बुधवार, 21 अक्तूबर 2020

श्रीगंगानगर-दिल्ली गाड़ी को परिवर्तित रुट व किसान एक्स को सिरसा से चलाया जाये- भीम शर्मा

 



* करणीदानसिंह राजपूत *


उत्तर पश्चिम रेलवे अधिकारियों को भीम शर्मा ने दिया सुझाव

श्रीगंगानगर, 21 अक्टूबर 2020.

किसानों के आंदोलन के चलते हर रोज पंजाब से गुजरने वाली ट्रेनों को रद्द करने की बजाय इन्हें परिवर्तित रुट से चलने का सुझाव दिया गया हैं। जेडआरयूसीसी पूर्व सदस्य श्री भीम शर्मा ने मण्डल रेल प्रबंधक बीकानेर श्री संजय कुमार श्री वास्तव वरिष्ठ वाणिज्य मण्डल प्रबन्धक श्री जितेंद्र मीणा व उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य यात्राी परिचालन प्रबन्धक श्री तरूण जैन को अपनी ओर से यात्रियों की सुविधा के सम्बंध में सुझाव भेजा हैं।

 श्री भीम शर्मा ने बताया कि पंजाब की परेशानी के चलते श्रीगंगानगर-दिल्ली स्पेशल ट्रेन को रद्द करने की बजाय इसे वाया हनुमानगढ़, सादुलपुर, रेवाड़ी दिल्ली तक संचालित किया जा सकता हैं। इसी ट्रैन के रैक लिंक की किसान एक्सप्रेस को सिरसा से दिल्ली तक संचालित किया जाना चाहिये। प्रस्ताव में श्रीगंगानगर-तिलकब्रिज व श्रीगंगानगर-नांदेड ट्रैन के संचालन को शुरू करने की भी मांग की गई हैं।

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शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आयोडीन जरूरी- - विश्व आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस पर कार्यशाला




* करणीदानसिंह राजपूत *

हनुमानगढ़ 21 अक्टूबर 2020.


वैश्विक आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस हर वर्ष  21 अक्टूबर को सम्पूर्ण विश्व में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य आयोडीन के पर्याप्त उपयोग के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना और आयोडीन की कमी के परिणामों पर प्रकाश डालना है। 

इस संबंध में नमक के थोक व खुदरा व्यापारियों सहित अन्य दुकानदारों को आयोडीन के बारे में जानकारी दी गई। हनुमानगढ़ टाउन व जंक्शन में आयोजित इस कार्यशाला में विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी तथा दुकानदार उपस्थित थे। 

जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी जीतसिंह यादव ने जानकारी दी कि आयोडीन हमारी सेहत के लिए एक बेहद जरूरी माइक्रोन्यूट्रिएंट है। शरीर में थायरॉइड फंक्शन को सामान्य रखने तथा शारीरिक और मानसिक विकास के लिए यह जरूरी तत्व है। इसकी कमी से व्यक्ति घेंघा रोग से पीड़ित हो सकता है। दुनिया भर में लोगों को शरीर में आयोडीन की जरूरत और इसकी कमी से होने वाली बीमारियों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व आयोडीन अल्पता विकार निवारण दिवस मनाया जाता है। हमारे शरीर को आयोडीन मुख्यतः हमारे भोजन में शामिल नमक से मिलता है। शरीर को एक निर्धारित मात्रा में ही प्रतिदिन आयोडीन की जरूरत होती है। इसकी ज्यादा मात्रा नुकसानदेह होती है। 

वरिष्ठ स्वास्थ्य कार्यकर्ता नवाबदीन भाटी ने जानकारी दी कि आयोडीन की कमी से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों जैसे घेंघा रोग, बच्चों में मानसिक मंदता, अपंगता, गूंगापन, बहरापन, बार-बार गर्भपात तथा गर्भ में शिशु की मृत्यु की रोकथाम, नियंत्रण एवं निवारण के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

 आईईसी गतिविधियों के जरिए लोगों को इस बारे में जागरूक भी किया जा रहा है। गर्भवती महिला में आयोडीन की कमी होने से बच्चे के मानसिक और शारीरिक विकास पर असर पड़ता है। वहीं बचपन में पूरा पोषण नहीं मिलने के कारण भी बच्चे कई तरह की बीमारियों से ग्रस्त हो जाते हैं। गर्भावस्था में आयोडीन की कमी बौनापन, मृत शिशु के जन्म या गर्भपात का कारण हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान आयोडीन की थोड़ी कमी भी बच्चे की सीखने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है।

 नवाबदीन भाटी ने उपस्थित नागरिकों को एमबीआई किट से नमक में आयोडीन की मात्रा को जांच कर दिखाया गया।

 कार्यशाला में अशोक व्यास, विनोद कुमार, नरेश कुमार धूड़िया, लालबहादुर सिंगला, खट्टूराम सिंधी, सुशनपाल अग्रवाल सहित अनेक दुकानदार उपस्थित थे।००

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रेलवे पुल पर कचरा और खाली गुटखा पाउच क्यों?

