गली विवाद का हल क्या हो?अरोड़ा कैमरे लगवाए.पुलिस नगरपालिका कार्वाई रिकॉर्ड होता रहे.
* करणीदानसिंह राजपूत *
भग्गुवाला कुआ के पास गली होने नहीं होने के मामले में एक अरोड़े और एक शर्मा का विवाद चर्चा में है। असली समाधान कागजों में है।
अरोड़े ने बणिये से जमीन खरीदी,रजिस्ट्री हुई। सब दस्तावेज सही और प्रमाणित। पड़ोसी शर्मा ने पहले बणिये को दबाने की कोशिश की। पार नहीं पड़ी। अरोड़े ने खरीद ली तो उस पर दबाव जो आज तक चला नहीं। शर्मा अपने भूखंड की गली बताता है तो वह शर्मा के पट्टे में होगी। शर्मा विवाद में पुलिस और नगरपालिका में अप्रोच कर अरोड़े पर दबाव बना रहा है।
पुलिस और नगरपालिका के अधिकारियों को अप्रोच के बजाय शर्मा का पट्टा देखना ही नहीं रिकॉर्ड में लेना चाहिए। शर्मा के पट्टे में गली है उसका अधिकार बनता है तो किसी भी प्रकार की मौखिक कार्वाई के बजाय अधिकृत लिखित कार्वाई करके शर्मा की गली खुलवानी चाहिए। यदि शर्मा अपना पट्टा कापी नहीं देता है तो पुलिस और नगरपालिका को कोई भी मौखिक कार्वाई नहीं करनी चाहिए।
👌 यदि शर्मा के पास अपने पट्टे में किसी दस्तावेज में गली होती तो वह पेश कर चुका होता। असल में गली अन्य स्थान पर से है, और खुलवानी है तो वहां से खुलवाई जानी चाहिए।
👌 अरोड़े को सबसे पहले कुछ कैमरे लगवाने चाहिए ताकि हर आने वाले का आने जाने और उसका कहना रिकॉर्ड होता रहे।भूखंड पर कुछ भी वाद विवाद, कोई गाली, दबाव,गलत होता है तो कैमरा रिकॉर्ड सबूत होंगे। बड़े मौखिक आदेश देने वाले साथ नहीं आते।
👌शर्मा के पास पट्टा और उसमें गली का दस्तावेज सबूत है तो वह पुलिस और नगरपालिका में पेश करना चाहिए। असली और सही समाधान के लिए अदालत में मामला दिया जा सकता है।
👍 मामला बड़ा रोचक आश्चर्य भरा है कि नगरपालिका ने गली वाली सही जगह के बजाय प्राईवेट भूखंड में इंटरलोकिंग सड़क और सीवरेज कैसे बनाए। किस पार्षद ने बनवाए? कितने रूपये बरबाद हुए?
इसकी जांच होगी तो उस समय के ईओ,इंजीनियर भी लपेटे में आएंगे। यह घपला भी जांच का एक मुद्दा तो बन ही गया है।
नगरपालिका के इंजीनियर सहायक अभियंता दबाव बनाने मौके पर जा रहे हैं तो उनको और ईओ को अपना नक्शा पहले देख कर और शर्मा से रिकॉर्ड मांग कर कदम उठाना चाहिए। गलत कार्वाई खतरा ही बनती है और यह गली विवाद
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