Thursday, February 22, 2018

विधानसभा घेराव की किसानों की चेतावनी-सरकार परेशान-जयपुर में भारी पुलिस बल


22-2-2018.

विधानसभा घेरने की चेतावनी को लेकर विभिन्न हिस्सों से एकजुट हुए हजारों किसानों द्वारा राजधानी की ओर कूच करने से हड़कम्प मचा हुआ है। यहां राजस्थान विधानसभा में बजट सत्र चल रहा है और ऐसे में नाराज किसान विधानसभा घेराव की मंशा को लेकर जयपुर पहुंचने को आतुर हैं। किसान दोपहर से पहले सीकर से चल पड़े थे, जो जयपुर के नजदीक चौमूं तक पहुंच गए हैं।

यहां पुलिस ने रोका तो हाईवे पर बैठे

जयपुर के नजदीक चौमूं टोल के पास किसानों ने जमावड़ा लगा लिया है। यहां उन्हें पुलिस ने रोकने की कोशिश की थी। ऐसे में सीकर हाईवे जाम हो गया है। जाम के चलते वाहन अटक गए हैं। जब से किसानों ने इस घेराव का ऐलान किया है, तब से सरकार से लेकर पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों तक में हड़कंप मचा हुआ है। किसानों को रोकने के लिए जगह-जगह पुलिस के पहरे लगे हुए हैं। आंदोलन में बड़ी संख्या में युवा किसान भी शामिल हैं। इससे सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं।


पुलिस ने 80 किसान नेताओं को किया अंदर


उग्र आंदोलन के अंदेशे को भांपते हुए राजस्थान सरकार ने दो दिन पूर्व ही किसान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमराराम, पेमाराम सहित 80 से ज्यादा किसान नेताओं को जेल में डाल दिया है। बावजूद इसके किसान जयपुर कूच के लिए आमादा है। अब इस आंदोलन में राजपा विधायक किरोड़ी लाल मीणा और विधायक हनुमान बेनीवाल भी किसानों के साथ आ गए हैं।


जयपुर में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात


आज सुबह से ही किसान जयपुर की ओर बढ़ रहे किसानों को पुलिस ने जगह-जगह रोकना प्रारंभ कर दिया है। जिस कारण कई सड़कों पर जाम लग गया है। किसान आंदोलन की आग सुलगने की आहट के चलते सरकार ने बड़ी संख्या में जयपुर व अन्य जिलों में पुलिस बल तैनात किया है।


ये हैं मांगें और ये शहर रखा था बंद

इससे पूर्व किसानों के आह्वान पर बुधवार को सीकर बंद रखा गया। बंद के दौरान पुलिस ने 10 लोगों को हिरासत में लिया। किसानों ने ऐलान किया है कि यदि उन्हें जयपुर जाने से रोका गया तो वे चक्काजाम और धरना प्रदर्शन उसी स्थल पर प्रारंभ कर देंगे। गौरतलब है कि किसान पूर्ण कर्ज माफी और राजस्थान सरकार के साथ पूर्व में हुए लिखित समझौते की मांग को पूर्ण करने पर अड़े हुए हैं।



Wednesday, February 21, 2018

पुलिस को लापता आकाश की है तलाश:सहयोग करें।

  

श्रीगंगानगर, 21 फरवरी। 

थाना अधिकारी पुलिस थाना जवाहरनगर को गुमशुदा आकाश की तलाश है। आकाश पुत्र सुखलाल जाति धानक उम्र 19 वर्ष, निवासी वार्ड नम्बर 47, कबीर चौक श्रीगंगानगर, कद 5 फिट 8 ईंच तथा रंग गैहूंआ है, जो 19 फरवरी 2018 को अपने घर से लापता है। किसी भी नागरिक को आकाश के संबंध में जानकारी मिले तो वह पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर या थाना अधिकारी जवाहरनगर गंगानगर को सूचित कर सहयोग करें।


सूरतगढ़ मुस्लिम वक्फ जमीन पर अतिक्रमियों को बिजली पानी देने पर बढ़ेगा विवाद


 

- करणीदानसिंहराजपूत -

सरकार की घोषणा है कि कि वक्फ जमीनों के अतिक्रमणों  हटाया जाएगा लेकिन सूरतगढ़ के अंदर वक्फ की जमीन पर अतिक्रमणकारियों को बिजली पानी के कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की कोशिश से मुस्लिमों में भारी रोष है।

वक्फ कमेटी के संयोजक गुलाम मोहम्मद पठान के नेतृत्व में आज दिनांक 21 फरवरी 2018 को विभिन्न क्षेत्रों में काम करने वाले मुस्लिम इकट्ठे हुए और अतिरिक्त जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन पेश किया।

कमेटी की ओर से स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि राजनीतिक कारणों से अतिक्रमियों को कई बार पहले भी लाभ देने की कोशिशें हुई है। 

प्रभावशाली लोगों ने वक्फ की जमीन पर  कब्जा कर रखा है जिसके कारण वातावरण दूषित हो रहा है।

कमेटी ने लिखा है कि सन 2001 में जमीन प्रशासन व पुलिस के नेतृत्व में खाली करवाई गई थी लेकिन प्रभावशाली लोगों ने धीरे धीरे बहुत बड़े क्षेत्र पर कब्जा कर लिया।

