भाजपा में टिकट फाईनल की जबरदस्त नाराजगी.निर्दलीय पड़ेंगे भारी. कौन जीत रहा.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ लेटेस्ट 30 अगस्त 2026.
भाजपा के प्रत्याशियों के नामों की भनक से उपजे हालात बिगड़ कर विरोध के स्वर अब वार्डों में फैले हैं। नगरपालिका में बोर्ड बनाने का दावा कर रही भाजपा की स्थिति डाउन होने की हालत से कुछ वार्डों में निर्दलीय का माहौल बन गया है। सामान्य वार्डों में ओबीसी,सामान्य वार्ड में बाहरी,फील्ड वर्कर के बजाय अन्य को टिकट फाईनल के होने से भाजपा में फूट का उफान है। यह टिकट वितरकों को दिखाई नहीं देता। टिकट वितरण में जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान और पूर्व नगर मंडल अध्यक्ष का दबाव रहा जिसमें पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया की नहीं चली बल्कि उनके कहने पर भी कुछ मेहनती फील्ड में जूझते रहे कार्यकर्ताओं को टिकट नहीं दी गई। कासनिया को खत्म करने की सोच से टिकटें नहीं दी गई।
* भाजपा 23 प्लस की नीति से चुनाव लड़ने की तैयारी पर थी जिससे 45 वार्डों में बहुमत के बाद भाजपा का बोर्ड आसानी से बनता हुआ नजर आ रहा था।
अब विभिन्न वार्डों में विरोध के स्वर उठ रहे हैं और भाजपा की ताकत कमजोर हो रही है। अब नीचे खिसकती हालत में भाजपा 15 प्लस पर है। बहुत बार सत्ता का नशा और अकड़ काम नहीं आती और यह स्थिति दो चार दिन में भाजपा नेताओं और विद्रोह वाले वार्डों में थोपे जाने वाले प्रत्याशियों को असली वोट का आईना दिखा देगी।
* वार्ड नं 30 सामान्य घोषणा के तुरंत बाद सुशील तावणिया ने भाजपा टिकट की दावेदारी और चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी। वहां ओबीसी वर्ग से कृष्ण छींपा ने भी भाजपा टिकट की दावेदारी और चुनाव लड़ना है कि घोषणा कर दी। कृष्ण छींपा का परिवार पिता सत्यनारायण व माता ही काफी सालों से चुनाव लड़ते रहे हैं। अब टिकट कृष्ण छींपा को टिकट दिए जाने से विरोध भी शुरू हो गया है कि सामान्य वर्ग फिर कब चुनाव लड़ेगा,जब नंबर आए हुए भी टिकट नहीं मिले। सुशील कुमार तावणियां ब्राह्मण जाति से हैं और भाजपा के प्रसिद्ध कार्यकर्ता हैं। विरोध शुरू होने से कृष्ण छींपा की जीत और खुशियां प्रभावित होंगी। यहां सामान्य वर्ग ने दया शंकर शर्मा को निर्दलीय प्रत्याशी तय किया है और अब वोट दयाशंकर को देना तय किया गया है।
* वार्ड नं 45 सामान्य वार्ड है जहां पूर्व पार्षद श्रीमती संतोष गिरी को फिर से भाजपा टिकट दिए जाने की चर्चा से नाराजगी शुरू है। संतोष गिरी ओबीसी वर्ग की है। इस वार्ड में सामान्य वर्ग के कई लोग चुनाव मैदान में हैं।
* वार्ड नं 19 सामान्य है। भाजपा जिलाध्यक्ष ने उपरी सिफारिश पर श्रीमती रजनी मोदी को टिकट देना फाईनल किया। कासनिया रिंकु सिद्दीकी को टिकट के पक्ष में थे और उनकी नहीं चली। यहां इसी परिवार की यासमीन सिद्दीकी पार्षद रही।
