सोमवार, 12 नवंबर 2018

महाराणा प्रताप प्रतिमा पर किसने लगवाया यह बोर्ड?


सूरतगढ। मुख्य बाजार के चौराहे पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थल पर लगाया गया एक बोर्ड यह प्रदर्शित करता है कि पुलिस के पक्ष में संदेश लिखवा कर कहीँ भी लगाया जा सकता है। इस बोर्ड के कारण प्रतिमा स्थापना की घोषणा की शब्दावली ढ़क दी गई है।  बोर्ड लगाने के लिए किसने चुना यह स्थल?

 यह कार्य प्रतिमा के अपमान का कारक बना है,प्रतिदिन प्रतिमा पर माल्यार्पण होता है लेकिन माल्यार्पण करने वाले और उसमें उपस्थित यातायात पुलिसकर्मियों को यह दिखाई नहीं दे रहा। व्यवस्था के नाम पर किसी संदेश और व्यवसाय का प्रचार करने के लिए प्रतिमा स्थल को ढकना अनुचित कार्य है।

रविवार, 11 नवंबर 2018

सूरतगढ़ भाजपा टिकट रामप्रताप कासनिया को मिली

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ सीट पर भारतीय जनता पार्टी की टिकट रामप्रताप कासनिया को घोषित हो गई।

 दो दिग्गजों वर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भादू और पूर्व राज्य मंत्री रामप्रताप कासनिया के बीच टिकट वास्ते जबरदस्त कसम कस चल रही थी।

 रामप्रताप कसनिया ने सन 2013 में टिकट नहीं मिलने पर पार्टी के उच्च नेताओं के निर्देश पर राजेंद्र सिंह भादू को मंच पर खुला समर्थन दिया व विजय श्री दिलाने में पूरा योगदान दिया।

 कासनिया ने 5 वर्ष तक भारतीय जनता पार्टी की अनुशासन तपस्या करके पार्टी को अन्य चुनावों में भी पूरा सहयोग दिया व  सत्ता पर बिठाने में योगदान दिया।

 कसनिया ने तपस्या में स्वयं को सफल मानकर लोगों की समीक्षा और समर्थन पाकर सन 2018 की टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी।

एक सभा 10 अक्टूबर को करके यह साबित भी किया कि वर्तमान में सूरतगढ़ क्षेत्र के लोग उन्हें बहुत चाहते हैं। 

लोग यह मानते हैं कि टिकट कासनिया को दिया जाए तो विपरीत हालात में भी यह सीट भारतीय जनता पार्टी की दावे के साथ विजय श्री की ओर बढ़ सकती है। 

इस सीट पर भाजपा का वर्चस्व कायम है और चुनाव के अंदर कांग्रेस के साथ जबरदस्त टक्कर होगी।

राम प्रताप कासनिया ने कहा था कि सर्वे के आधार पर टिकट दिया जाए। राजेंद्र सिंह भादू ने अपने विकास कार्यों पर पूरा भरोसा करते हुए कहा कि विकास हुए हैं उनके आधार पर टिकट का वितरण किया जाए।वर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भादू की टिकट काट दी गई है,दुबारा नहीं दी गई।

राजनीतिक क्षेत्रों में चाहे मोदी और वसुंधरा का नारा चले ना चले लेकिन यह तो मानकर चल रहे हैं कि कांग्रेस के पक्ष में जो हवा बताई जा रही है वह वोटिंग के समय तक नहीं रहेगी । 

लोग अभी भी भाजपा को चाहते हैं और भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में अधिक वोट करेंगे। 



शनिवार, 10 नवंबर 2018

सूरतगढ सीट:कांग्रेस टिकट में 2 पूर्व विधायक शिखर पर:किसे मिलेगी टिकट

* करणीदानसिंह राजपूत *

गंगाजल मील और सरदार हरचंद सिंह सिद्धु दो नाम-सूत्र :

 

सूरतगढ़ विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से पूर्व विधायक गंगाजल मील और पूर्व विधायक स.हरचंद सिंह सिद्धु में से एक को टिकट मिल सकता है। दिल्ली सूत्र के अनुसार ये दो नाम शिखर पर हैं और इनमें से चयन की कशमकश है।

