सूरतगढ़.स्वच्छ और स्वस्थ कैसे रहे! कर्मचारियों की ड्युटी पर सख्ती हो. (सरकार बड़ी या स्थानीय प्रशासन!!)
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 17 जुलाई 2026.
नगरपालिका का वार्ड नं 45 नरक बना हुआ है। आवासन मंडल कालोनी पुरानी व पश्चिम क्षेत्र नरक बनने वाले हैं। अन्य वार्डों में भी गंदगी भरी है। जमादारों का दैनिक निरीक्षण पूरी तरह से खत्म है। ड्युटी जमादारों और सफाई निरीक्षकों की है लेकिन वे वार्डों में जाते ही नहीं।
नये ईओ मनीषकुमार पारीक को गंदगी से बेहाल,सड़कों पर अतिक्रमण वाला, अव्यवस्थित कार्यालय मिला है।
* शहर स्वच्छ और स्वस्थ जनता को कागजी सूचनाएं देने से प्रेरणा देने से नहीं हो सकता जब तक कार्यालय में और व्यवस्था में अपना ही कुप्रबंध ड्युटियों में करके अपने आदमियों को,रिश्तेदारों को फील्ड के बजाय ए.सी.लगे कमरों में सरकारी आदेशों के विपरीत बैठाया हुआ हो,घरों पर बेगार में लगाया हुआ हो। दफ्तर में कर्मचारी कम हैं तो नियुक्त करें लेकिन फील्ड वालों को दफ्तर में लगाकर शहर को गंदा बनाने की कार्वाई में तो सुधार हो।
* उदाहरण के लिए ये प्रमाण हैं।
1- ईओ पूजा शर्मा ने अपने कार्यकाल में अवैध नियम विरूद्ध अपनी भाभी बबीता शर्मा का सफाई कर्मचारी से प्रमोशन कर जमादार बनाया। उसे पहले भी फील्ड में सफाई पर कभी नहीं लगाया गया। उसे दफ्तर में रखा गया और प्रमोशन के बाद भी दफ्तर में रखा गया। सफाईकर्मी आमतौर पर अनुसूचित जाति बाल्मीकि लगते हैं। पहले कहीं अस्थायी लगते हैं। दो साल के अनुभव प्रमाण पत्र से सफाईकर्मी लगते हैं। लेकिन बबीता शर्मा को सफाई कर्मी यह सोचकर ही लगाया गया कि दफ्तर में बैठाये रखेंगे, फील्ड में सफाई झाड़ू नाली खुरपा नहीं देंगे। महिला बाल विकास में आंगनबाड़ी में काम करने वाली बबीता शर्मा के पास सफाई का तो कोई भी अनुभव नहीं था। वहां से सीधे नगरपालिका में सफाई कर्मचारी लगा दी गई। अब जमादार बनाई तो ड्युटी तो फील्ड में होनी थी। प्रमोशन के बाद में भी दफ्तर में है। इस प्रकार से कितने सफाई शाखा के अपने दफ्तर में और अन्य सरकारी दफ्तरों में भेजे हुए हैं और कितने अधिकारियों के यहां बेगार पर हैं? बेगार तो कभी छापामारी से ही सामने आएगी। स्वायत्त शासन निदेशक ने अनेक बार आदेश जारी किया कि सफाईकर्मियों से अन्यत्र नहीं लगाया जाए। अभी ताजा आदेश भी है। अब सवाल उठता है कि सरकार बड़ी है या स्थानीय प्रशासन ईओ या प्रशासक बड़े हैं जो आदेश नहीं मानते। सबसे बड़ी बात यह भेदभाव की है कि वाल्मीकि कर्मचारी तो फील्ड में सफाई पर लगाएं और स्वर्ण वर्ग सफाई कर्मचारी रिश्तेदार और अपने खास को दफ्तर में लगाओ। कितने दिन नहीं मानोगे सरकार के आदेश?