इस वार्ड के क्षेत्र में रिंकु सिद्दी परिवार की पकड़ मजबूत है। सिद्दीकी परिवार विकास कार्यों का ताकतवर नेता है जबकि रजनी मोदी फील्ड में किसी एक भी विकास से जुड़ी हुई नहीं है। यहां सिद्दीकी परिवार ने टिकट नहीं मिलने पर अपने परिवार के साहिर सिद्दीकी को निर्दलीय खड़ा कर दिया है। यहां कांग्रेस ने हरीश दाधीच निवृत हुए पार्षद को चुनाव में उतारा है । हरीशदाधीच पिछले चुनाव में भाजपा से पार्षद था। अब भाजपा नेताओं से नाराजगी की वजह से कांग्रेस में चले गये। हरीशदाधीच यहां बाहरी माना गया है। वार्ड में निर्दलीय साहिर सिद्दीकी सब पर भारी है और यहां भाजपा की रजनी मोदी तीसरे क्रम पर मानी जा रही है।
* वार्ड नं 40 यहां भाजपा के पुराने सरावगी परिवार से सुमन पत्नी सुशील कुमार सरावगी भाजपा की टिकट की प्रबल दावेदार है लेकिन यहां दूसरे वार्ड की निवासी पूर्व पालिका अध्यक्ष आरतीशर्मा को चुनाव में उतारने से विद्रोह पनप रहा है। आरतीशर्मा का चेयरमैन काल 1994 से 1999 तक विवादों से घिरा रहा था। आरती शर्मा यहां बाहरी होने के कारण चर्चाओं में तीसरे क्रम पर मानी जा रही है। लोगों का आकलन है कि करीब एक सौ वोटों से पीछे रहेगी। आरतीशर्मा का वार्ड इस बार ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। आरतीशर्मा खुद को फिर से चेयरमैन का दावेदार मानती हुई सामान्य वार्ड नं 40 में घुस गई। सुमन सरावगी के समर्थक ताल ठोक रहे हैं कि यहां नियम के विपरीत जाकर भाजपा ने बाहरी आरतीशर्मा का टिकट फाईनल किया है जो सहन नहीं है। अब सरावगी परिवार को पीछे नहीं हटने देंगे और सुमन को चुनाव मैदान में निर्दलीय लड़ाएंगे। कुछ भी हो यहां से चुनाव लड़ना आरतीशर्मा को हानिकारक रहेगा। चेयरमैन पद के लोभ में वर्तमान स्थिति को आलोचना का शिकार बना देगी। सबसे विपदा उन भाजपा नेताओं पर आएगी जो आरतीशर्मा का चुनाव दूसरे वार्ड से समर्थन करने वालों में हैं। जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह, नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना और नगरमंडल के पूर्व अध्यक्ष सुरेश मिश्रा का क्या होगा?
* वार्ड नं 27 से भाजपा नेता विजय गोयल अपनी पत्नी सरोज गोयल को भावी चेयरमैन के पद के लिए पार्षद का चुनाव लड़ा रहे हैं। सरोज गोयल कभी फील्ड वर्कर नहीं रही।
यहां समाजसेवी पूर्व पार्षद चरणजीत सिंह टंडन चन्नी अपनी पत्नी सुनीता टंडन को चुनाव लड़ा रहे हैं जो भाजपा पर बहुत भारी हैं। यहां भाजपा का जीतना असंभव है।
* वार्ड नं 43 से श्रीमती वीना पत्नी प्रवीण छाबड़ा भावी चेयरमैन पद की आशा में पार्षद का चुनाव भाजपा टिकट से लड़ रही है जिनकी टक्कर कांग्रेस प्रत्याशी से है। सूत्रानुसार यहां तिकड़म से वीना छाबड़ा की जीत की संभावना है और तिकड़म हो चुकी है जो जीत का नया राजनैतिक तरीका होगा।
* भाजपा में विष्णु तरड़ अपनी पत्नी को भावी चेयरमैन के चुनाव के लिए पार्षद का चुनाव लड़ा रहे हैं। चेयरमैन पद के लिए भाजपा किसको टिकट देगी यह अभी कुछ कहा नहीं जा सकता।भाजपा में टिकटों को लेकर और वार्डों में भी विरोध अभी चल रहा है वह संकट पैदा करने वाला है।आरोप है कि पुराने कार्यकर्ता परिवारों को जानबूझकर पीछे धकेला जा रहा है।
