गुरुवार, 18 जुलाई 2019

मत मारो मुझे कोख में धरती पर आने दो- भ्रूण हत्या एक अभिशाप विषय पर संगोष्ठी,


 सूरतगढ़ 18-7-2019.

 गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से एक सेमिनार का आयोजन राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय में किया गया।

 कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधानाचार्य मोहिनी पुरी ने की। विशिष्ट अतिथि व्याख्याता मनजीत कौर राजस्थानी साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी व समिति के मंत्री किशन लाल  थे। 


छात्रा रेखा ने गर्भस्थ शिशु की हत्या को कानूनी व सामाजिक अपराध बताया।

छात्रा योगिता ने कहा कि  बेटियों के बिना समाज का भविष्य अंधकार में होगा।

 छात्रा माफिया ने इस बुराई को बढ़ावा दिए जाने पर रोक लगाने की महती आवश्यकता पर बल दिया उन्होंने कहा कि कन्या है जीवन का वरदान इसे मार कर कैसे रखोगे स्वाभिमान।

छात्रा अंजलि ने कहा कि बेटियों को भी जीने का हक है।

छात्रा मुस्कान ने कहानी लड़का और लड़की में भेद पर अपनी बात कही जिसमें कहानी के माध्यम से बताया गया कि बेटियां हीरे जवाहरात से कम नहीं है, वे समाज को अपनी चमक और झिलमिला से चमकदार बनाती हैं।

छात्रा रूमी पाल ने मत मारो मुझे कोख में धरती पर आने दो कविता सुनाकर भाव विभोर किया।

सुमेशता ने कहा कि जिस प्रकार एक पहिए से गाड़ी नहीं चल सकती उसी प्रकार बेटियों के बिना समाज की कल्पना नहीं की जा सकती। 

छात्रा मोनिका ने बेटियों को बरसात की हवा बताया।

गुंजन ने कहा कि भ्रूण हत्या से बढ़कर कोई पाप नहीं हो सकता समाज में यह बड़ा क्रूर कृत्य माना जाना चाहिए।

कुसुम ने कहा कि मैं नहीं हूं ना मुझ को मारो तुम।

 छात्रा प्रियंका स्वामी ने भावपूर्ण कविता अब मुझे डोली में बिठा दिया तो आंसू ना हो पापा।

कार्यक्रम का  संचालन करते हुए शारीरिक व्याख्याता बलजिंदर कौर ने कहा कि छात्राएं अपने आपको समाज की इतनी ऊंचाइयों पर स्थापित करें कि सामने वाले को ऊपर देखना पड़े। उन्होंने कहा कि समाज में बेटियों को अपना लक्ष्य निर्धारित करते हुए समाज में अग्रणी स्थान पर उनको स्थापित करना चाहिए और इस भेदभाव को मिटाने में वे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

राजस्थानी साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी ने भावपूर्ण दोहों के माध्यम से बताया कि किस तरह से बेटियों को गर्भ में टुकड़े-टुकड़े करके डस्टबिन में डाल दिया जाता है। इस बुराइयों को रोकने के लिए युवा पीढ़ी को आगे आना होगा।


प्रधानाचार्य मोहिनी पुरी ने कहा कि नारियों को सम्मान मिलना चाहिए। वे सदैव अग्रणी रही हैं। हर क्षेत्र में उन्होंने बताया कि नारी हूं सबला हूं परंतु अबला नहीं हूं। सबसे पहले सवाल उठता है कि नारियों को समाज में भेदभाव कर  दोयम दर्जे का क्यों माना जाता है? इसके लिए जरूरी है कि छात्राएं अपने भीतर आत्मविश्वास को पैदा करें और उमंग के साथ जीवन में आगे बढें।लड़कियां  लक्ष्य निर्धारित करें और समाज से इस बुराई को उठाकर फेंक दें। इस कार्यक्रम में समिति के मंत्री किशन लाल स्वामी ने विद्यालय परिवार का आभार व्यक्त किया व भविष्य में भ्रूण हत्या नहीं करने और  उस में सहयोग न करने के लिए छात्राओं से संकल्प पत्र भरवाए। 

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सेठ रामदयालराठी राजकीय उ.मा.विद्यालय सूरतगढ़ भवन खतरे में:



सैंकड़ों छात्रों व अध्यापकों की जान जोखिम में:नगरपालिका के बनाए नाले से हुआ बंटाधार:

करणीदानसिंह राजपूत -

सूरतगढ़ 16 जून 2016.

प डेट 23-5-2017.

अपडेट 18-7-2019.

