पॉइंट के कैमरे सही हालत में नहीं है। इंदिरा गांधी पार्क खेजड़ी हनुमान मंदिर राजकीय चिकित्सालय में भी कैमरे लगे हैं लेकिन रखरखाव के अभाव में ये भी खराब होकर बंद हो सकते हैं। 

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येड्डियूरप्पा का सीएम पद से इस्तीफा: अमितशाह का अंतिम शाह नया नाम होगा?

* कर नाटक में नाटक अंत से पहले ही खत्म हो गया।*

भाजपा की भद्द पिटी या अमित शाह की?

 देश के महान चौकीदार नरेन्द्र मोदी की चौकसी कैसी रही है?

राज्यपाल महोदय का कर्तव्य कैसा रहा?

राजस्थान में क्या असर होगा?

इतने अंतहीन सवाल होंगे की भाजपा पूरे देश में परेशान होगी।

 


कांग्रेसनेता पूर्वविधायक हरचंदसिंह सिद्धू का हथियार लायसेंस नवीनीकरण पुलिस का इनकार



* टिकट के दावेदार और कांग्रेस के नेता वरिष्ठ वकील की सुरक्षा पर खतरा  *

 - करणीदानसिंह राजपूत -

 सूरतगढ़ पुलिस की रिपोर्ट पर एसपी श्रीगंगानगर ने 2बार विधायक रह चुके सरदार हरचंदसिंह सिद्धु का हथियार लाइसेंस रिन्यू करने को अनुचित बताया है। लाइसेंस नवीनीकरण नहीं होने से उनकी आत्मसुरक्षा के लिए खतरा पैदा हो गया है। सूरतगढ पुलिस इससे पहले भी ऐसी हरकत कर चुकी है।

हरचंद सिंह सिद्धू का हथियार सन 2013 में चुनाव के वक्त थाना अधिकारी रणवीर सिंह की रिपोर्ट पर पहले हथियार थाने में जमा करवाया गया और बाद में कहा गया कि लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।

 सिद्धू ने उस समय कानूनी और उच्च न्यायालय के हवाले दे करके पुलिस सीआई रणवीर साईं की कार्यवाही को गलत बताया था तब लाइसेंस रिन्यू किया गया। सिद्धु ने उस समय पुलिस की गलत कार्रवाई को जानबूझकर की गई कार्यवाही का आरोप लगाया था।

इस बार फिर चुनाव का मौका है और कुछ महीने बाकी हैं और सिद्धु सूरतगढ सीट से टिकट के दावेदार भी हैं। एक बार फिर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के लाइसेंस रिन्यू पर पुलिस की आपत्ति से सरकार की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा है। 

सिद्धू ने 18 मई को खुद ने SP को श्रीगंगानगर में पत्र दिया है जिसमें पुलिस की कार्यवाही पर ऐतराज़ किया गया है और अनेक उदाहरण दिए गए है। यहां तक कहा गया है कि यह मामला अदालत की अवमानना तक का बनता है। सिद्धू ने कहा है कि उसके विरुद्ध पुराने मामले जो राजनीतिक थे और उनमें बरी हो चुके हैं। 3 साल के भीतर कोई मामला हो तब पुलिस को ऐतराज़ हो सकता है लेकिन ऐसा नहीं है। एक मामला  अदालत में विचाराधीन है।

SP को दिए पत्र में लिखा है कि लाइसेंस का नवीनीकरण करने की अनुशंसा अतिरिक्त कलक्टर सूरतगढ़ को पुनः भेजी जाए।

