मंगलवार, 24 अप्रैल 2018

तहसीलदार व चालक को रिश्वत लेने में एसीबी ने गिरफ्तार किया:

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने मंगलवार 24-4-2018  सोजत के तहसीलदार और उनके ड्राइवर को रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। 10 हजार रुपए की रिश्वत की यह रकम जमीन का नामांतरण खोलने की एवज में ली गई थी। एसीबी ने रिश्वत की रकम बरामद कर ली है। एसीबी अजमेर जोन के पुलिस अधीक्षक कैलाशचंद्र विश्नोई के निर्देशन में यह कार्रवाई भीलवाड़ा एसीबी की टीम ने की।


एसपी कैलाशचंद्र ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी सत्यनारायण वर्मा, सोजत तहसीलदार है। जबकि सह आरोपी तहसीलदार का ड्राइवर दुर्गाराम है। उनके खिलाफ स्थानीय व्यक्ति राजमल मेवाड़ा ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसने नामांतरण खोलने के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन किया था। जिसकी एवज में तहसीलदार सत्यनारायण वर्मा अपने ड्राइवर के मार्फत 15 हजार रुपए रिश्वत की मांग कर रहे है। इस पर भीलवाड़ा एसीबी की टीम ने ट्रेप रचा।


सत्यापन के दौरान ली 5 हजार रुपए की रिश्वत


- जिसमें एसीबी सत्यापन के दौरान आरोपियों ने 5000 रुपए की रिश्वत ली। शेष रकम 10 हजार रुपए लेकर परिवादी राजमल को मंगलवार को बुलाया।

 तहसीलदार सत्यनारायण के ड्राइवर दुर्गाराम ने ज्योंही रिश्वत की रकम ली। तभी आसपास मौजूद एसीबी टीम ने दुर्गाराम को धरदबोचा।

इसके बाद रिश्वत में लिप्त आरोपी सत्यनारायण वर्मा को भी एसीबी ने गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

( आपसे मांग रहा है कोई रिश्वत तो संपर्क करें नजदीकी एसीबी से)

सोमवार, 23 अप्रैल 2018

सूरतगढ में मुख्यमंत्री के हाथ में दी गई शिकायतों का भी निस्तारण नहीं-राज का डर नहीं रहा


* करणीदानसिंह राजपूत की स्पेशल रिपोर्ट *

सूरतगढ 23 अप्रेल 2018.

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हाथ में सूरतगढ में  सौंपी गई शिकायतों परिवेदनाओं को निस्तारण नहीं किया जा रहा जबकि 1 महीना होने को आया है। विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों का सर्विस रूल के तहत कड़ी कार्यवाही का भय निकल चुका है और वे लापरवाह हो चुके हैं। मुख्यमंत्री को प्रस्तुत शिकायतों पर कार्यवाही नहीं हो तो राजकाज और व्यवस्था का अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। यह लापरवाही सरकारी रिपोर्ट में उजागर हुई है। मुख्यमंत्री  को 27 मार्च 2018 को सूरतगढ़ दौरे के दौरान आमजन द्वारा प्रस्तुत परिवेदनाओं, शिकायतों के विधिनुसार निस्तारण हेतु संबंधित विभागों को भिजवाया गया था। परन्तु संबंधित विभागों द्वारा परिवादों का अभी तक निस्तारण किया जाकर रिपोर्ट उपखण्ड अधिकारी सूरतगढ़ को प्रस्तुत नही की गई है। 

एसडीएम सूरतगढ की कलक्टर को प्रस्तुत रिपोर्ट में खुलासा हुआ है।

उपखंड अधिकारी ने परिवादों को निम्न अधिकारियों को निस्तारण के लिए भिजवाया मगर निस्तारण नहीं हुआ। 

1.सचिव कृषि उपज मंडी समिति सूरतगढ

2.एसडीओ, बीएसएनएल सूरतगढ़, 3.प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ,