 वक्फ कमेटी यह अतिक्रमण हटवाने के लिए और अतिक्रमणियों  को सुविधाएं नहीं देने की मांग कर रही है।

पुलिस ने कमेटी के लोगों को निर्देशित किया कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर ना जाएं लेकिन 15 दिन पहले कब्जाधारियों के लिए बिजली देने के वास्ते वहां पर खंभे डाल दिए गए। पुलिस को इसकी सूचना दी गई पुलिस ने फिलहाल रोक दिया लेकिन अदालत के स्टे आदेश के बावजूद बिजली पानी देने की कोशिश से वातावरण खराब हो रहा है,अगर वहां पर जबरदस्ती से  कार्यवाही की गई तो माहौल खराब होगा और शांति व्यवस्था भी बिगड़ सकती है।


 मुस्लिमों ने लिखा है कि हम समाज के प्रबुद्ध नागरिक भी नहीं चाहते कि सूरतगढ़ में कोई घटना घटित हो इसलिए चाहते हैं कि जो लोग कब्जों को मजबूत करने के लिए मिट्टी ईंट आदि आदि डाल रहे हैं उन्हें पाबंद किया किया जाए।

आज मिलने वालों में संयोजक गुलाम मोहम्मद पठान पूर्व पालिका अध्यक्ष इकबाल कुरेशी शहर काजी सहित कई लोग शामिल थे। 

(विदित रहे कि राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 62 पर वक्फ की जमीन है जिसकी कीमत बहुत है। बार बार राजनीति पर और विधायक को वोट चाहिए पर बात आ रही थी।)

अतिरिक्त जिला कलेक्टर चांदमल वर्मा ने आश्वस्त किया है कि मौके को दिखाकर सही कार्यवाही की जाएगी।



आकाशवाणी महानिदेशक के नाम सौंपा ज्ञापन

सूरतगढ़ 21-2-2018.

अॉल इंडिया रेडियो कैजुअल अनाऊंसर एंड कॉम्पीयर्स यूनियन (रजिस्टर्ड) नई दिल्ली की तरफ से यूनियन के विधिक सलाहकार एडवोकेट श्रीपाल शर्मा व कैजुअल इकाई सूरतगढ़ के अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा की अगुवाई में समस्त कैजुअल अनाऊंसर/कॉम्पीयर्स ने आकाशवाणी सूरतगढ़ के कार्यक्रम प्रमुख श्रवण मीणा व कार्यक्रम अधिकारी रमेश शर्मा “बाहिया” को आकाशवाणी महानिदेशक नई दिल्ली के नाम कैजुअलकर्मियों के नियमितीकरण और फीस/ वेतन बढ़ाने के लिए आग्रह स्वरूप ज्ञापन सौंपा।

इकाई प्रवक्ता नरेश वर्मा ने बताया कि ज्ञापन में उन सभी बिन्दुओं का सिलसिलेवार विस्तृत उल्लेख है जिनके आधार पर वर्षों से लगातार कार्यरत आकाशवाणी कैजुअलकर्मी नियमितीकरण के पूर्णतः हकदार हैं।साथ में महानिदेशक से ये आग्रह भी किया गया है कि कोर्ट द्वारा यथास्थिति बनाए रखने का आदेश है इसलिए विभिन्न आकाशवाणी केन्द्रों पर रीस्क्रीनिंग व फ्रेश अॉडिशन न करवाए जाएं तथा पुराने कैजुअलकर्मियों की ड्यूटी पूर्ववत जारी रखी जाए और फीस में भी यथोचित बढ़ोतरी की जाए।

इकाई अध्यक्ष देवेन्द्र शर्मा ने कहा कि यूनियन द्वारा 21 फरवरी को आकाशवाणी महानिदेशक के नाम ये ज्ञापन देशभर में लगभग सभी आकाशवाणी केन्द्रों के कार्यक्रम प्रमुख व केन्द्र निदेशकों को सौंपकर आकाशवाणी महानिदेशक से नियमितीकरण के लिए विनम्र आग्रह किया गया।

कैजुअलकर्मियों से बातचीत के दौरान कार्यक्रम प्रमुख श्री श्रवण मीणा ने कहा कि आपकी माँग तुरन्त आकाशवाणी महानिदेशक महोदय नई दिल्ली तक पहुँचा दी जाएगी।

इस अवसर पर इकाई के संगठन मन्त्री संजय बैद, सचिव श्रीपाल शर्मा,उपसचिव संजीव कालिया,कोषाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा,प्रवक्ता नरेश वर्मा,संजय चौधरी,रोहिताश शर्मा,कुन्दन कटारिया,गुलशन मेघानी,मनोज खत्री, विकास पारीक,दुर्गाराम नायक आदि मौजूद थे।

इकाई देवेन्द्र शर्मा ने शुभकामनाओं सहित सबका आभार व्यक्त किया।



बड़ा अस्पताल- बड़ी लूट- सच्च मेंं रूह कांप जाती है

अपने परिजनों  को बचाने को अच्छे इलाज के लिए लोग आसपास के बड़े निजी अस्पताल पहुंचते हैं। वहां पर जिस प्रकार से ऊंची कीमत वसूली जाती है उसे जान लेने पर आदमी की रूह कांप जाती है।