शुक्रवार, 18 मई 2018

डाक्टर पति पत्नी को 7-7साल की जेल,फर्जी कं बना कमाई की,हास्पिटल सरकार को सौंपा

*राजस्थान में यह पहला फैसला*

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कोटा कोर्ट ने गुरुवार 17-5-2018 को  फैसला सुनाते हुए पद का दुरुपयोग कर आय से अधिक सम्पति अर्जित करने के मामले में एमबीएस अस्पताल के तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी सहित 7 आरोपियों को सात, पांच और तीन साल की सजा सुनाई है. कोर्ट ने सजा के साथ सभी आरोपियों पर कुल 1 करोड़ 25 लाख का भारी जुर्माना भी लगाया है.सहायक निदेशक अभियोजन एसीबी कोर्ट कोटा एहसान अहमद ने बताया कि वर्ष 2003 में जयपुर एसीबी ने तत्कालीन चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरपी शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की जांच की थी. जांच में पाया गया की वर्ष 1982 से 1998 तक डॉ. आरपी शर्मा ने पद का दुरुपयोग कर टीटी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर के नाम से प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाकर फर्जी निवेश किया. आरोपी ने इसमें अपनी पत्नी डॉ. मोहिनी शर्मा, ससुर तेजकरण शर्मा, सास चंद्रकांता शर्मा सहित गीतांजलि शर्मा, किशन गोपाल और असलम पठान को शामिल कर संपत्ति को अपने कब्जे में रखा. इस अवधि में आरोपी ने 55 लाख 42 हजार 429 रुपये की सम्पति अर्जित की. जांच में पाया गया कि इन्होंने 33 लाख से ज्यादा की आय अवैध रूप से अर्जित की.


इस पर एसीबी ने कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ चालान पेश किया गया. गुरुवार को मामले में एसीबी कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए मुख्य आरोपी डॉ. आरपी शर्मा और उनकी पत्नी मोहिनी शर्मा को 7-7 साल की सजा व 50-50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया. वहीं डॉ. आरपी शर्मा के ससुर तेजकरण शर्मा एवं सास चंद्रकांत शर्मा को 3-3 साल की सजा व 5-5 लाख रुपए जुर्माना और अन्य तीन आरोपियों को 5-5 साल की सजा व 5-5 लाख के जुर्माने से दंडित किया है. साथ ही अदालत ने टीटी हॉस्पिटल को भी सरकारी कब्जे में लेने के आदेश जारी किए हैं.

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आय से अधिक सम्पति के मामले में गुरुवार को एसीबी कोर्ट ने डॉक्टर दम्पति सहित पांच आरोपितों को सजा सुनाई |


कोटा . आय से अधिक सम्पति के मामले में गुरुवार को एसीबी कोर्ट ने डॉक्टर दम्पति सहित पांच आरोपितों को सजा सुनाई | इसमे से डॉक्टर दम्पति को 7-7 साल की सजा और 50 -50 लाख के जुर्माने से दंडित किया। जबकि सास-ससुर को तीन साल की सजा और 5 -5 लाख का जुर्माना किया। वही बाकि तीन आरोपितों को 5 साल की सजा सुनाई गयी और 5 -5 लाख का जुर्माना किया। | अदालत ने सभी आरोपितों को जेल भेज दिया। वहीं सास और ससुर को जमानत पर छोड़ दिया।


जानकारी के अनुसार कैशवपुरा स्थित टीटी हॉस्पिटल के मालिक डॉ. आरपी शर्मा ने फर्जी कंपनी बनाकर परिजनों को शेयर होल्डर बनाया था। इस मामले में वर्ष 2003 में जयपुर एसीबी टीम ने कार्रवाई करते हुए कोटा में उनके हॉस्टिल पर छापा मारा।


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एसीबी ने डॉ. शर्मा की कम्पनी व हॉस्पिटल से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। जिसमें सामने आया कि आरोपितों ने अवैध रूप से फर्जी कम्पनी बनाकर 35 लाख रुपए अर्जित किए। इस मामले में एसीबी ने डॉ. आरपी शर्मा, पत्नी मोहिनी शर्मा, ससुर तेजकरण, सास चंद्रकांता सहित तीन अन्य आरोपितो को गिरफ्तार कर एसीबी कोर्ट में पेश किया। जहां से डॉक्टर दम्पति सहित पांच जनों को जेल भेज दिया गया। जबकि ससुर और सास को जमानत पर छोड़ दिया गया।



सजा सुनते ही रोने लगी डॉ. मोहिनी


एसीबी कोर्ट ने जैसे ही 7 साल की सजा सुनाई तो डॉक्टर आरपी शर्मा की पत्नी मोहिनी दहाड़े मार-मार कर रोने लगी। पुलिस पहरे में उन्हें जेल भेज दिया गया। जानकारी के निजी हॉस्पिटल सरकार के हवाले कर दिया गया है। अब इसका संचालन सरकार द्वारा किया जाएगा।

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गुरुवार, 17 मई 2018

राजस्थान में गौशालाओं को 895 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई-मंत्री

