मंगलवार, 5 मई 2026
गुरुवार, 24 अप्रैल 2025
नरेन्द्र मोदी के विचारों पर अनीता कटिहार पंवार) का शोध स्वीकार.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 24 अप्रैल 2025.
भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व पटल पर छाए हुए हैं और वे जिस राजनीतिक सोच से कार्य करते हैं उसकी हर ओर चर्चा होती है। भारतीय राजनीति में मोदी के विचारों पर शोध करना बहुत महत्वपूर्ण कार्य है जो श्रीमती अनीता कटिहार पंवार ने किया है। शोध का विषय "भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी के राजनीतिक विचारों की भूमिका :एक विश्लेषण" था।
श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय हनुमानगढ़ में राजनीति विज्ञान विभाग में 18 अप्रैल 2025 को आयोजित प्रश्नोत्तरी में अनीता कटिहार के सफल रहने पर यह शोध स्वीकृत कर लिया गया है। अनीता को डाक्टरेट की उपाधि आगे समारोह में प्रदान की जाएगी।
यह शोध कार्य श्रीखुशालदास विश्वविद्यालय की डॉक्टर निशा शर्मा सहायक आचार्य के मार्गदर्शन में किया गया।
अनीता कटिहार हेमकुमारी स्व.रतनसिंह कटिहार हनुमानगढ़ जं की सुपुत्री हैं और आनंद सिंह पंवार सिरसा हरियाणा से विवाहित हैं।
( पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत की सग्गी भानजी है)
गुरुवार, 9 मई 2024
मोदी की हंसी वाली पुस्तक 'फेकूजी हवे दिल्ली मा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाने वाली गुजराती में छपी एक किताब ने जबरदस्त हलचल मचाई है और लोग उसे पढऩे को उत्सुक हैं। गुजरात में इसकी बिक्री खूब हो रही है। इस किताब का शीर्षक है,'फेकूजी हवे दिल्ली मा जिसका हिन्दी अर्थ होता है फेंकूजी अब दिल्ली में।इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने की मांग उठी और गुजरात के एक कोर्ट में इसकी बिक्री पर रोक लगाने की याचिका दायर की गई। अदालत ने इस पुस्तक पर प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। सिविल अदालत के जज ए.एम. दवे ने संविधान के अनुच्छेद 19 का हवाला देते किताब पर प्रतिबंध लगाने की मांग करने वाली याचिका को खारिज किया। न्यायाधीश ने कहा कि किताब पर प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की आजादी के मूल अधिकार का उल्लंघन है।
'फेकूजी हवे दिल्ली मा (फेकू जी अब दिल्ली में) नाम की यह किताब अहमदाबाद के पालड़ी निवासी कांग्रेसी कार्यकर्ता लेखक जे.आर. शाह ने लिखी और अपनी ही फर्म जे.आर. एंटरप्राइज से प्रकाशित कराई थी। मोदी जी द्वारा 2014 लोकसभा चुनावों में किए गए वादों में से अधूरे वादों पर गुजराती भाषा में ये किताब छप गई।
पाठक जानते हैं कि कई महीनों से मोदी जी को फेंकू नाम से हंसी में उड़ाया जा रहा है। भाजपा विरोधी कुछ राजनैतिक पार्टियों के बड़े नेता मोदी को इसी नाम से संबोधित कर हंसी उड़ाते रहते हैं और चैनलों पर भी इस प्रकार के व्यंग्य आते रहते हैं।
बुधवार, 18 जनवरी 2023
राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा. ले-सत्य पारीक.इतिहास रचेगी यह पुस्तक
सत्य पारीक की राहुल गांधी कि भारत जोड़ो यात्रा पर लिखी पुस्तक 'भारत जोड़ो यात्रा' राजनैतिक सामाजिक और अन्य क्षेत्रों में कार्य करने वाले बड़े और छोटे हर व्यक्ति के लिए आने वाले समय में इतिहास रचने वाली होगी।
राहुल की यात्रा पर अभी तुरंत जो समीक्षाएं हो रही है जो लिखा जा रहा है वह भविष्य में जोक्स हो जाएगा। यात्राएं जब-जब हुई हैं तब तब बदलाव आया है और वह बदलाव भविष्य को निर्धारित करने वाला प्रमाणित भी हुआ है। राहुल गांधी की यात्रा को मजाक बताने वाले उसे बेवकूफ और यात्रा को बेवकूफी भरी यात्रा बताने वाले लोग बहुत अधिक संख्या में नहीं है। यदि राहुल गांधी की यात्रा से कोई भी बदलाव होने वाला नहीं है तो फिर इससे घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है। जिस प्रकार की घबराहट जिस प्रकार की आलोचना की जा रही है,उससे यह लगता है कि इस यात्रा से जो होने वाला है जो हो रहा है उसे समझा तो जा रहा है लेकिन स्वीकार नहीं किया जा रहा। राजनीतिक क्षेत्र में काम करने वाले दूसरी पार्टियों के खासकर भारतीय जनता पार्टी के लोग
