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शनिवार, 6 मई 2023

वीर तेजाजी जाट संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉ. दलीप सिहाग का स्वर्गवास.

 

* करणी दान सिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 6 मई 2023.

 इलाके के जाने-माने वीर तेजाजी जाट संस्थान के पूर्व अध्यक्ष डॉक्टर दलीपसिंह सिहाग स्वर्गवास हो गया। करीब 82 साल की उम्र में 6 मई शाम को उन्होंने अंतिम सांस ली। उनका अंतिम संस्कार 7 मई रविवार को होगा,सुबह 10 बजे निवास से अंतिम यात्रा होगी।

उन्होंने राजकीय सेवा पशु चिकित्सालय में की। लोकप्रिय पशु चिकित्सक कहलाए। मिलनसार व्यक्तित्व के धनी रहे।

आर्य समाज से जुड़ाव रहा।उनके निवास पर हिसार सिरसा आदि क्षेत्र से आर्य समाजी संत आते तब घर में हवन जरूर होता। 

 मैं व्यक्तिगत रूप से समाचारों के मामले में और जब घर में हवन होता था तब अक्सर वहां पहुंचता था। डॉक्टर दलीप सिंह सिहाग को मेरा नमन।परम ब्रह्म उन्हें मोक्ष प्रदान करें।०0०

शनिवार, 4 फ़रवरी 2023

सत्यवादी परिवार के स्तंभ चौ.ओम प्रकाश का निधन

 


सूरतगढ़। सुप्रसिद्ध स्वर्गीय हीरालाल सत्यवादी के सुपुत्र ओम प्रकाश का 75 वर्ष की आयु में 2 फरवरी 2023 को निधन हो गया।अपने पिता की तरह ओम प्रकाश सहज शांत प्रकृति के व्यक्ति रहे। उनका जन्म 10 जून 1948 को हुआ था। 


ओम प्रकाश मेरे मित्रों में से  थे।

मैंने सूरतगढ़ में जब 1966 में  लायब्रेरी शुरू की तब ये मेरे प्रमुख पाठकों में से भी थे। लायब्रेरी काफी समय रही और ओम भी सालों तक पुस्तकें पढते रहे। पुस्तकें पढना उनकी रुचि में था।

शहर की व्यवस्था पर अकाल पर धार्मिक कार्यक्रमों आदि पर  ओमप्रकाश से घंटों तक बातचीत होती रहती थी।

 पिता हीरालाल सत्यवादी शांत धीर गंभीर गौभक्त थे। अकाल के अंदर गायों की रक्षा के लिए घास आदि की व्यवस्था की। सच बोलने के आदी थे सच सुनने के आदी थे इसलिए सत्यवादी नाम से उन्हें संबोधित किया जाता था। इलाके के अंदर यह पूरा परिवार सत्यवादी परिवार के नाम से प्रसिद्ध रहा। हीरालाल जी सत्यवादी ने विधानसभा का चुनाव 1972 के अंदर लड़ा था।  जीत तो नहीं पाये लेकिन जनता में लोकप्रिय रहे। ओम प्रकाश जी की माता भी धर्मप्रेमी महिला थी। माता पिता के ये गुण ओमप्रकाश में भी रहे। पूरा परिवार लोकप्रिय परिवार रहा है। 

ओमप्रकाश के सुपुत्र चौधरी संजय कुमार सूरतगढ़ में पत्रकारिता कर रहे हैं।

मै परम ब्रह्म से कामना करता हूं कि ओमप्रकाश जी को मोक्ष प्रदान करें। नमन।

* करणीदानसिंह राजपूत.

सूरतगढ़.

94143 81356.

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रविवार, 29 जनवरी 2023

सेवानिवृत्त एसडीएम हर्षवर्धन सिंह राठौड़ का निधन

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 29 जनवरी 2023.

सेवानिवृत्त एसडीएम हर्षवर्धन सिंह राठौड़ का 26 जनवरी 2023 को पैतृक गांव लीलकी में निधन हो गया। 29 जनवरी 2023 को तीये की बैठक हुई।

सूरतगढ़ में 2005- 6 में राजस्व तहसीलदार पद पर रहे। पदोन्नति के बाद पीलीबंगा में एसडीएम पद पर रहे। वे संगरिया और टिब्बी में भी रहे। सूरतगढ़ में अकाल राहत कार्यों को देखने के लिए मैं टिब्बा क्षेत्र में उनके साथ बहुत बार गया।

वे लोकप्रिय अधिकारियों में रहे। विद्यार्थियों आदि के कागजात जाति मूलनिवास आदि के हस्ताक्षर करने में कभी ना नहीं करते। उनका कहना था' मेरे गुरू ने कहा था कि दस्तखत करने में कभी कंजूसी मत करना।

मेरे सामने एक दिन 8-9 साल का एक लड़का आया। उस दिन रविवार था। उसने कहा आय प्रमाण चाहिए। दस्तखत कराने हैं। फार्म पर कुछ भी लिखा हुआ नहीं था। उन्होंने कहा बेटा इनै भरा तो ला। फिर बोले चल मैं भर देता हूं। मुझसे पेन लिया। उससे पूछा पिताजी का नाम आदि। पिताजी क्या करते हैं। उसने कहा मजदूरी। कौनसा काम करते हैं। यह तो मालुम नहीं। उन्होंने मजदूरी लिखी और प्रचलित मजदूरी के हिसाब से आय लिख दी और हस्ताक्षर कर दिए। लड़के से बोले सामने दफ्तर में जा बठै चपरासी है,बीं सूं मोहर लगवाले। हस्ताक्षर उदारता के कारण केसों में भी उलझे।


वे उदार ह्रदय थे। खुद का पैसा लोगों के सहयोग में दे देते। बैंक की कर्ज वसूली में एकबार 70 हजार से अधिक कमीशन मिला। दो घंटे बाद मुझे बताया कि 10 बचे हैं। लोगों ने मांगे उनको दिए। चपरासी की पुत्री का ब्याह था दस हजार तो उसे दे दिए थे। 

सेवानिवृत्त होने के बाद अपने गांव लीलकी में ही रह रहे थे।

परमब्रह्म उन्हें मोक्ष प्रदान करें।

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ़ 

94143 81356.

