बुधवार, 30 नवंबर 2022

राजस्थान:1977 में जनता ने कांग्रेस शासन उखाड़ फेंका.भैरोंसिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने थे

 

राजस्थान:1977 में कांग्रेस शासन उखाड़ फेंका: भैरोंसिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने.2023 में कांग्रेस का क्या होगा? अब हालात बुरे से बुरे।


* करणीदानसिंह राजपूत *


30 साल के संघर्ष के बाद राजस्थान में 1977 में आपातकाल के बाद में जनता पार्टी की जीत हुई। भैरों सिंह शेखावत मुख्यमंत्री बने उस समय कांग्रेस की क्या स्थिति थी? कांग्रेस क्यों हारी? इस पर राजस्थान समाचार प्रचार समिति की ओर से 21 जून 1977 को समाचार बुलेटिन जारी किया गया वह कांग्रेस पार्टी की नीतियों के प्रति बहुत कुछ बता रहा था। 2003 के चुनाव में फिर 2013 के चुनाव में कांग्रेस को पराजय मिली। अब आगे आने वाले चुनाव 2023 में कांग्रेस के हाल क्या होंगे? कांग्रेस राज के 2018 में जीतने के बाद 4 साल बीत चुके हैं।इन चार सालों में लोगों को जो मिला और जो देखा उससे तो यह कहा जा सकता है कि हालत 1977 के चुनाव में जो थी अब उससे कई गुना अधिक बिगड़ चुकी है। सरकार का नियंत्रण खत्म जैसा हो रहा है। भ्रष्टाचार और अनाचार बढ रहा है। नारी अत्याचार और हत्याकांड बढ रहे हैं।रिश्वत के बिना काम ही नहीं हो रहे। प्रतिदिन किसी न किसी को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो रंगे हाथों गिरफ्तार कर रहा है। दावा किया जा सकता है कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में बहुत सख्त है।  लेकिन फिर भ्रष्टाचार क्यों और कैसे बढ रहा है? जो लोग पकड़े गए उनको अपराधी सिद्ध होने के बावजूद अधिकांश के विरुद्ध अदालत में केस चलाने की अनुमति संबंधित विभाग क्यों नहीं दे रहे। इस पर सरकार की तरफ से कोई दिशा निर्देश नहीं हो रहे। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत या कोई भी अन्य मंत्री भ्रष्टाचार के मामले में अधिकारियों कर्मचारियों को लताड़ता नहीं है और चेतावनी भी नहीं देता। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में वर्षों से प्रकरण लंबित पड़े हैं और उनकी संख्या बढती जा रही है। किसी  मामले  की जांच कितने दिन में पूर्ण हो जानी चाहिए? सब जगह मामले दबाने से जनता परेशान हो रही है।

शिक्षा चिकित्सा का बुरा हाल है और सुनवाई नहीं हो रही। ऐसी बिगड़ी सूरत में 2023 के चुनाव होंगे। कांग्रेस की जीत की उम्मीद तो एक प्रतिशत भी नहीं। किसान खेत की रखवाली नहीं करे,लोगों के कहने पर भी खेत को देखे नहीं और अच्छी उपज की आस करे। कांग्रेस की ऐसी दुर्दशा है तो ऐसा ही चुनाव परिणाम होगा। 

सन् 2023 के चुनाव होने से पहले 1977 में कांग्रेस जिन जन विरोधी नीतियों के कारण हारी,उनके बारे में जानकारी लेते हुए अब की नीतियों पर विचार करना चाहिए।


*  राजस्थान में राजनीति करने वालों को चाहे वे किसी भी दल के हों वह समाचार बुलेटिन पढ़ना चाहिए जो मेरे रिकॉर्ड में मिला। आज 30 नवंबर 2022 के हिसाब से 44 साल पहले

कांग्रेस किन जनविरोधी नीतियों से हारी थी। उसका उल्लेख है। मै  उस समय स्वय का भारत जन साप्ताहिक समाचार पत्र (1973 से 1979) का संपादन प्रकाशन कर रहा था। भारतजन के नाम से ही राजस्थान समाचार प्रचार समिति के बुलेटिन मिलते रहते थे।

उस बुलेटिन में जो लिखा गया वह आपके समक्ष यहां शब्द से शब्द प्रस्तुत कर रहा हूं।


* 30 साल बाद भैरों सिंह शेखावत जनता नेता निर्वाचित राजस्थान में उमंग और उत्साह का वातावरण.*

जयपुर( राजस्थान 21 जून. 1977.


दुर्भावना और आशंकाओं के गहरे कोहरे को चीर कर आज प्रबल वेग से जनता सूर्य के रूप में जन नेता भैरों सिंह शेखावत के राजस्थान के मुख्यमंत्री के रूप में उदय हो जाने से सारे राज्य में उमंग और उत्साह का वातावरण व्याप्त हो गया है

कांग्रेस के एक दलीय  अहंकार से चूर और घृणा की राजनीति से भरपूर शासन को जनता ने उसके आपातकाल में चरमोत्कर्ष पर पहुंच जाने और अन्याय और की समस्त परिस्थितियों को लांघने सामने के बाद चतुर  किंतु खामोशी के आत्मिक बल के साथ उखाड़ फेंका।

* 30 साल तक बेबस और अनजान जनता ने अपने आंगन में जिस पेड़ को सींचा था उसके कांटो की असह्य चुभन को बर्दाश्त न करने से गत दो चुनावों में उस वृक्ष को जड़ सहित उस वृक्ष को भूमिगत कर दिया।

राजस्थान विधानसभा के प्रांगण में कांग्रेस की घृणा की राजनीति और असहनीय भ्रष्टाचार के बखिया उधेड़ने वाले जन नेता भैरों सिंह शेखावत को जनता ने आज अवसर दे दिया है कि अन्याय के आगे अपने नए झुकने वाले व्यक्तित्व से प्रदेश की करोड़ों जनता को सामाजिक न्याय प्रदान करें।