राहुल को क्यों स्वीकार करें? क्यों उसकी यात्रा को स्वीकार करें? समझ तो रहे हैं लेकिन केवल कांग्रेस के विरोधी होने के कारण उसके आलोचक बने हुए हैं।
* देश में भयानक भ्रष्टाचार, भयानक महंगाई, आम जनता परेशान, युवाओं की बेरोजगारी की आवाज, किसी की आवाज सुननी नहीं।लोगों का तिरस्कार करना। मीडिया से बात नहीं करना।ऐसे अनेक कारण देश में छाए हुए हैं। हमारा देश विभिन्न धर्मों संप्रदाय जातियों विचारों वर्गो अमीर और गरीब आदि में बंटा हुआ है। इस प्रकार के देश में जब सन् 2024 में आम चुनाव यानी लोकसभा के चुनाव होने वाले हैं, उससे पहले यात्रा करना और उसको भारत जोड़ो यात्रा नाम देना बहुत बड़ी बात है।
सत्य पारीक इस समय 75 वर्ष के बड़े विचारक लेखक है जिनकी अनेक पुस्तकें राजनीति पर प्रकाशित हो चुकी हैं। भारत जोड़ो यात्रा पुस्तक में उन्होंने राहुल गांधी के अनेक पहलुओं को प्रदर्शित किया है और हो सकता है कि वे पहले किसी पुस्तक में नहीं छपे हों। इस पुस्तक में अलग-अलग अध्यायों में अलग-अलग सार गर्भित सामग्री है और देश की राजनीतिक स्थिति पर व्यापक रूप से विस्तार से लिखा गया है।
* इस यात्रा के भविष्य में होने वाले बदलाव में लेखक मानते है कि राहुल गांधी भविष्य में प्रधानमंत्री बनेंगे। यही वाक्य है जिसको कांग्रेस विरोधी खासकर भाजपा के लोग एक मजाक के रूप में मानते हैं और राहुल गांधी को पप्पू के रूप में या बहुत अशोभनीय शब्दों में उच्चारित करते हैं।
* प्रजातंत्र में कभी कोई व्यक्ति स्थाई नहीं होता और कभी कोई दल सदा के लिए सत्ताधारी नहीं हो सकता। बदलाव होता रहता है।यह बात सभी राजनीतिक दलों को समझनी चाहिए लेकिन सत्ता में जब कोई आता है तो उसे अन्य दल तुच्छ लगने लगते हैं। सत्तारूढ़ दल यह मानने लगते हैं कि उनके अलावा देश का संचालन कोई नहीं कर सकता।
* राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में जो बातें लिखी है जो तथ्य हैं और इस यात्रा से जो कुछ निकलेगा वह परिणाम निश्चित रूप से देश की राजनीति में बदलाव करने वाला होगा।
* आज चाहे इसे स्वीकार नहीं किया जाए इसलिए मैं समीक्षा के रूप में यह बात लिखता हूं कि इस पुस्तक को संभाल कर रखें और अधिक से अधिक लोगों को पढ़ाने व पढ़ने के लिए प्रेरित भी करें।
इस पुस्तक में जो अध्याय हैं चैप्टर हैं, मैं उनका उल्लेख करते हुए और उसमें जो उपशीर्षक है उनको यहां देते हुए यह बताना चाहता हूं कि इस पुस्तक को राजनीति में काम करने वाले लोगों को सामाजिक काम करने वाले लोगों को विद्यार्थियों को जरूर पढ़ना चाहिए। यह पुस्तक भविष्य में इतिहास के सम पुस्तक के रूप में भी लोग स्वीकार कर सकेंगे यह मैं मानता हूं। इस पुस्तक में सत्य पारीक ने जो लिखा है वह महत्वपूर्ण है।
इस पुस्तक के संपादकीय अध्याय में राहुल गांधी को राजनीति का अपराजित योद्धा बताया गया है।
लेखक लिखता है कि ये राजनीति इतनी नहीं आसां,इतना समझ लीजिए इक आग का दरिया है और डूब के जाना है।
राहुल गांधी की तस्वीर बनाम विनोबा भावे। राजनीति में क्या यही बाकी रह गया है कि स्वयं को सिद्ध करने के लिए अब दूसरे नेताओं की तरह के स्टंट करके दिखाने होंगे।राहुल एक योद्धा। राहुल की फिटनेस का राज क्या है?आपको राहुल गांधी को देखकर युवराज की फीलिंग होती है।
** अशोक गहलोत कहते राहुल गांधी के पैरों में पड़े फफोलों छालों को प्रणाम जिन्होंने देश की पवित्र धरती को पैदल नापा है। गोविंद सिंह डोटासरा कहते हैं राहुल गांधी कांग्रेस में नए युग की पहचान बन गए हैं।
मेरी बात में लिखा है तू न थकेगा कभी, तू न रुकेगा कभी,तूने मुड़ेगा कभी,
कर शपथ कर शपथ कर शपथ।अग्निपथ अग्निपथ अग्निपथ।
* राहुल गांधी की जिंदगी के अनछुए पहलू। इसमें बहुत सी बातें लिखी हुई है। वे पांच कारण हैं जो राहुल गांधी को सन् 2024 में भाजपा पर बढत दिला सकते हैं। राहुल अगर कुछ सुझाव पर गौर करें तो हो सकता है कि 2024 में देश का ताज उनके पास हो।
भारत जोड़ो यात्रा की जरूरत क्यों?यूपीए की सरकार होती थी तब क्या होता था?
