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रविवार, 13 दिसंबर 2020

खेत और किसान मरे तो श्मशान बन जाएंगे शहर और शहरी कारोबार - करणीदान सिंह राजपूत -

 


 खेत और किसान मरे तो सब  श्मशान बन जाएंगे। न कोई शहर बचेगा न कोई कारोबार बचेगा ना कोई अट्टालिकाएं बचेगी और न कारों हवाई जहाजों में यात्रा करने वाले बचेंगे। आदमी की रीढ की हड्डी टूट जाती है या उसमें थोड़ा भी नुकसान हो जाता है तो उस आदमी की हालत क्या होती है? क्या रीढ की हड्डी टूटने के बाद आदमी चल फिर सकता है?मौज मस्ती कर सकता है? कोई कारोबार कर सकता है? पीड़ित व्यक्ति एक स्थान पर पड़ा रहता है।

 आज जो परिस्थितियां सत्ताधारियों ने और प्रशासनिक अधिकारियों ने पैदा कर दी है। इससे खेत और किसान दोनों की हालत रीढ टूटे हुए आदमी जैसी हो गई है, अगर अभी भी सब कुछ जानते हुए इलाज नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब किसान मर जाएगा खेत मर जाएंगे। लेकिन इतराने की जरुरत नहीं है कि शहर में रहते हैं, अलग से कारोबार है,बड़ी अट्टालिका हैं, चलने को सड़के हैं,कारें और हवाई जहाज हैं। यह सब या इन में से कोई भी जीवित नहीं बचेगा, और   न उनके अंश बचेंगे।

 हमारे देश में सारी जीवन प्रणाली खेत और किसान से जुड़ी हुई है। जब खेत में कुछ पैदा नहीं होता है तो सारा इलाका अकाल और अभाव  से पीड़ित हो जाता है। संपूर्ण क्षेत्र विकास के दौर में कई साल पीछे पहुंच जाता है।
खेत और गांव निरंतर मेहनत करने पर सरसब्ज हुए और आगे और अधिक विकास की संभावनाएं तलाशने वाले शक्तिशाली क्षेत्र बने।  इसे आज की ताकतवर हालत में पहुंचाने वाला इलाके का किसान है और उसका परिवार है, जिसने  न दिन देखा, न रात देखी। न सर्दी की बदन चीरती हुई हवाएं देखी। न जून जुलाई गर्मी की तपन देखी।
किसान और उसका परिवार दिन-रात जुटा हुआ रहा, लेकिन आज सरकारी और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं ने  किसान को  खेतों को मरने के लिए मजबूर कर दिया है। किसान और खेत खुद नहीं मर रहे हमारी राज व्यवस्था हमारी प्रशासनिक व्यवस्था उनकी हत्या कर रहे हैं। उनको तड़पा तड़पा कर मार रहे हैं।

 जब किसी को मारा जाता है तो वह जीव चाहे कितना ही छोटा हो कितना ही कमजोर हो। वह अपने जीवन के लिए मरने और मारने के लिए तैयार हो जाता है और उसमें सैंकड़ों गुना ताकत अपने आप पैदा हो जाती है। वह संघर्ष के लिए अपने बचाव के लिए और ताकतवर समूह बना लेता है। फिर अपनी ताकत का इस्तेमाल करता है। उस जीव द्वारा जीवन के लिए किया जाने वाला संघर्ष कामयाब रहता है।वह जीव ही नहीं पूरा समूह मौत की ओर जाने से बच जाता है।

जब जीव संघर्ष करता है तब उसके सामने ना कोई अपना होता है ना कोई पराया होता है। उसे केवल और केवल अपना जीवन दिखाई पड़ता है।

