शुक्रवार, 31 जुलाई 2026

स्कूल में बच्चों की प्रताड़ना: शिक्षक प्रधानाचार्य संचालक सभी को जेल होगी और स्कूल को ताला।

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

आपके स्कूल में बच्चों को किसी भी प्रकार से प्रताड़ित किया जाता है तो समझ लें कि किसी भी दिन बच्चे ने शिकायत कर दी तो स्कूल धड़ाम से 

गिर जाएगा।  शिक्षक,प्रिंसिपल,संचालक और मामले को दबाने में सहयोग देने वाले शिक्षक व अन्य स्टाफ जेल में होंगे। छोटेछोटे बच्चों को न पढने पर,होमवर्क नहीं करने पर,उत्तर याद नहीं होने पर किसी भी प्रकार की मारपीट, डांट डपट, मुर्गा बनाना, खडे़ करना, दूसरे बच्चे से थप्पड़ मरवाना,लड़कों को चूडिय़ां पहना कर हंसी उड़ाना क्रूरता मे आते हैं और पुलिस में शिकायत होने पर 

जेल निश्चित है। इस लेख को पढ कर यह न सोचें कि कुछ नहीं होता। माता पिता आदि ने ही न पढने पर दंड देने सख्ती करने का कहा था जैसा बहाना पुलिस थानों में नहीं चलता। क्या आपके स्कूल में कोई भी कक्षा में पढाने के लिए लगा दिया जाता है जो टीचर नहीं है और वह भी बच्चों को प्रताड़ित कर देता है। लड़कियों के साथ मारपीट, चोटी पकड़ कर डेस्क पर रगड़ कर दंड देना, हाथ मरोड़कर पिटाई करना होता है तो आप जैसा नालायक दूसरा नहीं हो सकता। लड़की ने प्रताड़ना के बाद शिकायत में बैड टच का आरोप लगा दिया तो क्या होगा?

कभी भी कोई भी बच्चा शारीरक दंड से डांट से परेशान हुआ घायल हुआ किसी का हाथ पैर काम करना बंद हुआ या कोई गड़बड़ी हुई तो गुरूजी की गुरूआई क्षण भर में खत्म हो जाएगी।

छोटे छोटे बच्चों को बाल वाहन में भेड़ बकरियों की तरह भरना और स्कूल में शारीरक मानसिक दंड देना, पीटना और पिटवाने की शिकायतें हैं मगर संचालकों को मालुम है और मालुम नहीं भी है।  स्कूल संचालकों की जानकारी में होती है ये सब अनियमितताएं  साधारण में,सब चलता है,कुछ नहीं होता, जैसी सोच से हल्के में लेते हैं और फंसने पर सब बरबाद हो जाता है। 


* छोटे छोटे बच्चे भी दंड से डांट से आत्महत्या जैसे कदम उठा लेते हैं तब संचालक ऐसे फंसता है कि केस में से निकल नहीं पाता। अभिभावक कह दें कि डराओ धमकाओ थप्पड़ मार दो तब भी शिक्षक को ऐसा नहीं करना चाहिए। 

* मेरी जानकारी में स्कूली छात्र की आत्महत्या का एक मामला सूरतगढ़ राजस्थान का है जिसमें उच्च माध्यमिक स्कूल के संचालक पर मुकदमा है तथा गिरफ्तारी आदेश पर उच्च न्यायालय जोधपुर से स्टे लेकर फिलहाल बचे हुए हैं।*

* अभी एक अत्याचार का बहुत ही घिनौना मामला सामने आया है जिसमें पुलिस केस हुआ है। बच्चे ने अध्यापिका से पेशाब करने के लिए अनुमति मांगी। अध्यापिका ने अनुमति नहीं दी। बच्चे का पेंट में पेशाब निकल गया। अध्यापिका ने डांटा पीटा और दूसरे कमरे में ले जाकर दंड दिया। अध्यापिका ने चाकू गर्म कर बच्चे की पेशाब नली पर दाग दिया। बच्चे के दर्द होने पर मां बाप ने पूछा तब यह घटना सामने आई। पुलिस केस हुआ। बच्चों को दंड देने का कोई अधिकार नहीं है। शिक्षक अपनी घर की परेशानियों की क्रूरता स्कूल में निकालते हैं।

* बाल वाहन का रंग पीला होना चाहिए और भी कड़े नियम हैं जिनका पालन नहीं किया जाता। वाहन किराए पर और उसमें क्षमता से अधिक बच्चे। लेखक ने अनेक बार छोटी बालवाहिनी में बच्चों को ठूंसा हुआ और सीट से नीचे बैठे हुए भी देखा है। इसमें अभिभावकों की भी गलती है कि जब वे वाहन का शुल्क देते हैं तो अपने  बच्चे से ऐसा व्यवहार स्वीकार क्यों करते हैं। इसमें यातायात विभाग, पुलिस भी दोषी है जो जांच नहीं करते। अच्छे स्कूल के चक्कर में अपने कोमल अंग बच्चों को यातनाओं के हवाले कर देते हैं।

* स्कूल संचालक, प्रधानाचार्य, शिक्षक दंड देने की और वाहन में ठूंसने की गलत हरकतें करते हैं तो अभिभावकों को पुलिस में शिकायत कर देनी चाहिए। बच्चे का जीवन स्कूल के संचालक की कार्वाईयों से अधिक महत्वपूर्ण है इसलिए बच्चों से वाहन,कक्षा में दंड आदि के बारे में जानकारी लेते रहना चाहिए। अभिभावकों द्वारा बच्चों से पूछते रहना चाहिए कि स्कूल में मारपीट या किसी भी प्रकार की प्रताड़ना तो नहीं हो रही। यदि स्कूल में कुछ भी गलत हो रहा है तो कोई भी क्षमा के लायक नहीं। ऐसे में शिकायत हुई तो स्कूल बंद और जेल खुली होगी।( यदि आप स्कूल चलाते हैं तो पढने के तुरंत बाद सुधार कर लें तथा अपने मित्रों संचालकों शिक्षकों को समझाएं। ) इस लेख को मजाक में न लें और गंभीरता से सोच लें कि समय खराब हो सकता है और पुलिस मुकदमा हो सकता है। 

०0०

31 जुलाई 2026.

* करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)

पत्रकारिता अनुभव 62 वर्ष,

94143 81356.