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आपके आसपास बड़े निजी अस्पतालों 

में भी होती लूट पर नजर रखें 

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 निजी अस्पताल मरीजों से हजारों गुना ज्यादा मुनाफा कमाते हैं। यह सनसनीखेज खुलासा किया है नैशनल फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) ने। एनपीपीए ने मशहूर निजी अस्पतालों के बिलों का अध्ययन किया जिससे पता चलता है कि ये निजी अस्पताल दवाओं, इलाज में इस्तेमाल की जाने वाली चीजें और विभिन्न जांच के नाम पर 1737 फीसदी तक का मुनाफा कमाती है। यह तीन चीजें मरीज के बिल का करीब 46 फीसदी होती हैं। एनपीपीए ने 20-2-2018 को अध्ययन जारी किया और बताया कि यह मुनाफा दवा कंपनियों को नहीं बल्कि अस्पताल को होता है।  

एनपीपीए ने यह खुलासा किया है कि ज्यादातर दवाओं और डिस्पोजेबल चीजें अस्पताल के अंदर मौजूद फार्मेसी ( मेडिकल स्टोर ) से खरीदी जाती हैं। मरीज के पास इन्हें कहीं बाहर से खरीदने की छूट नहीं होती है, जहां यह सस्ते में मिल सकती हैं। 

एनपीपीए ने बताया है कि निजी अस्पताल अपनी खुद की फार्मेसी के लिए बहुत ज्यादा मात्रा में दवा खरीदते हैं और इन्हें बेचकर मुनाफा कमाते हैं।


यही नहीं निजी अस्पताल दवा कंपनियों पर दबाव डालकर दवा के डिब्बों में ज्यादा दाम छपवाते हैं जो बाजार मूल्य से कहीं ज्यादा होता है। और ज्यादा दाम छापने की शर्त के साथ वे दवा कंपनियों से बड़ी मात्रा में दवा खरीदते हैं।    


5.77 रुपये की सूई 106 में मिलती है!


एनपीपीए की रिपोर्ट में दिए गए कुछ उदाहरण


एनपीपीए के मुताबिक दवा कंपनियों को सामान्य मुनाफा ही होता है। इस खेल में असल फायदा निजी अस्पतालों का होता है। क्योंकि दवा के डिब्बे पर छपे कई गुना दाम का भुगतान तो मरीज की जेब से होता है और अस्पताल मालामाल होते हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल कोई सूई अगर 5.77 रुपये में खरीदती है तो मरीज को वह 106 रुपए में बेचती है। यह सनसनीखेज खुलासे इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाते हैं क्योंकि कुछ दिनों पहले भी निजी अस्पतालों पर इलाज के नाम पर बेतहाशा बिल लेने के आरोप लगे थे।  एनपीपीए के अध्ययन में ऐसे कई उदाहरण दिए गए हैं जिससे पता चलता है कि निजी अस्पताल लोगों की जेब पर डाका डालते हैं। और उनपर लगाम लगाने वाली व्यवस्थाएं चुपचाप तमाशा देखती हैं


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गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में डेंगू मरीज के बिल में प्रति सिरिंज 1200 रुपये से ज्यादा की कीमतें लिखी मिली थीं। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने भी इसकी पुष्टि की है। इसके बाद सर्जिकल आइटम्स पर एक बार फिर सरकार के नियंत्रण की मांग होने लगी है।  जब दवा बाजार में इसकी पड़ताल की गई तो हकीकत चौकाने वाली थी। जिस सिरिंज की थोक में कीमत करीब 3 रुपये है। वह प्राइवेट अस्पताल पहुंचने तक 50 रुपये की हो जाती है।

दवा विक्रेताओं का कहना है कि सिरिंज के कारोबार में सबसे ज्यादा लाभ निजी अस्पतालों को होता है। निजी अस्पताल कम मूल्य में सिरिंज खरीदते हैं, लेकिन मरीजों से एमआरपी पर पैसा वसूलते हैं। बहरहाल, एनपीपीए ने हाल ही में सिरिंज निर्माता कंपनियों के साथ एक बैठक की है। इसमें कीमतें निर्धारण के लिए सभी कंपनियों ने सहमति दे दी है।

 


इस तरह करते हैं कमाई 


जानकारों के अनुसार, 10 एमएल सिरिंज का अस्पताल 21 रुपये तक मूल्य वसूलता है, जबकि थोक में इसकी कीमत 3.25 रुपये है। पांच एमएल की सिरिंज में करीब 600 प्रतिशत की मार्जिन होता है। थोक में पांच एमएल की सिरिंज 1.51 रुपये में मिलती है, जबकि खुदरा में 10.50 रुपये में बिकती है। अस्पताल में इसके 14 रुपये तक लिए जाते हैं। तीन एमएल की सिरिंज थोक में 1.25 रुपये में मिलती है, लेकिन खुदरा में 7.50 रुपये में बिकती है यानी इस पर 500 प्रतिशत की मार्जिन होती है। दो एमएल की सिरिंज थोक में 1.22 रुपये में मिलती है, जबकि खुदरा में यह 6.50 रुपये में बिकती है। अस्पताल में इसका 9.50 रुपये लिया जाता है।