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सेठ रामदयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन खतरे में है और यहां पढऩे वाले छात्रों और पढाने वाले व्याख्याताओं की जान जोखिम में है। 

राजस्थान कांग्रेस-एक व्यक्ति एक पद की मांग से हलचल-

राहुल गांधी ने कांग्रेस को मजबूत करने के लिए एक व्यक्ति एक पद का नारा दिया था लेकिन वह पूरी तरह से लागू नहीं हो पाया।

 राजस्थान में कांग्रेस के नेता 2 पदों पर विराजमान हैं। सत्ता में भी हैं और संगठन में भी हैं।

एऐसे नेताओं के लिए अब अड़चन आ सकती है।

कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अब एक पद एक व्यक्ति का सिद्धांत राजस्थान में लागू करने की मांग करनी शुरू की है। राजस्थान में इससे बहुत बड़ा बदलाव आ सकता है।

राजस्थान की गहलोत सरकार  की मंत्री परिषद में छह प्रदेश उपाध्यक्ष मंत्री हैं और 3 विधायक हैं। 

इनमें 5 कैबिनेट मंत्री और 1 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) हैं।

विश्वेंद्र सिंह,मास्टर भंवरलाल, प्रमोद जैन, रघु शर्मा,उदयलाल आंजना,गोविंद सिंह डोटासरा (राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार हैं, इनमें खिलाड़ी बैरवा, अशोक बैरवा, महेंद्रजीत सिंह मालवीय हैं। इसके साथ ही प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री मुरारी लाल मीणा विधायक महेंद्र चौधरी सरकारी उप मुख्य सचेतक हैं।

 अलवर के जिलाध्यक्ष टीकाराम जूली के इस्तीफे से गरमाई राज्य कांग्रेस की राजनीति में आम कार्यकर्ता भी कहने लगा है कि दो पदों पर एक व्यक्ति काबिज  रहेगा तो पार्टी की नींव मजबूत कैसे होगी? इस तरह से तो पार्टी सदा कमजोर ही रहेगी,क्योंकि नेता पार्टी संगठन को समय ही नहीं दे सकेंगे।

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बुधवार, 17 जुलाई 2019

सीवररेज की अति आवश्यक तकनीकी कानूनी जानकारी-(सूरतगढ़ वाले भी समझलें)


* लोगों का दायित्व क्या है?*


श्रीगंगानगर, 17 जुलाई 2019.

 राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना के तहत श्रीगंगानगर शहर के वार्ड नम्बर 33,34,35,36,37,38 व नेहरा नगर आदि में सीवर कनेक्शन करने का कार्य नगरपरिषद द्वारा किया जा रहा है। इस व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालन के लिये जिला कलक्टर श्री शिवप्रसाद मदन नकाते ने क्षेत्र के उपभोक्ताओं से सहयोग का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में आवश्यक तकनीकी व कानूनी जानकारियां नागरिकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। 

तकनीकी जानकारियां

रसोई व बाथरूम के सभी आउटलेट पर जाली लगाना आवश्यक है। गली ट्रेप के पाइप के मुंह पर गैस पाइप जरूर लगायें, जिससे बदबू घरों में न आये। घर से निकले व्यर्थ पानी के सभी आउटलेट को घर के बाहर एक स्थान पर जोड़ कर प्रोपर्टी चेम्बर से गली ट्रेप के माध्यम से जोड़ने का खर्च स्वयं उपभोक्ता को वहन करना होगा। विभाग ने मेनहाल से प्रोपर्टी चेम्बर तक पाइप बिछाया हुआ है। घर की छत के बरसाती पानी को सीवर लाईन से ना जोड़े। बरसाती पानी खुली नाली में बहने दे। गली ट्रेप पर जाली होनी चाहिए। सीवर लाइन जाम होने पर इससे छेड़ छाड़ न करें क्योंकि इसमें जहरीली गैस हो सकती है। 

कानूनी जानकारियां

राजस्थान म्यूनिसीपल एक्ट 2009 के नियम 259 की धारा 202 के अनुसार मल-नाली के पानी को, किसी अन्य तरल पदार्थ अथवा अन्य वस्तु को, जो दुर्गन्धपूर्ण हो, किसी खुले स्थान में बहाना या निकालना कानूनन जुर्म है। जो नागरिक इस अधिनियम का पालन नही करेगा जुर्म का भागी होगा। उसे कम से कम 5 हजार रूपये दण्ड के रूप में वहन करने पड़ सकते है। 

सीवरेज प्रणाली को सुचारू रखने हेतु ध्यान देने योग्य बातें

रसोई व स्नानघर का व्यर्थ जल भी सीवर कनेक्शन के द्वारा सीवर लाईन में जायें। सभी आउटलेट पर जाली लगाना आवश्यक है। नियमित रूप से इन जालियों की सफाई करें। गर्भ निरोधक व सेनेटरी नेपकीन को शौचालयों में प्रवाहित न करें। शौचालयों द्वारा ठोस कचरा सीवर लाईन में न जाने दें। मेनहॉल में मृत पशु अथवा उनके अंग न डाले व अन्य किसी को भी नही डालने दें। मेनहॉल खुला न छोड़े व न ही पत्थर, मलबा, प्लास्टिक, पॉलीथीन आदि डालें। सीवर लाईन जाम होने पर पाईप को न काटें न तोडे़। सीवर लाईन जाम होने पर इससे छेड़छाड न करें क्योंकि इसमें जहरीली गैसे हो सकती है। परेशानी के समय नगरपरिषद को सूचित करें। 