 

*  करणी दान सिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 21 अक्टूबर 2020.

कोरोना लोक डाउन के बाद अभी सुपर फास्ट श्री गंगानगर कोटा भीलवाड़ा चल रही है। यात्री बहुत कम होते हैं। फुट ओवरब्रिज का उपयोग करने वाले तो कुछ।

रेलवे स्टेशन का ओवरब्रिज एकदम साफ सुथरा रहना चाहिए मगर उस पर मूंगफली केले आदि के छिलके जर्दे के गुटके के पाउच खाली पड़े हुए बुरे लगते हैं। पुल पर कचरा पात्र लगे हुए हैं लेकिन जानते हुए भी लोग कचरा फैलाते हैं। रेलवे प्लेटफार्म आदि पर कचरा गंदगी फैलाना कानूनी अपराध है।


सूरतगढ़ का रेलवे स्टेशन हिंदुस्तान भर के स्टेशनों में सफाई व्यवस्था पर छठे क्रम पर विजित घोषित हुआ था। 

रेलवे स्टेशन के फुट ओवर ब्रिज पर लोग गंदगी कचरा फैलाते हैं उन पर कार्यवाही होने पर ही कोई सुधार हो सकता है।००




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मंगलवार, 20 अक्तूबर 2020

सूरतगढ़ में रजनी मोदी का सम्मान किया गया

 


* करणीदानसिंह राजपूत *

श्रीगंगानगर, 20 अक्टूबर 2020.

अग्रसेन जयंती के अवसर पर सूरतगढ़ अग्रवाल समिति द्वारा श्रीमती रजनी मोदी को भारतीय वैश्य महासभा का प्रदेश सचिव एवं उतर पश्चिम रेलवे उपभोक्ता सलाहकार समिति बीकानेर मण्डल द्वारा सदस्य बनाये जाने पर अभिनंदन पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।

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रेलवे ने वरिष्ठ नागरिक सहित 30 श्रेणियों में मिलने वाली किराये पर छूट बंद करदी

 



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कोरोना लाक डाउन से  हुए नुकसान को पूरा करने के लिए रेलवे ने किराए में दी जाने वाली रियायतें चुपचाप खत्म कर दी हैं। इनमें वरिष्ठ नागरिकों के साथ ही कुल तीस श्रेणियों में मिलने वाली रियायतें शामिल हैं।
लॉकडाउन के दौरान सभी ट्रेनों का संचालन पूरी तरह से ठप था। संचालन ठप होने से हुए नुकसान को पूरा करने के लिए रेलवे ने किराए में दी जाने वाली रियायतें खत्म कर दी हैं। जी हैं, वरिष्ठ नागरिकों के साथ ही कुल तीस श्रेणियों में मिलने वाली रियायत अब बीती बात हो गई है।हालांकि स्पेशल ट्रेनों में गंभीर मरीजों और दिव्यांगजनों को छूट जारी रेखने का फैसला किया गया।
स्पेशल ट्रेनों में रेलकर्मियों, गंभीर बीमारियों के मरीजों व दिव्यांगजनों को छोड़ अन्य सभी श्रेणियों के लिए टिकट में मिलने वाली छूट को बंद कर दिया था।

रेल मंत्रालय ने सीनियर सिटीजंस, मान्यता प्राप्त पत्रकारों, युवाओं, किसानों, दूधियों, सेंट जॉन एम्बुलेंस ब्रिगेड, भारत सेवा दल, रिसर्च स्कॉलर्स, पदक विजेता शिक्षकों, सर्वोदय समाज, स्काउट-गाइड, वॉर विडो, आर्टिस्ट व खिलाड़ियों सहित 30 से ज्यादा कैटेगरी के लोगों को टिकटों पर मिलने वाली छूट फिलहाल बंद कर दी है।

