रविवार, 10 अप्रैल 2022

💐सूरतगढ़ में गूंजा जय श्री राम:शानदार शोभा यात्रा*पुष्प वर्षा से जानदार स्वागत.








* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 9 अप्रैल 2022.

 रामनवमी पर भगवा पताकाओं से सजे सजाए शहर में शनिवार शाम को शोभा यात्रा में हजारों हिंदुओं ने भाग लिया। युवतियां महिलाएं भी हिंदुत्व जागरण में केसरिया ध्वज लहराते शामिल हुई। आम जन का मानना है कि वर्षों से शोभायात्रा निकाली जा रही है और शानदार रही हैं लेकिन इस बार लोगों की संख्या अधिक थी। ग्रामीण क्षेत्रों से भी लोग अपने वाहनों से पहुंचे और शामिल हुए। जहाँ जहाँ से शोभायात्रा गुजरी वहां वहां सड़कों और छतों पर उपस्थित लोगों ने पुष्प बरसाए। राम के जयकारे और गीत भी जोश एवं उत्साह को आकाश पहुंचा रहे थे।रामनवमी के एक दिन पूर्व निकाली जाती है शोभायात्रा ०0०

शनिवार, 9 अप्रैल 2022

राम से बड़ा कौन! राम से बड़ा राम का नाम!! लेख- करणी दान सिंह राजपूत*

 

राम! 
घट घट व्यापी राम!
भारत में ही नहीं दुनिया भर में श्रद्धालु अपने मन मस्तिष्क में समाए हुए राम नाम का जाप करते हैं।
घट घट व्यापी राम से भी बड़ा कौन है!
राम संसार में शारीरक रूप में नहीं वेअमरत्व प्राप्त कर चुके हैं मगर स्मरण करने पर प्रगट हो जाते हैं।
कहते हैं कि कण-कण में राम व्याप्त हैं।
ऐसे राम जो कण में व्याप्त हैं, उन से भी बड़ा है उनका नाम। राम का नाम।
यह क्यों कहते हैं राम से बड़ा है राम का नाम।
संसार में केवल रामनवमी पर ही राम की पूजा अर्चना नहीं होती बल्कि हर दिन राम का पूजन अर्चन चलता रहता है।
बस यही वह प्रमाण है कि राम से बड़ा राम का नाम है।
ऋषि मुनियों संतों श्रद्धालुओं का यह मानना है कि राम का नाम राम से भी बड़ा है। मानव के रग रग में रोम रोम में राम का नाम व्याप्त है।
ऐसा माना जाता है कि ऋषि मुनि आदि के मन और मस्तिष्क में राम का नाम समाया हुआ है, उन्हें धरती की समीरा में राम उच्चारित होता हुआ सुनाई पड़ता है। राम की गूंज रहती है। यही वह राम नाम की शक्ति है जो स्वयं राम से भी बड़ी है। कहते हैं कि राम का नाम लेने से भवसागर तर जाता है मानव।
राम के नाम में सत है। सत मन शक्ति। जिससे यह संसार सजीव है।
रामनवमी 10 अप्रैल 2022.
सामयिक लेख-
करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार ( राजस्थान सरकार के
सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से
अधिस्वीकृत)
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
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शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

सूरतगढ़ में कांग्रेस पार्टी की कब्र कौन खोद रहा है? 2023 का चुनाव होगा आफत का चुनाव.

 



* करणी दान सिंह राजपूत *


राजस्थान विधानसभा के अगले चुनाव नवंबर दिसंबर 2023 में होंगे। इससे पहले गंभीरता से सूरतगढ़ विधानसभा सीट पर नजर डालें तो कांग्रेस पार्टी एक बार फिर जीत से बहुत दूर खड़ी नजर आती है। कांग्रेस पार्टी की कब्र कौन खोद रहा है?

कांग्रेस पार्टी पिछले दो चुनाव हार कर 10 साल सत्ता से पीछे चली गई।

2013 राजेंद्र सिंह भादू ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस के गंगाजल मील को पराजित कर दिया। गंगाजल मील उस समय पिछले सत्र में विजयी रहे और 2008 से 2013 तक विधायक रहे,फिर भी भादू  के हाथों पराजय हो गई।  कांग्रेस पार्टी के नेता और कर्ता-धर्ता 2013 की हार से सबक नहीं ले पाए। यहां पर कांग्रेश पार्टी पर मील का ही दबदबा रहा लेकिन वे स्थिति को सुधार नहीं पाए व जनता को अपने पक्ष में खड़ा नहीं कर पाए और उसका नतीजा भी अच्छा नहीं रहा 2018 के चुनाव में गंगाजल मील साहब का भतीजा हनुमान मील भारतीय जनता पार्टी के रामप्रताप कासनिया से पराजित हुआ।

 किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक ही सीट पर दो बार और वह भी एक ही परिवार के लोगों का पराजित हो जाना बहुत बड़ी बात होती है।


अब 2023 के चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं माना जाना चाहिए। सन  2022 के बचे हुए 8 महीनों में कांग्रेस पार्टी सूरतगढ़ में क्या कुछ कर सकती है? यह महत्वपूर्ण सवाल सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में राजनीति में कुछ न कुछ रुचि रखने वाले के दिमाग में गुदगुदा रहा है।

प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का राज है।अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं। सूरतगढ़ पर मुख्यमंत्री सहित किसी भी मंत्री का और कांग्रेस संगठन का ध्यान ही नहीं है।

सूरतगढ़ में नगर पालिका बोर्ड कांग्रेस पार्टी का है अध्यक्ष ओम प्रकाश कालवा है। पंचायत समिति सूरतगढ़ के पर कांग्रेस पार्टी का ही कब्जा है। प्रधान पद पर गंगाजल मील के सगे भाई हजारी मील बैठे हैं।

ऊपरी तौर पर देखा जाए तो यहां पर लगता है कि कांग्रेस के हाथ  पांव मजबूत है लेकिन असल में ऐसा है नहीं। कांग्रेस के नेता दावा नहीं कर सकते कि अगला चुनाव 2023 का चुनाव वह हर हालत में जीत लेंगे। इसका कारण सूरतगढ़ शहर में राजनीति करने वालों से गंभीरता से पूछा जाए तो उत्तर भी मिल जाता

 है। आम जनता से भी उत्तर मिलता है। सूरतगढ़ की जनता आखिर कांग्रेस से परेशान क्यों हो रही है? साधारण भाषा में सवाल किया जाए कि तो ये शब्द निकलते हैं कि सूरतगढ़ में आखिर कांग्रेस की कब्र कौन खोद रहा है?  सीधा सा सवाल है जिसका उत्तर भी सीधा सादा सा है। आम जनता को मालूम है। 

तो फिर कांग्रेस के दिग्गजों को या जो समझते हैं कि कांग्रेस की बागडोर सूरतगढ़ में उनके हाथों में है उनको भी मालूम होगा कि सूरतगढ़ में कांग्रेस की कब्र कौन खोद रहा है? 

सूरतगढ़ शहर में 50 हजार से अधिक वोट हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि वोटों की बहुत बड़ी गठरी सूरतगढ़ में है और इस गठरी में कांग्रेस का प्रभाव कम क्यों होता जा रहा है?

सूरतगढ़ में कांग्रेस की कब्र कौन खोद रहा है जिससे कांग्रेसी आगे 5 साल फिर सत्ता से वंचित रह जाने की संभावना है।


 कांग्रेस के दिग्गज अगर जानबूझकर कानों में रुई डाले हुए हैं जनता को सुन नहीं रहे हैं। आंखों पर पट्टी बांधे हुए  देख नहीं रहे हैं तो आश्चर्यजनक है। देखने और सुनने के बाद मुंह से बोलना होता है या निर्णय लेने होते हैं या ऊपर से करवाने होते हैं। सूरतगढ़ में अप्रिय स्थिति है और  कुछ करना है तो फिर समय बर्बाद क्यों किया जा रहा है? कांग्रेस को हां जी हां जी चाहिए या सूरतगढ़ सीट चाहिए। सूरतगढ़ शहर की कुर्सी से ऊर्जा धनात्मक मिल रही है या ऋणात्मक मिल रही है? धनात्मक ऊर्जा के लिए क्या हटाना है और क्या जोड़ना है? ये बदलाव कब करने हैं? सूरतगढ़ की सीट पर जो कांग्रेस टिकट से चुनाव लड़ेगा वह इन आफतों से कैसे निकलेगा? जो सूरतगढ़ से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं,उनके लिए भी यह सवाल खड़ा है कि सूरतगढ़ में काग्रेस की कब्र कौन खोद रहा है? वे इच्छुक इस स्थिति को जल्दी ही बदल सकते हैं या नहीं।

यह कांग्रेस को तय करना है कि हालात बहुत ज्यादा बिगड़ जाए फिर सुधारे नहीं सुधरे वैसी स्थिति लाना चाहते हैं तो अलग बात है। ०0०

दि. 8 अप्रैल 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ़।

94143 81356.