वर्तमान में महंगाई बढ़ाने वाली मोदी सरकार का नारा है देश मजबूत हाथों में है चिंता ना करें, हिंदू खतरे में है वगैरा-वगैरा।
राहुल गांधी के नेतृत्व में 7 सितंबर 2022 में भारत को जोड़ने की यात्रा शुरु की गई। यात्रा कुल 3570 किलोमीटर होगी। यह 12 राज्यों 2 केंद्र शासित प्रदेशों के अंतर्गत आने वाले 113 स्थानों और 65 जिलों में से होकर गुजरेगी।
* इस यात्रा को लेकर कई सवाल पैदा पैदा होते हैं जिन पर चर्चा करना जरूरी है कि क्या भारत टूटा है जो जोड़ने की जरूरत आ पड़ी है।
लेखक का अनेक बातों में इस पर विश्लेषण है और बड़ा रोचक विश्लेषण किया हुआ है।
राजनीति के अनेक पृष्ठ इस पुस्तक के अंदर हैं चैप्टर देखें। जब अलवर महाराज ने अपने राज्य का झंडा नहीं झुकाया था। पुरखों के हत्यारों के देश में राष्ट्रपति।कांग्रेस पर बहुत कुछ लिखा हुआ है। भाजपा के प्रमोद महाजन पर भी है।
एक बड़ा चैप्टर है गेमचेंजर होगी राहुल की भारत जोड़ो यात्रा। भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी को मिलेगा लाभ।लाखों यात्री भी होंगे शामिल।जनता से जुड़ना कितना संभव होगा। योगेंद्र यादव का कथन आएगा काम। मुद्दों पर संघर्ष का संदेश देने की रहेगी कोशिश। राहुल की दावेदारी होगी मजबूत।राहुल गांधी की तपस्या है भारत जोड़ो यात्रा। प्यार से नफरत को जीतने में कामयाब होगी कन्याकुमारी से शुरू हुई भारत यात्रा। कांग्रेस के अस्तित्व की जंग। नेतृत्व के सवाल का मिला जवाब। विपक्षी दलों के नेतृत्व का जवाब क्या लोगों को जोड़ पाएगी कांग्रेस। यात्रा का खाका।
यात्रा में तीन तरह के यात्री शामिल। भारत यात्री प्रदेश यात्री अतिथि यात्री। कांग्रेस का दक्षिण भारत पर खास ध्यान। भारत में भाजपा में वंशवाद। पुस्तक में सिंधिया परिवार जाखड़ वंश वीरेंद्र सिंह परिवार अधिकारी परिवार बहुगुणा परिवार यादव परिवार प्रसाद परिवार प्रवीण आदि पर भी लिखा हुआ है।
भारत जोड़ो यात्रा पर आगे की रणनीति क्या होगी? भारत यात्रा को लेकर कांग्रेस में क्या मंथन है? इस यात्रा का उद्देश्य क्या है? राहुल गांधी ने मोदी पर कड़ा हमला बोला? भारत जोड़ो यात्रा से देश चुनावी मोड पर! राहुल का नया अवतार! भारत जोड़ो यात्रा कर्नाटक चुनाव! कांग्रेस ने बनाया यह खास प्लान! भारत जोड़ो यात्रा से है कनेक्शन। यात्रा से काफी कुछ सीखने को मिला। राहुल गांधी का मां के प्रति प्रेम। अडानी के निवेश पर सियासत। भाजपा ने कांग्रेस नेतृत्व पर साधा निशाना। क्या यह राहुल गांधी का गंभीर प्रयास है या एक छलावा है?
* बेरोजगारी का सामना कर रहे हैं युवा एक बहुत बड़ा चैप्टर चुनौती देने वाला चैप्टर है।
** देश के राजा का हुक्म है! हर आवाज को कुचल दो। राहुल गांधी ने कहा देश के राजा का हुक्म है बेरोजगारी महंगाई नफरत और असमानता के खिलाफ उठने वाली हर आवाज को कुचल दिया जाए। उनके अरमान और फरमान के आगे सीना ताने बेखौफ युवा खड़े हैं जिनकी गरजना अब देश की हर एक सड़क पर गूंज रही है। यह दबने नहीं देंगे।
बहुत महत्वपूर्ण है इंडिया में अपना हक मांगने वालों के लिए राहुल की सलाह।
मोदी के न्यू इंडिया नारे पर भी कटाक्ष और महत्वपूर्ण है।राहुल गांधी ने जो कहा कि हर राज्य के छात्रों को मातृभाषा में परीक्षा हो जो छात्र अपनी मातृभाषा में परीक्षा देना चाहता है तो उसे उसके लिए अनुमति होनी चाहिए। यह बहुत महत्वपूर्ण बात है जो देश की तस्वीर को बदलने वाली है। इससे निश्चित रूप से देश की तस्वीर बदल सकते हैं।
एक चैप्टर है यात्रा में राहुल गांधी ने क्या पाया? राहुल गांधी का लोगों से जुड़ाव और संवाद सड़क पर उतरने का जज्बा। कांग्रेस के भीतर आत्मविश्वास। कांग्रेस किसानों के साथ थी है और रहेगी।
यह भी एक चैप्टर है। अशोक गहलोत कहते हैं, बीजेपी के लोग ताना-बाना बुन रहे हैं। आज मुल्क में सांप्रदायिकता तनाव और हिंसा का माहौल बना है वह देश बर्दाश्त नहीं कर पाएगा अफोर्ड नहीं कर पाएगा। गहलोत ने कहा कि मेरा मानना है कि राहुल गांधी का संदेश आपस में भाईचारा सभी जातियों में सभी धर्मों में सभी वर्गों में सद्भावना का माहौल बने। ऐसा माहौल बनाने की आज आवश्यकता है। इसके लिए राहुल गांधी निकल पड़े हैं।उनका कारवां चल पड़ा है।डंके के साथ चल पड़ा है। हिम्मत और हौसले के साथ है।राहुल गांधी का कमिटमेंट देशवासियों के साथ में है। गरीबों दलितों पिछड़े के साथ में है।किसानों के साथ में है। मजदूरों के साथ में है।राहुल गांधी देश को बचाने की चिंता कर रहे हैं।देश को अखंड रखने की चिंता कर रहे हैं।
