मंगलवार, 24 अक्टूबर 2023

* नरेन्द्र घिंटाला:सूरतगढ़ में कांंग्रेस को हरा सकने वाला नया पावरफुल चेहरा हो सकता है.


करणीदानसिंह राजपूत.*

सूरतगढ़ सीट पर भाजपा को नाम तय करने में भारी कशमकश चल रही है लेकिन एक दो दिन में ही नाम तो तय करना ही होगा। कांग्रेस प्रत्याशी डुंगरराम गेदर को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में टक्कर दे सके और जनता की मांग के अनुरूप नया चेहरा हो और पार्टी में भी जाना पहचाना प्रभावशाली भी हो।
लोगों की आवाज़ उठ रही है कि नये नामों में घिंटाला भारी पड़ रहा है। टिकट किसको देना है यह पार्टी के बड़े नेताओं का संसदीय बोर्ड काम है।
 लेकिन यह नरेन्द्र घिंटाला कौन है और पार्टी से जुड़ाव कब से है,यह वर्णन यहां किया जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी के नए चेहरे और ग्रामीण एवं शहरी संस्कृतिक से भाजपा एवं संघ से जुड़े व्यक्ति नरेन्द्र घिंटाला की सभी गतिविधियों पर नजर डाल कर राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण काल यहां प्रस्तुत है।

* सन 1989 से अब तक की स्थिति और भारतीय जनता पार्टी के विधायकों के कार्यकाल में जनता से संपर्क,कार्यकर्ताओं से मेल आदि के बिंदु चुनाव में खड़े हों तो शहर टिब्बा क्षेत्र नहरी क्षेत्र में प्रभावी रह सकते हैं। रिश्तेदारियां बहुत विशाल और फैली हुई हैं। इनका भी वोटिंग में बड़ा महत्वपूर्ण रोल होता है। शिक्षा काल,उसके बाद भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चा में फिर भाजपा के कार्यक्रमों में संपूर्ण स्थिति का समीक्षात्मक वर्णन है।

 सूरतगढ़ के पुराने चेहरों को छोड़ें और नयों में सबसे अधिक प्रभावी जो इस सीट पर अन्य दलों को टक्कर देते हुए विजय पताका फहराए। वह संभावित नया चेहरा है नरेन्द्र घिंटाला जिसका कार्य पद दर पद सूरतगढ़,जिला, प्रदेश और फिर राष्ट्रीय नेताओं से संपर्क मेलजोल तक रहा और अभी भी है।

प्रदेश में भाजपा अध्यक्ष से और पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया से सीधी बात करने वाले, ओम प्रकाश माथुर गजेंद्र सिंह शेखावत वर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से संपर्क और सहयोग। जेपी नड्डा जब युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे उस समय यह चेहरा भी संपर्क में रहा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत,मध्यप्रदेश के सीएम शिवराजसिंह चौहान से घनिष्ठता।

भारतीय जनता पार्टी का यह चेहरा भाजपा युवा मोर्चा और भारतीय जनता पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर हर काल में सक्रियता की छाप लगाता रहा।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला, ओम माथुर  सतीश पूनिया से निरंतर पच्चीस तीस सालों से जो संपर्क और सहयोग रहा है संघ के कार्यक्रमों में प्रभावी रहने वाला चेहरा है नरेन्द्र घिंटाला।

सूरतगढ़ सीट पर भाजपा की ओर से नये चेहरे में अभी सबसे अधिक पावरफुल।


* इस स्नातक ( बी.ए.)डिग्रीधारी ने सूरतगढ़ के राजकीय महाविद्यालय ( अब गुरूशरण छाबड़ा राजकीय महाविद्यालय) में सन् 2002 में छात्र संघ में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को चुनाव लड़ा कर स्थापित किया था।

नरेंद्र का  का जन्म 2 अक्टूबर 1969 को हुआ और स्नातक तक की शिक्षा 1991 में पूरी की।
* * भारतीय जनता पार्टी में छोटा-मोटा कार्य करते रहे लेकिन जब ओम आचार्य ने लोकसभा का चुनाव 1989 में लड़ने को मैदान में उतरे तब इन्होंने भारतीय जनता पार्टी में विधिवत प्रवेश किया। नरेन्द्र घिंटाला का भाजपा में यह प्रवेश बड़ा महत्व रखता है जिससे निरंतर आगे कदम बढ़ते रहे।
* नरेंद्र घिंटाला1994 से 1997 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला महामंत्री रहे। उस समय ओमप्रकाश बिड़ला मोर्चे के प्रदेश अध्यक्ष होते थे।

* सन् 1997 से सन 2000 तक भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष पद पर रहे उस समय राजस्थान में सतीश पूनिया मोर्चे के प्रदेशाध्यक्ष थे।

* सन 2000 से 2004 तक नरेंद्र घिंटाला भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश मंत्री रहे।उस समय प्रदेशाध्यक्ष राघवेंद्र प्रताप सिंह थे।

* सन 2002 में सूरतगढ़ के राजकीय महाविद्यालय में छात्र संघ के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ा कर परिषद की स्थापना की।  अब परिषद का काफी दबदबा है।

* सन् 2004 में भारतीय जनता पार्टी में जिला मंत्री रहे उस समय बहादर चंद नारंग जिला अध्यक्ष थे।

* सन 2005 से 2009 तक भारतीय जनता पार्टी में जिला महामंत्री रहे।उस समय जिला अध्यक्ष पद पर सीताराम मौर्य थे और ओम प्रकाश जी माथुर प्रदेश अध्यक्ष थे।इनसे निरंतर संपर्क रहा।

* सन् 2005 से 2010 तक जिला परिषद श्रीगंगानगर के सदस्य थे। सरदारगढ़ क्षेत्र जिसमें 12 ग्राम पंचायतें आती है उस क्षेत्र से निर्वाचित हुए थे।

* सन् 2008 से 2015 तक सीमा जन कल्याण समिति के सदस्य रहे।

* सन्  2010 से 2016 तक देहात मंडल सूरतगढ़ के अध्यक्ष रहे। उस समय केवल संपूर्ण क्षेत्र में एक ही देहात मंडल होता था। उस समय भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष महेंद्र सिंह सोढ़ी और प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी बाद में प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे से निरंतर संपर्क रहा।