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सूरतगढ़ : होटल निर्माण की जांच जरूरी.सुरक्षा दृष्टि से जांच जरूरी.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 31जुलाई 2026.एक होटल का निर्माण रेलवे चारदीवारी से चिपते हुए चल रहा है। होटल निर्माता ने रेलवे सीमा की तरफ खिड़कियां बनाई है। पड़ोसी की दीवार की तरफ खिड़कियां रोशनदान द्वार आदि नहीं रखे जा सकते। यहां होटल की किसी भी खिड़की में से रेलवे मुख्य द्वार व परिसर पर नजर और निशाना रखा जा सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से बड़ी गड़बड़ है। 




होटल निर्माता को इसकी स्वीकृति हो नहीं सकती। यदि निर्माता ने बिना स्वीकृति के रेलवे सीमा की तरफ होटल की खिड़कियां रखी है तो वह जिम्मेदार है।

नगरीय सीमा में नगरपालिका के स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही निर्माण किया जा सकता है। यहां नगरपालिका तुरंत ही निरीक्षण और जांच कर सकती है और निर्माण अवैध पाया जाता है तो निर्माण रूकवाया और निर्माण को सीज भी किया जा सकता है। ०0०


गुरुवार, 30 जुलाई 2026

सूरतगढ़ नगरपालिका चुनाव:भाजपा बनाएगी बोर्ड.भाजपा संगठन नेताओं से बातचीत.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 30 जुलाई 2026.

भाजपा के संगठन नेताओं का दावा है कि सूरतगढ़ में नगरपालिका चुनाव में भाजपा को बहुमत मिलेगा और भाजपा ही आगामी नगरपालिका बोर्ड का गठन करेगी। पूर्व विधायक अशोक नागपाल की मौजूदगी में भाजपा जिलाध्यक्ष स.शरणपालसिंह मान,नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना और पूर्व नगरमंडल अध्यक्ष सुरेश मिश्रा से नगरपालिका चुनाव के संबंध में बातचीत हुई। नगरमंडल के अध्यक्ष और पूर्व अध्यक्ष दोंनो ने पक्का दावा किया कि भाजपा यहां पार्षदों के चुनाव में स्पष्ट बहुमत प्राप्त करेगी और निर्वाचित पार्षद बोर्ड के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का चुनाव करेंगे। यहां कुल 45 वार्ड हैं और बहुमत के लिए 23 वार्डों में भाजपा का जीतना जरूरी होगा। पिछले चुनाव में 45 वार्डों में भाजपा के केवल 12 पार्षद और कांग्रेस के 22 पार्षद चुने गए थे। अध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी को और अधिक 30 वोट मिले और भाजपा का एक वोट कम होकर केवल 11 वोट ही मिले। भाजपा संगठन नेताओं को यह स्थिति बताई गई लेकिन इसके बाद भी भाजपा नेता इस दावे पर रहे कि आगामी चुनाव में भाजपा को ही स्पष्ट बहुमत मिलेगा।

आम जनता में भाजपा कमजोर नजर आ रही है और नगरपालिका चुनाव  लगभग दो माह बाद होने वाले हैं। भाजपा इन दो माह में जनहित के कितने काम करा पाएगी। 15 अगस्त के बाद चुनाव घोषणा होते ही तत्काल आदर्श आचार संहिता लग जाएगी जिसमें काम रुक जाएंगे। नये काम शुरू नहीं हो पाएंगे, केवल पूर्व में शुरू कार्य पूर्ण हो सकेंगे। ऐसी स्थिति में भाजपा संगठन नेताओं की घोषणा सिरे चढेगी या बीच में लटक जाएगी? भाजपा नेताओं व सत्ता भोग चुके नेताओं  की ओर से आम जनता के काम कराने को कोई भी नेता आगे नहीं आया। लेकिन फिर भी भाजपा नेताओं में जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान ने यह भी दावा किया है कि अभी जो भाजपा कार्यकर्ता बिखरे हुए नजर आ रहे हैं वे सभी चुनाव में एक होकर कार्य करेंगे। एक और निचोड़ आया कि सफाई सड़कें और स्ट्रीट लाईट आदि सभी चुनाव से पहले तक दुरूस्त हो जाएंगे।०0०






बुधवार, 29 जुलाई 2026

सीएलजी बैठक में सीआई रामकुमार लेघा की बड़ी अपील.सूरतगढ़ पुलिस थाना सदर.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 29 जुलाई 2026.

पुलिस थाना सदर के थानाधिकारी रामकुमार लेघा की संपूर्ण पुलिस टीम अपने अधिकार क्षेत्र के गांवों चकों आबादियों और सड़क मार्गों पर सक्रियता से नशा बेचने तस्करी करने वालों की पकड़ में लगी हुई है। लेकिन एक सोच अलग चल रही है कि लोगों को खासकर युवाओं को प्रेरित करते हुए नशे से दूर रखा जाए।

* सदर थाने में आयोजित सीएलजी बैठक में थानाधिकारी रामकुमार लेघा ने एक बड़ी अपील की।




ज़िला पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार आज पुलिस थाना सूरतगढ सदर मे सीएलजी मिटींग का आयोजित की गई जिसमें थाना क्षेत्र के सभी गाँवों से सीएलजी सदस्य, ग्राम रक्षक, सुरक्षा सखियों ने व इलाक़े के गणमान्य महिला पुरूषों ने भाग लिया। 

थानाधिकारी रामकुमार लेघा द्वारा बढते नशे के दुष्प्रभावों को बताते हुए नशे पर अंकुश लगाने हेतु स्थानीय लोगों से सहयोग की अपील की गई।अपने अपने क्षेत्र मे सजग रहकर युवाओं को खेलों से जोड़कर शारीरिक रूप से व मानसिक रूप से मज़बूत रहने का आह्वान किया गया।

 महिलाओं को महिला अपराधों के बारे मे बताते हुए आत्मरक्षा व आपात स्थिति में सुरक्षा की जानकारी देते हुए अपने परिवार को व बच्चों को नशे से दूर रखने की हिदायत दी गई। सीएलजी  बैठक में उपस्थित नागरिकों ने अपने विचार व सुझाव प्रस्तुत किए एवं सहयोग का आश्वासन भी दिया।

यातायात नियमों की जानकारी दी जाकर यातायात नियमों का पालन करने पर विचार व्यक्त किए गए।

पुलिस थाना के सहायक उपनिरीक्षक राजकुमार कटारिया की प्रेरणा द्वारा जन सहयोग से निर्मित फ़र्नीचर युक्त एच एम  कार्यालय( प्रशासनिक भवन) में सहयोग करने वाले नागरिकों को धन्यवाद दिया गया।

 मिटींग में पधारे सीएलजी सदस्यों, ग्राम रक्षकों, सुरक्षा सखियों का आसुचना अधिकारी विक्रम सिंह द्वारा धन्यवाद दिया गया।०0०





मंगलवार, 28 जुलाई 2026

कासनिया लेघा रस्साकस्सी में पहली बार लेघा जीता? दूसरी बार कौन जीतेगा?

 





* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 28 जुलाई 2026.

पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया और भाजपा युवा मोर्चे के प्रदेश मंत्री राहुल लेघा में राजनैतिक पावर यूज करने की रस्साकस्सी चल रही है जिसकी हर ओर चर्चा है। दोनों के बीच जोर आजमाइश के भूचाल का केंद्र सूरतगढ़ की नगरपालिका कार्यालय में निकला। किसी को भी अंदाजा नहीं था कि अधिशासी अधिकारी के कक्ष में भूचाल आएगा। कासनिया ईओ पूजा शर्मा को सूरतगढ़ में ही रखने के ईच्छुक थे मगर यहां राहुल लेघा की डिजायर पर ईओ मनीषकुमार पारीक आ धमके और पूजा शर्मा को यहां से हटाकर एपीओ कर दिया गया। पूजा शर्मा को किसी दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया जाने के बजाय एपीओ किया जाना कासनिया को चोट पहुंचाने वाला रहा।  पहले चर्चा रही कि एक दो दिन में नया आदेश आएगा और पूजा शर्मा यहां सूरतगढ़ में ही रखी जाएगी। स्वायत्त शासन विभाग की तबादला सूची 10 जुलाई 2026 को घोषित हुई और 13 जुलाई को ईओ मनीषकुमार पारीक ने सूरतगढ़ में ईओ पद पर जोईन कर लिया।

* रामप्रताप कासनिया और राहुल लेघा के बीच रस्साकस्सी का  पहला परिणाम लेघा के पक्ष में घोषित हो गया। राहुल लेघा की पहली जीत ने कासनिया को झकझोर डाला। राहुल लेघा की यह जीत कासनिया  की राजनीति पर प्रहार रही और चर्चा गरम हुई कि कासनिया जी पूजा शर्मा को सूरतगढ़ में ईओ पद पर वापस लाएंगे। 

कासनिया जी ने  इस प्रयास को हर हालत में सफल बनाने के लिए जयपुर में डेरा डाल दिया। यह चर्चा तो है मगर इसमें भविष्य भूचाल के दूसरे झटके का है। पूजा शर्मा का ईओ पद पर पुनः आना होता है तब तो कासनिया की राजनीतिक पावर को बल मिलेगा लेकिन ऐसा नहीं हो पाया तब कासनिया की दूसरी बार हार होगी। निश्चय ही राहुल लेघा की पावर शक्तिशाली मानी जाएगी। यह माना जा रहा है कि पूजा शर्मा का सूरतगढ़ ईओ पद पर वापस लौटना बहुत मुश्किल है। पूजा शर्मा पर सूरतगढ़ में ईओ पद पर रहते भ्रष्टाचार के कई आरोप लगे हुए हैं इसलिए इस पद पर लौटना मुश्किल है। राहुल लेघा टीम का कहना है कि सरकारी योजनाओं को सही तरीके से लागू कराने के लिए ईओ मनीषकुमार पारीक को यहां लाया गया है। ईओ पद पर मनीषकुमार पारीक का रहना   कासनिया और लेघा के बीच दूरियां और अधिक बढाएगा। कासनिया टीम इस प्रयास में भी है कि पूजा शर्मा सूरतगढ़ नहीं लाई जा सकने की स्थिति में यह हो जाए कि राहुल लेघा की डिजायर पर आया ईओ मनीषकुमार पारीक भी यहां नहीं रहे। पारीक का यहां से तबादला कर दिया जाए। अगर यह भी नहीं हुआ तब क्या होगा? 

*ईओ मनीषकुमार पारीक ने सबसे पहले बिगड़ी सफाई व्यवस्था को सुधारना शुरू किया है जिसकी झलक कुछ दिखाई देने लगी है। ०0०









रविवार, 26 जुलाई 2026

कासनिया टीम का भ्रष्ट अधिकारी के पीछे मरणा मांडना.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

ईओ इतना बड़ा पद नहीं है कि तबादले के बाद किसी ईओ को वापस लाने की कसरत करते  राजनैतिक आत्महत्या हो जाए। क्या एक खास व्यक्ति के बिना शहर का काम नहीं चलेगा? पचासों सालों में अनेक ईओ आए और गये। पद खाली नहीं रहा किसी न किसी को चार्ज मिलता रहा। 

कासनिया टीम ईओ को वापस लाने के चक्कर में सूरतगढ़ को त्याग कर जयपुर में बैठी है। 10 जुलाई 2026 को तबादला आदेश हुआ जिसको 15 दिन बीत चुके हैं। किसी अधिकारी ने जनहित के काम कराने,सरकारी योजनाओं को लागू करने में जनता को लाभ पहुंचाने की विशेषता में कोई रिकॉर्ड बनाया हो,जनता मांग कर रही हो तब तो उसको वापस लाने का एक प्रयास हो सकता है। लेकिन जिसके साथ भ्रष्टाचार के मामले जुड़े हैं, और जिसने स्वच्छ भारत अभियान को ठेस पहुंचाई। शहर में फैली गंदगी को बरसात में और आगे काफी समय तक झेलना पड़ेगा। वह 27 महीने में 10-15 दिन ही वार्डों में पहुंची। ऐसी अधिकारी को सूरतगढ़ में वापस लाकर क्या पावर दिखलाना चाहते हैं? यदि प्रयासों के बाद भी सूरतगढ़ वापस नहीं ला पाए तब क्या होगा? 

एक भ्रष्ट अधिकारी के पीछे मरणा मांड ही दिया है तो यह भी करके देखलो। अब पक्कम पक्का ठान ही लिया है तो जयपुर से सूरतगढ़ खाली हाथ मत लौटना। खाली हाथ लौटे तो लोग न जाने कितनी बातें बनाएंगे। पचास साल की राजनीति को बड़ी ठेस लगेगी जो चुनाव में 50 हजार से हारने पर भी नहीं लगी थी।

* अधिकारी को यहां सूरतगढ़ में वापस तबादला कराने के आदेश और जोईन कर लेने के बाद ही जयपुर से सूरतगढ़ लौटना।

👍 एक सलाह भी है कि अधिकारी को सरकार और विभाग के भरोसे छोड़ो और खुद सोम मंगल को सूरतगढ़ जोईन करलो। कुछ बात रह जाएगी।

26 जुलाई 2026.

०0०











सूरतगढ़ में विकास करने वाले विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष.नये चुनाव में लोगों की पसंद- नेता कैसा हो?

 

 




 * करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 26 जुलाई 2026.

सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विकास करने वाले निर्वाचित नेताओं को सभी जानें। सन् 2000 के बाद से विकास विकास की बातें होने लगी थी। अपने अपने कार्यकाल में किसने क्या क्या किया जिससे सूरतगढ़ की सूरत बदली।

संपूर्ण विधानसभा क्षेत्र में विधायकों के नाम और कार्यकाल ऐसे रहे।

1- सन् 2003 से 2008 तक अशोक नागपाल विधायक रहे। सूरतगढ़ से भाजपा के अशोक नागपाल जीते तब सूरतगढ़ 3 विधानसभा क्षेत्रों जितना विशाल क्षेत्र था। राजियासर के पास से अनूपगढ़ घड़साना अंतरराष्ट्रीय सीमा तक का क्षेत्र था। ( सूरतगढ़ तहसील का टिब्बा क्षेत्र सन् 2003 से 2008 तक पीलीबंगा विधानसभा क्षेत्र में रहा। उस काल में पीलीबंगा से भाजपा की टिकट पर गंगाजल मील खड़े हुए। रामप्रताप कासनिया ने भाजपा टिकट का हकदार खुद को बताया और टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर निर्दलीय चुनाव में खड़े होकर भाजपा को चुनौती दी। रामप्रताप कासनिया जीते।)

2- सन् 2008 से 2013 तक गंगाजल मील विधायक रहे। गंगाजल मील ने भाजपा छोड़ कर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते।

3- सन् 2013 से 2018 तक राजेंद्र सिंह भादू विधायक रहे। भादू ने भाजपा टिकट से चुनाव लड़ा था। 2023 में भादू ने भाजपा से टिकट मांगी और नहीं मिलने पर स्वतंत्र चुनाव लड़ा। पराजय मिलने के बाद कांग्रेस जोईन कर ली।

3- सन् 2018 से 2023 तक रामप्रताप कासनिया विधायक रहे। कासनिया भाजपा टिकट से चुनाव में खड़े हुए और जीते।

4- सन् 2023 से 2028 तक के लिए डुंगरराम गेदर विधायक चुने गये हैं। गेदर ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा और 50 हजार से अधिक वोटों से जीते। गेदर ने भाजपा के प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया को हराया। 

👍 नगर का विकास कराने वाले नगरपालिका अध्यक्ष।

1- सन् 2004 से 20209 तक कांग्रेस के इकबाल मोहम्मद कुरैशी नगरपालिका के अध्यक्ष रहे। 

2- सन् 2009 से 2014 तक कांग्रेस के  बनवारीलाल मेघवाल नगरपालिका अध्यक्ष रहे।

3- सन् 2014 से 2019 तक श्रीमती काजल छाबड़ा नगरपालिका अध्यक्ष रहीं।

4- सन् 2019 में ओमप्रकाश कालवा नगरपालिका अध्यक्ष चुने गए। कालवा कांग्रेस से चुने गए। कालवा की कांग्रेस के पूर्व विधायक गंगाजल मील से नहीं बनी तब कालवा ने रामप्रताप कासनिया का हाथ पकड़ कर भाजपा में सदस्यता ग्रहण कर ली।

* इन नेताओं ने सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में और सूरतगढ़ शहर में विकास के कौन कौन से कार्य करवाए? पैन उठाएं और लिखना शुरू कर दें। 

* कौन विधायक कौन नगरपालिका अध्यक्ष जनहित कार्य कराने में कितने सक्रिय रहे? जिनके विकास कार्यों की चमक दमक से सूरतगढ़ आज समीक्षा के घूम चक्कर पर खड़ा है। अब स्थिति यह है कि चक्कर कुछ रूके तो गणना हो। घूमते चक्कर में केवल एक  सफेद रंग दिखाई पड़ रहा है। सभी ने शहर के विकास के लिए कुछ न कुछ किया है। बस! वह विकास दिखाई नहीं दे रहा। विकास दिखाई भी देना चाहिए।

* नये ऊर्जावान चाहिए अध्यक्ष और विधायक.*

नगरपालिका चुनाव अब सिर पर हैं। लोग चाहते हैं ऐसा ऊर्जावान अध्यक्ष जो अधिक समय दे,अधिक काम करे,फाईलों को लटकाए नहीं, नागरिकों की सुने,दफ्तर पर कंट्रोल हो,पालिका बोर्ड की बैठकें नियमित आयोजित करे। हर बैठक का एजेंडा एकदम स्पष्ट हो,आधा अधूरा न हो जिससे भ्रम रहे। नगरपालिका में अध्यक्ष बनने के ईच्छुक तो अनेक हैं, लेकिन वे कोई भी अभी सामने नहीं आना चाहते। आरक्षण लाटरी में पद किसको मिले,तो पहले सिरखपाई क्यों करें? यही सोच पार्षदों के चुनाव के ईच्छुक लोगों के हैं। फिर भी कुछ लोग चर्चाओं में हैं। नगरपालिका और प्रधान पंचायत समिति पर जिस पार्टी का वर्चस्व हो जाएगा, उसे विधानसभा चुनाव में जीत मिलना सुलभ होगा।०0०








गुरुवार, 23 जुलाई 2026

सूरतगढ़.व्यावसायिक आवासीय मिश्रीत पट्टों का महाघोटाला.ब्लैकमनी से काम हुए.पूजा शर्मा कार्यकाल.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 23 जुलाई 2026.

नगरपालिका के अधिशाषी अधिकारी पद पर पूजा शर्मा के कार्यकाल में गरीबों को पट्टों के लिए चक्कर और परेशानियां रही। लेकिन व्यावसायिक मिश्रित आवासीय पट्टों को जारी करने में प्रशासन ने फाईलें और अपने हाथ खुले रखे और करीब 200 पट्टे जारी किए।

 सूत्रानुसार यह महाघोटाला हुआ जिसमें करोड़ों की ब्लैक मनी लोगों से ली गई। प्रशासन की बड़ी उदारता रही और ब्लैकमनी ली गई। सब काम गुपचुप हुआ।

  राजनैतिक व बड़े संरक्षण के बिना ऐसा घोटाला करना संभव नहीं होता है।

👍 इनके अलावा कालोनियों के पट्टे सर्वाधिक जारी हुए। 

👍👍 यह महाघोटाला ऐसा है कि विभागीय जांच में नहीं एसीबी जांच में खुलासा हो सकता है और घोटालेबाजों पर कानूनी कार्वाई भी हो सकती है। 

सूत्रानुसार *पूजा शर्मा के ईओ रहते जो बड़े घोटाले हुए,उनमें से तीन पर जांच चल रही है।  ईओ पूजा शर्मा ने अपनी भाभी बबीता शर्मा का फर्जीवाड़े में प्रमोशन कर सफाईकर्मी से जमादार बनाया। कर्मचारी उपलब्ध कराने का ठेका गलत तरीके से एक एनजीओ को दिया। एक और ठेका कार्य है। 

* पूजा शर्मा 10 जुलाई 2026 की तबादला सूची से सूरतगढ़ ईओ पद से हटाकर एपीओ जयपुर की गई। पूजा शर्मा पर अनेक आरोप और शिकायतें हैं कि उनके कार्यकाल में अनेक भ्रष्टाचार हुए जिनके कारण नगरपालिका कोष को लाखों रूपयों की हानि हुई। कई होटलो का और अवैध दुकानों का निर्माण हुआ समाचार छपे जिनसे नगरपालिका कोष को बड़ी हानि हुई।

