गुरुवार, 22 अक्टूबर 2015

करणी मंदिर सूरतगढ़ राजपूत क्षत्रिय संघ में नवमी पर हवन:




सूरतगढ़, 22 अक्टूबर 2015.
शारदीय नवरात्रा की नवमी पर राजपूत क्षत्रिय संघ के करणी माता मंदिर परिसर में राजपूत सरदारों ने सपत्नी हवन कर शक्ति दुर्गा,लक्ष्मी,सरस्वती और करणी माँ की स्तुति करते हुए हवन किया। राजपूत सरदारों नात्थूसिंह राठौड़,करणीदानसिंह राजपूत बैंस,नगेन्द्रसिंह शेखावत,भीखसिंह शेखावत व सूरजसिंह भाटी सपत्नी हवन किया। संघ के अध्यक्ष मलसिंह भाटी,सचिव बजरंगसिंह पंवार,पूर्व अध्यक्ष कमांडेन्ट बीएसएफ हरिसिंह भाटी,पूर्व अध्यक्ष लालसिंह बीका,महेन्द्रसिंह शेखावत,ओंकारसिंह शेखावत,राजूसिंह सहित अनेक सरदारों ने हवन में आहुतियां दी।





 इस अवसर पर राजपूत महिला सरदारों की संख्या भी काफी थी। हवन पश्चात कन्याओं को जिमाया गया और प्रसाद वितरण किया गया।
देशनोक वाली मां करणी की अनुकृति शिला प्रतिमा यहां स्थापित है। हनुमानगढ़ गंगानगर बाई पास रोड पर यह मंदिर स्थित है।

बुधवार, 21 अक्टूबर 2015

सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को पुलिस ने उठा चिकित्सालय में भर्ती कराया:


छाबड़ा शहीद समारक जयपुर पर शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर आमरण अनशन पर थे:
पुलिस ने वहले भी उठाकर चिकित्सालय में भर्ती कराया था मगर वहां से डिस्चार्ज करते ही वापस आमरण अनशन पर बैठ गए थे।
-छाबड़ा चिल्ला रहे थे कि सरकार मेरी सेहत बहाना कर रही है,मेरी सेहत ठीक है,सरकार को जनता की सेहत की चिंता नहीं है।
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,21 अक्टूबर 2015.
सूरतगढ़ के पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को आज भार पुलिस बल से शहीद समारक जयपुर से उठा कर पुलिस ने एसएमएस चिकित्सालय में भर्ती करा दिया। छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर 2 अक्टूबर को शहीद समारक पर आमरण अनशन शुरू किया था। पुलिस ने घेराबंदी करके उठाया। छाबड़ा जोर जोर से चिल्ला रहे थे कि सरकार मेरी सेहत का बहाना बनाकर उठा रही है जबकि गरीबों की सेहत की सरकार को चिंता नहीं है। छाबड़ा कह रहे थे कि सरकार मीडिया से दूर करना चाहती है ताकि यह समाचार लोगों तक नहीं पहुंचे जो लगातार प्रसारित हो रहे हैं। छाबड़ा ने कहा कि मेरा अनशन जारी रहेगा। पुलिस द्वारा चिकित्सालय में ीारती कराए जाने के बाद भी छाबड़ा ने अनशन नहीं तोड़ा है। दाबड़ा का अनशन आज बीसवें दिन जारी है।
छाबड़ा ने जब 2 अकटूबर को अनशन शुरू किया था तब पुलिस ने 6 अक्टूबर को उठाकर चिकित्सालय में गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती करा दिया जहां पर अनशन जारी था। इसके बाद सरकार के निर्देश पर पुलिस ने उनको ऐसे वार्ड में अपराधियों के साथ रखा जहां पर उनका ईलाज किया जाता है। सरकार डराना व झुकाना चाहती थी लेकिन जब कुछ भी नहीं कर पाई तब 15 अक्टूबर को चिकित्सकों से फिट की रिपोर्ट करवाई और चिकित्सालय से डिस्चार्ज करवा दिया। छाबड़ा चिकित्सालय से डिस्चार्ज किए जाने के बाद वापस शहीद स्मारक पहुंचे और अनशन पर बैठ गए। आज उनको फिर उठा कर चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
इसी बीच भाजपा और कांग्रेस के बीच छाबड़ा के आमरण अनशन को लेकर बयानबाजी भी हुई है। कांग्रेस ने छाबड़ा के आमरण अनशन पर ध्यान नहीं देने पर भाजपा सरकार को संवेदनहीन बताया वहीं भाजपा की ओर से छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा करार दिया गया।
गुरूशरण छाबड़ा आरएसएस के कार्यकर्ता हैं। जनसंघ से राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य रहे हैं।आपातकाल 1975 के विरोध में जेल गए और जेल में भी आमरण अनशन किया था। जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गए थे। उस समय जनता युवा संघ में जब वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष थी तब छाबड़ा भी उपाध्यक्ष ही थे। छाबड़ा ने कांग्रेस राज में अनेक बार आँदोलन किए इसलिए उनको कांग्रेस का मुखौटा बताकर ध्यान नहीं दिया जाना गलत है।
छाबड़ा ने अपनी देह दान की घोषणा पूर्व में ही कर रखी है।
छाबड़ा ने पहले एक बयान में कहा था कि गुजरात में शराब बंद है और वहां शराब की आय के बिना सरकार चल सकती है तब राजस्थान में सरकार क्यों नहीं चल सकती।
विदित रहे कि अशोक गहलोत की सरकार के समय भी छाबड़ा ने आमरण अनशन किया था। छाबड़ा का आरोप है कि सरकार ने जो लिखित समझौता किया था उसका पालन क्यों नहीं कर रही है। 