इनमें हरचंद सिंह सिद्धू पीलीबंगा क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके हैं पहली बार सन 1977 में जनता पार्टी ग्रुप में लोक दल की ओर से चुनाव लड़ा और विजई रहे। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस की तरफ से सन 1998 का चुनाव लड़ा और विजयी रहे। 2003 तक इनका कार्यकाल रहा। इसके बाद टिकट नहीं मिला और अब पूरे प्रयास हैं।

भाजपा काल के बड़े जनविरोधी कार्यो की दस्तावेज सूचनाएं पार्टी के उच्च नेताओं तक पहुंचाते रहे हैं और इसी आधार पर स्थानीय स्तर पर भी मामले दाखिल करने में आगे रहे हैं।

सूरतगढ़ थर्मल के नीजि हाथों में सौंपने की प्रारंभिक सूचनाओं पर 22 हजार रूपये की भारी रकम पर सूचना के अधिकार नियम 2005 के तहत करीब 10 हजार पेज से अधिक सूचना ली और पार्टी को अवगत कराया। नगरपालिका के कार्यों की भी हजारों रूपये की सूचनाएं ली और कार्यवाही की व नेताओं को अवगत कराया। नहरी पानी पर मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री कार्य काल में धरातल की महत्त्वपूर्ण सूचनाएं दी।

गंगाजल मील ने सन 2003 में पीलीबंगा से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा। भारतीय जनता पार्टी के टिकट नहीं मिलने पर स्वतंत्र उम्मीदवार बने रामप्रताप कसनिया की जीत हुई। मील को हार का मुंह देखना पड़ा सन 2008 के चुनाव से पहले गंगाजल मील भारतीय जनता पार्टी को छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए और सूरतगढ़ सीट से चुनाव लड़ा सन 2008 के चुनाव में गंगाजल विजई रहे और 2013 तक कार्यकाल रहा सन 2013 में गंगाजल भारतीय जनता पार्टी के राजेंद्र सिंह भादू से पराजित हुए करीब 33000 वोटों से हारे और थर्ड नंबर पर पहुंचे इस बार टिकट मांगने वालों की संख्या तो काफी है मगर सूत्र के अनुसार इन दो में से किसी एक को टिकट मिल सकता है। सूत्र के हिसाब से केवल दो ही नाम शिखर पर हैं।






 

बसपा झंडे तले आमजन के हक और अधिकारों की लडा़ई लड़ता रहूगां - डूंगरराम गेदर

सूरतगढ - 10 नवम्बर 2018,  बहुजन समाज पार्टी सूरतगढ के प्रत्याशी डूंगरराम गेदर ने वार्ड नंबर 4, 5, 6, 7, व 23, 24, 25, 26, 27 में  नुक्कड़ सभा में दीपावली की राम राम करते हुए कहा कि मैं पिछले 30 वर्षों से बसपा के नीले झंडे के नीचे तीन महा संकल्प, आजीवन शादी नहीं करूंगा,  मैं अपने लिये किसी प्रकार की कोई सम्पति नहीं रखूंगा, व मै अपना संम्पूर्ण जीवन समाज सेवा में लगाऊंगा, का प्रण लेकर राजनीति में आया हूं और सच्ची जन सेवा करते हुए गरीबों के हक और अधिकारों की लड़ाई कांग्रेस और भाजपा की सरकारों से लड़ता आया हू और  लड़ता रहूंगा। गेदर ने कहा कि वर्तमान में नेता अपने लाभ के लिए व चुनाव जीतने के लिए जिस प्रकार कपड़े बदलते हैं उसी प्रकार पार्टियां बदलते रहते हैं। रातों रात ऐसे लोगों का डंडा वही रहता है और झंडा बदल जाता है। लेकिन मैंने जनसेवा को ही सच्ची सेवा मानते हुए पिछले 30 वर्षों से बसपा के नीले झंडे के नीचे कार्य करता आया हूं। गेदर ने लोगों से कहा की सेवा करने की इच्छा है मन में, इसलिए एक बार सेवा का मौका दें। लोगों ने गेदर को भारी मतों से जिताने का आश्वासन देते हुए तन मन धन से सहयोग करने का वादा किया और माला पहनाकर जीतने का आशीर्वाद दिया। गेदर के साथ बसपा नगर अध्यक्ष पवन सोनी, राजेन्द्र बोगियां,रज्जाक खान ,महावीर टाक, पूर्व पार्षद बनवारी लाल नायक ,भूपेंद्र सेठ, साधु राम गवारिया, धन्नालाल मेघवाल, मदन मेघवाल, रामप्रताप जालप ,साहब राम नाथ ,प्रेम जावा,मकशुद शेख,हरबंस ढूंढेरिया रामकुमार बावरी,हंस राज शर्मा ,घनश्याम स्वामी,अजय घुसर मनोज चांगरा,मलकीत सिंह ,टेक सिंह,नेमीचंद, अमित कल्याणा, मनोज जाटव, एडवोकेेेट लोकेश गहरवाल, आदि ने सभा को संबोधित किया।







