बुधवार, 17 अक्तूबर 2018

यौनशोषण आरोपों से घिरे एमजे अकबर का मंत्री पद से इस्‍तीफा:मोदी मंत्री मंडल में राज्यमंत्री रहे




*****अकबर पर लगभग 20 महिला पत्रकारों ने यौन शोषण का आरोप लगाया है *****

October 17, 2018.

यौन शोषण के आरोपों में फंसे विदेश राज्य मंत्री एम.जे.अकबर ने बुधवार (17 अक्टूबर) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन पर करीब 20 महिलाओं ने छेड़खानी करने का आरोप लगाया था, जिसमें सभी पत्रकार हैं। उन्होंने त्यागपत्र में कहा, “मैंने यौन शोषण के मामले में कानूनी मदद लेने का फैसला लिया है, इसलिए मैं मानता हूं कि मुझे अपने पद को छोड़कर इन झूठे आरोपों को चुनौती देनी चाहिए।”

 एमजे अकबर के खिलाफ आईं 19 महिला पत्रकार, केंद्रीय मंत्री के खिलाफ देंगी गवाही

‘आपने अंडरवियर में दरवाजा खोला’, एमजे अकबर के खिलाफ एक और महिला सहकर्मी ने लगाए आरोप

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नई दिल्ली 17-10-2018.


महिला पत्रकारों के साथ यौन दुर्व्यवहार के आरोपों से घिरे केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री एम. जे. अकबर ने आखिरकार बुधवार  17-10-2018 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। 

अकबर के एशियन एज अखबार के संपादक रहने के दौरान उनकी तत्कालीन महिला सहयोगी पत्रकारों ने पिछले दिनों उनपर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। अकबर ने इससे पहले रविवार को अपने आधिकारिक बयान में आरोपों पर अपना पक्ष रखा था। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताया था। अकबर ने आरोप लगाने वाली एक पत्रकार प्रिया रमानी के खिलाफ दिल्ली की एक अदालत में मानहानि का केस भी किया है।

रविवार को  अकबर ने अपने ऊपर लगे आरोप को पूरी तरह से झूठ करार दिया था और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली पत्रकारों में से एक प्रिया रमानी के खिलाफ सोमवार को आपराधिक मानहानि का मुकदमा कर दिया था। हालांकि, रमानी के समर्थन में 20 अन्य  महिला पत्रकार सामने आ गई हैं। ये सभी पत्रकार 'द एशियन एज' अखबार में काम कर चुकी हैं। अकबर की ओर से रमानी को मानहानि का नोटिस भेजे जाने पर इन महिला पत्रकारों ने एक संयुक्त बयान में रमानी का समर्थन करने की बात कही और अदालत से आग्रह किया कि अकबर के खिलाफ उन्हें भी सुना जाए। 


किस-किस ने लगाए थे आरोप? 


67 वर्षीय अकबर अंग्रेजी अखबार ‘एशियन एज’ के पूर्व संपादक हैं। सबसे पहले रमानी ने उनके खिलाफ आरोप लगाय था और बाद में धीरे-धीरे और महिला पत्रकार भी अपनी शिकायतों के साथ खुलकर सामने आ गई थीं। इन महिला पत्रकारों ने उनके साथ काम किया था। अकबर के खिलाफ खुलकर सामने आनेवाली पत्रकारों में फोर्स पत्रिका की कार्यकारी संपादक गजाला वहाब, अमेरिकी पत्रकार मजली डे पय कैंप और इंग्लैंड की पत्रकार रूथ डेविड शामिल हैं। 

अकबर का पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर 

दैनिक अखबार ‘द टेलीग्राफ’ और पत्रिका ‘संडे’ के संस्थापक संपादक रहे अकबर 1989 में राजनीति में आने से पहले मीडिया में एक बड़ी हस्ती के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ा था और सांसद बने थे। अकबर 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हुए थे। मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य अकबर जुलाई 2016 से विदेश राज्य मंत्री थे। 








विश्वास रखें सरकार कहीं नहीं गई-वसुंधरा:102 सीटों पर मंथन पूरा:कुछ सीटों पर बदलाव के संकेत





