रविवार, 15 मार्च 2026
शुक्रवार, 21 नवंबर 2025
बहुओं के वोट व 1 फार्म की बड़ी परेशानी.भाजपा सोचे.
* करणीदानसिंह राजपूत *
राजस्थान में वोट पुनरीक्षण कार्य 4 नवंबर 2025 से शुरू हुआ है तबसे परेशानियों के प्रमुख समाचारों में यह मिल रहा है कि बहुओं के वोटों पर परेशानी अधिक है और एक प्रकार से संकट कि वोट रहेंगे या कटेंगे। बड़ा झंझट यह है कि 2002 के बाद बहुएं वोट देती रही है तो भी पीहर से परीक्षण मिलान सत्यापन होगा। लोगों को इसमें बहुत परेशानी हो रही है। यदि किसी वजह से केवल 2002 में वोट नहीं रहे। आगे पीछे रहे तो भी संकट हो रहा है। 2002 से पहले वोट देते रहे और 2002 की सूची में नहीं है तो परेशानी। भाजपा के नेता नेतियां कार्यकर्ता इस परेशानी से रूबरू नहीं हो रहे और अनेक लोगों को कहते हैं सरकार ने लागू कर दिया है तो मानना तो पड़ेगा। सवाल यह है कि बहुओं ने क्या बिगाड़ा है कि उनके वोट परीक्षण पर ही अधिक परेशानी हो रही है। भाजपा के कट्टर समर्थक हर बात स्वीकार करें लेकिन जो समर्थक हैं वे नाराज हो रहे हैं और अपनी नाराजगी बातचीत में उजागर भी कर रहे हैं। नाराजगी का एक कारण यह है कि इसमें जानकारी उपलब्ध कराने का भार दायित्व बहुओं/ परिवार मुखिया पर ही डाला जा रहा है। अनेक बीएलओ इस पर गंभीर नहीं है इसलिए लोग परेशान हो रहे हैं कि बहु के पीहर की मतदाता सूची कहाँ से देखें और बीएलओ के आगे रखें।
* राजस्थान के अनेक भागों से बड़ी शिकायत यह भी है कि बीएलओ ने केवल एक ही फार्म दिया और अब मतदाता/ परिवार मुखिया के पास सबूत में कुछ भी नहीं है। अगर बीएलओ लापरवाही कर दे वोट नहीं रहे तो फार्म भर कर देने का कोई सबूत नहीं। भाजपा के लोग नेता कार्यकर्ता इसे भी गंभीर नहीं मान रहे। यह बड़ी गलती है जिसमें बीएलओ की शिकायत पर निश्चित ही कार्वाई होगी और वह दंडित भी होगा। निर्वाचन विभाग ने जब 2 फार्म देना नियम बनाया और उसकी पूरी नीति भी बनाई तो बीएलओ ने उस नीति का पालन क्यों नहीं किया? बीएलओ द्वारा जानते समझते हुए आदेश की अवहेलना करना है। अनेक बीएलओ घरों पर गये ही नहीं और केवल आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ही पहुंची। बीएलओ ने फार्म 2 दिए या नहीं दिये कि जांच निरीक्षण जिम्मेदार अधिकारियों को करना चाहिए।०0०21 नवंबर 2025.
करणीदानसिंह राजपूत.
स्वतंत्र पत्रकार.
94143 81356.
सोमवार, 17 नवंबर 2025
मतदाता सूची.ड्राफ्ट और अंतिम प्रकाशन इन तारीखों को होगा.
* करणीदानसिंह राजपूत*
* राजस्थान में मतदाता विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम–2026 : इस तरह से तिथिवार होगा।
• 04 नवंबर 2025 से 04 दिसंबर 2025 : घर–घर गणना एवं सत्यापन चरण
• 09 दिसंबर 2025 : ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन
• 09 दिसंबर 2025 से 08 जनवरी 2026 : दावे और आपत्तियों की अवधि
• 07 फ़रवरी 2026 : अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन ।०0०
गुरुवार, 31 जुलाई 2025
वोटरों का सत्यापन:ऐसे होगा.
निर्धारित दस्तावेज बीएलओ को उपलब्ध करवाने होंगे.
* करणीदानसिंह राजपूत *
श्रीगंगानगर, 31 जुलाई 2025.
भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार गहन पुनरीक्षण अभियान के अंतर्गत राजस्थान में 2002 की मतदाता सूची को आधार मानते हुए 25 जून 2025 तक पंजीकृत समस्त मतदाताओं का आयोग द्वारा निर्धारित समयावधि में सत्यापन किया जायेगा।
निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण पदाधिकारी एवं एसडीएम गंगानगर श्री नयन गौतम ने बताया कि आयोग द्वारा निर्धारित समय में बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाना है। इसके लिये समस्त मतदाताओं को आयोग द्वारा निर्धारित दस्तावेज बीएलओ को उपलब्ध करवाने होंगे।०0०
मंगलवार, 10 जून 2025
जिला प्रमुख का चुनाव नहीं हुआ. कारण.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 10 जून 2025.
श्रीगंगानगर के जिला प्रमुख पद का चुनाव समस्त चुनावी प्रक्रिया पूर्ण होने के बावजूद नहीं है पाया। राजस्थान उच्च न्यायालय से स्थगन किए जाने के कारण चुनाव की आगे की मतदान प्रक्रिया शुरू की जाने वाली थी लेकिन वह शुरू नहीं हुई।
* जिला परिषद प्रांगण में सांसद कुलदीप इंदौरा ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह प्रजातंत्र नहीं चाहती। इंदौरा ने आरोप लगाया कि जो भी स्थिति थी वह जिला निर्वाचन अधिकारी द्वारा बताई जानी थी,नोटिस बोर्ड पर सूचना लगाई जानी चाहिए थी।
सूरतगढ़ विधायक डुंगरराम गेदर और श्रीकरणपुर विधायक रुबि कुन्नर भी मौजूद थे।
सूचना है कि 22जोन के तकनीकी कारण से स्थगन लिया गया।
* कांग्रेस का बहुमत है। 31 सदस्यों में कांग्रेस 24 भाजपा 5 और कम्युनिस्ट पार्टी के 2 सदस्य हैं।
* इंदौरा के सांसद चुने जाने के बाद यह पद रिक्त हुआ था। सरकार की तरफ से कविता रेगर को जिलाप्रमुख मनोनीत किया गया। नये जिलाप्रमुख चुने जाने तक कविता रेगर ही इस पद पर आरूढ रहेगी।०0०
सोमवार, 19 अगस्त 2024
सूरतगढ:भ्रष्टाचार व गंदगी में चुनने होंगे पार्षद व अध्यक्ष.
* करणीदानसिंह राजपूत *
नगर पालिका चुनाव से पहले काम करने के लिए भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के लिए केवल 2 महीने का समय है। आचार संहिता अक्टूबर में लगेगी उसके बाद काम कुछ भी नहीं हो सकेगा।
नगरपालिका बोर्ड का अध्यक्ष पद भारतीय जनता पार्टी के पास में है इसलिए काम करने की नीति भारतीय जनता पार्टी के हाथ में है। कांग्रेस पार्टी के लिए विपक्ष की भूमिका निभाते हुए इतना ही समय है। दोनों राजनीतिक दलों के नेता कार्यकर्ता चुनाव लड़ने की ईच्छा तो रखते हैं और तैयारियां भी कर रहे हैं मगर नगरपालिका में भ्रष्टाचार और सफाई के मामलों में एकदम चुपी धारण किए हुए हैं। भ्रष्टाचार के मामले मीडिया में उजागर होने पर भी कुछ करना नहीं चाहते।
दोनों पार्टियों के नेता कदम आगे बढ़ाकर कार्यवाही करने की इच्छुक नहीं है। सफाई के मामले में पूरा शहर बंद नालों नालियों और कचरे के ढेरों से सड़ांध मार रहा है और इस गंदगी कचरे के बीच शहरवासी अपने हर कार्य और समारोह का आयोजन कर रहे हैं। दो वक्त का भोजन गंदगी और कचरे से उत्पन्न गंदी हवा और रोगाणुओं के फैलाव के बीच में करते हैं।
गंदगी के कारण जो बीमारियां फैल रही है उस पर सभी संस्थाएं और उनके समाजसेवी मौनी बाबा बने हैं। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे लोगों को समारोह में अतिथि बनाना, उद्घाटन कराना, मंचों पर बिठाना और पुरस्कार बंटवाना समाजसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों को कैसे शोभा देता है और वे समाज के लोगों को इस तरह से कैसे जागरूक करते हैं।
* दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता चुनाव लड़ने के इच्छुक तो हैं लेकिन धरातल पर कोई भी काम करने की इच्छा नहीं रखता। दोनों पार्टियों के नेता शहर में भ्रमण करके अवलोकन करके जानना नहीं चाहते कि इस गंदगी को सफाई करने के लिए नगर पालिका में व्यवस्था कैसे सुधारी जाए।
अधिशासी अधिकारी ने शहर के बाजारों और वार्डों का निरीक्षण नहीं किया है।
पर्टियों के नेताओं के पास कोई नीति नहीं है। भाजपा के नगरपालिका बोर्ड के अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा,पूर्व विधायकों रामप्रताप कासनिया व अशोक नागपाल दो खेमों में बंटे हैं। कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए पूर्व विधायक गंगाजल मील का तो कहीं नाम ही नहीं आ रहा।
कांग्रेस पार्टी के विधायक डुंगरराम गेदर,पूर्व विधायक राजेन्द्र सिंह भादु और 120 दिन नगरपालिका के अध्यक्ष नियुक्त रहे परसराम भाटिया ने भ्रष्टाचार और गंदगी पर चुप की नीति अपना रखी है। भ्रष्टाचार के आरोपों से जो घिरे हैं उनसे कोई उम्मीद भी नहीं की जा सकती। शहर की गंदगी को जो 5-7 दिन में खत्म की जा सकती है वह महीनों से खत्म नहीं हो रही है।
* भारतीय जनता पार्टी के पास नगरपालिका बोर्ड का अध्यक्ष पद है इसलिए जिम्मेदारी अधिक है कि वह सभी वार्डों में निरीक्षण करे और व्यवस्था भी करे।
*पालिका में भ्रष्टाचार के कारण काम नहीं हो रहे या देरी से हो रहे हैं तो उस पर कोई गंभीरता होनी चाहिए। एक दूसरे के ऊपर आरोप लगाने में एक दूसरे को फंसाने की कार्रवाई में ही समय निकलता चला गया है और आगे भी यह दो महीने इसी तरीके से बीतने की संभावना है।
👍नगर पालिका चुनाव के लिए पार्षद के रूप में अध्यक्ष बनने के रूप में तैयार तो अनेक लोग हैं मगर नगर पालिका के भ्रष्टाचार और सफाई की व्यवस्था, नगर पालिका में स्वर्ण जाति के अनेक सफाई कर्मचारियों की फर्जी हाजिरी पर सभी चुप है। कुछ भी कहना और करना नहीं चाहते।किसी एक नेता ने भी भ्रष्टाचार के प्रमाणित सबूतों के मामलों में भी उच्च स्तरीय शिकायतें नहीं की। जो मामले सामने है उन पर भी चुप्पी धारण किए हुए हैं।
*शहर में और कच्ची बस्तियों में निर्माण में अतिक्रमण निरंतर हो रहे हैं।मुख्य शहर में नगर पालिका की स्वीकृति के बिना अंडरग्राउंड निर्माण और बालकोनियों को बंद करके कमरों के रूप में बनाया जा रहा है। बालकोनी खुली रहनी चाहिए लेकिन उनमें व्यापार हो रहा है। नगर के मुख्य बाजारों में दुकानों में बिना स्वीकृति के अंडरग्राउंड निर्माण हो गये गई हैं और अनेक दुकानें बालकनी रोककर कमरों की तरह स्टोर बना दिए गए हैं या उन पर भी दुकानदारी शुरू है।मामला गंभीर है मगर नगर पालिका प्रशासन कुछ करना नहीं चाहता। सभी बाजारों की हालत बहुत बुरी है।
भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस पार्टी दोनों में शहर की सफाई व्यवस्था को सुधारने की सुध नहीं है। शहर के प्रति नागरिकों के प्रति दोनों ही पार्टियों के नेता कार्यकर्ता आंख कान बंद किए हुए हैं और हाथों को बांध करके पीछे किया हुआ है।
👍 भ्रष्टाचार को शह देने वाले निकम्मे लोग चुनाव लड़ेंगे और उन्हीं में से जनता को अपने पार्षद व अध्यक्ष का चुनाव मजबूरी में करना होगा। ०0०
*****






















