4. मैनेजर केन्द्रीय सहकारी बैंक सूरतगढ,

5. ब्लॉक प्रारम्भिक शिक्षा अधिकारी सूरतगढ

6.ईओ नगरपालिका सूरतगढ

7. रसद निरीक्षक सूरतगढ़, 

8.अधिशाषी अभियंता जोधपुर डिस्काम सूरतगढ, 

9.अधिशाषी अभियंता पीएचईडी सूरतगढ,

10. पुलिस उपअधीक्षक सूरतगढ़, 11.डाकपाल डाकघर सूरतगढ़,

12.अधिशाषी अभियंता पीडब्ल्यूडी सूरतगढ़, 

13.रेलवे सूरतगढ़,

14. तहसीलदार सूरतगढ़, 

15.परिवहन उपनिरीक्षक सूरतगढ़, 16.अधिशाषी अभियंता, जल संसाधन सूरतगढ़, 

17.क्षेत्रीय वन अधिकारी सूरतगढ़, 18.सीडीपीओ सूरतगढ

19.श्रम निरीक्षक गंगानगर,

20. विकास अधिकारी पंचायत समिति सूरतगढ, 

21.बीसीएमओ सूरतगढ

22.राजस्थान रोडवेज श्रीगंगानगर, 23.प्रधानाचार्य, सेठ रामदयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सूरतगढ।

उपखंड अधिकारी की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि इनको बार-बार पत्र जारी करने एवं दूरभाष पर निर्देशित किये जाने के उपरांत भी परिवादों के निस्तारण की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत नही की गई है। 

अब अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इनके कार्यालय, जिला कार्यालय में लम्बित परिवादों का 24 अप्रेल 2018 को दोपहर 2 बजे तक निस्तारित कर एसडीएम सूरतगढ़ को आवश्यक रूप से सूचित करेगें। 

विदित रहे कि जिला कलेक्टर ने जिला स्तरीय हर सप्ताह होने वाली दो बैठकों में परिवेदनाओं को निस्तारण करने के निर्देश दिए मगर निस्तारण नहीं होने पर उपखंड अधिकारी सूरतगढ़ से 2 दिन में जवाब मांगा तब जिला कलक्टर को उपखंड अथिकारी की ओर से यह जवाब दिया गया।

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शनिवार, 21 अप्रैल 2018

सूरतगढ़ में नए राजस्व तहसीलदार मंगतूराम होंगे

 सूरतगढ़ 20 अप्रैल 2018.

 राजस्व तहसीलदार मंतूराम को बाड़मेर से सूरतगढ़ स्थानांतरित किया गया है। सूरतगढ़ के तहसीलदार अजीत गोदारा को श्री बिजयनगर में लगाया गया है आदेश तत्काल प्रभावित हुए हैं

रिश्वत लेते अपर लोक अभियोजक को ACB टीम ने पकड़ा


एसीबी टीम के  साथ धक्का-मुक्की और मारपीट का भी मुकदमा


चूरू। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की चूरू टीम ने शुक्रवार को सुजानगढ़ एडीजे कोर्ट के अपर अभियोजक कुंभाराम आर्य को उसके घर से 5 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। इस दौरान आरोपी ने एसीबी टीम के साथ मारपीट भी की।

एसीबी प्रभारी रमेश चंद्र माचरा के अनुसार गांव चाडवास के परिवादी सुरेश कुमार सोनी ने ब्यूरो में शिकायत दर्ज करवाई थी कि कुछ माह पूर्व उसकी बहन को एक गांव का ही अमन नाम का युवक परेशान करता था। इससे तंग आकर  बहन ने सुसाइड कर लिया था।

इस मामले में अमन की शुक्रवार 20-4-2018 को कोर्ट में पेशी थी। लोक अभियोजक कुंभाराम आर्य ने परिवादी से संपर्क कर अमन की जमानत खारिज करने की एवज में 5000 की रिश्वत मांगी। शिकायत मिलके के बाद मामले का सत्यापन गुरूवार को कर ट्रेप का आयोजन किया गया।

शुक्रवार को एपीपी कुंभाराम ने परिवादी को रिश्वत ₹5000 घर पर ही देने की बात कही। टीम ने रसायन पावडर लगा नोट देकर परिवादी को कुंभाराम के घऱ भेजा। 

 परिवादी ने जैसे हीआरोपी को पैसे दिए एसीबी टीम ने उसे दबोच लिया। इस दौरान एसीबी टीम के साथ आरोपी कुंभाराम वहां से धक्का-मुक्की कर भागने का प्रयास करने लगा और उसके परिजनों ने मारपीट शुरू कर दी। लेकिन जाप्ते के साथ पहुंची टीम ने उसे दबोच लिया। 

एसीबी प्रभारी रमेश माचरा ने बताया कि इस बाबत सुजानगढ़ थाने में राजकार्य में बाधा डालने और टीम के साथ मारपीट करने के आरोप में अलग से मुकदमा दर्ज कराया गया है। साथ ही आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।


क्या बददुआ सच्च में लग जाती है? वैज्ञानिक युग में क्या सोचते हैं?