गहलोत ने कहा कि राजनीति के अंदर उनकी यात्रा शुभ होगी। आने वाले वक्त में राहुल गांधी का संदेश वर्गों के बीच में जाएगा। एक अध्याय है
बिलारी से सोनिया का कनेक्शन।
राहुल की यात्रा से नरेंद्र मोदी घबराए। बहुत महत्वपूर्ण एक चैप्टर है।मोदी का नया लुक बिजनेस सूट में मोदी। यात्रा से खिसक गई है बीजेपी की जमीन।
फायदे की उम्मीद। एक प्रतिज्ञा और लगातार चलने का जज्बा। यह है भारत यात्रा में राहुल गांधी के सहयात्री। संघ झुका मुस्लिम मतदाता की तरफ। इंडियन एक्सप्रेस ने मोदी सरकार का बैंड बजाया। सोनिया गांधी के नेतृत्व में यूपीए थर्ड का गठन।
* देश में आज लुटेरों का गिरोह सत्तारूढ़ है। अमीरों के लिए काम कर रही मोदी सरकार। भाजपा की तुलना राक्षसों से।पहले सिरसा और फतेहाबाद। नीतीश तेजस्वी रैली स्थल पर।
रैली से देश भर में संदेश। देश भर के विपक्षी नेता एक मंच पर। इनेलो की रैली में विपक्षी नेताओं का जमावड़ा।चौटाला के परिवार में भी चल रहा है पावर गेम।सोनिया गांधी से लालू नीतीश की मुलाकात।
* मीडिया से गायब राहुल की भारत जोड़ो पदयात्रा। भारत जोड़ो यात्रा से भाजपा में डर का भाव। स्वागत है राहुल गांधी। राहुल गांधी की बड़ी लकीर।मैं सदा केरल वासियों का रहूंगा ऋणी। राहुल लेफ्ट गठबंधन का विरोध। राहुल ने केरल को बताया अपना घर।भारत से जोड़ो यात्रा लोगों से जुड़ने का जरिया। महात्मा गांधी को श्रद्धा सुमन अर्पित। सोनिया गांधी पदयात्रा में शामिल हुई।सोनिया के यात्रा में जुड़ने के सियासी मायने क्या है? कांग्रेस को इससे क्या फायदा हो सकता है? सोनिया के शामिल होने से भाजपा पर क्या असर है? कांग्रेसका दक्षिण कनेक्शन? बारिश के बीच राहुल की जनसभा। कांग्रेसी नेताओं व कार्यकर्ताओं का बढ़ा उत्साह। लंबे समय बाद सोनिया ने दिखाई सक्रियता।खड़गे मेरे अध्यक्ष हैं मुझे निर्देश दे सकते हैं-राहुल गांधी। प्रतिज्ञा और लगातार चलने का जज्बा यह है भारत जोड़ो यात्रा। राहुल गांधी के सहयात्री। भारत जोड़ो यात्रा से राहुल ब्रांड बने। कांग्रेस की नीति क्या है? इस यात्रा से राहुल गांधी को क्या मिलेगा? कांग्रेस को क्या मिलेगा? कर्नाटक में सबसे अधिक दिन की यात्रा। हाफ पेंट में आग की लपटें। बीजेपी को भारी पड़ रही जल्दबाजी। कांग्रेस की राजनीति की इसलिए चर्चा। रणनीति में यह दिखा बदलाव। कितना फायदा इसका आकलन बाकी।
अशोक गहलोत कह रहे हैं । आजादी के बाद का सबसे बड़ा घोटाला।
भारत जोड़ो यात्रा का आंध्र प्रदेश में जोरदार स्वागत। राजस्थान में राहुल की यात्रा। भारत जोड़ो यात्रा का 50 दिन। हर क्षण विनम्रता और प्रेम से भरा। मोदी का गोदी मीडिया कैमरा। ओछे हथकंडे पर उतरी भाजपा 50 से अधिक पोस्टर फाड़े। रामदेव ने राहुल गांधी की यात्रा की तारीफ की। उड़ीसा में भारत जोड़ो यात्रा। पटेल और इंदिरा को श्रद्धांजलि। भारत जोड़ो यात्रा का विचार कहां से आया? मोरबी हादसे में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि? मोरबी पुल हादसा बनेगा बड़ा चुनावी मुद्दा? क्या इतिहास में यह यात्रा इतिहास बदलने वाली होगी? जन नायक बनकर उभरे राहुल गांधी- अशोक गहलोत। भारत जोड़ो यात्रा से राहुल का कद बढ़ा। राहुल के काम से कितने संतुष्ट। केरल का आकलन। नोटबंदी की छठी बरसी।नोटबंदी के उद्देश्य क्या थे? टि्वटर हैंडल ब्लॉक करने के आदेश रद्द। खबरिया चैनलों का पतन। संसद में आवाज दबा दी जाती है। बहुत महत्वपूर्ण चैप्टर है। यह बिहार में भारत जोड़ो यात्रा बड़ी चुनौती। भारत जोड़ो यात्रा के जरिए कांग्रेस की प्लानिंग सत्ता में रहते हुए शुरू हुई थी। कांग्रेस संदेश यात्रा राजीव गांधी ने भी की थी यात्रा। वाईएसआर रेड्डी की आंध्र प्रदेश में यात्रा से मिली थी कामयाबी। जगन रेड्डी की प्रजा संकल्प यात्रा ने दिलाई सत्ता। एक बहुत बड़ा चैप्टर है। सोशल मीडिया के जरिए चुनाव में धांधली। राहुल के जारी वीडियो में कही गई पांच बातें।कांग्रेस के मित्र दलों में चर्चा शुरू। विशाल की कुर्बानी बहुत बड़ी।भारत जोड़ो यात्रा महाराष्ट्र के अपने अंतिम चरण में से गांव की ओर बढ़ी। राहुल गांधी को बम से उड़ाने और कमलनाथ को गोली मारने की धमकी। यह एक ऐतिहासिक क्षण है।करगिल युद्ध के नायक दीपचंद भी भारत जोड़ो यात्रा में शामिल।