 प्रदेश के सौहार्दपूर्ण वातावरण को कभी जाट- राजपूत, कभी हरिजन गैर हरिजन, कभी मुसलमान और हिंदू की वैमनस्यता के गंदे पानी से खींचने वाले कांग्रेसी सत्तालोलुपों का जनता ने एक बार ही पर्दाफाश कर दिया है और जन नेताओं को अवसर दिया है कि वे ईमानदारी से प्रदेश में जनप्रजातांत्रिक मूल्यों की स्थापना करें जिसके प्रकाश ने गत आमचुनावों के परिणामों से विश्व को हतप्रभ कर दिया और भारत की प्रजातंत्र में अपूर्व निष्ठा को उजागर कर दिया।

 जनता के मुख्यमंत्री श्री भैरों सिंह शेखावत अब तक के समस्त मुख्यमंत्रियों में सर्वाधिक आदर के साथ अपने पद पर प्रतिष्ठित हुए हैं। उन्हें अधिक से अधिक विधायकों का जहां विश्वास प्राप्त हुआ है वहां प्रबल जनसमर्थन से भी उनके मनोबल को शक्ति प्राप्त हुई है।


 श्री शेखावत का जन्म 1923 में सीकर जिले के एक गांव खाचरियावास में हुआ है। प्रारंभिक दीक्षा के बाद उन्होंने 4 वर्षों तक सरकारी नौकरी की और 1952 में राजस्थान विधानसभा के लिए चुने गए। अपने 20 वर्ष के विधायक काल में भैरो सिंह ने सुखाड़िया सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार का निरंतर विरोध किया और नाथद्वारा कांड,पानरवा कांड, सहारिया भूमि कांड आदि को विधानसभा के समक्ष रखा।

 संगठन पक्ष में शेखावत राजस्थान प्रदेश जन संघ के उपाध्यक्ष, अध्यक्ष,अखिल भारतीय जन संघ की कार्यसमिति के सदस्य और उपाध्यक्ष रहे हैं। 

उन्होंने कच्छ रक्षा आंदोलन, शिमला समझौता विरोधी आंदोलन,सिंधी शरणार्थी बचाओ आंदोलन, महंगाई विरोधी आंदोलन, भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों में भाग लिया और उन्होंने अनेक बार गिरफ्तारियां दी।

 * 1965 और 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय उन्होंने अपने साथी निरंजन नाथ आचार्य के साथ सैनिकों की सेवा तथा युद्ध प्रयत्नों में भारी सहायता दी। भैरों सिंह शेखावत ने 1971 के बाद भारतीय सेनाओं द्वारा विजित पाकिस्तान क्षेत्र की यात्रा की और पचास हजार

सिंधी शरणार्थियों को मौत के मुंह में धकेले जाने से बचाने में सफलता प्राप्त की।

 गत लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में जनता पार्टी के चुनाव संयोजक के रूप में प्रदेश भर में उन्होंने विस्तृत चुनाव सभाएं आयोजित की और जनता को स्वच्छ और लाभकारी प्रशासन देने का वचन दिया। उनके ही एकथ परिश्रम का फल रहा कि जहां सुखाड़िया गए वहां ही कांग्रेस उम्मीदवार पराजित हुआ।

 धुन के धनी और सादा जीवन के पक्षपाती भैरों सिंह शेखावत जनता के बहुत निकट हैं। साहित्य और कला के अनुरागी के रूप में वे सहज हास्य और अनुराग के भरपूर हैं।

राज्य के नेता के चुनाव के रूप में उन्होंने प्रदेश की गंभीर जन समस्या के समाधान, अनुसूचित परिगणित जातियों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने तथा जनता पार्टी की घटक प्रवृत्ति को तोड़ने का तथा प्रदेश से भ्रष्टाचार के तीव्र पलायन का  जनता से वायदा किया है।०

आपने बुलेटिन पढ लिया। उस समय कांग्रेस के हारने के कारण भी जान गए। अब हालात बुरे से भी बुरे हैं जिनका कुछ वर्णन प्रारंभ में आपने पढ लिया।


०0० 

30 नवंबर 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

( 1965 से पत्रकारिता लेखन । )

( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ (राजस्थान )

94143 81356.

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* लेख प्रकाशित प्रसारित किया जा सकता है। फारवर्ड शेयर भी किया जा सकता है। 

करणीदानसिंह राजपूत।






( उस समय साईक्लोस्टाईलिस्ट मशीन से अधिक प्रतियां निकाली जाती थी।)०0० 

30 नवंबर 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

( 1965 से पत्रकारिता लेखन । )

( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ (राजस्थान )

94143 81356.

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* लेख प्रकाशित प्रसारित किया जा सकता है। फारवर्ड शेयर भी किया जा सकता है। 

करणीदानसिंह राजपूत।

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मंगलवार, 29 नवंबर 2022

गंगाश्री और श्यामसिंह की चिताएं जली एक साथ.अटूट रिश्ते की चर्चा चहुंओर.




 * करणी दान सिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 29 नवंबर 2022.