रणकपुर/पाली


राजस्थान में हर पांच साल बाद सत्ता बदलने का ट्रेंड खत्म करने की कोशिशों में जुटी भाजपा ने आधी से ज्यादा सीटों का फीडबैक पूरा कर लिया है। 

पिछले तीन दिन से रणकपुर में चल रहा बीजेपी का शिविर मंगलवार को खत्म हो गया। 

तीसरे दिन कोटा और उदयपुर संभाग की 36 सीटों के लिए मंथन किया गया। तीन दिन की रायशुमारी में सरकार और संगठन के समक्ष मौजूदा विद्यायकों के प्रति असंतोष भी सामने आया।

टिकट बंटवारे से पूर्व बीजेपी ने हर विधानसभा क्षेत्र से जमीनी फीडबैक और कार्यकर्ताओं के सुझाव जुटाने के लिए 14 अक्टूबर से रणकपुर में जानकारी लेनी शुरू की। बीकानेर संभाग से शुरू हुआ रायशुमारी का दौर तीन दिन तक चला। बीकानेर के बाद जोधपुर, कोटा और उदयपुर संभाग की 102 सीटों के लिए पार्टी आलाकमान ने फीडबैक लिया। मंगलवार को कोटा जिले की 19 और उदयपुर की 17 सीटों पर मंथन किया गया।


कॉन्फिडेंस रखें सरकार कहीं नही गई-

सीएम 

कोटा संभाग की सभी विधानसभा क्षेत्रों से आए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए मुख्यमंन्त्री वसुंधरा राजे ने कहा कि आप कॉन्फिडेंस रखें सरकार कहीं नहीं गई है। राजे ने यह भी समझाने का प्रयास किया कि परसेप्शन को खत्म करें आपकी जीत पक्की है। उन्होंने कांग्रेस को लगातार तीसरे दिन भी जमकर घेरा। इससे पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मदनलाल सैनी ने भी कार्यकर्ताओं में जोश भरने की पूरी कोशिश की।


जयपुर कैम्प के बाद प्रत्याशियों के नामों पर लगेगी मोहर 

अजमेर और भरतपुर संभाग की 98 सीटों की रायशुमारी जयपुर में 20 अक्टूबर से शुरू होगी। इसके बाद फीडबैक और सर्वे के आधार पर जिताऊ दावेदारों के नामों पर मोहर लगाई जाएगी। रायशुमारी में मिले फीडबैक के आधार पर पार्टी कई मौजूदा विधायकों को बदलने पर विचार कर रही है।

16-10-2018


मंगलवार, 16 अक्तूबर 2018

राजस्थान में भाजपा हाईकमान 150और वसुंधरा 50 सीटें बांटेंंगे

राजस्थान विधानसभा चुनाव की कमान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने अपने हाथों में ले ली है। 

इसके पीछे पार्टी का मकसद लोकसभा चुनाव से पहले मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस पर दबाव बनाना होगा। खबर तो यह भी है कि राजस्थान में सबकुछ कंट्रोल करने के इरादे से इसबार पार्टी आलाकमान टिकट बंटवारे को लेकर सीएम वसुंधरा राजे के अधिकार सीमित कर सकती है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक चुनाव तो एक साथ पांच राज्यों में हो रहे हैं लेकिन अमित शाह सबसे ज्यादा वक्त राजस्थान में ही बिताएंगे। इसके पीछे तर्क है कि राज्य में शाह के कमान संभालने के बाद भाजपा राज्य में अच्छा प्रदर्शन कर सकेगी। इसके अलावा पार्टी के बिखराव का खतरा भी खासा कम होगा।

दरअसल इसके पीछे रणनीति है कि राज्य में भाजपा के हारने की जितनी संभावनाएं जताई जा रही हैं, उतनी है नहीं। 

चुनाव नजदीक आते-आते शाह राज्य में हालात बदल सकने में सक्षम हैं। चूंकि पार्टी का मानना है कि अगर राजस्थान चुनाव भाजपा के नाम रहा तो 2019 में कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों की उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा। 

भाजपा के दिग्गज नेताओं के मुताबिक मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में तो हालात करीब-करीब ठीक हैं और यहां के मुख्यमंत्री बेहतर प्रदर्शन कर सकने में सक्षम भी हैं। 