* करणीदानसिंह राजपूत *

अनेक बार कई लोग खुद के बारे में,अपने ही लोगों के लिए या दूसरों के बारे में नकारात्मक सोच रखते हुए या अचानक गुस्सा आने पर,किसी प्रकार से दुखी होने पर बददुआ कह डालते हैं। 

लोग अपने ही घर परिवार के लोगों या दोस्तों के बारे में गलत सोचते या बोलते वक्त सोचते नहीं। लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम रहता है कि  किसी समय में निकले बोल या सोच विनाशकारी हो सकती है। इसका बुरा असर खुद पर भी हो जाए।

प्राचीनकाल में ऋषि मुनि किसी व्यक्ति या देवताओं को शाप या आशीर्वाद दे देते थे जो तत्काल ही फलीभूत हो जाता था। 

 वे शाप देते मगर क्षमा मांगने पर या अन्य कारण से मुक्ति का समाधान भी बता देते थे। 

ऐसा माना जाता है कि आज भी आशीर्वाद और शाप फलीभूत होते हैं।

 सामान्य मनुष्य के शाप या आशीर्वाद असामान्य असाधारण रुप में  फलीभूत हो जाए तो आश्चर्य नहीं।

हालांकि एक समय विशेष में दिए गए शाप निश्चित ही फलीभूत हो जाते हैं इसलिए कहा जाता है कि निर्बल की हाय मत लो। सब कुछ होते हुए भी व्यक्ति निर्बल हो सकता है,पीड़ित लाचार हो सकता है।


आप मानें कि परिवार के ही व्यक्ति के मुंह से या मन के भीतर से  किसी तरह से दुखी पीड़ित होने पर अपमानित होने पर परिवार के ही किसी भाई बंधु बहन या अन्य सदस्य के प्रति निकली बददुआ,हाय,दुराशीस का फल अनेक बार बहुत जल्दी प्रगट हो जाता है कि पुरानी घटना से नई घटना अपने आप जुड़ जाती है। ऐसी घटनाओं पर सत्ताधारी नेता,अपार संपत्ति के मालिक और उच्च पदाधिकारी सरकारी गैरसरकारी अधिकारी नजदीकी संगी साथी भी कुछ नहीं कर पाते। ऐसी हालत या घटना पर कहा जाता है। भगवान को यही मंजूर था। विधि के विधान को कोई टाल नहीं सकता। भगवान के आगे किसी की नहीं चलती। बस! इन शब्दों से दिलासा सांत्वना दी जाती है। सभी जाधते हैं कि यह सब कुछ दिन चलता है और प्रभावित को तो जीवन भर भोगना पड़ता है।पने या दूसरों के बच्चों को गालियां न दें, ना ही कोसें। 

 माता-पिता भी अनेक बार बच्चों को कहना न मानने पर, न पढ़ने पर कह देते हैं कि तू न ही होता तो अच्छा था, या घर से चला जा, मर जा।

घर परिवार में वाद विवाद पर मर जाने तक का कह देना।

नाश हो जाने या विनाश हो जाने की कल्पना करना, इसके बारे में सोचना या अपने ही घर परिवार के विनाश का शाप देना बहुत ही विनाशकारी साबित होता है। आप जो कहते हैं वही आपकी ओर लौट कर आता है।

बहुत ज्यादा गंभीर बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति के बारे में कुछ लोग यह भी बोलते रहते हैं कि अच्छे है कि भगवन इसे जल्दी उपर उठा ले। 

ऐसे लोगों को 'काली जुबान' का कहा जाता है जो अक्सर दूसरों के बारे में बुरा-बुरा ही बोलते रहते हैं। ऐसे लोगों से यदि आपका विवाद हो जाए तो वे तुरंत ही आपको शाप देने लगेंगे। 

वे अक्सर कहते हैं कि फलां  फलां  व्यक्ति का कभी भला नहीं होगा, वो तो तड़फ-तड़फ कर मरेगा, वो तो कुत्ते की मौत मरेगा। अरे वो तो जिंदगी में कुछ नहीं कर सकता। ऐसे लोगों की सोच नकारात्मक होती है। लोग खुद शापित होते हैं और दूसरों को भी शाप देते रहते हैं।