पति पत्नी के एक साथ संसार छोड़ने की घटनाओं में सूरतगढ़ के दंपति गंगाश्री और श्यामसिंह की घटना भी जुड़ कर चर्चा बन गई है।

भगवान के घर से बना अटूट रिश्ता एक और प्रमाण वार्ड नंबर 23 सूर्योदयनगरी के निवासी श्याम सिंह और पत्नी गंगाश्री का है। 

श्यामसिंह सूरतगढ़ केंद्रीय फार्म से सेवानिवृत्त शांत जीवन उम्र 75 वर्ष और पत्नी गंगाश्री धर्म परायणा उम्र 70 वर्ष।

गंगाश्री दिनरात धार्मिक जीवन व्यतीत करने वाली महिला। 3 वर्ष पहले गाय को गुड़ खिलाते वक्त उसी गाय से घायल हुई। गाय ने उछाला लेकिन धर्म की परंपराएं नहीं छूटी। गंगाश्री हिंदू व्रत त्योहारों पर धर्म-कर्म में अपना समय व्यतीत करती। पति सेवानिवृत्त कर्मचारी सामान्य जीवन शांतिपूर्ण जीवन दोनों का संबंध जिसे कहते हैं अटूट संबंध। इस धर्म प्रिय परिवार में दोनों का वृद्धावस्था जीवन सामान्य सा चल रहा था। 

अटूट रिशते की घटना बड़ी शांति से इस प्रकार चली।

गंगाश्री ने 27 नवंबर 2022 की रात करीब साढे नौ बजे यह संसार छोड़ दिया। रात को ही यह सूचना शहर और दूर रिश्तेदारों तक पहुंचाई गई।

रात बीती।  28 नवंबर दोपहर बाद अपरान्ह में चार बजे अंतिम संस्कार की तैयारियां चल रही थी। काफी रिश्तेदार पहुंच चुके थे।

28 नवंबर को सुबह करीब 11 बजे अटूट रिश्ते की घटना ने इस तरह से प्रवेश किया।

श्याम सिंह ने अपने बड़े पुत्र महेंद्र सिंह जाटव को कहा कि मेरा भी संसार से मोह छूट गया है। मैं भी जा रहा हूं। मुझे चिकित्सालय आदि ले जाने की आवश्यकता नहीं है।  कुछ समय व्यतीत होने के बाद में उनकी देह शिथिल होने लगी। पिता के प्रति मोह। मां की निर्जीव देह घर में पड़ी और पिता ने अचानक यह बात कह दी। 


पुत्र महेंद्र सिंह और मित्र श्यामसिंह  को हॉस्पिटल में ले गए।  चिकित्सकों ने कहा कि देह में प्राण नहीं है। 

अचानक यह समाचार सूरतगढ़ के कोने कोने में पहुंच गया। सोशल मीडिया में प्रसारित हो गया। पति और पत्नी का यह रिश्ता अमर हो गया। कुछ रिश्तेदार जो आनेवाले थे वे भी तुरंत पहुंचे। 

घर में नर नारियों की भीड़ जुटने लगी। 


 29 नवंबर को गंगाश्री और श्याम सिंह की अंतिम यात्रा एक साथ रवाना हुई। राम नाम सत् है सत् बोलो गत् है के स्वर गूजते दोनों अर्थियां

सूर्योदयनगरी की कल्याण भूमि में ले जाई गई। सर्वमान्य मनोरम स्थान जहां ईहलोक परलोक की धर्म कर्म की चर्चाएं होती है। कल्याण भूमि में दोनों के अटूट रिश्ते और धर्म कर्म की ही चर्चा होने लगी।

दोनों की चिताएं पास पास जली। बड़े पुत्र महेंद्र सिंह ने अग्नि संस्कार पूर्ण किया । मुखाग्नि दी कपाल क्रिया की । यह दृश्य देखकर लोग भावव्हिल हो रहे थे। धर्म परायण परिवार से जुड़े पति और पत्नी गंगा श्री और श्याम सिंह एक साथ ही पंचतत्व में विलीन हो गए। 

इस अंतिम संस्कार में शहर के गणमान्य राजनीतिक कार्यकर्ता पत्रकार वकील चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोग सामाजिक कार्यकर्ता आदि साक्षी बने। 

* गंगाश्री और श्याम सिंह के बड़े सुपुत्र महेंद्र सिंह जाटव यहां पत्रकारिता करते हैं और साप्ताहिक ब्लास्ट की आवाज समाचार पत्र का प्रकाशन करते हैं। छोटे पुत्र जीतेंद्र हैं। एक पुत्री मिथिला उत्तर प्रदेश में विवाहित है। 

29 नवंबर 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,(राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

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सोमवार, 28 नवंबर 2022

सूरतगढ़:उपखंड अधिकारी खुद देखें अधूरे फ्लाईओवर से बने बुरे हालात:विनम्र मांग






* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 28 नवंबर 2022.

राष्ट्रीय उच्च मार्ग नंबर 62 पर शहर में बन रहे फ्लाईओवर के पास छात्रा की मौत के बाद लोगों में रोष है और आज पूर्व घोषणा के अनुसार  नेता नरेंद्र घिंटाला की अगुवाई में उपखंड कार्यालय के आगे धरना लगाया गया। 

उपखंड अधिकारी संदीपकुमार से बातचीत हुई नरेंद्र घिंटाला के साथ में शहर के जागरूक नेता कार्यकर्ता भी मौजूद थे। उपखंड अधिकारी को निवेदन के रूप में कहा गया कि इंदिरा सर्कल से मानकसर तक की जो हालात है पुल अधूरा बना हुआ है जिससे दुर्घटनाएं होती है।

 उसे आप खुद पैदल देखें या दुपहिया वाहन पर सवार होकर के देखें और उसके बाद में निर्णय लें। जनता में बहुत आक्रोश है और कुछ नहीं हुआ तो फिर शीघ्र ही धरना प्रदर्शन निरंतर किया जाएगा और उसमें उग्रता भी आ सकती है। उपखंड अधिकारी को बताया गया कि करीब 10- 15 घटनाएं हो चुकी है जिसमें लोग घायल हुए हैं। छात्रा की मौत से पहले एक सेवानिवृत्त इंजीनियर की भी मौत होने का हवाला दिया गया।

