शनिवार, 26 मई 2018

वसुंधराराजे से बंगला सं 13 खाली कराया जाए-घनश्यामतिवाड़ी


* वसुंधरा राजे पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से भी बंगला संख्या 13 का उपयोग कर रही हैं।*


घनश्याम तिवाड़ी ने राज्यपाल से मिल कर सरकारी बंगाल खाली करवाने की मांग की।

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राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जयपुर में वीआईपी सिविल लाइन क्षेत्र में एक नहीं बल्कि दो सरकारी बंगलों का उपयोग कर रही हैं। यह आरोप भाजपा के वरिष्ठ विधायक और दीन दयाल वाहिनी के संस्थापक घनश्याम तिवाड़ी ने 25 मई को राज्यपाल कल्याण सिंह से मिल कर लगाए हैं। राज्यपाल से आग्रह किया कि वर्तमान सीएम से बंगला संख्या 13 तत्काल प्रभाव से खाली करवाया जावे तथा पिछले चार वर्षों का बंगले का किराया भी वसूला जाए। इस बंगले की साज सज्जा पर जो करोड़ों रुपया खर्च किया, उसकी वसूली भी मुख्यमंत्री से की जाए। राज्यपाल को दिए ज्ञापन में बताया गया कि मुख्यमंत्री की हैसियत से वसुंधरा राजे सिविल लाइन में बंगला संख्या 8 का उपयोग कर रही है। मुख्यमंत्री के सारे कार्यक्रम इसी बंगले पर होते हैं। यह बंगला मुख्यमंत्री के लिए आरक्षित है, लेकिन इसके बाद भी पिछले चार वर्षों से बंगला संख्या 13 का भी उपयोग हो रहा है। वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री के पद से हटने के बाद आजीवन बंगला संख्या 13 का उपयोग कर सकें, इसलिए विधानसभा में 26 अपै्रल 2011 को राजस्थान मंत्री वेतन (संशोधन) विधेयक लाया गया। असल में इस विधेयक में पूर्व मुख्यमंत्री की सुविधाओं का ही ख्याल रखा गया। विधेयक में सालाना 4 से 5 करोड़ रुपए के खर्च का प्रावधान किया। तिवाड़ी ने राज्यपाल को बताया कि इस विधेयक में संबंधित मुख्यमंत्री सालाना खर्च को नकद भी ले सकता है। जैसे यदि वसुंधरा राजे ने किसी राज्य की राज्यपाल या केन्द्र में मंत्री बन जाए तो राजस्थान में पूर्व मुख्यमंत्री की सुविधा नकद राशि में भी ले सकती हैं। तिवाड़ी ने राज्यपाल कल्याण सिंह की जागीरदारी प्रथा वाले इस विधेयक के विरोध में मैंने 12 मई 2017 को आपको भी पत्र लिखा था, लेकिन मेरे विरोध को दर किनार कर आपने विधेयक को मंजूरी दे दी। यही वजह है कि बंगला संख्या 13 का नाम मुख्यमंत्री ने अनंत विजय रख दिया है। तिवाड़ी ने राज्यपाल से पूछा कि सरकारी बंगले का नामकरण कैसे किया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट की अवमाननाः

तिवाड़ी ने आरोप लगाया कि बंगला संख्या 13 पर कब्जा कर मुख्यमंत्री सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की भी अवमानना कर रही हैं। अपने ज्ञापन के साथ तिवाड़ी ने राज्यपाल को 7 मई 2018 का सुप्रीम कोर्ट का आदेश भी दिया। इस आदेश में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों से सरकारी बंगले खाली करने को कहा गया है। इसी आदेश के अनुरूप उत्तर प्रदेश की सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती, मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव आदि को सरकारी बंगले खाली करने के नोटिस जारी कर दिए हैं। एक ओर सुप्रीम कोर्ट के आदेश से उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्रियों से बंगले खाली करवाए जा रहे हैं तो वहीं राजस्थान में वर्तमान मुख्यमंत्री पूर्व मुख्यमंत्री की हैसियत से भी सरकारी बंगले पर कब्जा कर रखा है। राज्यपाल  को बताया गया है कि सुप्रीम कोर्ट आदेश राजस्थान पर भी लागू होता है। यदि वसुंधरा राजे से बंगला संख्या 13 खाली नहीं करवाया गया तो यह सुप्रीम कोर्ट की अब मानना होगी। राज्यपाल को दिया ज्ञापन मेरे फेसबुक पेज पर पढ़ा जा सकता है। इस संबंध में और अधिकारी जानकारी दीनदयाल वाहिनी के मीडिया प्रभारी दीपक आजाद से मोबाइल नम्बर 7742979442 पर ली जा सकती है।