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रविवार, 18 अक्टूबर 2015

सीता मेरे सामने:कविता


सीता मेरे सामने
धीर गंभीर मौन

अविचलित शांत स्वरूप
आती है हर युग में
चेतन करने को संसार
और खो जाती है
अनन्त में
स्मृति अपनी छोड़।
...सीता मेरे सामने

धीर गंभीर मौन
मन में तरंगित होती
हलचल मचाती

एक रेख।
रेख जो बना देती है अक्षर
गढ़ देती है काव्य आख्यान
बना देती है सुंदर कलाकृति
रच देती है वन उपवन

और सुगंधित नगर उप नगर।
एक रेख
की तरंग
रच देती है रामायण

और गीता का ज्ञान।
...सीता मेरे सामने
रेख की शक्ति को
सीता जानती है
इसलिए हर युग काल में
रहती है धीर गंभीर मौन।
सीता के ध्यान में होता है
जब रेख रचती है सृष्टि
और उसमें भरती है

नाना प्रकार का
जीवन।
रेख मात्र की परम शक्ति
इतनी अपार
तब कौन लगाए अनुमान
सीता की शक्ति का।
...सीता मेरे सामने
- --


करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356.

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शनिवार, 17 अक्टूबर 2015

सूरतगढ़ से सच्च में कितने आरएएस चयन हुए? झूठ की संख्या चलाई गई:


- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 24 जुलाई 2015.
राजस्थान प्रशासनिक व अधिनस्थ सेवाओं की परीक्षा 2012 के मुख्य परिणाम में सूरतगढ़ से प्रशिक्षण ले रहे तीस से अधिक अभ्यर्थियों के चयन होने का खूब प्रचार हुआ और अखबारों में खूब रंग चढ़ाया गया। राजस्थान में ही नहीं यह प्रचार राजस्थान से बाहर तक गया और मीडिया कर्मियों ने स्पेशल रिपोर्ट तक छापी और कोचिंग वालों के साक्षात्कार तक छाप डाले।
मीडिया वालों ने ही नहीं संस्थाओं के संचालकों तक ने केवल राजस्थान प्रशासनिक सेवा शब्द का ही इस्तेमाल किया व अधिनस्थ शब्द ही गोल कर दिया।
अखबारों में वे नाम भी दे दिए गए जो पिछले कुछ सालों से सूरतगढ़ से सैंकड़ों किलो मीटर दूर सरकारी सेवाओं में लगे हुए हैं तथा उन्होंने वहीं से ही अपना पूर्व का रैंक सुधारने के लिए परीक्षा में भाग लिया। सूरतगढ़ से बाहर सरकारी सेवाओं में लगे अधिकारी व कर्मचारी सूरतगढ़ में कोचिंग लेने नहीं आए लेकिन उनके चयन को भी सूरतगढ़ का बता कर वाह वाही लूटी गई और यह झूठ तीन चार दिन तक खूब चला। सरकारी सेवाओं में सैंकड़ों किलोमीटर दूरी पर कार्य कर रहे और रेग्यूलर ड्यूटी देने वालों के नाम भी सूरतगढ़ से चयन में छापे गए। वे
लोग सूरतगढ़ में कोचिंग लेने आते तो सरकार से अवकाश लेना पड़ता और ऐसा नहीं हुआ। लेकिन उनका नाम आरएएस चयन में छपवा दिया गया। मीडिया वालों को कोचिंग संस्थाओं के संचालकों ने ही बताया और यह झूठ बताया। मीडिया को नाम तो संचालकों ने ही दिए। यह होशियारी रखी गई कि संस्थाओं ने अपने लेटर हेड पर कोई सूची नहीं दी। जबानी बताई। दूरस्थ स्थानों पर सरकारी सेवाओं में लगे हुए लोगों ने पहले कभी सूरतगढ़ से कोचिंग ली थी। हालांकि बाद में वे नए स्थानों पर अन्य कोचिंग संस्थाओं से जुड़ गए। एक बार कोचिंग सूरतगढ़ से ले ली इसलिए नाम जोड़ दिए। कौन देखता है? किसको मालूम पड़ता है? मीडिया वाले बेली हो तो बस छपवाए चलो।
दूर दराज के चयन हुए सरकारी अधिकारियों को कर्मचारियों को भी यह मालूम पड़ा। उनकी तरफ से भी कुछ हुआ। वे किसी भी विवाद में क्यों पड़ेंï? तब आगे ये नाम प्रचारित करना बंद हुए।
अब सच्च में कितने आरएएस सूरतगढ़ से चयन हुए? कोई जारी करे अपनी असली सूची तो मालूम पड़े। किसने कब कोचिंग ली और कितने समय कब से कब तक ली। तब सच्च सामने आ पाएगा।
सूरतगढ़ में कई संस्थाएं आरएएस की तैयारी करवाने में लगी थी व कई व्याख्याता अपने स्तर पर लगे हुए थे। प्रत्येक संस्था अपनी अपनी आरएएस की चयन सूची जारी कर दे तो सभी की प्रगति का ब्यौरा आ सकेगा और सही तस्वीर और सभी संस्थाओं व व्यक्तियों के नाम उपलब्ध हो जाऐंगे।
एक सच्च और कि कोचिंग वालों ने अपना ढ़ोल पीटा लेकिन सूरतगढ़ के उन लोगों का नाम कहीं नहीं लिया दिया जो बिना उनकी कोचिंग के चयन हुए थे। सूरतगढ़ की बड़ाई करनी थी तब उनका नाम भी संख्या में जुडऩा चाहिए था। उनका नाम बाद में एक एक कर सोशल मीडिया से सामने आने लगे तब कुछ अखबारो में नाम आए। 

कोचिंग संस्थाएं लैटर हेड पर आरएएस की विज्ञप्ति जारी क्यों नहीं करती?

कोचिंग संस्थाएं लैटर हेड पर आरएएस की विज्ञप्ति जारी क्यों नहीं करती?


