सूरतगढ़:परमेश्वरी देवी गोदारा को अध्यक्ष बनाने का दबाव डुंगरराम गेदर को मानना पड़ा.भाजपा संगठन चक्कर घिनी.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 16 सितंबर 2026.
नगरपालिका बोर्ड के अध्यक्ष पद निर्वाचन के लिए भरतीय जनता पार्टी से श्रीमती ज्योतिकंवर और इंडियन नेशनल कांग्रेस से श्रीमती परमेश्वरी देवी का नामांकन हुआ।
* भाजपा नेताओं के साथ ज्योतिकंवर ने पहले सवा बारह बजे अपना आवेदन पेश किया।
* कांग्रेस नेताओं के साथ परमेश्वरी देवी ने दोपहर में आवेदन पेश किया।
👌 निर्दलीय परमेश्वरीदेवी को अध्यक्ष बनाने का प्रस्ताव कांग्रेस को मानना पड़ा.
👌 विधायक डुंगरराम गेदर ने टिकट वितरण में उन कांग्रेसियों और परिवार के टिकट काट दिए थे जिन्होंने कासनिया से संबंधित स्कूल को जमीन देने के प्रस्ताव का समर्थन किया था व कुछ बैठक में विरोध के लिए शामिल ही नहीं हुए थे। राजाराम गोदारा परिवार के टिकट कांग्रेस ने काट दिए। इस पर राजाराम गोदारा परिवार में से पत्नी परमेश्वरी देवी और पुत्र महेन्द्र गोदारा ने निर्दलीय चुनाव लड़ा। चुनाव के बीच में पार्टी ने राजाराम गोदारा को ओबीसी के जिलाध्यक्ष पद से हटा दिया। परमेश्वरी देवी और महेंद्र गोदारा दोनों जीत गए। राजाराम गोदारा के कुछ और पार्षद भी जीत गये,उधर कांग्रेस के 16 और भाजपा के 16 पार्षद जीते।बहुमत कांग्रेस भाजपा दोनों के पास नहीं आया। भाजपा के पास 22 पार्षद होने का समाचार फैला। यह भी समाचार फैला कि भाजपा अध्यक्ष बना लेगी।
👍 ऐसे विकट समय में राजाराम गोदारा ने दबाव बनाया और अपनी पत्नी परमेश्वरी देवी गोदारा के लिए अध्यक्ष पद मांगा। विधायक डुंगरराम गेदर को मजबूरी में यह मांग माननी पड़ी। अब कांग्रेस के पास पर्याप्त बहुमत होने से परमेश्वरी देवी गोदारा के अध्यक्ष पद पर जीत होगी। क्रासवोटिंग का खतरा असंभव है। यह माना जा रहा है कि अब परमेश्वरी देवी गोदारा का पांच साल अध्यक्ष राज रहेगा। परमेश्वरी देवी पहले पार्षद रह चुकी है। राजाराम गोदारा और महेंद्र गोदारा भी पहले पार्षद रह चुके हैं। राजाराम गोदारा को ओबीसी के जिलाध्यक्ष पद पर पुनः बहाल किया जा सकता है। सभी ओर चर्चा है कि राजाराम गोदारा ने अपनी ताकत दिखाकर सारी बाजी पलट कर रखदी। डुंगरराम गेदर को उनकी शर्त माननी पड़ी। अध्यक्ष पद का चुनाव 21 सितंबर 2026 को है। क्रोसवोटिंग नहीं हुई तो परमेश्वरी देवी का अध्यक्ष चुना जाना निश्चित है। एकदम से हुए इस घटनाक्रम से भाजपा के दिग्गज नेता और संगठन पदाधिकारी चक्कर घिनी हो गये हैं। भाजपा के बहुत बड़ी चपत लगी है। जीमणे से पहले थाली हटाई जाने जैसी हालत हुई है। देखते हैं भाजपा अब कौनसा गेम खेलती है। टिकटें गलत बांटने से सीटें कम आने का आरोप चल रहा था कि यह नयी आफत आ गई।०0०