राहुल गांधी की यात्रा:यह हो सकते हैं मायने। गहलोत नहीं चाहेंगे कि सचिन मुख्यमंत्री बने। छत्तीसगढ़ के मिट्टी पानी। गहलोत पायलट की दुश्मनी पुरानी। राहुल का भाजपा पर हमला। इंदिरा गांधी जयंती शक्ति भाग के रूप में मनाई। नया सूर्य उदय होगा -कृष्णा पूनिया। मुझे राहुल गांधी के साथ चलने पर गर्व -दिव्या। यात्रा से ब्रेक लेकर गुजरात में चुनाव प्रचार। राहुल गांधी की यात्रा हिंदी बेल्ट में प्रवेश। राहुल का केंद्र सरकार पर निशाना।पदयात्रा के रास्ते में 321 लोकसभा क्षेत्र। राहुल का चेहरा बदला क्या यात्रा से राजनीति भी बदलेगी? राहुल गांधी को इस यात्रा की आवश्यकता। वसुंधरा राजे के चुनावी गढ़ में यात्रा। राजस्थान की कांग्रेस राजनीतिक। राजस्थान के साथ न्याय होगा। पायलट की वजह से पार्टी में माहौल खराब हुआ।पायलट को लग रहा था कि वह तो सीएम बन रहे हैं।पायलट को चाहते थे मंत्री बनना।गहलोत ने चलाया ब्रह्मास्त्र। राजस्थान में भारत जोड़ो यात्रा।
लेखक इस यात्रा को लेकर बहुत आशान्वित है कि यह देश में बदलाव लाने वाली यात्रा सिद्ध होगी। ज्योतिषाचार्यों ने इस यात्रा को 2024 में फलदायक बताया है।
इस पुस्तक का बैक कवर पढने वाला है।
440 पृष्ठों की पुस्तक में 85 चित्र हैं जो पुस्तक का महत्व बढाते हैं।
* प्रथम संस्करण. दिसंबर 2022.
मूल्य 640 रू.
पुस्तक ऑनलाइन एमेजॉन और फिल्पकार्ट से मंगवाई जा सकती है।
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पुस्तक के प्रकाशक हैं.
तनेशा पब्लिशर्स.
254,खुरियाखरत्ता नं 10,बिंदु खट्टा,
लाल कुआं,
नैनीताल ( उत्तराखंड) भारत.
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दि.18 जनवरी 2023.
पुस्तक चर्चा-
करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
1965-66 से पत्रकारिता व लेखन.
( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ (राजस्थान )
94143 81356.
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गुरुवार, 16 जून 2022
राजस्थान के यशस्वी पत्रकार: पुस्तक में शामिल 510 पत्रकारों की सूची.
* विशेष*
यह पुस्तक पत्रकारों के लिए महत्वपूर्ण है। पत्रकारों को पढनी चाहिए. पत्रकार कैसा होना चाहिए। यह भी उल्लेख है।
इसमें शामिल 510 पत्रकारों के नामों की जानकारी सभी चाहेंगे। इस पोस्ट में सूची और पुस्तक प्रकाशक का नाम पता भी है। पत्रकार इसका पठन कर सकें इसलिए नामों की सूची की फोटो यहां लगाई है। इन पत्रकारों की पत्रकारिता का पुस्तक में वर्णन है।
प्रस्तुत कर्ता.
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ़.
94143 81356.
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बुधवार, 15 जून 2022
राजस्थान के यशस्वी पत्रकार. ले० सत्य पारीक वरिष्ठ पत्रकार (510 पत्रकारों का वर्णन)
समीक्षक: करणीदानसिंह राजपूत *
इस पुस्तक में उन तमाम कलाकारों को लेकर लिखा गया है जो अपनी कलम से अंग्रेजों से लेकर राजनेताओं अधिकारियों समाज कंठ को तक को हिला चुके हैं कलमकार के पास कलम होती है ना तीर होता है न तलवार होती है
" राजस्थान के यशस्वी पत्रकार " सन् 2016 में जयपुर के वरिष्ठ पत्रकार श्री सत्य पारीक ने प्रकाशित की। इस पुस्तक में राजस्थान के 510 पत्रकारों का कर्म क्षेत्र का वर्णन है। पत्रकार किस समाचार पत्र,समाचार एजेंसी आदि से जुड़े रहे।
इतने पत्रकारों की जानकारियां एकत्रित करने का कार्य किसी शोध से कम नहीं हो सकता।
मैं इसे पत्रकारों पर शोध करना ही मानता हूं।
लेखक ने पुस्तक स्वतंत्रता संग्राम के कलम योद्धाओं को समर्पित की है। वर्तमान में ऐसे पत्रकार हैं तो सही लेकिन बहुत कम है।
पुस्तक में लेखक का कथन है जिसमें लिखने के लिए प्रसिद्ध पत्रकारों सर्व श्री विजय भंडारी, सीता राम झालानी,श्याम आचार्य ने मार्ग दर्शन करने का वर्णन है।
श्री विजय भंडारी ने इस पुस्तक को ऐतिहासिक बताया है। उनका यह वर्णन चार पृष्ठों में इसी पुस्तक में शामिल है।
पुस्तक एक परिभाषा नाम का वर्णन सीता राम झालानी द्वारा लिखित भी इसी पुस्तक में शामिल है। झालानी ने लिखा है कि एक समय था जब वर्षों तक कलम घिसने के बाद पत्रकार संपादक बनता था,आज स्थिति ठीक इसके विपरीत है, कलम घिसना तो दूर रहा, पकड़ना बाद में सीखता है और पत्रकार संपादक पहले बन जाता है। झालानी लिखते हैं कि पत्रकार कौन होते हैं किस प्रकार के व्यक्ति पत्रकार कहला सकते हैं।
*कौन है पत्रकार?
