मंगलवार, 25 अगस्त 2026

सूरतगढ़: भाजपा में टिकट विद्रोह होने की गर्माहट.पार्टी को बड़े नुकसान की आशंका.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 25 अगस्त 2026.

सामान्य वार्डों में आरक्षित वर्गों ओबीसी व एसी के टिकटार्थियों के फार्म भरे जाने,और दूसरे वार्ड में फार्म भरे जाने के बाद से भाजपा के सामान्य वर्ग के टिकटार्थियों में तथा असली वार्डवासी टिकटार्थियों मेंअग्रिम रोष की चर्चा है। भाजपा में टिकट वितरण में राजनैतिक सूझबूझ हुई तो तय नियमों के अनुसार ही सबकुछ होगा। बाहरी टिकटार्थी को टिकट नहीं दी जाएगी। 

भाजपा में पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड से चुनाव की तैयारी से यह असंतोष अधिक हो रहा है। आरती शर्मा का वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित हो गया। आरतीशर्मा पड़ोसी वार्ड से चुनाव की तैयारी में लग गई जहां वार्ड वासी सरावगी परिवार की महिला भाजपा टिकट की प्रबल दावेदार है। सरावगी परिवार पुराना भाजपा कार्यकर्ता परिवार है और पूर्ण भाजपा भक्त है।

भाजपा के जिला प्रभारी दशरथ सिंह, चुनाव प्रभारी जसवंतसिंह ईंदा और स्थानीय शासन संचालक पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया व समिति में जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान चुनाव में कहीं भी विघ्न नहीं चाहेंगे तो आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड से टिकट नहीं देंगे। आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड में टिकट दी जाने की गलती की जाती है तो वार्ड वासी अब नहीं तो फिर बाद में कब चुनाव लड़ेंगे। कभी नंबर आने की उम्मीद ही नहीं होगी।

आरतीशर्मा तो चेयरमैन पद की लालसा में हार की कल्पना नहीं कर रही मगर समझदार नेताओं को इस राजनैतिक विवाद को फैलने से पहले प्रथम कदम पर ही रोक देना चाहिए। 

* मान लें कि आरतीशर्मा को दूसरे वार्ड में टिकट देने की गलती कर दी जाती है और वहां असंतोष व विद्रोह हो जाता है आरतीशर्मा जीत नहीं पाई तब क्या होगा? आरतीशर्मा की और टिकट देने वालों की हालत क्या होगी? पार्टी के पुराने कार्यकर्ता छिन्न भिन्न होंगे। सीधे रूप में पार्टी को नुकसान होगा जो वार्ड में संकेत मिल रहे हैं। आरती शर्मा दूसरे वार्ड में जीत की स्थिति में नजर नहीं आ रही। 

* आरतीशर्मा पूर्व में सन् 1994 से 1999 तक चेयरमैन रही। वह काल नये लोगों को नेताओं को मालुम नहीं मगर चुनाव में उसकी चर्चा होने लगी है। वह संपूर्ण  काल विवादों में आरोपों में घिरा रहा। सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति करने में आरोप लगा। आंदोलन हुआ। उस काल में आरतीशर्मा ने एक और बहुत बड़ी गलती की जो असामान्य है। भाजपा संगठन को कोई गलती टिकट में नियम बना कर नहीं करनी चाहिए जब असंतोष का मालुम पड़ रहा है। 

* वार्ड नं 30 सामान्य है और यह स्थिति सालों बाद आई है। पहले ओबीसी वर्ग के लोग ही चुनाव लड़ते रहे। अब सामान्य वर्ग के कार्यकर्ता टिकट मांग रहे हैं और ओबीसी भी। ओबीसी को वहां टिकट दी जाती है तो असंतोष फैलेगा।

* सूर्योदय नगरी यानि लाईन पार के वार्डों में शहर की तरफ के लोग टिकटार्थी क्यों बन रहे हैं जबकि उन्होंने कभी एक दिन भी वहां काम नहीं किया।

* भाजपा में टिकटों के आवेदनों व तैयारियों से ही असंतोष झलकने लगा है और टिकटों में सबकुछ ठीक हो जाएगा की तर्ज पर गड़बड़ हुई तो भाजपा नेताओं की गलतियों से बड़ा नुकसान होगा। 

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