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शनिवार, 17 दिसंबर 2022

मामी सा चंद्रकला का 12 दिसंबर 2022 को परलोक गमन

 

 * करणीदानसिंह राजपूत *


गुलाब मामा इंद्र सिंह चंदेल के स्वर्गवास के करीब डेढ़ माह बाद मामी सा चंद्रकला भी 12 दिसंबर 2022 को परलोक सिधार गई। उनकी उम्र करीब 75 वर्ष रही। 

गुलाब मामा करीब 81 वर्ष की उम्र में 28 अक्टूबर 2022 को परलोक सिधार गए थे।  उनकी घोषणा के अनुसार 29 अक्टूबर 2022 को मेडिकल कॉलेज जोधपुर को दे दान की गई मामाजी के देहावसान के बाद मामी सा ने अन्न ग्रहण बहुत कम कर दिया ना के बराबर और निरंतर शिथिल होती चली गई।

 12 दिसंबर को उन्होंने संसार त्याग दिया।

 बड़े पुत्र सुरेंद्र सिंह चंदेल ने 17 दिसंबर को हरिद्वार में मामी सा की हस्तियों का विधि विधान से विसर्जन किया। 

मामा जेसलमेर से जौधपुर आकर चौमुंडा कॉलोनी में बस गये थे। 

* परम ब्रह्म से निवेदन है मामी सा की आत्मा को मोक्ष प्रदान करें।

करणी दान सिंह राजपूत।

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करणीपालसिंह हनुमानगढ़, पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत सूरतगढ़, प्रेमसिंह सूर्यवंशी सूरतगढ़ की मामी थे। ०0०


गुरुवार, 24 नवंबर 2022

पूर्व विधायक हरचंद सिंह सिद्धू के बड़े भाई सरदार भोला सिंह का निधन

 

- करणीदानसिंह राजपूत -

 सूरतगढ़ 24 नवंबर 2022.

 पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील सरदार हरचंद सिंह सिद्धू के बड़े भाई स.भोला सिंह का करीब 90 वर्ष की उम्र में 23 नवंबर 2022 को निधन हो गया। भोला सिंह गांव खरलिया तहसील पीलीबंगा जिला हनुमानगढ़ में निवास कर रहे थे। उनका अंतिम संस्कार 23 नवंबर को खरलिया गांव में किया गया।

भोला सिंह काफी सालों से पशु सेवा करने में माहिर थे। वे बीमार पशुओं का प्राचीन देसी ग्रामीण नुस्खों से इलाज किया करते थे। 

उनका बड़े पुत्र सुख महेंद्र सिंह मार्केटिंग कमेटी का चेयरमैन है। छोटे पुत्र लाल सिंह खेती किसानी करते हैं।०0०



शुक्रवार, 11 नवंबर 2022

दानवीर इंद्र कोठारी सूरतगढ़ का हृदय आघात से दिल्ली में निधन

 

 * करणी दान सिंह राजपूत *

 सूरतगढ़ 11 नवंबर 2022.

शिक्षा को सर्वोपरि मानने वाले दानवीर इंद्र कोठारी का आज 11 नवंबर को दिल्ली में 82 वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन हो गया।


 सूरतगढ़ जैतसर इलाके में प्रसिद्ध इंद्र कोठारी ने सूरतगढ़ के सेठ रामदयाल राठी उच्च माध्यमिक विद्यालय में 1 वर्ष पूर्व 5 कक्षा कमरों का संपूर्ण निर्माण करवाया था।

माना जाता है कि इसमें करीब 40 लाख से अधिक रू लगे थे। इंद्र कोठारी ने सूरतगढ़ के इस विद्यालय की जीर्णशीर्ण हालत देखकर अपने आप को आगे किया। 

इंद्र कोठारी ने एक साथ पांच कक्षा कमरों का बरामदों सहित निर्माण करवाया और समस्त सुविधाएं भी उन कमरों के अंदर उपलब्ध करवाई थी।

 इंद्र कोठारी को राज्य सरकार स्तर पर हाल ही में सम्मानित किया गया था। रामदयाल राठी उच्च माध्यमिक विद्यालय के अंदर आयोजित एक समारोह में भी इंद्र कोठारी और अन्य दानदाताओं का सम्मान किया गया था। 

* इंद्र कोठारी के छोटे भाई राजेंद्र कोठारी मेरे सहपाठी रहे हैं जो जयपुर में रसायन का व्यवसाय करते हैं वे सेठ रामदयाल राठी उच्च माध्यमिक विद्यालय में मेरे साथ पढे थे। मैंने सन् 1963 में हायर सेकेंडरी परीक्षा उत्तीर्ण की थी।


 इंद्र जी कोठारी धर्म प्रिय व्यक्ति थे और मिलते रहते थे। एक पुस्तक भी उन्होंने प्रकाशित करवाई थी।

 उनके पुत्रों का दिल्ली में  रसायन का बहुत बड़ा व्यवसाय है। दिल्ली के निगमबोध घाट पर कल 12 नवंबर को उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

इन्द्र कोठारी का पहले जैतसर में व्यवसाय था। बाद में सूरतगढ़ रहने लगे। सूरतगढ़ में भी व्यवसाय था। इन्द्र कोठारी सूरतगढ़ के श्री माहेश्वरी सदन के अध्यक्ष थे।

इनके पिता गौरीशंकर कोठारी हिन्दू महासभा से जुड़े थे जो यहां गौशाला के अध्यक्ष भी रहे।

राजेंद्र कोठारी से मेरी अभी बात हुई है। राजेंद्र सूरतगढ़ आए हुए थे और अभी दिल्ली के लिए अवध आसाम एक्सप्रेस से रवाना होंगे और कल अंतिम संस्कार में शामिल होंगे।

कहते हैं होनी प्रबल होती है। 

राजेंद्र कोठारी की बड़े भाई इंद्र कोठारी से अभी 3 दिन पहले बात हुई थी। इंद्र कोठारी ने राजेंद्र को कहा था कि तुम सूरतगढ़ पहुंचो और वहां से फोन करना,मैं भी सूरतगढ़ पहुंच जाऊंगा। लेकिन यह सूरतगढ़ का मिलन हो नहीं पाया। अचानक आज 11 को उनका निधन हो गया। परम ब्रह्म से यही प्रार्थना है कि उन्हें मोक्ष प्रदान करें और उनकी सोच को अन्य लोगों में भी प्रवाहित करें।०0०

शनिवार, 29 अक्टूबर 2022

गुलाब मामा इन्द्रसिंह चंदेल जोधपुर का निधन:देह मेडिकल कॉलेज को दान

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 29 अक्टूबर 2022.