अपने खेतों को बचाने के लिए किसान इलाके का मजदूर और इलाके का व्यापारी एक जुट खडे़ हैं। कहने का मतलब है कि सब कुछ खेत और किसान से जुड़ा हुआ है। अभी भी सत्ता और प्रशासन समझ नहीं पा रहे हैं या जानबूझकर सत्ता सुख में समझना नहीं चाहते हैं।
इलाके का किसान संघर्ष करें और जनप्रतिनिधि चाहे वह  सरपंच हो, चाहे अन्य पदों पर हो, विधायक सांसद हो या फिर मंत्री हो,नष्ट हो रहे मर रहे खेत और किसान को देखते हुए कैसे कोई समारोह कर रहे हैं?  कैसे मालाएं पहन रहे हैं और कैसे विकास के थोथे भाषण दे रहे हैं।

विकास मशीनों से पैदा नहीं होता बल्कि यह जो मशीनें बनी हैं वह सब खेत और किसान के उत्पादन के बाद  आवश्यकता के अनुरूप बनाई गई है किसान और खेत नहीं होते तो फिर मशीनें भी नहीं होती।

 मैं एक बात बहुत कड़वी कहना चाह रहा हूं बल्की कह रहा हूं की अगर खेत और किसान नहीं रहे तो बाकी भी नहीं रहेंगे। इस वाक्य को समझना चाहिए। यह वाक्य और बात केवल हवा में नहीं कह रहा और हवा में उड़ाने के लिए भी नहीं कह रहा हूं।

किसान आंदोलन और संघर्ष करके अपने अधिकार प्राप्त कर लेंगे। सत्ताधारियों का और प्रशासन का क्या होगा? जो आज किसान के साथ न होकर समारोहों में व्यस्त हैं। किसान और खेत रहेंगे लेकिन ये समारोह एक दिन  एक सप्ताह मनाए जा सकते हैं।  इनको सदा के लिए तो नहीं मनाया जा सकता। सदा तो खेत रहेंगे किसान रहेंगे।००

लेख- करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान)
94143 81356.
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बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

आत्माराम तरड़ भारतीय कृषि अनुसंधान के .सदस्य मनोनीत

मन्नीवाली। भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष आत्माराम तरड़ को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान की प्रबंध समिति के सद्स्य पद के लिए मनोनीत किया गया है।बागवानी विभाग के अवर सचिव पी के श्रीवास्तव द्वारा जारी पत्र में लिखा गया है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के लिए तीन वर्ष के लिए स्थाई रूप से चुना जाता है।इससे क्षेत्र में खुशी का माहौल है।आत्माराम तरड़ के घर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। आत्माराम तरड़.ने सभी को धन्यवाद देते हुए बताया कि वे अपने कृषि के क्षेत्र.में.काश्तकारों का भरपूर सहयोग करेंगे।


गुरुवार, 28 जून 2018

सिंचाई पानी की कमी: कांग्रेस का सूरतगढ में प्रदर्शन:सीएम को ज्ञापन



श्रीगंगानगर जिले में सिंचाई पानी की  मांग को लेकर आज 28 जून 2018 को कांग्रेस पार्टी सूरतगढ़ के ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया के नेतृत्व में उपखंड अधिकारी के मार्फत मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया गया।

 कांग्रेस पार्टी के कार्यकर्ताओं ने उपखंड कार्यालय के आगे नारेबाजी की और वर्तमान सरकार के शासन की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि पानी की कमी से श्रीगंगानगर जिला और इंदिरा गांधी नहर के अलावा भाखड़ा और गंग कैनाल के क्षेत्र में किसान पीड़ित हो रहे हैं। 

इंदिरा गांधी नहर परियोजना के प्रथम चरण के किसानों को जो पानी मिलना चाहिए था वह मिल नहीं पाया है।

राज्य सरकार और बीबीएमबी कि गत बैठक में पंजाब से पानी लेने में नाकाम रही। 

काश्तकार धरना प्रदर्शन कर अपना रोष प्रकट कर रहे हैं।

भखड़ा,गंग कैनाल आईजीएनपी क्षेत्र के किसानों में राज्य सरकार के खिलाफ आक्रोश और बढा है। खरीफ की फसल बिजाई का अंतिम दौर चल रहा है लेकिन ऐसे समय में पानी की कमी से किसान परेशान है।