सरकार से मांग हुई है कि नगरपालिका कोष को करोड़़ों रूपयों की हानि पहुंचाने वाली पूजा शर्मा को फील्ड में ड्युटी न सौंपी जाए व हर आरोप की जांच करवाई जाए।०0०









बुधवार, 22 जुलाई 2026

देश में ज्वालामुखी फूटेगा: कविता- करणीदानसिंह राजपूत




मेरा देश बोलेगा

मेरा देश देखेगा

मेरा देश सुनेगा 

सब कुछ होगा।



 मेरे देश में 

घटनाओं पर घटनाएं

कुछ भी हो जाए 

ऐसा सदा नहीं चलेगा


 मेरे देश के आँखें हैं

 मेरे देश के कान भी हैं

मेरे देश के मुंह भी है।


अरे। घमंडी अत्याचारियों

इसका विशाल रूप

ताकत का स्वरूप

कंकाल नहीं हुआ है।

मेरे देश में बदलाव आएगा


आएगा वह दिन आएगा

जब मेरा देश गौर से देखेगा

जब मेरा देश गौर से सुनेगा

जब मेरा देश उदघोष करेगा।


मेरे देश के दिल में 

मेरे देश के दिमाग में

हलचल मचेगी और

ज्वालामुखी फूटेगा।


भ्रष्टाचार के विरूद्व

तानाशाही के विरूद्ध

हर गली हर मोड़ से

क्रांतिकारियों के चौक से

तूफान उठेगा।


ठहर नहीं पाएंगे

भाग जाएंगे

सफेदपोश भ्रष्टाचारी दुराचारी 

ऐसा दिन आएगा?

हां,ऐसा भी दिन आएगा।


 चप्पे चप्पे से

भारत मां का जयघोष

जोरों से गूंजेगा।


क्रांतिकारियों की प्रतिमाएं

स्मारकों से निकल कर

संसद में बैठेंगी

सीमा पर सैनिक बन

दुश्मन को मार भगाएंगी

आएगा जल्दी वह दिन।


जब हम और तुम 

एक दिल एक जान

एक सोच से 

मशाल उठा कर

शक्तिशाली बन जाएंगे

भारत बन जाएंगे।

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रचना 24 जून 2018.
अपडेटेड. 15 फरवरी 2021.
अपडेट. 15 जनवरी 2024.
अपडेट 10 अप्रैल 2024.
अपडेट 9 फरवरी 2026.
अपडेट 22 जुलाई 2026.

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करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

पत्रकारिता 62 वां वर्ष.

सूरतगढ़ ( राजस्थान) 

94143 81356

***०००००😊










मंगलवार, 21 जुलाई 2026

सूरतगढ़ को अब मिला भरोसा. अब राहुल लेघा भी चलाएंगे सरकारी नीतियां.




 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 21 जुलाई 2026.

सूरतगढ़ शहर ताप में झुलस रहा है और अच्छी बरसात की उडीक में है जो तब हो जब सारे नाले नालियां बरसात के पानी को बहाने के लिए साफ हो। अभी तो पांच दस मिनट की बरसात में ही बाजारों में और गली मोहल्लों में सड़कें गलियां घंटों के लिए डूब जाती है और दुर्घटना का डर लगता है। कभी ऐसी दुर्दशा कहीं नहीं देखी तो सूरतगढ़ में देखलें। ईओ पूजा शर्मा यहां से 10 जुलाई 2026 को हटाई गई और एपीओ कर जयपुर भेजी गई। उनका उल्लेख यहां इसलिए किया जा रहा है कि वे 27 महीनों के कार्यकाल में 10-15 दिन ही शहर विजीट को निकली। जब ईओ निरीक्षण नहीं करे तो स्टाफ सफाई निरीक्षक, जमादार भी निरीक्षण क्यों करे और सफाई कर्मचारी भी ड्युटी सही क्यों करे? बात सीधे आती है कि शहर में शासन चलाने वाले पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया टीम ने शहर का निरीक्षण नहीं किया। ईओ पूजा शर्मा 27 महीनों में 10-15 दिन निरीक्षण को निकली और कासनिया टीम और लीडर एक दिन भी निरीक्षण को नहीं निकले।

कासनिया टीम के इस आलसीपन लापरवाही रवैये और नगरपालिका प्रशासन को कुछ भी नहीं कहने की वजह से शहर के हालात बिगड़े और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व राज्य सरकार के स्वच्छ भारत अभियान को पूरी तरह से फेल करके रख दिया। इस अभियान को सफल बनाने की राजकीय ड्युटी थी तो पार्टी स्तर पर भी ड्युटी थी। करणी प्रेस इंडिया में शहर की गंदगी, अतिक्रमण के फोटो वीडियो समाचार अनेक बार प्रसारित हुए। सब पढ कर इग्नोर किया जाता रहा।

👍 बरसात के पानी का निकास तो नहीं हुआ मगर ईओ पूजा शर्मा का सूरतगढ़ से निकास हो गया। पूजा शर्मा को यहां ही रखने के लिए कासनिया टीम ने पूरा जोर लगा दिया और पार नहीं पड़ी। पूजा शर्मा यहां से दूसरे शहर में तबादला नहीं की गई बल्कि भ्रष्टाचारों की ढेरों शिकायतों के कारण एपीओ की गई। ड्युटी के प्रति लापरवाह और भ्रष्टाचारों की शिकायतों के बावजूद कासनिया टीम इस प्रयास में रही है कि पूजा शर्मा को किसी नगरपालिका में ईओ लगवाया जाए। सूरतगढ़ में आए ईओ मनीषकुमार पारीक को भी यहां न रखें किसी ओर को लगा दिया जाए। कम से कम इतनी तो चले। हमारे सामने शहर और शहर की पीड़ित जनता है। शहर के गंदगी भरे बुरे हालात हैं। लोगों की दृष्टि में जो है, उसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।

👍 ईओ मनीषकुमार पारीक को कौन लाया की चर्चा की राजनीति*

ईओ मनीषकुमार पारीक को भाजपा युवा मोर्चे के प्रदेश मंत्री राहुल लेघा की डिजायर पर नगरपालिका में लगाने की चर्चा है और यह पूजा समर्थक कासनिया टीम को आहत कर रही है। * मनीषकुमार पारीक ने 13 जुलाई 2026 को पद भार ग्रहण कर कार्य शुरु किया। उसी दिन उन्होंने कहा कि राज्य सरकार के आदेश पर यहां आए हैं और सरकार की नीतियों योजनाओं को लागू कर लोगों को लाभ पहुंचाएंगे।