3 साल में छूट पर ‌~7418 करोड़ का खर्च
रेलवे इस समय 50 कैटेगरी के लोगों को किराए में छूट देता है। इससे बड़ी संख्या में मरीजों, दिव्यांगों को आवागमन में काफी सहूलियतें होती है।
भारत सरकार के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में बीते वर्षों में रियायती टिकटों पर 7417.44 करोड़ रुपये के खर्च पर सवाल उठे थे। इसके बाद से ही रेलवे रियायती टिकटों पर कैंची चलाने की कोशिश कर रहा था।
कोरोना वायरस से बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए किए गए लॉकडाउन से मौका मिल गया। इसके बाद उसने कई कैटेगरीज की रियायतें फिलहाल बंद कर दी हैं। म ई में जब श्रमिक स्पेशल गाड़ियां शुरु की तब से किराए में बंद कर दी गई।००

सोमवार, 19 अक्तूबर 2020

मेरा 76 वें वर्ष में एवं पत्रकारिता का 55 वें वर्ष में प्रवेश- करणीदानसिंह राजपूत

 



माँ हीरा और पिता रतनसिंहजी की सीख तूं चलते जाना निर्भय होकर-पीड़ितों की आवाज बन कर:^
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पत्रकारिता एवं लेखन के वर्षों के संघर्ष और आनन्ददायी अनुभवों व महान लेखकों पत्रकारों की रचनाओं को पढ़ते और उनसे मिलते हुए मेरे जीवन के 75 वर्ष पूर्ण हुए एवं 19 अक्टूबर 2020 को 76 वें वर्ष में प्रवेश की सुखद अनुभूति।
सीमान्त क्षेत्र का छोटा सा गांव जो अब अच्छा कस्बा बन गया है अनूपगढ़ जिसमें मेरा जन्म हुआ। माता पिता हीरा रतन ने और परिवार जनों ने वह दिया जिसके लिए कह सकता हूं कि मेरी माँ बहुत समझदार थी और पिता ने संषर्घ पथ पर चलने की सीख दी।
मेरा पहला लेख 'जल - जीवन और  स्वास्थ्य  का दाता' साप्ताहिक ज्वाला जयपुर में 15 जुलाई 1965 को प्रकाशित हुआ। 
सन् 1965 में दैनिक वीर अर्जुन नई दिल्ली में खूब छपा और सरिता ग्रुप जो बड़ा ग्रुप आज भी है उसमें छपने का गौरव मिला।
हिन्दी की अनेक पत्रिकाओं में छपने का इतिहास बना।
धर्मयुग और साप्ताहिक हिन्दुस्तान में छपना गौरव समझा जाता था। दोनों में भी कई बार छपा।
छात्र जीवन में वाचनालय में दिनमान पढ़ता था तब सोचा करता था कि इसके लेखक क्या खाते हैं कि इतना लिखते हैं? वह दिन भी आए जब दिनमान में भी मेरी रिपोर्टें खूब छपी।

सन् 1974 में प्राणघातक हमला हुआ। राजस्थान की विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव 20 विधायकों के हस्ताक्षरों से पेश हुआ। 48 विधायक बोले और फिर संपूर्ण सदन ही खड़ा हो गया था। मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी को खड़े होकर सदन को शांत करना पड़ा था। राजस्थान विधानसभा की प्रतिदिन की कार्यवाही उन दिनों छपती थी। मेरे पास एक दिन की कार्यवाही प्रति काम रोको प्रस्ताव की पड़ी है। सात दिनों तक यह हंगामा किसी न किसी रूप में होता रहा था। बीबीसी,रेडियो मास्को, वायस ऑफ अमेरिका सहित अनेक रेडियो ने दुनिया भर में वह घटना प्रसारित की। देश के करीब करीब हर हिन्दी अग्रेजी अखबार में समाचार और संपादकीय छपे। काम रोको(कट मोशन) वाले दिन कि छपी पुस्तक मेरे रिकॉर्ड में है। सभी दिनों की पुस्तकें स्व.केदारनाथ शर्मा के गृहमंत्री काल 1977-79 में उनकी लायब्रेरी से लाया था। वे भी मेरे पक्ष में बोलने वालों में थे।

आरएसएस का पांचजन्य,वामपंथी विचारधारा और जवाहर लाल नेहरू के मित्र आर.के.करंजिया का ब्लिट्ज,कांग्रेसी टच का करंट और समाजवादी विचार धारा के जॉर्ज फरनान्डीज के प्रतिपक्ष में (1974-75) में खूब छपा। प्रतिपक्ष साप्ताहिक था जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नींद हराम करके रखदी थी और बाद में तो इस पर आपातकाल में प्रतिबंध लग गया था।