उप खंड अधिकारी को जीीी पेश करने वालों में परसराम भाटिया,पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व प्रधान परमजीतसिंह रंधावा,अमित कड़वासरा,पूर्व पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल, ओम साबनिया,ओम प्रकाश कालवा,सतनाम वर्मा,राय साहब मेहरड़ा,सलीम कुरैशी,रमेश छाबड़ा,आकाशदीप बंसल,किशन आसेरी,त्रिलोकचंद,इरफान भाटी,कमलेश मीणा, जयप्रकाश गहलोत,विनोद चौधरी आदि ने आज प्रदर्शन किया।


सोमवार, 11 जून 2018

गांवों में पहुंचकर कर्जमुक्ति प्रमाणपत्र दे रही सरकार:भाजपा सरकार

श्रीगंगानगर के 91 हजार से अधिक किसानों के कर्जे माफ- निहालचंद सांसद

श्रीगंगानगर, 11 जून 2018.

सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री निहालचंद ने कहा कि राजस्थान में वर्तमान सरकार ने प्रदेश के लगभग 28 लाख किसानों का 8 हजार करोड़ रूपये की राशि का ऋण माफ किया है। पूरे प्रदेश में सरकार गांव-गांव जाकर किसानों को ऋण मुक्ति प्रमाण पत्र दे रही है। 


श्री निहालचंद सोमवार को गांव 5 केएसडी में ग्राम सेवा सहकारी समिति द्वारा आयोजित ऋण माफी प्रमाण पत्र वितरण समारोह में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि श्रीगंगानगर जिले में 91 हजार 112 छोटे किसानों को इसका लाभ मिला है। जिले में 292 करोड़ रूपये की राशि जो किसानों द्वारा ऋण स्वरूप दी गई थी, सरकार ने माफ कर दी है। ग्राम सेवा सहकारी समिति 5 केएसडी में 281 किसानों का 95.24 लाख रूपये रूपये की राशि का ऋण माफ हुआ, जिसमें 125 लघु सीमांत किसान 48.93 लाख रूपये तथा अन्य 156 किसानों का 95.24 लाख रूपये की राशि माफ की है। 

श्री निहालचंद ने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा करवाये गये विकास कार्यों से हर क्षेत्र में विकास हुआ है। सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल व विधुत के क्षेत्रा में भारी सुधार हुआ है, जो यह दर्शाता है कि देश में विकास बहुत तेज गति से हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्रा आवास योजना में जहां गरीबों को पक्का आवास दिया, वही पर गरीब माताओं को धुएं से मुक्ति दिलाने के लिये उज्ज्वला योजना वरदान साबित हुई है, जिससे प्रत्येक गरीब महिलाओं को निशुल्क गैस कनेक्शन दिये गये है, वही पर प्रधानमंत्रा कृषि सिंचाई योजना, पक्के खालों का निर्माण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, प्रधानमंत्रा फसल बीमा योजना के अलावा 2022 तक किसान की आय दौगुनी करने के प्रयास तेज गति से किये जा रहे है।