ये थे ज्ञापन देने वालों में:

राज्यपाल को ज्ञापन देने वालों में दीनदयाल वाहिनी के प्रदेश अध्यक्ष घनश्याम तिवाड़ी के साथ प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य आशीष तिवाड़ी, अशोक यादव, विमल अग्रवाल, अंकित शर्मा, विष्णु जैसवाल, घनश्याम मंत्री, नरेन्द्र भोजक, राजेश अजमेरा, दिलीप महरोली, भंवर सराधना, प्रदीप मोटवानी, आनंद, आशीष क्रांतिकारी, शैलेन्द्र माथुर, अशोक सालोदिया, हर्ष शर्मा आदि थे।

एस.पी.मित्तल) (25_05-2018)

शुक्रवार, 25 मई 2018

राजस्थान सरकार का फसली कर्ज माफी में बदलाव: किसानों को बड़ा झटका

25 मई 2018.राजस्थान सरकार बजट घोषणा में 50 हजार तक के फसली ऋण माफी योजना की घोषणा कर प्रदेश व देश में वाहवाही लूटी लेकिन ऋण माफी शुरू होने से पहले ही सरकार ने किसानों को बड़ा झटका दज दिया।

राजस्थान फसली ऋण माफी योजना 2018 के तहत कई किसानों को योजना के दायरे से बाहर कर दिया है। सरकार के  इस आदेश से प्रदेश में किसानों की नींद उड़ा दी है। योजना के दायरे में आने वाली शर्तों के कारण प्रदेश के करीब नौ लाख किसान लाभ उठाने से वंचित हो जाएंगे।

 प्रदेश में सहकारी बैंकों के जरिए फसली ऋण लेने वालों की संख्या करीब 30 लाख है।

सरकार की ओर से गुरुवार 24-5-2018 को जारी किए आदेश में कई श्रेणियों को ऋण माफी के दायरे से बाहर किया गया है। 

नए आदेश में सबसे अधिक परेशानी आयकर दाता, केन्द्र व राज्य सरकार से नियमित पेंशन लेने वाले किसानों को बाहर करने से होगी।

 इन शर्तों के दायरे में 29 से 33 प्रतिशत तक किसान आ जाएंगे। विभागीय अधिकारी नए आदेश आने के बाद एक बार फिर लिस्ट बनाने में जुट गए हैं।


ये थी राजस्थान बजट 2018 घोषणा

राजस्थान सरकार बजट 2018 की घोषणा में 30 सितंबर 2017 को अवधिपार ऋण पर समस्त शास्तियां एवं ब्याज तथा लघु एवं सीमांत कृषकों के 30 सितंबर 2017 तक अल्पकालीन फसली ऋण में से 50 हजार रुपए तक के कर्जे एकबारीय माफ करने की घोषणा की गई थी। जिसमें केन्द्रीय सहकारी बैंक और प्राथमिक सहकारी भूमि विकास बैंक के लघु व सीमांत किसानों के अवधिपार व अन अवधिपार ऋण ही माफ होने थे।

अब यह है आदेश

रजिस्ट्रार सहकारी समितियां राजस्थान की ओर से जारी आदेश के अनुसार आयकर दाता किसान, नियमित पेंशन धारक, केन्द्र व राज्य सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी, वर्तमान व पूर्व सांसद- विधायक, केन्द्र व राज्य मंत्री मंडल के वर्तमान और पूर्व सदस्य, विभिन्न निगम में नियुक्त केबिनेट का दर्जा प्राप्त पदाधिकारी, राज्य स्तरीय आयोग में नियुक्त अधिकारी एवं सदस्य को ऋण माफी से पृथक किया गया है।

नए आदेश के बाद प्रदेश में नए सिरे से लिस्ट तैयार होंगी। 


श्रीगंगानगर व हनुमानगढ जिलों में रेल सेवाओं के विस्तार की मांग





श्रीगंगानगर, 25 मई 2018.

पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री वं सांसद श्री निहालचंद ने केन्द्रीय रेल मंत्री श्री पीयुष गोयल से मुलाकात कर  श्रीगंगानगर व हनुमानगढ जिलों में रेल सेवाओं को और बेहतर करने के संबंध में विस्तारपूर्वक चर्चा की। 


सांसद श्री निहालचंद ने 

बीकानेर-नांदेड-बीकानेर, व

बीकानेर-सिकन्दराबाद-बीकोनर को (वाया कैनाल लूप )श्रीगंगानगर तक बढाने हेतु निवेदन किया।

इसके साथ ही 

श्रीगंगानगर-जोधपुर-श्रीगंगानगर (वाया कैनाल लूप) व 

श्रीगंगानगर-सीकर-श्रीगंगानगर (वाया हनुमानगढ), 

अनूपगढ-नई दिल्ली-अनूपगढ व श्रीगंगानगर-नई दिल्ली-श्रीगंगानगर इंटर सिटी (वाया हनुमानगढ) तक नई रेल सेवा शुरू करने के संबंध में  निवेदन किया।

केन्द्रीय  रेल मंत्री श्री पीयुष गोयल द्वारा सभी प्रस्तावों में गंभीरता से विचार करने का आश्वासन दिया और जल्द से जल्द आवश्यक कार्यवाही हेतु विभाग को भी निर्देशित किया। सांसद श्री निहालचंद ने कहा कि उन्हे आशा है कि रेल मंत्रालय द्वारा इस क्षेत्र में रेल सेवाओं को और बेहतर करने के उद्देश्य  से इन सभी प्रस्तावों को मंजूर किया जाएगा।

राजस्थान मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़ में कांग्रेस बसपा समझौते की संभावनाएं





 25 मई 2018.


कर्नाटक में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में विपक्षी एकता को लेकर कांग्रेस में उत्साह है। राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने वाले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस बसपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकती है।


कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बुधवार को बेंगलुरु में शपथ ग्रहण समारोह में यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी और बसपा सुप्रीमो मायावती की मुलाकात भविष्य की राजनीति का संकेत देने के लिए काफी है। इस मुलाकात से प्रदेश कांग्रेस के नेताओं में यह उम्मीद जगी है कि मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बसपा के साथ गठबंधन हो सकता है।


मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बसपा का प्रभाव है। पिछले चुनाव में बसपा ने मध्य प्रदेश में चार और छत्तीसगढ़ में एक सीट जीती थी। ऐसे में पार्टी का एक बड़ा तबका चुनाव में बसपा और दूसरे दलों के साथ गठबंधन की वकालत कर रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी ने कहा कि इन प्रदेशों में या तो भाजपा है या कांग्रेस है। जो छोटी पार्टियां हैं, वह कुछ सीट चाहती हैं तो देने में कोई ऐतराज नही है।


छत्तीसगढ़ में पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के बीच वोट प्रतिशत में अंतर एक फीसदी से भी कम था। कांग्रेस को 40.29 और भाजपा को 41.18 फीसदी वोट मिले थे। जबकि इन चुनाव में बसपा ने 4.27 फीसदी वोट के साथ एक सीट जीती थी। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और बसपा का वोट मिल जाए, तो भाजपा की राह आसान नहीं होगी। मध्य प्रदेश में भी भाजपा की मुश्किलें बढ़ जाएगीं।


मध्य प्रदेश के प्रभारी दीपक बाबरिया भी समान विचार वाली पार्टियों के साथ आने की वकालत कर चुके हैं। उनका कहना है कि प्रदेश की जनता शिवराज सिंह चौहान के कुशासन से मुक्ति चाहती है।

राजस्थान में भाजपा की वसुंधराराजे सरकार से भी लोग नाराज हैं और यह नाराजगी प्रगट होने लगी है।


गुरुवार, 24 मई 2018

जनता के मूड में बदलाव- राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश में कांग्रेस सरकार

May 24, 2018 

केन्द्र की बीजेपी सरकार अब अपनी चौथी सालगिरह मना रही है। इसी साल के अंत तक देश के तीन राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। ये राज्य हैं, राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़। हिन्दी न्यूज चैनल एबीपी ने इन राज्यों के लिए ओपिनियन पोल किया है। ओपिनियन पोल के मुताबिक अगर इस वक्त राजस्थान और मध्य प्रदेश में चुनाव हुए तो दोनों ही राज्यों से बीजेपी की छुट्टी हो सकती है। सर्वे के मुताबिक राजस्थान और मध्य प्रदेश दोनों ही राज्यों में कांग्रेस जोरदार वापसी कर सकती है। सर्वे के मुताबिक अगर इस वक्त मध्य प्रदेश में चुनाव हुए तो बीजेपी को 34%, जबकि कांग्रेस को 49 प्रतिशत वोट मिल सकता है, जबकि अन्य के खाते में 17 फीसदी वोट जाने का अनुमान है। बता दें कि 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को मध्य प्रदेश में 45 फीसदी, कांग्रेस को 36 फीसदी जबकि अन्य को 19 प्रतिशत वोट मिले थे।

