मंगलवार, 7 जनवरी 2025

सूरतगढ़:1केएसआर में अधिकारियों की अनदेखी से डिग्गी की सालों से दुर्दशा.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 7 जनवरी 2025.

सूरतगढ़ तहसील में चक 1 केएसआर की करीब 2000 की आबादी और करीब 250 घर हैं जो सभी पक्के हैं मगर पंचायत की सार्वजनिक डिग्गी ( जोहड़) बुरी तरह से जीर्ण हालात में हैं। यह डिग्गी ही साबित करती है कि विकास अधिकारी सहित सरपंच आदि सभी लापरवाही से अनदेखी करते रहे। गांव में सभी घर पक्के हैं तो कुछ दो मंजिला भी हैं। सुनकर आश्चर्य हुआ कि गाय भैंसों पशुओं के कोठे भी पक्के हैं बस दुर्दशा सार्वजनिक डिग्गी की है। इस डिग्गी के चारदीवारी नहीं होना तो बहुत ज्यादा खतरनाक। कोई बच्चा बच्ची भी गिर सकते हैं। डिग्गी की ईंटे खुर जाने मसाला उतर जाने की हालत तो यह बयान करती है कि जब यह डिग्गी बनाई गई तब न ईंटे सही थी और न मसाला सही था। सभी गुणवत्ता हीन थे। जो मसाला अभी ईंटों पर लगा है उसकी प्रयोगशाला जांच करवाई जानी चाहिए ताकि स्पष्ट हो जाए कि कितना घटिया निर्माण हुआ था। डिग्गी के मरम्मत आदि निर्माण के लिए बजट आया तो फिर उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? 


* डिग्गी के पास में ही सार्वजनिक धर्मशाला बनी है जिसमें सुविधाओं का अभाव है इसलिए कोई भी इसका उपयोग नहीं कर पाता। धर्मशाला में रसोई, नहानघर,शौचालय आदि का प्रबंध होता है तब उसका उपयोग हो सकता है। 


विकास अधिकारी को तो तुरंत ही निरीक्षण कर निर्णय लेना चाहिए।०0०








सोमवार, 6 जनवरी 2025

कैलाश भसीन जी ने मुझे "समर्पण को अर्पण" पुस्तक भेंट की.करणीदानसिंह राजपूत.

 


माननीय कैलाश भसीन जी ने आज "समर्पण को अर्पण" पुस्तक मुझे भेंट की जो  मेरा सम्मान है और अतुलनीय है। भसीन जी की नस नस में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ समाया है या ये संघ में समाये हैं के बारे में कह सकता हूं कि एकाकार हैं। मैं भसीन जी को सुनता तो एकटक देखता रहता कि एक एक शब्द सुनने वाले को अदृश्य डोरी से बांधते चलता है। समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में भी पढता रहा। विचार किया कि श्रीगंगानगर जाकर निवास पर मिलूं। आज यह अवसर मिल ही गया।

भसीन जी के निवास का प्रवेश आंगन। एक तरफ ऊंचाई को दर्शाती पेड़ियां और तुलसी माता के समक्ष यह पुस्तक मुझे भेंट हुई। "समर्पण को अर्पण" को पढना है और फिर लिखना है एक महान व्यक्तित्व के कर्म पर जो अनेक संघर्षों से भरा एक इतिहास है। 

*6 जनवरी 2025.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ़ ( राजस्थान)

94143 81356

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रविवार, 5 जनवरी 2025

नवजात बच्चे को पालने में छोड़ दें फेंके नहीं.जाट क्लब.सूरतगढ़

 


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 5 जनवरी 2025.

जाट क्लब सूरतगढ़ ने राजकीय चिकित्सालय में पालना लगाया है ताकि अनावश्यक समझे जाने वाले नवजात बच्चों के जीवन को बचाया जा सके। फेसबुक से यह कार्य शुरू करने की जानकारी सामने आई। लोग इस पोस्ट पर कमेंट्स कर रहे हैं और सराहना कर रहे हैं तो अनेक अच्छा कार्य बता रहे हैं।०0०

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28 जनों को उम्र कैद:चंदन गुप्ता मौत: नाम सूची.