 उपखंड अधिकारी से मांग की गई कि निर्माण कंपनी से शीघ्र ही निर्माण पूरा करवाया जाए जो बंद पड़ा हुआ है। पुल बंद होने से बड़े वाहन सड़क पर से ही कम जगह में से गुजरते हैं और वहां कोई ना कोई चपेट में आ जाता है। 

 इससे पहले आंदोलन कर चुके लोग भी शामिल हुए। 

आज धरना प्रदर्शन और बातचीत में नरेंद्र घिंटाला, बद्रीनारायण बिनानी, रतन लाल पारीक, लीलाधर फौजी, रेवंत राम सोनगरा, एडवोकेट ललित शर्मा,रमेशचंद्र माथुर,पूर्व पार्षद गोपी नायक,पूर्व पार्षद जगजीत सिंह बराड़, अजय सिंह सिसोदिया,सत्यनारायण सारस्वत, दुलीचंद सहारण,जसराम टाक,सुरेंद्र टाक,सतनाम वर्मा,एडवोकेट श्रीमती पूनम शर्मा, बाबू सिंह खींची आदि ने भाग लिया।कार्यालय के आगे आज धरने पर अनेक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

विदित रहे कि करीब 5 माह पहले अतिरिक्त जिला कलेक्टर अरविंद कुमार जाखड़ के कार्यालय में एक बैठक हुई जिसमें नगरपालिका पुलिस यातायात पुलिस निर्माण कं के प्रतिनिधि शामिल हुए।  अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने उस बैठक में कं को एक माह का समय दिया था। लेकिन निर्माण कं ने बंद निर्माण को शुरू ही नहीं किया।

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रविवार, 27 नवंबर 2022

सूरतगढ़:रतन चौपड़ा के ससुर सुरेंद्र कोचर के पिता जीवराज कोचर की देहदान.अमर हुए.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

भीनासर ( बीकानेर) के जीवराज कोचर देहदान कर अमर हो गये। नश्वर शरीर को राख बनाने के बजाय चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों के शोध के लिए देहदान का संकल्प अपने जीते जी परिजनों को बता दिया। वे अपने वस्त्र व्यवसायी पुत्र सुरेंद्र कुमार कोचर के पास कोलकत्ता रहने लगे और अपने दामाद रतनलाल चौपड़ा के यहां भी आते रहते थे। अभी सूरतगढ़ आए हुए थे और इस धरती पर अंतिम सांस ली। आज 27 नवंबर 2022 को सुबह उनके परलोक गमन के साथ ही उनके संकल्प अनुसार कार्यक्रम शुरू कर दिया गया। डॉ एस एस टांटिया मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, श्रीगंगानगर को उनकी देहदान कर दी गई। उनके परिजन रिश्तेदार, जैन और जैनेतर समुदाय के लोग देहदान कार्यक्रम के साक्षी बने। 


सूरतगढ़ का महावीर इंटरनेशनल वर्षों से समाजसेवा के विभिन्न कार्य, चिकित्सा,रक्तदान शिविर चलाता है। उसके कार्यकर्ता जीवराज कोचर के निधन पर एकत्रित हो गए।

जीवराज जी के दामाद रतनलाल चौपड़ा

महावीर इंटरनेशनल सूरतगढ़ के संस्थापक सदस्य पूर्व कोषाध्यक्ष रहे हैं।

वीर रतनलाल चोपड़ा के ससुर श्री जीवराज कोचर  की मृत्यु पश्चात रविवार को उनका देहदान करवाया गया। 93 वर्षीय श्री कोचर ने अपनी देहदान का संकल्प ले रखा था। उनके नाती अमृत चोपड़ा ने महावीर इंटरनेशनल की गवर्निंग काउंसिल के सदस्य संजय बैद को अपने नाना की इच्छा से अवगत कराया। तत्पश्चात संस्था ने टांटिया समूह के निदेशक डॉ विशु टांटिया से संपर्क किया गया। डॉ एस एस टांटिया मेडिकल कॉलेज, हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, श्रीगंगानगर की टीम सूरतगढ़ पहुंची। परिजनों की सहमति से पार्थिव देह कॉलेज स्टाफ को सुपुर्द की गई जिसे विद्यार्थियों के रिसर्च के लिए काम में लिया जाएगा।




 श्री कोचर की अंतिम क्रिया जैन संस्कार विधि से भरत ऋषि रांका ने करवाई।इस अवसर पर उनके भतीजे राजू कोचर, पुत्री लीला देवी चोपड़ा, उर्मिला भूरा, सोनम चोपड़ा, विकास चोपड़ा आदि परिजनों सहित पूर्व विधायक अशोक नागपाल, महेंद्र बैद, अनिल रांका, जय प्रकाश सावनसुखा, मनोज सेठिया, समाज बंधु व संस्था सदस्य उपस्थित थे। रलनलाल चौपड़ा और उनके पुत्र सूरतगढ़ में सौंदर्य प्रसाधनों का व्यवसाय करते हैं। ब्यूटी हट नाम प्रसिद्ध है। समाजसेवा के लिए समय निकाल उपस्थित रहते हैं।

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27 नवंबर 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ ( राजस्थान)

94143 81356.

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कांग्रेस नेता बलराम वर्मा मांगेंगे कांग्रेसी टिकट: संकट डूंगर गेदर और मील के टिकट पर शुरू

 






👍 प्रथम 1 म ई 2022.

 अपडेट 27 नवंबर 2022.