गुलाब मामा इन्द्र सिंह चंदेल का बीती रात करीब 10 बजे 81 वर्ष की आयु में  निधन हो गया। पूर्व घोषणानुसार डा.संपूर्णानंद मेडिकल कॉलेज को सौंपी जाएगी जिसकी तैयारी की जा रही है।  मामा ने 6 साल पहले देहदान के फार्म भर कर प्रक्रिया पूरी कर दी थी। मामा की ईच्छा रही कि चिता में जलाकर राख बनाने के बजाय देह का दान मेडिकल कॉलेज को किया जाए जहां विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए उपयोगी होगी। 

  कुछ वर्षों से श्वास रोग से जूझते मामा ने यह निर्णय लिया था। मामा चिकित्सालय में भर्ती थे जहां 28 अक्टूबर 2022 की रात को 10 बजे अंतिम सांस ली।

मामा जेसलमेर से जौधपुर आकर चौमुंडा कॉलोनी में बस गये थे। 

करणीपालसिंह हनुमानगढ़, पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत, प्रेमसिंह सूर्यवंशी सूरतगढ़ के मामा थे। ०0०


मंगलवार, 21 दिसंबर 2021

सुरेशसिंह सेवा निवृत्त राजस्व निरीक्षक नगरपालिका सूरतगढ़ का स्वर्गवास

 


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 21दिसंबर 2021.
सुरेश सिंह सेवानिवृत्त राजस्व निरीक्षक नगरपालिका का 19 दिसंबर 2021 को करीब 66 वर्ष की उम्र में स्वर्गवास हो गया।
उनके पैतृक गांव बामनवास जिला झुंझुनूं में स्वर्गवास हुआ। वे कुछ समय से गंभीर संक्रमण से रुग्ण थे। उनकी द्ववादसा रस्म 30 दिसंबर 2021 को पैतृक गांव बामनवास में होगी।
स्व.सुरेश सिंह की सूरतगढ़ में बहुत ही मिलनसार सज्जन व्यक्ति के रूप में  लोकप्रियता थी।
परमब्रह्म उन्हें मोक्ष प्रदान करे। यही कामना करते हैं।
करणीदानसिंह राजपूत
पत्रकार सूरतगढ़ 94143 81356.
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मंगलवार, 18 मई 2021

पूर्व जनसम्पर्क अधिकारी फरीदखान का स्वर्गवास राष्ट्रपति स्काउट पदक सम्मानित थे



* करणीदानसिंह राजपूत *


श्रीगंगानगर में जनसम्पर्क अधिकारी रहे श्री फरीदखान जी का आज निधन हो गया। वे कुछ समय से अस्वस्थ थे। उनका अधिकांश सेवा काल श्रीगंगानगर में ही रहा। वे सर्वप्रिय अधिकारी थे। सहायक निदेशक पद से सेवा निवृत्त हुए। मूल रूप में बीकानेर निवासी थे लेकिन श्री गंगानगर में अधिक रहने के कारण इसी मिट्टी से लगाव हो गया। उन्होंने सेवा निवृत्ति के बाद श्री गंगानगर को ही अपना ठिकाना बनाया और पत्रकार कालोनी में निवास बनाया।



वे1963 से भारत स्काउट गाइड आंदोलन से जुड़े। वे सादुल मल्टीपर्पज हा. से. स्कूल,बीकानेर में जब पढ़ रहे थे तब1965 में राष्ट्रपति स्काउट अवार्ड से सम्मानित हुए।


फरीदखान जी से अभी 23 फरवरी  2021 को दिल्ली सरायरोहिल्ला बीकानेर एक्सप्रेस में भेंट हुई थी। वे अपनी बेगम और पुत्र अमित के साथ गंगानगर से बीकानेर जा रहे थे। मैं और पत्नी सूरतगढ़ से बीकानेर जा रहे थे। सूरतगढ़ से लालगढ़ तक हमारी बातें चलती रही थी। उस समय अस्वस्थ ही थे। उच्च रक्तचाप के कारण एक आंख में विकार आया जिसका आपरेशन कराए कुछ दिन ही बीते थे।

पुरानी बातें चली और खूब चली। ऐसा सोचा नहीं था कि  उनका इंतकाल इतना जल्दी हो जाएगा।

खुदा उन्हें जन्नत बख्से।

*

दि. 18 मई 2021.

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

सूरतगढ़।

94143 81356.

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बुधवार, 7 अप्रैल 2021

प्रसिद्ध ईंट भट्ठा मालिक महावीर कोठारी सूरतगढ़ का निधन.दुर्घटना से 7 दिन बेहोश रहे।

 



- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 7 अप्रैल 2021.