जिला प्रशासन की आमजन से अपील

शहर के वार्ड नम्बर 33,34,35,36,37,38 व नेहरा नगर आदि में सीवर कनेक्शन करने का कार्य स्थानीय निकाय द्वारा किया जा रहा है। इस व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालन के लिये क्षेत्र के उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है। रसोई व बाथरूम के उपयोग किये गये पानी को किसी भी स्थिति में खुली नालियों में नही बहने दे, इसे सीवर में ही प्रवाहित करें। राज्य सरकार द्वारा पारित नगरपालिका अधिनियम के अनुसार जहां पर सीवर लाईन है, वहां पर गन्दे पानी के नाली में बहने पर नगरपरिषद द्वारा 5 हजार तक जुर्माना किया जा सकता है। 

सीवर लाईन जो आपके यहां डाली गयी है, वह घर के डब्ल्यू.सी., रसोई घर एवं बाथरूम में उपयोग किये पानी के लिये बनाई गयी है। सड़क के किनारे स्थित नाली केवल बरसात के पानी के लिये है। बरसाती पानी को सीवर लाईन से नही जोडे़, क्योकि सीवर लाईन बरसात के पानी के लिये नही बनायी गयी है। सीवर लाईन में रसाई व बाथरूम का कचरा (सब्जी, झूठन, चायपती, अदरक का टुकड़ा, राख, मिट्टी, बाल के गुच्छे, साबुन व कागज आदि) नही जाने चाहिए, इससे आपका सीवर लाईन से गली ट्रेप चोक होगा एवं आपके घर के पास पानी गली ट्रेप के उपर से बहकर गन्दगी फैलायेगा।

आपके घर से सड़क तक डाली गई सीवर लाईन आपकी स्वयं मिल्कियत है एवं उसमें स्थित गली ट्रेप की सफाई करना आपकी स्वयं की जिम्मेदारी है। सीवर के मेनहॉल में कोई कचरा नही फेंके, इससे सीवर लाईन चोक होती है एवं सीवेज सड़क पर बहने लगता है। सूखा कचरा, पत्थर, प्लास्टिक की थैलियां इत्यादि सीवर लाईन या मेन हॉल में नही डाले, इससे सीवर लाईन अवरूद्ध हो जायेगी एवं गन्दा पानी सड़क पर बहने लगेगा। सीवर संबंधी कोई भी शिकायत होने पर जाली या पाईप को काटे नही। नगरपरिषद को सूचित करें।

सीवरेज प्रणाली की आवश्यकता क्यों

रसोई व स्नानघर का पानी सीधे नालियों में छोडे़ जाने से पानी सड़क पर फैलता है, जिससे जीवाणु पैदा होते है, सीवरेज प्रणाली हानिकारक जीवाणुओं की उत्पति रोकने में सहायक जिससे चिकित्सा व्यय कम होता है। सीवरेज प्रणाली जल-जनित होने वाली लगभग 70 प्रतिशत बीमारियांं से बचाव करती हैं सीवरेज प्रणाली भूमिगत जल का प्रदूषण रोकती है। व्यर्थ पानी को सीवरेज प्रणाली में डालकर घर के आस-पास भरने से रोक कर घरों का सीलन व क्षति से बचाव किया जा सकता है, जिससे रख रखाव का खर्च कम होता है। सीवर शोधन संयंत्र में शोधित जल व मल का उपयोग सिंचाई, खाद के रूप में किया जाता है। सीवरेज प्रणाली शहर को साफ-सुथरा बनाने में सहायक है।  

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कर्नाटक की कांग्रेस जेडीएस सरकार -क्या हुआ कोर्ट में बागी विधायकों का


नई दिल्ली 17 जुलाई 2019.

कर्नाटक में बीते कई दिनों से राजनैतिक संकट गहराया हुआ है।

कर्नाटक के बागी विधायकों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। इस फैसले के तहत कोर्ट ने कहा है कि ‘बागी विधायक गुरुवार 18-7-2019 को कर्नाटक विधानसभा में होने वाले विश्वासमत में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं है। विधायकों के पास सत्र में शामिल नहीं होने का विकल्प मौजूद है।’ साथ ही कोर्ट ने कहा कि ‘विधानसभा स्पीकर को एक निश्चित समय में इस्तीफे पर फैसला लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।’

कोर्ट के इस फैसले के बाद गुरुवार को यदि बागी विधायक फ्लोर टेस्ट में शिरकत नहीं करते हैं तो कांग्रेस-जेडीएस सरकार पर अल्पमत में आने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें गुरुवार को विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट पर टिक गई हैं।

बता दें कि बागी विधायकों ने आरोप लगाया था कि विधानसभा स्पीकर उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं कर रहे हैं। इसके खिलाफ विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने बागी विधायकों को स्पीकर से मिलने का निर्देश दिया था। इसके बाद बागी विधायक स्पीकर से मिलने के बाद वापस मुंबई लौट आए थे।