इसमें पार्टी आलाकमान राजस्थान को सीएम राजे के भरोसे नहीं छोड़ना चाहता। 

यही कारण है कि इस बार 200 विधानसभा सीटों में से 150 का चयन पार्टी आलाकमान के हस्तक्षेप से होगा। जबकि सीएम खेमे के लिए करीब 50 सीटें रखी जाएंगी। यहां इसका मतलब यह है कि इन सीटों पर वसुंधरा के पसंद के उम्मीदवारों को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है। मगर बाकी सीटों पर पार्टी का दखल होगा।

अमित शाह ने अपने प्रवास के दूसरे और अंतिम दिन सोमवार को कांग्रेस पर जोरदार हमले बोले और कार्यकर्ताओं से कहा कि यह चुनाव सरकार बनाने के लिए नहीं, बल्कि कांग्रेस को मूल सहित उखाड़ फेंकने के लिए लड़ना है। रीवा में रीवा-शहडोल संभाग के कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, ‘आपने सरकार बनाने के लिए कई चुनाव लड़े हैं, मगर आने वाला चुनाव सरकार बनाने के लिए नहीं है, यह चुनाव कांग्रेस को मूल सहित उखाड़ फेंकने के लिए है।’ उन्होंने कार्यकर्ताओं को भरोसा दिलाया, ‘वर्ष 2019 में नरेंद्र मोदी को फिर प्रधानमंत्री बनाओ, मैं आपको गारंटी देता हूं कि अगले 50 वर्ष तक पंचायत से संसद तक भाजपा का भगवा ध्वज ही लहराएगा।



राजनीतिक भेंट के बहाने नई लड़कियों का यौन शोषण:NSUI अध्यक्ष फिरोज का इस्तीफा

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के अध्यक्ष फिरोज खान ने मंगलवार (16 अक्टूबर) को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह फैसला खुद पर यौन शोषण के आरोप लगने के बाद लिया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी आलाकमान ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया है।

खान, मूलरूप से जम्मू और कश्मीर के रहने वाले हैं और उन्होंने सोमवार (15 अक्टूबर) को त्याग-पत्र पार्टी दफ्तर भेजा था। जून में इसी साल उन पर छत्तीसगढ़ के एनएसयूआई ऑफिस की बियरर ने उन पर यौन शोषण के आरोप लगाए थे। मामले में जांच-पड़ताल के लिए आंतरिक कमेटी बनाई गई थी, जो शुक्रवार को इस मामले में रिपोर्ट सौंपेगी।

पीड़िता ने खान के खिलाफ इस संबंध में पुलिस को शिकायत भी दी थी। आरोप है, “राजनीतिक मुलाकातों के नाम पर खान नई लड़कियों का यौन शोषण करते थे।” जांच के लिए बनी कांग्रेस की आंतरिक कमेटी में ऑल इंडिया महिला कांग्रेस अध्यक्ष सुष्मिता देव, लोकसभा सदस्य दीपेंद्र हुड्डा और पार्टी की नेशनल मीडिया पैनलिस्ट रागिनी हैं।

शुक्रवार को मिलने वाली रिपोर्ट से गुजरने के बाद कमेटी खान पर आगे फैसला लेगी। इससे पहले, बुधवार को कांग्रेस प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी ने इस मामले में जांच के लिए आंतरिक कमेटी बनाए जाने की बात की घोषणा की थी। उनका कहना था कि यह कमेटी सभी पक्षों को बराबरी से सुनेगी।

रिपोर्ट्स में खान के हवाले से कहा गया, “कल मैंने इस्तीफा भेजा था। मुझ पर लगे आरोप गलत हैं, मैं इस बात पर अभी भी अडिग हूं। मैं कोर्ट का दरवाजा खटखटाऊंगा। पार्टी के छवि के लिए मैंने पद छोड़ा है।”

वहीं, एनएसयूआई प्रवक्ता साइमन फारूकी का कहना था, “फिरोज पर इस्तीफे का कोई दबाव नहीं था। पर लगातार लग रहे आरोपों के मद्देनजर उन्होंने यह फैसला लिया। संगठन ने उनका इस्तीफा स्वीकार लिया है।

जनसत्ता ओन लाइन 16-10-2018.