सोमवार, 30 अप्रैल 2018

सांसद निहालचंद ने लोहागढ़ हेड व रिलाईनिंग कार्यो का किया अवलोकन

श्रीगंगानगर, 30 अप्रेल। सांसद एवं पूर्व केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री निहालचंद ने इंदिरा गांधी नहर परियोजना के लोहागढ हेड (496 आरडी) पर चल रहे रिलाईनिंग व निर्माण कार्यां का अवलोकन किया। लोहागढ़ हेड पर 50 मीटर लम्बाई 20 मीटर चौडाई तथा 25 फिट गहराई का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जिस पर 4 करोड़ रूपये की लागत आयेगी। इस कार्य में 30 हजार सीमेंट के थैले तथा 110 मैट्रिक टन सरिया लगेगा। श्री निहालंचद ने आरडी 496 से 520 तक चल रहे रिलाईनिंग के कार्यों का अवलोकन किया। इस रिलाईनिंग कार्य पर 72 करोड रूपये की राशि व्यय की जायेगी। इसी प्रकार आरडी 582 पर क्रोस रेगुलेटर निर्माण कार्यों का निरीक्षण किया। क्रोस रेगुलेटर निर्माण पर 30 करोड़ रूपये की राशि व्यय होगी। मसीतावाली हेड से नीचे की नहर की रिलाईनिंग कार्य को देखा। इस रिलाईनिंग कार्य पर 20 करोड़ रूपये की राशि व्यय होगी। 

निहालचंद ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा इंदिरा गांधी नहर परियोजना के सुदृढ़ीकरण व नवीनीकरण के लिये 3092 करोड़ रूपये की राशि खर्च करने का प्रावधान किया है, जिससे किसानों का भला होगा तथा सिंचाई क्षेत्र में बढ़ोतरी होगी।





बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

सूरतगढ़ फार्म शुरुआत में सोवियत रूस की दी मशीनों के संग्रहालय का उद्घाटन



सूरतगढ़ 14 फरवरी 2018.

रूस के कृषि मंत्री श्री सरगेई बेलेस्की ने कहा कि आज हम यहां पर आये हैं ये एक ऐतिहासिक बात है। 

उन्होंने कहा कि कृषि रिसर्च योजना के लिये हम भारत के साथ एक पंच वर्षीय योजना बनाना चाहते हैं । मुझे पता है कि वर्ष 1991 में रूस में एक स्पेशलिस्ट आया था। कृषि के क्षेत्र में पहले जो भी मशीने यहां आई थी, वे वर्तमान में भी उपयोग में ली जा रही है। मै भी एक इंजिनियर हूॅ, ये मेरे लिये गर्व की बात है। जो कृषि यंत्र यहां  पर हैं , मैने स्कूल के समय में बनाये थे।

 मैं बहुत प्रभावित हॅू, जो कृषि यंत्र आपको मिला है, उससे आपको बहुत फायदा होगा। मैं बहुत प्रभवित हॅू कि यहां जो परम्परा कृषि के क्षेत्र में विकसित की गई थी, जिसके तहत सूरतगढ़ में एक कृषि फार्म स्थापित किया गया है। उन्होंने कहा कि फसल व बीज को बढ़ावा देना है, इसके लिये एक पंचवर्षीय योजना के तहत कृषि रिसर्च सेन्टर स्थापित किया जायेगा। 

केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज भारत खाद्यान्न के क्षेत्र में एक नम्बर पर है, जो यह रूस का भी सहयोग रहा है। 70 लाख रूपये की लागत के कृषि यंत्र जो रूस ने ही भारत को कृषि के लिये दिये थे। 

सूरतगढ़ कृषि फार्म देश का पहला ऐसा फार्म है, जिसमें 24 प्रकार के उन्नत किस्म के बीज तैयार किये जाते है। गेहूं, जौ, चना भरपूर मात्रा में उत्पन्न होते है। केन्द्र में मोदी सरकार के बाद देश में मृदा कार्ड की शुरूआत जो सूरतगढ़ से की गई थी, वो किसानों के लिये बहुत ही फायदेमंद हो 

रही है और किसान यूरिया खाद कम उपयोग कर रहे हैं ।

 उन्होंने सूरतगढ़ में कृषि प्रयोगशाला बनाने के लिये सांसद श्री निहालचंद को एक प्रस्ताव बनाकर भिजवाने को कहा। उन्होंने कहा कि पश्चिम राजस्थान में सबसे ज्यादा आकाल पड़ते है, पर वहां का किसान आत्महत्या नही करता क्योंकि वहां का किसान खेती के अलावा अन्य कार्य भी करता है। 