सुप्रीम कोर्ट में बागी विधायकों का पक्ष रखने वाले वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दो अहम बातें कही हैं। जिनके मुताबिक 15 बागी विधायक कल विधानसभा में होने वाले फ्लोर टेस्ट में शामिल होने के लिए बाध्य नहीं हैं। साथ ही कोर्ट ने सभी विधायकों को यह छूट भी दी है कि यदि वह चाहते हैं तो कल सदन की कार्यवाही में शामिल हो सकते हैं। रोहतगी ने बताया कि कोर्ट ने कहा है कि इस मामले पर अगली तारीख पर अंतिम फैसला होगा।


वहीं भाजपा नेता जगदीश शेट्टार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि कुमारस्वामी के चलते राज्य में अराजकता का माहौल है। कोर्ट के इस फैसले के बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए और विश्वासमत की प्रक्रिया का इंतजार नहीं करना चाहिए। पूर्व सीएम और भाजपा नेता बीएस येदियुरप्पा ने भी कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और कहा कि कर्नाटक सीएम बहुमत खो चुके हैं और कल उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए।  यह लोकतंत्र और संविधान की जीत है और बागी विधायकों की नैतिक जीत है। यह सिर्फ अंतरिम आदेश है और कोर्ट स्पीकर की पॉवर के संबंध में बाद में फैसला लेगा।

मंगलवार को इस मामले पर कोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें बागी विधायकों का पक्ष वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने और कर्नाटक विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार का पक्ष अभिषेक मनु सिंघवी ने रखा था। वहीं सीएम एचडी कुमारस्वामी का पक्ष राजीव धवन ने अदालत में पेश किया था। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को इस मामले में सभी पक्षों की ओर से जोरदार दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान कुमारस्वामी और विधानसभा अध्यक्ष ने बागी विधायकों की याचिका पर विचार करने के न्यायालय के अधिकार क्षेत्र पर सवाल उठाया। वहीं, बागी विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा अध्यक्ष के आर रमेश कुमार बहुमत खो चुकी गठबंधन सरकार को सहारा देने की कोशिश कर रहे हैं।

विधानसभा अध्यक्ष ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान कहा था कि संवैधानिक पदाधिकारी होने के नाते उन्हें इन विधायकों के इस्तीफे पर पहले फैसला करने और बाद में उन्हें अयोग्य ठहराने की मांग पर फैसला करने का निर्देश नहीं दिया जा सकता। वहीं मुख्यमंत्री कुमारस्वामी गुरुवार को विधानसभा में विश्वासमत का प्रस्ताव पेश करेंगे।

सत्तारूढ़ गठबंधन को विधानसभा में 117 विधायकों का समर्थन है। इसमें कांग्रेस के 78, जद (एस) के 37, बसपा का एक और एक मनोनीत विधायक शामिल हैं। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष का भी एक मत है। इनमें से 18 विधायकों ने इस्तीफा देकर बागी रुख अपनाया हुआ है। दो निर्दलीय विधायकों के समर्थन से 225 सदस्यीय विधानसभा में विपक्षी भाजपा को 107 विधायकों का समर्थन हासिल है। इन 225 सदस्यों में एक मनोनीत सदस्य और विधानसभा अध्यक्ष भी शामिल हैं।


मंगलवार, 16 जुलाई 2019

बिना लाईसेंस नशे की दवा बेचने पर विभाग का इस्तगासा- तीन से पांच वर्ष तक की सजा का प्रावधान



श्रीगंगानगर, 16 जुलाई 2019.

औषधि विभाग द्वारा फर्म पावॅर मैडिकल स्टोर, वीपीओ जोरावरपुरा (53 एफ) तहसील करणपुर, जिला श्रीगंगानगर पर एनडीपीएस औषधियों के बिना लाईसेंस उल्लंघन के प्रकरण में औषधि नियंत्रण अधिकारी श्रीमति श्वेता छाबड़ा द्वारा माननीय न्यायालय सीजेएम, श्रीगंगानगर में फर्म व उसके मालिक श्री भंवरलाल व रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट श्री राजीव पाण्डे के विरूद्ध इस्तगासा दायर किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा प्रकरण को केस संख्या 174/2019 पर दर्ज कर प्रंसज्ञान लेकर अभियुक्तों को तलब करने के आदेश जारी किये गये। प्रकरण में फर्म को नशे के रूप में दुरूपयोग होने वाली औषधियों की अनुमति लाईसेंसों पर जारी नही थी, परन्तु निरीक्षण के दौरान ट्रामाडोल घटक औषधियों का स्टॉक पाया गया, जिसका क्रय-विक्रय रिकोर्ड प्रस्तुत नही किया गया। 
फर्म के लाईसेंस कार्यवाही कर निरस्त किये गये व बिना लाईसेंस औषधियों के प्रकरण में जांच पूर्ण कर औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत अलग से वाद दायर किया गया। जिसमें कम से कम तीन वर्ष व अधिकतम पांच वर्ष की सजा व जुर्माने का प्रावधान है। 
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नये उद्योग लगाने पर तीन वर्ष तक छूट मिलेगी