 

( मीडिया रिपोर्ट्स.3 जनवरी 2025.)

उत्तर प्रदेश के कासगंज में 26 जनवरी 2018 को दर्जनों मोटरसाइकिल सवार तिरंगा यात्रा पर निकले जब वे बद्दुनगर मुस्लिम बहुल इलाके में पहुँचे तब यात्रा के दौरान विवाद हुआ। पत्थरबाज़ी हुई और फिर हालात नियंत्रण से बाहर हो गए। गोलियां भी चलीं और यात्रा में शामिल चंदन गुप्ता को एक गोली लगी। इसके बाद चंदन गुप्ता की मौत हो गई थी।चंदन की मौत के बाद इलाक़े में तनाव फ़ैल गया था और दुकानों के साथ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था. तब 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया था और तीन दिन तक इंटरनेट बंद था।

घटना के लगभग सात साल बाद इस मामले में अदालत का फ़ैसला आया है. लखनऊ में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने गुरुवार 2 जनवरी 2025 को 28 अभियुक्तों को दोषी ठहराया।

अगले दिन शुक्रवार 3 जनवरी 2025 को अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद सभी दोषियों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई।

एनआईए के अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश विवेकानंद शरण त्रिपाठी ने 28 अभियुक्तों को आईपीसी की कई धाराओं के तहत दोषी पाया, जिनमें 302 (हत्या), 307 (हत्या का प्रयास), और 147 (दंगा), 149 (ग़ैर-क़ानूनी सभा में शामिल होने) शामिल हैं। इसके अलावा अभियुक्तों पर आईपीसी की धारा 124 ए (राजद्रोह) लगाई गई थी और मामला एनआईए की अदालत में चला गया था।

एसआईटी ने 31 अभियुक्तों के विरूद्ध जुलाई 2018 में आरोपपत्र दाखिल किया था लेकिन एक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।

28 जनवरी 2018 को घटना को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट के मुताबिक़, जहां हिंसा हुई वहां दोनों ही पक्षों के पास तिरंगा था और झगड़ा रास्ते को लेकर हुआ था।

घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंदन गुप्ता के परिवार को मुआवज़े के तौर पर 20 लाख रुपये देने की घोषणा की थी।

कासगंज पहले एटा ज़िले में आता था लेकिन 2008 में बीएसपी की सरकार में इसे अलग ज़िला बना दिया गया। उस वक़्त इसका नाम कांशीराम नगर कर दिया गया था, लेकिन 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस शहर का पुराना नाम वापस लौटा दिया।

इस दौरान जब ये लोग शहर के बद्दू नगर इलाक़े में पहुंचे थे तो यहां स्थानीय लोगों से झड़प हो गई थी.


इस दौरान फायरिंग हुई और इसमें शहर के नदरई गेट निवासी एक युवक अभिषेक गुप्ता उर्फ़ चंदन को गोली लग गई थी. घटना के बाद घायल चंदन को ज़िला अस्पताल ले जाया गया और यहां उनकी मौत हो गई.


चंदन की मौत के बाद इलाक़े में तनाव फ़ैल गया था और दुकानों के साथ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया था. तब 100 से ज़्यादा लोगों को गिरफ़्तार किया गया था और तीन दिन तक इंटरनेट बंद था.


28 जनवरी 2018 को घटना को लेकर इंडियन एक्सप्रेस ने एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी. रिपोर्ट के मुताबिक़, जहां हिंसा हुई वहां दोनों ही पक्षों के पास तिरंगा था और झगड़ा रास्ते को लेकर हुआ था.


रिपोर्ट की माने तो बद्दू नगर के स्थानीय मुसलमानों ने गणतंत्र दिवस के दिन तिरंगा फहराने की तैयारियां की थीं और कुर्सियां रखी थीं.


वहीं बाइकों पर निकल रही तिरंगा रैली में शामिल युवाओं ने कुर्सियां हटाकर रैली वहीं से निकालने के लिए कहा था.


घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चंदन गुप्ता के परिवार को मुआवज़े के तौर पर 20 लाख रुपये देने की घोषणा की थी.