श्रीगंगानगर/जयपुर, 17 मई। गोपालन मंत्री श्री अजय सिंह किलक ने बताया कि वर्तमान सरकार ने अब तक आपदा राहत एवं प्रबंधन तथा गोपालन विभाग के माध्यम से रिकार्ड 895 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता राशि गौशालाओं को उपलब्ध कराई है।


      श्री किलक बुधवार 17-5-2018 को शासन सचिवालय स्थित मंत्रालय भवन में गोपालन विभाग से संबंधित बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि गोपालन विभाग द्वारा वर्ष 2016-17 में 1 हजार 160 गौशाला/कांजी हाऊस को 132.68 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2017-18 में 1 हजार 603 गौशालाध्कांजी हाऊस को 123.07 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जा चुकी है तथा हिंगोनिया गौ-पुनर्वास केन्द्र नगर निगम जयपुर को 10 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है।


      गोपालन राज्य मंत्री श्री ओटाराम देवासी ने बताया कि पात्र गौशालाओं को 63.52 करोड़ रुपये की राशि संबंधित जिला संयुक्त निदेशक को आवंटित की जा चुकी है।


      अतिरिक्त मुख्य सचिव, गोपालन श्री खेमराज चौधरी ने बताया कि उन्होंने बताया कि वर्ष 2018-19 में गौशालाओं को सहायता राशि जारी करने के लिये शीघ्र ही सर्वे का कार्य प्रारम्भ किया जायेगा।


      निदेशक, गोपालन डॉ. लाल सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा बजट में की गई घोषणा के क्रम में प्रत्येक जिले में एक नंदी गौशाला, गौशालाओं में बायो गैस संयंत्रा का निर्माण की योजना प्रक्रियाधीन है और इसे मूर्तरूप प्रदान किया जा रहा है। बैठक में विशिष्ट सहायक, गोपालन मंत्री श्री मातादीन मीणा, विशिष्ट सहायक, गोपालन राज्य मंत्रा श्री मनीष गोयल सहित विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।


बुधवार, 16 मई 2018

आबकारी जिलाधिकारी,निरीक्षक व चालक रिश्वत लेते ही एसीबी द्वारा गिरफ्तार

* बूंदी में एसीबी की बड़ी कार्रवाई*

बूंदी. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) चित्तौडगढ़़ की टीम ने बुधवार 16-5-2018 दोपहर को जिला आबकारी अधिकारी व निरीक्षक सहित तीन जनों को रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया। टीम ने पहले डेढ़ लाख रुपए की रिश्वत लेते जिला आबकारी अधिकारी कमलेश परमार को देवपुरा स्थित उसके घर से रंगे हाथों गिरफ्तार किया। इसके बाद ब्यूरो की दूसरी टीम ने आबकारी निरीक्षक मनीषा राजपुरोहित के कहने पर एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए चालक रूपलाल को आबकारी अधिकारी कार्यालय में पकड़ा। मामले में निरीक्षक को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

एसीबी चित्तौडगढ़़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक चिरंजीलाल मीणा ने बताया कि 11 मई को चित्तौडगढ़़ आबकारी चौकी पर भगवत सिंह व हिम्मत सिंह ने शिकायत दी कि बूंदी जिले में गणेशपुरा स्थित उनकी देसी मदिरा समूह की दुकान की नई लोकेशन डाबी क्षेत्र में देवजी का खेड़ा करने के लिए जिला आबकारी अधिकारी व निरीक्षक एक-एक लाख रुपए की रिश्वत मांग रहे। ब्यूरो टीम ने उसी दिन परिवादी को भेजकर शिकायत का सत्यापन कराया, आबकारी अधिकारी ने दो लाख रुपए की मांग की। एक लाख रुपए पुरानी बंदी के भी मांगे।

फिर परिवादी ने 15 मई को निरीक्षक मनीषा राजपुरोहित से बात की। सत्यापन के बाद बुधवार को एसीबी टीम ने जिला आबकारी अधिकारी परमार को उसके घर पर डेढ़ लाख की रिश्वत लेेते पकड़ लिया। आबकारी निरीक्षक से फरियादी ने बात की तो उसने चालक रूपलाल को रुपए देने की बात कही। इस पर चालक को एक लाख रुपए रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया।


राजस्थान भाजपा और कांग्रेस वालों सुधर जाओ नहीं तो कर्नाटक की तरह लटका दिए जाओगे


* करणीदानसिंह राजपूत*

 राजस्थान की भारतीय जनता पार्टी सरकार में चल रहे भयानक भ्रष्टाचार पर रोक नहीं और कांग्रेस की ओर से कोई बोल नहीं।