👍 कासनिया टीम को राहुल लेघा एक प्रतिस्पर्धी नेता और उसकी शुरू हुई राजनीति नहीं सुहा रही। चर्चा चलाई गई कि ' राहुल लेघा सूरतगढ़ शहर में क्या है? सूरतगढ़ में नहीं चल पाएगा। कासनिया टीम को जबरदस्त जवाब शुरू हुआ है कि राहुल लेघा ने आज 21 जुलाई 2026 को जोरदार ढंग से    सूरतगढ़ शहर की कुंडी खड़का दी है और अब पूरे शहर में हर वार्ड में लोगों की समस्याओं को हल करने के प्रयास में रहेंगे। राहुल लेघा नरक बने हुए वार्ड नं 45 में पहुंचे। उनके साथ ही नगरपालिका प्रशासन की पूरी टीम में ईओ मनीषकुमार पारीक,सहायक अभियंता महेंद्र थालोड़, कनिष्ठ संदीप अभियंता कालवा,व सफाई टीम थी। वार्ड वासियों को समस्याओं को दूर करने का भरोसा दिया गया। अब यह भरोसा पूरे शहर में आगे बढेगा और कासनिया टीम खुद के आलसीपन के रवैये का नतीजा देखती रहेगी। 

*  कासनिया टीम को अब स्पष्ट प्रमाण मिल जाना चाहिए कि ईओ मनीषकुमार पारीक को यहां स्वच्छ भारत अभियान को सफल बनाने, सरकार की योजनाओं को लागू करने के लिए कौन लेकर आया है!०0०


रविवार, 19 जुलाई 2026

राहुल लेघा की रामप्रताप कासनिया को चुनौती से हालात बदलेंगे. सूरतगढ़ की सबसे गरम चर्चा.

 




* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़। भाजपा युवा मोर्चे के प्रदेश मंत्री राहुल लेघा ने चालीस सालों से राजनीति कर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया की राजनैतिक कार्यप्रणाली को चुनौती दी है, जिसकी पूरे सूरतगढ़ विधानसभा में और बाहर हर ओर गरम चर्चा है। 'काल को छोरो राज चलावेगो अर चुनाव लड़्या कासनिया जी देखेगा, आ क्यूं कर चालण देवांगा' कासनिया जी के अनेक समर्थक बतियाते हैं। कासनिया जी 50 हजार से अधिक वोटों से हार कर भी जगह नहीं छोड़ें,मनमर्जी भी चलाएं तो फिर कोई तो चुनौती देगा। गलत सलत होते हुए देख कर कोई तो बोलेगा। यहां जब भाजपा में से कोई नहीं बोला तो राहुल लेघा ने गलत सलत पर चुनौती दी और अब लगातार चुनौतियां ही रहेंगी। राहुल अब कल कल का छोरा नहीं रहा है। पंचायत समिति सूरतगढ़ में एक इलाके का डायरेक्टर रहा है और परिवार सक्रिय राजनीति और सामाजिक सेवाओं में कासनिया से बहुत आगे है। राहुल लेघा के पास भाजपा युवा मोर्चे का प्रदेश मंत्री पद है। भाजपा को आगे बढाने की युवा ताकत है जिसको अपने प्रधान रहे दादा चंदुराम लेघा और नगरपालिका श्रीबिजयनगर के अध्यक्ष रहे चाचा राजेंद्र लेघा से राजनैतिक गुर मिल रहे हैं।

* कासनिया को चुनौती आखिर क्यों नहीं दी जाए? कासनिया जी के समर्थक नजदीकी लोग यह जानें कि कासनिया जी भी तो किन्हीं राजनैतिक लोगों को चुनौती देते हुए ही विधायक बने,राज्य मंत्री बने और इस उम्र में विधानसभा चुनाव हार कर भी राजनीति कर रहे हैं। राजनीति में कोई भी स्वेच्छा से काम नहीं छोड़ता लेकिन चुनौती दर चुनौती मिलने पर चुप होकर बैठता है। यह हाल कासनिया जी का भी होगा। सन् 2018 में विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले पुरानी धानमंडी में कासनिया जी ने एक आम सभा की और उसमें घोषणा की थी कि यह अंतिम चुनाव है कहते सहयोग मांगा था। उक्त कार्यकाल पूरा होने के बाद सन् 2023 में कासनिया जी चुनाव में फिर खड़े हो गये। विधानसभा के हर गांव शहर से आवाज उठी कि कासनिया हारेंगे, नये को टिकट दिया जाए। कासनिया जी ने अड़ कर टिकट ली और चुनाव में धाप कर फजीहत हुई। पचास हजार से अधिक वोटों से हार जाने पर तो चुप होना चाहिए था। लोगों को नहीं सुहा रहा कि पचास हजार से अधिक वोटों से हार जाने वाला राजकाज चलाए। बात आती है कि हम चुनाव लड़े हम हारे और अब काल को छोरो राहुल लेघो छाती पर मूंग दलसी। अब इतना तो समझ लेना चाहिए कि चुनाव का रिजल्ट पहले ही आ गया था फिर भी क्यों लड़ा था? 

सबसे बड़ी बात यह है कि कासनिया जी विभागों में अपनी चलाएं और आम आदमी काम के लिए रोता फिरे। यह हालात संपूर्ण विधानसभा में हो गये हैं। अधिकारी किसी की नहीं सुनते। अधिकारी हर रोज एक दो घंटे लेट आते हैं और मन में आए तब समय से पहले दफ्तर से निकल जाते हैं। संपूर्ण क्षेत्र में नशा बढा अपराध बढे हैं और कोई नियंत्रण नहीं है। अरे! पीने को शुद्ध पानी नहीं, बिजली की कटौती से भी जनता तंग। गरीब अपने पट्टों के लिए मरता घूम रहा है। एक भी ऐसा विभाग नहीं रहा जहां बैठा अधिकारी लोगों की बात सुने और काम करे।

👍 ऐसे हालात में जब सभी भाजपा नेता चुप बैठे ढाई साल निकाल चुके हैं तब नगर निकाय और पंचायत चुनावों से कुछ महीनों पहले राहुल लेघा और युवा ग्रुप का उदय होना हालात बदलने वाला होगा। यह भी हो सकता है कि  रामप्रताप कासनिया भी हवा का रुख देख कर अपनी कार्यप्रणाली में चुपचाप बदलाव कर लें।





०0०







शनिवार, 18 जुलाई 2026

कौशल्या चोपड़ा ( गंगाशहर-बीकानेर) का संथारा (अन्नत्यागा) .लोकतंत्र सेनानी हुलासमल चोपड़ा की पत्नी.