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 अस्पतालों के साथ नर्सिंग होम में बड़े पैमाने पर हो रहा खेल

फार्मूूले में बदलाव कर महंगे दामों में बेंच रहे हैं दवाएं

आठ सौ से ज्यादा दवाएं हैं मूल्य नियंत्रण के दायरे में 


 दवा कंपनी-डॉक्टर गठजोड़ के चलते मरीजों को सस्ती दवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। केंद्र सरकार ने लोगों को सस्ते रेट में दवा उपलब्ध कराने को हृदय रोग, कैंसर, मिर्गी समेत कई बीमारियों की दवाओं को ड्रग प्राइज कंट्रोल आर्डर (डीपीसीओ) में शामिल किया है। शुरूआती दौर में इससे दवा कंपनियों की मनमानी पर अंकुश तो लगा, लेकिन बाद में दवा कंपनियों ने फार्मूले में बदलाव कर नया खेल शुरू कर दिया। इस खेल में डॉक्टरों को भी शामिल किया गया, ताकि मनमाने दामों में दवाएं बेंची जा सके। 

सरकार आम लोगों के लिए दवाइयां सस्ती रखने के लिए 800 से ज्यादा दवाइयों को मूल्य नियंत्रण के दायरे में ला चुकी है। ड्रग प्राइस रेगुलेटर एनपीपीए ने दवाइयों के दाम में 4.8 फीसदी से 23.3 फीसदी तक कमी की है। इसके तहत पैरासिटामॉल, सिफोड्रोक्सिन, सेल्ब्युटामॉल व कैफेजोलिन जैसी एंटी बायोटिक्स को भी मूल्य नियंत्रण के दायरे में शामिल किया गया। इससे काफी हद तक दवा कंपनियों के मनमाने दामों पर दवा बेचने का एकाधिकार टूट गया, लेकिन यह सबकुछ ज्यादा दिन तक नहीं चल सका। दवा कंपनियों ने इस बंदिश से आजाद होने का नया तरीका ढूंढ निकाला। कंपनियों ने डीपीसीओ में शामिल दवाओं के साल्ट के साथ दवा बनाने में ऐसे साल्ट इस्तेमाल करने शुरू कर दिए जो डीपीसीओ के दायरे से बाहर हैं। इस तरह उनकी दवा मूल्य नियंत्रण दायरे से बाहर हो गई। बाजार में एक ही फार्मूले की दवाएं अलग-अलग रेट पर मौजूद हैं। खास बात यह है कि अंजान मरीज भी वहीं दवाएं खरीदते हैं जो डॉक्टर लिखते हैं। दवाओं के लिखने के पीछे बड़े पैमाने पर कमिशन का खेल होता है। इस खेल में सरकारी अस्पतालों के अलावा नर्सिंग होम के डॉक्टर बड़े पैमाने पर शामिल हैं। डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाओं को खरीदने के लिए मरीज के तीमारदार विवश हैं।

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यह हैं दवाएं जिनमें होता है खेल

दवा        सामान्य दाम    फार्मूला बदलने पर बढ़े दाम

पैरासिटामोल    1.00 रुपये         5.00 रुपये

सिफेकज्मि        7.00 रुपये        14.00 रुपये

सेलब्युटामॉल    9.00 रुपये        55.00 रुपये

सेट्राजिन      श  0.75 पैसे        7.00 रुपये

मेट्राजिल        7.00 रुपये        38.00 रुपये

डेक्सा        20.00 रुपये    120 रुपये

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ऐसे होता है खेल

डीपीसीओ में दर्ज दवाओं के दाम सरकार के नियंत्रण में रहते हैं। इन दवाओं के दाम बिना अनुमति नहीं बढ़ाए जा सकते। इन दवाओं को मनमाने दामों पर बेचने के लिए इनके फार्मूले में बदलाव कर नई दवा के तौर पर लांच कर दिया जाता है। सरकार का कॉबिनेशन वाली दवाओं पर नियंत्रण नहीं है। ऐसे में इस खेल को रोकने में सरकार भी नाकाम है। मसलन बुखार के लिए पैरासिटोमॉल की गोली एक रुपये में मिलती है, लेकिन इसमें एसीक्लोफिनेक का साल्ट बढ़ाकर यह गोली पांच रुपये में बेची जा रही है।

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ब्रॉड नेम से ही लिखते हैं दवा

दवा कंपनियों के इस खेल में डॉक्टर भी शामिल हैं। सरकार द्वारा डॉक्टरों को फार्मूले के नाम से दवा लिखने को कहा गया है लेकिन डाक्टर ऐसा न करके ब्रॉडनेम से ही दवा लिखते हैं। दवा विक्रेता मनीष अग्रवाल बताते हैं कि मरीज भी वे ही दवाएं लेने की बात करते हैं जो पर्चे में लिखी है। यदि उन्हें उसी साल्ट की सस्ती दवा देने का प्रयास किया जाता है तो वह लेने से ही इंकार कर देते हैं।

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सरकारी डॉक्टर भी शामिल हैं गठजोड़

सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों को बाहरी दवाएं लिखने पर रोक लगी है। अब जब डाक्टर बाहरी दवाएं नहीं लिख सकते हैं तो उनके पास मेडिकल रिप्रजेंटेटिव का क्या काम। लेकिन जिले के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी के दौरान अक्सर एमआर बैठे देखे जा सकते हैं। कमिशन के लिए एमआर डॉक्टरों को पैकेज का तारगेट भी देते हैं। जैसा लक्ष्य, वैसा कमिशन, गिफ्ट पैक तय होता है। इससे साफ जाहिर होता है कि डॉक्टर बाहरी दवाएं लिख रहे हैं।

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एक दिन में होता है साढ़े छह लाख का कारोबार

जिले में करीब 1300 खुदरा मेडिकल स्टोर हैं। इन स्टारों के कारोबार का आकलन करें तो एक दिन में एक मेडिकल स्टोर पर कम से कम 50 लोग दवा लेते आते हैं। औसतन 500 रुपये की दवा खरीदी गई तो जिले के 1300 मेडिकल स्टोर पर एक दिन में दवा का कारोबार 6,50000 रुपये का होगा।

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सरकार नीति करें स्पष्ट

ड्रग प्राइज कंटोल आर्डर में जीवन रक्षक दवाओं को रखा गया है। इन दवाओं में जरूरत के हिसाब साल्ट मिलाकर कॉबिनेशन वाली दवाएं बेचीं जा रही हैं। इनके फंक्शन भी अलग-अलग होते हैं। सरकार को अपनी नीति स्पष्ट करनी चाहिए तभी डीपीसीओ का फायदा मिल सकता है।

आलोक बंसल, थोक दवा विक्रेता

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सिंगल ड्रग पालिसी अपनाए सरकार

डीपीसीओ में जो दवाएं शामिल की हैं वह आम लोगों के लिए काफी हितकारी हैं, लेकिन विभिन्न बीमारियों के लिए उनमें कुछ साल्ट मिलाकर नए कांबिनेशन बनाए गए हैं ताकि मरीज को कम दाम में पूरा इलाज मिल सके। कांबिनेशन वाली दवाओं पर सरकार को कोई नियंत्रण नहीं है। ऐसे में सिंगल ड्रग पालिसी होनी चाहिए, तभी डीपीसीओ का लाभ मिल सकेगा।

राघवेंद्र नाथ मिश्रा, कैमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन

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बाहरी दवाएं लिखने व एमआर पर है पाबंदी

मैंने अभी करीब एक माह पहले ही यहां चार्ज लिया हैं। जिला अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा बाहरी दवाएं लिखने व मेडिकल रिप्रेंजेटेटिवस के आने पर पूरी तरह से पाबंदी है। 

‌डॉ. रतनपाल सिंह सुमन, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल


दिल्ली की सरकार और मुख्यसचिव का विवाद-रिपोर्ट

आम आदमी पार्टी की सरकार एक बार फिर विवादों में घिर गई है। मुख्य सचिव से मारपीट मामले में अंशु प्रकाश की मेडिकल रिपोर्ट में बड़ा खुलासा हुआ है। मेडिकल रिपोर्ट से उनके साथ मारपीट की पुष्टि होती है। उनके चेहरे पर कट के निशान और सूजन पाई गई है। बता दें कि सोमवार आधी रात को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में सीएम अरविंद केजरीवाल की मौजूदगी में विधायकों पर मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हाथापाई के आरोप में आप विधायक प्रकाश जारवाल और सीएम केजरीवाल के सलाहकार को हिरासत में ले लिया गया है।

बाद में सीएम के सलाहकार वीके जैन को पूछताछ कर छोड़ दिया गया। वहीं आज मारपीट के आरोपी विधायक अमानतुल्लाह खान ने थाने में जाकर सरेंडर कर दिया। उनका कहना है कि वह देश के कानून का सम्मान करते हैं और इसीलिए वह सरेंडर कर रहे हैं। हालांकि वह अपनी बात पर अब भी कायम हैं और कहा कि उन्होंने कुछ नहीं किया है। कहा जा रहा है कि यह जांच केजरीवाल और मनीष सिसोदिया तक पहुंच सकती है।

आम आदमी पार्टी के एक रीट्वीट के अनुसार आज सुबह ही दिल्ली पुलिस ने सीएम अरविंद केजरीवाल के सलाहकार वीके जैन को उनके महारानी बाग स्थित आवास से गिरफ्तार किया और बाद में उन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। हालांकि, सरकार ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। इस मसले को लेकर मंगलवार को दिन भर सियासत तेज रही। मुख्य सचिव की शिकायत पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है।

उन्होंने सीएम आवास पर मीटिंग के बहाने बुलाकर हमला करने का आरोप लगाया है। मुख्य सचिव ने ओखला से आप विधायक अमानतुल्लाह खान व अन्यों पर मारपीट करने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर घर बुलाने, सरकारी काम में बाधा डालने, ड्यूटी के दौरान हमला करने, जान से मारने की धमकी, बंधक बनाने का मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।

इससे नाराज आईएएस एसोसिएशन ने एलजी से शिकायत दर्ज करा दोषी विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उधर, दिल्ली सचिवालय के अधिकारियों और कर्मचारियों ने विरोध में कामकाज ठप कर दिया है। मुख्य सचिव ने कहा कि वह सोमवार रात करीब 12 बजे सिविल लाइंस स्थित मुख्यमंत्री आवास गए। वहां पहले से मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित 10 से 11 विधायक मौजूद थे।

