रविवार, 26 मई 2019

देश भर में चुनावआचार संहिता हटाई गई:सभी काम हो सकेंगे

दि. 26 मई 2019 भारत निर्वाचन आयोग ने लोकसभा चुनाव 2019,व कुछ राज्यों में विधानसभा चुनावों की संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण हो जाने के बाद आचार संहिता हटाने का आदेश जारी कर दिया है। 


हार के बाद कांग्रेस में हड़कंप-काफी उलट पलट की संभावना राहुल गांधी गुस्सा -


* गहलोत, कमलनाथ, चिदंबरम ने पार्टी से ज्यादा बेटों को दी तरजीह*

* कांग्रेस कार्य समिति सदस्यों द्वारा राहुल का इस्तीफा नामंजूर*


**कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में राहुल ने कहा कि उन्होंने बीजेपी ओर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उठाए थे, पार्टी के नेता उसे जनता के पास ले जाने में असफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने खास तौर पर राफेल डील मामले और 'चौकीदार चोर है' नारे का जिक्र किया।**

26 मई 2019.


आम चुनाव 2019 में मिली करारी हार के बाद कांग्रेस नेतृत्व अपनी गलतियों की समीक्षा करने के लिए शनिवार को इकट्ठा हुआ। कांग्रेस वर्किंग कमेटी में हुई बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन सीडब्ल्यूसी सदस्यों ने उन्हें ऐसा करने से रोक दिया। 

चुनाव नतीजों को लेकर नाराज राहुल गांधी ने कुछ सीनियर कांग्रेसी नेताओं को आड़े हाथ लिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि इन नेताओं ने चुनाव में अपने बेटों को पार्टी से ज्यादा तरजीह दी। राहुल के मुताबिक, इन नेताओं ने अपने बेटों को टिकट देने में सारा जोर लिया दिया। राहुल गांधी ने ऐसी बात तब कही, जब इससे पहले ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मजबूत स्थानीय नेता खड़े करने का सुझाव दिया।

द टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के मुताबिक, राहुल ने इस बात का जिक्र किया कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार थी, वहां भी पार्टी ने बेहद खराब प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ ने अपने बेटों को टिकट देने के लिए दबाव बनाया, जबकि वह इसके पक्ष में नहीं थे। राहुल ने इसी संदर्भ में सीनियर कांग्रेसी नेता पी चिदंबरम का भी नाम लिया। राहुल ने यह भी कहा कि उन्होंने बीजेपी ओर नरेंद्र मोदी के खिलाफ जो मुद्दे उठाए थे, पार्टी के नेता उसे जनता के पास ले जाने में असफल रहे। सूत्रों के मुताबिक, मोदी ने खास तौर पर राफेल डील मामले और ‘चौकीदार चोर है’ नारे का जिक्र किया।

खबर के मुताबिक, राहुल ने कहा कि वह चाहते हैं कि इस हार के लिए जिम्मेदारी तय की जाए इसलिए वह अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे रहे हैं। उनके ऐसा ऐलान करते ही सीनियर पार्टी नेताओं ने इसका विरोध किया। सीनियर नेताओं का तर्क था कि राहुल गांधी ने आगे बढ़कर कांग्रेस की अगुआई की और उन्हें इस हार से दिल छोटा करने की जरूरत नहीं है। खबरों के मुताबिक, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी की राय थी कि अगर राहुल इस्तीफा दे देते हैं तो बीजेपी की चाल सफल हो जाएगी। वहीं, पी चिदंबरम ने आशंका जताई की राहुल के इस्तीफे से आहत बहुत सारे कार्यकर्ता आत्महत्या जैसा कदम उठा सकते हैं।



मोदी की जीत का जश्न मनाएं:चित्रों की झलक






देश में और देश के बाहर भी मनाया जा रहा है नरेन्द्र मोदी का दूसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुने जाने का जश्न।