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हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट का आम आदमी पार्टी में विलय:

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

पंजाब में आम आदमी पार्टी की शानदार जीत और सरकार बनने के बाद इस पार्टी का रुतबा पंजाब के बाद हरियाणा और हिमाचल में बढने लगा है।

आज गुरुवार 7 अप्रैल 2022 को हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट का आप पार्टी में विलय हो गया। इसके साथ ही हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट सुप्रीमो और पूर्व मंत्री निर्मल सिंह और उनकी बेटी चित्रा सरवारा ने आप पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। इन दोनों को आप के मुखिया अरविंद केजरीवाल ने आप पार्टी का दुपट्टा पहनाकर पार्टी की सदस्यता 

ग्रहण करवाई।


आप पार्टी में पूर्व मंत्री निर्मल सिंह और उनकी बेटी चित्रा सरवारा के शामिल होने पर सीएम केजरीवाल ने इनका स्वागत किया।

सीएम केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा- चित्रा जी, निर्मल जी एवं हरियाणा डेमोक्रेटिक फ्रंट के सभी कार्यकर्ताओं का आम आदमी पार्टी परिवार में स्वागत है। हरियाणा और देश की तरक्की के लिए हम सब मिलकर मेहनत करेंगे। उनके इस ट्वीट पर चित्रा ने लिखा- आपके समर्थन और विश्वास के लिए हार्दिक धन्यवाद।अरविंद केजरीवाल जी. ये भरोसा और जिम्मेवारी हम पूरी निष्ठा से निभाएंगे।०0०

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बुधवार, 6 अप्रैल 2022

पंजाब के जीत के बाद हिमाचल में आप का शानदार रोड शौ:सभी 68 सीटों पर लड़ेंगे

 




* करणीदानसिंह राजपूत *

दि. 6 अप्रैल 2022.

पंजाब में बड़ी जीत और राज प्राप्त करने के बाद आम आदमी पार्टी ने अब हिमाचल प्रदेश में प्रवेश के लिए डंका बजा दिया है। हिमाचल की सभी 68 सीटों पर आम आदमी पार्टी ने प्रत्याशी उतारने की घोषणा कर दी है।


* राज्य के मंडी जिले में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रोड शो किया। 

 अरविंद केजरीवाल ने पहाड़ी राज्य के लोगों से  कहा कि आपने 30 साल कांग्रेस को और 17 साल भाजपा को भी मौका देकर देख लिया। अब आम आदमी पार्टी को 5 साल के लिए मौका दे दीजिए, हम दिखा देंगे कि वास्तव में विकास क्या होता है। 

*अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'हम नहीं जानते कि राजनीति कैसे की जाती है। लेकिन हम यह जानते हैं कि कैसे स्कूल खोले जाते हैं और कैसे भ्रष्टाचार समाप्त किया जाता है।'

हिमाचल में नारे बैनर खूब लगे। हिमाचल में भ्रष्टाचार का होगा सफाया. देखो आया देखो आया झाड़ू वाला।


अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमने दिल्ली में विकास किया है और पंजाब को भी उसी रास्ते पर आगे ले जा रहे हैं।

केजरीवाल के रोड शौ में भारी भीड़ थी। लोगों का रुझान दिया। केजरीवाल भीड़ देख कर बहुत खुश हुए। हिमाचल में आप की तरफ लोगों का आकर्षण बढ रहा है। लोग सदस्य बन रहे हैं। पंजाब में आप के राज आने के बाद वहां तेजी से सदस्य बढ रहे हैं। हिमाचल में नवंबर में विधानसभा चुनाव होंगे। आम आदमी पार्टी गुजरात में भी चुनाव लड़ने की तैयारी में है।०0०


मंगलवार, 5 अप्रैल 2022

आपातकाल के लोकतंत्र सेनानियों को भूली भाजपा. मनाएगी स्थापना दिवस

 

👍 आपातकाल लोकतंत्र सेनानियों को भूल जाने वाली भारतीय जनता पार्टी 6 अप्रैल  2022 को अपना बैयालीसवां स्थापना दिवस मनाएगी।

*  यह कड़वा सच है कि 1980 में 6 अप्रैल को स्थापित इस पार्टी में एक भी सत्ताधारी और संगठन पदाधिकारी ऐसा नहीं है जो लोकतंत्र सेनानियों की आवाज बन सके।