श्रीगंगानगर, 15 जुलाई 2019. जिले में नये उधोग विकसित करने के लिये राज्य सरकार ने नई उद्योग निति के तहत तीन वर्ष के लिये छूट प्रदान की है। कोई भी उद्यमी इस छूट का लाभ लेते हुए अपना उधोग स्थापित कर सकता है। 

यह जानकारी सोमवार को कलेक्ट्रेट सभाहॉल में आयोजित जिला स्तरीय ओद्यौगिक समिति की बैठक में दी गई। बैठक की अध्यक्षता एडीएम सर्तकता श्री राजवीर सिंह ने की। बैठक में बताया कि राज्य सरकार ने मार्च 2019 से नये उधोग स्थापित करने पर तीन वर्ष के लिये छूट प्रदान की है। तीन वर्ष पूर्ण  होने के आगामी 6 माह तक विभिन्न प्रक्रियाएं पूर्ण करनी होगी। नये उद्यम स्थापित करने के लिये राजस्थान टेनेंसी एक्ट, राजस्थान लेण्ड रेवन्यू एक्ट 1956, राजस्थान अर्बन इम्प्रूवमेंट एक्ट, राजस्थान ग्राम दान एक्ट, राजस्थान पंचायती राज एक्ट, राजस्थान मुनस्पल्टीज एक्ट के तहत छूट दी गई है। इसी प्रकार राजस्थान दूकान एण्ड वाणिज्यिक प्रस्थापना रूल 1959, रिक्को के नियमों, भूमि रूपांतरण सहित विभिन्न प्रकार की सुविधाएं प्रदान की है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिये https://rajudyogmitra.rajasthan.gov.in/  पर अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है। 
बैठक में ओद्यौगिक क्षेत्र रावला द्वितीय चरण, घडसाना प्रथम चरण व सूरतगढ के संबंध में रिक्को को आवंटित भूमि का नामांतरण के संबंध में अब तक की प्रगति पर चर्चा की गई। बैठक में राजस्थान वित्त निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से संबंधित विचारणीय प्रकरणों पर चर्चा हुई। राजस्थान विधुत मंडल से संबंधित 21 प्रकरण लम्बित थे, जिन्हें समयावधि में निस्तारित कर दिये गये। नगरपरिषद गंगानगर को निर्देश दिये गये कि पॉलीथीन बैग जब्त करने में तेजी लाये तथा जिले में स्थानीय निकायों द्वारा कितनी मात्रा में पॉलीथीन जब्ती, जुर्माना व चालान की जानकारी भिजवाने के निर्देश दिये गये है। छोटे दस्तकारों को अपना उत्पाद बेचने के लिये ग्रामीण हाट के लिये जमीन आरक्षित करने पर चर्चा हुई। 
बैठक में उद्योग केन्द्र में महाप्रबंधक श्री हरीश मित्तल, रिक्को के रिजनल मेनेजर श्री विनोद कुमार, कारखाना एवं बॉयलर के श्री पवन कुमार गोयल, प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड के श्री पामुल थलिया, उद्योग विभाग के अधीक्षण अभियंता श्री आर.पी. वर्मा, पेयजल के अधीक्षण अभियंता श्री बलराम वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। 
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श्रीगंगानगर:जिला कलेक्टर ने अपनी बेटी योजना में गोद ली बालिकाओं को शिक्षण सामग्री दी


श्रीगंगानगर, 15 जुलाई 2019. 

राजस्थान सरकार द्वारा संचालित अपनी बेटी योजना के तहत राजस्थान सरकार के प्रत्येक जिला कलक्टर द्वारा दो-दो बालिकाओं को गोद लिया हुआ है। इसी संदर्भ में राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विधालय मटका चौक श्रीगंगानगर में कक्षा 9 में अध्ययनरत कुसुम तथा कक्षा 10 में अध्ययनरत रजनी ने सोमवार को जिला कलक्टर श्री शिवप्रसाद मदन नकाते से मुलाकात की। 

जिला कलक्टर ने दोनों बालिकाओं से उनकी शिक्षा व स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्राप्त की तथा उनकी पढाई किस प्रकार चल रही है, उन्हें किसी प्रकार की कोई समस्या तो नही है, की जानकारी ली। बालिकाओं ने बताया कि उनकी पढाई सुचारू रूप से चल रही है परिजनों एवं विधालय की ओर से पूर्ण सहयोग मिल रहा है। जिला कलक्टर ने दोनों बालिकाओं को शिक्षण सामग्री, यूनिफोर्म, लंच बॉक्स, पानी की बोतल, स्कूल बैग आदि सामग्री प्रदान करते हुए उन्हें मन लगाकर अध्ययन करने व अपने परिवार तथा जिले का नाम रोशन करने की प्रेरणा दी। इस अवसर पर सहायक निदेशक महिला अधिकारिता श्री विजय कुमार, राजकीय माध्यमिक विधालय की प्राध्यापक श्रीमती विनिता ओझा तथा श्रीमती अंजना कालड़ा उपस्थि थे। 