 आपातकाल अत्याचार का काल था जिसमें मेरा साप्ताहिक " भारत जन "भी सरकारी कोपभाजन का शिकार बना। पहले सेंसर लगाया गया। सरकार की अनुमति के बिना कोई न्यूज छप नहीं सकती थी। विज्ञापन रोक दिए गए। अखबार की फाइल पेश करने के लिए मुझे गंगानगर बुलाया गया और  30 जुलाई 1975 को वहां गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप लगाया गया कि पब्लिक पार्क में इंदिरा गांधी के विरोध में लोगों को भड़का रहा था। एक वर्ष की सजा भी सुनाई गई। सवा चार माह तक जेल मे बिताए और उसके बाद एक संदेश बाहर कार्य करने का मिलने पर 3 दिसम्बर 1975 को बाहर आया। आपातकाल में बहुत कुछ भोगा। मेरी अनुपस्थिति में छोटी बहन,पिता और नानी को क्षय रोग ने ग्रस लिया। इलाज तो हुआ वे ठीक भी हुए लेकिन वह काल बड़ा संघर्षपूर्ण रहा। परिवार ने कितनी ही पीड़ाएं दुख दर्द भोगे मगर वह अनुभव पत्रकारिता व राजपूती शान के अनुरूप और देशभक्ति से पूर्ण रहे जो जीवन की श्रेष्ठ पूंजी हैं।
 मैं सरकारी पीडब्ल्यूडी की नौकरी में था तब लेख कहानियां आदि बहुत छपते थे लेकिन गरीबों व पिछड़े ग्रामों आदि पर लिखने की एक ललक थी कि दैनिक पत्रों में लिखा जाए तब 1969 में पक्की नौकरी छोड़ कर लेखन के साथ पत्रकारिता में प्रवेश किया। 
 अखबारों में लिखता छपता हुआ सन 1972 में राजस्थान पत्रिका से जुड़ा और 15 मई 2009 तक के 37 साल का यह सुखद संपर्क रहा।

राजस्थान पत्रिका का एक महत्वपूर्ण स्तंभ 'कड़वा मीठा सच्च' था। इस स्तंभ में लेखन में घग्घर झीलों के रिसाव पर सन् 1990 में लेखन पर सन् 1991 में राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार मिला। इंदिरागांधी नहर पर 12 श्रंखलाएं लिखी जो सन् 1991 में छपी तथा दूसरी बार 1992 में पुन: राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ। राजस्थान की शिक्षा प्रणाली पर व्यापक अध्ययन कर दो श्रंखलाओं में सन् 1993 में प्रकाशित लेख पर तीसरी बार राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार 1994 में प्राप्त हुआ। इसके बाद सन 1996 में राजस्थान की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पद्धति पर व्यापक अध्ययन कर 4 श्रंखलाएं  लिखी। इस पर सन् 1997 में राज्य स्तरीय दूसरा पुरस्कार मिला।
राजस्थान पत्रिका के संस्थाथापक प्रसिद्ध पत्रकार श्रद्धेय कर्पूरचंद कुलिश का मेरे पर वरद हस्त रहा और उन्होंने जोधपुर में पत्रकारों के बीच में कहा कि मैं तुम्हारे हर लेख को पढ़ता हूं। यह एक महान गौरववाली बात थी। गुलाब कोठारी और मिलाप कोठारी एक घनिष्ठ मित्र के रूप में आते मिलते और अनेक विषयों पर हमारी  चर्चाएं होती। माननीय गुलाब जी सुझाव लेते और वे पत्रिका में लागू भी होते। गुलाब कोठारी ने श्रीगंगानगर में सर्वश्रेष्ठ संवाददाता के रूप में सम्मानित किया तब कई मिनट तक एकदूजे से गले मिले खड़े रहे। आज भी पत्रिका परिवार के साथ घनिष्ठ संबंध हैं।


राजस्थान पत्रिका के प्रधानसंपादक गुलाब कोठारी सर्व श्रेष्ठ पत्रकारिता पर करणीदानसिंह राजपूत को सम्मानित करते हुए। बीच में नजर आ रहे तत्कालीन शाखा प्रबंधक अवधेश जैन और पास में उपस्थित तत्कालीन शाखा प्रभारी संपादक हरिओम शर्मा। दिनांक 16-4-2004.