* अपने बुजुर्गों को साथ लेकर चलने के बजाय सम्मान देने के बजाय उनको तिरस्कार करते रहने की घटनाएं होती रही है। सारा देश देखता भी रहा है। बुजुर्गों का आपातकाल लोकतंत्र सेनानियों का तिरस्कार स्थानीय स्तर से लेकर प्रधानमंत्री स्तर तक होता रहा है।


**आपातकाल लोकतंत्र सेनानियों की तरफ देखने का भी समय भाजपा नेताओं के पास नहीं है। सत्ता का बहुत बड़ा घमंड इसलिए है कि सामने प्रतिपक्ष शून्य जैसा है।

*आपातकाल के विरोधी, देश को बचाने वाले,संविधान को बचाने वाले,लोकतंत्र को बचाने और अपना सब कुछ खो देने वाले,जेलों में जाने वाले सेनानियों को सम्मानित करने की बात तक नहीं होती। 

*6 अप्रैल को जब देशभर में भारतीय जनता पार्टी अपना स्थापना दिवस मना रही होगी तब मंचों पर केवल भाजपा के सत्ताधारी नेता और संगठन के पदाधिकारी होंगे। मंचों पर आपातकाल लोकतंत्र सेनानी नहीं होंगे। भाजपा का ध्वज फहराने वालों में लोकतंत्र सेनानी आमंत्रित नहीं होंगे।

* यह कटु सत्य इसलिए लिख रहा हूं कि निरंतर ऐसा देख रहा हूं और हर स्थान पर लोकतंत्र सेनानी यह व्यवहार भोग रहे हैं। कोई पूछ नहीं है।

* भारतीय जनता पार्टी व्यवहार और संस्कार वाली पार्टी अपने आप को कहती है लेकिन अपने से बड़ों का सम्मान नहीं करना उनका आदर नहीं करना उनको याद नहीं करना यह कौन से संस्कारों में आता है। 

* बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद इसलिए लिया जाता है कि जीवन में सफलता मिलती रहे। पार्टी के नाम में भारतीय है लेकिन व्यवहार में भारतीयता नहीं है।


* आपातकाल लोकतंत्र सेनानियों की ओर से सम्मान की मांग प्रधानमंत्री नरेंद्र जी मोदी से की गई। गृहमंत्री वर्तमान अमित शाह से भी कीथ गई।भारतीय जनता पार्टी के वर्तमान अध्यक्ष जेपी नड्डा जी से भी की गई लेकिन एक भी कार्यालय से उत्तर प्राप्त नहीं हुआ।किसी एक नेता ने भी व्यक्तिगत रूप से भी पत्र का उत्तर नहीं दिया। यह है संस्कार नीति।

* आपातकाल के लोकतंत्र सेनानियों की उम्र 65- 70 साल से ऊपर 90 - 95 साल तक है। इन बुजुर्गों का हर कदम पर हर समारोह में सम्मान होना चाहिए लेकिन कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि भारतीय जनता पार्टी के स्थापना दिवस पर भी सेनानियों को याद नहीं किया गया है।


इसे बहुत बड़ी कमी या गलती माने और क्षमा मांग सुधारा जाना चाहिए। लेकिन जिस तरह का व्यवहार पिछले सालों से मैं देख रहा हूं मुझे लगता नहीं है कि भारतीय जनता पार्टी के अहंकारी नेता लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान करने के लिए आगे आएंगे और अपनी गलती सुधार लेंगे।

लोकतंत्र सेनानियों का भारत सरकार की ओर से सम्मान किया जाना चाहिए इसके लिए पार्टी में क्या दो चार भी ऐसे व्यक्ति नहीं है जो अपने पदों का मोह छोड़कर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री को स्पष्ट रूप से कहते हुए लोकतंत्र सेनानियों के साथ खड़े हो जाएं। 

अभी सत्ता मोह पद मोह है। ईश्वरीय विधान में कभी सत्ता नहीं रहेगी तब क्या होगा? 

भाजपा ऐतिहासिक गलती कर रही है। संघ लोकतंत्र सेनानियों को सम्मान देने में किसी भी प्रकार से मना कर रहा है तो वह भाजपा का भविष्य खराब कर रहा है। 

दि. 5 अप्रैल 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

आपातकाल जेलबंदी,

सूरतगढ़ ( राजस्थान)

94143 81356.