सर्वे के मुताबिक राजस्थान की तस्वीर भी कुछ ऐसी ही है। अगर यहां अभी चुनाव हो तो बीजेपी को 39 प्रतिशत, कांग्रेस को 44 प्रतिशत और अन्य को 17 प्रतिशत वोट मिलता दिख रहा है। इस तरह से राजस्थान में कांग्रेस के वोट प्रतिशत में बीजेपी के मुकाबले 5 फीसदी का इजाफा दिख रहा है। 2013 में यहां बीजेपी को 45 प्रतिशत, कांग्रेस को 33 प्रतिशत और अन्य को 22 प्रतिशत वोट मिले थे।


एबीपी न्यूज के इस सर्वे के मुताबिक अगर इस वक्त राजस्थान में लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ तो एनडीए के खाते में 45 फीसदी, यूपीए के खाते में 42 फीसदी और अन्य के हिस्से में 13 प्रतिशत वोट जाने का अनुमान है। लेकिन यहां पर 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को 55 फीसदी, यूपीए को 30 फीसदी और अन्य को 15 प्रतिशत वोट मिल रहा है। इस तरह से अगर अभी चुनाव हो तो एनडीए को 2014 के मुकाबले 10 प्रतिशत वोटों का नुकसान हो दिख रहा है।  इसी तरह से अगर एमपी में अभी लोकसभा चुनाव के वोट डाले जाएं तो एनडीएन को नुकसान होता दिख रहा है। सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि इस वक्त एनडीए को 40 फीसदी, यूपीए को 50 फीसदी और अन्य को 10 परसेंट वोट मिल रहा है। यहां पर 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को 54 फीसदी वोट मिला था। इस तरह से साल 2014 के मुकाबले एनडीए को 14 प्रतिशत वोट का नुकसान होता दिख रहा है।

साभार जनसत्ता 

बुधवार, 23 मई 2018

भाजपा के 2019 में नेताओं पर अनैतिकता भ्रष्टाचार के आरोपों से भारी बदनामी होगी:


* नेताओं की आपस में लड़ाई होगी*

* अकेले दम पर सरकार संभव नहीं*

जालंधर: कर्नाटक में भाजपा द्वारा अपनी सरकार को बचाए रखने में विफलता के बाद अब अगले लोकसभा चुनाव 2019 में केन्द्र में किसकी सरकार बनेगी, इसे लेकर सियासी पटल पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। ज्योतिषी भी इस संबंध में भविष्यवाणियां करने में पीछे नहीं हैं। कनाडा के ज्योतिषी प्रो. पवन कुमार शर्मा के अनुसार भाजपा को इस समय सूर्य महादशा में शुक्र की अन्तर्दशा चल रही है, जो 19 जून 2018 तक रहेगी। शुक्र पर नीच राशि के चंद्रमा, नैप्च्यून, यूरेनस तथा शनि की दृष्टि है। 


कुल मिलाकर शुक्र भाजपा की लगन, नवमाश व दशमांश कुंडली में अशुभ ग्रहों से दृष्ट है। शुक्र की अन्तर्दशा में भाजपा को विफलता, आलोचना, आरोपों व हानि के सिवाय कुछ नहीं मिलेगा। भाजपा पर कई प्रकार की अनैतिक गतिविधियों में लिप्त होने के आरोप लगेंगे। भाजपा की जन्मकुंडली में शुक्र व शनि की दृष्टि होने से भाजपा को ऐसी अनैतिक गतिविधियों व कार्य के कारण जनता से दंड मिलेगा। भाजपा के कई नेताओं पर कई आरोप लगेंगे। 