वर्ष 1997 में विश्व प्रसिद्ध शिक्षा संस्थान ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया के बहादुरसिंह ट्रस्ट की ओर से पत्रकारिता  में सम्मान व पुरस्कार प्रदान किया गया। 
बीकानेर संभाग का "राजस्थान गौरव पत्रकारिता सम्मान 2019" बीकानेर के रवीन्द्र मंच पर 4 अगस्त 2019 को प्रो.ललित किशोर चतुर्वेदी स्मृति संस्थान जयपुर की ओर से प्रदान किया गया।
    रामनाथ गोयनका के इंडियन एक्सप्रेस का विस्तार जब जनसत्ता दैनिक के रूप में हुआ तब जनसत्ता दिल्ली में खूब छपा। जब चंडीगढ़ से भी छपने लगा तब ओमप्रकाश थानवी के कार्यकाल में चंडीगढ़ में भी मैं खूब छपा। साप्ताहिक हिन्दी एक्सप्रेस बम्बई में भी लेख कई बार छपे।
राजस्थान की संस्कृति,सीमान्त क्षेत्र में घुसपैठ,तस्कर,आतंकवाद पर भी खूब लिखा गया। पंजाब के आतंकवाद पर टाइम्स ऑफ इंडिया बम्बई ने लिखने के लिए कहा तब कोई तैयार नहीं हुआ। वह सामग्री वहां से छपने वाली पत्रिका धर्मयुग में छपनी थी। मैंने संदेश दिया और मेरा लेख सन् 1984 में दो पृष्ठ में छपा। धर्मयुग में लेख छपना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। धर्मयुग में बाद में कई लेख प्रकाशित हुए। मेरे लेख और कहानियां बहुत छपी।

आकाशवाणी सूरतगढ़ से वार्ताएं कहानियां कविताएं रूपक आदि बहुत प्रसारित हुई हैं। रूपक राजस्थान के सभी केंद्रों से एक साथ प्रसारित हुए।
इंदिरागांधी नहर पर दूरदर्शन ने एक रूपक बनाया जिसमें कई मिनट तक मेरा साक्षात्कार रहा। वह साक्षात्कार मेरे इंदिरागांधी नहर पर लेखन के अनुभवों के कारण लिया गया। दूरदर्शन के दिग्गज प्रसारण अधिकारी के.के.बोहरा के निर्देशन में वह साक्षात्कार हुआ व राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारण हुआ।

मेरा लेखन कानून नियम के लिए सच्च के प्रयास में रहा। कई बार ऐसा लेखन अप्रिय भी महसूस होता है लेकिन जिन लाखों लोगों के लिए लिखा जाता है,उनके लिए आगे बढऩे का कदम होता है।
राजनीति,राजनेताओं व राजनैतिक दलों पर और भ्रष्टाचार के विरुद्ध लिखना लोगों को सुहाता है वहींं अप्रिय भी लगता है। साधारणतया ऐसे लेखन से पत्रकार बचना चाहते हैं, लेकिन मैं ऐसे लेख लिखना अच्छा समझता रहा हूं,क्योंकि समाज व लोग सतर्क तो होते ही हैं।
मेरे परिवार जन,मित्रगण और कानून ज्ञाता जो साथ रहे हैं वे भी इस यात्रा में सहयोगी हैं। 
मेरे लेखन में माता पिता की सीख रही है इसलिए उनका संयुक्त छायाचित्र यहां पर दे रहा हूं।


मैंने मेरे पूर्व के लेखों में भी लिखा है कि लिखने बोलने की यह शक्ति ईश्वर ही प्रदान करता है और वह परम आत्मा जब तक चाहेगा यह कार्य लेखन और पत्रकारिता चलता रहेगा और लोगों का साथ भी रहेगा।
पवित्र स्थानों, तीर्थ स्थलों, मंदिरों और शिक्षा संस्थाओं में सच्च लिखने की कोशिश करता रहूं का आशीर्वाद ही मांगा है। 

मेरी ब्लॉग वेब साईट   www.karnipressindia.com 
आज अत्यन्त लोक प्रिय साईट है जो देश और विदेश में प्रतिदिन हजारों लोग देखते हैं।
दिनांक 19-10-2020
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करणीदानसिंह राजपूत,
राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क सचिवालय से
अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़ / राजस्थान/ भारत।
91 94143 81356.
मेरा ई मेल पता.   karnidansinghrajput@gmail.com
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रविवार, 18 अक्तूबर 2020

खाद्य सुरक्षा योजना में हेराफेरी करने वाले अभी और पकड़े जाएंगे- झूठे शपथपत्रों से लाभ.