 

*  करणीदानसिंह राजपूत *

जैन परंपरा के अनुसार कौशल्या देवी चोपड़ा  (84) धर्मपत्नी लोकतंत्र सेनानी एडवोकेट हुलासमल जी चोपड़ा ने आज 18 जुलाई 2026 से अन्नत्याग दिया। इसे संथारा कहा जाता है।परमपूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी की आज्ञा से मुनि श्री अमृतकुमार जी एवं साध्वी श्री त्रिशलकुमारी जी ने आज दोपहर 01:07 बजे  तिविहार संथारा का प्रत्याख्यान करवाया। यह परिवार तेरापंथी है।

 जीवन में धर्मप्रिय कौशल्या चोपड़ा ने अपने पति हुलासमल के साथ श्रीगंगानगर में सामाजिक एवं राजनैतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई। आपातकाल में  सन् 1975 में हुलासमल चोपड़ा संविधान बचाने लोकतंत्र को पुनः स्थापित करने के आंदोलन में जेल भोगी। श्रीगंगानगर में हुलासमल चोपड़ा प्रसिद्ध वकीलों में माने जाते थे।

कौशल्या चोपड़ा ने सन् 1977 में विधानसभा चुनाव के लिए श्रीगंगानगर से जनता पार्टी से टिकट की प्रबल दावेदार रही थी। सूरतगढ़ से सन् 1977 में विधायक चुने गये स्व.गुरूशरण छाबड़ा और लोकतंत्र सेनानी पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत कौशल्या देवी को टिकट दिलाने के समर्थन में रहे थे। श्रीमती चोपड़ा टिकट नहीं मिलने के बाद भी राजनैतिक गतिविधियों में रही।

* पिछले कुछ वर्षों से कौशल्या चोपड़ा हुलासमल चोपड़ा परिवार अपने स्थाई निवास बीकानेर के उपनगर गंगाशहर में निवास करने लगे। उनका निवास छलानी निवास तातेड गली पुरानी लेन गंगाशहर में है। हुलासमल चोपड़ा की उम्र इस समय करीब 87 साल है। ( रतनलाल चोपड़ा सूरतगढ़,( दी ब्युटी हट ) से आज श्रीमती कौशल्या देवी चोपड़ा के संथारा ग्रहण की सूचना मिली।(समाचार मेरी स्मृति के अनुसार. करणीदानसिंह राजपूत, सूरतगढ़ ( राजस्थान) 18 जुलाई 2026.०0०








शुक्रवार, 17 जुलाई 2026

सूरतगढ़.स्वच्छ और स्वस्थ कैसे रहे! कर्मचारियों की ड्युटी पर सख्ती हो. (सरकार बड़ी या स्थानीय प्रशासन!!)

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 17 जुलाई 2026.

नगरपालिका का वार्ड नं 45 नरक बना हुआ है। आवासन मंडल कालोनी पुरानी व पश्चिम क्षेत्र नरक बनने वाले हैं। अन्य वार्डों में भी गंदगी भरी है। जमादारों का दैनिक निरीक्षण पूरी तरह से खत्म है। ड्युटी जमादारों और सफाई निरीक्षकों की है लेकिन वे वार्डों में जाते ही नहीं।

नये ईओ मनीषकुमार पारीक को गंदगी से बेहाल,सड़कों पर अतिक्रमण वाला, अव्यवस्थित कार्यालय मिला है। 

* शहर स्वच्छ और स्वस्थ जनता को कागजी सूचनाएं देने से प्रेरणा देने से नहीं हो सकता जब तक कार्यालय में और व्यवस्था में अपना ही कुप्रबंध ड्युटियों में करके अपने आदमियों को,रिश्तेदारों को फील्ड के बजाय ए.सी.लगे कमरों में सरकारी आदेशों के विपरीत बैठाया हुआ हो,घरों पर बेगार में लगाया हुआ हो। दफ्तर में कर्मचारी कम हैं तो नियुक्त करें लेकिन फील्ड वालों को दफ्तर में लगाकर शहर को गंदा बनाने की कार्वाई में तो सुधार हो। 

* उदाहरण के लिए ये प्रमाण हैं।

1- ईओ पूजा शर्मा ने अपने कार्यकाल में अवैध नियम विरूद्ध अपनी भाभी बबीता शर्मा का सफाई कर्मचारी से प्रमोशन कर जमादार बनाया। उसे पहले भी फील्ड में सफाई पर कभी नहीं लगाया गया। उसे दफ्तर में रखा गया और प्रमोशन के बाद भी दफ्तर में रखा गया। सफाईकर्मी आमतौर पर अनुसूचित जाति बाल्मीकि लगते हैं। पहले कहीं अस्थायी लगते हैं। दो साल के अनुभव प्रमाण पत्र से सफाईकर्मी लगते हैं। लेकिन बबीता शर्मा को सफाई कर्मी यह सोचकर ही लगाया गया कि दफ्तर में बैठाये रखेंगे, फील्ड में सफाई झाड़ू नाली खुरपा नहीं देंगे। महिला बाल विकास में आंगनबाड़ी में काम करने वाली बबीता शर्मा के पास सफाई का तो कोई भी अनुभव नहीं था। वहां से सीधे नगरपालिका में सफाई कर्मचारी लगा दी गई। अब जमादार बनाई तो ड्युटी तो फील्ड में होनी थी। प्रमोशन के बाद में भी दफ्तर में है। इस प्रकार से कितने सफाई शाखा के अपने दफ्तर में और अन्य सरकारी दफ्तरों में भेजे हुए हैं और कितने अधिकारियों के यहां बेगार पर हैं? बेगार तो कभी छापामारी से ही सामने आएगी। स्वायत्त शासन निदेशक ने अनेक बार आदेश जारी किया कि सफाईकर्मियों से अन्यत्र नहीं लगाया जाए। अभी ताजा आदेश भी है। अब सवाल उठता है कि सरकार बड़ी है या स्थानीय प्रशासन ईओ या प्रशासक बड़े हैं जो आदेश नहीं मानते। सबसे बड़ी बात यह भेदभाव की है कि वाल्मीकि कर्मचारी तो फील्ड में सफाई पर लगाएं और स्वर्ण वर्ग सफाई कर्मचारी रिश्तेदार और अपने खास को दफ्तर में लगाओ। कितने दिन नहीं मानोगे सरकार के आदेश?

2- दमकल यानि अग्नि शमन की बड़ी जिम्मेदारी होती है और प्रशिक्षित स्टाफ होता है, प्रशिक्षण में समय और खर्च होता है। हर समय हर कर्मचारी ड्युटी पर जरूरी होता है। लीडिंग फायरमेन पद पर नौकरी पर लगी हुई श्रीमती सुप्रभा करीब सात सालों से दमकल दफ्तर में नहीं है। उसकी ड्युटी नगरपालिका दफ्तर में स्थापना शाखा में लगा रखी है, जो काम वह जानती नहीं। कर्मचारियों के पेंशन आदि विभिन्न कार्य वर्षों से अटके हुए पड़े हैं। लीडिंग फायरमेन को दफ्तर में लगा रखा है जबकि सरकार के स्पष्ट आदेश हैं कि दमकल कर्मियों को अन्यत्र नहीं लगाया जाए। जब पद का कार्य ही नहीं तो फिर उसका वेतन कैसे दिया जा रहा है? अब आगे सरकार के आदेश के विपरीत कितने दिन दफ्तर में रखेंगे?