कासगंज पहले एटा ज़िले में आता था लेकिन 2008 में बीएसपी की सरकार में इसे अलग ज़िला बना दिया गया।  उस वक़्त इसका नाम कांशीराम नगर कर दिया गया था, लेकिन 2012 में समाजवादी पार्टी की सरकार ने इस शहर का पुराना नाम वापस लौटा दिया।

*राज्य सरकार के वकील एमके सिंह ने मीडिया से बातचीत में बताया, "सभी दोषियों को धारा 302 की सज़ा मिली है। इसमें दो ही सज़ा हैं, या तो मौत की सज़ा है या आजीवन कारावास. आजीवन कारावास की सज़ा दी गई है।"


एनआईए कोर्ट ने कुल 28 अभियुक्तों को दोषी ठहराया।
इनके नाम हैं- सलीम, वसीम, नसीम, जाहिद, आशिक क़ुरैशी, असलम क़ुरैशी, अकरम, तौफ़ीक, खिल्लन, शादाब, राहत, सलमान, मोहसिन, आसिफ, शाकिब, बबलू, निशू, वासिफ, इमरान, शमशाद, जफ़र, साकिर, खालिद परवेज़, फैज़ान, इमरान क़य्यूम, शाकिर सिद्दीकी, मुनाज़िर और आमिर।

सलीम, वसीम, नसीम, मोहसिन, राहत, बबलू और सलमान को शस्त्र अधिनियम के तहत भी दोषी करार दिया गया है क्योंकि चार्ज़शीट के मुताबिक़, घटना के दौरान ये लोग हथियार लेकर गए थे।

दो अभियुक्तों नसीरुद्दीन और असीम क़ुरैशी को बरी कर दिया गया है. दोनों को सबूतों के अभाव में बरी किया गया है। इनके अलावा अजीजुद्दीन नामक अभियुक्त की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी। एमके सिंह का कहना है कि बरी हुए लोगों पर हम लोग जजमेंट की कॉपी मिलने के बाद फ़ैसला करेंगे।


*सरकार के वकील एमके सिंह और एल के दीक्षित की अगुवाई में अभियोजन पक्ष ने 18 गवाह पेश किए, जबकि बचाव पक्ष ने 23 गवाह पेश किए थे।
* मृतक चंदन गुप्ता के परिवार के लिए सरकार की ओर से की गई सभी सहायता घोषणा पूरी नहीं हुई हैं। चंदन चौक बनाने की घोषणा भी थी,जिसका निर्माण भी नहीं हो पाया है।०0०









सूरतगढ़:अतिक्रमण तोड़ने को मौका मजिस्ट्रेट और पुलिस मांगी.

 

सूरतगढ़ 5 जनवरी 2025.

नगरपालिका प्रशासन ने अतिक्रमण तोड़ने के लिए उपखंड अधिकारी से मौका मजिस्ट्रेट नियुक्त करने और पुलिस जाब्ते की मांग की है। सीएमओ में अतिक्रमण तोड़ने की एक शिकायत काफी समय से पड़ी है जिसकी पालना नगरपालिका प्रशासन को करनी है। नगरपालिका ने कुछ दिन पूर्व अतिक्रमियों को अतिक्रमण हटाने की चेतावनी भी लाऊडस्पीकर के माध्यम से घोषणा कर दी थी लेकिन किसी ने अतिक्रमण नहीं हटाया बल्कि कुछ अतिक्रमण नये हो गये। अतिक्रमण सड़कों तक करने वालों ने दूसरों को दुर्घटना के खतरे में डाला है और बची हुई सड़क पर अवैध गतिरोधक और बना लिए हैं।

मौका मजिस्ट्रेट नियुक्त और पुलिस जाब्ते की व्यवस्था होते ही चिन्हित अतिक्रमण हटा दिए जाएंगे। अतिक्रमण में बड़े लोगों ने स्कूल, बगीचे, झूले, वाहन पार्किंग, ब्युटी पार्लर आदि संचालित कर रखे हैं।०0०







शुक्रवार, 3 जनवरी 2025

विधायक डुंगरराम गेदर का एक्शन गैस प्लांट बाहर हो.

 





* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 3 जनवरी 2024.

नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता, – बायो एनर्जी गैस प्लांट निर्माण कार्य की जांच व आबादी क्षेत्र से बाहर करने की मांग

विधायक डुंगर राम गेदर ने नगरपालिका क्षेत्र सूरतगढ़ के आबादी क्षेत्र में निर्माणाधीन बायो एनर्जी गैस प्लांट के संबंध में गहरी चिंता व्यक्त की है।

 विधायक ने आयुक्त, औद्योगिक, वाणिज्य एवं सीएसआर विभाग जयपुर से मिलकर पत्र प्रस्तुत किया कि प्लांट के निर्माण कार्य को तुरंत रोका जाए और जांच कराई जावे।

विधायक गेदर ने कहा कि उक्त प्लांट का निर्माण आबादी क्षेत्र में किया जा रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिना उचित अनुमति और पर्यावरणीय जांच के इस तरह के निर्माण से गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। विधायक ने संबंधित अधिकारियों से कहा कि इस प्लांट के लिए जारी किए गए जो भी अनुमति पत्र हैं उनकी जांच कर उचित कार्रवाई सुनिश्चित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम जनता की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और इस मुद्दे को सुलझाने के लिए वे हर संभव कदम उठाएंगे।

विधायक गेदर ने इससे पूर्व जिलाकलेक्टर को भी पत्र लिखा था। 



यह मामला मीडिया में उठ चुका है। राजस्थान के मुख्यमंत्री को भी शिकायत हुई है। 

नगरपालिका ईओ की ओर से स्वीकृति पत्र पेश करने और काम बंद करने का निर्माता को अंतिम नोटिस दिया जा चुका है। 

👍 निर्माता द्वारा कार्य बंद नहीं किये जाने पर सीज करने और बिजली पानी कनेक्शन कटवाने की मांग उठी है।०0०

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गुरुवार, 2 जनवरी 2025

1984 भोपाल गैस कांड 2024 में खतरनाक कचरा हटाया. हजारों मरे थे.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 2 जनवरी 2025.

कोई भी गैस प्लांट सूरतगढ़ आबादी में बिना स्वीकृति के बनाया जा रहा हो और प्रशासन के बंद करने के कागजी आदेश पर भी कार्य बंद नहीं करे तो नागरिकों को अपने भविष्य के बारे में केवल नेताओं और अपने कालोनियों के नेताओं पदाधिकारियों के कागजी पत्रों और आलसीपन पर भरोसा नहीं करके सामूहिकता से फैसला करें। एक दिन का भी इंतजार क्यों हो। यहां मई 2024 में पहली रिपोर्ट प्रकाशित हुई और सही रूप में प्रशासन अभी तक नहीं जागा। कारण जब लोग ही नहीं जागे तब प्रशासन अधिकारी तो एक दो साल के लिए ही आते हैं।

* कोई भी प्लांट बिना स्वीकृति के अवैध बन रहा है तो उसके सीज ( जब्ती) और सील मोहर,नोटिस चिपकाने के अलावा पानी और बिजली के कनेक्शन तुरंत कटवाने की मांग से ही कुछ हो सकता है। इसकी विडिओग्राफी भी साथ में हो। प्रशासन द्वारा निर्माण कर रहे सभी कर्मचारियों को प्लांट क्षेत्र से बाहर निकाला जाए। इसके अलावा कोई समाधान नहीं है। कं चाहे कोई भी सुरक्षा की गारंटी देने की कोशिश करे। आबादी से हटाया जाना ही जरूरी है।

क्या प्रशासन का अधिकारी मौके पर पहुंचा और रिपोर्ट तैयार की? अभी पूरे शहर सूरतगढ़ को जागना जरूरी है।नजदीकी कालोनियां वाले तो घटना होने पर चपेट में आएंगे लेकिन शहर भी सुरक्षित नहीं रह सकता। 