2- दमकल यानि अग्नि शमन की बड़ी जिम्मेदारी होती है और प्रशिक्षित स्टाफ होता है, प्रशिक्षण में समय और खर्च होता है। हर समय हर कर्मचारी ड्युटी पर जरूरी होता है। लीडिंग फायरमेन पद पर नौकरी पर लगी हुई श्रीमती सुप्रभा करीब सात सालों से दमकल दफ्तर में नहीं है। उसकी ड्युटी नगरपालिका दफ्तर में स्थापना शाखा में लगा रखी है, जो काम वह जानती नहीं। कर्मचारियों के पेंशन आदि विभिन्न कार्य वर्षों से अटके हुए पड़े हैं। लीडिंग फायरमेन को दफ्तर में लगा रखा है जबकि सरकार के स्पष्ट आदेश हैं कि दमकल कर्मियों को अन्यत्र नहीं लगाया जाए। जब पद का कार्य ही नहीं तो फिर उसका वेतन कैसे दिया जा रहा है? अब आगे सरकार के आदेश के विपरीत कितने दिन दफ्तर में रखेंगे?
👍 12 सितंबर 2025 को ईओ पूजा शर्मा को सफाई कर्मचारियों के संगठन ने एक मांगपत्र दिया था जिसमें मांग थी कि दफ्तर में लगाए हुए सफाई कर्मचारियों को फील्ड में लगाया जाए ताकि सफाई व्यवस्था में सुधार हो,लेकिन यह मांग पूरी नहीं की गई।
*ये तो उदाहरण हैं और इनमें बिना विलंब के सुधार होना चाहिए चाहे कोई किसी का रिश्तेदार हो या खास हो।
3-स्वच्छ भारत अभियान में सड़कें गलियां एकदम साफ सुथरी होनी चाहिए। आवासन मंडल पुरानी कालोनी व उसके पश्चिम क्षेत्रभविष्य में जल्दी ही नरक बनने वाली बात है तो हालात बिगड़े हैं। आवासन मंडल पुरानी कालोनी में 58 और उसके पश्चिम क्षेत्र में 32 अतिक्रमण सड़कों पर चिन्हित हैं। नोटिस और लाऊडस्पीकर चेतावनी के बावजूद हटाए नहीं गये। पूजा शर्मा के पीहर आवास के आगे सड़क पर अतिक्रमण हैं और आसपास के अनेक घरों के आगे है। यहां सामने के अतिक्रमण हटाए लेकिन खुद के घर की लाईन के नहीं हटाए। ऐसी हालत शहर में अनेक जगह है जो स्वच्छ भारत अभियान में बाधा है। नगरपालिका प्रशासन पर नेताओं का दबाव है लेकिन गरीब की छत झोपड़ी कच्चा कोठा जेसीबी से ध्वस्त करने में कोई शर्म नहीं आती चाहे सर्दी गर्मी बरसात कुछ भी हो। बाजारों में सड़कों पर अतिक्रमण स्वच्छ भारत अभियान में बाधा हैं।
* गंदे पानी बरसात के पानी की निकासी भी काम करने,अतिक्रमण हटाने से हो पाएगी। घरों दुकानों का कचरा सड़कों पर नहीं फेंके, कचरा ट्रोली में डालें। यह संदेश अच्छा है लेकिन करोड़़ों रूपये लगाकर सीवरेज बनाई और 2 ट्रीटमेंट प्लांट लगाए 10-12 साल हो गये। ये दोनों बंद हैं। यहां से कितना सीवेज ( मल पावडर) बेचा? इनको चालू हालत में कौन रखेगा? नगर पालिका प्रशासन इनको चलाएगा या आम निवासी या दुकानदार चलाएंगे?
* नगरपालिका प्रशासन को कौन कहे कि खुद चुस्त रहें और कोई ड्युटी में लापरवाही करे तो उस पर सख्त कार्वाई भी करे। सफाई कर्मचारी खुद ड्युटी पर है या उसकी जगह कोई और ड्युटी पर है? जमादारों को डायरियां दी जाएं जिन में वे अपनी रिपोर्ट लिखें। सख्त कंट्रोल दफ्तर में और दफ्तर के बाहर भी हो तो हालात सुधर सकते हैं।०0०