एक विधायक उन पर चिल्लाने लगा और अपशब्द कहे

बैठक में सरकार के तीन साल पूरे होने पर विज्ञापन को लेकर बात शुरू ही हुई थी कि एक विधायक उन पर चिल्लाने लगा और अपशब्द कहे। साथ ही उन्हें एससी एसटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी। अचानक बगल में बैठे विधायक अमानतुल्लाह खां ने पहले उनके सिर पर मारा और धक्कामुक्की करने लगे। इसमें उनका चश्मा भी नीचे गिर गया।

उधर, सरकार ने इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया है। बैठक में मौजूद विधायक प्रकाश जारवाल व अजय दत्त का कहना है कि वह मुख्य सचिव से 2.50 लाख लोगों को राशन नहीं मिलने को लेकर सवाल पूछ रहे थे।

मुख्य सचिव ने जवाब देन से मना करते हुए जातिसूचक अपशब्दों का इस्तेमाल किया। साथ ही कहा कि उनके बॉस एलजी हैं। विधायक के प्रति उनकी जवाबदेही नहीं है। प्रकाश जारवाल व अजयदत्त ने पुलिस आयुक्त समेत एससी एसटी आयोग में भी शिकायत दर्ज कराई है।

उपमुख्यमंत्री बोले, आरोप बेबुनियाद
मुख्य सचिव के लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं। कुछ लोग सरकार के तीन साल के कामकाज को खराब करना चाहते हैं। इसलिए सचिवालय का माहौल भी खराब कर दिया है। मारपीट का आरोप पूरी तरह से गलत है। विधायकों ने राशन नहीं दिए जाने पर मुख्य सचिव से जवाब मांगा था। उसे लेकर बातचीत में थोड़ी गरमागरमी हुई थी, लेकिन मारपीट का आरोप निराधार है।-मनीष सिसोदिया, उपमुख्यमंत्री

सचिवालय में पर्यावरण मंत्री के साथ मारपीट का आरोप


हड़ताल पर गए अधिकारियों व कर्मचारियों पर पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन के साथ मारपीट का आरोप लगा है। दिल्ली सचिवालय में दोपहर साढ़े 12 बजे अधिकारी कामकाज ठप कर प्रथम तल पर बैठे थे।

उसी समय सचिवालय से बाहर जा रहे पर्यावरण मंत्री व सरकार के खिलाफ अधिकारियों और कर्मचारियों ने नारेबाजी की। मंत्री के साथ धक्कामुक्की न हो, इसे रोकने गए उनके सहयोगी हिमांशु के साथ मारपीट की गई। बीच बचाव करने गए पर्यावरण मंत्री के साथ भी मारपीट की गई।

राजनीतिक अखाड़ा बना सचिवालय, सरकार का कामकाज ठप
मारपीट की खबर आने के बाद दिल्ली सचिवालय राजनीतिक अखाड़ा बन गया । दिनभर चले शिकायतों के दौर के बीच मंगलवार को सरकार का कामकाज पूरी तरह से ठप रहा। दिल्ली सचिवालय में दास कैडर के अधिकारी मुख्य सचिव के समर्थन में हड़ताल पर चले गए।


आईएएस एसोसिएशन के आरोप
 . मुख्यमंत्री की उपस्थिति में सीएम आवास पर आप विधायकों ने पिटाई की।
. विज्ञापन को लेकर बैठक बुलाई गई थी। सरकार उसे रोके जाने का कारण जानना चाहती थी।
. हमने किसी भी तरह का हड़ताल नहीं किया है। सिर्फ विरोध में काली पट्टी बांधकर काम करेंगे।

सरकार का जवाब
. मुख्यमंत्री आवास पर बैठक हुई, मगर मारपीट का आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद।
. बैठक विज्ञापन को लेकर नहीं, बल्कि दिल्ली में ढाई लाख लोगों के राशन नहीं मिलने पर बुलाई थी।
. साजिशन सरकार के कामकाज को खराब करने के लिए सचिवालय में अराजकता का माहौल बनाया जा रहा है।
. हमारे नेता पर्यावरण मंत्री इमरान हुसैन के साथ मारपीट की गई। डीडीसी उपाध्यक्ष के साथ भी धक्कामुक्की हुई।


श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में 26-2-2018 से बनने लगेगें पासपोर्ट

* करणीदानसिंह राजपूत *

श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले के नागरिकों को पासपोर्ट के लिये सीकर, बीकानेर व जयपुर नहीं जाना पडे़गा। पासपोर्ट बनाने की सुविधा इसी माह से श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ में शुरू हो जायेगी। 

पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री एवं सांसद श्री निहालचंद ने बताया कि भारत सरकार विदेश मंत्रालय ने यहां के नागरिकों को यह सुविधा प्रदान कर दी है तथा 26 फरवरी 2018 को हनुमानगढ़ व गंगानगर में पासपोर्ट बनाने की प्रक्रिया शुरू हो जायेगी।