हो सच का पैरोकार, पत्रकार वही है।
बने नहीं पक्षकार पत्रकार वही है।
तलवे किसी समर्थ के सहलाये नहीं कलम से,
पैनी हो जिसकी धार पत्रकार वही है।
काजल की कोठरी से बेदाग लौट कर,
आये जो बार-बार पत्रकार वही है।
मर मिटने का जज्बा जगाए जिसकी लेखनी,
भ्रष्ट तंत्र पर करे प्रहार,पत्रकार वही है।
धनवान ही बनता है तो कारोबार बहुत है।
बिकना ही है,तो देश में खरीदार बहुत है।
किसी मजलूम की,
आवाज तो बन के दिखा,
कहने को इस देश में पत्रकार बहुत है।
Sunny Sebastian का इंग्लिश में लिखा लेख
The Annals of Rajasthan journalism भी पुस्तक की रोचकता बढाता है।
राजस्थानी ग्रथांगार जोधपुर इसके प्रकाशक व वितरक हैं। 206 पृष्ठों की 350 रू. कीमत की यह पुस्तक बहुत अच्छी है।
समीक्षक-
करणीदानसिंह राजपूत.
आयु 77 वर्ष.
(59 साल का पत्रकारिता का अनुभव)
स्वतंत्र पत्रकार,( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान)
94143 81356.
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रविवार, 12 जून 2022
देश के हालात,संविधान व गांधी पर विचार: रमेश छाबड़ा की काव्यकृति की विमोचन रिपोर्ट
*असहमति का अर्थ अराजकता नहीं होता— प्रो त्यागी*
सूरतगढ़ 12 जून 2022.
असहमति का अर्थ अराजकता नहीं होता। असहमति के मूल में भूत,वर्तमान और भविष्य तीनों सम्मिलित होते हैं।यह लोकतन्त्र की सबसे बड़ी विशेषता है”-यह बात प्रख्यात शिक्षाविद् और गीतकार प्रो चंद्रभानु त्यागी ने रमेश चंद्र छाबड़ा की पुस्तक “असहमति के स्वर” के विमोचन समारोह में कार्यक्रम के अध्यक्ष के रूप अपने संबोधन में कही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार डा मंगत बादल और विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत थे।
प्रो चंद्र भानु त्यागी ने अपने संबोधन में कहा कि असत्य का बोलबाला तभी तक है जब तक सत्य प्रकट नहीं होता। सत्य की अनुपस्थिति ही असत्य है। इसलिये आवश्यकता केवल सत्य को सामने लाने की है। उन्होंने कहा कि जिसके भीतर की कविता समाप्त हो जाती है वही व्यक्ति हत्यारा या दंगाई हो सकता है। उन्होंने कहा कि आज गांधीवाद की आवश्यकता न केवल भारत को है, अपितु पूरी दुनिया को है। प्रो त्यागी ने कहा कि जिस व्यक्ति में जिज्ञासा बरक़रार रहती है वह शिखर से भी आगे नये शिखर गढ़ता है।लेखक का जिज्ञासु होना अति आवश्यक है, तभी वह अपने कर्त्तव्य का पालन भली भाँति कर सकता है। उन्होंने गीता के अनेक कथ्यों का विस्तार से वर्णन किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि डा. मंगत बादल ने कहा कि हालाँकि कविता क्रांति नहीं कर सकती लेकिन क्रांति के लिये बीज ज़रूर तैयार कर सकती है।जब तक सत्ता को चुनौती देने वाले साहित्यकार रहेंगे तब तक समाज को किसी चिंता की ज़रूरत नहीं है।
विशिष्ट अतिथि करणीदानसिंह राजपूत ने कहा कि आज जिस देश राह पर जा रहा है वहाँ, तहज़ीब का बचना मुश्किल लगता है। ऐसे माहौल में लेखकों को उठना ही होगा और अपनी असहमति दर्ज करवानी ही पड़ेगी। यदि साहित्यकार नहीं खड़ा होगा तो देश की विरासत विध्वंस का शिकार हो जायेगी। राजपूत ने रमेशचंद्र छाबड़ा के व्यक्तित्व और कवि रूप तथा काव्य यात्रा के कई सालों का रोचक वर्णन किया। राजपूत ने कहा कि कवि संघर्ष करने वाले,परेशानियां भोग रहे लोगों के बीच खड़ा होकर बात रख रहा है।
रमेशचंद्र छाबड़ा की काव्यकृति असहमति के स्वर पर दो पत्र पढे गए।
डा कृष्ण कुमार आशु ने पत्र वाचन करते हुए कहा कि कवि किसी के विपक्ष में नहीं होता अपितु वह सत्य का पैरोकार होता है।लेकिन आजकल कवियों ने भी सत्ता सुख के लालच में अपने कवित्व को ख़त्म कर दिया है। उन्होंने कहा कि रमेश चंद्र छाबड़ा ने इस दौर में असहमति का स्वर सशक्त रूप से दर्ज करवाया हैं।
प्रह्लाद पारीक ने भी पत्र वाचन करते हुए कहा कि रमेश चन्द्र छाबड़ा ने अपने कवि होने के धर्म का बखूबी पालन किया और वर्तमान समाज में मानवीय पीड़ाओं को अपना स्वर दिया है।