शुक्रवार, 9 नवंबर 2018

राजस्थान में वसुंधरा के ताज पर संकट कितना:इंडिया टुडे व एक्सिस माई इंडिया का सर्वे पर टिप्पणी

* करणीदानसिंह राजपूत *

 9 नवंबर 2018.

राजस्थान में वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार के पांच साल पूर्ण होते इंडिया टुडे-एक्सिस माई इंडिया का सर्वे सामने आया है। सटोरियों,चर्चाओं और अखबारबाजी में वसुंधरा सरकार को संकट में बताने का हल्ला मचा है लेकिन हालात बहुत अधिक बिगड़े हैं या नहीं? यह जानिए।

सर्वे के मुताबिक, राजस्थान की 43 फीसद जनता सरकार बदलना चाहती है वहीं 39 प्रतिशत मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे की सरकार का समर्थन करती है जबकि 18 प्रतिशत इस मसले पर कोई राय प्रगट नहीं करती। इस 18 प्रतिशत का रुख मतदान तक क्या होगा? सामान्य तया ये राय प्रगट नहीं करने वाले सरकार के पक्ष में रह जाते हैं जब सामने भी एकजुटता नजर नहीं आती हो। अभी कांग्रेस में नेतृत्व में एकजुटता की कमी है। टिकटार्थियों में कोई भी यह नहीं कह रहा कि वह टिकट नहीं मिलने पर तय प्रत्याशी के साथ खड़ा होगा। मतलब वह किधर भी मुंह कर सकता है। 


कांग्रेस की दशा भी इस सर्वे में समझें।


सर्वे में जनता ने सरकार बदलाव के अलावा अन्य कई मुद्दों पर अपनी राय प्रगट की है। मालूम हो कि पिछले कई चुनावी सर्वे में वसुंधरा सरकार की स्थिति सामने आ चुकी है। इनमें सीएम वसुंधरा के प्रति लोगों की नाराजगी सामने आई है। सर्वे में राजस्थान की जनता मुख्यमंत्री के चेहरे को लेकर अपनी राय प्रकट की है। चुनाव प्रचार में सीएम राजे बीजेपी की अगुवाई कर रही है। वहीं कांग्रेस की ओर से सचिन पायलट मोर्चा संभाल रहे हैं। लेकिन सर्वे में अशोक गहलोत सबसे लोकप्रिय नेता के तौर पर सामने आए हैं।

सर्वे में शामिल 35 प्रतिशत लोग अशोक गहलोत को अगला मुख्यमंत्री चाहते हैं और 11 प्रतिशत लोग सचिन पायलट को मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। आश्चर्य है कि मौजूदा मुख्यमंत्री वसुंधरा को 31 प्रतिशत लोग फिर से मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। 

हां,कांग्रेस दो दिग्गज नेता अशोक गहलोत और पायलट के आंकड़ों को जोड़ दिया जाए तो वह संयुक्त रूप से 46 प्रतिशत पहुंचता है।

क्या इससे यह अनुमान लगता है की भाजपा कांग्रेस की ही टक्कर होगी?