भारत रूस राजनयिक संबंधों की 70 वर्ष गांठ पर 14 फरवरी 2018 को केन्द्रीय राज्य फार्म सूरतगढ़ के बेस वर्कशॉप में कार्यक्रम का आयोजन हुआ। 

जिसमें रूसी गणतंत्र के उप कृषिमंत्री श्री सरगेई बेलेस्की, भारत सरकार के कृषि राज्यमंत्री श्री गजेन्द्र सिह शेखावत, संयुक्त सचिव भारत सरकार श्री अश्वनी कुमार, रूसी व्यापार प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख श्री यारोस्लाव तारास्युक, प्रथम सचिव रूसी दूतावास भारत सरकार श्री कैटरिना सेमिनोवा एवं राष्ट्रीय बीज निगम के अधिकारीगण एवं उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों एंव राष्ट्रीय बीज निगम के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री विनोद कुमार गौड़ के साथ इस अवसर पर संबोधन किया। 

फार्म के वेस वर्कशाप में रशियन मशीनों के संग्रहालय का उद्घाटन बुधवार को 11.30 बजे रूस के उपमंत्री श्री सरगेई बेलेस्की, भारत सरकार के कृषि राज्यमंत्री श्री गजेन्द्र सिह शेखावत द्वारा किया गया।

अतिथियों ने फार्म परिक्षेत्र का भ्रमण किया, साथ में मतस्य बीज पालन केन्द्र का भी अवलोकन किया। 

इस फार्म की स्थापना 15 अगस्त 1956 में हुई थी। इसके लिये सोवियत समाजवादी गणराज्य संघ से 70 लाख रूपये की मशीनों एवं उपकरण भेंट के रूप में प्राप्त हुए थे। बेस वर्कशाप में रूस द्वारा उपलब्ध करवायी गई  पुरानी मशीनों को मौजूद देखकर प्रसन्न भी हुए। 

इसके बाद फार्म में कृषि से जुडे़ अन्य क्षेत्रों में नवसृजन की तरफ कदम बढ़ाते हुए निगम द्वारा मतस्य बीज उत्पादन, अपारम्परिक क्षेत्रों में हाईब्रिड बीजों का उत्पादन, कस्टम हाईरिंग केन्द्र, आधुनिक भंडार गृहों के निर्माण जैसे कई कार्यक्रमों के क्रियान्वयन किये गये को देखा गया। इस अवसर पर फार्म के निदेशक श्री यशपाल सिंह एवं अन्य सभी कर्मचारी उपस्थित होकर विशिष्ट अतिथि का स्वागत भी किया। इस अवसर पर राष्ट्रीय बीज निगम के उच्च अधिकारी निदेशक वित श्री वी.मोहन, वरिष्ठ महाप्रबंधक श्री कुलदीप सिंह, उपमहाप्रबंधक श्री नीरज वर्मा, अतिरिक्त महाप्रबंधक श्री दीपक रस्तोगी, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से श्री ए.के.झा, निदेशक श्री एचके सुयानथांग, सूरतगढ़ विधायक श्री राजेन्द्र सिंह भादू मौजूद थे।




शुक्रवार, 19 जनवरी 2018

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में सर्वाधिक 14 करोड़ का क्लेम सूरतगढ क्षेत्र को:श्रीगंगानगर जिले को कितना?