👌 करणीदानसिंह राजपूत *

अनेक पार्षदों के और नेताओं के सहयोग से फर्जीवाड़ा करके खाद्य सुरक्षा योजना में हजारों लोगों ने खाद्य प्राप्त कर सरकार को हर महीने लाखों रुपए का चूना लगा दिया सूरतगढ़ नगर पालिका क्षेत्र में  यह हेरा फेरी पूरी तरह से नहीं पकड़ी गई है।
अभी केवल सरकारी नौकरियों में लगे हुए जिन लोगों के नाम से खाद्य सुरक्षा में सस्ता अनाज प्राप्त किया गया था उन परिवारों से वसूली की जा रही है।
परिवारों के लोग अभी जांच पकड़ से बचे हैं जो कुछ सालों से बाहर जयपुर जोधपुर आदि शहरों मे दिल्ली, पंजाब व अन्य राज्यों में सूरतगढ़ गंगानगर आदि से बाहर रह रहे हैं और अच्छा खासा पैसा कमा रहे हैं। प्राइवेट कंपनियों आदि में नौकरी कर रहे हैं। जिनकी आय अकेले की ही 1 लाख रूपये वार्षिक से अधिक है। परिवार की सम्पूर्ण आय और अधिक है। उनके नाम सूरतगढ़ आदि शहरों में राशन कार्डों में खाद्य सुरक्षा में जुड़े हुए हैं और अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं।
खाद्य सुरक्षा में नाम जोड़ने और जुड़वाने पार्षदों का महत्वपूर्ण रोल रहा है अनेक पार्षदों ने जानते बुझते हुए भी यह धोखे का कार्य किया। ऐसे पार्षदों को अभी भी मालूम है कि किन किन व्यक्तियों को फर्जीवाड़े से लाभ पहुंचाया ताकि उनका वोट बैंक बना रहे और लाभ मिलता रहे।

* परिवार का मुखिया शपथपत्र भी देता है जिसमें लिखा है कि अपात्र होने पर नाम काटने और कानूनी कार्रवाई का भी अधिकार सरकार को होगा। इसके बावजूद लोगों ने इस योजना का लाभ उठाया और अभी भी अनेक लोग यह लाभ लेते हुए सरकारी कोष को हानि पहुंचा रहे हैं।*

सरकार अभी तो अपात्र सरकारी नौकरियों में लगे लोगों से ही 27 रूपये किलो गेहूँ भाव वसूल कर रही है।
सरकार इसके बाद कानूनी कार्यवाही भी खर सकती है और उसमें पार्षद व नेता गण उलझ सकते है।
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*खाद्य सुरक्षा राजकोषीय हानि की विभाग करवा रहा वसूली *
श्री गंगानगर जिले में अब तक 1 करोड़ 15 लाख रुपए की वसूली हो चुकी है।
श्रीगंगानगर ब्लॉक में 53 लाख,सूरतगढ़ में 10,19,520 लाख ,
सादुलशहर में 12,53,120 लाख,पदमपुर में 15,26,250 लाख,घड़साना में 8,50000 लाख,
श्रीकरणपुर में 10,08620 लाख,अनूपगढ़ में 9,19000 लाख,श्रीबिजयनगर में 7,27,215 लाख की हुई रिकवरी हो चुकी है।००

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खाद्य सुरक्षा योजना: पात्र-अपात्रों की संशोधित सूची

शहरी क्षेत्र में घरेलू कामकाजी महिलाएं, गैर सरकारी सफाई कर्मी, स्ट्रीट वेंडर, कच्ची बस्ती में निवास करने वाले सर्वेक्षित परिवार आदि पात्र होंगे।
इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र के लिए लघु कृषक, नरेगा में वर्ष 2009-10 से किसी भी वर्ष में 100 दिन मजदूरी करने वाला परिवार, भूमिहीन, सीमांत कृषक आदि पात्र होंगे। हालांकि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में अंत्योदय, बीपीएल, स्टेट बीपीएल, अन्नपूर्णा योजना के लाभार्थी सहित अन्य प्राथमिकता श्रेणियां समान है।