* चुनावों में भारतीय जनता पार्टी का हर क्षेत्र में सक्रिय योगदान दिया व चुनाव लड़ाने में विशेष सहयोग किया गया। राजेंद्र सिंह भादू सन् 2013 और रामप्रताप कासनिया 2018 के विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

* नरेंद्र घिंटाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से भी जुड़े हुए हैं। इन्होंने 2005 में श्री जगदंबा अंध महाविद्यालय श्री गंगानगर के परिसर में प्रथम वर्ग शिक्षा ग्रहण की। प्राथमिक शिक्षा वर्ग 1996 में जैतसर में किया था।

*  सामाजिक कार्यों में विशेष रुचि रखने वाले नरेंद्र घिंटाला  विभिन्न कार्यों के लिए लोकप्रियता रखते हैं।

* सूरतगढ़ की रेलविकास समिति से जुड़े हैं।

👍 इनके पिता महावीर सिंह जी सूरतगढ़ के प्रसिद्ध सेठ रामदयाल राठी राजकीय उ.मा. विद्यालय में  प्रधानाध्यापक रहे थे।
सेवा निवृत्ति के बाद विश्व हिंदू परिषद के सूरतगढ़ जिले के जिलाध्यक्ष रहे। सामाजिक कार्य में सूरतगढ़ में वीर तेजाजी जाट संस्थान के कन्या छात्रावास के संस्थापक सदस्य रहे। घग्घर बाढ के दिनों में एक बार हनुमानगढ़ से सूरतगढ़ तक मोटर साइकिल पर सवार होकर बहुत कम चौड़ाई वाले खेतों के डोलों (बंधों) के ऊपर से गुजरते हुए हर क्षण खतरनाक स्थिति पानी के बहाव में गिर जाने के डर में एक सर्वे में इस लेखक के सहयोगी रहे। महावीरसिंह जी घिंटाला ने मोटरसाइकिल चलाया और लेखक फोटो व रिपोर्ट में रहा था।
* नरेन्द्र घिंटाला नये चेहरों में सर्वाधिक पावरफुल  सक्रिय हैं। अभी किसानों की समस्याओं बाबत लोकसभा अध्यक्ष ओमप्रकाश बिड़ला से भी मिल कर आए हैं।०0०

संशोधित अपडेट 24 अक्टूबर 2023.

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करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ ( राजस्थान)

94143 81356.

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सोमवार, 23 अक्टूबर 2023

भाजपा राजस्थान की 76 टिकटों पर निर्णय बैठकें 25 को.होल्ड सीटें भी हैं।

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

भाजपा राजस्थान की कुल 200 सीटों में 124 की घोषणा के बाद अब शेष बची 76 सीटों पर  परसों 25 अक्टूबर 2023 को पहले राजस्थान संसदीय बोर्ड की बैठक होगी और उसके बाद केन्द्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक होगी। 

* 76 सीटों पर एक बार विचार होगा जिसमें होल्ड मानी जा रही सीटें भी है। राजस्थान संसदीय बोर्ड की बैठक में विचार के बाद केन्द्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में अंतिम निर्णय होगा। 

** सूची 25 को रात 10 बजे तक या अगले दिन 26 को सुबह से दोपहर में जारी की जाएगी। यह संभावना बनी हुई है।०0०


चुनावी युद्ध के बिना मील राज का अंत. सलाहकारों ने मिटा दिया सबकुछ.

 


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ से मील राज का अंत ऐसे हुआ मानों हार्टसीज हो गया हो। इस तरह से चुनावी युद्ध के बिना राज का अंत होगा ऐसा गंगाजल मील हनुमान मील ने सोचा भी नहीं होगा। वैसे तो यह शांति पूर्ण अंत चुनावी हार होने से अच्छा है। लोग बेहद नाराज और तीसरी बार हराने के लिए तैयार थे। आखिर जनता नाराज होती रही तो मालुम तो पड़ा ही होगा लेकिन नजदीकी सलाहकारों ने मील राज को मिटा दिया। मील राज को गलत रास्ते पर चलाया गलत कार्य करवाए जिससे छवि खराब होती रही। ऐसी घेराबंदी रही कि मील पांच छह अक्लमंदों को अपना हितकारी मानते रहे। अब वापस राज में लौटना असंभव है।

* करीब डेढ साल से चेतावनी भरे लेखों सलाहों से व्यवस्था सुधारने जनता को समझने का करणी प्रेस इंडिया में आता रहा। तीन चार महीनों से तो स्पष्ट लिखा गया कि कौन मील और कांंग्रेस की लुटिया डुबो रहे हैं। नगरपालिका का भ्रष्टाचार और गलत कार्य भी बड़ा कारण रहे हैं। कालवा को हटाया मगर कार्यवाहक अध्यक्ष परसराम भाटिया के राज में भी न भ्रष्टाचार हटा न जनता के काम हुए। शहर गंदगी और अंधेरे में डूबा है लेकिन इसकी परवाह नहीं की गई। पत्रों को रद्दी की टोकरी में डाला जाता रहा है। ईओ और कर्मचारी मनमानी करते रहे हैं। अब भय से सुधर जाएंगे या फिर परेशान होंगे। कालवा जहां है कल भाटिया भी वहीं होंगे।

मील राज का अंत हो गया जिसका दुख न भाटिया को होगा न सलाहकारों को होगा। ०0०

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रविवार, 22 अक्टूबर 2023

सूरतगढ़ की टिकट:डुंगरराम गेदर कांंग्रेस का लोकप्रिय चेहरा.भाजपा को चुनौती.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 22 अक्टूबर 2023.