- करणीदानसिंह राजपूत - 

नरेन्द्र मोदी के आह्वान में बहुत बड़ी शक्ति रही थी कि 2019 के लोकसभा आमचुनाव में जनतांत्रिक गठबंधन को भारी जीत मिली। 353 सीटें मिली जिसमें अकेले भाजपा को 303 सीटें मिली।
मोदी को दूसरी बार प्रधानमंत्री पद के लिए चुना गया है। मोदी की जीत पर भारत को विश्व में शक्ति शाली राष्ट्र के रूप में पहचान मिली है।

मोदी ने आतंकवाद के विरूद्ध संसार को जगाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है तथा भारत को एक महत्वपूर्ण मजबूत राष्ट्र के रूप में स्थापित किया है। इस वजह से विश्व के अन्य देशों की सोच बदल गई है।
मोदी ने बलूचिस्तान के आजादी मांग रहे लोगों को एक संबल प्रदान किया है तथा पाकिस्तान को उसकी हैसियत का एक नमूना दिया है। पाकिस्तान  कश्मीर की स्वायतता के राग अलापता रहा है उसे यह बता दिया है कि उसके कब्जे में जो कश्मीर का हिस्सा है वह भी भारत का हिस्सा है। उसको वापस भारत में शामिल किए जाने का ईशारा देकर भी अपने देश सहित दुनिया को भी ताकत का एहसास करा दिया है।

मोदी मोदी के ही नारों का जयघोष चारों ओर सुनाई पड़ रहा है।
करणी प्रेस इंडिया संग मनाएं मोदी की जीत का जश्न।

शनिवार, 25 मई 2019

हवन कुंड में जिंदा समाधि ले लूंगा’का दावा करने वाले मिर्ची बाबा पर कार्रवाई


25 मई 2019.मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भोपाल संसदीय सीट से कांग्रेसी उम्मीदवार का समर्थन में मिर्ची यज्ञ  कराने वाले महामंडलेश्वर वैराग्यानंद गिरी उर्फ मिर्ची बाबा को बड़ा झटका लगा है। मिर्ची बाबा को दिग्विजय सिंह की हार के बाद जिंदा समाधि लेने वाले बयान पर निरंजनी अखाड़ा ने निष्कासित कर दिया गया है।

निरंजनी अखाड़ा के मुख्य पंच रविंद्र पुरी महाराज ने वैराग्यानंद की तरफ से दिए गए बयान को आपत्तिजनक माना। रविंद्र पुरी महाराज ने कहा कि उनका बयान अखाड़े की मर्यादा के विरुद्ध है। इस लिए उन्हें अखाड़े से निष्कासित करने का निर्णय लिया है। मुख्य पंच ने कहा कि उनका अब अखाड़े से कोई संबंध नहीं है।

इससे पहले महामंडलेश्वर ने दिग्विजय सिंह की जीत के लिए भोपाल में 5 क्विंटल मिर्ची से यज्ञ कराया। दिग्विजय खुद भी इस यज्ञ में शामिल हुए थे। वैराग्यानंद ने मीडिया से बातचीत में भाजपा उम्मीदवार साध्वी प्रज्ञा पर भी खूब निशाना साधा था। उन्होंने कहा था कि प्रज्ञा संत नहीं ढोंगी।


महामंडलेश्वर ने दिग्विजय सिंह के लिए प्रचार करने की भी घोषणा की थी। उनका कहना था कि यदि दिग्विजय सिंह नहीं जीते तो मैं नतीजों केबाद जिंदा समाधि ले लूंगा। दूसरी तरफ चुनाव नतीजों के आने के बाद सोशल मीडिया पर मिर्ची बाबा को खोज रहे हैं। लोग कह कर रहे कि बाबा कहां चले गए हैं। क्या वह समाधि की तैयारी कर रहे हैं। कुछ लोग सोशल मीडिया पर बाबा का नंबर डालते हुए कह रहे हैं कि बाबा का नंबर बंद आ रहा है। उन्हें जल्द से जल्द ढूंढा जाए।