* समर्थकों की ताकत के बल पर चुनावी घोड़े पर हर हालत में सवार होंगे: बलराम वर्मा की प्रेसकान्फ्रेंस में पक्की  घोषणा।*


* करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ़। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बलराम वर्मा ने 2023 राजस्थान विधानसभा का चुनाव हर हालत में सूरतगढ़ सीट से लड़़ने की पहली घोषणा करके जहां इलाके की जनता को सजग किया है वहीँ डूगरराम गेदर और मील परिवार के टिकट पतंग में छेद कर दिया है। बलराम वर्मा अपने समर्थकों की ताकत पर चुनावी घोड़े पर सवार होंगे और अपने करीब 40 साल से अधिक अनेक संघर्षों के इतिहास पर चुनाव लड़ेंगे। 


बलराम वर्मा ने पत्रकार वार्ता दि 1 मई 2022 में घोषणा की कि प्रथम वे कांग्रेस पार्टी से टिकट मांगेंगे और टिकट नहीं मिली तो भी हरहाल में चुनाव लड़ेंगे। वर्मा ने कहा की हकदार होते हुए भी पहले तीन बार उनकी टिकट काट दी गई ,इसलिए यदि इसबार गड़बड़ी हुई तो हर हालत में चुनाव लड़ेंगे। टिकट काटने का यह खेल बारबार सहन नहीं हो सकता। वर्मा ने बताया कि पिछली बार टिकट ऐन मौके पर काटी गई। उस समय समर्थकों ने चुनाव लड़ने का कहा लेकिन सात आठ दिन में तैयारियां करना संभव नहीं था। उस समय समर्थकों की आशाओं को पूरा नहीं कर सका इसलिए 2023 के चुनाव से 18 महीने पहले ही घोषणा की है। इसी घोषणा से ही गांवों में सम्पर्क अभियान शुरू होगा और चुनाव तक चलेगा।

बलराम वर्मा ने कहा कि चुनाव में खर्च करने को लाखों रुपये नहीं है लेकिन संघर्षों और समर्थकों की ताकत पर चुनाव लड़ा जाएगा। वर्मा ने बताया कि छात्र दिनों से ही संघर्षों में जूझने लगे और अभी भी जनता के मजदूर किसान व्यापारी,नौजवानों  के साथ खड़े हैं। कालेज आंदोलन, थर्मल,सिंचाई पानी,सूरतगढ़ फार्म,जिला बनाओ आदि अनेक आंदोलनों का इतिहास रहा है। उन्होंने कहा कि 2008 से जिनको कांग्रेस की टिकट दी जाती रही है उनका कोई संघर्ष आंदोलन में नाम भी नहीं रहा। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की टिकट कोई भी मांगे, सभी को टिकट मांगने का चुनाव लड़ने का हक है, लेकिन वे इसबार समर्थकों के आग्रह को टाल नहीं सकते। 

उन्होंने कहा कि अनेक चुनावों का अनुभव है।  सूरतगढ़ नगरपालिका पार्षद रह चुके हैं। रामपुरा पंचायत से सरपंच रह चुके हैं। सन 2003 में विधानसभा चुनाव पीलीबंगा सीट पर 18 हजार वोट और सूरतगढ़ सीट पर 40 हजार वोट मिलने का रिकॉर्ड रहा है। 

वर्मा से पूछा गया कि चुनाव किन मुद्दों पर लड़ेंगे। उन्होंने जवाब दिया कि सूरतगढ़ शहर और गांवों में अनेक मुद्दे हैं। अकेले शहर में 60 हजार वोट हैं जहां मुद्दों की भरमार है। नगरपालिका भ्रष्टाचारों से भरी है जो सबसे बड़ा मुद्दा है। बलराम वर्मा ने कहा कि पालिका  अध्यक्ष पर जनता ने भरोसा किया लेकिन आज शहर का सत्यानाश हो गया है। 

बलराम वर्मा ने बताया कि अशोकगहलोत सन 2004 के लोकसभा चुनाव में घर आए और कांग्रेस में आग्रह से शामिल किया। आज भी सूरतगढ़ से जिला और प्रदेश राजधानी जयपुर तक संपर्क हैं जिनका लाभ पीड़ित लोगों की समस्याओं को समाधान कराने में इस्तेमाल करते हैं।०0०













शनिवार, 26 नवंबर 2022

राजस्थान:2023 में जीतेंगे नये चेहरे: नयों का बढता दबाव 1980 में जीते थे 116 नये चेहरे.

 


* करणीदानसिंह राजपूत.*


राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 में भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों में नए चेहरों की मांग और आवाज उठ रही है कि चुनाव नये चेहरों को लड़ाया जाए।

 20 से 40 साल से राजनीति कर रहे जो पुराने हैं उनके नाम कट सकते हैं। यह मांग बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। मांग बहुत अधिक प्रभावी है इसलिए इस आवाज को निश्चित ही सुना जाएगा। नये चेहरों को भी दिनरात अपना प्रयास पूरी शक्ति से जोरों पर करना होगा जिसमें जनसंपर्क जरूरी है।

 * 2018 के चुनाव में राहुल गांधी ने इस पर अधिक जोर देकर कार्य किया और सख्ती की थी जिससे कांग्रेस ने राजस्थान में अनेक पुराने चेहरों को टिकटें नहीं दी थी और नए चेहरे शामिल किए गए थे।

इस बार सन् 2023 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी में भी नए चेहरों को टिकट दिए जाने की मांग बल पकड़ रही है। कांग्रेस में भी यह मांग चल ही रही है। 

*दोनों पार्टियों में नए चेहरों को टिकट दिए जाने के बारे में मंथन भी चल रहा है।आशा की जाती है कि 70 से अधिक उम्र के नेताओं को टिकट नहीं मिलेगा। संभावना यह भी है कि अनेक 60 और 70 के बीच उम्र के अनेक नेताओं को टिकट भी नहीं मिलें। 