कांग्रेस ने सूरतगढ़ सीट पर लोकप्रिय चेहरे डुंगरराम गेदर को टिकट घोषित कर भाजपा के लिए चुनौती और खतरा पैदा कर दिया है। भाजपा को इस चुनौती का मुकाबला करने के लिए नया चेहरा ही घोषित करना होगा। कांंग्रेस और भाजपा दोनों में नये चेहरों को ही टिकट दिए जाने की मांग जनता कर रही थी। कांंग्रेस ने जनता की मांग पूरी कर दी और मूल ओबीसी को वरीयता देकर बड़ा संदेश देकर दांव भी चल दिया।




डुंगरराम गेदर का नाम कांंग्रेस टिकट पर छप जाने संबंधी पहला घोषणा पूर्ण लेख करणी प्रेस इंडिया में 6 मार्च 2022 को दिया गया था। डुंगरराम गेदर निरंतर लोकप्रिय होते गये। कांंग्रेस सूरतगढ़ में 2013 और 2018 में दो बार लगातार पराजित हुई इसलिए यहां नया प्रभावशाली चेहरा चुनाव में उतारना और भाजपा को चुनौती देना जरूरी हो गया था।

अब भाजपा को भी नया चेहरा घोषित करना होगा। 

भाजपा के वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया का जनता में विरोध है। लोग भाजपा में भी नये चेहरे की मांग कर चुके हैं। लोग पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू और पूर्व विधायक अशोक नागपाल को भी मजबूत नहीं मानती।

भाजपा कांंग्रेस सूची की प्रतीक्षा कर रही थी। अब भाजपा सूरतगढ़ का चेहरा घोषित कर देगी और मानना चाहिए की भाजपा भी नया चेहरा घोषित करेगी।०0०







सूरतगढ़:भाजपाई व कांग्रेसी टिकटार्थियों ने जोर खूब लगाया.टिकटें लटका दी.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

भाजपा और कांग्रेसी टिकटार्थियों ने अपना अपना जोर सिफारिशें दबाव जयपुर और  दिल्ली में इतना ज्यादा लगाया कि भाजपा और कांंग्रेस की टिकटें लटका कर रखवादी। अब जोर लगाने के बाद टिकट तो एक पार्टी में किसी एक को ही मिलेगी। 


भाजपाई नेता और कार्यकर्ता कमल खिलाने में लगें। चेहरा तो लोप कर दिया। पहले ही घोषणा हो गई थी कि वोट कमल को देना है। कमल खिलाना है तो फिर किसी को भी टिकट मिले। 


कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ता अपने चुनाव चिन्ह हाथ को मजबूत करें और वोट दें टिकट अब किसी को भी मिले।

* दोनों ही पार्टियों में मौजूदा का विरोध पिछले एक साल से हो रहा है। भाजपा से निर्वाचित  विधायक रामप्रताप कासनिया पर आरोप है कि उन्होंने काम नहीं करवाए। वे कहते रहे कि सरकार कांग्रेस की है और उनके कहने से काम नहीं होते। उनकी चलती नहीं। पूरे पांच साल निकाल दिए लेकिन अब भी टिकट की दावेदारी में आगे है। चालीस साल से राजनीति और उम्र 72 साल हो गई। टिकट दूसरे नये चेहरे के लिए छोड़ना नहीं चाहते। इनकी टिकट रुकेगी तब ही नये चेहरे को मिलेगी। नये सभी टिकटार्थियों ने विरोध किया वह सही है कि कासनिया को टिकट रुकेगी तभी नये को मिल पाएगी। 

* कांग्रेस में 2008 से मील परिवार ही रहा। 2008 2013 तक गंगाजल मील विधायक रहे। पांच साल जैसा काम किया या जनता राजी नहीं थी सो 2013 में उनको हरा दिया। जनता को राजी नहीं किया इसलिए 2018 में जनता ने हनुमान मील को हरा दिया। प्रदेश में सरकार कांंग्रेस की बन गयी। गंगाजल मील और हनुमान मील ने अपनी खूब चलाई जिसे लोग तानाशाही कहते हैं। अभी भी भारी विरोध के हनुमान मील टिकटार्थी हैं। इनकी टिकट रुकेगी नहीं तो नये को मिलेगी नहीं। अन्य 12 टिकटार्थी हैं उनका विरोध में बोलना सही है। 

तर्क और राजनीति में  भाजपा में कासनिया का विरोध और कांंग्रेस में मील का विरोध जायज है। बिना विरोध के ये खुद हटने वाले नहीं। 

* निर्णय भाजपा और कांंग्रेस पार्टियों को सोच समझ कर करना है कि आखिर किन नये चेहरों को टिकट देनी है या पुरानों को ही दौड़ाएंगे।

 दि. 22 अक्टूबर 2023* ०0०  

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शुक्रवार, 20 अक्टूबर 2023

सूरतगढ़:डुंगर गेदर के सामने भाजपा कासनिया और सेवटा में से किसे चुनाव लड़ाएगी?

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

कांग्रेस के डुंगरराम गेदर के सामने भाजपा भी इसी मूल ओबीसी वर्ग के नये चेहरे श्रीभगवान सेवटा को चुनाव में उतारेगी या फिर वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया को ही जन विरोध के बावजूद टिकट दे देगी? कांग्रेस और भाजपा दोनों पार्टियों में नये वर्ग और नये चेहरे की मांग उठी हुई है। 

कांग्रेस में डुंगरराम गेदर मूल ओबीसी कुम्हार है और भाजपा में मूल ओबीसी कुम्हार से ही श्री मगवान सेवटा टिकटार्थी हैं। डुंगरराम गेदर का नाम 19 अक्टूबर से शिखर पर छाया हुआ है और टिकट भी इसी के चारों ओर घूम रही है। 

सूरतगढ़ सीट पर ओबीसी से 2008 में कांंग्रेस के गंगाजल मील जीते। 2013 में ओबीसी के राजेंद्र सिंह भादू जीते। 2018 में ओबीसी के रामप्रताप कासनिया जीते। ओबीसी के ये तीनों जाट हैं। इस बार सर्वे में कांंग्रेस और भाजपा दोनों में ही इस वर्ग के अलावा किसी अन्य वर्ग को टिकट देने की मांग है। भाजपा सूची में से  वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया और श्रीभगवान सेवटा में से कौन प्रत्याशी होगा? क्या भाजपा सूची में इन दो के अलावा भी कोई तीसरा नाम भी है? लोग अनुमान और संभावना के अपने अपने घौड़े दौड़ा रहे है। ०0०

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गुरुवार, 19 अक्टूबर 2023

पृथ्वीराज मील बोले सूरतगढ़ का भविष्य सुधारेंगे.मील कुटुम्ब के पृथ्वी की नीति.