दिग्विजय के पक्ष में कम्प्यूटर बाबा ने किया था हठ योगः 

दिग्विजय के समर्थन में मिर्ची यज्ञ के साथ हट योग भी किया गया था। इस यज्ञ को मध्य प्रदेश की सरकार में कैबिनेट मंत्री का दर्जा पाने वाले कम्प्यूटर बाबा ने किया था। कम्प्यूटर बाबा ने कहा था कि मंदिर का निर्माण नहीं होने पर मोदी को वोट नहीं मिलेगा।


गुरुवार, 23 मई 2019

दुनिया की बड़ी खबर-जनता ने चलादी मोदी फिल्म-* करणीदानसिंह राजपूत *



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर बायोपिक फिल्म को प्रतिपक्ष ने रुकवा दिया था कि इससे मोदी को लोकसभा आम चुनाव में लाभ होगा।

आश्चर्य जनक रहा है कि डिब्बाबंद फिल्म पड़ी रही और देश की जनता ने असली फिल्म को चला दिया। ऐसा प्रदर्शित कर दिया कि पुरानी अन्य फिल्मों के रिकॉर्ड तोड़ नया कीर्तिमान रच दिया। 

यह फिल्म चुनाव के दौरान प्रदर्शित हो जाती तो प्रतिपक्ष का आरोप होता कि इससे भारतीय जनता पार्टी को प्रचार मिला। घटनाक्रम ऐसे हुए की यह फिल्म प्रदर्शित नहीं हो पाई लेकिन भारतीय जनता पार्टी रिकॉर्ड तोड़ जीत प्राप्त कर गई। यह रिकॉर्ड जीत का जो नया बना वह केवल नरेंद्र मोदी के नाम से बना। भाजपा में फूट डालने के लिए लोगों ने यहां तक कहा कि नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी तक को खुडे लाइन लगा दिया है और अब यह एक व्यक्ति के नाम से चुनाव लड़ा जा रहा है।  प्रतिपक्ष ने और अनेक पत्रकारों अखबार और चैनल वालों ने भी कोई कसर नहीं छोड़ी थी, मगर उनका दुष्प्रचार बेअसर रहा। जनता ने बिना देखे ही मोदी फिल्म को मोदी के नाम पर चला दिया और दिल से चलाया। 

"मैं भी चौकीदार"और "इस बार फिर से मोदी सरकार" के नारे पूरे देश में लोकप्रिय हुए। मैं भी चौकीदार नारे का इतना अधिक प्रभाव हुआ कि चप्पे चप्पे में चौकीदार पैदा हो गए और करोड़ों की संख्या में हो गए। 

नरेंद्र मोदी पर चुनावी सभाओं में भद्दे से भद्दे शब्दों में आरोप लगाए गए। सारी मर्यादा तोड़ दी गई मगर जनता है यह सिद्ध कर दिया कि देश को ऐसे ही चौकीदार की जरूरत है जिसकी लाठी में इतना दम हो कि देश के गद्दार भ्रष्टाचारी तो डरें साथ में दुश्मन भी डरता रहे। 

नरेंद्र मोदी कि यह फिल्म चुनाव के वक्त दिखाई जाती तो चुनाव के बाद लोग भूल जाते। उसके बाद उसकी आवश्यकता ही नहीं होती,लेकिन अब 5 साल तक नरेंद्र मोदी की फिल्म चलती रहेगी।

 पहले घोषणाएं भाषण हुए थे कि विपक्ष 2019 को भूल जाए व 2024 की तैयारी करे क्योंकि 2019 में तो भाजपा गठबंधन की ही सरकार बनेगी।  ये भाषण घोषणाएं और ललकार सब सच साबित हुई। नरेंद्र मोदी के विकास कार्यों को जनता ने सराहा और एकदम चुप रहते हुए भी जबरदस्त वोटिंग नरेंद्र मोदी के पक्ष में की। 

भारत के इस लोकसभा आमचुनाव पर देश के साथ विश्व की निगाहें भी लगी हुई थी। इस चुनाव से संपूर्ण विश्व में भारत शक्तिशाली प्रधानमंत्री वाले शक्तिशाली देश के रूप में स्थापित हुआ है।

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बुधवार, 22 मई 2019

बलराम वर्मा की सूरतगढ़ पालिका अध्यक्ष का चुनाव लड़ने में दिलचस्पी

^^ करणीदानसिंह राजपूत ^^

सूरतगढ़ 22 मई 2019.

कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष बलराम वर्मा नगर पालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ेंगे। 

बलराम वर्मा ने आज रात्रि एक शादी समारोह  में बताया कि आगामी नगर पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में वे खड़े होंगे। पालिका अध्यक्ष पद के चुनाव में कुछ महीने ही शेष हैं।

बलराम वर्मा पूर्व में यहां नगरपालिका पार्षद रह चुके हैं।बलराम वर्मा के पुत् एडवोकेट वेद वर्मा भी पार्षद रह चुके हैं। वर्तमान में पुत्र वधू अलका वर्मा पार्षद हैं।  बलराम वर्मा पूर्व में सरपंच पद पर भी रह चुके हैं। पिछले करीब 1 वर्ष से कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष पद पर हैं। नगरपालिका सूरतगढ़ का अध्यक्ष पद विधायक पद के बराबर माना जाता है।






एक लाख रुपए की रिश्वत लेते एईएन सुरेन्द्र कुमार गिरफ्तार- करोड़ों की संपत्ति का मालिक है एईएन।

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने 22 मई 2019 को बड़ी कार्यवाही करते हुए अजमेर जलदाय विभाग के किशनगढ़ में तैनात एईएन सुरेन्द्र कुमार को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। सुरेन्द्र कुमार के साथ विभाग के वरिष्ठ सहायक नवरत्न सोलंकी को भी गिरफ्तार किया गया है। ब्यूरो ने यह कार्यवाही अजमेर के पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के दिशा निर्देश में की है। ब्यूरो के डीएसपी महिपाल चौधरी ने बताया कि ठेकेदार मंगलाराम ने रेलवे में डीएफसीसी में पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया था। हालांकि भुगतान ठेकेदार को डीएफसीसी से ही मिलना था, लेकिन भुगतान से पहले किशनगढ़ के जलदाय विभाग की एनओसी जरूरी थी। इस एनओसी को देने की एवज में ही दो लाख रुपए की मांग की गई। ठेकेदार मंगलाराम ने एक लाख रुपए की राशि पहले ही दे दी थी। ब्यूरो की योजना के अनुरूप 22 मई को जब ठेकेदार मंगलाराम एक लाख रुपए की रिश्वत देने पहुंचा तो ब्यूरो की टीम ने एईएन सुरेन्द्र कुमार और वरिष्ठ सहायक नवरात्न सोलंकी को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। चौधरी ने बताया कि अब दोनों रिश्वतखोरों के घरों की तलाश ली जा रही है। एक लाख रुपए की रिश्वत का मामला अपने आप में बड़ा है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि जलदाय विभाग में किस स्तर पर भ्रष्टाचार फैला हुआ है। 

करोड़ों की संपत्ति

एसीबी के सूत्रों के अनुसार सुरेन्द्र कुमार पिछले कई वर्षों से किशनगढ़ में ही नियुक्त है। अब तक की जानकारी के अनुसार तीन-तीन बंगलों का मालिक है तािा वह एशोआराम की जिन्दगी व्यतीत करता है। एईएन के बेटों के पास डेढ़ लाख रुपए की कीमत वाली मोटर साइकिल है। 

दझ

राजस्थान में बड़ा सवाल- हारे तो किसकी होगी जिम्मेदारी? वैभव गहलोत हारा तो क्या होगा?

