सोमवार, 7 सितंबर 2026

वार्ड 45.भाजपा से पार्षदगी जाएगी या बचेगी.भाजपा कांग्रेस माकपा में तिकोनी टक्कर.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 7 सितंबर 2026.

 भाजपा सोच बाहुल्य वार्ड नं 45 सामान्य में भाजपा ने ओबीसी वर्ग की पूर्व पार्षद श्रीमती संतोष गिरी को इस बार टिकट देकर सामान्य वर्ग से जानबूझकर युद्ध छेड़ लिया है। सामान्य वर्ग के लिए फिर बाद में कब नं आएगा और सामान्य वर्ग के बाद में कब चुनाव लड़ेंगे और नगरपालिका बोर्ड में अपना प्रतिनिधि पार्षद भेजेंगे।

* यहां श्रीमती संतोष गिरी से पार्षदगी छीन लेने के लिए  माकपा के मदन ओझा पूर्व पार्षद कई दिनों से जूझ रहे हैं। मदन ओझा का वार्ड आरक्षित हो गया तब उन्होंने वार्ड नं 45 को अपनी जीत हो सकने की उम्मीद में चुनाव लड़ने को चुना। यहां मदन ओझा सामान्य वर्ग के होते हुए भी बाहर के वार्ड वासी भी माने जा रहे हैं। पहले तो भाजपा के सामने अकेले कामरेड मदन ओझा का ही हल्ला था लेकिन अब वार्ड में कांग्रेस का हल्ला विधायक डुंगरराम गेदर,पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादु की टीम के साथ मचा है। इसी वार्ड के निवासी राधेश्याम उपाध्याय ने कांग्रेस की टिकट लेकर भाजपा की संतोष गिरी को पार्षदगी छीन लेने की चुनौती दी है। यह चुनौती माकपा के मदन ओझा को भी है। यदि राधेश्याम उपाध्याय की जीत होती है तो भाजपा तो नगरपालिका में नहीं जा पाएगी। लेकिन कामरेड मदन ओझा भी नगरपालिका भवन का बोर्ड बाहर से ही पढेंगे। कामरेड मदन ने पार्षद होते हुए भी नगरपालिका में भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुंह नहीं खोला। एक भी भ्रष्टाचार पर न मुंह खोला न शिकायत की। आखिर अब फिर से पार्षद क्यों बनना चाहते हैं जब सब प्रकार के भ्रष्टाचार आंखों के सामने होते रहे? ईओ पूजा शर्मा ने अनेक अनियमितताएं की नगर को गंदगी में धकेले रखा और कामरेड चुप रहे। सारी पार्टी चुप रही और यह खेल जनता देख रही थी। इस वार्ड नं 45 की जनता भी देख रही थी। यहां कामरेड येनकेन प्रकरेण कुछ लोगों को तो प्रभावित करने में सफल हो सकेंगे लेकिन मतदाता पार्षद नहीं बनाएंगे। 

* पहले अकेले कामरेड सामने था और अब राधेश्याम उपाध्याय भी है जो इसी वार्ड का है। अपने वाकपटुता यानि भाषण से तो सबसे आगे है। उपाध्याय कुटुंब राजनीति में कहीं न कहीं 40-45 सालों से सक्रिय दिखाई देता है। वार्ड वासियों का झुकाव राधेश्याम उपाध्याय की ओर बाहर ओर भीतर से होने की जानकारी मिल रही है।

 यहां भाजपा माकपा और कांग्रेस में ही तिकोनी टक्कर है जिसमें राधेश्याम उपाध्याय की स्थिति मजबूत लग रही है। भाजपा के नेता सत्ताधारी दल के नेता देखते हैं कि श्रीमती संतोष गिरी की पार्षदगी बचाने को क्या कुछ कर पाते हैं?

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