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सोमवार, 4 अप्रैल 2022

💐 मां का आंचल है हिंद की धरती - कविता- करणीदानसिंह राजपूत






💐 जीवन के रंग अनेक

सुख दुख संघर्ष परेशानियां

दुख परेशानियां नहीं बांटते 

दूसरों को और अपनों को भी नहीं

क्योंकि हम निर्दयी नहीं।


हम ये सब भोगते हैं अकेले

ढोते रहते है पहाड़ से क्रूर अनुभव।

यह सच्च है कि दुख परेशानियां

कोई दूसरा नहीं बांटता।

ये सामान भी नहीं हैं कि बांटे जा सकें।

लेकिन ये अनुभव होते हैं जो

अपने बांट लेते हैं हंसते हंसते

चाहे पहाड़ जैसे हों विशाल।

अपनों के आसपास की हवा भी

हर लेती है दुख दर्द परेशानियां।

क्यों होता है ऐसा चमत्कार

अपनों के आसपास फैला रहता है

हरेक का अपना अपना प्रभा मंडल

ये करते हैं एक दूसरे को स्पृश

हर लेते हैं दुख दर्द परेशानियों की मलीनता।

दुख दर्द परेशानियों पर सुख की चद्दर 

बदल देती है आनन्द में हर पल।


हम जब होते हैं अपने सब आमने सामने

एक दूजे के नजदीक सुन सकते हैं सांसों को

तब संघर्ष भी बदल जाता है आनन्द में 

बन जाता है खुशी का समंदर।

यह अहसास यह चमत्कार होता है सच्च में

हम सभी जानते हैं अनुभव करते हैं

मां का आंचल छुपा लेता है सभी कष्ट

वह होती है ईश्वर का साक्षात स्वरूप।

आओ,हम सब मां के आंचल में खो जाएं

सुनें मीठी लोरी उसकी गोदी में 

सुंदर सपनों में खो जाएं।

वह जननी पुकारती हिंद की धरती

स्वर्ग का आनंद मिलता इसमें

यही है मां का आंचल।

यही है जननी का आंचल।०0०


दि. 4 मार्च 2022.




करणीदानसिंह राजपूत,

सूरतगढ़. भारत.

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रविवार, 3 अप्रैल 2022

पूजा भारती छाबड़ा ने अरोड़ा समाज सूरतगढ़ से शराबबंदी में सहयोग मांगा

 


* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़। अप्रैल 2022.
राष्ट्रीय शराबबंदी आंदोलन की अध्यक्ष पूजा भारती छाबड़ा का सूरतगढ़ आगमन पर अरोड़ा समाज समिति की ओर से स्वागत किया गया।
पूजा भारती ने कहा कि स्वागत कार्यक्रम में अरोड़ा समाज के  वर्तमान अध्यक्ष व सभी पदाधिकारियों द्वारा किए गए सम्मान के लिए हमेशा आभारी रहूंगी।
उपस्थित अरोड़ा समाज से राजस्थान को नशा मुक्त व निरोगी राजस्थान मुक्त बनाने के लिए सहयोग की अपील की।
पूजा भारती छाबड़ा स्व.गुरुशरण छाबड़ा की बड़ी पुत्र वधु हैं। गुरुशरण छाबडा सूरतगढ़ से सन 1977 में जनता पार्टी से विधायक निर्वाचित हुए थे। यह विधानसभा करीब ढाई साल ही चल पाई थी।
छाबड़ा जी ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और लोकपाल की मांग को लेकर जयपुर मेंआमरण अनशन करते हुए 3 नवंबर 2016 को  देह त्यागी।
उनके इस अभियान को पूजा भारती टीम चला रही है। 







राज्य सरकार ने सूरतगढ़ में राजकीय महाविद्यालय और पुरानी आबादी मा.विद्यालय का नाम गुरूशरण छाबड़ा के नाम पर कर दिया।
स्व.गुरूशरण छाबड़ा की आदमकद प्रतिमा राजकीय चिकित्सालय के आगे लगी हुई है। जहां उनकी जयंती और पुण्य तिथि पर कार्यक्रम आयोजित होते हैं।०0०

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नगरपालिका सूरतगढ़ बदबू मार रही मगर नेताओं के नाक बीमार हैं और नीतियों में खोट

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

नगर पालिका सूरतगढ़ के भ्रष्टाचार की बदबू आम नागरिकों को महसूस हो रही है लेकिन राजनैतिक पार्टियों के नेताओं को बदबू आती नहीं। उनका नाक खराब है या नीति में खोट समाई हुई है कि वह जनता के साथ खड़ा नहीं होना चाहते और भ्रष्टाचार के विरुद्ध सीधी लड़ाई नहीं लड़ना चाहते।