प्रसिद्ध ईंट भट्ठा मालिक महावीर कोठारी का आज करीब 10 बजे निधन हो गया।
वे 31 मार्च की शाम को अपने ईंट भट्ठे के एक गहरे गड्ढे में गिरने से सिर की चोट से गंभीर घायल हो गए और दुर्घटना के बाद से बेहोश रहे। उनके होश में आने का इंतजार किया जाता रहा।
उनका उपचार घटना के बाद से श्री गंगानगर के टांटिया हास्पीटल में चल रहा था और उपचार के दौरान आज निधन हो गया।

महावीर कोठारी करीब 72 वर्ष के थे।

दुर्घटना उनके भट्ठे पर 31 मार्च 2021 की शाम को करीब 6 -साढे छह के समय हुई थी।

वे असावधानी से फिसल गए और गहरे गड्ढे में गिर गए थे। भट्ठे पर काम करने वालों ने उन्हें निकाला। उनके गिरने पर सिर के अलावा भी चोटें लगी थी।

उन्हें सूरतगढ़ में एपेक्स मल्टीस्पेशलिटी हास्पीटल में पहुंचाया गया और इसके तुरंत बाद गंगानगर लेजाया गया था।

महावीर कोठारी जी के पुत्र पवन कोठारी से मेरी  दुर्घटना के पांचवे दिन दोपहर बाद 2-25 मोबाइल वार्ता हुई थी।  पवन कोठरी ने उनके सिर में गंभीर चोट लगने से कोमा में होना बताया था।

माहेश्वरी समाज में कोठरी कुटुम्ब काफी बड़ा और समाजसेवी और धर्मप्रेमी है।
इस परिवार में महावीर कोठरी के घायल होने से सभी मिलने वाले ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि उनको शीघ्र स्वस्थ करें।
होनी प्रबल है।
- परमब्रह्म मोक्ष प्रदान करें। यही प्रार्थना है।-

सोमवार, 28 दिसंबर 2020

मशहूर इवेंट्स संचालक गोविंद छाबड़ा का निधन.

 



- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 28 दिसंबर 2020.
गोविंद जी छाबड़ा का आज सुबह जयपुर के एक  प्राइवेट हॉस्पिटल में सुबह करीब 7:30 बजे निधन हो गया गया।  गोविंदा छाबड़ा की की उम्र करीब 48 वर्ष थी। उनका अंतिम संस्कार कल दि. 29 दिसंबर 2020 को अरोड़वंश कल्याण भूमि में किया जाएगा।
सूरतगढ़ व्यापार मंडल के प्रमुख व्यापारी गोविंद के भाई सुरेंद्र छाबड़ा से जानकारी मिली। गोविंद छाबड़ा की लीवर की नली फटने की घटना दि. 16 दिसंबर को हुई जिससे खून बाहर निकलने लगा। उन्हें जयपुर के प्राइवेट हास्पीटल में भर्ती कराया गया जहां ईलाज चला। सुरेंद्र भी सूचना पर जयपुर पहुंचे और 26 को ही जयपुर से सूरतगढ़ लौटे। बीती रात को 11 बजे के करीब गोविंद से बात भी हुई कि हास्पीटल में कई दिन हो गए अब छुट्टी लें। सुबह अचानक तबीयत बिगड़ी। रक्तचाप बहुत गिर गया। वेंटिलेटर पर रखा गया। आज सुबह करीब साढे सात बजे निधन हो गया।
सूरतगढ़ निवासी गोविंद छाबड़ा कुछ वर्षों से जयपुर के झोटवाड़ा क्षेत्र में निवास कर रहे थे। वही मकान लिया और एक समाचार पत्र झोटवाड़ा झोटवाड़ा टाइम्स निकाला लेकिन मुख्य कार्य इवेंट्स आदि का ही ही रहा जिसमें वे वे सिद्धहस्त थे।
सूरतगढ़ के सेठ रामदयाल राठी उ.मा.विद्यालय में शिक्षा ग्रहण की थी।
सूरतगढ़ में खेलों के आयोजन में उनका नाम था। उनके कार्य पद्धति को देखकर राजस्थान पत्रिका ने उन्हें पत्रिका में स्थान दिया।
सूरतगढ़ में मेरे पत्रिका कार्यकाल में सूरतगढ़ में जोइनिंग हुई। सूरतगढ़ के बाद श्री गंगानगर और जयपुर में खूब काम किया और नाम कमाया।
सूरतगढ़ गंगानगर और उसके बाद जयपुर में बहुत अच्छे कार्यक्रम दिए गए उसके बाद उन्होंने पत्रिका छोड़ने के बाद कुछ वर्ष पहले अपने निजी कार्यक्रम शुरू किए जिनमें काफी सफल रहे।
मेरे साथ उनका कार्य बहुत अच्छा सराहनीय रहा था। सूरतगढ़ के पत्रकारों से भी अच्छा मेलमिलाप रहता था।
गोविंद छाबड़ा का अचानक संसार से जाना।। ईश्वर की ईच्छा।
याद रहेंगे।
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करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ जिला श्री गंगा नगर.
94143 81356.
***** मेरी इंटरनेट साइट करणी प्रेस इंडिया पर बहुत मैटर है। उसे अवश्य ही देखते रहें।
करणी प्रेस इंडिया
Karni press india
www.karnipressindia.com
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सोमवार, 7 दिसंबर 2020

पूर्व पार्षद इंद्र चंद सरावगी सूरतगढ़ का स्वर्गवास

 

 - करणीदानसिंह राजपूत - 


सूरतगढ़ 7 दिसंबर 2020.


सूरतगढ़ के जाने-माने सरावगी कुटुंब के महत्वपूर्ण और राजनीति के महत्वपूर्ण कार्यकर्ता पूर्व पार्षद इंद्रचंद्र सरावगी का 70 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार 6 दिसंबर को सूरतगढ़ की मुख्य कल्याण भूमि में किया गया।

इंद्र चंद सरावगी का जयपुर के दुर्लभजी हॉस्पिटल में कुछ दिन इलाज चला था। स्वस्थ होने के बाद हॉस्पिटल से छुट्टी मिल गई। 5 दिसंबर की शाम को जयपुर से सूरतगढ़ लाए जाने की तैयारियां चल रही थी तब अचानक उनका हार्टसीज होने से निधन हो गया।

पूर्व में हृदय संबंधी कोई कोई लक्षण नहीं थे।


 स्वर्गीय इंद्र चंद सरावगी भारतीय जनता पार्टी की ओर से सन 2004 में पार्षद चुने गए थे। लोकप्रिय व्यक्ति थे। राजनीति में काफी समय से सक्रिय रहे। स्पष्ट वादी रहे। सूरतगढ़ के सेठ रामदयाल राठी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में उन्होंने शिक्षा ग्रहण की थी।


उनके संसार से चले जाने पर ईश्वर से प्रार्थना है कि उन्हें मोक्ष प्रदान करें। नमन!