रविवार, 14 जुलाई 2019

पहली बार पहुंचेगा भारत का चंद्रयान-2 जहां कोई देश नहीं पहुंचा-अद्भुत जानकारी

  

श्रीहरिकोटाः भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रमा पर भारत के दूसरे मिशन चंद्रयान-2 के प्रक्षेपण का रिहर्सल शुक्रवार को पूरा कर लिया। चंद्रयान का प्रक्षेपण 22 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से किया जायेगा। इसके छह सितंबर को चंद्रमा पर पहुंचने की उम्मीद है। इस मिशन के लिए जीएसएलवी-एमके3 एम1 प्रक्षेपणयान का इस्तेमाल किया जायेगा। इस जगह पर इससे पहले किसी भी देश का कोई यान नहीं पहुंचा है। विक्रम लैंडर के अलग हो जाने के बाद, यह एक ऐसे क्षेत्र की ओर बढ़ेगा जिसके बारे में अब तक बहुत कम खोजबीन हुई है।


इसरो ने बताया कि मिशन के लिए रिहर्सल आज पूरा हो गया है। इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। उल्लेखनीय है चंद्रमा पर भारत के पहले मिशन चंद्रयान-1 ने वहाँ पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी। इस मिशन में चंद्रयान के साथ कुल 13 स्वदेशी पे-लोड यान वैज्ञानिक उपकरण भेजे जा रहे हैं।


इनमें तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, रडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा की दूरी सटीक दूरी पता लगाना है। यह मिशन इस मायने में खास है कि चंद्रयान चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरेगा और सॉफ्ट लैंडिंग करेगा। चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अब तक दुनिया का कोई मिशन नहीं उतरा है। चंद्रयान के तीन हिस्से हैं।



ऑर्बिटर चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई वाली कक्षा में चक्कर लगायेगा। लैंडर ऑर्बिटर से अलग हो चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। इसे विक्रम नाम दिया गया है। यह दो मिनट प्रति सेकेंड की गति से चंद्रमा की जमीन पर उतरेगा। प्रज्ञान नाम का रोवर लैंडर से अलग होकर 50 मीटर की दूरी तक चंद्रमा की सतह पर घूमकर तस्वीरें लेगा।

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चन्द्र यान -2: 1000 करोड़ लागत और माइनस 130 डिग्री ठंड नहीं, 

यह है मिशन की सबसे बड़ी चुनौती

चंद्रयान-2 के लैंडर और रोवर में ऊर्जा के लिए सोलर पैनल लगाए गए हैं। मिशन के दौरान चंद्रयान-2 के उपकरण 350 घंटे तक चंद्रमा के बेहद ठंडे तापमान में रहेंगे।

नई दिल्ली |  14 जुलाई 2019.

इसरो की तरफ से चंद्रयान-2 के लॉन्चिंग की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इन सब के बीच चंद्रमा पर दिन और रात गुजारना चंद्रयान-2 की सफलता की सबसे बड़ी चुनौती है।

यदि सब कुछ ठीक रहा तो चंद्रयान-2 का लैंडर चंद्रमा के साउथ पोल एटकिन बेसिन पर उतरेगा। इसके बाद लैंडर विक्रम रोवर प्रज्ञान को आगे बढ़ने की राह प्रशस्त करेगा। रोवर बहुत धीरे-धीरे चंद्रमा की सतह पर गति करेगा। यह गति 1 सेमी/सेकंड होगी। लैंडर और रोवर दोनों पर एनर्जी जेनरेट करने के लिए सोलर पैनल लगे हैं।

रोवर को चंद्रमा पर 14 दिन रह कर प्रयोग करना है। इसकी इलेक्ट्रिक पावर जेनरेट करने की क्षमता 50 वॉट है। मिशन की अवधि, सभी जटिल पैंतरेबाजी और 1000 करोड़ रुपये की लागत इन सब के पीछे कारण है। चंद्रमा अपने अक्ष पर एक घूर्णन पूरा करने में 29 दिन का समय लेता है। इसका मतलब है कि 350 घंटे रात रहेगी।


चंद्रयान मिशन-2 का काउंटडाउन शुरू, सोमवार सुबह 2.51 बजे श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से होगा प्रक्षेपण

चांद के दक्षिणी ध्रुव पर जानेवाला पहला देश बन जाएगा भारत, सोमवार को तड़के चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग

चंद्रमा की बहुत कम तापमान होता है। ऐसे में साइंटिफिक इंस्ट्रूमेंट और इलेक्ट्रोनिक का प्रयोग नहीं हो सकेगा। बैटरी ना तो चार्ज होगी और ना ही डिसचार्ज। ऐसे में कम्यूनिकेशन सिस्टम भी फेल रहेगा। चंद्रमा पर तापमान बहुत अधिक होता और बहुत कम भी हो जाता है। चंद्रमा में दिन में जहां तापमान 120 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है वहीं रात में तापमान -130 डिग्री सेल्सियस रहता है।