वाहनों व निजी घरों पर झण्डे बैनर अनुमति बिना नहीं लगा सकेगें

*चुनाव के दौरान सम्पति विरूपण अधिनियम की पालना जरूरी*

श्रीगंगानगर, 16 अक्टूबर 2018.

जिला कलक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी श्री ज्ञानाराम ने बताया कि विधानसभा आम चुनाव 2018 के दौरान सम्पति का विरूपण अधिनियम की पालना करनी जरूरी है। विधानसभा आम चुनाव के लिये चुनाव प्रचार अभियान के दौरान राजनैतिक दलों, अभ्यर्थियों, व्यक्तियों एवं संगठनों द्वारा विभिन्न सार्वजनिक, निजी स्थलों, मैदानों, वाहनों आदि पर प्रचार सामग्री प्रदर्शित करने के साथ सम्पति विरूपण अधिनियम की पालना करनी होगी। 

    उन्होंने बताया कि राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 के अंतर्गत नगरपालिका संस्थाओं के द्वारा निर्दिष्ट स्थानों पर विज्ञापन प्रदर्शन किये जाने के संबंध में राज्य सरकार के अनुमोदन के बाद राजपत्र में प्रकाशित करते हुए उपविधियां बनाई जा सकती है। उपविधियों के अनुसार इलेक्ट्रोनिक डिस्पले, यूनिपोल पर विज्ञापन, फुट ओवरब्रिज विज्ञापन, गेन्ट्री विज्ञापन आदि प्रकार के विज्ञापन एक चिन्हित प्रक्रिया के तहत निर्दिष्ट स्थानों पर प्रदर्शित किये जाने की अनुमति देने का प्रावधान किया हुआ है। चिन्हित स्थानों पर विज्ञापन प्रदर्शित करना सौन्दर्य का ह्यस करना नही माना जा सकता। निजी सम्पति के मालिक या अधिभोगी की लिखित स्वीकृति से अस्थाई रूप से बैनर या झण्डे लगाये जा सकते है। शहरी क्षेत्र में निजी सम्पति पर सहमति से झण्डे लगाये जा सकते है। 

सार्वजनिक स्थानों पर लगे ऐसे चिन्हित विज्ञापन स्थलों पर कोई विशिष्ट राजनैतिक दल या कोई अभ्यर्थी एकाधिकार न कर सकें, इसके लिये सभी को समान अवसर प्राप्त हो। इसके लिये भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुसार समान अवसर दिये जायेगें। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार राजकीय सम्पति सार्वजनिक स्थलों एवं निजी सम्पतियों पर राजनैतिक विज्ञापन लगाये जाने के संबंध में आयोग के प्रतिबंधात्मक निर्देश है। सार्वजनिक स्थलों पर 48 घंटे में और निजी सम्पति पर अवैध रूप से लगे होर्डिग्स को 72 घंटे में हटाने के निर्देश दिये गये थे। इन्ही निर्देशों के अनुरूप संबंधित रिटर्निंग अधिकारी द्वारा कार्यवाही की जा रही है।

सभी राजनैतिक दलों व अभ्यर्थियों को विज्ञापन स्थलों का उपयोग करने का समान अवसर प्राप्त होना चाहिए, इसके लिये समुचित कार्यवाही जिला निर्वाचन अधिकारी के परिवेक्षण में की जायेगी। चिन्हित विज्ञापन स्थलों को उपयोग करने के अवसर उपलब्ध करवाने और आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों के विपरीत विज्ञापन सामग्री के प्रदर्शन को नियंत्रित करने के प्रयोजन से अन्य विज्ञापन स्थल अनुबंधित फर्म या नगरपालिका संस्था द्वारा चिन्हित नही किया जायेगा और न ही दरों में परिवर्तन किया जायेगा। 

जिला कलक्टर ने बताया कि नामांकन की कार्यवाही 12 नवम्बर से प्रारम्भ होगी। इससे पूर्व कोई राजनैतिक दल या संस्था संगठन चुनाव संबंधी विज्ञापनों के लिये चिन्हित किसी विज्ञापन स्थल पर अपना विज्ञापन प्रदर्शित करना चाहे तो उसकी अनुमति जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा गठित समिति की अनुसंशा के आधार पर नाम वापसी की तिथि 22 नवम्बर तक की स्वीकृति दी जा सकती है। 

चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की सूची तैयार होने के दिन 22 नवम्बर 2018 को सांय 5 बजे के पश्चात किसी समय चुनाव लड़ने वाले अभ्यर्थियों की बैठक जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बुलाई जायेगी। जिसमें स्थान उपलब्ध करवाने व आदर्श आचार संहिता पर चर्चा होगी। यदि किसी विशेष विज्ञापन स्थल के लिये एक से अधिक आवेदन पत्रा है तो लॉटरी के जरिये आवंटन किया जायेगा। आवेदन पत्रों के आधार पर अनुपातित मात्रा में विज्ञापन स्थल का आवंटन होगा। आवंटन के बाद शेष स्थल पहले आओ पहले पाओ के आधार पर दिया जायेगा। सभी आवंटित स्थानों पर प्रदर्शित पोस्टर, पेम्पलेट पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की पालना करनी होगी। अगर पालना नही हुई तो संबंधित विज्ञापन को हटा दिया जायेगा। 

ग्रामीण क्षेत्र में विज्ञापनों का प्रदर्शन

आयोग के निर्देशानुसार ग्रामीण क्षेत्र में भी राजनैतिक विज्ञापनों को प्रदर्शित करने के अवसर हेतु स्थल चिन्हित करने और सभी को समान आधार पर आवंटित करने से संबंधित आदेश है। ग्रामीण क्षेत्र में भी निजी सम्पति पर भी झण्डे, बैनर लगाने के अनुसार लिखित सहमति के साथ ब्यौरा निर्धारित प्रपत्र में रिटर्निंग अधिकारी को तीन दिन के अंदर संबंधित अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत किया जायेगा। 

वाहनों पर प्रचार सामग्र्री

उम्मीदवार की अनुमति के बिना नही लगा सकेगें

चुनाव प्रचार अभियान के दौरान वाहनों पर लगाये जाने वाले स्टीकर, झण्डे, बैनर के संबंध में मोटरयान अधिनियम के अधीन की पालना करनी होगी। वाहन पर लगाये गये झण्डा बैनर से किसी राहगीर को असुविधा या आपत्ति नही है। लेकिन यदि कोई व्यक्ति अभ्यर्थी की अनुमति लिये बिना अपने वाहन पर झण्डे, स्टीकर इस प्रकार से लगाता है, जिससे किसी अभ्यर्थी विशेष के पक्ष में मतयाचना का उददे्श्य स्पष्ट होता है तो ऐसे व्यक्ति के विरूद्ध भारतीय दण्ड संहिता की धारा 171 के अंतर्गत कानूनी कार्यवाही की जायेगी। 

अभ्यर्थी द्वारा प्रचार के प्रयोजन से लिये गये व्यक्तिगत वाहन को प्रचार वाहन माना जायेगा तथा बाजार दर से इंधन पर अनुमानित व्यय, चालक का वेतन चुनाव खर्च में शामिल किया जायेगा। वाणिज्यिक वाहनों पर झण्डे या स्टीकर लगाने पर उसे प्रचार के उपयोग में लाना माना जायेगा। वाणिज्यिक वाहनों पर झण्डे स्टीकर लगाये जाने की अनुमति नही होगी, जब तक उस वाहन का चुनाव प्रचार अभियान में अपेक्षित अनुमति नही ली जाती। ऐसे वाहनों पर अनुमति पत्र विण्ड स्क्रीन पर प्रदर्शित करनी होगी। 