*शहरी-ग्रामीणके लिए ये पात्रता समान होगी : शहरी-ग्रामीणदोनों की प्राथमिकता श्रेणी में एकल महिलाएं, श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक, कचरा बीनने वाले परिवार, मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष, उत्तराखंड त्रासदी वाले परिवार, कुली, कुष्ठ रोगी एवं कुष्ठ रोग मुक्त व्यक्ति, घुमंतु अर्द्ध घुमंतु (वन वागरिया, गाडियालुहार भेड़ पालक)जातियां, सहरिया काथौड़ी जनजाति, आस्था कार्डधारी परिवार, स्वतंत्र राशन कार्ड वाले वरिष्ठ नागरिक, साइकिल रिक्शा चालक शामिल हैं। ये योजना के लिए पात्र होंगे।

**ग्रामीण क्षेत्र में अपात्र*

{परिवारके एक सदस्य जीविकोपार्जन के उपयोग में आने वाला चार पहिया वाहन हो। (ट्रैक्टर एक वाणिज्यिक वाहन को छोड़कर)।

{ऐसे परिवार, जिसके सभी सदस्यों के स्वामित्व में कुल कृषि भूमि लघु कृषक के लिए निर्धारित सीमा से अधिक हो।

{ परिवार में सभी सदस्यों की कुल आय एक लाख रुपए वार्षिक से अधिक हो।

{ जिस परिवार के पास ग्रामीण क्षेत्र में 200 वर्गफीट से अधिक स्वयं के रिहायश के लिए निर्मित पक्का मकान हो।

**शहरी क्षेत्र मेंं अपात्र **

1.जिसपरिवार के किसी एक सदस्य के पास चार पहिया वाहन हो,(एक वाणिज्य वाहन को छोड़कर) वह जीविका के उपयोग में आता हो।

2. नगर निगम/ नगर परिषद क्षेत्र में 1000 वर्गफीट से और नगर पालिका क्षेत्र में 1500 वर्गफीट से अधिक क्षेत्रफल में पक्का आवासीय/व्यावसायिक मकान हो।

3.एक लाख रुपए वार्षिक से अधिक आय सीमा वाले परिवार।

4.ऐसे परिवार, जिसके सभी सदस्यों के स्वामित्व में कुल कृषि भूमि लघु कृषक के लिए निर्धारित सीमा से अधिक हो।

( नियमों की ताजा सूचना संबंधित विभाग से प्राप्त की जाए)
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शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2020

राजस्व दिवस पर उम्मेदसिंह रतनू एसडीएम श्रीगंगानगर को किया सम्मानित



* करणीदानसिंह राजपूत *

श्रीगंगानगर, 16 अक्टूबर। राजस्थान के पहले राजस्व दिवस 15 अक्टूबर के अवसर पर जिला कलक्टर श्री महावीर प्रसाद वर्मा ने गंगानगर एसडीएम उम्मेद सिंह रतनू को अच्छे राजस्व प्रशासक का प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया। 

राजस्व दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में सम्मान दिया गया। इस अवसर पर एडीएम प्रशासन डाॅ. गुंजन सोनी, न्यास सचिव डाॅ. हरितिमा, सीईओ जिला परिषद श्रीमती टीना डाबी, एसीईओ श्री मुकेश बारेठ तथा अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित थे। जिला कलक्टर ने राजस्व अधिकारियों को कृषि भूमि से संबंधित प्रकरणों को संवेदनशीलता के साथ निपटाने के निर्देश दिये है। ००


पीपल पेड़ को बचाने का इस तरह चला प्रसन्नता भरा कार्य-पर्यावरण युवा मंडल व सहयोगियों का जोश सफल

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

रेलवे पुलनिर्माण में खत्म होने वाले एक पीपल वृक्ष को दूसरी जगह स्थानांतरित कर बचाने का प्रयास सफलता से पूर्ण हुआ है।
पर्यावरण युवा मंडल के प्रयास से रेलवे पुल में खत्म हो रहे पीपल वृक्ष को बचाने के लिए कुछ दूरी पर रेलवे भूमि पर लगा दिया गया है।
दूसरे स्थान पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