कोचिंग संस्थाएं लैटर हेड पर हर कार्य की विज्ञप्तियां जारी करती रही हैं तब आरएएस चयन सूची की विज्ञप्ति जारी करने में डर क्यों?
राजस्थान प्रशासनिक व अधिनस्थ सेवाओं का सन 2012 की परीक्षा का मुख्य परिणाम 17 जुलाई को घोषित होने के बाद कोंचिंग संस्थाओं ने चयन संख्या के साथ अपने अपने दावे प्रचारित करने शुरू कर दिए। इन दावों में केवल संख्या ही बताई जाती रही। ऐसा प्रचारित किया गया कि सूरतगढ़ संपूर्ण राजस्थान में पहले नम्बर पर रहा है। जब दावों पर सवाल उठने लगे और जानकारियां विस्तृत मांगी जाने लगी कि अभ्यर्थी ने कब से कब तक संस्था में प्रशिक्षण लिया तब वहां अध्यापन करने वालों को ,कराने वाले को और संस्थाओं को भी चिढ़ होने लगी। संस्थाओं की ओर से फेस बुक आदि पर अध्यापन कराने वाले टीम के नाम बताए जाने लगे जबकि नाम तो उन लोगों के पूछे जा रहे हैं जो आरएएस में चुने गए व संस्थाएं उनकी संख्या के दावे कर रही है। इन अध्यापन कराने वाली टीमों में वे नाम भी हैं जो आरएएस की परीक्षाएं देते देते थक गए और चुने नहीं जा सके। उनके अवसर भी पूरे हो गए। अगर उनकी कोचिंग में ही सार था तब वे स्वयं क्यों नहीं चुने जा सके। स्पष्ट है कि अभ्यर्थी की व्यक्तिगत मेहनत अधिक पावरफुल रही। यहां बिंदु यह नहीं है कि कौन रह गया। बिंदु यह है कि जब कोचिंग संस्थाएं अपने हर कार्य की प्रेस विज्ञप्तियां जारी करती रही है और उनके अनुसार आयोजन होते रहे हैं तथा आयोजन की सफलताओं के समाचार छपते रहे हैं तब आरएएस के चयन का अति महत्वपूर्ण समाचार कोचिंग संस्थाएं विज्ञति के रूप में जारी करने से क्यों डर रही हैं? विज्ञप्ति में उनके नाम दे दिए जाएं जिन्होंने संस्था से कोचिंग ली और कब ली? संस्थाओं के पास में तो हरके अभ्यर्थी का संपूर्ण रिकार्ड है। उन्होंने कब प्रशिक्षण लिया था उसके शुल्क की रसीदें तक कटी हुई है।
आखिर नाम सहित विज्ञप्ति जारी करने में कोई तो भय है जिसके कारण सब ओट में रखा जा रहा है। संस्थाओं को डर है कि नाम दे दिया जाए व बाद में संबंधित व्यक्ति खंडन करदे तब क्या होगा? विज्ञापन में भी नाम और फोटो छपवाने में भय। लेकिन यह सच को तो नहीं होना चाहिए। किसी भी कोचिंग संस्था में सच में कोचिंग ली है तब संस्था धड़ले से नाम व फोटो सहित विज्ञप्ति जारी कर सकती है और ये जारी की जानी चाहिए।
आरएएस अधिकारी जो कार्यरत हैं,जो अभी चुने गए हैं व जो कोचिंग चलाते हैं उन सभी के सामने एक सवाल है।
सूरतगढ़ से कौन कौन अभ्यर्थी आरएएस में चुने गए?
उत्तर का ऑपशन है। अ- जिसमें संख्या दी गई। ब- जिसमें नाम दिए गए।
इसका सही उत्तर क्या होगा? सही उत्तर वह होगा जिसमें नाम दिए गए होंगे। वह उत्तर गलत होगा जिसमें संख्या दी गई होगी। कोचिंग संस्थाएं चलाने वाले और वहां अध्यापन करने कराने वाले इतना तो जानते ही हैं। जब साँच को आँच नहीं तो संस्थाओं को असली सूची जारी करनी चाहिए और वह अवधि भी जब कोंचिंग ली दी गई।

सूरतगढ़ से सच्च में कितने आरएएस चयन हुए? झूठ की संख्या चलाई गई:

शुक्रवार, 16 अक्टूबर 2015

गुरूशरण छाबड़ा के आमरण अनशन पर भाजपा व कांग्रेस में राजनीति:


चिकित्सालय से छूटते ही आमरण अनशन पर बैठ गए:
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया:
भाजपा ने छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा बताया:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 16 अकटूबर। पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को आमरण अनशन से उठा कर पुलिस ने चिकित्सालय में भर्ती कराया था मगर 15 अक्टूबर शाम को चिकित्सकों ने फिट करार देकर डिस्चार्ज कर दिया और छाबड़ा वापस शहीद स्मारक पर पहुंचे तथा आमरण अनशन पर बैठ गए।
छाबड़ा के अनशन पर कांग्रेस और भाजपा में जमकर राजनीति शुरू हो गई है।
कांग्रेस नेताओं ने छाबड़ा के अनशन पर गौर नहीं करने पर भाजपा सरकार को संवेदनहीन बताया है। इस पर भाजपा ने छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा करार दिया है। मामला समाचारों के कारण और गरमा गया है जिसका कारण यह रहा है कि छाबड़ा के चिकित्सालय से छूटते ही पुन: शहीद स्मारक पर पहुंच कर अनशन शुरू कर देने की भनक पड़ते ही चौदह पन्द्रह चैनल रिपोर्टर वहां पहुंच गए तथा अचानक सभी चैनलों पर यह समाचार और दृश्य दिखलाए जाने लगे।
छाबड़ा ने मोबाइल पर शाम को पांच बजे वार्ता में बताया कि भाजपा नेता अनशन से बौखलाए हुए हैं। छाबड़ा ने कहा कि 2 अक्टूबर को शहीद समारक जयपुर में अनशन शुरू किया था। पुलिस ने 6 अक्टूबर को उठाकर चिकित्सालय में गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती करा दिया जहां पर अनशन जारी था। इसके बाद सरकार के निर्देश पर पुलिस ने उनको ऐसे वार्ड में अपराधियों के साथ रखा जहां पर उनका ईलाज किया जाता है। सरकार डराना व झुकाना चाहती थी लेकिन जब कुछ भी नहीं कर पाई तब 15 अक्टूबर को चिकित्सकों से फिट की रिपोर्ट करवाई और चिकित्सालय से डिस्चार्ज करवा दिया।
छाबड़ा ने कहा कि उन पर कांग्रेस का मुखौटा होने का आरोप लगाना अनुचित है क्योंकि शराबबंदी और शक्तिशाली लोकपाल की मांग को लेकर आमरण अनशन अशोक गहलोत की सरकार में शुरू किया था।
नोट: गुरूशरण छाबड़ा आरएसएस के कार्यकर्ता हैं। जनसंघ से राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य रहे हैं।आपातकाल 1975 के विरोध में जेल गए और जेल में भी आमरण अनशन किया था। जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गए थे। उस समय जनता युवा संघ में जब वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष थी तब छाबड़ा भी उपाध्यक्ष ही थे।
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बुधवार, 14 अक्टूबर 2015

गोपसिंह का राम रोल रेलवे रामलीला की जान होता था:


भरत मिलाप और लक्ष्मण मूर्छा में राम के अभिनय पर पंडाल रो पड़ता था:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,14 अक्टूबर 2015.
रेलवे रामलीला की शुरूआत हुए करीब 45 साल हो गए हैं। पुराने लोको के पास में हर साल राम लीला का मंचन होता है।
शुरूआत के सालों में गोपसिंह और प्रेमसिंह दोनों सग्गे भाई राम व लक्ष्मण का रोल निभाया करते थे। दोनों का अभिनय ऐसा होता कि लोगों में दिन रात चर्चा होती थी। घर की खिड़की में से बच्चे सारे दिन कमरे में झांकते रहते थे राम को लक्ष्मण को देखने को।
भरत मिलाप और लक्ष्मण मूर्छा के अभिनय में राम का मिलन और विलाप देख कर पंडाल में उपस्थित नर नारी रो पड़ते थे।
इन दोनों छोटे भाईयों का अभिनय देखने का अवसर बहुत मिला। लोगों की सराहना भरे वाक्य सुन सुन कर प्रसन्न होता था।
रेलवे में अभी भी रामलीला होती है।
प्रेमसिंह सूर्यवंशी प्रमुख उदघोषक मंच संयोजक के रूप में उपस्थित होते हैं।
राम लक्ष्मण का रोल कई साल पहले अन्य कलाकार प्रस्तुत करने लगे थे।
गोपसिंह सूर्यवंशी आपातकाल 1975 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून में बंदी रहे। पार्षद चुने गए। अनेक सामाजिक कार्य और संघर्षों में जूझते हुए दिनांक 15-12-2014 को संसार से विदा हो गए। 