००

बुधवार, 25 नवंबर 2020

राजस्थान के पूर्व वितमंत्री माणिक चन्द सुराणा का निधन-लोकप्रिय नेता थे- करणीदानसिंह राजपूत

 



बीकानेर के लोकप्रिय जन नेता पूर्व वितमंत्री  माणिक चंद सुराणा का 25 नवंबर 2020 सुबह जयपुर के चिकित्सालय में स्वर्गवास हो गया। उनकाअन्तिम संस्कार  बीकानेर में 26 नवंबर को किया जाएगा।
वे अभी पिछले कई  दिनों से अस्वस्थ थे और सघन चिकित्सा इकाई में भर्ती थे।
वे कोरोना ग्रसित भी रहे लेकिन उसमें स्वस्थ हो गए थे। 
89 वर्षीय माणिक चन्द  सुराणा  जन्म 31 मार्च 1931 को हुआ था।  अपने छात्र जीवन से राजनीती में आने वाले सुराणा डूंगर कॉलेज के अध्यक्ष रहे।
 2018 तक  लूणकरणसर से विधायक रहने के बाद इस बार चुनाव नहीं लड़ा था। लूणकरणसर,  कोलायत , नोखा व बीकानेर से विधानसभा के चुनाव लड़कर अपनी लोकप्रियता साबित करने वाले  एकमात्र राजनेता हुए। राजनीति में  जातिवाद के मिथक को  तोड़ते हुए जाट बाहुल्य क्षेत्र से स्वतन्त्र  प्रत्याशी  के रूप  विजय प्राप्त करने वाले एकमात्र जननेता थे।

1977 , 1985 में जनता पार्टी से  ,2000   भाजपा व 2013 में स्वतंत्र रूप से लूणकरणसर से विधायक रहे।   अन्तिम समय  सक्रीय रहे।
इसी वर्ष  पत्नी विमलादेवी ( भंवरीदेवी ) का अप्रैल 2020 को  स्वर्गवास हुआ था।
बीकानेर  में उनका मूल  बड़ेबाज़ार क्षेत्र  हैं। उनका जन्म कोलकता  हुआ परन्तु शिक्षा MA , LLB ,MDS तक की  बीकानेर में प्राप्त की  व  जयपुर में प्रवास  किया।     माणिक चंद सुराणा देश के अनेक अखबारों सहित  थार एक्सप्रेस में भी समसामयिक विषयों  बेबाक लिखते थे।
सन 1977 में जनता पार्टी की मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत की सरकार में वित्त मंत्री रहे। मूल रूप में समाजवादी थे। भाजपा में रहे और असंतुष्ट होने पर लूणकरणसर से निर्दलीय रूप से चुनाव लड़ा था।
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मैं उनसे अनेक बार मिला। 1977-78 में उनकी पत्रकार वार्ता डागा बिल्डिंग ( केईएम रोड बाद में इसका नाम महात्मा गांधी मार्ग किया गया) में थी। प्रख्यात पत्रकार शुभु पटवा ( अब स्वर्गीय) ने दो बहुत तीखे प्रश्न किए। पत्रकार वार्ता के बाद जब कमरे मे चाय पी रहे तब उन्होंने शुभु पटवा को उन प्रश्नों बाबत कहा कि खाल उधेड़ने वाले प्रश्न थे,ऐसे क्यों पूछते हो,मित्र हो।
शुभू पटवा ने उत्तर दिया। मित्र हूं मगर पत्रकार वार्ता में पत्रकार हूं। वहां मेरा पत्रकारिता का फर्ज है।
मानिकचंद सुराणा पर आम जनता को भरोसा था। जनता का हर व्यक्ति सीधे अपनी बात उनके आगे रखता था। उनका हरेक की पीड़ा समस्या से सीधा संबंध रहा।
सूरतगढ़ में इंजीनियर एम.एल.सिडाना श्रीमती राजेश सिडाना परिवार के नजदीकी मित्रता में थे। सिडाना परिवार में आना रूकना पचासों बार हुआ। सनसिटी नये आवास में ही पन्द्रह सोलह बार आए ठहरे। सिडाना के यहां पत्रकार वार्ता भी कई बार हुई जिनमें मैं शामिल हुआ। मानिकचंद जी सूरतगढ़ आते तब मेरे पास सिडाना परिवार से फोन आता, मानिक जी आए हैं और मैं पहुंच जाता, उनसे बातचीत करने।
एम.एल.सिडाना की परसों 23 नवंबर को ही सुराणा जी से मोबाईल फोन पर बात हुई थी। उन्होंने कहा था कि हालत इसबार गंभीर है।
मानिकचंद सुराणा जैसे नेता हों। जनता के नेता।
मेरा नमन!
करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
94143 71356.
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बुधवार, 18 नवंबर 2020

पार्थ सारथी का यों जाना! शब्द ही नहीं है! * करणी दान सिंह राजपूत *

 

सूरतगढ़ के अंदर राजनैतिक सामाजिक चेतना जगाने के लिए प्रतिदिन कुछ न कुछ  करके हलचल मचाने वाले संघर्षशील व्यक्तित्व पीतांबर दत्त शर्मा के युवा पुत्र पार्थ सारथी शर्मा का संसार से यूं अचानक चले जाना बेहद दुखी करने वाला है।

पीतांबर दत्त का संघर्षशील जीवन एक नए प्रकार के संघर्ष में ईश्वर ने डाल दिया है। ईश्वर के नीति नियम कब किस पर क्या चक्र चला दे कोई सोच नहीं सकता। 

पितांबर दत्त को कैसे समझाएं कि पार्थ का यह गमन न जाने आगे कैसा भविष्य रचने वाला है? खुद पार्थ सारथी समाज सेवा में पिता के कदमों पर ही चल रहा था। 