इन दोनों दलों को कर्नाटक चुनाव परिणाम से सबक लेना चाहिए कि जनता सरकार और प्रतिपक्ष दोनों को अधर में लटका कर के रख देती है।

 जनता ने कर्नाटक में  कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी दोनों की हेकड़ी    पर दोनों के नाक पर  घूसा दे मारा।  ना कांग्रेस जीती ना भारतीय जनता पार्टी जीती। 

नरेंद्र मोदी की हालत सांप सीढ़ी के खेल जैसी कर दी। सांप सीढी में जीतते हुए को बड़ा अहंकार होने लगता है उसे 99 पर सांप काटता है और 10 पर ले जाकर छोड़ देता है। नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी को इतना अहंकार हो गया था कि दावे के 130 सीटें जीतने और सरकार बनाने का था लेकिन जनता ने 112 के बहुमत पर पहुंचने से पहले ही 104 पर ही एकदम से ब्रेक लगा दिया। मोदी की तूफानी गाड़ी को 104 पर  रोक दिया। भाजपा बनाने को चाहे जोड़-तोड़ करके खरीद फरोख्त करके सरकार बना ले लेकिन जो इमानदारी का ठप्पा लगा हुआ है वह एक बार फिर धूल में मिलेगा।

 दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी फिर से सत्ता में लौटने का दावा कर रही थी। जनता ने उसका दावा भी मटियामेट कर दिया और उसकी सीटे घटाकर 78 पर पहुंचा दिया। 

जनता के इस खेल को समझना चाहिए। सत्ता में हो चाहे प्रतिपक्ष में हो जनता दोनों को ही सबक सिखा सकती है।

 

 राजस्थान में नवंबर दिसंबर में चुनाव होंगे और अभी 5 महीने बाकी पड़े हैं।  भारतीय जनता पार्टी की सरकार को और कांग्रेस पार्टी को अपने अपने कार्यों पर नजर डाल कर सुधार कर लेना चाहिए।अन्यथा भारतीय जनता पार्टी का 180 का मिशन फेल होकर 100 से कम सीटों पर सिमट जाएगा। जनता 90 - 95 के बीच में लटका कर के रख सकती है। यह स्थिति प्रतिपक्ष कांग्रेस की भी हो सकती है कि उसे भी बहुमत से पहले रोक ले। कारण स्पष्ट है कि भारतीय जनता पार्टी राज में भ्रष्टाचार बढ़ा है कोई सुनवाई नहीं होती। आम जनता चाहती है कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता जनता से तमीज से बात तो करे। भ्रष्टाचार से दुखी जनता जब कोई बात करना चाहती है तो तमीज से बात भी नहीं की जाती कोई सुनवाई तक नहीं की जाती। दूसरी और कांग्रेस पार्टी यह मानकर चल रही है कि उस की झोली में सत्ता आ रही है। कांग्रेस पार्टी इस बहुत बड़े भुलावे में जनता का काम नहीं कर रही। कांग्रेस भ्रष्टाचार के विरुद्ध आवाज नहीं उठा रही। इसलिए इन दोनों पार्टियों को ही कर्नाटक के चुनाव परिणाम से सबक ले लेना चाहिए,अगर दोनों पार्टियों ने इन चार पांच महीनों में सुधार नहीं किया तो  जनता निश्चित रूप से बीच में लटका कर रख देगी।

मंगलवार, 15 मई 2018

जिला कलेक्टर का आज का ताजा आदेश-टावर और टंकियों पर चढने पर रोक

श्रीगंगानगर, 15 मई 2018. 

जिला कलक्टर व जिला मजिस्ट्रेट श्री ज्ञानाराम ने आदेश जारी कर अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा उंचे टावर व उंची पानी की टंकियों पर चढ़कर लोक शान्ति भंग करने के संबंध में दण्ड प्रक्रिया संहिता 1973 की धारा 144 के अंतर्गत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किये है। 

आदेशानुसार कोई भी अनाधिकृत व्यक्ति उंचे टावर व उंची पानी की टंकियों पर नही चढ़ेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 188 के तहत दण्डित करने की कार्यवाही की जायेगी। यह आदेश आगामी 9 जुलाई 2018 तक प्रभावी रहेंगे। 


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