राजनीति के रण में राहुल लेघा की कासनिया के गढ में पहली जीत!
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ 13 जुलाई 2026.रामप्रताप कासनिया की विधानसभा चुनाव 2023 में 50 से अधिक वोटों की हार के बावजूद भाजपा सूरतगढ़ में कासनिया को चुनौती देने वाला कोई नेता नहीं था। सभी चुप थे जिसके कारण कासनिया की चल रही थी और आराम से 2 साल से अधिक का समय बीत गया। लेकिन भाजपा युवा मोर्चे के प्रदेश मंत्री राहुल लेघा ने राजनीति के रण में कासनिया को ललकारते हुए युद्ध शुरू किया और सूरतगढ़ में पहला युद्ध जीत लिया। कासनिया की डिजायर चल रही थी लेकिन सरकार की योजनाएं लागू कराने की बात को आगे रखते हुए राहुल लेघा ने अधिशाषी अधिकारी पद पर मनीषकुमार पारीक की नियुक्ति करवा दी। कासनिया ईओ पद पर पूजा शर्मा को ही यहां रखना चाहते थे लेकिन मनीषकुमार पारीक ने आज 13 जुलाई 2026 की सुबह नगरपालिका में जोईन किया। राहुल लेघा का यह सूरतगढ़ शहर में प्रवेश है और यह बड़ी जीत है। इस जीत की सफलता से राहुल लेघा कुछ अधिक तेज चलेगा और राहुल लेघा का हर तेज कदम कासनिया को पीछे धकेलता हुआ आगे बढेगा। पहले यही चर्चा थी कि कासनियाजी राहुल की डिजायर को सफल नहीं होने देंगे। कासनिया जी ईओ पद पर केवल पूजा शर्मा को ही देखना चाहते थे। लोगों ने इसे लेघा की जीत माना है। हालांकि लेघा ग्रुप ने यही कहा है कि वे भाजपा सरकार की जनहित योजनाओं को सही लागू करा कर आम जन को लाभान्वित करना चाहते हैं। इस बयान और चर्चा में बाहरी तौर पर कहीं नजर नहीं आता कि राहुल लेघा यहां राजनीति कर रहा है। यहां एक बड़ा सवाल यह है कि पूजा शर्मा पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं तो उसे यहां रख कर किसको लाभ दिलाना है। काम की दृष्टि से तो शहर के आम लोग पूजा शर्मा की कार्य प्रणाली से नाराज ही रहे हैं। पूजा शर्मा को वापस सूरतगढ़ लाने की भागदौड़ चाहे कितनी हो,वापस लौटा लाना मुश्किल है। तबादला सूची मंत्री स्तर पर तैयार होना और फिर मुख्यमंत्री स्तर पर ओके होना तथा बाद में सार्वजनिक होना ऐसी प्रक्रिया है कि इसमें अब किसी प्रकार की रद्दोबदल परिवर्तन संभव नहीं। पूजा सूरतगढ़ नहीं लाई जाती है तब क्या होगा?
राहुल लेघा और रामप्रताप कासनिया की राजनैतिक रस्साकसी में इसे किसकी जीत और किसकी हार कहा जाएगा? पूजा शर्मा अब एपीओ यानि पद स्थापन की प्रतीक्षा में हैं और मूलपद राजस्व अधिकारी हैं। हो सकता है कि पूजा शर्मा को किसी अन्य स्थान पर या एपीओ के बजाय कहीं ड्युटी पर लगवाया जाए ताकि कुछ तो अच्छा मैसेज लोगों में पहुंचे। क्योंकि अभी तो लोगों में चर्चा यह है कि राजनैतिक पावर कुछ अधिक घटी है। आज कासनिया जी की स्थिति पार्टी में कुछ कहने जैसी भी नहीं है। नगर मंडल अध्यक्ष गौरव बलाना और जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह तक कोई कासनिया के पक्ष में सहयोग में नहीं है। देखते हैं कि कासनिया जी अब क्या करते है?
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