शुक्रवार, 4 सितंबर 2026

विधायक की दावेदारी कर रही आरतीशर्मा नगरपालिका चुनाव में तीसरे क्रम पर.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 4 सितंबर 2026.

नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष आरतीशर्मा विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही थी जो नगरपालिका के चेयरमैन पद की लालसा में पार्षद चुनाव में उलझ गई है जहां आम चर्चाओं में वे तीसरे क्रम पर है। हालात ऐसे बने हुए हैं कि आरतीशर्मा अंतिम चौथे क्रम पर भी पहुंच सकती है। आखिर आरतीशर्मा के इन परिस्थितियों में पहुंचने की वजह पद लोभ है जिसके कारण वे अपना निवास का वार्ड आरक्षित होने पर वार्ड नं 40 से चुनाव लड़ने को तैयार हुई और जयपुर से प्रेशर डाल कर भाजपा की टिकट प्राप्त की। आरतीशर्मा ने इस वार्ड से जीत आसान समझी मगर यहां तो कुए में आ गिरी। आरतीशर्मा ने भाजपा की टिकट तो प्राप्त कर ली मगर वोट तो प्रेशर से मिल नहीं सकते।

👌 वार्ड नं 40 के पुराने निवासी भाजपा के पुराने कार्यकर्ता सरावगी परिवार से सुमन पत्नी सुशील कुमार सरावगी भाजपा की टिकट की प्रबल दावेदार थी लेकिन उसे टिकट नहीं मिली। सुमन सरावगी अब निर्दलीय चुनाव में डटी है। उसे बैठाने की हर चाल धमकियां भी बेकार हो गयी।

 यहां दूसरे वार्ड की निवासी पूर्व पालिका अध्यक्ष आरतीशर्मा को चुनाव में उतारने से विद्रोह पनप उठा। आरतीशर्मा का चेयरमैन काल 1994 से 1999 तक विवादों से घिरा रहा था। भ्रष्टाचार के आरोप लगे और बलराम वर्मा का आमरण अनशन पांच दिन चला। उस समय विकास की बात करें तो एक सड़क सुभाष चौक से महाराणा प्रताप चौक तक बनी थी। लोग भूल गये। समय भी अधिक हो गया इसलिए लोग कहने लगे कि आरतीशर्मा का अध्यक्षता काल ईमानदारी वाला स्वच्छ काल रहा।

* आरती शर्मा यहां वार्ड नं 40 में बाहरी होने के कारण चर्चाओं में तीसरे क्रम पर मानी जा रही है। लोगों का आकलन है कि करीब एक सौ वोटों से पीछे रहेगी। आरतीशर्मा का वार्ड इस बार ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। आरतीशर्मा खुद को फिर से चेयरमैन का दावेदार मानती हुई सामान्य वार्ड नं 40 में घुस गई। सुमन सरावगी के समर्थक ताल ठोक रहे हैं कि यहां नियम के विपरीत जाकर भाजपा ने बाहरी आरतीशर्मा का टिकट फाईनल किया है जो सहन नहीं है। अब सरावगी परिवार को पीछे नहीं हटने देंगे और सुमन को चुनाव मैदान में निर्दलीय लड़ाएंगे। सो सुमन सरावगी अब निर्दलीय चुनाव मैदान में है और आरतीशर्मा से अधिक ताकतवर है। यहां से कांग्रेस पार्टी ने कृष्णा देवी कोठारी को खड़ा किया है और यह भी आरतीशर्मा से अधिक ताकतवर है। इसके अलावा यहां एक और निर्दलीय आशा भी मैदान में है।

कुछ भी हो यहां  से चुनाव लड़ना आरतीशर्मा के लिए हानिकारक रहेगा और भविष्य का सिरदर्द भन जाएगा।

 👌सबसे अधिक विपदा भाजपा नेताओं पर आएगी जो आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने का समर्थन करने वालों में हैं। जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह, पूर्व विधायक अशोक नागपाल, नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना और नगरमंडल के पूर्व अध्यक्ष सुरेश मिश्रा का क्या होगा? 

👌 आरतीशर्मा की वार्ड नं 40 में हालात चर्चा में आ गये कि आरतीशर्मा तीसरे क्रम पर रहेगी, फिर भी चुनाव लड़ने की जिद रही।सब कुछ मालुम हो जाने के बाद नामांकन किया गया। इन हालात में आरतीशर्मा को टिकट देने वाले जिला प्रभारी दशरथ सिंह शेखावत और चुनाव प्रभारी जसवंत सिंह ईंदा भी हार होने के बड़े जिम्मेदार होंगे। इनकी ड्युटी थी कि ये जयपुर को संपूर्ण हालात बताते। आरतीशर्मा ने खुद ने अपने राजनैतिक भविष्य पर आत्मघाती कुठाराघात किया है।०0०






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