* वार्ड नं 41 में भाजप के पुराने परिवारों में है डिम्मी सचदेवा परिवार। सचदेवा परिवार अपनी बेटी के लिए भाजपा की टिकट मांग रहे हैं और वहां किसी और को टिकट थमाने की तैयारी चल रही है।
*भाजपा के जीतने वाले चेहरों में पूर्व पार्षदों में ओम अठवाल वार्ड 31, राजेंद्र ताखर,जगदीश मेघवाल के नाम चर्चाओं में हैं। भाजपा के नरेन्द्र कालरा (मोनू कालरा) वार्ड नं 26 से जीत का चेहरा है। भाजपा ने पूर्व पार्षद प्रदीप चौहान को चुनाव में उतारा है जहां उनकी टक्कर कांग्रेस के योगेश मेघवाल से है। अभी मेघवाल भारी माने जा रहे हैं।
* रामप्रताप कासनिया को सन् 2003 के विधानसभा चुनाव में पीलीबंगा से भाजपा की टिकट नही मिली तब उन्होंने भाजपा से विद्रोह कर सफेद झंडे से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उस समय भाजपा की टिकट पीलीबंगा से गंगाजल मील को मिली थी। कासनिया ने कहा था कि मील को टिकट गलत दी गई है असली हकदार मैं हूं और सामने चुनाव लड़ूंगा। उस चुनाव में कासनिया जीते थे और भाजपा से अलग नहीं हुए थे।
आज ऐसी स्थिति सूरतगढ़ नगरपालिका चुनाव में है।भाजपा के अनेक कार्यकर्ता पूछ नहीं होने, सामान्य वार्ड में अन्य वर्गों को टिकट देने व बाहरी उम्मीदवार को टिकट देने से नाराज होकर कासनिया की सीख पर निर्दलीय मार्ग और
सफेद झंडा उठाने को एकजुट हो रहे हैं। जो कार्यकर्ता हक छिन जाने से क्रोधित हैं वे भाजपा के घोषित किए जा रहे नाम की भनक पड़ते ही सामने निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में एकजुट हो रहे हैं। वे भाजपा की टिकट को वार्ड से हराकर लौटा देंगे। आगे उनकी मर्जी रहेगी कि वे बोर्ड बनाने में भाजपा के साथ रहेंगे या कोई नया ग्रुप बनाकर बोर्ड बनाने को आगे बढेंगे। ऐसी स्थिति बदली परिस्थिति में भाजपा को चेयरमैन पद जाने तक का खतरा हो सकता है। अभी तो भाजपा नेताओं को सब असंभव लगता है। लेकिन राजनीति में बहुत कुछ संभव है।
* सन् 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले स्पष्ट हो गया था कि सूरतगढ़ के सीटिंग विधायक रामप्रताप कासनिया का जबरदस्त विरोध है तथा हर हालत में हार होगी। इसके बावजूद कासनिया को भाजपा ने टिकट दिया। कासनिया को नाराज कार्यकर्ताओं ने जनता से मिलकर धूल चटा दी और गुस्से में कांग्रेस को साथ देकर डुंगरराम गेदर को विधायक चुन लिया। भाजपा के लिए और कासनिया के लिए वह बहुत बड़ी सीख थी। अब कासनिया भाजपा की टिकट निर्धारित करने वालों में हैं और उनकी तय की हुई टिकटें हराकर वापस करने को भाजपा कार्यकर्ता एकजुट होकर निर्दलीय रूप से किसी एक को साथ देकर जिताएंगे। भाजपा का एक खेमा इस चुनाव में कासनिया को नीचा दिखाने को तत्पर है जिसकी शहर में चर्चा गर्म है।
👌 जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह नगर मंडल अध्यक्ष गौरव बलाना पूर्व अध्यक्ष नगर मंडल सुरेश मिश्रा के लिए भाजपा से बागी हुए निर्दलीयों की जीत गहरी चोट होगी। ०0०