उन्होंने कहा कि भाजपा के कुछ नेताओं को जेल भी हो सकती है व कुछ पर भ्रष्टाचार के आरोप भी लगेंगे। कुल मिलाकर भाजपा का जनाधार घटेगा। जनता में भाजपा की छवि को गहरा आघात लगेगा। किसी महिला नेता के कारण भाजपा को भारी बदनामी का सामना भी करना पड़ेगा, जिससे भाजपा की जनता में साख घटेगी।  उन्होंने कहा कि गोचर में शनि 26 अक्तूबर 2017 से लगन से सातवें, चंद्रमा से दूसरे तथा सूर्य से 10वें स्थान में संचार कर रहा है। शनि की दृष्टि लगन, नौवें व चौथे भाव पर पड़ रही है। 


देश का मीडिया चाहे यह दावा कर रहा है कि 2019 के आम चुनावों में भाजपा को सफलता प्राप्त होगी परन्तु गोचर में शनि जनवरी 2021 तक धनु राशि में चलेगा तथा उसकी दृष्टि चौथे भाव में प्लूटो पर पड़ेगी, जिस कारण 2019 के चुनावों तक भाजपा का जनसमर्थन काफी कम हो जाएगा। भाजपा अगर धार्मिक मुद्दों को उठाएगी तो उसका दाव उलटा हानिकारक होगा। 


19 जून 2018 से 10 वर्षों के लिए भाजपा को चंद्रमा की महादशा शुरू होगी। जन्म कुंडली में चंद्रमा छठे घर में नीच का है। चंद्रमा का समय शुरू होते ही भाजपा में अन्तर्कलह चरम सीमा पर बढ़ेगी, इसके नेता खुलेआम एक-दूसरे के विरुद्ध लड़ेंगे। भाजपा को सूर्य की महादशा अच्छी रही परन्तु चंद्रमा की महादशा में भाजपा केन्द्र में अपने बलबूते पर सरकार बनाने मेें असमर्थ होगी, उसे 2019 में पूर्ण बहुमत हासिल नहीं होगा। चंद्रमा के समय में नौजवानों का समर्थन भाजपा व मोदी सरकार से पीछे हट जाएगा। 

 ( साभार पंजाब केसरी 22-5-2018 )




सोमवार, 21 मई 2018

राजस्थानी भाषा मान्यता: के सी मालू पुनः प्रदेशाध्यक्ष व मनोजकुमार स्वामी प्रदेश महामंत्री चुने गए

जयपुर/सूरतगढ़ 21 मई 2018.

अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता समिति की प्रदेश स्तरीय बैठक जयपुर के महारानी होटल में के सी मालू की अध्यक्षता में 20 मई को आयोजित हुई। 

जिसमें प्रो. कल्याणसिंह शेखावत, डा. अमरसिह राठौड़ के सानिध्य में सर्वसम्मती से आगामी तीन वर्षो के लिए चुनाव समपन हुए। जिसमें के सी मालू को पुनः प्रदेशाध्यक्ष व मनोजकुमार स्वामी को प्रदेश महामंत्री चुना गया। बैठक में पदमश्री डां. सीपी देवल, प्रो. भंवरसिंह सामौर, पदम मेहता, देवकिशन राजपुरोहित, डां. गौरीशंकर निमिवाल, किशनलाल स्वामी, कल्याणसिंह, इन्द्रसिंह, विक्रम राजपुरोहित, शोभा राजपुरोहित, कर्णसिंह, फिल्मस्टार मोहन कटारियां, नंदकिशोर जालानी, अशोक गहलोत, गजेन्द्रसिंह राजपुरोहित, हेमजीत मालू, श्याम सुन्दर आदि नें भाग लिया। बैठक में राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए संघर्ष को और तेज करने की रूप रेखा तैयार की गई। बैठक में यह निर्णय लिया गया की समिति द्वारा शीघ्र विधान सभा का घेराव व दिल्ली में बड़ा धरना लगाने की तैयारियां जोरशोर से की जाएगी। कार्यक्रम का संचालन व संयोजन डा. भरत ओळा ने किया। 



श्री जैन श्श्वेताम्बर तेरापंथी आंचलिक समिति के अध्यक्ष मांगीलाल रांका निर्वाचित



पीलीबंगा/सूरतगढ़/  21 मई 2018.