👌 मध्यप्रदेश का भोपाल गैस कांड 3 दिसंबर 1984 को हुआ था जिसका जहरीला कचरा 337 टन ( 1 टन में 1000 कुंटल) 40 साल बाद 30 दिसंबर 2024 को हटाया गया है। यह जहरीला कचरा भी हाईकोर्ट के आदेश से हटाया  गया है। 12 कंटेनरों में हवा रहित बैगों में भरा गया। 30 दिसंबर को यह पैकिंग शुरू हुई जो 31दिसंबर 2024 को यह कार्य पूरा हुआ। 100 मजदूरों को पीपीई किट पहनाई गई और हर आधे घंटे बाद मजदूर बदले गये। उनका स्वास्थ्य परीक्षण भी बाद में कराया गया। भोपाल से 250 किलोमीटर दूर पीथमपुर इंडस्ट्रियल वेस्ट मैनेजमेंट राम की कं तक कचरे को पहुंचाया गया। इसके लिए वहां एक सुरक्षित क्षेत्र बनाया गया। कचरे को जलाने से पहले भी एक बार जांच होगी।

👌 उच्च न्यायालय में यह रिपोर्ट 3 जनवरी 2025 को प्रस्तुत की जाने की तारीख तय की हुई है। उच्च न्यायालय में 6 जनवरी 2025 को सरकार पेश होगी। 

भोपाल गैस कांड में हजारों लोग तो तुरंत ही मारे गए थे। आरोप था कि 15000 से 20000 मारे गये। सरकारी तौर पर ही मरने वालों की संख्या 5800 मानी गई। घायलों और बीमार लोग सालों तक पीड़ा भोगते रहे थे।०0०

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बुधवार, 1 जनवरी 2025

बदली 8-10 महीनों में हो जाए तो न्यायालय में जाना उचित.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

राजस्थान सरकार ने 1 जनवरी से 10 जनवरी 2025 तक स्थानांतरण पर से रोक हटाई है और यह आदेश स्थानीय नगर निकायों के अधिकारियों कर्मचारियों पर भी लागू है। इसमें कोई अधिकारी कर्मचारी की बदली  8-10 माह पहले ही हुई हो और अब फिर हो जाए तो उक्त  आदेश पर स्थगन के लिए उच्च न्यायालय में जाना उचित है।

* अधिकारियों कर्मचारियों जिन पर कोई आरोप हो मामले चल रहे हों तब भी स्टे लेकर उसी स्थान पर रहना चाहिए और वहीं पर रहते हुए क्लीन चिट लेनी महत्वपूर्ण होती है। साधारणतः ऐसी स्थिति में बदली होने पर अधिकारी कर्मचारी तुरंत ही पदभार मुक्त होकर निकल जाते हैं। उनकी सोच होती है कि जगह छोड़ने के बाद में कोई भी पीछा नहीं करता। ऐसा ही होता भी है लेकिन ऐसे मामलों में आदेशों पर स्थगन मिलते रहे हैं।०0०

1 जनवरी 2025.

करणीदानसिंह राजपूत

पत्रकारिता 61 वर्ष

सूरतगढ़ ( राजस्थान)

94143 81356.

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भाजपा में आए कांग्रेसियों का धीमी गति से खात्मा.2025 में कुछ करेंगे?

  

* करणीदानसिंह राजपूत *

विधानसभा चुनाव और लोकसभा चुनाव के वक्त कांग्रेस और अन्य दलों से आए नेता और कार्यकर्ता धीमी गति से खत्म किए जा रहे हैं। इसे धीमी गति से मारना कह सकते हैं। 

* अनेक भविष्य में पाने के लिए तो कुछ अनेक भय के कारण भाजपा में घुसे। भाजपा ने अपनी कूटनीति से आने वालों को मालाएं पहनाई और कमल छपे भाजपा के पटकों से सजा कर फोटो विडिओ करवाए। भाजपा में घुसे नेताओं कार्यकर्ताओं ने इनको सोशल मीडिया पर डाला और ऐसा दिखाया मानों बहुत खुश हैं। भाजपा में आने वालों के मुख से यह भी कहलवाया कि वे माननीय नरेन्द्र मोदी जी की नीतियों से प्रभावित होकर भाजपा में आए हैं।

* लेकिन सच्च तो यह है कि आने वाले भाजपा की नीति का कखग भी नहीं जानते। भाजपा मारने के लिए विष नहीं देती। भाजपा कूटनीति से जड़मूल ही सूखा खर खत्म कर देती है कि फिर वह जिंदा ही नहीं हो पाता।