 तूझे तेरे किए का दंड अवश्य मिलेगा।भयानक दंड मिलने की चेतावनी दे दी जाती है।

यदि आपने किसी गरीब, भिखारी, अबला या बच्चे का दिल दुखाया है तो उसके दिल से आपके लिए जो बद्दुआ निकलेगी उससे आपको कोई नहीं बचा सकता।

जितना असर उसकी दुआ में होता है उतना ही असर उसकी बद्दुआ में होता है। 

ऐसा भी माना जाता है कि कई बार बददुआ उलट कर लौटती है और बददुआ देने वाले पर ही लग जाती है। दूसरों को गड्ढे में गिराने के लिए अपने ही घर के आगे खोदे गड्ढे में दूसरा गिरे या न गिरे खुद गिर जाते हैं।

कभी सोच कर देखा जाए किसी को पति मरने की बददुआ उलटी लौटे तब क्या होता है? किसी को भी बददुआ देने से पहले सोचा जाए और यह भी किसी को पीड़ित न किया जाए।

वैसे तो विज्ञान का युग है। शब्द की शक्ति को इस तरह से माना जाए या न माना जाए।

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2018

आर्म लाइसेंस प्रकरण निस्तारण शिविर: वृद्ध स्थानांतरित भी कर सकेंगे


श्रीगंगानगर, 20 अप्रैल। पुराने आर्म लाइसेंस प्रकरणों के विचारधीन आवेदन पत्रों के निस्तारण के लिए निम्न थाना क्षेत्रों के शिविर निम्न तारीखों में जिला मुख्यालय पर लगेंगे।

25  अप्रैल 2018 को पुलिस थाना पदमपुर, जैतसर, मटीलीराठान, श्रीकरणपुर, सादुलशहर, श्रीबिजयनगर क्षेत्र।

26 अप्रैल को पुलिस थाना मुकलावा, रामसिंहपुर, गजसिंहपुर, सूरतगढ, घमुडवाली, केसरीसिंहपुर, हिन्दुमलकोट व अनूपगढ क्षेत्र।

27 अप्रैल 2018 को पुलिस थाना लालगढ जाटान, समेजा कोठी, जवाहरनगर, चुनावढ सदर, रायसिंहनगर, रावला क्षेत्र के आवेदनकर्ताओं के लिए विशेष शिविर का आयोजन जिला मुख्यालय (न्याय शाखा जिला कलक्टर श्रीगंगानगर) पर रखा गया है।


जिला कलक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट श्री ज्ञानाराम ने बताया कि आयुध नियम 2016 के अनुसार वृद्ध शस्त्र अनुज्ञाधारी अपनी स्वेच्छा से अपना शस्त्र अनुज्ञा पत्र अपने पति, पत्नी,, भाई, बहिन, पुत्र, पुत्री, दामाद व पौत्र के नाम स्थानान्तरित कर सकता है। शस्त्र अनुज्ञा पत्र स्थानान्तरण करने वाला वृद्ध व्यक्ति, महिला अपने आधार कार्ड के साथ शिविर में उपस्थित होकर अपनी सहमति प्रदान करेगा, करेगी तथा जिसके नाम सहमति दी जा रही है, वह स्वयं उपस्थित होकर यह साक्ष्य प्रस्तुत करेगा कि उसके नाम से पूर्व में कोई शस्त्र अनुज्ञा पत्र नहीं  है।

( पूरा विवरण अपने थाने से पूछ सकते हैं।)

अब तो जागो, कब तक सोते रहोगे?

उठ जाग मुसाफिर भोर भई,

अब रैन कहां जो सोवत है?

जो सोवत है वो खोवत है,

जो जागत है सो पावत है।

यह भजन गीत या जागृति संदेश  50 से अधिक सालों से गूंज रहा है। चाहे देवालय हो चाहे, निवास स्थान, चाहे कोई आयोजन यह समय पर जागने का संदेश सुनाया जा रहा है।

 यह भजन,गीत किसने लिखा और कब लिखा?

यह तो मालूम नहीं मगर लिखने वाले को भी यह अनुमान नहीं हुआ होगा कि आने वाले सालों में यह जगाने का संदेश गूंजता रहेगा। 

समय पर जागने वाले ही सब कुछ पा लेते हैं और दिन में भी सोने वाले सब कुछ खो देते हैं। कितना सटीक संदेश है कि दिन निकलने से कुछ पहले भोर में ही जाग लेना चाहिए।

20-4-2018.

