विधायक डुंगरराम गेदर,परसराम भाटिया और सामने राजाराम गोदारा में कौन ताकतवर?विधायक की नीति दोगली रही.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 1 सितंबर 2026.
नगरपालिका चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने पार्षद चुनाव की टिकट वितरण में राजाराम गोदारा आदि को टिकट नहीं दी क्योंकि उन्होंने कासनिया के स्कूल को भूमि देने के प्रस्ताव में विरोध नहीं किया,काग्रेस की व्हिप नहीं मानी।लेकिन परसराम भाटिया ने उच्च न्यायालय में रिट लगाकर वापस लेली उससे गेदर की भी बदनामी हुई इसके अलावा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे,कुछ मुकदमें होते हुए भी परसराम भाटिया को टिकट दी है। कासनिया के स्कूल को जमीन देने के प्रस्ताव में सहयोगी भाजपा पार्षद हरीशकुमार दाधीच( छोटू पंडित) को भाजपा ने टिकट नहीं दी,मगर कांग्रेस ने टिकट दे दी।
👌 विधायक डुंगरराम गेदर ईमानदार गेदर एक ही प्रस्ताव पर तीन लोगों पर तीन तरह के निर्णय क्यों कर गये? इसका जवाब तो चुनाव परिणाम देगा लेकिन अभी विधायक की इस नीति की आलोचना हो रही है।
👌 परसराम भाटिया 120 दिन के लिए सरकार की ओर से नगरपालिका के अध्यक्ष मनोनीत रहे और रिकॉर्ड तोड़ भ्रष्टाचार किया। मुकदमें भी हो गये,जो डुंगरराम गेदर को इतने प्रिय हैं कि उनको टिकट दी है। ये एक दूजे को मिठाई कतली खिलाएं लेकिन दोनों का टिकट वितरण कांग्रेस को भारी पड़ेगा। भ्रष्टाचारों के आरोपों से घिरे परसराम भाटिया को टिकट देने की जो भी मजबूरी डुंगरराम गेदर को रही है वह चुनाव में जो नतीजा पेश करेगी उससे डुंगरराम गेदर की नींद हराम होगी।
* राजाराम गोदारा ने अपनी टिकटों से अधिक संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी खड़े कर दिए जो चुनाव में कांग्रेसी प्रत्याशियों के लिए आफत और जीत में बाधा होंगे तथा अध्यक्षीय चुनाव में भी गेदर की मुसीबत होंगे। मीडिया में राजाराम गोदारा का हल्ला है। परसराम भाटिया और हरीश दाधीच दोनों ही सीटें जीत पाएंगे में संशय है। परसराम भाटिया के भ्रष्टाचार और मुकदमे गेदर न देखें मगर वोटर तो देखेंगे।०0०