  


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 19 अक्टूबर 2023.

जननायक जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष पृथ्वीराज मील ने कहा है कि पिछले राजनेताओं के ध्यान नहीं देने के कारण सूरतगढ़ का समुचित विकास नहीं हो पाया। लेकिन वे सूरतगढ़ का भविष्य सुधारेंगे और युवाओं और महिलाओं को आगे लाने उत्थान करने के विजन से काम करेंगे। उन्होंने कहा कि यही पार्टी की नीति है। जेजेपी झूठे सपने नहीं दिखाती न झूठे वादे करती। उन्होंने कहा कि धरातल पर काम होता है वही करके दिखाएंगे।

पृथ्वीराज मील सन् 2005 में सूरतगढ़ पंचायत समिति ( सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र) के एक जोन से जीत कर जिला प्रमुख बने और उस काल में विकास के अनेक कार्य किए।

उन्होंने कहा की जेजेपी पार्टी राजस्थान में पूरी ताकत से चुनाव लड़ेगी और विधानसभा का ताला उनकी चाबी सज खुलेगा।

पृथ्वीराज मील से क्षणिक वार्ता 18 अक्टूबर को हुई जब वे जनसंपर्क को निकलने वाले थे। पृथ्वीराज सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र के हर गांव ढाणी और शहर के वार्डों से भलीभांति जानकारी रखते हैं। मील कुटुम्ब के ही पृथ्वीराज मील सन् 2008 में गंगाजल मील के चुनाव में नाव के खेवनहार थे जिससे मील विधायक चुने गए थे। अब गंगाजल मील कांग्रेस में है और पृथ्वीराज मील जननायक जनता पार्टी में हैं और उसके प्रदेशाध्यक्ष हैं। ०0०







मेरा 79 और पत्रकारिता के 60 वें वर्ष में सुखद प्रवेश:करणीदानसिंह राजपूत

     




^( माँ हीरा और पिता रतनसिंहजी की सीख तूं चलते जाना निर्भय होकर-पीड़ितों की आवाज बन कर:^)
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पत्रकारिता एवं लेखन के वर्षों के संघर्ष और आनन्ददायी अनुभवों व महान लेखकों पत्रकारों की रचनाओं को पढ़ते और उनसे मिलते हुए मेरे जीवन के 78 वर्ष पूर्ण हुए एवं 19 अक्टूबर 2023 को 79 वें वर्ष में प्रवेश की सुखद अनुभूति।

सीमान्त क्षेत्र का छोटा सा गांव जो अब अच्छा कस्बा बन गया है अनूपगढ़ जिसमें मेरा जन्म हुआ। 
माता पिता हीरा रतनसिंह ने और परिवार जनों ने वह दिया जिसके लिए कह सकता हूं कि मेरी माँ बहुत समझदार थी और पिता ने संषर्घ पथ पर चलने की सीख दी।

मेरा पहला लेख 'जल - जीवन और  स्वास्थ्य  का दाता' साप्ताहिक ज्वाला जयपुर में 15 जुलाई 1965 को प्रकाशित हुआ। 
सन् 1965 में दैनिक वीर अर्जुन नई दिल्ली में खूब छपा और सरिता ग्रुप जो बड़ा ग्रुप आज भी है उसमें छपने के शुभारंभ का गौरव मिला।
हिन्दी की अनेक पत्रिकाओं में छपने का इतिहास बना।
👍मैं सरकारी पीडब्ल्यूडी की नौकरी में था तब लेख कहानियां आदि बहुत छपते थे लेकिन गरीबों व पिछड़े ग्रामों आदि पर लिखने की एक ललक थी कि दैनिक पत्रों में लिखा जाए तब 1969 में पक्की नौकरी छोड़ कर लेखन के साथ पत्रकारिता में प्रवेश किया। 
अखबारों में लिखता छपता हुआ सन 1972 में राजस्थान पत्रिका से जुड़ा और 15 मई 2009 तक के 37 साल का यह सुखद संपर्क रहा।

धर्मयुग और साप्ताहिक हिन्दुस्तान में छपना गौरव समझा जाता था। दोनों में भी कई बार छपा।
छात्र जीवन में वाचनालय में दिनमान पढ़ता था तब सोचा करता था कि इसके लेखक क्या खाते हैं कि इतना लिखते हैं? वह दिन भी आए जब दिनमान में भी मेरी रिपोर्टें खूब छपी।
रामनाथ गोयनका के इंडियन एक्सप्रेस का विस्तार जब जनसत्ता दैनिक के रूप में हुआ तब जनसत्ता दिल्ली में खूब छपा। जब चंडीगढ़ से भी छपने लगा तब ओमप्रकाश थानवी के कार्यकाल में चंडीगढ़ में भी मैं खूब छपा। साप्ताहिक हिन्दी एक्सप्रेस बम्बई में भी लेख कई बार छपे।
राजस्थान की संस्कृति,सीमान्त क्षेत्र में घुसपैठ,तस्कर,आतंकवाद पर भी खूब लिखा गया। 
पंजाब के आतंकवाद पर टाइम्स ऑफ इंडिया बम्बई ने लिखने के लिए कहा तब कोई तैयार नहीं हुआ। वह सामग्री वहां से छपने वाली पत्रिका धर्मयुग में छपनी थी। मैंने संदेश दिया और मेरा लेख सन् 1984 में दो पृष्ठ में छपा। धर्मयुग में लेख छपना बहुत बड़ी बात मानी जाती थी। धर्मयुग में बाद में कई लेख प्रकाशित हुए। 
आरएसएस का पांचजन्य,वामपंथी विचारधारा और जवाहर लाल नेहरू के मित्र आर.के.करंजिया का ब्लिट्ज,कांग्रेसी टच का करंट और समाजवादी विचार धारा के जॉर्ज फरनान्डीज के प्रतिपक्ष (1974-75) में खूब छपा। 
प्रतिपक्ष साप्ताहिक था जिसने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नींद हराम करके रखदी थी और बाद में तो इस पर आपातकाल 1975-77 में प्रतिबंध लग गया था।
मेरे लेख और कहानियां अनेक पत्र पत्रिकाओं में  बहुत छपी।
आकाशवाणी सूरतगढ़ से वार्ताएं कहानियां कविताएं रूपक आदि बहुत प्रसारित हुई हैं। रूपक राजस्थान के सभी केंद्रों से एक साथ प्रसारित हुए।
इंदिरागांधी नहर पर दूरदर्शन ने एक रूपक बनाया जिसमें कई मिनट तक मेरा साक्षात्कार रहा। वह साक्षात्कार मेरे इंदिरागांधी नहर पर लेखन के अनुभवों के कारण लिया गया। दूरदर्शन के दिग्गज प्रसारण अधिकारी के.के.बोहरा के निर्देशन में वह साक्षात्कार हुआ व राष्ट्रीय स्तर पर प्रसारण हुआ।