करणीदानसिंह राजपूत,

 सूरतगढ़


गुरुवार, 19 अप्रैल 2018

सीएम जनसंवाद प्रकरण निपटाने में 3 एसडीएम 2 दिन में स्थिति बताएंगे

* जिला बैठक में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों से जवाब तलब होगा*

श्रीगंगानगर, 19 अप्रैल। जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम ने कहा कि जिला स्तरीय बैठक में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस दिए जाएंगे। उनसे 15 दिवस में जवाब लिया जाएगा, नोटिस में पूछा जाएगा कि क्यो ना उनके विरूद्ध 17 सीसीए की कार्यवाही अमल में लाई जाए। 

जिला कलक्टर गुरूववार 19-4-2018  को कलैक्ट्रेट सभाहॉल में आयोजित बैठक में बोल रहे थे। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री के जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान आए प्रकरणों का तत्काल व गंभीरतापूर्वक निपटारा करे। उन्होने निर्देश दिए कि सूरतगढ, गंगानगर व सादुलशहर एसडीएम को आगामी दो दिवस में अपने-अपने प्रकरणों की ताजा स्थिति से अवगत करवाना होगा। 

जिला कलक्टर ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार आगामी माह से न्याय आपके द्वार कार्यक्रम प्रारम्भ होगा, जिसमें राजस्व, समाज कल्याण, पशु पालन, चिकित्सा, महिला बाल विकास, विद्युत, पेयजल, आयोजना, सैनिक कल्याण, पंचायतीराज, श्रम, कृषि, रसद तथा आयुर्वेद विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी रहेगी। सभी विभाग ब्लॉकवार एक अधिकारी को उत्तरदायित्व सौंपेंगे। ब्लॉक स्तरीय अधिकारी प्रत्येक शिविर में उपस्थित रहेंगे। उन्होने कहा कि प्रत्येक विभाग एक एडवांस टीम का गठन करेंगे, जो शिविर से पूर्व गांव में जाकर समस्याओं का निदान करेंगे। 

जिला कलक्टर ने ग्राम स्वराज अभियान की समीक्षा की तथा निर्देश दिए कि चिन्हित 111 गांवों में कोई भी महिला बिना गैस कनैक्शन के या कोई परिवार विद्युत कनैक्शन के बिना न रहे। भारत सरकार के निर्देशानुसार उज्ज्वला, उजाला, सौभाग्य, प्रधानमंत्री जनधन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति  बीमा योजना, सुरक्षा बीमा योजना तथा मिशन इन्द्र धनुष योजनाओं का सौ प्रतिशत नागरिकों  को लाभ दिया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री हैल्प लाईन, भामाशाह, अन्नपूर्णा भण्डार, अनपूर्णा रसोई, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री आवास योजना, फसल बीमा योजना, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, राजश्री, शुभशक्ति योजना तथा शहर में 20 करोड़ की लागत से बनने वाली सड़कों  की अब तक की प्रगति की समीक्षा की तथा आवश्यक निर्देश दिए। 

बैठक में नगर परिषद आयुक्त सुनीता चौधरी, न्यास सचिव श्री कैलाशचंद्र शर्मा, एसडीएम श्री यशपाल आहूजा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ0 नरेश बंसल, अधीक्षण अभ्रियन्ता विद्युत श्री संजय वाजपेई, सहायक निदेशक समाज कल्याण श्री बी.पी. चन्देल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।

इस उपस्थिति से मालूम पड़ता है कि कई अधिकारी सरकार के निर्देशों की परवाह नहीं कर रहे यहां तक कि मुख्यमंत्री के निर्देशों की भी परवाह नहीं कर रहे।


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पृथ्वीराज मील के ससुर विधायक धर्मपाल चौधरी का निधन-

अलवर जिले की मुंडावर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक धर्मपाल चौधरी का बुधवार 18-4-3018 मध्य रात को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. 

धर्मपाल चौधरी को सीने में दर्द के बाद गुरुग्राम के मेदांता अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था. उपचार के दौरान उन्‍होंने रात करीब तीन बजे अंतिम सांस ली. 

उनका पार्थिव शरीर गुरुवार 19-4-2018  को दोपहर बाद पैतृक गांव जाट बहरोड़ पहुंचेगा. दोपहर बाद करीब 3 बजे उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा. उनके निधन पर मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे समेत अन्य भाजपा नेताओं ने दुख जताया है.