रक्तदान करके दूसरे के जीवन को बचाने में महत्वपूर्ण सोच के तहत वह रक्तदानी था। रक्तदान करते पार्थ सारथी का फोटो मेरे सामने है। ईश्वर ने ऐसे व्यक्तित्व को अपने पास बुला लिया।

पीतांबर दत्त शर्मा को किन शब्दों में आश्वासन दें भरोसा दिलाएं सांत्वना दें। 

ईश्वर ने यह नया संघर्ष शुरू किया है।

मेरे पास आज शब्द नहीं हैं। 

' पार्थ का यों जाना'


परमब्रह्म पार्थ को मोक्ष प्रदान करें।


शनिवार, 31 अक्टूबर 2020

*स्वामी आनंद प्रेम (हनुमान मल सेठिया)का ईश्वर में लीन होना*

 



* करणीदानसिंह राजपूत*


 मेरे मित्र मेरे भ्राता ओशो भक्त स्वामी आनंद प्रेम  करीब 70 वर्ष की उम्र में 30 अक्टूबर 2020 को संसार से चले गए।  पिछले छह सात दिनों से रुग्ण हुए और बीकानेर की फोर्टिस ब्रांच में देह त्यागी।  अंतिम संस्कार 31 अक्टूबर 2020 गंगाशहर बीकानेर में। कोरोना महामारी में एकदम सीमित परिजन।


सरकारी नौकरी में बहुत ईमानदारी कर्तव्यनिष्ठा से कार्य किया। श्रम और रोजगार विभाग में अधिकारी पद से बीकानेर से सेवानिवृत्ति हुई। श्रीगंगानगर बीकानेर अजमेर बाड़मेर आदि विभिन्न स्थानों पर भी रहे और हर जगह है अपनी कर्तव्यनिष्ठा की छाप छोड़ी। 

श्रम और रोजगार विभाग में पंजीकृत होते नौकरी की आयु में 2 या 3 दिन बाकी होते  उन बेरोजगारों को प्राथमिकता से तुरंत नौकरी लगाने के लिए कोई न कोई व्यवस्था करने में आगे रहते थे।  ऐसे अनेक लोगों को सरकारी नौकरी में लगाया था।

 छात्र रूप में जब थे तब गंगा शहर के निवास पर मैं अनेक बार रुका। बडे़ भाई स्व.इन्द्र चंद सेठिया,स्व.छगनमल सेठिया सहित यह संयुक्त रूप से रहते थे। सबसे बड़े भाई स्व.भंवरलाल सेठिया थे जो ठेकेदारी करते थे।

हम आधी आधी रात तक हम विभिन्न विषयों पर बहस किया करते थे चर्चा किया करते थे। यह वक्त था 1967 सेे 70 के आसपास का। उनके बड़े भाई इंद्र चंद सेठिया भारतीय जीवन बीमा निगम के अधिकारी रहे। एक बड़े भाई छगन मल सेठिया सूरतगढ़ में व्यवसाय और सूझबूझ वाले भाजपा नेता रहे।

 हम चारों यानि इन्द्रचंद,छगन,हनुमान और मै गंगाशहर के घर में किसी किसी विषय पर चर्चा शुरू करते और अनेक विषयों को समेटने के बाद में आधी रात बीतने के बाद ही को सोया करते थे। 

अनेक बार मिलना हुआ लेकिन अभी पिछले काफी समय से मैं मिल नहीं पाया।

सूरतगढ़ में मिलना विभिन्न कार्यक्रमों में होता रहा।

*स्वामी आनंद प्रेम का पूर्व नाम हनुमान मल सेठिया था।ओशो प्रेम में रंगने के बाद उन्होंने अपना नाम बदल लिया और सरकारी सेवा में भी नया नाम स्वामी आनंद प्रेम हो गया।

उन्होंने अपने आप को ज्यादा ध्यान मग्न अवस्था में डाल दिया था।

ओशो के बारे में भी चर्चाएं होती थी कैसेट भी सुनते थे।ओशो के मीरा महावीर कृष्ण के अलावा विदेशी महापुरुषों पर भी जो वक्तव्य हुए उनकी भी बहुत सी किताबें ग्रंथ रूप में मैंने भी पढी। बहुत चर्चाएं होती थी। अनेक ओशो सेमिनारों में  ध्यान ज्ञान केंद्र समारोह आदि में वे भाग लेते थे। उनके अनेक मित्र इस विचारधारा के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न स्थानों पर कार्यरत हैं।

करीब 10-12 साल पहले जब वे सेवानिवृत्त हो गए उसके बाद में अधिक से अधिक ध्यान लगाने में ही रहे । 70 वर्ष की आयु में ईश्वर में विलीन होना प्रकृति का नियम। जब मिलते संसार मृत्यु जीवन इन विषयों पर भी चर्चा होती थी। मृत्यु से क्या डरना है वह तो स्वाभाविक

 रूप से आएगी और कभी भी आ सकती है।

* स्वामी आनंद प्रेम के दो पुत्र हैं। पत्नी सरकारी अध्यापिका और अब सेवा निवृत्त हैं। एक पुत्र चार्टेड एकाउंटेंट और एक लेक्चरार है।

गंगाशहर बीकानेर में इनका निवास है।

 *सूरतगढ़ में उनके भतीजे मनोज कुमार सेठिया एलआईसी में है माणक सेठिया सुशील सेठिया व्यवसायिक क्षेत्र में है*

* स्वामी आनंद प्रेम आयु में मेरे से करीब छह साल छोटे थे। नमन!*

गुरुवार, 26 दिसंबर 2019

माटी की महक तारावती भादू स्वर्ग को रवाना

^^ करणी दान सिंह राजपूत  ^^


सूरतगढ़ क्षेत्र में डॉक्टर विजय प्रकाश भादू की माता के रूप में जानी जाने वाली शिक्षाविद नारी उत्थान में जीवन लगाने वाली तारावती भादू लगभग 81 वर्ष की उम्र में 25-26 दिसंबर की रात्रि में स्वर्ग को रवाना हो गई।ःउन्होंने अपने 75 वर्ष की उम्र में आयोजित अमृत महोत्सव के समय कहा था "जीवन मृत्यु को नहीं टालेगा, इसलिए हम भी जीवन को न टालें"उनका अंतिम संस्कार 26  दिसंबर 2019 अपरान्ह चार बजे के करीब मुख्य कल्याण भूमि में किया गया। पुत्र गण,परिजन,कुटंबी सहित गणमान्य अंतिम संस्कार के समय उपस्थित थे।