* विशेष घटना*
पत्रकारिता के कारण ही मार्च सन् 1974 में प्राणघातक हमला हुआ। राजस्थान की विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव ( कट मोशन) 20 विधायकों के हस्ताक्षरों से पेश हुआ। बीस विधायकों के हस्ताक्षरों से ही काम रोको प्रस्ताव पेश हो सकता था।
  काम रोको प्रस्ताव पर मेरे लिए 48 विधायक बोले और फिर संपूर्ण सदन ही खड़ा हो गया था। मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी को खड़े होकर सदन को शांत करना पड़ा था। राजस्थान विधानसभा की प्रतिदिन की कार्यवाही उन दिनों छपती थी। मेरे पास एक दिन की कार्यवाही प्रति काम रोको प्रस्ताव की पड़ी है। सात दिनों तक यह हंगामा किसी न किसी रूप में होता रहा था। बीबीसी,रेडियो मास्को, वायस ऑफ अमेरिका सहित अनेक रेडियो ने दुनिया भर में वह घटना प्रसारित की। 
देश के करीब करीब हर हिन्दी अग्रेजी अखबार में समाचार और संपादकीय छपे।
* काम रोको(कट मोशन) वाले दिन कि छपी पुस्तक मेरे रिकॉर्ड में है। सभी दिनों की पुस्तकें स्व.केदारनाथ शर्मा के गृहमंत्री काल 1977-79 में उनकी लायब्रेरी से लाया था। वे भी मेरे पक्ष में बोलने वालों में थे।

* आपातकाल 26 जून 1975 से 21 मार्च 1977 ईसवी.*

आपातकाल अत्याचार का काल था जिसमें मेरा साप्ताहिक " भारत जन "भी सरकारी कोप का शिकार बना।
( यह मेरे संपादन और स्वामित्व में जनवरी 1973 से 1979 तक प्रकाशित हुआ था)
भारतजन पर पहले सेंसर लगाया गया। सरकार की अनुमति के बिना कोई न्यूज छप नहीं सकती थी। विज्ञापन रोक दिए गए। अखबार की फाइल पेश करने के लिए मुझे  श्रीगंगानगर बुलाया गया और  30 जुलाई 1975 को वहां गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप लगाया गया कि पब्लिक पार्क में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के विरूद्ध लोगों को भड़का रहा था। एक वर्ष की सजा भी सुनाई गई। सवा चार माह तक जेल मे बिताए और उसके बाद एक संदेश बाहर कार्य करने का मिलने पर 3 दिसम्बर 1975 को बाहर आया। 
आपातकाल में बहुत कुछ भोगा। मेरी अनुपस्थिति में छोटी बहन,पिता और नानी को क्षय रोग ने ग्रस लिया। इलाज तो हुआ वे ठीक भी हुए लेकिन वह काल बड़ा संघर्षपूर्ण रहा। परिवार ने कितनी ही पीड़ाएं दुख दर्द भोगे मगर वह अनुभव पत्रकारिता व राजपूती शान के अनुरूप और देशभक्ति से पूर्ण रहे जो जीवन की श्रेष्ठ पूंजी हैं।

* पुरस्कार - अलंकरण *

राजस्थान पत्रिका का एक महत्वपूर्ण स्तंभ 'कड़वा मीठा सच्च' था। इस स्तंभ में लेखन में 
* घग्घर झीलों के रिसाव पर सन् 1990 में लेखन पर सन् 1991 में राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार मिला।

* इंदिरागांधी नहर पर 12 श्रंखलाएं लिखी जो सन् 1991 में छपी तथा दूसरी बार 1992 में पुन: राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।

* राजस्थान की शिक्षा प्रणाली पर व्यापक अध्ययन कर दो श्रंखलाओं में सन् 1993 में प्रकाशित लेख पर तीसरी बार राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार 1994 में प्राप्त हुआ।

* इसके बाद सन 1996 में राजस्थान की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पद्धति पर व्यापक अध्ययन कर 4 श्रंखलाएं  लिखी। इस पर सन् 1997 में राज्य स्तरीय दूसरा पुरस्कार मिला।

* वर्ष 1997 में विश्व प्रसिद्ध शिक्षा संस्थान ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया के बहादुरसिंह ट्रस्ट की ओर से पत्रकारिता  में सम्मान व पुरस्कार प्रदान किया गया।

* बीकानेर संभाग का "राजस्थान गौरव पत्रकारिता सम्मान 2019" बीकानेर के रवीन्द्र मंच पर 4 अगस्त 2019 को प्रो.ललित किशोर चतुर्वेदी स्मृति संस्थान जयपुर की ओर से प्रदान किया गया।