सांसद श्री निहालचंद 26 फरवरी को प्रातः 11 बजे मुख्य डाकघर हनुमानगढ़ में तथा दोपहर बाद  3 बजे मुख्य डाकघर श्रीगंगानगर में पासपोर्ट कार्यालय की शुरूआत करेंगे।

श्री निहालचंद ने बताया कि श्रीगंगानगर व हनुमानगढ़ जिले के नागरिकों को अब अधिक  समय व पैसा खर्च नहीं  करना पडे़गा। भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट की सुविधा यहीं  प्रदान कर दी है। इन कार्यालयों के प्रारम्भ होने से आमजन को लाभ मिलेगा।






Tuesday, February 20, 2018

सांसदों के वेतन, भत्ते, पेंशन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त,


कहा- स्थायी तंत्र पर हफ्तेभर में दें जवाब-  

- लोक प्रहरी संस्था की याचिका -


केंद्र सरकार को इसके लिए एक सप्ताह का समय देते हुए न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि इस संबंध में केंद्र द्वारा 12 सितम्बर 2017 को दाखिल शपथपत्र से सरकार का पक्ष स्पष्ट नहीं होता।

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सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार 20-2-2018 को सरकार को मौजूदा सांसदों के वेतन, भत्ते के लिए स्थायी तंत्र गठित करने को लेकर केंद्र सरकार को अपना पक्ष स्पष्ट करने का ‘अंतिम अवसर’ दिया है। 

केंद्र सरकार को इसके लिए एक सप्ताह का समय देते हुए न्यायमूर्ति जे. चेलामेश्वर और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल ने कहा कि इस संबंध में केंद्र द्वारा 12 सितम्बर 2017 को दाखिल शपथपत्र से सरकार का पक्ष स्पष्ट नहीं होता है। 

केंद्र सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अजित सिन्हा ने पीठ से कहा, “यह मामला केंद्र सरकार के पास विचाराधीन है।” न्यायमूर्ति चेलामेश्वर ने इस पर सिंह को कहा, “भारत सरकार की नीति गतिशील (डायनेमिक) है। हालांकि आप इसे प्रत्येक दिन बदल नहीं सकते।”

न्यायमूर्ति कौल ने सिन्हा से कहा, “आपने अपना पक्ष स्पष्ट नहीं किया है। आपकी ओर से सितंबर 2017 में पेश किए गए शपथपत्र में स्थायी तंत्र स्पष्ट नहीं है। आप इसके लिए क्या कर रहे हैं।” इस पर सिन्हा ने केंद्र सरकार की ओर से इस संबंध में स्पष्टीकरण देने के लिए न्यायालय से अंतिम बार एक सप्ताह का समय मांगा। न्यायमूर्ति कौल ने कहा, “इस पर सरकार का क्या विचार है? आप इसे चाहते हैं या नहीं चाहते हैं? आपके काउंटर शपथपत्र (जवाब) से कुछ भी पता नहीं चलता है।”

इस मुद्दे पर केंद्र सरकार के ढुलमुल रवए पर नाराजगी जताते हुए न्यायालय ने सिन्हा से कहा, “आपके पास हो सकता है अतिम शब्द न हो, लेकिन आपके पक्ष को स्पष्ट करने के लिए अब आपके पास अंतिम अवसर है।” न्यायालय इस मामले में एक एनजीओ लोक प्रहरी की उस याचिका पर सुनवाई कर रहा है जिसमें सांसदों के वेतन व भत्ते को तय करने के लिए एक स्थायी तंत्र गठित करने की मांग की गई है। याचिका में कहा गया है कि सांसद इस पर खुद निर्णय नहीं कर सकते। याचिका में यह भी मांग की गई है कि पूर्व सांसदों को पेंशन और अन्य सुविधाएं नहीं दी जानी चाहिए क्योंकि वे लोगों का प्रतिनिधित्व करने का अधिकार खो चुके होते हैं। मामले की अगली सुनवाई 5 मार्च को होगी।




आरपीएस महिला अधिकारी के घर आगे सगे भाई ने आग लगाई


सूरतगढ़ 20 फरवरी 2018.

शिव प्रकाश ओझा ने आज अपनी सगी बहन पुलिस उपाधीक्षक ममता सारस्वत के निजी आवास के आगे खुद को आग लगा ली। उनकी ईलाज के दौरान शाम को बीकानेर मेंं मृत्यु हो गई।

  घटना के बाद शिव प्रकाश ओझा को गंभीर हालत में चिकित्सालय ले जाया गया जहां से बीकानेर भेजा गया। बताया जाता है कि शिव प्रकाश 70- 80 प्रतिशत  के करीब झुलस गया और बयान देने की स्थिति में नहीं था।

यह घटना सुबह करीब 11:15 के आसपास की बताई जाती है।

घटना का कारण कोई पारिवारिक असंतोष रहा है जिसके कारण उसने अपनी बहन के घर के आगे जाकर आग लगाकर मरने का प्रयास किया।

शिवप्रकाश की बहन ममता सारस्वत पहले महिला बाल विकास अधिकारी के पद पर सूरतगढ़ व अन्य स्थानों पर रह चुकी हैं। राजस्थान प्रशासनिक सेवाओं की परीक्षा में सुधार लाने पर इस बार वे पुलिस उप अधीक्षक रैंक पर पहुंची। प्रशिक्षण के उपरांत अभी बीकानेर पुलिस रेंज में उन्हें दिया गया है और पद स्थापन की प्रतीक्षा में हैं। ममता सारस्वत स्वभाव में शांति स्वभाव की उच्च कोटि की मानी जाती है।