 

राजस्थान में 12 से 19 नवंबर तक नामांकन:

श्रीगंगानगर, 9 नवम्बर। विधानसभा आम चुनाव 2018 के दौरान 12 नवम्बर 2018 से नाम निर्देशन का कार्य प्रारम्भ होगा। नाम निर्देशन प्रस्तुत करने की अंतिम तिथि 19 नवम्बर होगी। 

जिला कलक्टर व जिला निर्वाचन अधिकारी श्री ज्ञानाराम ने बताया कि नाम निर्देशनों की 20 नवम्बर को संवीक्षा की जायेगी। 22 नवम्बर तक अभ्यर्थियों के नाम वापस लेने की अंतिम तिथि रहेगी। 7 दिसम्बर 2018 को प्रातः 8 से सायं 5 बजे तक मतदान रहेगा। 

बुधवार, 7 नवंबर 2018

25 महिला होमगार्ड्स के यौन शोषण के आरोप: 2 अधिकारी सस्पेंड।

*महिलाओं ने अपनी शिकायत में दो वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे उनका ‘मानसिक, शारीरिक, यौन, भावनात्मक और आर्थिक तौर पर उत्पीड़न’ करते हैं और उनमें से कुछ का यौन शोषण करना चाहते थे।*


November 7, 2018.


गुजरात के सूरत में 25 महिला होम गार्ड्स ने दो वरिष्ठ अधिकारियों पर उत्पीड़न और यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। इसके बाद दोनों अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है और जांच के आदेश दिए गए हैं। महिला कर्मियों ने पुलिस आयुक्त (नगर) सतीश शर्मा को पिछले हफ्ते लिखित शिकायत दी थी। होम गार्ड्स के कमांडेंट जनरल पीबी गोंडिया ने कहा, ‘‘महिला होम गार्ड्स की अपने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ शिकायत मिलने के बाद हमनें उन्हें (दो वरिष्ठ अधिकारियों) निलंबित कर दिया है और पुलिस उपाधीक्षक स्तर के एक अधिकारी को जांच का जिम्मा सौंपा है।’’

उन्होंने कहा कि 25 शिकायतकर्ताओं में से 19 के बयान पहले ही दर्ज किए जा चुके हैं और अन्य के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया चल रही है। महिलाओं ने अपनी शिकायत में दो वरिष्ठ अधिकारियों पर आरोप लगाया है कि वे उनका ‘मानसिक, शारीरिक, यौन, भावनात्मक और आर्थिक तौर पर उत्पीड़न’ करते हैं और उनमें से कुछ का यौन शोषण करना चाहते थे।

गौरतलब है कि, इन 25 महिला होमगार्डस ने शुक्रवार शाम सूरत पुलिस आयुक्त सतीष शर्मा के कार्यालय पहुंचकर शिकायत दर्ज करवायी थी। शिकायत में कहा गया था कि, ऑफिसर कमांडिंग सोमनाथ परेड के समय परेड ग्राउन्ड पर टर्न आउट के नाम पर चेक करने के बहाने इधर उधर हाथ लगाते रहते हैं। साथ ही शिकायत में एक महिला अधिकारी का नाम भी सामने आया था। कहा गया था कि, महिला होमगार्ड इंचार्ज भावना बेन कंथारिया कहती हैं कि तुम्हें साहब का ध्यान रखना पड़ेगा। सोमनाथ अपने घर बुलाएं तो जाना पड़ेगा। ऐसा करके तुम अपनी नौकरी सुरक्षित रखोगी।

( जनसत्ता ओन लाइन साभार)


भादू कासनिया में टिकट की भारी कशमकश:लोग इस तरह से करेंगे आकलन:भारी कौन?




