शुक्रवार, 20 जून 2025
गुरुवार, 12 जून 2025
जनसुनवाई में नगरपालिका के मामले पेश किए.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ 12 जून 2025.
उपखंड स्तरीय जनसुनवाई में आज गुरुवार को सुनवाई अधिकारी उपखंड अधिकारी संदीप काकड़ के समक्ष पूर्व पार्षद मदन ओझा पूर्व पार्षद लक्ष्मण शर्मा हुसैन मोहम्मद तेली नवरंगसिंह और शहाबुद्दीन गौरी ने शहर की महत्वपूर्ण समस्याओं की ओर प्रशासन का ध्यान दिलाया। अधिकारी से निवेदन किया गया कि नागरिकों के हित में इन समस्याओं को दूर कराया जाना चाहिए।
* सीवरेज के चेम्बर के ढक्कन सड़कों से ऊंचे या नीचे हैं जिनसे दुर्घटनाएं होती है उन सभी सीवरेज ढक्कन को सही करवाई जाने की मांग थी। इस विषय में विवरण दिया गया कि मार्च 2025 में उपखंड अधिकारी को मांग पत्र दिया गया था। नगरपालिका ने आज तक कोई कार्य नहीं किया।
शहर में बिजली व्यवस्था पूरी तरह से चौपट होने का आरोप लगाते हुए इसमें सुधार की मांग की गई।
उपखंड अधिकारी कार्यालय के पास में रेलवे द्वारा आम रास्ता बंद कर दिया गया, उसको खुलवाने की माग की गई। कहा गया कि पटवारी ने उपखंड कार्यालय में रिपोर्ट भी दे दी कि उक्त जमीन नगर पालिका की है। उक्त जमीन पर रेलवे ने चार दिवारी का गेट बंद कर दिया। उस रास्ते को खुलवाने की मांग भी जनसुनवाई में रखी गई।०0०
सोमवार, 23 दिसंबर 2024
ओमप्रकाश कालवा सीवरेज केस: एफआर अदालत में पेश
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 23 दिसंबर 2024.नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा पर सीवरेज कं को पूर्व में रोका हुआ भुगतान कर देने के मुकदमें में पुलिस ने जांच पूरी कर फाईनल रिपोर्ट यहां 3 दिन पहले अदालत में पेश कर दी। ओमप्रकाश कालवा अधिशासी अधिकारी विजयप्रतापसिंह, लेखाकार सुनीलकुमार आदि पर आरोप साबित नहीं हुए।
* नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। उक्त मुकदमा अदालत में इस्तगासा करने पर अदालत के आदेश से सिटी पुलिस थाने में 396/22 दर्ज हुआ था।
* बनवारीलाल इस मुकदमें में उच्च न्यायालय में गये। उच्च न्यायालय एसपी को जांच के लिए कुछ निर्देश दिए। इसके बाद एसपी ने जांच के कुछ बिंदु तय किए।
इसके बाद ओमप्रकाश कालवा जांच सीआईडी क्राइम ब्रांच में ले गए। यह जांच बाद में सुजानगढ़ के एसपी को सौंपी गई। वहां से बयान आदि के बाद जांच और अंतिम रिपोर्ट लगी।
* यह घोटाला तो हुआ काजल के अध्यक्षता काल में हुआ। उस समय के इंजीनियरों द्वारा कार्य होने और भुगतान के दस्तावेज एमबी में इन्द्राज भी कर दिए गये थे। रामप्रताप कासनिया ने यह घोटाला जुलाई 2019 में विधानसभा में उठाया था। उस समय काजल के अध्यक्षता काल में रूडको के अभियंता ने कुईयां आदि तोड़ने का भुगतान रूकवा दिया था।
कालवा बाद में नवंबर में निर्वाचित हुए और 2 दिसंबर 2019 को पदभार ग्रहण किया।
रूडको के जिस अभियंतां ने भुगतान रूकवाया उसी ने बाद में भुगतान करने का लिखा। तब ओमप्रकाश नगरपालिका अध्यक्ष आ गये थे। वह रूकवाया हुआ भुगतान मार्च 2020 में 1 करोड़ 60 लाख का भुगतान हुआ जो टैक्स काट कर 1 करोड़ 45 लाख का हुआ। यह तकनीकी गलती मानी जा रही थी। इतनी ही राशि को सिक्योरिटी में रोके जाने का हुआ।
सा.नि.वि. की जांच रिपोर्ट में लिखा था कि मौके पर अब कुइयां आदि हटाने का मालुम करना संभव नहीं है क्योंकि सड़क बन गई है।
जिन लोगों ने शिकायत की उनमे से ही कुछ ने लिखा कि गलत फहमी में शिकायत की थी। इन्होंने फिर कलेक्टर की जांच में फिर बयान बदले और भुगतान को गलत बताया।
अब इसमें फाईल बड़ी होती गई थी।
* इसमें राजनीति भी खूब चली। ओमप्रकाश कालवा और गंगाजल मील के बीच अनबन होने से कालवा ने भाजपा जोईन कर ली। इसके बाद ओमप्रकाश कालवा के विरूद्ध मोर्चा खोला गया। धरना प्रदर्शन हुए। ओमप्रकाश कालवा के सस्पेंशन के बाद कांग्रेस के परसराम भाटिया 120 दिन अध्यक्ष बनाए गये।
** यह एफ आर अदालत में पेश हुए तीन चार दिन बीत गये लेकिन किसी बड़े अखबार और सोशल मीडिया आदि ने खबर नहीं दी। * ओमप्रकाश कालवा ने बनवारीलाल पर आरोप लगा रखा है कि उसके कार्यकाल में बनी सीवरेज का कोई अतापता नहीं है। यह आरोप एक प्रेस कान्फ्रेंस में लगाए थे। बनवारीलाल मेघवाल पर भी सीवरेज घोटाले के आरोप में अदालत के धारा 202 के आदेश पर सिटी पुलिस थाने में जांच चल रही है। महेंद्र सिंह जाटव पत्रकार ने अक्टूबर 2024 में अदिलत में इस्तगासा पेश किया था।
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गुरुवार, 8 अगस्त 2024
पूर्व अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल पर सीवरेज घोटाले में मुकदमे का आवेदन.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ 8 अगस्त 2024.