 

उन्होंने समाज को बदलने के लिए नारी शिक्षा व नारी उत्थान और वृद्धावस्था के लोगों के लिए प्रोढ शिक्षा क्षेत्र में शिक्षक जीवन में इतने कार्य किए हैं कि उन्हें कभी भी भुलाया नहीं जा सकेगा। शेखावाटी क्षेत्र में उनकी सेवा कदम कदम पर है।


तारावती का जन्म स्वतंत्रता सेनानी हनुमान सिंह जी बुडानिया के घर दुधवाखारा जिला चूरू में 10 मई 1938 को हुआ। पिता पुलिस में मुंशी थे और स्वतंत्रता आंदोलन में कूदने के लिए उन्होंने 1942 में सरकारी नौकरी छोड़ दी। दुधवाखारा स्वतंत्रता सेनानियों के लिए बहुत बड़ा अत्याचारी केंद्र रहा है। तारावती के दो भाईयों में एक रणवीर सिंह एडवोकेट और दूसरे सेना में कर्नल सुरेंद्र सिंह।


तारावती ने कक्षा 10 उत्तीर्ण जैसे-तैसे करने के बाद स्वामी केशवानंद के शिक्षण संस्थान में 1954 में नौकरी शुरू की थी। 

वहीं पर बडोपल निवासी हजारी लाल जी भादू स्वामी केशवानंद के यहां निशुल्क लाइब्रेरियन का कार्य करते और स्वामी जी के एक प्रकार से सचिव थे।

हजारी लाल जी भादू के साथ उसी काल में तारावती का विवाह हुआ और उसके बाद में सरकारी नौकरी लगने के बाद उन्होंने अपने जीवन को समाज सेवा में डाल दिया।  

उस काल में शिक्षा ही नहीं होती थी तब नारी शिक्षा के लिए उद्घोष करना बहुत बड़ी बात थी।

 तारावती ने नारी शिक्षा प्रोढ शिक्षा का बीड़ा उठाया और अपना जीवन उसमें लगाया।विभिन्न पदों पर कार्य करती हुई जिला शिक्षा अधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुई। 

नेशनल वार विडोज एसोसिएशन नई दिल्ली के सहयोग से 10 वर्ष तक 'शार्ट स्टे होम'का संचालन किया जिसमें विधवाओं, परित्यक्ताओं,संकट ग्रस्त नारियों को सहायता सहयोग मिला।

तारावती भादू स्वामी केशवानंद ट्रस्ट मंडल संगरिया की मानद सदस्य और केशव विद्यापीठ शिक्षण समिति पीलीबंगा की अध्यक्ष रही।

पारिवारिक स्थिति के रूप में हजारीलाल जी ने कभी भी उनके कार्य में दखल नहीं दिया बल्कि समाज सेवा में जो भी कार्य कर रही थी उसके अंदर सहयोगी बने रहे।

 

तारावती भादू का बचपन पिता के स्वतंत्रता आंदोलन में। भाग लेने के कारण  बड़ा कष्ट पूर्ण रहा लेकिन उन्होंने अपने वैवाहिक काल के बाद जीवन को बहुत अच्छे ढंग से संचालित किया।

 उनके 4 पुत्र हुए जिनमें श्री जयप्रकाश इंजीनियर थे जिनका देहांत हो गया।।

विजय प्रकाश भादू हड्डी रोग विशेषज्ञ के रूप में सूरतगढ़ इलाके में जाने-माने हैं।

संजय प्रकाश वन विभाग में  डीएफओ पद के अधिकारी।  जयप्रकाश भारतीय प्रशासनिक सेवा में है और अभी वर्तमान में भारत के राष्ट्रपति के सचिवालय में नियुक्त हैं।

 

तारावती भादू को अपने जीवन काल में अनेक पुरस्कार मिले थे।

तारावती भादू की आयु के 75 वर्ष पूर्ण होने पर साहित्य संसद फतेहपुर की ओर से अमृत महोत्सव मनाया गया।

उस समय राजस्थान के प्रसिद्ध साहित्यकार शिशुपाल सिंह नारसरा ने एक पुस्तक *माटी की महक* का प्रकाशन किया जिसमें  तारावती भादू के जीवन का संपूर्ण वर्णन है। उनके बारे में अनेक शिक्षाविदों ने अधिकारियों ने लेखकों ने बहुत कुछ लिखा। यह पुस्तक अपने आप में उनके जीवन को संपूर्ण रूप से दर्शाती है। अनेक पुरस्कारों से सुसज्जित हुई। 

मेरा यह मानना है कि हमारे इलाके में नारी शिक्षा,नारी को स्वावलंबी बनाने में,प्रौढ़ शिक्षा की जागृति फैलाने में बहुत कार्य किया।  मुझे इतना अच्छा कार्य और किसी का ध्यान में नहीं आ रहा है।

सूरतगढ़ में वह शिक्षाविद के रूप में अनेक कार्यक्रमों में भाग लेती रही। आज उनके संसार से गमन पर श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए नमन करता हूं कि उनका कार्य नारी समाज में सदा जागरूकता पैदा करता रहेगा।

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ।

94143 81356.