अब तक 42.65 करोड़ का पारित हो चुका है क्लेम

श्रीगंगानगर, 19 जनवरी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2016 में फसल खराब होने पर सर्वाधिक सूरतगढ़ तहसील क्षेत्र के किसानों के क्लेम पारित हुए है। सूरतगढ़ क्षेत्र के किसानों को 14 करोड़ रूपये के क्लेम वितरति होगें। 

जिला कलक्टर ज्ञानाराम ने बताया कि तहसील क्षेत्र सूरतगढ़ के लिये 14 करोड़, घड़साना के लिये 7.5 करोड़, अनूपगढ़ क्षेत्र के लिये 2.5 करोड़ तथा रायसिंहनगर क्षेत्रलके किसानों के लिये 7 करोड़ रूपये का क्लेम पारित हुआ है। जिला कलक्टर ने बताया कि पूर्व में प्राप्त 11.61 करोड़ में से श्रीगंगानगर तहसील क्षेत्र के किसानों को 1.97 करोड़, सादुलशहर क्षेत्र के लिये 0.23 करोड़, करणपुर क्षेत्र के लिये 1.83 करोड़, पदमपुर क्षेत्र के लिये 4.75 करोड़ तथा विजयनगर क्षेत्र के लिये 2.80 करोड़ के क्लेम वितरित किये जा चुके है। फसल खराब होने पर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में पारित क्लेम सीधे ही संबंधित किसान के बैंक खातों के माध्यम से भुगतान किया जाता है। 

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मंगलवार, 24 अक्टूबर 2017

अखिल भारतीय किसान सभा सूरतगढ़ का संयोजक मंडल गठित:आइजीएनपी में पानी की मांग

अखिल भारतीय किसान सभा सूरतगढ़ की बैठक करनाणी धर्मशाला में हुई जिसमें 7 सदस्य संयोजक मंडल का गठन कर जसराम बुगालिया को तहसील संयोजक चुना गया। 

उसके बाद इंदिरा गांधी नहर परियोजना में 4 में से 2 समूह में मार्च माह तक सिंचाई पानी देने ,IPC में संशोधित विधेयक काला कानून वापिस लेने  सहित अन्य मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के नाम प्रशासन को ज्ञापन सौंपा।


शनिवार, 24 दिसंबर 2016

खेत और किसान मरे तो श्मशान बन जाएंगे शहर और शहरी कारोबार

-  करणीदान सिंह राजपूत -

 खेत और किसान मरे तो सब  श्मशान बन जाएंगे। न कोई शहर बचेगा न कोई कारोबार बचेगा ना कोई अट्टालिकाएं बचेगी और न कारों हवाई जहाजों में यात्रा करने वाले बचेंगे। आदमी की रीढ की हड्डी टूट जाती है या उसमें थोड़ा भी नुकसान हो जाता है तो उस आदमी की हालत क्या होती है? क्या रीढ की हड्डी टूटने के बाद आदमी चल फिर सकता है?मौज मस्ती कर सकता है? कोई कारोबार कर सकता है? पीड़ित व्यक्ति एक स्थान पर पड़ा रहता है।

 आज जो परिस्थितियां सत्ताधारियों ने और प्रशासनिक अधिकारियों ने पैदा कर दी है। इससे खेत और किसान दोनों की हालत रीढ टूटे हुए आदमी जैसी हो गई है, अगर अभी भी सब कुछ जानते हुए इलाज नहीं किया गया तो वह दिन दूर नहीं जब किसान मर जाएगा खेत मर जाएंगे। लेकिन इतराने की जरुरत नहीं है कि शहर में रहते हैं, अलग से कारोबार है,बड़ी अट्टालिका हैं, चलने को सड़के हैं,कारें और हवाई जहाज हैं। यह सब या इन में से कोई भी जीवित नहीं बचेगा, और   न उनके अंश बचेंगे।

 हमारे देश में सारी जीवन प्रणाली खेत और किसान से जुड़ी हुई है। जब खेत में कुछ पैदा नहीं होता है तो सारा इलाका अकाल और अभाव  से पीड़ित हो जाता है। संपूर्ण क्षेत्र विकास के दौर में कई साल पीछे पहुंच जाता है।

