सूरतगढ़ में विकास करने वाले विधायक और नगरपालिका अध्यक्ष.नये चुनाव में लोगों की पसंद- नेता कैसा हो?
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 26 जुलाई 2026.
सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विकास करने वाले निर्वाचित नेताओं को सभी जानें। सन् 2000 के बाद से विकास विकास की बातें होने लगी थी। अपने अपने कार्यकाल में किसने क्या क्या किया जिससे सूरतगढ़ की सूरत बदली।
संपूर्ण विधानसभा क्षेत्र में विधायकों के नाम और कार्यकाल ऐसे रहे।
1- सन् 2003 से 2008 तक अशोक नागपाल विधायक रहे। सूरतगढ़ से भाजपा के अशोक नागपाल जीते तब सूरतगढ़ 3 विधानसभा क्षेत्रों जितना विशाल क्षेत्र था। राजियासर के पास से अनूपगढ़ घड़साना अंतरराष्ट्रीय सीमा तक का क्षेत्र था। ( सूरतगढ़ तहसील का टिब्बा क्षेत्र सन् 2003 से 2008 तक पीलीबंगा विधानसभा क्षेत्र में रहा। उस काल में पीलीबंगा से भाजपा की टिकट पर गंगाजल मील खड़े हुए। रामप्रताप कासनिया ने भाजपा टिकट का हकदार खुद को बताया और टिकट नहीं मिलने पर नाराज होकर निर्दलीय चुनाव में खड़े होकर भाजपा को चुनौती दी। रामप्रताप कासनिया जीते।)
2- सन् 2008 से 2013 तक गंगाजल मील विधायक रहे। गंगाजल मील ने भाजपा छोड़ कर कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते।
3- सन् 2013 से 2018 तक राजेंद्र सिंह भादू विधायक रहे। भादू ने भाजपा टिकट से चुनाव लड़ा था। 2023 में भादू ने भाजपा से टिकट मांगी और नहीं मिलने पर स्वतंत्र चुनाव लड़ा। पराजय मिलने के बाद कांग्रेस जोईन कर ली।
3- सन् 2018 से 2023 तक रामप्रताप कासनिया विधायक रहे। कासनिया भाजपा टिकट से चुनाव में खड़े हुए और जीते।
4- सन् 2023 से 2028 तक के लिए डुंगरराम गेदर विधायक चुने गये हैं। गेदर ने कांग्रेस की टिकट पर चुनाव लड़ा और 50 हजार से अधिक वोटों से जीते। गेदर ने भाजपा के प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया को हराया।
👍 नगर का विकास कराने वाले नगरपालिका अध्यक्ष।
1- सन् 2004 से 20209 तक कांग्रेस के इकबाल मोहम्मद कुरैशी नगरपालिका के अध्यक्ष रहे।
2- सन् 2009 से 2014 तक कांग्रेस के बनवारीलाल मेघवाल नगरपालिका अध्यक्ष रहे।
3- सन् 2014 से 2019 तक श्रीमती काजल छाबड़ा नगरपालिका अध्यक्ष रहीं।
4- सन् 2019 में ओमप्रकाश कालवा नगरपालिका अध्यक्ष चुने गए। कालवा कांग्रेस से चुने गए। कालवा की कांग्रेस के पूर्व विधायक गंगाजल मील से नहीं बनी तब कालवा ने रामप्रताप कासनिया का हाथ पकड़ कर भाजपा में सदस्यता ग्रहण कर ली।
* इन नेताओं ने सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में और सूरतगढ़ शहर में विकास के कौन कौन से कार्य करवाए? पैन उठाएं और लिखना शुरू कर दें।
* कौन विधायक कौन नगरपालिका अध्यक्ष जनहित कार्य कराने में कितने सक्रिय रहे? जिनके विकास कार्यों की चमक दमक से सूरतगढ़ आज समीक्षा के घूम चक्कर पर खड़ा है। अब स्थिति यह है कि चक्कर कुछ रूके तो गणना हो। घूमते चक्कर में केवल एक सफेद रंग दिखाई पड़ रहा है। सभी ने शहर के विकास के लिए कुछ न कुछ किया है। बस! वह विकास दिखाई नहीं दे रहा। विकास दिखाई भी देना चाहिए।
* नये ऊर्जावान चाहिए अध्यक्ष और विधायक.*
नगरपालिका चुनाव अब सिर पर हैं। लोग चाहते हैं ऐसा ऊर्जावान अध्यक्ष जो अधिक समय दे,अधिक काम करे,फाईलों को लटकाए नहीं, नागरिकों की सुने,दफ्तर पर कंट्रोल हो,पालिका बोर्ड की बैठकें नियमित आयोजित करे। हर बैठक का एजेंडा एकदम स्पष्ट हो,आधा अधूरा न हो जिससे भ्रम रहे। नगरपालिका में अध्यक्ष बनने के ईच्छुक तो अनेक हैं, लेकिन वे कोई भी अभी सामने नहीं आना चाहते। आरक्षण लाटरी में पद किसको मिले,तो पहले सिरखपाई क्यों करें? यही सोच पार्षदों के चुनाव के ईच्छुक लोगों के हैं। फिर भी कुछ लोग चर्चाओं में हैं। नगरपालिका और प्रधान पंचायत समिति पर जिस पार्टी का वर्चस्व हो जाएगा, उसे विधानसभा चुनाव में जीत मिलना सुलभ होगा।०0०