* भाजपा अपने कार्यक्रमों में ही नहीं बुलाती। निमंत्रण सूची में नाम ही नहीं होता। नाम होता है तो भी संदेश नहीं देती। कोई सूचना कहीं से मिल जाए और उस पर बिन बुलाए पहुंच जाए तो मंच नहीं बोलने का मौका नहीं। श्रोताओं में बैठें सुनें और लौट जाएं। 

* अब भाजपा संगठन के चुनाव की प्रक्रिया चल रही है। भाजपा में आए नेताओं को कांग्रेसियों को बुलाया हो राय ली हो,ऐसा लग नहीं रहा। ऐसे में संगठन में कोई पद दिया जाने की तो उम्मीद ही नहीं होती।

* मोदीजी ने कांग्रेस मुक्त भारत की घोषणा की थी तो सोच समझ कर ही की थी। किन किन तरीकों से कांग्रेसियों का खात्मा करना है और वह कूटनीति चल रही है। राजनीति में छल कपट सब सही होता है। सो हो रहा है।

* अब जिन कांग्रेसियों में कुछ जान है दिल कुछ धड़क रहे हैं और बुद्धि दिमाग काम कर रहा है वे 2025 में कुछ कर पाएंगे? या फिर धीमी गति से खत्म होते रहेंगे।०0०

1 जनवरी 2025.

करणीदानसिंह राजपूत

पत्रकारिता 61 वर्ष.

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356

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इंडिया का नाम हिंदुस्तान तो कराओ.हिंदूराष्ट्र व हिंदू संवत् का हल्ला

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

हर साल 1 जनवरी को और पहले से सोशल साइट्स के ग्रुपों में हल्ला होने लगता है कि यह हमारा नहीं है इसलिए इसको न मनाएं हमारा तो चैत्र मास में आता है। ऐसे ही हिंदू राष्ट्र घोषित करने का हल्ला भी मचता रहता है। इसका प्रश्न यह है कि यह कार्य कौन कर सकता है? क्या हम तुम या सोशल मीडिया पर लिखने वाले कर सकते हैं? हर किसी का उत्तर होगा कि यह कार्य केवल भारत सरकार ही कर सकती है। तो फिर इन कार्यों के लिए केंद्र की भारतीय जनता पार्टी की सरकार करे जिसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। प्रधानमंत्री मोदी अपने हैं। मतलब जो लिखते हैं और लिखवाते हैं और वकालत करते हैं वे मोदीजी की वकालत भी करते हैं कि मोदी है तो सब मुमकिन है। इन कार्यों और घोषणाओं के लिए हल्ला मचाने के बजाए मोदीजी को ही कहा जाना चाहिए। केंद्र सरकार में भाजपा बहुमत की गठबंधन सरकार है। सभी प्रस्ताव पारित हो सकने में कोई परेशानी नहीं। मोदीजी अपने मन से बड़े बड़े निर्णय करते हैं तो वे ये भी कर सकते हैं। आखिर मोदी जी तीसरी बार प्रधानमंत्री बन कर पावर में होते हुए हिंदू राष्ट्र घोषित कर क्यों नहीं रहे? यह प्रस्ताव सरकार की ओर से लोकसभा में क्यों नहीं रखा जाता?

* हल्ला मचाना और करने में दिनरात का अंतर है। मेरी तो यह चुनौती है कि हिंदू राष्ट्र घोषित कराने से पहले इंडिया का नामकरण ही 'हिंदुस्तान' करवालो। इंडिया अंग्रेजों का दिया हुआ नाम है और हमारे सभी कानून इंग्लिश में हैं जिनका हिंदी अनुवाद भी मान्य नहीं होता। मोदीजी की पावर है बहुमत की सरकार है इसलिए यह नामकरण तो सबसे पहले हो कि 'आज से इस देश का नाम हिंदुस्तान है और आज से सभी देश विदेश में इसे हिंदुस्तान ही बोला और लिखा जाएगा।

* मोदीजी कर पाएंगे या नहीं लेकिन मुझे यह शंका है बल्कि मानता भी हूं कि इंडिया को हिंदुस्तान नामकरण के लिए पत्र नहीं लिखोगे। 1 जनवरी 2025.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकारिता 61 वां वर्ष,

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

91 94143 81356.

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