नासा के थर्मल इंजीनियर रोन क्रील का कहना है कि यहा तापमान बिल्कुल झरने के समान गिर जाता है। जहां लैंडर विक्रम लैंड करेगा वहां रात में तापमान -180 डिग्री के आसपास होगा। इसरो के प्लेनेटरी साइंस से जुड़े नरेंद्र भंडारी का कहना है कि अधिकतर इलेक्ट्रोनिक सेंसर और कैमरा इतने अधिक तापमान में काम करना बंद कर देते हैं।

भंडारी चंद्रयान-1 मिशन के प्रमुख सदस्य रह चुके हैं। अब तक केवल तीन मिशन ही लूनर नाइट में बच सके हैं। इनमें 1969-77 के दौरान अपोलो अल्सेप, यूएसएसआर का लूंकोहोड 1 और 2 और चाइना का साल 2013 और 2019 का यूतू रोवर।

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पहले 17 दिन पृथ्वी की कक्षा में ही रहेगा चंद्रयान

श्रीहरिकोटा 14 जुलाई (वार्ता) चंद्रमा पर भारत के दूसरे मिशन चंद्रयान-2 की सोमवार को तड़के 2.51 बजे लॉन्चिंग के बाद पहले 17 दिन यह पृथ्वी की कक्षा में ही रहेगा जहाँ से अगले पाँच दिन में इसे चाँद की कक्षा में स्थानांतरित किया जायेगा।

यह मिशन इसरो के इतिहास के सबसे कठिन मिशनों में से एक है। चंद्रयान का लैंडर छह सितंबर के आसपास चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मैनजिनस सी और सम्पेलस एन क्रेटरों के बीच उतरेगा। आज तक दुनिया के किसी अन्य देश ने चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मिशन नहीं भेजा है। 

इसरो के अनुसार, पहले 17 दिन पृथ्वी की कक्षा में रहने के बाद चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में स्थानांतरित करने वाले वक्र पथ पर डाला जायेगा। बाइसवें दिन यानी छह अगस्त को यह चंद्रमा की कक्षा में पहुँच जायेगा।

वहाँ अगले 27 दिन तक चंद्रयान चंद्रमा की सतह से 100 किलोमीटर की ऊँचाई वाली कक्षा में चक्कर लगायेगा। पचासवें दिन लैंडर चंद्रमा की सतह पर उतरने के लिए अॉर्बिटर से अलग हो जायेगा जबकि ऑर्बिटर उसी कक्षा में चक्कर लगता रहेगा। इक्यावनवें दिन से लैंडर की गति कम की जायेगी और 54वें दिन वह चंद्रमा पर उतरेगा।

अपने दूसरे मिशन में इसरो ने सॉफ्ट लैंडिंग का लक्ष्य रखा है। लैंडर दो मीटर प्रति सेकेंड की बेहद धीमी गति से आहिस्ते से चंद्रमा पर उतरेगा। 

चंद्रयान के तीन हिस्से ऑर्बिटर, लैंडर और रोवर हैं जिन्हें एक समेकित मॉड्यूल में रखा गया है। इस मॉड्यूल का वजन 3850 किलोग्राम है। यह 3.1 गुना 3.1 गुना 5.8 मीटर के आकार का है।

ऑर्बिटर का वजन 2379 किलोग्राम है। इसमें 1000 वाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता है। इसमें आठ वैग्यानिक उपकरण यानी पेलोड हैं जो विभिन्न आँकड़े जुटायेंगे। यह एक साल तक चंद्रमा की कक्षा में रहेगा।

लैंडर, जिसे भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के पितामह विक्रम साराभाई के नाम पर विक्रम नाम दिया गया है, चंद्रमा की सतह पर उतरेगा। यह एक चंद्र दिवस यानी करीब 14 दिन तक आँकड़े जुटाने का काम करेगा। इस पर चार पेलोड हैं। इसका वजन 1471 किलोग्राम है और यह 650 वाट बिजली उत्पन्न कर सकता है। 

रोवर को प्रग्यान नाम दिया गया है। इसका वजन 27 किलोग्राम है और इसमें छह पहिये लगे हैं। यह लैंडर से 500 मीटर के दायरे में चक्कर लगा सकता है। इस दौरान इसकी गति एक सेंटीमीटर प्रति सेकेंड होगी। इस पर दो पेलोड हैं।

ऑर्बिटर और लैंडर बेगलुरु के पास ब्यालालू स्थित इंडियन डीप सी नेटव्रक नामक इसरो के नियंत्रण कक्ष से सीधे संपर्क में रहेंगे। ये आपस में भी संवाद कर सकेंगे। रोवर लैंडर के साथ संवाद करेगा।

इस मिशन के मुख्य उद्देश्यों में चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना, उसके जमीन, उसमें मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना, उसकी भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन, और चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है। उल्लेखनीय है चंद्रमा पर भारत के पहले मिशन चंद्रयान-1 ने वहाँ पानी की मौजूदगी की पुष्टि की थी।