लोकसभा चुनाव की मतगणना से एक दिन पहले मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राजस्थान की सभी 25 सीटों पर जीत का दावा किया है। गहलोत ने कहा कि कांग्रेस के सभी उम्मीदवारों से उनकी फोन पर बात हुई है। सभी उम्मीदवार उत्साहित है। सीएम के दावे अपनी जगह है, लेकिन न्यूज चैनलों का जो सर्वे आया है उसमें कांग्रेस को 2-4 सीटेें ही मिलने का अनुमान लगाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि हार हुई तो राजस्थान में किस नेता की जिम्मेदारी होगी? सब जानते हैं कि पांच माह पहले विधानसभा के चुनाव में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यही माना गया कि कांग्रेस को बहुमत मिलने पर पायलट ही मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन कांगे्रस आला कमान ने गहलोत को सीएम बनवा दिया। यही वजह है कि अब लोकसभा चुनाव में हार की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। चुनावी राजनीतिक के जानकारों का मानना है कि यदि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार होती तो पूरी जिम्मेदारी पायलट की ही बनती। लेकिन अब जब मुख्यमंत्री की कुर्सी पर अशोक गहलोत बैठे हैं तो हार की जिम्मेदारी भी गहलोत की ही बनेगी। हालांकि लोकसभा चुनाव में गहलोत और पायलट ने एक साथ प्रचार किया, लेकिन सब जानते हैं कि यह प्रचार किस प्रकार कर रहा। सवाल यह भी है कि क्या संभावित हार की जिम्मेदारी सचिन पायलट लेंगे? जब पायलट को जीत का ईनाम नहीं मिला तो वे हार की जिम्मेदारी क्यों लेंगे?

पायलट के समर्थक अभी गहलोत के सीएम बनने को पचा नहीं पाए हैं। ऐसे समर्थकों को कहना है कि लोकसभा चुनाव की मतगणना में गुर्जर बहुल्य मतदान केन्द्र पर कांग्रेस को मिले वोट से अंदाजा लगाया जा सकता है। विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव में गुर्जर बहुल्य मतदान केन्द्रों के मतों का मिलान किया जाएगा तो हार के कारणों का पता चल जाएगा। सवाल यह है कि क्या मुख्यमंत्री होने के नाते गहलोत हार की जिम्मेदारी लेंगे? गहलोत के लिए एक मुसीबत जोधपुर का परिणाम भी है। जोधपुर से गहलोत के पुत्र वैभव गहलोत कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। यदि वैभव की भी हार होती है तो गहलोत का मुख्यमंत्री के पद पर टिका रहना मुश्किल होगा। यह भी देखना होगा कि लोकसभा चुनाव के बाद अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच कैसे संबंध रहते हैं?

एस.पी.मित्तल) (22-05-19) साभार



नरेन्द्र मोदी की संभावित जीत पर इतना बवाल क्यों?


** विपक्षी दलों की मांग खारिज। मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं। **

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22 मई को चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों की उस मांग को खारिज कर दिया है। जिसमें ईवीएम के मतों की गणना से पहले विधानसभा वार पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों से मिलान कराने की बात कही गई थी। मांग को लेकर 21 मई को 22 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने आयोग को ज्ञापन दिया था। 22 मई को आयोग के फुल कमिशन की बैठक हुई। बैठक के बाद आयोग ने स्पष्ट किया कि 23 मई को देशभर में होने वाली मतगणना की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं होगा। अब पहले के दिशा निर्देशों के अनुरूप वीवीपेट की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों की गणना के बाद होगा। एक विधानसभा क्षेत्र के पांच मतदान केन्द्रों की पर्चियों का मिलान ईवीएम में दर्ज मतों से करना है। जिन पांच केन्द्रों की वीवीपेट की पर्चियों का मिलान होगा, उन केन्द्रों का चयन रेंडम पद्धति से होगा। मिलान के बाद ही परिणाम की अधिकृत घोषणा हो सकेगी। लेकिन निर्वाचन विभाग राउंडवार मतगणना की जानकारी सार्वजनिक करता रहेगा। आयोग ने स्पष्ट किया है कि ईवीएम में किसी भी प्रकार से गड़बड़ी नहीं हो सकती है। ईवीएम सिर्फ बैट्री पर संचालित है। इंटरनेट तकनीक का ईवीएम में कोई उपयोग नहीं है, इसलिए हैक की आशंकाएं निर्मूल हैं। 

जीत पर बवाल क्यों?: 