अलवर राठ क्षेत्र के जाट नेताओं में धर्मपाल चौधरी का सिक्‍का माना जाता था. धर्मपाल चौधरी साल 2003, 2008 और 2014 में भाजपा से विधायक पद के लिए चुने गए थे.  

भाजपा की पिछली सरकार के कार्यकाल में उन्‍हें संसदीय सचिव बनाकर राज्‍यमंत्री का दर्जा दिया गया था. चौधरी अलवर जिले की जाट महासभा के  2000 से 2014 तक लगातार अध्यक्ष भी रहे थे.



बुधवार, 18 अप्रैल 2018

वसुंधरा के खास अशोक परनामी का भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से इस्तीफा: बड़े बदलाव होंगे





*  करणीदानसिंह राजपूत *

राजस्थान में विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी ने इस्तीफा दे दिया है। 

 अब नया प्रदेश अध्यक्ष किसे बनाया जाएगा इस बारे में अभी तक साफ़ नहीं हो पाया है।

बताया जा रहा है कि केंद्रीय संगठन के इशारे पर परनामी ने इस्तीफा दिया है। वहीं इस बात को लेकर पहले से ही क़यास लगने शुरू हो गए थे कि परनामी को प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया दिया जाएगा। उपचुनाव में पार्टी को मिली हार और संगठन में कमज़ोर होती पकड़ के चलते उनकी जगह किसी अन्य को ये महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी देने की बात सामने आई है।

गौरतलब है कि परनामी पिछले कुछ समय से विवादों की वजह से सुर्ख़ियों में रहे थे। उनके अतिक्रमण को बढ़ावा देने सम्बन्धी बयान से पार्टी की किरकिरी हुई थी। उनके विवादित बयान की खबर को राजस्थान पत्रिका ने प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद हाईकोर्ट तक में सुनवाई हुई थी और उन्हें माफ़ी मांगनी पड़ी थी।

बीजेपी की रणनीति का हिस्सा!

आगामी चुनावों को देखते हुए राजस्थान भाजपा अब जातिगत समीकरण साधने की रणनीति बना रही है। इसके तहत केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री अर्जुन राम मेघवाल, राज्य के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री अरुण चतुर्वेदी और सांसद ओम बिड़ला में से किसी एक को अब भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। हाल ही हुए उपचुनावों में भाजपा की करारी हार का कारण भी जातिगत समीकरण मे गड़बड़ी होना माना जा रहा है।

इन चुनावों में भाजपा के परंपरागत वोटर रहे ब्राह्मण, वैश्य और राजपूत समाज की नाराजगी भाजपा की हार का मुख्य कारण रही। अब इन समाजों को पार्टी के साथ फिर से जोड़ने की रणनीति तैयार की जा रही है। ऐसे में वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी पर गाज गिरी है। उन्हें इसका खामीयाजा अपनी कुर्सी गवाकर चुकाना पड़ा है। परनामी को अध्यक्ष पद से हटाए जाने के साथ ही अब अधिकांश प्रदेश पदाधिकारी और जिला अध्यक्ष की भी छुट्टी होने के संकेत हैं।

लोगों में फिर से अपनी पकड़ बनाने के लिए संगठनात्मक कामकाज प्रदेश प्रभारी और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अविनाश राय खन्ना, राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री वी सतीश और प्रदेश संगठन महामंत्री चंद्रशेखर ही संभाल रहे हैं। अर्जुन राम मेघवाल और ओम बिड़ला पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के निकट होने के साथ ही आरएसएस की पहली पसंद भी हैं।

इसी के साथ मेघवाल और बिड़ला को मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के विरोधी खेमे का माना जाता है। वहीं अरूण चतुर्वेदी पूर्व में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं। साथ ही उन्हे संघ के स्वयंसेवक के नाते कई सालों तक काम करने का अनुभव भी प्राप्त है।

‌सूत्रों की माने तो मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अरूण चतुर्वेदी को अध्यक्ष बनवाना चाहती हैं। इसके लिए सीएम राजे ने प्रदेश में आरएसएस के पदाधिकारियों के साथ दो बार बातचीत कर चुकी है और केंद्रीय नेतृत्व तक भी अपनी बात पहुंचा चुकी है। चतुर्वेदी को मध्यम मार्गीय माना जाता है। सूत्रों के अनुसार, नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम शीघ्र तय कर लिया जाएगा।

भाजपा को बदलाव से कितना लाभ मिल पाएगा? यह समय ही बतलाएगा।









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