स्थानीय न्यायालय में नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल के विरुद्ध सीवरेज में घोटाला करने के आरोप में मुकदमें के लिए आवेदन प्रस्तुत हुआ है। बनवारीलाल मेघवाल के अध्यक्षीय कार्यकाल 2009 से 2014 की अवधि दि.29 अप्रैल 2011 से 16 म ई 2014 तक सीवरेज का 7 करोड़ 52 लाख भुगतान हुआ। आरोप है कि बनवारीलाल के अध्यक्षीय काल में करीब 15 किलोमीटर लंबाई में सीवरेज डाली गयी थी जो काम में नहीं आई और उसके अनुपयोगी होने की सूचना नगरपालिका से एक पत्र के जरिए सूचना डीएलबी को भिजवाई गयी थी।
* नगरपालिका के वर्तमान अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा ने बनवारीलाल पर 6 अगस्त 2022 को प्रेसवार्ता में सीवरेज घोटाले का आरोप लगाया था। सवाल उठाया था कि बनवारीलाल के समय में करीब 15 किलोमीटर में बनाई गयी सीवरेज कहां है? बनवारीलाल वह सीवरेज पत्रकारों को दिखा नहीं पाए और 2 साल बीत गये।
बनवारीलाल के समय वार्ड 12,4 से 13, 16, 17,25 का सीवरेज के लिए चयन हुआ था। आरोप है कि कुछ वार्डों में कार्य में गड़बड़ी हुई और कार्य अधूरे रहे।
* आरोप लगाने वाले की तरफ से वकील विष्णु शर्मा हैं। पहले पुलिस थाना सिटी सूरतगढ को मुकदमे के लिए शिकायत की गई और उसके बाद जिलापुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर को मुकदमे के लिखा गया। मुकदमा कार्यवाही नहीं होने पर शिकायतकर्ता ने अदालत में आवेदन किया है।०0०
बुधवार, 5 जून 2024
सीवरेज भुगतान मामले में पुलिस जांच में तेजी.
करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ 5 जून 2024.
ओमप्रकाश कालवा के विरुद्ध सीवरेज मामले में फर्जी 1करोड 45 लाख रू कं को करने के आरोप में पुलिस दर्ज मुकदमें की जांच करने सुजानगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सूरतगढ़ आए हैं। उन्होंने कुछ लोगों के बयान लिए हैं। मौके पर भी 6 जून को निरीक्षण करेंगे।
इस प्रकरण में नगरपालिका के पूर्व अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल ने पुलिस में मुकदमा दर्ज कराया था। उक्त मुकदमा अदालत में इस्तगासा करने पर अदालत के आदेश से सिटी पुलिस थाने में 396/23 दर्ज हुआ था। कालवा इस मुकदमे की प्राथमिकी को क्वैश( निरस्त) करवाना चाहते थे।
* उक्त मुकदमें बनवारी लाल ने अपना पक्ष रखा। पुलिस एफ आर लगाने वाली थी। उच्च न्यायालय ने एसपी को जांच के लिए कुछ निर्देश दिए। इसके बाद एसपी ने जांच के कुछ बिंदु तय किए।
इसके बाद ओमप्रकाश कालवा जांच सीआईडी सीबी में ले गए। वहां फाईल काफी दिनों तक पड़ी रही।
फिर यह जांच सुजानगढ़ के एसपी को सौंपी गई। उसमें पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल के बयान हो चुके हैं। सुजानगढ़ में नगरपालिका स्टाफ के भी बयान हुए। कुछ महीनों से फाईल पड़ी थी। अब शायद सरकार के कड़े निर्देश हैं इसलिए प्रकरणों की जांच में तेजी आई है।
* यह घोटाला तो हुआ काजल के अध्यक्षता काल में। भुगतान के दस्तावेज एमबी में इन्द्राज भी होगये। फिर भुगतान रोका गया। जिस रूडको अभियंता ने भुगतान रूकवाया उसी ने बाद में भुगतान करने का लिखा।यह भी लिखा कि नगरपालिका अपने स्तर पर भी जांच कराले। सा.नि.वि. की जांच रिपोर्ट में लिखा था कि मौके पर अब कुइयां आदि हटाने का मालुम करना संभव नहीं है क्योंकि सड़क बन गई है।
जिन लोगों ने शिकायत की उनमे से ही कुछ ने लिखा कि गलत फहमी में शिकायत की थी। इन्होंने फिर कलेक्टर की जांच में फिर बयान बदले और भुगतान को गलत बताया।
अब इसमें फाईल बड़ी होती गई है और तकनीकी रूप में क्या निकलेगा? यह प्रमाणित करना भी असंभव होगा कि बदनियती से कं को भुगतान किया गया। हालांकि इस बार यह जांच पूरी होगी। यदि इसमें एफ आर लग जाती है तो ओमप्रकाश कालवा को डीएलबी की न्यायिक जांच और बहाली में लाभ मिलने की गुंजाइश बन जाएगी। शिकायत कर्ता पक्ष भी पूरा प्रयास कर रहा है कि जांच पूरी हो और कालवा का व अन्य का अदालत में चालान हो.०0०
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