भारतीय जनता पार्टी के नेता विधायक रामप्रताप कासनिया कहते हैं कि प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का राज है उनकी चलती नहीं।नगर पालिका मैं कांग्रेसका बोर्ड है अध्यक्ष ओम प्रकाश कालवा कहते हैं कि बजट नहीं है पैसा नहीं है। काम करें तो कैसे करें? सफाई के लिए पूरा स्टाफ है फिर सफाई क्यों नहीं होती?सड़कों के गड्ढे भरे जाने वाला मामूली काम जितना भी पैसा नहीं है? यदि ऐसी स्थिति है तो फिर कुर्सियों पर क्यों बैठै हो? कालवा को जो हालात या व्यवस्था मिली थी वह ठीक नहीं हुई और बुरी हो गई। 

दोनों की नीतियां ईमानदारी से दूर है।

 भारतीय जनता पार्टी को लगता है कि जनता जितना ज्यादा परेशान होगी उतना ही कांग्रेस से दूर होगी तथा भारतीय जनता पार्टी के अलावा वोट देने का कोई दूसरा विकल्प उनके पास नहीं होगा।मजबूर होकर भारतीय जनता पार्टी को ही विधानसभा चुनाव में वोट देना होगा। यह सोच बेईमानी से भरी हुई है। जनता के लिए कुछ भी नहीं किया जाए पीड़ित जनता के साथ खड़ा नहीं हुआ जाए कांग्रेस के भरोसे जनता को छोड़ ठोकरें झटके सड़ांध में बीमार होने के लिए छोड़ दिया जाए। यह शुद्ध सोच नहीं है। यह कपट और बेईमानी वाली सोच है। जनता जब भयानक कष्टों में हो तो उसके साथ खड़ा होना पड़ता है तभी सच्ची हमदर्दी महसूस होती है।लेकिन सूरतगढ़ में विधायक रामप्रताप कासनिया हमदर्द नजर नहीं आते।पूर्व विधायकों राजेंद्र भादू और अशोक नागपाल भी जनता के नजदीक नहीं हैं।

भारतीय जनता पार्टी के नगर मंडल देहात मंडल मोर्चा के नेता भी जनता से बहुत दूरी पर खड़े हैं।क्या यह दूरी आने वाले कुछ महीनों में चुनाव से पहले भर जाएगी यह दूरी मिट जाएगी। भारतीय जनता पार्टी जनता की ओर बढ़ेगी या फिर पीड़ित जनता भारतीय जनता पार्टी की और बढ़ेगी। असमंजस की स्थिति है।


फिलहाल भाजपा माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के चेहरे पर ही लीपापोती करके वोट मांगने की इच्छुक है। नरेंद्र जी मोदी जी के राज में महंगाई आसमान छू रही है बल्कि कहना चाहिए कि आसमान में छेद कर चुकी है।मोदी जी की ओर से महंगाई को रोकने का कोई भी प्रयास किया हुआ नजर नहीं आ रहा। जनता बुरी तरह से पीड़ित है। आवाज यह भी उठ रही है कि भाजपा को भी सबक सिखाया जाए। 


वर्तमान में नरेंद्र जी मोदी का एक वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर जोर शोर से चल रहा है जिसमें मोदी जी कांग्रेस पर छींटाकशी कर रहे हैं बढ़ती महंगाई पर गैस सिलेंडर पेट्रोलियम पदार्थों परजनता से पूछ रहे हैं कि भाइयों बताएं महंगाई बढ़ रही है कि नहीं बढ़ रही है।यह वीडियो 2013 का है। 2014 के चुनाव से ठीक पहले का है। किसी तरह से राज प्राप्त करने के लिए जो प्रयास हुए उसका है।

 अब 2022 में मोदी जी नहीं बोल रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी भी नहीं बोल रही है। भारतीय जनता पार्टी का कोई कार्यकर्ता भी नहीं बोल रहा है। रसोई गैस घरेलू सिलेंडर रिफिल हाल ही में ₹982 का हो गया। बहुत कष्टकारी स्थिति है। पेट्रोल डीजल ₹100 प्रति लीटर से अधिक पर खरीदने को मजबूर है।


2014 से अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का राज है। मोदी जी ने जो कुछ कहा उस पर क्या वे खरे उतरे हैं? जवाब मिलेगा कि नहीं नहीं नहीं ।महंगाई पर नियंत्रण रखने के तरीके खोजना और उन्हें  लागू करना भारत सरकार का कर्तव्य तो बनता है।