शिव प्रकाश ओझा पूर्व विधायक गंगाजल मील के खास पीए रह चुके हैं। काफी समय तक उनके साथ रहे।

 चुनाव से लेकर और विधायक बनने के बाद तक। उसके बाद ठेकेदारी करने लगे।

 शिव प्रकाश ओझा के पिता वेद प्रकाश ओझा नगरपालिका सूरतगढ़ में नाकेदार के पद से सेवानिवृत्त जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

 शिव प्रकाश ओझा वर्तमान में सूरतगढ़ के वार्ड नंबर 19 में पिता के मकान में रह रहे हैं।

शिव प्रकाश ओझा की बहन ममता सारस्वत अपने अलग हाउसिंग बोर्ड के मकान में निवास कर रही हैं।

 शिव प्रकाश ओझा की एक बड़ी बहन अनूपगढ़ में ब्याही हुई है जिसकी पुत्री की शादी अभी  दो दिन पहले ही हुई है। शिव प्रकाश ओझा उस शादी में शामिल नहीं हुआ।

चर्चा है कि कोई कारण ऐसा हुआ है जिसके कारण उसने आत्महत्या करने की कोशिश की है। लेकिन उसने इस कार्य के लिए यही स्थान क्यों चुना?

 शिव प्रकाश ओझा के बयान देने की स्थिति में होने के बाद ही कारण का पता चल सकेगा।

Monday, February 19, 2018

बलात्कार की कोशिश, गिरफ्तार हुए बीजेपी सरकार के मंत्री

एसिड अटैक पीड़िता से बलात्कार की कोशिश में मध्य प्रदेश भाजपा सरकार में दर्जा राज्य मंत्री राजेंद्र नामदेव गिरफ्तार किए गए हैं। राजधानी भोपाल के हनुमानगंज थाने की पुलिस ने पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस से उन्हें गिरफ्तार किया। इससे पहले नामदेव को मध्य प्रदेश राज्य सिलाई कला मंडल के उपाध्यक्ष पद से भी हटाया जा चुका है। उधर, मंत्री ने खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाया है।

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नई दिल्ली | February 19, 2018.

एसिड अटैक पीड़िता से बलात्कार की कोशिश में मध्य प्रदेश भाजपा सरकार में दर्जा राज्य मंत्री राजेंद्र नामदेव गिरफ्तार किए गए हैं। राजधानी भोपाल के हनुमानगंज थाने की पुलिस ने पीडब्ल्यूडी के गेस्ट हाउस से उन्हें गिरफ्तार किया। इससे पहले नामदेव को मध्य प्रदेश राज्य सिलाई कला मंडल के उपाध्यक्ष पद से भी हटाया जा चुका है। उधर, मंत्री ने खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाया है। एसिड अटैक पीड़ित लड़की को हवस का शिकार बनाने की कोशिश का मामला सामने आने पर मंत्री की सोशल मीडिया पर खूब भद्द पिट रही है। उधर, विपक्षी दल बीजेपी सरकार पर जमकर हमला बोल रहे हैं।

पुलिस के मुताबिक, 18 जून 2016 को सिवनी निवासी युवती पर एसिड अटैक हुआ था। न्याय दिलाने की बात कहकर मंत्री युवती के करीब आए और उसे नौकरी दिलाने का झांसा दिया। करीब चार महीने पहले 11 नवंबर 2017 को उन्होंने राजदूत होटल के कमरा नंबर 106 में उसे बुलाया। आरोप है कि मंत्री ने पहले दिन अश्लील हरकतें की। फिर अगले दिन जबरन कपड़े उतारने लगे। इस दौरान उन्होंने मोबाइल से अश्लील तस्वीरें भी उतारी। विरोध करने पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी। डर के मारे युवती चार महीने तक चुप रही। रविवार (18 फरवरी) को उसने हनुमानगंज थाने पहुंचकर राज्य मंत्री नामदेव के खिलाफ केस दर्ज कराया।

उधर, मंत्री का कहना है कि विरोधियों के भड़काने पर युवती उनके खिलाफ झूठे आरोप लगा रही है। वे पुलिस और कोर्ट के सामने अपनी बेगुनाही के सबूत पेश करेंगे। केस दर्ज होने के बाद मध्य प्रदेश पुलिस हरकत में आई और न्यू मार्केट स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस से मंत्री नामदेव को गिरफ्तार कर लिया। एएसपी राजेश सिंह भदौरिया के मुताबिक, युवती मूलतः सिवनी की रहने वाली है। 18 जून 2016 को उस पर हबीबगंज थाना क्षेत्र में एसिड अटैक हुआ था। राजेंद्र नामदेव ने इसी के बाद हमदर्दी दिखाई और मदद के बहाने युवती के करीब आ गए। इस दौरान नामदेव ने पीड़िता को नौकरी दिलाने का झांसा दिया था।

(जनसत्ता ओनलाइन 18-2-2018 से साभार,)


 


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