अधिकृत तौर पर तो 23 मई को ही पता चलेगा कि लोकसभा चुनाव में किसकी जीत हुई है, लेकिन मतगणना से पहले जो रुझान सामने आए हैं उसमें नरेन्द्र मोदी की जीत मानी जा रही है। मोदी की जीत की संभावना पर बिहार के एक नेता ने खून खराबे की आशंका जताई है। विपक्षी नेता का यह बयान देश के लोकतंत्र के लिए खतरनाक संदेश हैं। दुनिया के कई देशों में देखा गया कि सैन्य अधिकारी से राष्ट्रपति बने व्यक्ति मतदान में धांधली कर वर्षों तक सत्ता में बने रहते हैं। कई बार ऐसे तानाशाह शासकों के विरुद्ध संबंधित देश की जनता सड़कों पर आ जाती है और राष्ट्रपति भवन या संसद के बाहर धरना दिया जाता है। ऐसे धरनों से तख्ता पलट भी हो जाता है। लेकिन भारत में उल्टा हो रहा है जिस नेता को जनता ने वोट दिया है उस नेता के चुनाव पर अंगुली उठाई जा रही है। विपक्षी दलों के नेता भी मानते हैं कि इस बार का लोकसभा का चुनाव मोदी बनाम अन्य हुआ है। एनडीए में शामिल राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी मोदी के चेहरे को आगे रख कर वोट मांगे हैं। कांग्रेस सहित तमाम विपक्ष ने अपने प्रचार अभियान में मोदी को ही निशाना बनाया। विपक्ष का मकसद सिर्फ मोदी को हटाना रहा। मोदी को हटाने के लिए विपक्षी दल जो कुछ भी कर सकते थे वो किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो अपनी तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवारों को जीताने के लिए पूरी सरकार को ही दांव पर लगा दिया। पुलिस के अधिकारियों और कर्मचारियों ने तो टीएमसी के कार्यकर्ता की भूमिका निभाई। गुंडातत्वों ने टीएमसी के उम्मीदवारों के लिए मतदान करवाया। इतना सब कुछ करने के बाद भी विपक्षी दलों को चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष नजर नहीं आ रही है। यही वजह है कि परिणाम से पहले ही देश का माहौल खराब करने की कोशिश की जा रही है। यदि मोदी की जीत होती है तो चुनाव प्रक्रिया को संदेह के घेरे में लाने की कोशिश की जाएगी। यदि पश्चिम बंगाल में मोदी को 15 से 20 सीटें मिल गई तो हो सकता है कि ममता बनर्जी लाख दो लाख लोगों को लेकर दिल्ली में धरने पर बैठ जाएं। दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल की पहचान तो धरना सीएम से ही है। दिल्ली में धरना देंगे तो दुनिया भर में भारत की छवि पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। असल में विपक्षी दल मोदी की जीत को पचाने की स्थिति  में नहीं है। लाख कोशिश के बाद भी जब मोदी हारते नजर नहीं आ रहे हैं तो खून खराबे, धरना प्रदर्शन आदि की नीति अमल में लाई जा रही है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)