*वे नेता जो लोकप्रिय नहीं रहे, कार्यकर्ताओं की जनता की अनदेखी की या जनता के बीच नहीं रहे, चुपचाप समय व्यतीत करते रहे आदि टिकटों से वंचित रहेंगे। इसे तो पक्का मान ही लेना चाहिए। ऐसे व्यवहार वाले नेताओं को कोई भी पार्टी टिकट क्यों देना चाहेगी जिसके कटु व्यवहार के कारण या गुमनाम जैसे चुप रहने के कारण हार निश्चित लगती हो।

राजस्थान में भाजपा राज पुनः पाने के लिए और कांग्रेस अपना राज बचाने के लिए पूरी शक्ति लगाएगी और इसके लिए नये चेहरों को चुनाव में उतारेगी। भारतीय जनता पार्टी में 100 से अधिक नये चेहरे हो सकते हैं। कांग्रेस भी नयी स्थितियों को ध्यान में रखकर नये चेहरों को चुनाव लड़ाएगी।


 * नए चेहरों को टिकट दिए जाने का इतिहास अभी एकदम से पैदा नहीं  हुआ है। सन 1980 में राजस्थान विधानसभा चुनाव में कुल 200 सीटों में 116 सीटों पर नए चेहरे चुने गए थे।

पुराने चेहरों को जो चुनाव में खड़े हुए थे उनको हार मिली। पुराने चेहरे वही जीते थे जो बहुत अधिक प्रभावी व्यक्तित्व वाले और  जनता के बीच में बहुत लोकप्रिय थे।

भाजपा टिकट पर प्रभावी जनता पार्टी सरकार के मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत,पूर्वमंत्रीगण भंवरलाल शर्मा, कैलाश मेघवाल,ललित किशोर चतुर्वेदी, विद्या पाठक,नंदलाल मीणा चुनाव जीत  गए। जनता पार्टी राज के पूर्वमंत्री बिरदमल सिंघवी भाजपा टिकट पर हार गये।


* जनता पार्टी राज के सात  पूर्व मंत्री जिन्होंने जनता पार्टी ( जे.पी.) के टिकट पर चुनाव लड़ा वे हार गए। उन हारने वालों में मानिकचंद सुराणा कल्याण सिंह कालवी दिग्विजय सिंह त्रिलोक चंद जैन हरि सिंह यादव भैरव लाल काला बादल और सूर्य नारायण चौधरी थे। भूतपूर्व मंत्री जयनारायण पूनिया भी चुनाव में खड़े हुए थे मगर उन्होंने चुनाव के बीच में ही हटने का ऐलान कर दिया था।

 जनता सरकार के दो भूत पूर्व मंत्री संपत राम कांग्रेस अर्श के टिकट पर और डॉक्टर हरिसिंह इंदिरा कांग्रेस के टिकट पर फिर से चुने गए। प्रोफेसर केदारनाथ भूतपूर्व जनता पार्टी सरकार के मंत्री ने लोक दल के टिकट पर नामांकन भरा मगर बाद में उसे वापस ले लिया। 

मास्टर आदित्येंद्र,शिवचरण सिंह,विज्ञान मोदी, व महबूब अली आदि भूतपूर्व जनता मंत्रियों ने चुनाव नहीं लड़ा। भूतपूर्व  जनता सरकार मंत्री लालचंद भी चुनाव में खड़े हुए मगर हार गए। लोक दल के टिकट पर चुनाव में खड़े हुए लालचंद तीसरे स्थान पर रहे। जनता राज के दो भूतपूर्व मंत्री सूर्य नारायण चौधरी वह हरि सिंह यादव अपने चुनाव क्षेत्रों में तीसरे नंबर पर रहे।


 नए चेहरों के चुनाव वाले समय में इंदिरा कांग्रेस ने 199 सीटों पर चुनाव लड़ा. लाडनू में दीपंकर का नाम देरी से तय हुआ तब तक वे अपना नाम वापस ले चुके थे। भारतीय जनता पार्टी ने 123 सीटों पर, जनता एस चरण सिंह यानी लोकदल ने 103 सीटों पर,जनता पार्टी जेपी ने 76 सीटों पर,कांग्रेस अर्श ने 70 सीटों पर जनता एस राज नारायण ने 39 सीटों पर, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 24 सीटों पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी ने 17 सीटोंपर चुनाव लड़ा था। उस चुनाव का परिणाम ऐसा रहा। इंदिरा कांग्रेस 133 सीटों पर भाजपा 32 सीटों पर लोक दल जनता एस चरण सिंह 7 सीटों पर,कांग्रेस अर्श 6 सीटों पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी एक सीट पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी एक सीट पर जीते और 12 स्थानों पर निर्दलियों ने बाजी मारी थी।

उस चुनाव में 30 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में थी जिनमें से केवल 10 जीतकर विधानसभा में पहुंच सकी थी।  श्रीमती शांति पहाड़िया, सरोज मल्होत्रा, भगवती देवी, समंदर कंवर, कमला, कमला भील, लक्ष्मी कुमारी चूंडावत कुल 7 महिलाएं इंदिरा कांग्रेस के टिकट पर जीती। जयपुर के लोगों ने जनता राज की तीनों महिला उम्मीदवारों को फिर से भाजपा के टिकट पर चुनकर विधानसभा में भेजा उनके नाम पुष्पा जैन आमेर से डॉ उज्जवला अरोड़ा जयपुर ग्रामीण से विद्या पाठक सांगानेर से पहुंची। जनता पार्टी वाली भंग सरकार के 141 सदस्यों ने चुनाव लड़ा मगर 52 ही जीतकर पहुंचे

 

नए चेहरों के बीच राजस्थान विधानसभा के उपचुनाव में 5 पार्टियों के अध्यक्षों को हार का मुंह देखना पड़ा। इंदिरा कांग्रेस के अध्यक्ष राम किशोर व्यास,भाजपा के संयोजक जगदीश प्रसाद माथुर,जनता पार्टी जेपी के अध्यक्ष नरेंद्र पाल सिंह चौधरी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके माकपा के राजस्थान के महासचिव मोहन पूनमिया कांग्रेस के अध्यक्ष मथुरादास माथुर चुनाव हार गए थे।