👍 12 सितंबर 2025 को ईओ पूजा शर्मा को सफाई कर्मचारियों के संगठन ने एक मांगपत्र दिया था जिसमें मांग थी कि दफ्तर में लगाए हुए सफाई कर्मचारियों को फील्ड में लगाया जाए ताकि सफाई व्यवस्था में सुधार हो,लेकिन यह मांग पूरी नहीं की गई।

 *ये तो उदाहरण हैं और इनमें बिना विलंब के सुधार होना चाहिए चाहे कोई किसी का रिश्तेदार हो या खास हो।

3-स्वच्छ भारत अभियान में सड़कें गलियां एकदम साफ सुथरी होनी चाहिए। आवासन मंडल पुरानी कालोनी व उसके  पश्चिम क्षेत्रभविष्य में जल्दी ही नरक बनने वाली बात है तो हालात बिगड़े हैं। आवासन मंडल पुरानी कालोनी में 58 और उसके पश्चिम क्षेत्र में 32 अतिक्रमण सड़कों पर चिन्हित हैं। नोटिस और लाऊडस्पीकर चेतावनी के बावजूद हटाए नहीं गये। पूजा शर्मा के पीहर आवास के आगे सड़क पर अतिक्रमण हैं और आसपास के अनेक घरों के आगे है। यहां सामने के अतिक्रमण हटाए लेकिन खुद के घर की लाईन के नहीं हटाए। ऐसी हालत शहर में अनेक जगह है जो स्वच्छ भारत अभियान में बाधा है। नगरपालिका प्रशासन पर नेताओं का दबाव है लेकिन गरीब की छत झोपड़ी कच्चा कोठा जेसीबी से ध्वस्त करने में कोई शर्म नहीं आती चाहे सर्दी गर्मी बरसात कुछ भी हो। बाजारों में सड़कों पर अतिक्रमण स्वच्छ भारत अभियान में बाधा हैं। 

* गंदे पानी बरसात के पानी की निकासी भी काम करने,अतिक्रमण हटाने से हो पाएगी। घरों दुकानों का कचरा सड़कों पर नहीं फेंके, कचरा ट्रोली में डालें। यह संदेश अच्छा है लेकिन करोड़़ों रूपये लगाकर सीवरेज बनाई और 2 ट्रीटमेंट प्लांट लगाए 10-12 साल हो गये। ये दोनों बंद हैं। यहां से कितना सीवेज ( मल पावडर) बेचा? इनको चालू हालत में कौन रखेगा? नगर पालिका प्रशासन इनको चलाएगा या आम निवासी या दुकानदार चलाएंगे?

* नगरपालिका प्रशासन को कौन कहे कि खुद चुस्त रहें और कोई ड्युटी में लापरवाही करे तो उस पर सख्त कार्वाई भी करे। सफाई कर्मचारी खुद ड्युटी पर है या उसकी जगह कोई और ड्युटी पर है? जमादारों को डायरियां दी जाएं जिन में वे अपनी रिपोर्ट लिखें। सख्त कंट्रोल दफ्तर में और दफ्तर के बाहर भी हो तो हालात सुधर सकते हैं।०0०













बुधवार, 15 जुलाई 2026

लायब्रेरी सीज मामला: अंडरग्राउंड अवैध निर्माण और ऊपर से प्रदर्शन की धौंस.

  

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 15 जुलाई 2026.

नगरपालिका प्रशासन ने जिन बेसमेंट ( अंडरग्राउंड) में चलाई जा रही लायब्रेरियों को ताले लगाए हैं वे अंडरग्राउंड बनाने की स्वीकृति नगरपालिका से ली हुई नहीं थी। बिना अनुमति के अवैध रूप से अंडरग्राउंड निर्माण करना और फिर उनमें आग से बचाव के कोई भी साधन नहीं होना और ऊपर से प्रदर्शन की धौंस दिखाकर दबाव डालना। इस प्रकार के दबाव से छात्रों का भविष्य बताकर दबाव डालने से लायब्रेरियों के खुलवा लेने की संभावना एक प्रतिशत भी नहीं है। 

* कहा जा रहा कि छात्रों की पुस्तकें, लेपटॉप आदि लायब्रेरियों में बंद रह गये। पूर्व सूचना नहीं दी गई, खामियां बताएं ताकि सुधार किया जा सके।

👍 जिलाकलेक्टर के निर्देश पर लायब्रेरियों का निरीक्षण हुआ और रिपोर्ट तैयार हुई। सबसे पहले अंडरग्राउंड पर कार्वाई का निर्णय हुआ जिसके समाचार कार्वाई से कुछ दिन पहले छप गये।

* कार्वाई के समय मौका मजिस्ट्रेट,पुलिस जाब्ता,नगरपालिका की अधिशासी अधिकारी और कर्मचारी। नगरपालिका की विडियोग्राफी। पत्रकारों की वीडियोग्राफी। पुस्तकें लेपटॉप आदि बाहर करवाए गये। फिर भी यदि किसी स्टुडेंट की पुस्तकें लैपटॉप किसी लायब्रेरी में भीतर बंद रह गये हैं तो उसका आवेदन प्रशासन को दिया जा सकता है। इन बहानों से लायब्रेरी खुलवाकर डेस्क, फर्नीचर आदि हटवाना तो संभव नहीं और न प्रशासन ऐसा करने देगा। 

👍 अब बात आती है कि प्रशासन कमी बताए जो सुधार कर लें। अंडरग्राउंड बनाने की अनुमति नहीं थी जो अवैध बनाए गये तब इनमें क्या सुधार होगा?

👍👍 पहले सूचना नहीं दी। जहां जान माल का नुकसान होने, किसी भी समय दुर्घटना की आशंका हो,वहां पूर्व सूचना नहीं होती, वहां बिना विलंब कार्वाई होती है जो प्रशासन ने कर दी।

👍👍👍 अभी जो लायब्रेरियां असुरक्षित है जहां अग्नि व दुर्घटना के बचाव साधन नहीं हैं, वहां प्रशासन को तुरंत कार्वाई करनी चाहिए। अवैध कार्य करने वाले चाहे जितने प्रदर्शन करते रहें, उनसे कार्वाई रूकने का दबाव संभव नहीं। दुर्घटना हो जाए और उसमें जानमाल की हानि हो जाए तो यही लोग प्रशासन के खिलाफ भी हो जाएंगे कि प्रशासन ने समय रहते कार्वाई क्यों नहीं की। अब आवश्यकता है कि प्रशासन कानूनी प्रक्रिया से अवैध निर्माण को ध्वस्त करे।०0०







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