पुस्तक के लेखक रमेश चंद्र छाबड़ा ने अपनी बात कही। उन्होंने कहा कि आज समाज का भी एक तरह से विभाजन हो गया है।ऐसे माहौल में चुप नहीं रहा जा सकता।इस नफ़रत के माहौल के ख़िलाफ़ व्यक्ति को खड़ा होना ही चाहिये। इसी भाव से इस पुस्तक की कविताओं की रचना हुई है। उन्होंने कहा कि इन कविताओं का स्वर किसी दल का राजनैतिक विरोध नहीं है बल्कि नकारात्मक माहौल के प्रति असहमति का स्वर है।
आकाशवाणी के पूर्व निदेशक दिनेश चन्द्र शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
इससे पूर्व ब्लॉसम स्कूल के निदेशक अनिल चुघ ने सभी अतिथियों का स्वागत किया तथा कार्यक्रम के अंत में डा. विशाल छाबड़ा ने सभी का आभार व्यक्त किया।
काव्यकृति पर विचार रखते हुए वरिष्ठ कवि राजेश चड्ढा ने कार्यक्रम का रोचकता से संचालन किया।
कार्यक्रम में डा. संदेश त्यागी, प्रो. मोहित कुमार,डा. हरिमोहन सारस्वत 'रूंख' लेखराज छाबड़ा, इंजीनियर रमेश चन्द्र माथुर, डा जयंत व्यास, लेखक नंदकिशोर सोमानी, संजय चुघ,मदन बैनीवाल, परसराम भाटिया, राकेश राठी, जयप्रकाश गहलोत, सिकंदर, विपिन छाबड़ा, विशाल छाबड़ा, अंतरिक्ष शर्मा, तनिष्क, कु.भूमिका आदि गणमान्य उपस्थित थे।०0०
गुरुवार, 4 फ़रवरी 2021
👌 विजय भंडारी जी की आत्मकथ्य पत्रकारिता पुस्तक 'भूलूं कैसे'- करणीदानसिंह राजपूत.
* राजस्थान पत्रिका जयपुर से भेजी गई माननीय विजय भंडारी जी की पुस्तक 'भूलूं कैसे'आज मुझे मेरे कार्यालय में आनंद डागा के माध्यम से प्राप्त हुई।
भंडारी जी राजस्थान पत्रिका में काफी समय तक प्रधान संपादक रहे। विजय भंडारी जी की यह है पुस्तक आत्मकथ्य है।
श्रद्धेय कर्पूर चंद कुलिश जी की जीवनी पढ़ने के बाद समझता हूं कि यह दूसरी महत्वपूर्ण पुस्तक है। अभी मिलने के बाद प्रारंभ के कुछ पृष्ठ पढ़ पाया हूं। कुछ पृष्ठों के पढने से ही लग रहा है कि भंडारी जी ने अपना बचपन छात्र जीवन जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था उस समय का भी रोचक वर्णन किया है। पत्रकारों पर भी बहुत कुछ लिखा है। अनेक पत्रकारों का उल्लेख है।
मैंने माननीय विजय भंडारी जी के कार्यकाल में बहुत कुछ सीखा और बहुत छपा भी था।
मेरा यह मानना है कि यह पुस्तक पत्रकारों के लिए भी अति महत्वपूर्ण पुस्तक है जो इसे पढ़ पाएंगे बहुत कुछ सीख देने वाली है।
पूरी पढ़ने के बाद फिर कुछ लिखूंगा।
पत्रिका की यह खूबी रही है कि माननीय गुलाब जी की पुस्तकें भी जब नई आई तब सूरतगढ़ में विशेष रूप से मुझे भिजवाई गई।
आज यह पुस्तक मिलने पर भी बहुत प्रसन्नता हुई।
विजय भंडारी बहुत सख्त संपादक रहे। समाचारों में त्रुटियां सहन नहीं करते थे। उस समय प्रत्येक संस्करण में स्थानीय संपादक ही प्रथम पृष्ठ पर पहली खबर बनाते थे। शाम को 5 से साढे पांच बजे भंडारी जी फोन पर बात करते। उनकी निगाह से समाचारों की त्रुटियां छिपी नहीं रहती। स्थानीय संपादक को जवाब देना होता था।
उनके कार्यकाल में हर पत्रकार को जो पत्रिका में किसी भी पद पर रहा उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला।
इस पुस्तक में बहुत से पत्रकारों का भी वर्णन है। वर्तमान प्रधान संपादक गुलाब कोठारी और मिलाप कोठारी का भी वर्णन है।
अभी तो यही कह सकता हूं कि इस पुस्तक में राजस्थान पत्रिका का एवं राजस्थान का बहुत बड़ा इतिहास पत्रकारिता के साथ लिखा हुआ है।
पत्रिका के बाद विजय भंडारी जी ने स्वतंत्र पत्रकारिता भी की।
दि.4 फरवरी 2021.
करणी दान सिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.
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बुधवार, 20 जनवरी 2021
मनोज स्वामी की राजस्थानी बाल एकांकी संग्रह "सरहिन्द रो साको"का गुरू गोविंदसिंह जयंती पर विमोचन-
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 20 जनवरी 2021.