 * सन् 1980 में राजस्थान विधानसभा में जो परिणाम रहा।उस पर मेरी एक बड़ी रिपोर्ट दिल्ली प्रेस की सरिता ग्रुप की प्रसिद्ध पत्रिका 'भू भारती' नई दिल्ली के अगस्त प्रथम अंक 1980 में प्रकाशित हुई थी। भूभारती में प्रकाशित लेख के तीन पृष्ठों के चित्र प्रस्तुत है। यह रिपोर्ट राजनीतिज्ञों और पत्रकारों को पढ़नी चाहिए। विधायकों पूर्व विधायकों और चुनाव लड़ने के ईच्छुक को इससे महत्वपूर्ण लाभ अवश्य ही मिलेगा। ०0०

26 नवंबर 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

 स्वतंत्र पत्रकार,

(राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

 सूरतगढ़ (राजस्थान)

94143 81356.

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- करणीदानसिंह राजपूत.

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पत्रकारिता आम आदमी के लिए करें,चाटुकार न बनें- करणीदानसिंह राजपूत.21 दिसंबर 2012.

 

हनुमानगढ़। वरिष्ठ पत्रकार करणीदान सिंह राजपूत ने आम आदमी के लिए पत्रकारिता किए जाने पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि चंद प्रभावी लोगों की चाटुकारिता के बजाय अगर आम आदमी के हित में काम होगा तो इसके बहुत अच्छे नतीजे सामने आएंगे। आम आदमी का भला होगा और मीडिया को भी इसका फायदा पहुंचेगा। वे आज यहां नवज्योति मूक-बधिर स्कूल में दैनिक तेज के संस्थापक डॉ. तेजनारायण शर्मा की पुण्यतिथि के अवसर पर 'बदलते परिदृश्य में प्रिंट मीडिया की भूमिका' विषयक व्याख्यान माला को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।


उन्होंने कहा कि डॉक्टर तेज नारायण शर्मा जैसे लोगों ने आज से पांच दशक पहले जब पत्रकारिता शुरू की, तब आज की तरह सुख-सुविधाएं नहीं थीं। न संचार के साधन थे और न अत्याधुनिक प्रिटिंग की सुविधा। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने लगातार अखबार निकाल कर पत्रकारिता धर्म निभाया। ऐसे लोगों को सिर्फ जयंती-पुण्यतिथि पर ही नहीं, इन्हें हर रोज पूजा जाना चाहिए।


राजपूत ने कहा कि पहले पत्रकारिता सिखाने वाले संस्थान नहीं थे। उस समय छोटे कहे जाने वाले अखबारों के दफ्तरों में ही लोग पत्रकार के रूप में शिक्षित-दीक्षित होते थे, उनमें से अनेक लोग ख्याति प्राप्त कर मूर्धन्य पत्रकार कहलाए। बड़े समाचार घरानों को इस तरह का श्रेय प्राप्त नहीं है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ पत्रकार मदन अरोड़ा ने कहा कि डॉक्टर तेजनारायण शर्मा निर्भीक, निष्पक्ष और ईमानदार पत्रकार थे। उन्होंने कभी पत्रकारिता के मूल्यों से समझौता नहीं किया। वरिष्ठ पत्रकार गोविंद गोयल ने कहा कि पत्रकार को विभिन्न परिस्थतियों में काम करना पड़ता है। वह गांव में रहते हुए यदि विकास पत्रकारिता करता है तो शहर में आकर उसका कैनवास बड़ा हो जाता है। हर स्थिति में पत्रकार का काम सराहनीय है।०0०

( पुरानी यादें)






नगर पालिका सूरतगढ़ को जेठमल मूंधड़ा पार्क 4 महीने में खाली करना होगा

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 17 अगस्त 2022. 

अपडेट 26 नवंबर 2022.


उपखंड मजिस्ट्रेट कपिल कुमार यादव ने यह निर्णय दिया है कि नगरपालिका को जेठमल मूंधड़ा पार्क व पुस्तकालय चार माह में खाली करना होगा। यदि नगरपालिका ने पार्क खाली नहीं किया तो दूसरी एजेंसी से पार्क खाली करवाया जाकर खर्च वसूल किया जाएगा।

नगरपालिका प्रशासन ने  इस पार्क पर कब्जा जमा कर कबाड़ और कचरा वाहन  स्टोर बना रखा है।

 सूरतगढ़ के कुछ नागरिकों ने नगरपालिका प्रशासन के विरुद्ध कदम उठाया। 

उन्होंने उपखंड मजिस्ट्रेट के समक्ष 2 मार्च 2022 को यह वाद प्रस्तुत किया। उपखंड मजिस्ट्रेट के समक्ष सुनवाई होने के बाद उपखंड मजिस्ट्रेट ने 5 अगस्त 2022 को यह फैसला सुनाया। यह अवधि 4 दिसंबर 2022 को पूरी होगी। नगरपालिका के पास अब गिनती के ही दिन बचे हैं।

 नागरिकों की ओर से वाद प्रस्तुत करने वालों में रेवंत राम सोनगरा पुत्र तुलसाराम,गणपत राम आसरी पुत्र फुसाराम, पार्षद बसंत कुमार बोहरा पुत्र सत्यनारायण,एडवोकेट आनंद कुमार शर्मा पुत्र लूणकरण, महावीर प्रसाद भोजक पुत्र गोपीराम, नत्थू राम गहलोत पुत्र मोतीराम मोची, मुरलीधर पारीक पुत्र किशनलाल , भंवरलाल पुत्र मोहनलाल ब्राह्मण,समीर कुमार भाटी पुत्र तोलाराम,प्रेम प्रकाश पुत्र खुशाल सिंह खारवाल ने यह बात प्रस्तुत किया था।०0०








