लोकतंत्र सेनानी वरिष्ठ पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत का उम्र में 82 वर्ष में और पत्रकारिता लेखन में 63 वें वर्ष में प्रवेश.
* विशेष लेख*
सूरतगढ़। लोकतंत्र सेनानी वरिष्ठ पत्रकार लेखक करणीदानसिंह राजपूत ने 19 अक्टुबर 2026 को 81 वर्ष पूर्ण कर उम्र के 82 वर्ष में और लेखन व पत्रकारिता के 63 वें वर्ष में प्रवेश किया। इनके राजनैतिक लेखन और समीक्षा पठन में लोगों की गहरी रुचि है।
पहला लेख 'जल - जीवन और स्वास्थ्य का दाता' साप्ताहिक ज्वाला जयपुर में 15 जुलाई 1965 को प्रकाशित हुआ। यह लेख जीवन विज्ञान पर था।
सन् 1965 में दैनिक वीर अर्जुन नई दिल्ली में खूब छपे और सरिता ग्रुप जो बड़ा ग्रुप आज भी है उसमें छपने के शुभारंभ का गौरव मिला। सरिता और भूभारती में खूब छपे
अखबारों में लिखते छपते हुए सन 1972 में राजस्थान पत्रिका से जुड़े और 15 मई 2009 तक के 37 साल तक पत्रिका से जुड़े रहे। पत्रिका में हजारों लेख होंगे।इतवारी पत्रिका में भी अनेक लेख रिपोर्ट छपी।
पंजाब के आतंकवाद पर टाइम्स ऑफ इंडिया बम्बई ने लिखने के लिए कहा तब कोई तैयार नहीं हुआ। तब राजपूत का लेख सन् 1984 में दो पृष्ठ में छपा। धर्मयुग में बाद में कई लेख प्रकाशित हुए। टाइम्स ऑफ इंडिया के दिनमान और विभिन्न हिंदी प्रकाशनों में रिपोर्ट छपी। नवभारत टाइम्स जयपुर में भी। हिन्दुस्तान टाइम्स के साप्ताहिक हिन्दुस्थान,इंडियन एक्सप्रेस के पाक्षिक हिंदी एक्सप्रेस, दैनिक जनसत्ता दिल्ली और चंडीगढ़, सन्मार्ग कोलकत्ता,पंजाब केसरी जलंधर, दैनिक ट्रिब्यून चंडीगढ़ में आनेक रिपोर्ट व लेख छपे।
आरएसएस के पांचजन्य,वामपंथी विचारधारा और जवाहर लाल नेहरू के मित्र आर.के.करंजिया के साप्ताहिक ब्लिट्ज बम्बई,कांग्रेसी टच के करंट बम्बई, और समाजवादी विचार धारा के जॉर्ज फरनान्डीज के 'प्रतिपक्ष' नई दिल्लीमें खूब छपे। राजस्थानी मासिक माणक,राजस्थानी भाषा साहित्य अकादमी की जागती जोत,राजस्थान हिंदी अकादमी की मधुमति में लेख व कहानियां बहुत छपे।
आकाशवाणी सूरतगढ़ से वार्ताएं कहानियां कविताएं रूपक आदि बहुत प्रसारित हुई हैं।
* राजपूत पर पत्रकारिता के कारण ही मार्च सन् 1974 में प्राणघातक हमला हुआ। इस पर राजस्थान की विधानसभा में काम रोको प्रस्ताव ( कट मोशन) 20 विधायकों के हस्ताक्षरों से पेश हुआ। काम रोको प्रस्ताव पर 48 विधायक बोले और फिर संपूर्ण सदन ही खड़ा हो गया था। मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी को खड़े होकर सदन को शांत करना पड़ा था। सात दिनों तक यह हंगामा किसी न किसी रूप में होता रहा था। बीबीसी,रेडियो मास्को, वायस ऑफ अमेरिका सहित अनेक रेडियो ने दुनिया भर में वह घटना प्रसारित की।देश के करीब करीब हर हिन्दी अग्रेजी अखबार में समाचार और संपादकीय छपे।
प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 26 जून 1975 को आपातकाल की घोषणा की जो 21 मार्च 1977 तक चला।आपातकाल अत्याचार का काल था जिसमें राजपूत का साप्ताहिक " भारत जन "भी सरकारी कोप का शिकार बना।