इस वृक्ष को बचाने की  पहली अपील  फेसबुक और सोशल साइट ग्रुप्स में 14 अक्टूबर 2020 को हुई थी। पर्यावरण संस्थाओं से जुड़े वृक्ष प्रेमी मौके पर पहुंचे। सूर्योदय नगरी के पर्यावरण युवा मंडल वृक्ष प्रेमियों ने अवलोकन के बाद विचार किया कि पीपल को दूसरी जगह लगा कर बचाया जा सकता है।
पर्यावरण युवा मंडल के कार्यकर्ता 16 अक्टूबर को प्रभात बेला में पहुंचे।
अध्यक्ष प्रेमसिंह सूर्यवंशी,सचिव परमजीत सिंह पम्मी( पूर्व पार्षद) उपाध्यक्ष दिनेश शर्मा, उपाध्यक्ष सतनाम वर्मा, प्रवक्ता ओम अठ वाल ( वर्तमान पार्षद) डाक्टर प्रकुल खत्री,संदीप सेन,मांगी सेन,बब्बू,सुरेन्द्र वर्मा,हरीश खुरीवाल आदि ने कार्य शुरू किया।
पारस मेहरड़ा ,रावत,शकील खान,आबिद खान भी कार्य में जुटे।
रेलवे अधिकारी बाबू लाल  नाहड़िया और  सुरेन्द्र गर्ग (ठेकेदार ओवर ब्रिज निर्माण) का इसमें सहयोग रहा।
इस सहयोगी कार्य से करीब दो घंटों के परिश्रम से नीचे गिरे हुए पीपल को पुराने पिल्लर की कंक्रीट में से जड़ों सहित निकाला गया। पीपल को पास की खाली भूमि तक ले जाया गया। एक विशाल गड्ढा खोदा गया। रस्सियों के सहारे पीपल को गड्ढे में सीधा खड़ा किया गया। सही स्थिति होने पर गड्ढे को मिट्टी से भरा गया। 





सभी आश्वस्त हुए की पीपल सही लगा दिया गया तब पानी डाला गया।
सभी प्रसन्न हुए कि इस सामूहिक कार्य से पीपल पेड़ बच जाएगा।००

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गुरुवार, 15 अक्तूबर 2020

राज्य में पहला राजस्व दिवस- राजस्व रिकाॅर्ड आॅनलाईन एक क्रांतिकारी कदमः- मुख्यमंत्री अशोक

 



श्री गंगानगर 15 अक्टूबर 2020.

मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने गुरूवार को प्रथम राजस्व दिवस (15 अक्टूबर 2020) के अवसर पर समस्त राजस्व अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राजस्व के कार्य आॅनलाईन होने से किसान को त्वरित गति से न्याय मिलेगा तथा यह एक क्रांतिकारी कदम है। 

श्री गहलोत राजस्व दिवस के अवसर पर विडियों कांफ्रेंसिंग के माध्यम से राजस्थान के पटवारी से लेकर जिला कलक्टर, राजस्व बोर्ड के अधिकारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि राजस्थान की 338 में से 244 तहसीलों में राजस्व रिकाॅर्ड आॅनलाईन कर दिया गया है तथा ई-साईन गिरदावरी, कृषि ऋण रहन पोर्टल, पंजीयन तथा स्वतः नामातंरण का पाॅयलेट प्रोजेक्ट प्रारम्भ कर दिया गया है, जिसका लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि कृषि भूमि को लेकर होने वाले विवाद के निस्तारण में कई पीढ़ियां निकल जाती थी, लेकिन अब राजस्व कार्य आॅनलाईन होने से त्वरित न्याय की प्रक्रिया शुरू होगी। 

राजस्व रिकाॅर्ड आॅनलाईन से किसान को त्वरित न्याय मिलेगाः- जिला कलक्टर


जिला कलक्टर श्री महावीर प्रसाद वर्मा ने बताया कि राजस्व रिकाॅर्ड को आॅनलाईन करने से किसान का समय, किसान के धन की बचत के साथ-साथ उसे कम समय में न्याय मिलेगा। नई व्यवस्था में गिरदावरी, बैंक ऋण, पंजीयन तथा नामातंरण जैसे महत्वपूर्ण कार्य आॅनलाईन होने लगेंगे। राजस्व रिकाॅर्ड का आधुनिकीकरण करने के लिये राजस्व रिकाॅर्ड को आॅनलाईन किया जा रहा है। जिला कलक्टर ने राजस्व दिवस पर जिले के समस्त राजस्व कार्मिकों, अधिकारियों को शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि राजस्व कार्मिकों की मेहनत से ही लाखों-लाखों किसानों का राजस्व रिकाॅर्ड आॅनलाईन हुआ है। 

वीसी में अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन डाॅ. गुंजन सोनी, एसडीएम श्री उम्मेद सिंह रतनू, तहसीलदार संजय मित्तल सहित अन्य राजस्व अधिकारी तथा जिले के समस्त एसडीएम, तहसीलदार, गिरदावर, पटवारी भी उपखण्ड स्तर से जुड़े हुए थे। 

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