* मेरी पत्रकारिता और रचनाएं *
    
मेरा लेखन कानून नियम के लिए सच्च के प्रयास में रहा। कई बार ऐसा लेखन लोगों को अप्रिय भी महसूस होता है लेकिन जिन लाखों लोगों के लिए लिखा जाता है,उनके लिए आगे बढऩे का कदम होता है।
राजनीति,राजनेताओं व राजनैतिक दलों पर और भ्रष्टाचार के विरुद्ध लिखना लोगों को सुहाता है वहीं अप्रिय भी लगता है। साधारणतया ऐसे लेखन से पत्रकार बचना चाहते हैं, लेकिन मैं ऐसे लेख लिखना अच्छा समझता रहा हूं,क्योंकि समाज व लोग सतर्क तो होते ही हैं।

मेरे परिवार जन,मित्रगण और कानून ज्ञाता जो साथ रहे हैं वे भी इस यात्रा में सहयोगी हैं।

मैंने मेरे पूर्व के लेखों में भी लिखा है कि लिखने बोलने की यह शक्ति ईश्वर ही प्रदान करता है और वह परमआत्मा जब तक चाहेगा यह कार्य लेखन और पत्रकारिता चलता रहेगा और लोगों का साथ भी रहेगा।
पवित्र स्थानों, तीर्थ स्थलों, मंदिरों और शिक्षा संस्थाओं में एक ही आशीर्वाद मांगता रहा हूं कि सच्च लिखने की कोशिश करता रहूं ।

💐 आज 79 में प्रवेश पर करणी माता मंदिर (राजपूत क्षत्रिय संस्था) में पत्नी विनीता सूर्यवंशी सहित नवरात्र के पांचवे नवरात्र का विशेष पूजन किया। सच्च के लिए भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध लिखते रहने का संकल्प ले मां करणी के धोक लगाई। 


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राजस्थान पत्रिका के संस्थाथापक प्रसिद्ध पत्रकार श्रद्धेय कर्पूरचंद कुलिश का मेरे पर वरद हस्त रहा और उन्होंने जोधपुर में पत्रकारों के बीच में कहा कि मैं तुम्हारे हर लेख को पढ़ता हूं। यह एक महान गौरववाली बात थी। 
राजस्थान पत्रिका ग्रुप के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी और स्व. मिलाप कोठारी  ( राजस्थान पत्रिका के संपादक रहे गुलाब जी के छोटे भाई) एक घनिष्ठ मित्र के रूप में आते मिलते और अनेक विषयों पर हमारी  चर्चाएं होती। 
माननीय गुलाब जी सुझाव लेते और वे पत्रिका में लागू भी होते। गुलाब कोठारी ने श्रीगंगानगर में सर्वश्रेष्ठ संवाददाता के रूप में सम्मानित किया तब कई मिनट तक एकदूजे से गले मिले खड़े रहे। आज भी पत्रिका परिवार के साथ मेरे घनिष्ठ संबंध हैं।

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राजस्थान पत्रिका के प्रधानसंपादक गुलाब कोठारी सर्व श्रेष्ठ पत्रकारिता पर करणीदानसिंह राजपूत को सम्मानित करते हुए। बीच में नजर आ रहे तत्कालीन शाखा प्रबंधक अवधेश जैन और पास में उपस्थित तत्कालीन शाखा प्रभारी संपादक हरिओम शर्मा। दिनांक 16-4-2004)**
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मेरी ब्लॉग वेब साईट   www.karnipressindia.com
आज अत्यन्त लोक प्रिय साईट है जो देश और विदेश में प्रतिदिन हजारों लोग देखते हैं।
दिनांक 19-10-2023.
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करणीदानसिंह राजपूत,
(राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क सचिवालय सेअधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,)
विजयश्री करणी भवन,
सूर्यवंशी स्कूल के पास,मिनीमार्केट,
सूर्योदय नगरी
सूरतगढ़ / राजस्थान/ भारत।
मेरा ई मेल पता.   karnidansinghrajput@gmail.com
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डूंगरराम गेदर का अभिनंदन बनेगा शक्ति प्रदर्शन! कांग्रेस की टिकट पर छप जाएगा नाम!

 


* यह चुनौती भरा लेख 6 मार्च 2022 को लिखा गया था।  आपके सामने नयी परिस्थितियों में पुन: प्रस्तुत है।)


 सन 2023 के चुनाव में जनता चाहती है बदलाव में कांग्रेसी नया चेहरा*


* सूरतगढ़ की पुरानी धानमंडी के शक्तिप्रदर्शन से बन जाती है टिकट की ताकत! ऐसी है मान्यता!*