सूरतगढ़ सीट पर भारतीय जनता पार्टी के दो दिग्गजों वर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भादू और पूर्व राज्य मंत्री रामप्रताप कासनिया के बीच टिकट वास्ते जबरदस्त कसम कस चल रही है।

सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में वोटर इन दोनों दिग्गजों के बीच के युद्ध को समझ रहे हैं और देख रहे हैं।

 रामप्रताप कसनिया ने सन 2013 में टिकट नहीं मिलने पर पार्टी के उच्च नेताओं के निर्देश पर राजेंद्र सिंह भादू को मंच पर खुला समर्थन दिया व विजय श्री दिलाने में पूरा योगदान दिया।


 कासनिया ने 5 वर्ष तक भारतीय जनता पार्टी की अनुशासन तपस्या करके पार्टी को अन्य चुनावों में भी पूरा सहयोग दिया व  सत्ता पर बिठाने में योगदान दिया।

 कसनिया ने तपस्या में स्वयं को सफल मानकर लोगों की समीक्षा और समर्थन पाकर सन 2018 की टिकट के लिए अपनी दावेदारी पेश की है। 

एक सभा 10 अक्टूबर को करके यह साबित करने का प्रयास भी किया है कि वर्तमान में सूरतगढ़ क्षेत्र के लोग उन्हें बहुत चाहते हैं। 

लोग यह मानते हैं कि टिकट कासनिया को दिया जाए तो विपरीत हालात में भी यह सीट भारतीय जनता पार्टी की दावे के साथ विजय श्री की ओर बढ़ सकती है। राजेंद्र भादू के पक्ष में भी दावा करने वाले कार्यकर्ताओं की कमी नहीं है।

वर्तमान में जहां राजस्थान में भाजपा की हालत कमजोर मानी जा रही है वहां सूरतगढ़ की सीट भी बहुत अधिक प्रभावी नहीं समझी जा रही। श्री गंगानगर जिले की अन्य सीटों की तरह ही सूरतगढ़ सीट ही  कमजोर मानी जा रही है। 

इस सीट पर दिग्गजों के बीच टिकट के घमासान का मतलब यह है कि भाजपा का वर्चस्व कायम है और चुनाव के अंदर कांग्रेस के साथ जबरदस्त टक्कर होगी। अगर भारतीय जनता पार्टी इस सीट पर बेहद कमजोर होती तो इन दिग्गजों के बीच टिकट की मारामारी नहीं होती।

 हालांकि टिकट के दावे में दोनों दिग्गजों ने अपनी तरह से नेताओं के सामने बात रखी है।

राम प्रताप कासनिया ने कहा कि सर्वे के आधार पर टिकट दिया जाए। राजेंद्र सिंह भादू ने अपने विकास कार्यों पर पूरा भरोसा करते हुए कहा कि विकास हुए हैं उनके आधार पर टिकट का वितरण किया जाए।

 फिलहाल टिकट इन दोनों के बीच में ही मानी जा रही है।

देखते हैं कि पार्टी किसको टिकट देती है?

पार्टी का सन 2013 में कहना मानने वाले रामप्रताप कसनिया पर पार्टा नेता ध्यान करते हैं  तो यहां पर कासनिया को टिकट मिल जाएगी।

जनता में तीन तरह के पक्ष हैं। कुछ लोग भादू को टिकट मिलने का और कुछ लोग कासिया को टिकट मिलने का कहते हैं वही तीसरे पक्ष के कार्यकर्ता जिनकी संख्या अधिक मानी जानी चाहिए उनका कहना है कि भाजपा की टिकट जो भी लाएगा वे उसका समर्थन करेंगे और उसके पक्ष में अधिक से अधिक वोटिंग करा कर विजयश्री दिलाने का भरपूर प्रयास करेंगे।


 राजनीतिक क्षेत्रों में चाहे मोदी और वसुंधरा का नारा चले ना चले लेकिन यह तो मानकर चल रहे हैं कि कांग्रेस के पक्ष में जो हवा बताई जा रही है वह वोटिंग के समय तक नहीं रहेगी । 

लोग अभी भी भाजपा को चाहते हैं और भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में अधिक वोट करेंगे। 

अब देखना है कि सूरतगढ़ की सीट पर इन दो दिग्गजों में किसको टिकट मिलती है?