 मैं संपूर्ण देश के बजाय अभी  राजस्थान और राजस्थान में भी फिलहाल कुछ इलाके की बात कर रहा हूं, जिस इलाके में अनेक सालों के प्रयत्नों के बाद करोड़ों रुपए लगाने के बाद गंग नहर निकली,भाखड़ा और राजस्थान नहर निकली।
 यह इलाका निरंतर मेहनत करने पर सरसब्ज हुआ और आगे और अधिक विकास की संभावनाएं तलाशने वाला शक्तिशाली क्षेत्र बना। इसे आज की ताकतवर हालत में पहुंचाने वाला इलाके का किसान है और उसका परिवार है, जिसने  न दिन देखा, न रात देखी। न सर्दी की बदन चीरती हुई हवाएं देखी। न जून जुलाई गर्मी की तपन देखी।
किसान और उसका परिवार दिन-रात जूटा हुआ रहा, लेकिन आज सरकारी और प्रशासनिक अव्यवस्थाओं ने इलाके के किसान को इलाके के खेतों को मरने के लिए मजबूर कर दिया है। मेरी सोच यह है कि किसान और खेत खुद नहीं मर रहे हमारी राज व्यवस्था हमारी प्रशासनिक व्यवस्था उनकी हत्या कर रहे हैं। उनको तड़पा तड़पा कर मार रहे हैं।

 जब किसी को मारा जाता है तो वह जीव चाहे कितना ही छोटा हो कितना ही कमजोर हो। वह अपने जीवन के लिए मरने और मारने के लिए तैयार हो जाता है और उसमें सैंकड़ों गुना ताकत अपने आप पैदा हो जाती है। वह संघर्ष के लिए अपने बचाव के लिए और ताकतवर समूह बना लेता है। फिर अपनी ताकत का इस्तेमाल करता है। उस जीव द्वारा जीवन के लिए किया जाने वाला संघर्ष कामयाब रहता है।वह जीव ही नहीं पूरा समूह मौत की ओर जाने से बच जाता है।


जब जीव संघर्ष करता है तब उसके सामने ना कोई अपना होता है ना कोई पराया होता है। उसे केवल और केवल अपना जीवन दिखाई पड़ता है। आज इलाके के खेत और किसान को जीवन देने वाली राजस्थान नहर भाखड़ा नहर और गंग नहर इन तीनों को बचाने के लिए अपने खेतों को बचाने के लिए किसान इलाके का मजदूर और इलाके का व्यापारी एक जुट खडे़ हैं। कहने का मतलब है कि सब कुछ खेत और किसान से जुड़ा हुआ है। अभी भी सत्ता और प्रशासन समझ नहीं पा रहे हैं या जानबूझकर सत्ता सुख में समझना नहीं चाहते हैं। वे भूल गए हैं कि  उनका जन्म भी इस इलाके के अंदर हुआ। इस इलाके के मतों ने विजयी बनाकर जयपुर और दिल्ली भेजा। यह इलाका उनके साथ नहीं होता तो वे न दिल्ली पहुंच पाते,न राजस्थान की राजधानी जयपुर पहुंच पाते। न जिले में और न तहसील में और पंचायत समितियों में ग्राम पंचायतों में प्रतिनिधित्व कर पाते।

 इस इलाके का किसान संघर्ष करें और जनप्रतिनिधि चाहे वह  सरपंच हो, चाहे अन्य पदों पर हो, विधायक सांसद हो या फिर मंत्री हो,नष्ट हो रहे मर रहे खेत और किसान को देखते हुए कैसे समारोह कर रहे हैं?  कैसे मालाएं पहन रहे हैं और कैसे विकास के थोथे भाषण दे रहे हैं। विकास मशीनों से पैदा नहीं होता बल्कि यह जो मशीन है बनी हैं वह सब खेत और किसान के उत्पादन के बाद  आवश्यकता के अनुरूप बनाई गई है किसान और खेत नहीं होते तो फिर मशीनें भी नहीं होती।