इस मिशन में तरह-तरह के कैमरा, स्पेक्ट्रोमीटर, रडार, प्रोब और सिस्मोमीटर शामिल हैं।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का एक पैसिव पेलोड भी इस मिशन का हिस्सा है जिसका उद्देश्य पृथ्वी और चंद्रमा की  सटीक दूरी पता लगाना ।

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अशोक गहलौत और सचिन पायलट की खींचतान - उड़ जाएगी राजस्थान सरकार ---



** करणीदानसिंह राजपूत **

राजस्थान की कांग्रेस सरकार अशोक गहलोत और सचिन पायलट की चल रही खींचतान में उड़ जाएगी।
ऐसे संकेत मिल रहे हैं जिससे संपूर्ण प्रशासन में किसी प्रकार का नियंत्रण नहीं रहा है।। इस खींचतान से प्रशासन बेपरवाह हो रहा है तथा प्रदेश में कामकाज एक प्रकार से ठप्प जैसे हालात में है। जिला कलेक्टर एक प्रकार से सरकार ही होता है, लेकिन कलेक्ट्रेट से लोग संतुष्ट  नजर नहीं आरहे। लोगों से सवाल किया जाता है तो लगता है कि उनकी दूखती रग को छू लिया गया हो। 
पुलिस अनियंत्रित और तानाशाही रवैया अपनाए हुए  दिखाई दे रही है जिसका प्रमाण सरदार शहर का कांड है। जिसमें देवर की मौत और भाभी के साथ पुलिस कस्टडी में बलात्कार की घटना ने सारे प्रदेश को हिला कर रख दिया है।
सरकार ने सरदार शहर के पूरे थाना स्टाफ को लाइन हाजिर किया है।  वहीं  थाना अधिकारी रणवीर सिंह सांई सहित आठ को सस्पेंड किया है।  वहां के पुलिस उप अधीक्षक को भी सस्पेंड किया गया है और एसपी को एपीओ कर दिया गया है। 
यह घटना मामूली नहीं है। राजस्थान के अन्य कानों में भी कामकाज मनमर्जी से चल रहा है। 
आम जनता से जुड़ी हुई नगर पालिकाओं में भयानक रूप से लूट चल रही है। अधिकारियों और कर्मचारियों को लग रहा है कि उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं होगी। किसी प्रकार की एपीओ या सस्पेंड जैसी कार्यवाही होगी तो भी महीने डेढ़ महीने में अपनी ड्यूटी पर लौट आएंगे। नगर पालिकाओं में आम जनता की सुनवाई बंद है। काम नहीं हो रहे हैं। पैसे का सर्वत्र बोल बाला है। 
संपूर्ण राज्य में हालात यह है कि रिश्वतखोरी के बाजार में रोजाना ही 1-2 अधिकारी-कर्मचारी चपेट में आ रहे हैं।  सरकार की ओर से किसी भी मंत्री की ओर से अधिकारियों और कर्मचारियों को भ्रष्टाचार के मामले में सख्त चेतावनी नहीं दी जा रही है। पूरे प्रदेश में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ता और नेता भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट की खींचातानी से त्रस्त और बेबस हैं। उनके भी काम नहीं हो रहे। दोनों के शीत युद्ध में समय व्यर्थ में बीत रहा है। पहले लोगों को यह आशा थी कि सरकार के गठन के बाद कार्यकर्ताओं और नेताओं की खुशी के लिए राजनैतिक नियुक्तियां जल्दी से जल्दी कर दी जाएगी लेकिन अब लगता है कि दोनों के झगड़े में राजनीतिक नियुक्तियों में भी अभी और विलंब होगा।
सरकार ने अपना बजट नगर पालिका और पंचायत समिति चुनावों को देखते हुए सामान्य सा रखा है लेकिन केवल बजट के सामान्य रखने से ही स्थिति सुधरने की आशा नहीं हो सकती।

आम लोगों का मानस है और कांग्रेस कार्यकर्ताओं में भी यह बात घर कर रही है कि पहले मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री का विवाद निपट जाए। लेकिन यह  विवाद अभी दूर होता नजर नहीं आ रहा। कभी अशोक गहलोत, कभी सचिन पायलट तो कभी दोनों ही दिल्ली में पहुंचते हुए और लौटते हुए नजर आते हैं। 

राहुल गांधी का कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष पद से दिया हुआ त्यागपत्र भी प्रदेशों में कांग्रेस पार्टी की सरकारों को प्रभावित कर रहा है जिसमें राजस्थान सरकार भी फंसी हुई है। 
राहुल गांधी का त्यागपत्र भी विभिन्न प्रकार से सरकारें चलाने में बाधा बना हुआ है और जब तक किसी एक अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो जाती तब तक दिल्ली का यह झंझट भी संपूर्ण देश को प्रभावित करता रहेगा।
राजस्थान में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की खींचातानी में कांग्रेस की सरकार उड़ जाने की हालत में है। ***
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