रविवार, 19 जुलाई 2026

राहुल लेघा की रामप्रताप कासनिया को चुनौती से हालात बदलेंगे. सूरतगढ़ की सबसे गरम चर्चा.

 




* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़। भाजपा युवा मोर्चे के प्रदेश मंत्री राहुल लेघा ने चालीस सालों से राजनीति कर रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया की राजनैतिक कार्यप्रणाली को चुनौती दी है, जिसकी पूरे सूरतगढ़ विधानसभा में और बाहर हर ओर गरम चर्चा है। 'काल को छोरो राज चलावेगो अर चुनाव लड़्या कासनिया जी देखेगा, आ क्यूं कर चालण देवांगा' कासनिया जी के अनेक समर्थक बतियाते हैं। कासनिया जी 50 हजार से अधिक वोटों से हार कर भी जगह नहीं छोड़ें,मनमर्जी भी चलाएं तो फिर कोई तो चुनौती देगा। गलत सलत होते हुए देख कर कोई तो बोलेगा। यहां जब भाजपा में से कोई नहीं बोला तो राहुल लेघा ने गलत सलत पर चुनौती दी और अब लगातार चुनौतियां ही रहेंगी। राहुल अब कल कल का छोरा नहीं रहा है। पंचायत समिति सूरतगढ़ में एक इलाके का डायरेक्टर रहा है और परिवार सक्रिय राजनीति और सामाजिक सेवाओं में कासनिया से बहुत आगे है। राहुल लेघा के पास भाजपा युवा मोर्चे का प्रदेश मंत्री पद है। भाजपा को आगे बढाने की युवा ताकत है जिसको अपने प्रधान रहे दादा चंदुराम लेघा और नगरपालिका श्रीबिजयनगर के अध्यक्ष रहे चाचा राजेंद्र लेघा से राजनैतिक गुर मिल रहे हैं।

* कासनिया को चुनौती आखिर क्यों नहीं दी जाए? कासनिया जी के समर्थक नजदीकी लोग यह जानें कि कासनिया जी भी तो किन्हीं राजनैतिक लोगों को चुनौती देते हुए ही विधायक बने,राज्य मंत्री बने और इस उम्र में विधानसभा चुनाव हार कर भी राजनीति कर रहे हैं। राजनीति में कोई भी स्वेच्छा से काम नहीं छोड़ता लेकिन चुनौती दर चुनौती मिलने पर चुप होकर बैठता है। यह हाल कासनिया जी का भी होगा। सन् 2018 में विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले पुरानी धानमंडी में कासनिया जी ने एक आम सभा की और उसमें घोषणा की थी कि यह अंतिम चुनाव है कहते सहयोग मांगा था। उक्त कार्यकाल पूरा होने के बाद सन् 2023 में कासनिया जी चुनाव में फिर खड़े हो गये। विधानसभा के हर गांव शहर से आवाज उठी कि कासनिया हारेंगे, नये को टिकट दिया जाए। कासनिया जी ने अड़ कर टिकट ली और चुनाव में धाप कर फजीहत हुई। पचास हजार से अधिक वोटों से हार जाने पर तो चुप होना चाहिए था। लोगों को नहीं सुहा रहा कि पचास हजार से अधिक वोटों से हार जाने वाला राजकाज चलाए। बात आती है कि हम चुनाव लड़े हम हारे और अब काल को छोरो राहुल लेघो छाती पर मूंग दलसी। अब इतना तो समझ लेना चाहिए कि चुनाव का रिजल्ट पहले ही आ गया था फिर भी क्यों लड़ा था? 

सबसे बड़ी बात यह है कि कासनिया जी विभागों में अपनी चलाएं और आम आदमी काम के लिए रोता फिरे। यह हालात संपूर्ण विधानसभा में हो गये हैं। अधिकारी किसी की नहीं सुनते। अधिकारी हर रोज एक दो घंटे लेट आते हैं और मन में आए तब समय से पहले दफ्तर से निकल जाते हैं। संपूर्ण क्षेत्र में नशा बढा अपराध बढे हैं और कोई नियंत्रण नहीं है। अरे! पीने को शुद्ध पानी नहीं, बिजली की कटौती से भी जनता तंग। गरीब अपने पट्टों के लिए मरता घूम रहा है। एक भी ऐसा विभाग नहीं रहा जहां बैठा अधिकारी लोगों की बात सुने और काम करे।

👍 ऐसे हालात में जब सभी भाजपा नेता चुप बैठे ढाई साल निकाल चुके हैं तब नगर निकाय और पंचायत चुनावों से कुछ महीनों पहले राहुल लेघा और युवा ग्रुप का उदय होना हालात बदलने वाला होगा। यह भी हो सकता है कि  रामप्रताप कासनिया भी हवा का रुख देख कर अपनी कार्यप्रणाली में चुपचाप बदलाव कर लें।





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