जिला निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि अनुमति वाले वाहनों पर लाउडस्पीकर लगाने से पूर्व अनुमति लेनी होगी। प्रचार के दौरान लाउडस्पीकर रात 10 बजे से प्रातः 6 बजे के मध्य उपयोग निषेध रहेगा। रैलियां, जुलुसों, सभाओं के दौरान झण्डों, बैनरों, कटआउट्स, स्थानीय विधि और प्रतिबंधात्मक आदेशों के अध्याधीन लगाये जा सकते है। जुलुसों में राजनैतिक दलों द्वारा उपलब्ध करवाई जाने वाली टोपी, मास्क, स्कॉर्फ आदि का उपयोग किये जाने की अनुमति है, लेकिन राजनैतिक दलों या अभ्यर्थी द्वारा साड़ी, कमीज आदि परिधान वितरित नही किये जा सकते। सरकारी, स्थानीय निकाय, उपक्रम, सहकारी संस्थाओं के मीटिंग स्थलों, ऑडिटोरियम, हॉलस आदि का उपयोग पूर्व में जारी दिशा निर्देशों से प्रतिबंधित नही है तो समानता के आधार पर किया जा सकता है। किसी दल या अभ्यर्थी का एकाधिकार नही होगा। स्कूलों व शैक्षणिक संस्थाओं के मैदानों का चुनाव प्रचार के लिये मिटिंगों में उपयोग शर्तां के आधार पर किया जा सकता है। शिक्षण संस्था में किसी भी स्थिति में शैक्षणिक कार्य पर विपरीत प्रभाव न पडे़। प्रबंधन को कोई आपत्ति न हो तथा संबंधित आरओ से स्वीकृति प्राप्त कर ली हो। अगर मैदान को क्षति होती है, तो संबंधित से भरपाई करवाई जायेगी तथा शर्तां का उल्लंघन किसी स्थिति में नही होने दिया जायेगा।

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बा सुहागण बड़भागण है जिकी सदांई पति री आज्ञा में हुवै-राजस्थानी रामलीला


* करणीदानसिंह राजपूत *

* राजस्थानी रामलीला में सीता हरण ,बाली -सुग्रीव जुद्ध आदि रे माध्यम सूं दी गई सीख *

सूरतगढ़ 16 अक्टूबर 2018.

राजस्थानी रामलीला री छठी रात मांय  सुंदरी स्वरूपनखा, खर-दूषण वध ,सीताहरण,भीलणी रा बेर , बाली -सुग्रीव जुद्ध आदि दरसाव माथै दरसकां खुस होय तालियां घणी बजाई।

 राजस्थानी संवाद अदायगी के साथ रोचक ढंग से किया गया। 

बनवास बिचालै सती अनुसुइया खानी सूं सीता के माध्यम सूं लुगायां नै दी गई सीख बेटी पतिव्रत धरम जगत में सैसूं बड़ो हुवै। बा सुहागण बड़भागण है जिकी सदांई पति री आज्ञा में चालै।


रावण साधू को वेश बणा र पंचवटी में आवै अर  सीता सूं कहवै जै भिक्षा देणी हैं तो रेखा सूं बारै आ माई।जोगी बाबा कद लेवै हैं इण तरिया भिक्षा माई।सीता, देवर री आंण रैवे ना रैवे, राखूली धरम गिरस्थी रो,अबै हे रेख उलांघ गे पालू हू धरम गिरस्थी रो। 

भीलणी बोरिया चाख चाख राम लखन नै खावण सारूं देवै पण लखण जूठा समझ कर फेंक देवै जणा राम कहवै हैं,लछमण थूं खाया कोनि  चाख तो सरी कितरा मीठा हैं.....आ बोरियां  मांय भगती रो नेह भरयो है।


सोमवार, 15 अक्तूबर 2018

चुनाव:स्वीकृति बिना मुख्यालय छोड़ने वाले 3 अधिकारियों को सख्त नोटिस

श्रीगंगानगर, 15 अक्टूबर 2018.

विधानसभा आम चुनाव 2018 के दौरान मुख्यालय पर नही रहने तथा बिना बताये मुख्यालय छोड़ने पर तीन अधिकारियों को 17 सीसीए के नोटिस जारी किये गये है। 