यहां पर रामलीला का एक चित्र प्रस्तुत है जिसमें बीच में गोपसिंह है।

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मंगलवार, 13 अक्टूबर 2015

अनशनकारी गुरूशरण छाबड़ा चिकित्सालय में भर्ती से हुई बात:


करणीदानसिंह राजपूत से शाम 5:03 पर हुई बात:
आरहवें दिन आमरण अनशन जारी:
2 अक्टूबर से शराबबंदी को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे:6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराए गए:
-विशेष समाचार-
सूरतगढ़, 13 अक्टूबर। राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और शक्तिशाली लोकपाल की मांग को लेकर पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा का आमरण अनशन बारहवें  दिन चिकित्सालय में भी जारी है। आपातकाल के लोकतंत्र साथी करणीदानसिंह राजपूत से शाम को छाबड़ा की बातचीत हुई। छाबड़ा अपने निर्णय पर अडिग हैं और सूरतगढ़ के साथियों को संदेश दिया है कि अनशन जारी रहेगा।
पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को एसएमएस में पहले गहन चिकित्सा ईकाई में रखने के बाद पुलिस पहरे में उस स्थान पर रखा गया है जहां पर अपराधियों की चिकित्सा की जाती है। सरकार की यह पुलिसिया कार्यवाही निन्दनीय है,छाबड़ा जी कोई अपराधी नहीं है। आपातकाल में भी वे जेल में बंद रहे हैं।
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शराबबंदी को लेकर अलग अलग मत हो सकते हैं। लेकिन यह सच है कि इससे अपराध बढ़ रहे हैं।
छाबड़ा के समर्थन में जो लोग अपने विचार रखते हैं उनको अपने निकटतम प्रशासनिक अधिकारी के मारफत मुख्यमंत्री व राज्यपाल को ज्ञापन भेजने चाहिए।

रविवार, 11 अक्टूबर 2015

अनशनकारी गुरूशरण छाबड़ा को चिकित्सालय में अपराधियों वाली जगह रखा:


छाबड़ा ने कहा सरकार डराना और झुकाना चाहती है मगर न न डरूंगा न झुकूंगा:
काफी कमजोर मगर अनशन का जोश:मरते दम तक अनशन पर रहूंगा:
2 अक्टूबर से शराबबंदी को लेकर आमरण अनशन पर थे:6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराए गए:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 11अक्टूबर। पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को एसएमएस में पहले गहन चिकित्सा ईकाई में रखने के बाद पुलिस पहरे में उस स्थान पर रखा गया है जहां पर अपराधियों की चिकित्सा की जाती है। सरकार की यह पुलिसिया कार्यवाही निन्दनीय है,छाबड़ा जी कोई अपराधी नहीं है। आपातकाल में भी वे जेल में बंद रहे हैं।
छाबड़ा ने आज एक टीवी चैनल से बातचीत में कहा कि सरकार ऐसा करके उनको डराना और झुकाना चाहती है लेकिन वे न डरेंगे न झुकेंगे। छाबड़ा ने कहा कि सरकार के साथ लिखित समझौता हुआ था जिसका पालन नहीं किया जा रहा है।
छाबड़ा का स्वास्थ्य गिरने पर पुलिस ने 6 अक्टूबर को एसएमएस में भर्ती कराया। छाबड़ा राजस्थान में संपूर्ण शराबबंदी और सशक्त लोकपाल की मांग को लेकर 2 अक्टूबर महात्मा गांधी व लाल बहादुर शास्त्री की जयंती से शहीद समारक जयपुर पर आमरण अनशन पर थे। संपूर्ण राजस्थान में उनकी इन मांगों पर अनेक संगठनों का समर्थन मिल रहा है।
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शराबबंदी को लेकर अलग अलग मत हो सकते हैं। लेकिन यह सच है कि इससे अपराध बढ़ रहे हैं।
छाबड़ा के समर्थन में जो लोग अपने विचार रखते हैं उनको अपने निकटतम प्रशासनिक अधिकारी के मारफत मुख्यमंत्री व राज्यपाल को ज्ञापन भेजने चाहिए।

