गोदारा को नगरपालिका सौंपने का खेला नहीं चला:भाजपा नेताओं का टिकट वितरण और चुनाव.
* करणीदानसिंह राजपूत *
स्कूली जमीन, कालोनी जमीन, नगरपालिका में कांग्रेस राज में परसराम भाटिया के काल में हुए भ्रष्टाचारों पर बड़ा समझौता हो गया है। कोई किसी के मामले उखाड़ेगा नहीं, बोलेगा नहीं, न शिकायत करेगा। गोदारा के सहयोग पर नगरपालिका की अध्यक्षता दी जाएगी। 👌 यही खेल भाजपा में टिकट वितरण से चुनाव और अध्यक्ष चुनाव तक चला।
👍 अच्छा यह हुआ कि बात ऊपर तक पहुंचाई गई और वहां की डांट से खेला करने वालों की जोरदार खिंचाई हुई। नये लोगों ने कंट्रोल कर लिया
तब यह अध्यक्ष की सीट भाजपा जीत पाई। यदि समय पर जाग नहीं होती सचेत नहीं होते तो यह सीट गोदारा को चली जाती। समझलें कि खेला करने वाले भाजपाइयों को सापसीढी खेल की तरह 99 पर सांप ने काट खाया। बहुत कुछ है जो निडरता से प्रकाशित होगा। कांग्रेस राज में परसराम भाटिया के 120 दिन के भ्रष्टाचार भाजपा नेताओं के न चाहने पर भी खुलेंगे। परसराम भाटिया कानूनी शिकंजे में जेल में होता। कुछ मुकदमे हैं जो पत्रकार महेंद्र सिंह जाटव ने किए हुए हैं। एक मुकदमा ओमप्रकाश कालवा का किया हुआ है। ओमप्रकाश कालवा की एक शिकायत है लेकिन उस की कार्वाई ईओ पूजा शर्मा ने दबाए रखी। पूजा शर्मा ने जमीन प्रस्ताव में अपनी भाभी बबीता शर्मा का अवैध अनियमित प्रमोशन किया। इसकी कोई शिकायत व जांच की मांग कासनिया, शरणपालसिंह, पूर्व विधायक अशोकनागपाल आदि ने कभी नहीं की।
* परसराम भाटिया के ही नहीं राजाराम गोदारा परिवार ने अतिक्रमण के तीन पट्टे नियमविरुद्ध लिए। स्व.पत्रकार कृष्ण सोनी आजाद ने मुकदमा कराया। वह फाईलें, कीनिया ने भी पट्टा लिया। ये सभी खुलने की आशा है। चाहे भाजपा नेता नेतियां चुप रहें। अब सब ऊपर से होगा।विधायक गणेशराज बंसल की पट्टा कांड में गिरफ्तारी हो सकती है तो परसराम भाटिया की भी हो सकती है।
परसराम के भ्रष्टाचार पर ईमानदार डुंगरराम गेदर नहीं बोले,बल्कि सामान्य सीट पर पार्षद चुनाव की टिकट भी देदी।
। भाजपा के पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया, जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह और अन्य पदाधिकारी नहीं बोले। इनका अपराध कम नहीं है। भाजपा जीती मगर नेताओं के चेहरे पर दिखावटी खुशी थी। समय समय पर सामग्री देंगे।
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