संस्था की पीलीबंगा के जैन भवन में हुई वार्षिक साधारण सभा में सर्वसम्मति से सूरतगढ के मांगीलालजी रांका को अध्यक्ष चुना गया।

चुनाव अधिकारी चंद्रेश जैन एवं बंशीलाल दुग्गड़ ने मांगीलाल रांका को दो वर्ष के लिए अध्यक्ष घोषित किया। रांका को साफा एवं मालाएं पहना कर स्वागत किया गया।

रांका ने अपने अध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद सभी से सहयोग की अपेक्षा जताते हुए कहा कि वे अंचल के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, अबोहर, फाजिल्का क्षेत्र में सभी का सहयोग लेकर धार्मिक संस्कार पुष्ट करने का काम करेंगे।

इससे पूर्व निवर्तमान अध्यक्ष भोजराज जैन, कृष्णकुमार जैन, सुरेंद्र रांका, कमलापति पटावरी,प्रकाश जैन, राजेन्द्र पारख, वीरेन्द्र नाहटा आदि ने विचार रखे। 

अंचल की इस शीर्ष संस्था की साधारण सभा पीलीबंगा की तेरापंथी सभा के आतिथ्य में हुई। इसमें अलग-अलग जगहों की संस्थाओं के पदाधिकारी अच्छी संख्या में मौजूद थे। 

मांगीलाल रांका विद्युत निगम के अधीक्षण अभियन्ता पद से सेवानिवृत्ति के बाद से अधिक समय  तेरापंथी समाज की सेवा में दे रहे हैं। रांका सूरतगढ़ तेरापंथ सभा के अध्यक्ष के रूप में भी काफी सक्रिय रह चुके हैं। इसके अलावा रांका तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के भी सक्रिय सदस्य हैं। सामाजिक कार्यों में सदा अग्रणी रहने वाले रांका अपनी मिलनसारिता एवं धर्मनिष्ठा के कारण विशिष्ट पहचान रखते हैं।


श्रीगंगानगर:नहरों में आ रहा मटमेला पानी पेयजल की डिग्गियों में नहीं डाला जाए- जिला कलक्टर

श्रीगंगानगर, 20 मई। नहरों में आ रहे मटमेले पानी को पेयजल के लिए उपयोग में नही लिया जाएगा।

जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम ने पेयजल विभाग के अधीक्षण अभियन्ता को निर्देशित किया है कि आगामी 2-3 दिनों तक ऐसा ही पानी आता रहे, तब तक पेयजल की डिग्गियों में इसका भण्डारण नही किया जाए। जिला कलक्टर ने पेयजल विभाग एवं चिकित्सा विभाग को लगातार समय-समय पर पेयजल के नमूने लेने के निर्देश दिए है। इसी की अनुपालना में आज विभिन्न समय पर पेयजल विभाग द्वारा 3 नमूने लिए गए। 

पेयजल विभाग के अधीक्षण अभियन्ता श्री वी.के. जैन ने बताया कि जिला कलक्टर के निर्देशानुसार आ रहे मटमेले पानी को पेयजल की डिग्गियों में नही डाला जाएगा। इसके लिए सभी पेयजल परियोजनाओं के प्रभारियों को निर्देशित कर दिया गया है तथा सभी आउट लेट बंद रखने के निर्देश दिए है। श्री जैन ने बताया कि पेयजल परियोजनाओं में पानी का पर्याप्त भण्डारण है, फिर भी ऐतिहास के तौर पर पेयजल वितरण व्यवस्था बनी रहे, इसके लिए पानी वितरण के समय में थोडी कमी करने के निर्देश दिए गए है।

रविवार, 20 मई 2018

बेचारे येदुरप्पा:तीसरी बार भी 5 साल पूरे नहीं कर पाए-

 *तीसरी बार का कार्यकाल बहुत कम तीसरे दिन ही खत्म हो गया*

- करणीदानसिंह राजपूत -

हाई-वोल्‍टेज राजनीतिक नाटक के बीच आखिरकार गुरुवार 17-5-2018 को सुबह बीएस येदुरप्‍पा ने तीसरी बार कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ले ली। 

मगर 19-5-2018 को विधानसभा में बहुमत साबित करने से पहले ही इस्तीफा दे दिया।

*येदुरप्‍पा पहली बार 2007 में, दूसरी बार 2008 में और अब तीसरी बार 2018 में सीएम बने।

येदुरप्‍पा कर्नाटक के कितने बड़े नेता हैं, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह अपने दम पर दो बार बीजेपी को लगभग बहुमत के करीब लेकर आए, लेकिन किस्‍मत ने उनके साथ हर बार खेल किया।

