रविवार, 26 जुलाई 2026

कासनिया टीम का भ्रष्ट अधिकारी के पीछे मरणा मांडना.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

ईओ इतना बड़ा पद नहीं है कि तबादले के बाद किसी ईओ को वापस लाने की कसरत करते  राजनैतिक आत्महत्या हो जाए। क्या एक खास व्यक्ति के बिना शहर का काम नहीं चलेगा? पचासों सालों में अनेक ईओ आए और गये। पद खाली नहीं रहा किसी न किसी को चार्ज मिलता रहा। 

कासनिया टीम ईओ को वापस लाने के चक्कर में सूरतगढ़ को त्याग कर जयपुर में बैठी है। 10 जुलाई 2026 को तबादला आदेश हुआ जिसको 15 दिन बीत चुके हैं। किसी अधिकारी ने जनहित के काम कराने,सरकारी योजनाओं को लागू करने में जनता को लाभ पहुंचाने की विशेषता में कोई रिकॉर्ड बनाया हो,जनता मांग कर रही हो तब तो उसको वापस लाने का एक प्रयास हो सकता है। लेकिन जिसके साथ भ्रष्टाचार के मामले जुड़े हैं, और जिसने स्वच्छ भारत अभियान को ठेस पहुंचाई। शहर में फैली गंदगी को बरसात में और आगे काफी समय तक झेलना पड़ेगा। वह 27 महीने में 10-15 दिन ही वार्डों में पहुंची। ऐसी अधिकारी को सूरतगढ़ में वापस लाकर क्या पावर दिखलाना चाहते हैं? यदि प्रयासों के बाद भी सूरतगढ़ वापस नहीं ला पाए तब क्या होगा? 

एक भ्रष्ट अधिकारी के पीछे मरणा मांड ही दिया है तो यह भी करके देखलो। अब पक्कम पक्का ठान ही लिया है तो जयपुर से सूरतगढ़ खाली हाथ मत लौटना। खाली हाथ लौटे तो लोग न जाने कितनी बातें बनाएंगे। पचास साल की राजनीति को बड़ी ठेस लगेगी जो चुनाव में 50 हजार से हारने पर भी नहीं लगी थी।

* अधिकारी को यहां सूरतगढ़ में वापस तबादला कराने के आदेश और जोईन कर लेने के बाद ही जयपुर से सूरतगढ़ लौटना।

👍 एक सलाह भी है कि अधिकारी को सरकार और विभाग के भरोसे छोड़ो और खुद सोम मंगल को सूरतगढ़ जोईन करलो। कुछ बात रह जाएगी।

26 जुलाई 2026.

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