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मंगलवार, 18 जून 2019

पत्रिका समूह के निदेशक मिलाप कोठारी का निधन: 'कड़वा मीठा सच्च:व 'मंथन:के लिए याद रहेंगे




-- करणीदानसिंह राजपूत --
पत्रिका समूह के निदेशक मिलापचंद कोठारी का  18 जून 2019 को सुबह निधन हो गया। राजस्थान पत्रिका में लोकप्रिय 'कड़वा मीठा सच्च' स्तंभ शुरू करने और 'मंथन' स्तंभ लिखने के लिए वे सदैव याद रहेंगे।
मिलाप कोठारी 69 वर्ष के थे। वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उन्होंने जयपुर में अंतिम सांस ली।
15 दिसम्बर, 1950 को जन्मे मिलाप कोठारी राजस्थान पत्रिका के संपादक और निदेशक भी रहे हैं। वे पत्रिका समूह के संस्थापक स्व. कर्पूरचंद कुलिश के छोटे पुत्र और प्रधान संपादक गुलाबचंद कोठारी के छोटे भाई थे।
शवयात्रा उनके निवास "स्वस्ति, 11, हॉस्पिटल मार्ग, सी स्कीम" से आज शाम को 5:15 बजे आदर्शनगर मोक्षधाम जाएगी।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने ट्वीट करते हुए श्री मिलाप कोठारी के निधन पर दुःख जताया है। ट्वीट में उन्होंने लिखा, 'पत्रिका ग्रुप के निदेशक श्री मिलाप कोठारी जी के निधन पर मेरी गहरी संवेदना। दुःख की इस घड़ी में मेरे विचार और प्रार्थनाएँ उनके परिवार के सदस्यों के साथ हैं। ईश्वर उनके परिवार को इस दुःख की घडी करने की शक्ति प्रदान करे। दिवंगत आत्मा को शांति मिले।' 
जीवन परिचय 
मिलाप कोठारी 'सुमंत' का जन्म 15 दिसंबर 1950 को जयपुर में हुआ। उन्होंने यांत्रिक अभियांत्रिकी में स्नातक की उपाधि ग्रहण की लेकिन कार्यक्षेत्र पत्रकारिता को ही चुना।
वे 1977 से राजस्थान पत्रिका तथा इसके सहयोगी प्रकाशनों से संबद्ध रहे।
कोठारी ने पत्रिका के जोधपुर संस्करण के प्रबंध संपादक एवं स्थानीय संपादक सहित अन्य पदों का निर्वहन किया। इसके बाद 1988 में अंग्रेजी आर्थिक दैनिक और जुलाई 1990 में हिंदी दैनिक राजस्थान पत्रिका के संपादक का दायित्व संभाला
उन्होंने राजस्थान पत्रिका के परामर्शी एवं पत्रिका के निदेशक मंडल के सदस्य का दायित्व भी सम्भाला। राजस्थान पत्रिका में उनका देश-विदेश की समसामयिक घटनाओं पर 'मंथन' पाठकों में काफी लोकप्रिय रहा है। कोठारी की 'सुमन' नाम से कुछ कविताएं भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
मिलाप कोठारी ने सन 1990 में राजस्थान पत्रिका में कड़वा मीठा सच्च स्तंभ शुरू कराया जो बहुत लोकप्रिय हुआ। सरकार का ध्यान भी उसमें छपी सामग्री पर रहता था जिन पर सरकार निर्णय भी लेती थी। इस स्तंभ में तीन बार राज्य स्तरीय प्रथम और एक बार राज्य स्तरीय द्वितीय पुरस्कार मुझे मिले,जिन पर समारोहों में सम्मानित हुआ। 
मिलाप कोठरी सूरतगढ़ अनेक बार आए। पत्रकारिता पर बहुत चर्चाएं होती।
अन्य स्थानों जयपुर, जोधपुर उदयपुर आदि में भी मिलना और चर्चा करने का अवसर मिला। वे सदा याद रहेंगे। ( राजस्थान पत्रिका से 33 साल तक जुड़ाव रहा है।अभी भी संपर्क है)
- करणीदानसिंह राजपूत,
राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
9414381356.


गुरुवार, 3 मई 2018

सूरतगढ़ सरस्वती स्कूल के संचालक राजेंद्रप्रसाद की पत्नी का निधन:अंतिम संस्कार संम्पन्न

सूरतगढ 3-5-2018.

श्रीमती सुमित्रा शर्मा (धर्मपत्नी राजेंद्रप्रसाद उपाध्याय ) का  60 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया है। उन्होने 2 मई  को दोपहर में करीब 1-45 बजे संसार छोड़ा।वे कुछ माह से बीमार थी।

उनका अंतिम संस्कार 3 मई 2018 सुबह 10:00 बजे मुख्य कल्याण भूमि में किया गया। पुत्र दीपक ने मुखाग्नि दी। अंतिम संस्कार मेंं परिजन,रिश्तेदार,गणमान्य उपस्थित थे। शिक्षण संस्थानों के संचालक व शिक्षक भी उपस्थित थे।



शनिवार, 24 फ़रवरी 2018

व्यवसायी ओमप्रकाश डागा सूरतगढ का जयपुर मेंं निधन

- करणीदानसिंह राजपूत -

सूरतगढ़ 24 फरवरी 2018.

सूरतगढ़ निवासी प्रसिद्ध समाचार पत्र विक्रेता रहे ओम प्रकाश जी डागा का जयपुर में आज दोपहर निधन हो गया। वे करीब 77 वर्ष के थे। उनका निवास सूरतगढ़ वार्ड नंबर 19 में है।

 सूरतगढ़ में प्रमुख अखबार राजस्थान पत्रिका के बड़े एजेंटों में उनकी गणना थी। कुछ वर्ष पहले उनके पुत्रों ने जयपुर में कंप्यूटर व्यवसाय शुरू किया तब ओमप्रकाश डागा जी भी यहां का व्यवसाय बंद कर जयपुर रहने लगे। सूरतगढ़ में उनका आना जाना और मित्रों से मिलना जानकारों से मिलना कायम रहा था। उनका अंतिम संस्कार कल 25 को जयपुर में किया जाएगा।

ओमजी डागा के बड़े भाई दिवानचंद डागा वार्ड नं 19 में ही निवास करते हैं। दिवानजी के पुत्र आनन्द डागा व विजय डागा राजस्थान पत्रिका के सूरतगढ़ में सबसे बड़े एजेंसी मालिक हैं। एक भाई गजानंद श्रीगंगानगर में व्यवसाय करते हैं।

सूरतगढ़ में डागा कुनबा काफी विस्तृत

 है। 

ओम जी डागा मेरे मित्र थे।


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