 मैं एक बात बहुत कड़वी कहना चाह रहा हूं बल्की कह रहा हूं की अगर खेत और किसान नहीं रहे तो बाकी भी नहीं रहेंगे। इस वाक्य को समझना चाहिए। यह वाक्य और बात केवल हवा में नहीं कह रहा और हवा में उड़ाने के लिए भी नहीं कह रहा हूं। मैं इस इलाके में 50 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहा हूं।मैं यहां के इलाके के किसानो को खेत मजदूरों को और व्यापारियों को अच्छी तरह से,भलीभांति तरीके से जानता हूं कि वे आंदोलन और संघर्ष करके अपने अधिकार प्राप्त कर लेंगे। पानी प्राप्त कर लेंगे लेकिन सत्ताधारियों का और प्रशासन का क्या होगा? जो आज किसान के साथ न होकर समारोहों में व्यस्त हैं।


 किसान और खेत रहेंगे लेकिन ये समारोह एक दिन  एक सप्ताह मनाए जा सकते हैं।  इनको सदा के लिए तो नहीं मनाया जा सकता। सदा तो खेत रहेंगे किसान रहेंगे।


राजस्थान नहर जिसे आज इंदिरा गांधी नहर कहा जा रहा है,भाखड़ा नहर और गंगनहर इलाके की तीनों जीवनदायिनी नहरें पिछले कुछ सालों से लगातार मौत की ओर जा रही है और इनसे जुड़े धरतीपुत्र किसान संघर्ष कर रहे हैं। अब समय कह रहा है कि संभल जाओ।

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24-12-2016.
अपडेट 4-6-2018.

शुक्रवार, 23 दिसंबर 2016

भाजपा के हाथ से किसान निकले- नेता किसानों से अपील करने से भी डर गए है

-  करणीदान सिंह राजपूत -
हनुमानगढ़ व श्रीगंगानगर जिलों में चल रहे किसान प्रदर्शनों से भारतीय जनता पार्टी के मंत्री और नेता विधायक बुरी तरह से डर गए हैं। भाजपा के जनप्रतिनिधि किसानों से बात करने से भी भय खा रहे हैं। किसानों की सीधी चुनौतियों से लग रहा है कि पानी की मांग कर रहे किसान भाजपा के हाथ से निकल गए हैं।
 किसान अपने उजड़ रहे खेतों को देखकर भा ज पा से मेलजोल तक नहीं रखना चाहते। भाजपा के नेता किसानों के बीच जाकर अपनी सरकार की बात रखने तक से घबरा रहे हैं।भाजपा नेताओं को लग रहा है कि उनकी बात और अपील सुनी नहीं जाएगी तथा किसान उनको खरी-खोटी सुनाएंगे। भाजपा के घबराए जनप्रतिनिधियों की ओर से किसानों से अपील नहीं की गई। आश्चर्यजनक तौर पर भाजपा का डर इस स्थिति में सामने आया है कि किसानों से जल संसाधन विभाग के उत्तरीय क्षेत्र के मुख्य अभियंता आर के चौधरी से अपील करवाई गई है। आर के चौधरी ने बांध में जल स्तर कम होने का हवाला देते हुए किसानों को भाई बताते हुए अपील की है। यह अपील सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के माध्यम से समाचार के रूप में दी गई है। आश्चर्यजनक है कि जल संसाधन मंत्री डॉ रामप्रताप खुद हनुमानगढ़ में रहते हैं हनुमानगढ़ से विधायक हैं लेकिन उनकी तरफ से किसानों से अपील नहीं हुई।
 हनुमानगढ़ जिले में किसानों का आंदोलन रोष से भरता जा रहा है और यह कोई विकट रुप भी ले सकता है। हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर के विधायक किसानों के बीच में जाने से कतरा रहे हैं। किसानों का आंदोलन किस रूप में आगे जाएगा और इससे कितना नुकसान हो जाएगा का अनुमान भाजपा नेता नहीं लगा रहे।

एक तरफ किसान आँदोलन और नोटबंदी दोनों मुद्दे जुड़ जाएंगे तब क्या होगा?

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