दीपावली के बाद टिकटों का निर्धारण होगा लेकिन जनता दीपावली के स्नेहमिलन रामास्यामा को भी एक प्रमाण मान रहे हैं कि दोनों में किसके यहां पहुंचेंगे अधिक लोग। लोगों के आकलन का यह भी एक नजरिया रहेगा।


 




सूरतगढ़ से कांग्रेसी टिकट गैरजाट चेहरे का दबाव:अन्य समुदायों के टिकटार्थी अधिक


सूरतगढ सीट पर पिछले चुनाव 2013 में कांग्रेस प्रत्याशी गंगा जल मील के विधायक रहते बहुत बुरी तरह से 30 हजार वोटों से हारने और तीसरे क्रम पर नीचे पहुंचने के कारण मील को टिकट नहीं देने का दबाव बढा है। मील को टिकट नहीं दिए जाने के लिए सैंकड़ों पेजों में अनेक कागजात दस्तावेज आदि पार्टी के उच्च नेताओं को सौंपे जाने के समाचार भी हैं। पिछली बार विधायक रहते गंगा जल को आसानी से टिकट मिल गई थी लेकिन इस बार प्रबल दावेदार कई हैं और उनका दबाव अधिक व मील की स्थिति कमजोर है।

सूरतगढ़ के पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर कांग्रेस पार्टी की ओर से विशेष ध्यान दिया जा रहा है ताकि इस सीट को जीता जा सके।

विभिन्न समुदायों के टिकटार्थियों की ओर से पिछले काफी समय से यहां मांग चल रही है कि जाट जाति में से कैंडिडेट खोजने के साथ ही अन्य जातियों में भी कैंडिडेट की खोज की जाए।

इस दबाव से कांग्रेस इस बार कोई दूसरा चेहरा चुनाव में उतारे तो आश्चर्य नहीं होगा।

भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व राज्य मंत्री रामप्रताप कासनिया और वर्तमान विधायक राजेंद्र सिंह भादू में ही किसी एक को टिकट मिलने की संभावना है। ये दोनों जाट समुदाय से हैं इसलिए भी कांग्रेस अपना प्रत्याशी अन्य समुदाय से उतारने को प्राथमिकता दे सकती है जिसके लिए राजनीतिक क्षेत्र के अलावा चर्चा सरगर्म है।


पार्टी सूरतगढ़ से अन्य समुदायों में सिख समुदाय, अरोड़ा, वणिक व ओबीसी कुम्हार व किसी अन्य  समुदाय में से टिकट दे सकती है।

पूर्व में यहां कांग्रेस की ओर से बिश्नोई जाट दो समुदायों को विशेष रूप से प्रमुखता दी जाती रही है।

 जाट समुदाय से यहां राजा राम साईं साईं चौधरी मनफूल सिंह भादू गंगाजल मील व बिश्नोई समुदाय से सुनील बिश्नोई और उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी बिश्नोई को प्रमुखता दी जाती रही है।

सुनील बिश्नोई ने 4 बार चुनाव लड़ा दो बार जीते दो बार हारे। विजयलक्ष्मी ने दो बार चुनाव लड़ा एक बार जीती एक बार हारी। एक ही परिवार ने 30 साल तक यहां क्षेत्र पर कब्जा जमाए रखा रखा।

 इससे पूर्व इस क्षेत्र में भादू परिवार का विशेष कब्जा रहा 1952 में मनफूल सिंह भादू व 1962 और 1967 में मनफूल सिंह भादू इस इलाके से विजयी रहे। 1957 में एक बार राजा राम साईं को विधायक चुना गया।

इस प्रकार से देखा जाए तो इस क्षेत्र में जाट और बिश्नोई परिवारों का ही वर्चस्व रहा था।

 सन 2008 में गंगाजल मील कांग्रेस की टिकट पर जीते लेकिन 2013 में जनता ने उन्हें तीसरे क्रम पर पहुंचा दिया। मील परिवार अभी भी टिकट की ट्राई करने में लगा हुआ है,मगर जनता गंगाजल मील के नाम पर उत्सुक नहीं है।

 गंगाजल मील ने 2003 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से पीलीबंगा सीट पर चुनाव लड़ा लेकिन भाजपा से नाराज होकर स्वतंत्र रूप से लड़ने वाले रामप्रताप कासनिया से मात खाई।

 इस क्षेत्र में जो सूरतगढ़ तहसील कहलाती है लोगों ने भाजपा और कांग्रेस में रामप्रताप कासनिया गंगाजल मील और राजेंद्र सिंह भादू को ही 15  सालों से देखा है। ये तीनों एक दूसरे का विरोध भी नहीं करते चाहे जो विधायक रहे, हां चुनाव में जरूर एकदूसरे के विरोध में वोट मांगते हैं।