गुरू गोविन्दसिंह जयन्ती के पावन पर्व पर राजस्थानी के वरिष्ठ साहित्यकार ,राजस्थानी रामलीला के लेखक मंचनकर्ता,केन्द्रीय साहित्य अकादमी पुरस्कार ( अनुवाद) से सम्मानित मनोज कुमार स्वामी की राजस्थानी बाल एकांकी संग्रह "सरहिन्द रो साको" पुस्तक का विमोचन किया गया। यह लोकार्पण कार्यक्रम गुरूद्वारा गुरू सिंघ सभा सूरतगढ़ में हुआ। गुरू गोविंद सिंह जी के दो पुत्रों को दीवार में चिनवाए जाने की शहादत पर पहली एकांकी है और पुस्तक के आवरण पृष्ठ पर उसी शहादत का रेखाचित्र प्रकाशित है।
मनोज स्वामी को गुरूद्वारा सिंह सभा कमेटी ने सिरोपाव भेंट कर सम्मानित किया।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर सूरतगढ़ के प्रसिद्ध व्याख्याता प्रवीण भाटिया ने कहा की "सरहिन्द रो साको" बाल एकांकी संग्रह बालकों में देश भक्ति की भावना को जगाने का महत्वपूर्ण कार्य करेगी और मातृभाषा राजस्थानी के प्रति बालकों का जुड़ाव होगा।
अंग्रेजी शिक्षक अनिल चुघ ने इस बाल एकांकी संग्रह को बालकों में संस्कार के बीजारोपण की महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
पुस्तकों के समीक्षक मांगीलाल शर्मा ने मनोज स्वामी की रचनाओं को समाज के हर वर्ग की समस्या को उजागर करने वाली सामाजिक,नैतिक शिक्षा से ओतप्रोत बताया।
राजस्थानी के व्याख्याता सुरेन्द्र स्वामी के अनुसार राजस्थानी भाषा के प्रति तन,मन धन से समर्पित मनोज स्वामी की प्रत्येक रचना अपने आप में महत्वपूर्ण है। हमें मनोज स्वामी की साहित्य साधना से शिक्षा लेते हुए ,अपनी मातृभाषा राजस्थानी का प्राथमिक शिक्षा,उच्च शिक्षा में विस्तार करना अतिआवश्यक है।
एडवोकेट कमल पारीक ने इस अवसर पर सरहिन्द रो साको पुस्तक के विभिन प्रसंगो पर चर्चा करते हुए बताया की प्रदेश की प्रतियोगी परीक्षाओं में राजस्थानी भाषा कला, संस्कृति, साहित्य का पाठ्यक्रम जुड़ने से राजस्थान के युवाओं को रोजगार के अधिक अवसर मिलने शुरू हुए हैं। इस लिए भाषा का विस्तार और संवर्धन जरूरी है।
गुरुद्वारा श्री सिंह सभा अध्यक्ष प्रीतम सिंह गिल,गुरदीप सिंह भूंई, टैगोर महाविद्यालय के निदेशक गगन सिंह, ओमप्रकाश साबनिया,मुरलीधर पारीक,हरीश स्वामी, विविधा अध्यक्ष योगेश स्वामी, किशन स्वामी,अशोक स्वामी, टाबर टोली में निखिल,रामप्रताप, सुरजीत, इमरान, रोहित, उत्तम, तपेश, राजकमल आदि मौजूद रहे। 00
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शुक्रवार, 1 फ़रवरी 2019
नाव अर जाळ उपन्यास का विमोचन समारोह:कलमकारों का संगम:
सूरतगढ़, 17 अगस्त 2014.
राजस्थानी साहित्यकार मनोज कुमार स्वामी सूरतगढ़ ने मलयालम भाषा के साहित्यकार तकषी शिव शंकर पिल्ले के उपन्यास चैम्मीन के हिन्दी अनुवाद मछुआरे का आगे राजस्थानी में अनुवाद किया। उसी राजस्थानी अनुवाद नाव अर जाळ का विमोचन समारोह 17 अगस्त 2014 को हुआ जिसमें साहित्यकारों,पत्रकारों,राजनीतिज्ञों,समाजसेवियों,शिक्षाविदों व राजस्थानी भाषा प्रेमियों का अनूठा संगम हुआ और पत्रकारिता व साहित्य में नये संपर्क नए सृजन के संकेत सामने आए। तकषी शिव शंकर पिल्ले का उपन्यास चैम्मीन केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत है। केन्द्रीय साहित्य अकादमी ने ही उसके हिन्दी अनुवाद से आगे राजस्थानी में अनुवाद करवाया।
प्रसिद्ध पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत की अध्यक्षता में हुए विमोचन समारोह में केन्द्रीय साहित्य अकादमी से पुरस्कृत प्रसिद्ध साहित्यकार डा.भरत ओळा मुख्य अतिथि थे। ओळा ने अपने भाषण में कि मूल लेखन से अनुवाद करना अधिक दुष्कर कार्य है। अनुवाद में भावनाओं के अनुरूप होने वाला अनुवाद ही सही माना जाता है जो कार्य मनोज स्वामी ने किया है।
मनोज कुमार स्वामी ने अनुवाद में होने वाले कार्य और परेशानियों व साथ देने वालों का ब्यौरा दिया।
राजस्थानी अनुवाद पर श्रीमती सुमन शेखावत ने पत्र वाचन किया जिसमें एक एक बात खुलासा की गई।
पूर्व विधायक और वर्तमान में भाजपा श्री गंगानगर जिलाध्यक्ष अशोक नागपाल व गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया विशिष्ट अतिथि थे।
अध्यक्षता करते हुए करणीदानसिंह राजपूत ने बताया कि मनोज स्वामी को एक मछुआरे के रूप में जीते हुए देखा जिसके कारण यह अच्छा अनुवाद हुआ।
शिक्षाविद् महेन्द्रसिंह शेखावत ने मंच संचालन किया।
अपडेट 1-2-2018.
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