भारतजन पर पहले सेंसर लगाया गया। सरकार की अनुमति के बिना कोई न्यूज छप नहीं सकती थी। विज्ञापन रोक दिए गए। अखबार की फाइल पेश करने के लिए उनको श्रीगंगानगर बुलाया गया और 30 जुलाई 1975 को वहां गिरफ्तार कर लिया गया। आरोप लगाया गया कि पब्लिक पार्क में प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी के विरूद्ध लोगों को भड़का रहा थे। एक वर्ष की सजा भी सुनाई गई। सवा चार माह तक जेल मे बिताए और उसके बाद एक संदेश बाहर कार्य करने का मिलने पर 3 दिसम्बर 1975 को बाहर आये।
राजस्थान सरकार ने संविधान की रक्षा करने व लोकतंत्र को बहाल कराने के लिए राजपूत को * लोकतंत्र सेनानी* सम्मान प्रदान किया है। यह बड़ा सम्मान है। इसमें प्रतिमाह सम्मान राशि व सुविधाएं मिल रही है।
👌 राजपूत को जनवरी 2025 से राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क सचिवालय से अधिस्वीकृति (मान्यता) लाईफटाईम मान्यता मिली।
* पुरस्कार - अलंकरण *
* घग्घर झीलों के रिसाव पर सन् 1990 में लेखन पर सन् 1991 में राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार मिला। (राजस्थान पत्रिका)
* इंदिरागांधी नहर पर 12 श्रंखलाएं लिखी जो सन् 1991 में छपी तथा दूसरी बार 1992 में पुन: राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ।( राजस्थान पत्रिका)
* राजस्थान की शिक्षा प्रणाली पर व्यापक अध्ययन कर दो श्रंखलाओं में सन् 1993 में प्रकाशित लेख पर तीसरी बार राज्य स्तरीय प्रथम पुरस्कार 1994 में प्राप्त हुआ। (राजस्थान पत्रिका)
* इसके बाद सन 1996 में राजस्थान की चिकित्सा एवं स्वास्थ्य पद्धति पर व्यापक अध्ययन कर 4 श्रंखलाएं लिखी। इस पर सन् 1997 में राज्य स्तरीय दूसरा पुरस्कार मिला। (राजस्थान) पत्रिका
* सन् 2002 में तीर निशाने पर स्तंभ में लेख. सोनिया गांधी सूरतगढ़ सुपर थर्मल पावर स्टेशन पर पहली इकाई के लोकार्पण और दूसरी इकाई के शिलान्यास पर आई तब लाखों रूपये खर्च हुए। सुरक्षा व्यवस्था पर भी। राजस्थान में लगातार 6-7 साल से अकाल पड़ रहा था। यह स्टोरी राज्यस्तर पर पुरस्कृत हुई। 3 जनवरी 2003 को समारोह में यह पुरस्कार भारत के श्रम मंत्री साहिब सिंह वर्मा के हाथों से मिला। (राजस्थान पत्रिका.)
* वर्ष 1997 में विश्व प्रसिद्ध शिक्षा संस्थान ग्रामोत्थान विद्यापीठ संगरिया में आयोजित समारोह में विद्यापीठ के बहादुरसिंह ट्रस्ट की ओर से पत्रकारिता में सम्मान व पुरस्कार प्रदान किया गया। अजमेर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर के हाथों यह पुरस्कार मिला।
* बीकानेर संभाग का "राजस्थान गौरव पत्रकारिता सम्मान 2019" बीकानेर के रवीन्द्र मंच पर 4 अगस्त 2019 को प्रो.ललित किशोर चतुर्वेदी स्मृति संस्थान जयपुर की ओर से प्रदान किया गया। गुलाब चंद कटारिया के हाथों से मिला। अभी गुलाब चंद कटारिया पंजाब के राज्यपाल हैं।
अभी लेखन और पत्रकारिता निरंतर चल रहे हैं।
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