1. येदुरप्‍पा  पहले 2007 में जनता दल-सेक्‍युलर के समर्थन से पहली बार कर्नाटक के सीएम बने थे, लेकिन तब उनके हाथ सत्‍ता केवल 7 दिन तक रह सकी थी। येदुरप्‍पा ने 12 नवंबर 2007 को सीएम पद की शपथ और 19 नवंबर 2007 को उन्‍होंने पद से इस्‍तीफा दे दिया था।

-7 दिन सीएम रहने के बाद येदुरप्‍पा को ज्‍यादा इंतजार नहीं करना पड़ा।

2. 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी। इसके बाद येदुरप्‍पा ने दूसरी बार कर्नाटक के सीएम पद की शपथ ली और 3 साल 62 दिन तक मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर रहे।

-येदुरप्‍पा ने दूसरी बार सीएम पद की शपथ 2008 में ली। वह जब दूसरी बार सीएम बने तब बीजेपी 110 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी, लेकिन बहुमत से 3 सीटें उस वक्‍त भी कम ही रह गईं।

-30 मई 2008 को दूसरी बार सीएम बनने के बाद येदुरप्‍पा 3 और 62 दिन तक मुख्‍यमंत्री की कुर्सी पर रहे, लेकिन भ्रष्‍टाचार के आरोप लगने के बाद उन्‍हें पद से इस्‍तीफा देना पड़ा।

-येदुरप्‍पा के दूसरे कार्यकाल में अवैध खनन के मामले ने तूल पकड़ा और आरोपों की आंच येदुरप्‍पा तक जा पहुंची। लोकायुक्‍त ने जुलाई 2011 में रिपोर्ट सबमिट कराई, जिसमें येदुरप्‍पा की भूमिका की बात कही गई।

-भ्रष्‍टाचार के आरोपों के दायरे में येदुरप्‍पा के परिवार के सदस्‍यों का भी नाम आया। आरोप लगे कि परिवार के सदस्‍यों ने भी डोनेशन के नाम पर खनन कंपनियों से पैसा लिया।

-भ्रष्‍टाचार के आरोपों के बाद येदुरप्‍पा को कर्नाटक के सीएम पद से इस्‍तीफा देना पड़ा। 2011 में पद छोड़ने के बाद येदुरप्‍पा को बीजेपी से वैसा सपोर्ट नहीं मिला, जिसकी उन्‍हें उम्‍मीद थी और येदुरप्‍पा ने पार्टी के खिलाफ ही बगावत का बिगुल बजा दिया। उन्‍होंने कर्नाटक जनता पक्ष नाम से नई पार्टी तक बना डाली।

-मई 2013 में वह शिकारीपुरा सीट से येदुरप्‍पा एक बार फिर विधानसभा पहुंचे।

-नई पार्टी बनाने के बाद भी येदुरप्‍पा बीजेपी के शीर्ष नेताओं के संपर्क में रहे और 2 जनवरी 2014 मतलब लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उन्‍होंने अपनी पार्टी का बीजेपी में विलय करा दिया। यही वही समय जब बीजेपी में मोदीयुग की शुरुआत हो रही थी। अमित शाह की रणनीति में येदुरप्‍पा काफी अहम थे। लोकसभा चुनाव में येदुरप्‍पा शिमोगा से चुनाव लड़े और विपक्षी उम्‍मीदवार को करीब साढ़े तीन लाख वोटों से मात दी।

-2014 लोकसभा चुनाव में येदुरप्‍पा की वापसी से बीजेपी को काफी फायदा हुआ।

-2018 में भी बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन इस बार भी बहुमत से 8 सीट कम हैं। हैरानी की बात यह रही कि येदुरप्‍पा ने 2018 चुनाव के नतीजे आने से पहले ही कह दिया था कि वह 17 मई को सीएम पद की शपथ ले लेंगे। हुआ भी ऐसा ही राज्‍यपाल ने उन्‍हें 17 मई को शपथ का न्‍योता भेजा और येदुरप्‍पा ने गुरुवार सुबह तीसरी बार सीएम पद की शपथ ले ली। लेकिन यह तीसरा कार्यकाल बहुत कम रहा। इस बार राज गया और भाजपा की बदनामी ज्यादा कर गया।

इसका राजनैतिक परिणाम राजस्थान के चुनाव पर भी असर डालेगा। वैसे भी राजस्थान की भाजपा सरकार से जनता बेहद नाराज है और केवल मतदान दिवस का इंतजार कर रही है।

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