लेकिन भारतीय जनता पार्टी की भारत सरकार ने इस पर कुछ भी नहीं किया।


हम सूरतगढ़ की बात कर रहे हैं देश में बढ़ रही महंगाई  का असर सूरतगढ़ में भी हो रहा है। सूरतगढ़ में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता ऊपर से कोई कार्यक्रम आता  है तो उस पर बैनर और झंडे लेकर घंटे 2 घंटे का प्रदर्शन जरूर कर लेते हैं लेकिन नगर पालिका और राजस्व विभाग के ऊपर कभी सीधे लड़ाई नहीं करते। कहीं ना कहीं नेताओं का व्यक्तिगत हित प्रभावित होता है इसलिए नेता और उसके साथ जुड़े हुए 10-20 लोग चुपचाप घरों में पड़े रहना उचित समझते हैं। ये सभी भ्रष्टाचार होता हुआ देखते रहते हैं। सूरतगढ़ में हर एक परेशानी पर समीक्षा की जाए तो भारतीय जनता पार्टी शून्य नजर आती है।


 विधायक रामप्रताप कासनिया के अलावा दो पूर्व विधायक भी हैं राजेंद्र सिंह भादू और अशोक नागपाल यह अपना रिपोर्ट कार्ड तीनों जनता के सामने पेश करें तो स्थिति एकदम साफ हो जाएगी।इन तीनों नेताओं की जनता के प्रति कितनी जवाबदेही है और उसके अनुसार इन्होंने क्या कार्य किया है? 

अब चुनाव का समय करीब डेढ़ साल बचा है।तब अशोक नागपाल अपने घर से बाहर निकलने लगे हैं। वह भी जनता की परेशानियों में नहीं जहां धूम धड़ाका हो तप्पड़ किसी और का बिछा हुआ हो लाउडस्पीकर व्यवस्था किसी और की हो तो वहां पर घंटे दो घंटे बैठना और भाषण देना। धरना प्रदर्शन आदि में शामिलहोना।नागपाल जी बहुत वर्षों से केवल शक्ल दिखाने वाली जगह पहुंचते हैं और सोशल मीडिया पर जयंती पर बधाई और पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के अलावा कहीं कोई काम करने के इच्छुक नहीं रहे। यह जो घर से बाहर निकलना शुरू हुआ है वह अभी चुनाव की  नज़दीकियां देखते हुए शुरू किया गया है। लेकिन कहीं कांग्रेसियों से भ्रष्टाचारी प्रशासन से सीधी टक्कर वाली बात नहीं है। 

राजेंद्र सिंह भादू  कुछ प्रकरणों में आवाज उठाते हुए दिखाई पड़ते हैं मगर वह भी 2- 4 प्रतिशत ही कार्य कर रहे हैं। 

 रामप्रताप कासनिया के पास सरकारी फंड भी देने को है और भरपूर दिया भी है लेकिन उसका प्रचार करने का लोगों को बताने का कार्य करने वाला कोई नहीं है।

अभी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया इलाके में आए थे। पन्ना कार्यक्रम का शुभारंभ करने मतलब वोटर लिस्ट का एक पन्ना और उसका एक एक कार्यकर्ता जिसकी जिम्मेवारी होगी वोट डलवाने की। इससे पहले एक बूथ और दस यूथ का नारा खूब चला था लेकिन असल में वोट के समय मालूम हुआ कि यह योजना कार्यक्रम पूरी तरह से फेल हुआ। वोट तो डलवाए गए लेकिन बूथ के अंदर और बाहर जिनको बिठाया गया वे सच्चे दिल से बहुत कम थे। 


अभी भी यह स्थिति है कि भाजपा के साथ स्वागत अभियान में तो तयशुदा कार्यकर्ता दिखाई देते हैं लेकिन अभियान के अलावा कोई भाजपा के साथ खड़ा हुआ नहीं मिलता। नेताओं के पास में अपने-अपने काम है तो कार्यकर्ता व जनता के पास भी अपने-अपने काम है।

जब 2018 का चुनाव हुआ तब यह बात कही गई थी कि काम पड़े तो आधी रात को भी आओगे तो काम करेंगे। अब आधी रात और हर वक्त की छोड़ो दिन में भी काम नहीं करते।