सूरतगढ़ की कॉलोनियों के घोटाले:एक बार पैसा वापस लेना ही समझदारी होगी.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ की कॉलोनियों के घोटाले उजागर हो रहे हैं और जब भी जांचें हुई तो निश्चित रूप से लोगों की बड़ी बड़ी रकमें डूबेंगी जिनका वापस मिलना बेहद मुश्किल होगा। कॉलोनियों में बिना सोचे समझे वे लोग लाखों रूपये लगा रहे हैं जिनके पास बिना मेहनत के लाखों रूपये पैदा हो रहे हैं या अचानक से लाखों रूपये हाथ लगे हों। वे संपत्ति बनाने के बड़े दिखावे के लिए रकम बिना पूरी जानकारी के लगा देते हैं।


अभी केवल लाखों रूपये की पहली किस्त दी है या भूखंड की पूरी कीमत दे चुके हैं तथा भूखंड लिया नहीं या कॉलोनी का निर्माण शुरू नहीं हो पाया, या निर्माणाधीन है तो अनुबंध खत्म कर अपनी रकम वापस ले लेनी चाहिए। अपनी रकम को वापस अपने हाथों में या अपने खाते में लेने में देरी करना मूर्खता होगी। 


ये कॉलोनाइजर बड़े पैसे वाले,राजनीतिक, व्यवसायी, चिकित्सक, कारखाने वाले,स्टोर मालिक, मॉल वाले भी हो सकते हैं जिनके प्रभाव में लोग जल्दी आते हैं। लोग सोचते हैं कि यह मेरी पार्टी का है, मेरा मिलने वाला है, मेरे मोहल्ले मेरे शहर का है। यह मेरे से ठगी नहीं करेगा। आप की ऐसी सोच एक पल में फुर्र हो जाए तब क्या करेंगे?


कॉलोनाइजर से जब दी गई रकम वापस मांगेंगे तब बहुत बहाने लगाएंगे, बहुत उदाहरण देंगे, मीठा बोलेंगे लेकिन रकम देने की हां नहीं करेंगे। वे सस्ता कह कर उलझाए रखेंगे ताकि लाखों रूपये वापस नहीं लौटाने पड़ें। यहां कड़ाई का रूख अपनाए रखते हुए रकम वापस ही लेनी है ताकि आपकी रकम जैसे भी हो बच जाए। 

कॉलोनाइजर,ठग,भ्रष्टाचारी आदि मीठे बोल कर ही फंसाते हैं फुसलाते हैं बहकाते हैं। इसलिए यह याद रखें कि रकम अपने पास ही जमा रखने के लिए कॉलोनाइजर के पास हजारों मीठे शब्द होंगे। वह बार बार कहेगा'एक बार और सोच लो,'रकम पड़ी है'। आप बिना रकम लौट आए तो उसके आदमी दूत आने लगेंगे और फुसलाते रहेंगे। आप समझेंगे कि यह तो मेरा ही खास है, उसकी सलाह  भी सही लगेगी लेकिन असल में वह कॉलोनाइजर का खास होगा। ऐसे  बिचौलिए लोग बाद में कहते हैं कि किसी के दिल में तो बैठ कर देखा नहीं जा सकता,कॉलोनाइजर लगता तो भला था। आपकी रकम थी। हमारे से ज्यादा तो आपको सोचना चाहिए था।


"खबर पॉलिटिक्स" की धमाकेदार हलचल और उथलपुथल करने वाली खबरों में पत्रकार राजेंद्र जैन (पटावरी) ने 22 जून 2022 को एक कॉलोनी का जमीनी सच्च तथ्यों प्रमाणों सहित उजागर किया और अपना आशियाना का सपना लेने वालों को सचेत किया। राजेंद्र जैन ने 

सूरतगढ़ की बसंत बिहार आनंद बिहार कॉलोनियों का मामला एक बार फिर दो पंक्तियों में रख दिया कि यह जिन्न भी बोतल से बाहर आने को है। ये कॉलोनियां अपने शुरू होने से लेकर अब तक विवाद से घिरी हैं। आरोप है की जोहड़ पायतन पर कोई भी निर्माण नहीं हो सकता। जोहड़ तालाब के मूल स्वरूप को बदला नहीं जा सकता। 

इन दोनों कॉलोनियों पर ब्लास्ट की आवाज साप्ताहिक में बड़े बड़े खुलासे हो चुके हैं। ब्लास्ट की आवाज में तीन और कॉलोनियों की गड़बड़ियां भी जनता के सामने रखी। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर और पास में बन रही है ये कॉलोनियां। 

इससे पहले सूर्योदय नगरी लाईन पार क्षेत्र की कॉलोनी की गड़बड़ी को भी उजागर किया। ब्लास्ट की आवाज का संपादन प्रकाशन महेंद्र सिंह जाटव करते हैं जिसके हर अंक में राजनीति पर या घोटालों पर धमाके होते हैं।

* सवाल घूम फिर कर वहीं आता है कि जिन लोगों के पास अचानक से पैसा बढ रहा है वे लोग बिना सोचे समझें भूखंडों पर कॉलोनियों में लाखों लगा रहे हैं। डूबे तो उनके कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा लेकिन जिनके जीवन भर की कमाई है और जो दिनरात व्यवसाय कर पैसे जोड़े हैं, उनके फर्क पड़ेगा। क्या करना है यह तो पैसा लगाने वाले जानें। लेकिन एक बार पैसा वापस लेना ही समझदारी है।०0०

दि. 23 जून 2022. 

अपडेट 26 नवंबर 2022



करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार

( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

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