राजस्थान में भाजपा की बड़ी जीत पर भी अशोक गहलोत को खतरा नहीं।

फस्र्ट इंडिया न्यूज चैनल के हैड  की 

चुनाव परिणाम से पहले खास विश्लेषण*

इंनडिया न्यूज चैनल के हैड जगदीश चन्द्रा ने 22 मई को राजस्थान की राजनीति के संदर्भ में अपना विश्लेषण प्रस्तुत किया है। राजनीतिक घटनाओं का सटीक आंकलन करने वाले जगदीश चन्द्रा का यह विश्लेषण चैनल पर 22 मई को दोपहर तब प्रसारित हुआ, जब 23 मई को प्रात:8 बजे से लोकसभा चुनाव में मतों की गणना होनी है। फस्र्ट इंडिया न्यूज चैनल के दस से भी ज्यदा तेजतर्रार एंकरों के सवालों का जवाब देते हुए जगदीश चन्द्रा ने कहा कि राजस्थान में भाजपा को भले ही बड़ी सफलता मिल जाए लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कोई खतरना नहीं है। जहां तक डिप्टी सीएम सचिन पायलट का सवाल है तो पायलट हमेशा कांग्रेस के प्रति वफादार रहेंगे। कुछ लोगों का मानना है कि पायलट को सीएम पद का लालच देकर भाजपा अशोक गहलोत की सरकार को गिरा सकती है। चन्द्रा ने कहा कि जहां तक मेरी जानकारी में ऐसा प्रस्ताव विधानसभा चुनाव के बाद पायलट को तब भी दिया था जब कांगे्रस आला कमान ने गहलोत को सीएम बनाने का फैसला किया। चन्द्रा ने कहा कि पायलट को सीएम नहीं बनाने से उनके समर्थक और जाति विशेष के लोग मायूस तो हुए, लेकिन पायलट ने कभी भी ऐसा कोई काम नहीं किया जिससे कांग्रेस कमजोर हो। लोकसभा चुनाव में भी पायलट ने गहलोत के साथ मतभेद की खबरों को नकारा और राष्ट्रीय महासचिव अविनाश पांडे के साथ मिल कर तीनों ने प्रचार किया। चन्द्रा ने कहा कि लोकसभा चुनाव में भाजपा चाहे कितनी भी सीट जीत ले, लेकिन गहलोत सरकार के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। परिणाम के बाद कांग्रेस की राजनीति में बदलाव की संभावना नजर नहीं आती है। उन्होंने कहा कि गहलोत हमेशा गांधी परिवार के प्रति वफादार रहे हैं और राजनीति में भी गहलोत की छवि साफ-सुथरी है। यही वजह है कि कई मौकों पर गहलोत कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय राजनीति में भी सक्रिय हो जाते हैं। जहां तक भाजपा की राजनीति में बदलाव की बात है तो मुझे नहीं लगता की राजस्थान में कोई बदलाव होगा। पूरा चुनाव नरेन्द्र मोदी के नाम पर लड़ा गया, यहां तक कि भाजपा के उम्मीदवारों ने मोदी का चेहरा सामने रखकर वोट मांगे। राजस्थान की राजनीति में अब वो ही होगा, जो नरेन्द्र मोदी और अमितशाह चाहेंगे। मंत्रिमंडल में भी मोदी और शाह की राय को ही तवज्जों मिलेगी। राजस्थान में अब ऐसा कोई नेता नहीं है जो आला कमान के समक्ष दबाव की राजनीति कर सके। जहां तक भाजपा और कांग्रेस को सीट मिलने का सवाल है तो दोनों ने ही अपने अपने दावे किए हैं। भाजपा ने जहां सभी 25 सीटों पर जीत की बात कही है, वहीं कांग्रेस के अनेक नेताओं का मानना है कि यदि दस सीटे भी मिल जाएगी तो राजस्थान में कांग्रेस मजबूत स्थिति में खड़ी होगी। चूंकि 2014 में एक सीट भी कांग्रेस को नहीं मिली। ऐसे में अब जो सीटें मिलेंगी उसका फायदा कांग्रेस को होगा। चन्द्रा ने कहा कि किस दल को कितनी सीटें मिलेंगी इस पर मेरा कोई आंकलन नहीं है। 

अमेठी में राहुल फंसे हैं, जबकि बनारस और अहमदाबाद में आसान जीत:

चन्द्रा ने कहा कि अमेठी में कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी का भाजपा उम्मीदवार और केन्द्रीय मंत्री स्मृति इरानी से कड़ी मुकाबला है। इसमें कोई दो राय  नहीं कि भाजपा की फायर ब्रांड नेता ईरानी ने अमेठी में भाजपा की मजबूत जमीन तैयार की है। चन्द्र का मानना रहा कि बनारस से नरेन्द्र मोदी और अहमदाबाद से अमितशाह की जीत आसान है। प्रियंका गांधी ने अपनी उम्मीदवार वापस लेकर मोदी को पहले ही वॉक ऑवर दे दिया, जबकि अहमदाबाद सीट पर अमितशाह के सामने कोई मुकाबला ही नहीं है। 

एस.पी.मित्तल) (22-05-19)

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