बात वही सीधी टक्कर की है।भारतीय जनता पार्टी का एक भी नेता और कार्यकर्ता यहां कांग्रेस से सीधी टक्कर में खड़ा नहीं होना चाहता। यह स्थिति उन हालातों में है जब कांग्रेस के पास में मजबूत कार्यकर्ताओं की टीम नहीं है खाली खाली सी पार्टी है। भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता इस खाली-खाली सी पार्टी के साथ में भी युद्ध करने को तैयार नहीं है। इसे राजनीति नहीं कह सकते। इसे तो जनता से धोखा ही कहा जा सकता है। दोनों पार्टियां जनता के साथ यही व्यवहार कर रही है और अपने को सही भी बतला रही है।


सूरतगढ़ में नगरपालिका का बोर्ड कांग्रेस का है बोर्ड है पर कांग्रेस को जनहित की परवाह नहीं है। 

कांग्रेस को भी मालूम है कि 2023 में विधानसभा में  राज आना बहुत मुश्किल है फिर भी जनता के साथ खड़ा नहीं होना चाहते। नगर पालिका में अभी भी लोगों को छोटे छोटे काम के लिए धक्के खाने पड़ते हैं।

नगरपालिका का काम साफ सफाई प्रमुख है लेकिन शहर सडांध  मार रहा है नाले नालियां महीनों से साफ नहीं हो रहे। अनेक नालियां मिट्टी से भर कर बंद कर दी गई है जिन पर लाखों रुपए खर्चा हुआ था। 

गंदगी हर और खेल रही है। सूरतगढ़ शहर  को नाक बंद करना पड़ रहा है लेकिन नेताओं के नाक ही नहीं है या नाक बीमार है जिनमें गंध नहीं पहचानी जा रही। घरों से निकलकर 1-1 सड़क 1-1 गली और एक एक नाला नाली  प्रकाश व्यवस्था को देखें पर कोई ये काम करने का इच्छुक नहीं है। नेता इस इस सोच में है कि काम जनता करे नेता केवल राज करें।


रामप्रताप कासनिया जी को तो 2018 से 2023 तक का कार्यकाल जनता ने गिड़गिड़ाने पर सौंपा था। चुनाव से पहले पुरानी धान मंडी में एक सभा हुई थी जिसमें रामप्रताप कासनिया ने कहा था कि यह उनका आखिरी चुनाव है।अब इस हिसाब से जो अन्य लोग हैं उनको दिन-रात मेहनत और जनता के बीच में रहना जरूरी है लेकिन यह कार्रवाई नेताओं की तरफ से नहीं हो रही। कांग्रेस पार्टी मील परिवार के दबदबे पर यहां कार्य कर रही है लेकिन उसे भी जनता की कोई परवाह नहीं है।०0०

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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022

शिलान्यास एवं लोकार्पण कार्यक्रमों में सांसद, विधायकों को आमंत्रित किया जाये:सरकारी निर्देश

 





श्रीगंगानगर, 30 मार्च2022.


 राजस्थान सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग जयपुर द्वारा जारी परिपत्र  के अनुसार राजकीय भवनों के शिलान्यास व उद्घाटन कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, माननीय सांसदों, विधायकों को आमंत्रित किया जाये।


जिला कलक्टर श्रीमती रूक्मणि रियार सिहाग ने बताया कि प्रशासनिक सुधार विभाग जयपुर द्वारा जारी निर्देशों के अनुरूप राजकीय भवनों आंशिक अथवा पूर्ण रूप से राजकीय धनराशि से निर्मित भवनों के शिलान्यास व उद्घाटन कार्यक्रमों व अन्य राजकीय समारोह जो राजकीय धनराशि से आयोजित हो, में जनप्रतिनिधियों, विशेषतः कार्यक्रम स्थल क्षेत्र से संबंधित को आवश्यक रूप से आमंत्रित किया जाये।

 जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न विभागों को पत्र  प्रेषित कर निर्देशों की पालना करने के निर्देश दिये गये है।

अतिरिक्त जिला कलक्टर प्रशासन श्री भवानी सिंह पवार ने बताया कि प्रशासनिक सुधार विभाग जयपुर के निर्देशों की पालना के लिये पुलिस, सीईओ जिला परिषद, एडीएम सर्तकता गंगानगर व सूरतगढ़, सचिव नगर विकास न्यास, जिले के समस्त एसडीएम, तहसीलदार, नगरपरिषद, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, सभी नगरपालिकाओं के अधिशाषी अधिकारियों व समस्त जिला स्तरीय अधिकारियों को निर्देशों की पालना के लिये आवश्यक निर्देश दिये गये है।०0०

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