लोगों का मानस है कि कि कांग्रेस पार्टी इस बार अपनी सीट को हर हालत में जीतने के लिए टिकट में परिवर्तन करे जिसमें समुदाय का परिवर्तन भी हो और कोई नया या दूसरा चेहरा सामने आए। पिछले 15 सालों से जो लोग यहां चर्चा में रहे हैं, उनको जनता इस  2018 के चुनाव में देखने को उत्सुक नहीं है

चाहे भाजपा हो चाहे कांग्रेस हो।

दोनों पार्टियों में लोग नए या फिर दूसरे चेहरों को देखना चाहती है।

भाजपा की राजनीतिक स्थिति बहुत कमजोर नजर आती है ऐसी स्थिति में कांग्रेस का नया या.प्रभावशाली दूसरा चेहरा लोगों को प्रभावित कर सकता है।


राजस्थान के तीन उपचुनाव कांग्रेस ने जीते जो 17 विधानसभा क्षेत्र में हुए। इस परिवर्तन को नजर में रखते सूरतगढ़ पर नजर है। जयपुर दिल्ली में यह दबाव चल रहा है और उसके अनुसार टिकट के लिए प्रयास और दबाव शुरू है।

अन्य समुदायों में सिख में से 2 बारपीलीबंगा से विधायक रह चुके स.हरचंद सिंह सिद्धू,पूर्व प्रधान परमजीत सिंह रंधावा और युवक कांग्रेस के विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष गगनदीपसिंह वरिंग हैं। 

जैन समुदाय से विमलकुमार पटावरी ( जैन) ने प्रबल दावेदारी जताई है।ओबीसी में से बलराम वर्मा हैं जो कुम्हार समुदाय से कई चुनावों के अनुभवी कार्यकर्ता हैं। इनके अलावा अमित कड़वासरा भी हैं। इनके अलावा भी टिकटार्थी हैं।


 


%%%%%%%%%%%%%%%%%


मंगलवार, 6 नवंबर 2018

सट्टेबाजी में 100 गिरफ्तार:सटोरियों वास्ते शराब व खाने का इंतजाम भी था

* दिवाली से पहले दिल्ली में बड़े सट्टा रैकेट का भंडाफोड़, 100 गिरफ्तार*

नई दिल्ली 6-11-2018.

दिवाली से एक दिन पहले पश्चिमी दिल्ली के राजौरी गार्डन थाने की पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मंगलवार तड़के विशाल एंक्लेव में छापेमारी कर एक बड़े सट्टा रैकेट का पर्दाफाश कर 100 लोगों को हिरासत में लिया है। छापेमारी में लगभग 2 करोड़ रुपये के सट्टा लगाए जाने का पता चला है, जिसमें डेढ़ करोड़ से ज्यादा के टोकन भी पुलिस को मिले हैं। 

छापेमारी में पुलिस को 100 से ज्यादा ताश की गड्डियां भी मिली हैं। इस दिवाली पर दिल्ली पुलिस की यह अभी तक की सबसे बड़ी कार्रवाई मानी जा रही है। 

डीसीपी वेस्ट मोनिका भारद्वाज ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि अभी कार्रवाई चल रही है। डीसीपी के अनुसार, यह कार्रवाई राजौरी गार्डन एसीपी, एसएचओ सुनील कुमार शर्मा, सब इंस्पेक्टर अजय, मनोज, विक्रम, हेड कांस्टेबल विनोद, अनिल और कांस्टेबल महेंद्र की टीम ने की है। 

स्थानीय लोगों से मिली सूचना के अनुसार, पुलिस को विशाल एंक्लेव की इमारत की एक बेसमेंट में सट्टा रैकेट चलाए जाने की जानकारी मिली थी, जिसके बाद मंगलवार तड़के पुलिस ने यहां छापा मारा। यहां पर ही सटोरियों और जुआरियों के लिए शराब के साथ खाने-पीने का भी इंतजाम किया हुआ था। 





यह ब्लॉग खोजें