शुक्रवार, 8 अप्रैल 2022

सूरतगढ़ में कांग्रेस पार्टी की कब्र कौन खोद रहा है? 2023 का चुनाव होगा आफत का चुनाव.

 



* करणी दान सिंह राजपूत *


राजस्थान विधानसभा के अगले चुनाव नवंबर दिसंबर 2023 में होंगे। इससे पहले गंभीरता से सूरतगढ़ विधानसभा सीट पर नजर डालें तो कांग्रेस पार्टी एक बार फिर जीत से बहुत दूर खड़ी नजर आती है। कांग्रेस पार्टी की कब्र कौन खोद रहा है?

कांग्रेस पार्टी पिछले दो चुनाव हार कर 10 साल सत्ता से पीछे चली गई।

2013 राजेंद्र सिंह भादू ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस के गंगाजल मील को पराजित कर दिया। गंगाजल मील उस समय पिछले सत्र में विजयी रहे और 2008 से 2013 तक विधायक रहे,फिर भी भादू  के हाथों पराजय हो गई।  कांग्रेस पार्टी के नेता और कर्ता-धर्ता 2013 की हार से सबक नहीं ले पाए। यहां पर कांग्रेश पार्टी पर मील का ही दबदबा रहा लेकिन वे स्थिति को सुधार नहीं पाए व जनता को अपने पक्ष में खड़ा नहीं कर पाए और उसका नतीजा भी अच्छा नहीं रहा 2018 के चुनाव में गंगाजल मील साहब का भतीजा हनुमान मील भारतीय जनता पार्टी के रामप्रताप कासनिया से पराजित हुआ।

 किसी भी राजनीतिक दल के लिए एक ही सीट पर दो बार और वह भी एक ही परिवार के लोगों का पराजित हो जाना बहुत बड़ी बात होती है।


अब 2023 के चुनाव में ज्यादा वक्त नहीं माना जाना चाहिए। सन  2022 के बचे हुए 8 महीनों में कांग्रेस पार्टी सूरतगढ़ में क्या कुछ कर सकती है? यह महत्वपूर्ण सवाल सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में राजनीति में कुछ न कुछ रुचि रखने वाले के दिमाग में गुदगुदा रहा है।

प्रदेश में कांग्रेस पार्टी का राज है।अशोक गहलोत मुख्यमंत्री हैं। सूरतगढ़ पर मुख्यमंत्री सहित किसी भी मंत्री का और कांग्रेस संगठन का ध्यान ही नहीं है।

सूरतगढ़ में नगर पालिका बोर्ड कांग्रेस पार्टी का है अध्यक्ष ओम प्रकाश कालवा है। पंचायत समिति सूरतगढ़ के पर कांग्रेस पार्टी का ही कब्जा है। प्रधान पद पर गंगाजल मील के सगे भाई हजारी मील बैठे हैं।

ऊपरी तौर पर देखा जाए तो यहां पर लगता है कि कांग्रेस के हाथ  पांव मजबूत है लेकिन असल में ऐसा है नहीं। कांग्रेस के नेता दावा नहीं कर सकते कि अगला चुनाव 2023 का चुनाव वह हर हालत में जीत लेंगे। इसका कारण सूरतगढ़ शहर में राजनीति करने वालों से गंभीरता से पूछा जाए तो उत्तर भी मिल जाता

 है। आम जनता से भी उत्तर मिलता है। सूरतगढ़ की जनता आखिर कांग्रेस से परेशान क्यों हो रही है? साधारण भाषा में सवाल किया जाए कि तो ये शब्द निकलते हैं कि सूरतगढ़ में आखिर कांग्रेस की कब्र कौन खोद रहा है?  सीधा सा सवाल है जिसका उत्तर भी सीधा सादा सा है। आम जनता को मालूम है। 

तो फिर कांग्रेस के दिग्गजों को या जो समझते हैं कि कांग्रेस की बागडोर सूरतगढ़ में उनके हाथों में है उनको भी मालूम होगा कि सूरतगढ़ में कांग्रेस की कब्र कौन खोद रहा है? 

सूरतगढ़ शहर में 50 हजार से अधिक वोट हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि वोटों की बहुत बड़ी गठरी सूरतगढ़ में है और इस गठरी में कांग्रेस का प्रभाव कम क्यों होता जा रहा है?

सूरतगढ़ में कांग्रेस की कब्र कौन खोद रहा है जिससे कांग्रेसी आगे 5 साल फिर सत्ता से वंचित रह जाने की संभावना है।


 कांग्रेस के दिग्गज अगर जानबूझकर कानों में रुई डाले हुए हैं जनता को सुन नहीं रहे हैं। आंखों पर पट्टी बांधे हुए  देख नहीं रहे हैं तो आश्चर्यजनक है। देखने और सुनने के बाद मुंह से बोलना होता है या निर्णय लेने होते हैं या ऊपर से करवाने होते हैं। सूरतगढ़ में अप्रिय स्थिति है और  कुछ करना है तो फिर समय बर्बाद क्यों किया जा रहा है? कांग्रेस को हां जी हां जी चाहिए या सूरतगढ़ सीट चाहिए। सूरतगढ़ शहर की कुर्सी से ऊर्जा धनात्मक मिल रही है या ऋणात्मक मिल रही है? धनात्मक ऊर्जा के लिए क्या हटाना है और क्या जोड़ना है? ये बदलाव कब करने हैं? सूरतगढ़ की सीट पर जो कांग्रेस टिकट से चुनाव लड़ेगा वह इन आफतों से कैसे निकलेगा? जो सूरतगढ़ से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं,उनके लिए भी यह सवाल खड़ा है कि सूरतगढ़ में काग्रेस की कब्र कौन खोद रहा है? वे इच्छुक इस स्थिति को जल्दी ही बदल सकते हैं या नहीं।

यह कांग्रेस को तय करना है कि हालात बहुत ज्यादा बिगड़ जाए फिर सुधारे नहीं सुधरे वैसी स्थिति लाना चाहते हैं तो अलग बात है। ०0०

दि. 8 अप्रैल 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार,

सूरतगढ़।

94143 81356.

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