* करणीदानसिंह राजपूत *

राजनैतिक शक्ति का शानदार प्रदर्शन स्थल पुरानी धान मंडी में 7 मार्च 2022 को अनूठा दिन होगा जब डूंगर राम गेदर का शानदार अभिनंदन होगा। यह अभिनंदन होगा और इसी अभिनंदन से डूंगर की ताकत प्रदर्शित होती जयपुर पहुंचेगी। डूंगरराम गेदर को प्रदेश में माटी एवं शिल्पकला बोर्ड के उपाध्यक्ष बनाये जाने पर यह अभिनंदन समारोह होगा।
सूरतगढ़ की पुरानी धानमंडी में धान तो  दिखाई नहीं देता मगर राजनैतिक ताकत यहीं से सामने आती है और जब सिर से सिर ही मिले दिखाई पड़ते हैं तो मनचाही टिकट पर नाम छप जाता है। पीछे झांक कर देखें तो यही इतिहास खुलता है।
डूंगर राम गेदर अब कांग्रेस की मजबूत ताकत बने हुए हैं और सूरतगढ़ का अभिनंदन जयपुर तक ध्वज फहराएगा। ऐसी हवा सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में चल रही है। यह अभिनंदन और यह राजनैतिक शक्ति प्रदर्शन ही 2023 के चुनाव की टिकट पक्की करेगा। याद आए तो ठीक नहीं तो हम कराते हैं 2018 के विधानसभा चुनाव से पहले का एक शक्ति प्रदर्शन। भाजपा के रामप्रताप कासनिया का शक्ति प्रदर्शन हुआ और भाजपा की टिकट उसी दिन पक्की हो गई। कासनिया के शक्ति प्रदर्शन की हवा और चर्चा जयपुर पहुंची जिसकी काट नहीं हो सकी। रामप्रताप कासनिया को टिकट और फिर जनता का साथ मिला जिससे वे विधायक चुने गए। तब से यह पक्की बात लोगों के दिमाग में घुस गई कि सूरतगढ़ की पुरानी धानमंडी का अभिनंदन शक्ति प्रदर्शन टिकट की लहर चलाता है।
डूंगर गेदर का अभिनंदन जिस तरह से होने वाला है वह शक्ति प्रदर्शन ही होगा। सूरतगढ़ का हर गांव यहां अपनी पहुंच दिखाएगा।ऐसी चर्चा चल रही है। क्या होने वाला शक्ति प्रदर्शन डूंगर की चुनावी टिकट पक्की करेगा? पुरानी धान मंडी का इतिहास तो यही कहता है कि डूंगर राम गेदर की टिकट पक्की होगी और कोई रुकावट नहीं आएगी। कोई रुकावट डालेगा तो वह विरोध छलनी छलनी होकर बिखर जाएगा।
कांग्रेस की टिकट पर मील परिवार के अलावा कोई हो नहीं सकता। यह लोगों को कहते सुनते रहते हैं। लोगों को यही लगता है कि उनके पास पैसे की ताकत है। यह सच्च भी है। हम उसी मील और उनके पिछले राजनैतिक इतिहास पर नजर डाल लेते हैं।
सन 2003 का चुनाव। विधानसभा की पीलीबंगा सीट । उस समय सूरतगढ़ तहसील का लगभग पौना हिस्सा पीलीबंगा विधानसभा में होता था। विशेष कर टिब्बा क्षेत्र। भाजपा के नेता रामप्रताप कासनिया ही टिकट के हकदार थे मगर भाजपा की टिकट गंगाजल मील ले आए। कैसे ले आए किस पावर से ले आए? भाजपा के शक्तिशाली नेता प्रमोद महाजन ने मील के पक्ष में पीलीबंगा में चुनावी सभा भी की। रामप्रताप कासनिया ने अपना हक मरते देखा तो चुनौती देकर सामने आ खडे़ हुए। निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में। भाजपा की टिकट थी हाईकमान के दिग्गजों का साथ था लेकिन जीत साथ में नहीं थी। गंगाजल मील की पहली हार हुई। अनेक लोग जो मील साहब को नेता मानते हैं उनको इस हार का मालुम ही नहीं होगा।
सन 2008 में परिसीमन हुआ और पीलीबंगा अनुसूचित वर्ग के लिए आरक्षित हो गई। सूरतगढ़ सामान्य सीट बनी और छोटी हो गई। पहले अन्तर्राष्ट्रीय सीमा को छूती थी। सूरतगढ़ तहसील का जो हिस्सा पीलीबंगा विधानसभा में था वह सूरतगढ़ विधानसभा में शामिल हो गया।
पीलीबंगा के चुनावी योद्धा सूरतगढ़ सीट पर युद्ध करने आ गए।
पीलीबंगा में हारे हुए गंगाजल मील ने 2008 के चुनाव से पहले भाजपा की वसुंधरा राजे को निशाना बनाते हुए भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए भाजपा छोड़दी। यह घोषणा पत्रकारों के सामने हुई।  मील को पराजय के बाद भाजपा की मिश्री कड़वी लगी और भाजपा में भ्रष्टाचार भी दिखाई देने लगा।
सन 2008 में गंगाजल मील साहब ने कांग्रेस का दामन थामा और  कांग्रेस की टिकट भी मिल गई। रामप्रताप कासनिया को भाजपा की टिकट मिली। राजेंद्र भादू निर्दलीय लड़े।
2008 का चुनाव गंगाजल मील साहब ने सभी शक्तियां लगा कर जीता। कासनिया और भादू पराजित हुए। भादू ने इस चुनाव में अपनी राजनैतिक ताकत दिखाई। भादु ने भाजपा में प्रवेश कर लिया।
गंगाजल मील 2008 से 2013 तक विधायक रहे। यह उनकी जीत का स्वर्णिम काल था। इलाके के और सूरतगढ़ शहर के विकास में चार चांद लगा सकते थे। लेकिन इसके लिए जनता का बनना होता है। चुनाव जीत कर भी जनता की आवाज नहीं बन सके। सन 2013 में गंगाजल मील कांग्रेस की टिकट ले आए और जनता ने पासा पलट दिया। मील साहब हार गए और भाजपा के राजेन्द्र सिंह भादु बहुत अच्छे वोटों से जीत गए। मील साहब और टीम ने 2013 से 2018 तक जनता को जोड़ने जैसा काम नहीं किया। कुछ लोग ही घेरा बनाए रहे जो 2008 से ही जुडे़ हुए थे।
सन 2018 में मील ने टिकट मांगी और दो बार पीलीबंगा से विधायक रहे सरदार हरचंद सिंह सिद्धु ने भी टिकट मांगी। सिद्धु की ओर से कुछ महत्वपूर्ण नेताओं की ताकत भी थी। दोनों की मांग दिल्ली में स्वीकार नहीं हो पाई। राहुल नीति के कारण टिकट मील परिवार के हनुमान मील को मिला। 2008 से 2018 तक की मील की कार्य प्रणाली का वजन हनुमान मील पर पड़ा। जो लोग 2008 से 2013 तक गंगाजल मील साहब की विधायकी का लाभ लेते रहे। घेरा बनाए रहे आम जनता की सुनने नहीं दिया। वे हनुमान मील के चुनाव में साथ नहीं रहे तमाशा देख रहे थे। यह हार हुई। उसके बाद गहनता से इसकी समीक्षा होनी चाहिए थी। जो नजदीकी तमाशा देखने में थे उनके नाम और चुनाव की भूमिका अपने घरेलु रजिस्टर में उतारते। ऐसा नहीं हुआ। 2018 के चुनाव में सीख मिली। कांग्रेस में रहते 2013 से 2023 तक 10 साल की सत्ता से दूरी बन गई। मील परिवार को 2003,2008,2013 और 2018 कुल चार मौके इस इलाके में मिल गए।
2018 की पराजय के बाद तीन साल बीत गए और 2022  शुरू हो गया। इन तीन सालों में मील साहब और हनुमान मील ने प्रदेश में कांग्रेस राज होते हुए क्या किया है? लोग स्थानांतरणों से दुखी होते रहे और कटते रहे दूर होते रहे।
अभी कांग्रेस राज है और हनुमान मील प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य होते हुए बहुत कुछ करवा सकते हैं। 
वैसे मील परिवार को कांग्रेस में तीन मौके मिल गए। एक में जीत दो में हार।  सूरतगढ़ विधानसभा में महत्वपूर्ण हिस्सा आता है नगरपालिका। सन  2019 से कांग्रेस का बोर्ड है। पालिका अध्यक्ष गंगाजल मील और हनुमान मील के हर समय साथ और दोनों के कहने में है लेकिन शहर में विकास के नाम पर जनता खुश नहीं। हनुमान मील टिकट मांगेगे तो पालिका के काम कितना लाभ दे पाएंगे।
* सबसे एक बड़ा पोइंट भी आएगा। अभी 2022 में पंचायत समिति सूरतगढ़ के प्रधान पद पर गंगाजल जी के भाई हजारी मील निर्वाचित हुए। यह आवाज जरूर उठेगी कि क्या मील परिवार को ही सब दिया जाता रहे। यह कारण टिकट वितरण में महत्वपूर्ण रहेगा। कांग्रेस में तीन बार विधानसभा की टिकट और मौके तथा प्रधानगी कुल मिला कर मील परिवार के अलावा नये कांग्रेसी चेहरे के दावे को मजबूत करने वाले होंगे। कांग्रेस यह सूरतगढ़  सीट भाजपा से छीन लेने की कोशिश करेगी और इसके लिए नये चेहरे को टिकट देने के कारण मजबूत होंगे। मील अपना दावा आसानी से तो छोड़ेंगे नहीं। एकदम शक्ति शून्य हो गए हों वाली बात भी नहीं है। राजनैतिक ताकत कभी भी शून्य नहीं होती। उसका तरीका जनहित में या जनता के साथ फिर से जुड़ जाने में बदलना होता है और वह झुक कर विनम्र होकर किया जाता है। यह तरीका मील परिवार कितना कर पाए हैं वे जानते हैं या फिर जनता जानती होगी। मील खुद तो समीक्षा कर ही सकते हैं। जनता कभी सामने बोलती नहीं।
* काम के बारे में एक उदाहरण नहीं सैकड़ों उदाहरण होंगे। आगे और रिपोर्ट अखबारों में आती रहेंगी और टिकट बंटने के समय चर्चा होती रहेगी। 
अभी डूंगरराम गेदर के अभिनन्दन और शक्ति प्रदर्शन पर पक्ष विपक्ष का हिस्सा ना बनते हुए जो स्थिति सामने हैं उसको नजरों से दूर नहीं किया जा सकता।
*फिलहाल कांग्रेस के पास नये चेहरे के रूप में डूंगरराम गेदर के अलावा कोई है नहीं। कोई और पनप जाए ऐसा भी लगता नहीं है।०0०
दि. 6 मार्च 2022.
अपडेट 19 अक्टूबर 2023.
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार ( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
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.सूरतगढ़ सीट:चुनाव 2023.समाचार विचार रिपोर्ट:जानकारियां. पढते रहें।
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बुधवार, 18 अक्टूबर 2023

