पंचायत चुनावों में विधायक डुंगरराम गेदर की मुश्किलें.अपनों से ही भीतरी खतरों का संकट.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 18 अक्टुबर 2026.
कांग्रेस के किस बडगर ने एक वोट भाजपा को दिलवाकर नगरपालिका सूरतगढ़ के अध्यक्षीय चुनाव में विधायक डुंगरराम गेदर की पक्की जीत को हार में बदल डाला। उसका राज शायद कभी नहीं खुले क्योंकि इस खेल में सभी भाजपा को वोट देने वाले पार्षद का मालुम करने में लगे हैं लेकिन बडगर की कोई खोज खबर नहीं हो रही। भाजपा पर आरोप है कि उसने प्रशासन व पुलिस की सहायता से सत्ता हथियाई। कांग्रेस का कोई पार्षद बिका नहीं न किसी के बिकने की चर्चा है लेकिन एक वोट भाजपा में चला गया। वोट बिका नहीं तो कांग्रेस से भाजपा में किसके इशारे पर चला गया।
इस एक वोट के भाजपा में चले जाने से कांग्रेस को कम और विधायक डुंगरराम गेदर की ताकत को बड़ी चोट पहुंचाई है।
कांग्रेस के भीतर डुंगरराम गेदर को विधायक देख कर कुछ नेता खुश नहीं है। आगामी विधानसभा चुनाव सन् 2028 से पहले डुंगरराम गेदर की ताकत को मटियामेट करने के मौकों में चुनावों से बड़ा मौका और कोई हो नहीं सकता था। नगरपालिका चुनाव में डुंगरराम गेदर ने अपनी पूरी ताकत और सूझबूझ से चुनाव लड़ाया। कांग्रेस 16 तो भाजपा भी 16 वार्डों में जीती। निर्दलीय 12 जीते भाजपा में 6 गये तो 6 को कांग्रेस ने अपने खेमे मे कर लिया। माकपा का एक वोट कांग्रेस के साथ मिल जाने पर कांग्रेस की एक वोट से ताकत बढ गई। अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की जीत पक्की हो गयी थी। यह जीत डुंगरराम गेदर की मानी जाती और गेदर मजबूत भी होते। यहां पर ऐन मौके पर चोट मारी गई जिससे परिणाम एकदम उलटा दिया गया।
नगरपालिका बोर्ड के अध्यक्ष चुनाव में कांग्रेस खेमे के 23 वोटों में से एक वोट भाजपा को डलवा दिए जाने से भाजपा की जीत हो गई। भाजपा के खेमे में 22 वोट थे तथा कांग्रेस खेमे का एक वोट मिल जाने से भाजपा में 23 हो गये। डुंगरराम गेदर को बड़ी और पक्की चोट से घायल करने वाला छुपा रुस्तम कौन था का मालुम नहीं हो सका।
दोनों पंचायत समितियों में कांग्रेस और भाजपा का कड़ा मुकाबला है और इन दोनों में भाजपा की जीत करवादी जाती है तो कांग्रेस की यह हार विधायक डुंगरराम गेदर की ताकत को शून्य जैसी कर डालेगी। डुंगरराम गेदर को नापसंद करने वालों की बड़ी जीत होगी। डुंगरराम गेदर दोनों पंचायत समितियों में कोई भी रणनीति अपनाएं लेकिन चुनाव के बीच में कुछ भी कर भी नहीं सकते। शक करने से भी खतरा है। एक तरफ कुंआ दूसरी तरफ खाई।
👌 विधानसभा चुनाव सन् 2023 में रामप्रताप कासनिया को किसने हराया था? कांग्रेस ने और डुंगरराम गेदर ने नहीं हराया था। रामप्रताप कासनिया को अपनों ने ही हराया था। अब डुंगरराम गेदर भी अपनों के ही खतरों में घिरे हैं।