जिला कलक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी श्री ज्ञानाराम ने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विधानसभा आम चुनाव 2018 की घोषणा के साथ ही समस्त अधिकारियों व कार्मिकों को मुख्यालय पर रहने के निर्देश दिये गये थे। इसके बावजूद नायाब तहसीलदार लालगढ़ श्री प्रभजोत सिंह गिल, नायाब तहसीलदार चुनावढ़ श्री विश्व प्रकाश चारण तथा श्रीबिजयनगर पंचायत समिति के विकास अधिकारी मेजर अली अपने मुख्यालय पर नही थे। इन्होंने बिना स्वीकृति के मुख्यालय छोड़ा। विकास अधिकारी श्रीबिजयनगर जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा रायसिंहनगर में ली जा रही चुनाव संबंधी बैठक में उपस्थित नही हुए। इसी कारण से तीनों अधिकारियों के विरूद्ध कार्यवाही की जायेगी। 


चुनाव:बुलेट प्रूफ वाहन भी मिल सकेंगे

* जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त महानुभावों को भुगतान पर मिलेगें वाहन *

श्रीगंगानगर, 15 अक्टूबर 2018. 

 जिला कलक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी श्री ज्ञानाराम ने बताया कि आदर्श आचार संहिता लागू होने के पश्चात जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त महानुभावों को भुगतान के आधार पर बीपी वाहन उपलब्ध करवाये जायेगें। उन्होंने बताया कि जेड प्लस सुरक्षा प्राप्त राजनैतिक दल के उम्मीदवार, व्यक्ति, नेताओं व अन्य महानुभावों के आगमन पर भुगतान के आधार पर बुलेट प्रूफ वाहन जिला कलक्टर पूल स्तर पर अग्रिम राशि जमा कराने पर उपलब्ध करवाये जायेगें। 

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रविवार, 14 अक्तूबर 2018

सूरतगढ:भाजपा टिकट का युद्ध शुरू: रणकपुर में बोले टिकटार्थी नेता



* करणीदानसिंह राजपूत *

भारतीय जनता पार्टी की सूरतगढ सीट की टिकट के लिए युद्ध शुरू हो चुका है। रणकपुर में 14 अक्टूबर 2018 को तीन प्रबल दावेदारों ने अपनी बात रखते हुए दावेदारी की है।

भाजपा की टिकट के लिए प्रबल दावेदारों में वर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भादू,पूर्व विधायक अशोक नागपाल  और पूर्व राज्य मंत्री रामप्रताप कसनिया ने टिकट के लिए अपनी दावेदारी नेताओं के समक्ष प्रकट की है। 

वर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भादू ने क्षेत्र में कराए गए विकास के दावे के हिसाब सेे टिकट देने का आग्रह किया।

पूर्व विधायक अशोक नागपाल और पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कसनिया ने सर्वे के आधार पर टिकट दिए जाने का आग्रह किया है।

रणकपुर में संगठन की मीटिंग में टिकटार्थियों को शामिल नहीं किया गया। उन्हें सभा हाल से बाहर जाने का कहा गया और बाद में संगठन की राय जानी गई।

 संपूर्ण जिले की वर्तमान स्थिति की जानकारी ली गई और उसके बाद प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के बारे में अलग अलग जानकारियां ली गई।

सूरतगढ़  सीट को अखबारों व चर्चाओं में भाजपा की कमजोर सीट माना जाता रहा है मगर वर्तमान विधायक और पूर्व के दो विधायकों के द्वारा टिकट की मांग किए जाने से सूरतगढ़ सीट की स्थिति कमजोर होने का कथन सच्च नजर नहीं  आता। अगर यहां भाजपा की स्थिति बेहद कमजोर होती तो कोई भी ऊंखली में सिर देने को तैयार नहीं होता। लेकिन इस सीट को वर्तमान विधायक राजेंद्रसिंह भादू छोड़ने को तैयार नहीं है वहीं कासनिया और नागपाल काबिज होना चाहते हैं।

अगर इस सीट पर पार्टी बदलाव करे और भादू कासनिया के अलावा किसी अन्य वर्ग को मौका दे तो नागपाल के भाग्य में टिकट आ सकता है। जनमानस जीत पक्की के लिए बदलाव चाहता है तथा यह तथ्य पार्टी के जयपुर नेताओं तक भी जानकारी में है। सूरतगढ सीट पर अशोक नागपाल का कार्यकाल 2003 से 2008 तक रहा। उसके बाद उन्होंने टिकट का आवेदन नहीं किया। भाजपा ने 2008 में कासनिया को टिकट दिया लेकिन पराजय और तीसरा क्रम मिला। कांग्रेस के गंगाजल मील ने जीत प्राप्त की और राजेंद्र भादू निर्दलीय रूप में दूसरे क्रम पर रहे। सन 2013 के चुनाव से पहले भादू ने भाजपा की सदस्यता लेली। वसुंधरा राजे की थपकी से सन 2013 में भादू को भाजपा ने प्रत्याशी बनाया। भादू ने जीत हासिल की और कांग्रेस के गंगाजल मील को तीसरे क्रम पर धकेल दिया।