डुंगर मिटने वाला नाम नहीं, कोई रोक न पाएगा. भाजपा के लिए खतरा!

 


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 18 अक्टूबर 2023.

सूरतगढ़ सीट पर डुंगरराम गेदर का नाम भाजपा के लिए पक्का और जबरदस्त खतरा बन गया है। 

अभी कांग्रेस की सूची घोषित नहीं हुई है मगर सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र से डुंगर गेदर के पक्ष में आवाज उठी है"आपणै डुंगर नै टिकट मिलगी,घरां सूं बारै आओ! 

* बसपा से कांग्रेस में आए डुंगरराम गेदर के वोटबैंक की गिनती कम से कम 30 हजार वोटों से शुरु होती है। डुंगर गेदर की यह तस्वीर जनमानस में बनी है। यह तस्वीर कांग्रेस में डुंगर गेदर को चुनाव में मजबूत प्रमाणित करती है वहीं भाजपा के लिए खतरा बनाती है। सन् 2013 और सन् 2018 में जीती भाजपा की तीसरी जीत के लिए डुंगर गेदर का नाम बहुत बड़ी बाधा होगा। 

* लोग 17 अक्टूबर को चौकन्ने हुए जब यह चर्चा फैली कि सर्वे में डुंगरराम गेदर शिखर पर है और कांग्रेस की टिकट इस बार गेदर को मिलने वाली है। 

* भाजपा में पहले हनुमानमील का नाम और जीत आसान मानी जा रही थी कि भाजपा किसी को भी टिकट दे वह 30 हजार से अधिक वोटों से  जीत जाएगा। आसानी से चुनाव जीत लेने का दिन में जागते हुए सपना देखने वाले भाजपा नेताओं में अब माना जाने लगा है कि कांग्रेस गेदर को टिकट देती है तो भाजपा को सोचना होगा कि किसको चुनाव में उतारे? भाजपा के पुराने महार्थियों से पार नहीं पड़ेगी तो नया चेहरा कौनसा उतारे जो डुंगर गेदर का मुकाबला कर सके। डुंगर गेदर के नाम को लेकर कांग्रेस में भी बहुत हलचल मची है। लेकिन कांग्रेस में भी अब उसका नाम रोकने वाला कोई नेता नहीं है। कांग्रेस दो बार हार के बाद अब कोई खतरा उठाना नहीं चाहती। लोग डुंगर गेदर का नाम सुनने के लिए कांग्रेस सूची के लिए उतावले हो रहे हैं।  डुंगर गेदर का नाम कैसे ऱोका जाए इसके लिए  प्रयास कितने सफल असफल होते हैं यह कांग्रेस की टिकट सूची से ही मालुम होगा। जयपुर तक तो चलती रही मगर राहुल के आगे सभी के हाथ खड़े हैं। ०0०








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