शनिवार, 10 अक्टूबर 2015

मेरा परींदा मेरी चिडिय़ा -- कविता




धुंधलाती रोशनी बिखेरता
अस्तांचल में जाता सूरज हर रोज
तुम्हारा छत पर जाकर
चुग्गा बिखेरना हर रोज।
चिडिय़ां कबूतर कमेडिय़ों को
निहारती तुम्हारी आँखे हर रोज
छत के किनारे पर बनी
चौकी पर बैठी तुम हर रोज।
कभी तुम चिडिय़ों को निहारती
कभी ध्यान में कबूतरों की गटर गूं
कभी कमेडिय़ों की घूं घूं पर
नजर उठाती तुम हर रोज।



तुम्हारा यह चुग्गा डालना हर रोज
सूरज की अस्तांचल लाली में
लाल होता दमकता तुम्हारा चेहरा
संपूर्ण लाली में नहा जाती हो हर रोज।
परींदे आते एक एक चुगते दाने
और उड़ जाते एकदम से सब
तुम निहारती ओझल होने तक
छत से उतरती सपना लिए हर रोज।
मैंने सालों बाद तुम्हें देखा
चुग्गा बिखेरते
कितनी खोई तन्मयता में
गुनगुना रही थी कोई गीत।
तुम्हारा चेहरा बता रहा था
मन के भाव खुशियां समाये
मैं इतना समीप था तुम्हारे
कि छू सकूं चुग्गे का कटोरा
अहसास करा दूं अपनी उपस्थिति
लेकिन तुम खोई थी परींदों में।
यह ध्यान ही तुम्हारा है शक्तिदाता
तुम नहीं थकी और न थकोगी
चुग्गा खिलाते परींदों को हर रोज।
मैं साथ हूं तुम्हारे हर रोज
साढिय़ां चढ़ती हो तब पीछे
सीढिय़ां उतरती हो तब आगे
मैं चलता हूं साथ हर रोज
क्यों कि मैं समय हूं
जो तुम्हें गति देता हूं हर रोज।
कितने सालों से चुग्गा खिला रही तुम
मौन व्रत चेहरा लिए हर रोज
आओ मैं सिखलाता हूं बोलो
आओ री चिडिय़ों खाओ री चिडिय़ों
आती रहना रोज आती रहना रोज।



पंखेरू आते चुग्गा खाते और उड़ जाते
तुम्हारी आँखें उनमें कुछ खोजती
आते जाते और चुग्गा खाते
हर पंखेरू चिडिय़ा तक को निहारती।
मैं हर रोज देखता तुम्हारे हाव भाव
और एक दिन पूछ लिया तुमसे
तुमने जवाब दिया दर्द भरा
मेरा परींदा और मेरी चिडिय़ा
ना जाने कहां उड़ गए हैं।
मैं इंतजार में हूं कभी तो आयेंगे
मेरा परींदा मेरी चिडिय़ा।
तुम्हारा विश्वास साल दर साल
दृढ़ और दृढ़ होता रहा है
एक परींदे और एक चिडिय़ा का इंतजार।
तुम खिला रही हो चुग्गा सालों से
ये सैंकड़ों परींदे और प्यारी सी चिडिय़ां
तुम्हारी ही हैं यह मानो
और चुग्गा खिलाती रहो रोज।
--


करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़ 
94143 81356

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