अब भाजपा की टिकट की दावेदारी में किसका दावा मजबूत माना जाता है,उसका इंतजार सभी को है।



सास-ससुर की संपत्ति पर बहू का कोई हक नहीं,

*दिल्ली हाई कोर्ट का महत्वपूर्ण निर्णय *

- हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख व कल्याण के लिए बने नियमों को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नागरिकों को अपने घर में शांति से रहने का अधिकार है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है। हाई कोर्ट ने फैसला दिया है कि सास-ससुर की चल या अचल संपत्ति में बहू का कोई अधिकार नहीं है। फिर चाहें वह संपत्ति पैतृक हो या खुद से अर्जित की गई हो। ये अपील महिला ने जिलाधिकारी के द्वारा ससुर का घर खाली करने के आदेश के खिलाफ दायर की थी। इससे पहले इसी साल जुलाई में एकल पीठ ने मामले की सुनवाई की थी और जिलाधिकारी के आदेश को बरकरार रखा था। एकल पीठ के आदेश के खिलाफ महिला ने पुन: डबल बेंच में अपील की थी। इसी मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने ये आदेश सुनाया है। कोर्ट ने जिलाधिकारी और एकल पीठ के आदेश को बरकरार रखने का फैसला सुनाया है।

इस मामले की सुनवाई दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस वी. कामेश्वर राव की पीठ ने की। उन्होंने अपने फैसले में कहा है कि ऐसी कोई भी चल या अचल, मूर्त या अमूर्त या ऐसी किसी भी संपत्ति जिसमें सास-ससुर का हित जुड़ा हुआ हो, उस पर बहू का कोई अधिकार नहीं है। पीठ ने कहा है कि यह बात मायने नहीं रखती है कि संपत्ति पर सास-ससुर का मालिकाना हक कैसा है।

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों की देखरेख व कल्याण के लिए बने नियमों को ध्यान में रखते हुए वरिष्ठ नागरिकों को अपने घर में शांति से रहने का अधिकार है। सास-ससुर को अपने घर को बेटे-बेटी या कानूनी वारिस ही नहीं, बल्कि बहू से भी घर खाली कराने का अधिकार है।

हाईकोर्ट ने महिला की उन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें उसने माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक के देखरेख व कल्याण के लिए बने नियम का हवाला देते हुए कहा था कि चूंकि उसने ससुर से गुजाराभत्ता नहीं मांगा है, इसलिए वह उससे घर खाली नहीं करा सकते हैं। इतना नहीं, हाईकोर्ट ने महिला की उन दलीलों को भी ठुकरा दिया जिसमें कहा गया था कि कानून के तहत उसके ससुर सिर्फ अपने बेटे-बेटी व कानूनी वारिस से ही घर खाली करा सकते हैं।

वैसे बता दें कि याचिका दायर करने वाली महिला अपने पति व सास-ससुर के खिलाफ दहेज उत्पीड़न व अन्य आरोपों में मुकदमा दर्ज करा चुकी है। ये मामले अदालत में लंबित हैं। महिला का उसके पति से तलाक का भी मुकदमा चल रहा है। इसी बीच महिला के पति का उसके घर से अलगाव हो गया।

इसके बाद ससुर ने जिलाधिकारी के सामने अर्जी दाखिल की और आरोप लगाया कि उनकी बहू उन्हें प्रताड़ित कर रही है। ससुर ने ये भी मांग की उनकी बहू से उनका घर खाली करवाया जाए। तथ्यों और साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद जिलाधिकारी ने महिला को घर खाली करने का आदेश दिया। महिला ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

जनसत्ता ओनलाईन 14-10-2018.




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