पूर्वराज्यमंत्री कासनिया टीम, कांग्रेस विधायक गेदर टीम और निर्दलीयों की कड़ी टक्कर.खुली रिपोर्ट.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 23 अगस्त 2026.
पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया नगरपालिका सूरतगढ़ में भाजपा का बोर्ड बनाएंगे और यह उनकी अबकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी भी बन गई है। नगरपालिका चेयरमैन पद महिला के लिए आरक्षित होने के बाद अनेक लोग चुनाव मैदान से कन्नी काट निकल गये कुछ भी हो किसी का भी बोर्ड बने कोई भी चेयरमैन बने उनको कुछ भी लेनादेना नहीं। लेकिन शासकीय संचालन यहां कासनिया के पास है इसलिए भाजपा नगरपालिका बोर्ड बना कर भजनलाल शर्मा की भाजपा सरकार को सौंपना है। इसके तुरंत काबाद पंचायत समिति में भी प्रधान भाजपा का बनाने की भी जिम्मेदारी कासनिया की है। नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड बनने के बाद इस हवा के प्रभाव से पंचायतों में जीत कर प्रधान बनाने में उत्साह रहेगा। भाजपा की संगठानत्मक योजनाएं भी शुरू हो चुकी है और चुनाव प्रभारी जसवंत सिंह ईंदा,जिला प्रभारी दशरथसिंह व अन्य की देखरेख और नेतृत्व में बैठकें और कार्यक्रम शुरू हो चुके हैं।
भाजपा और उसके राजनैतिक तथा विभिन्न क्षेत्रों में फैले अग्रिम संगठन भी सक्रिय हो चुके हैं। सभी जानते हैं कि भाजपा के विभिन्न संगठनों की संख्या और शक्ति कांग्रेस संगठनों से अधिक प्रभावी है और अधिक शक्तिशाली भी है।
* नगरमंडल अध्यक्ष गौरव बलाना से जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान,पूर्व विधायक अशोक नागपाल व नगर के पदाधिकारी तथा जिला कार्यकारिणी के स्थानीय पदाधिकारी सब बैठकों और फील्ड में सक्रिय हो चुके हैं।
* पिछले नगरपालिका चुनाव में भाजपा ने 45 वार्डों में से 44 में प्रत्याशी उतारे जिनमें 12 ही जीत पाए थे। उस समय कांग्रेस का बोर्ड बना। कांग्रेस के 22 पार्षद जीते जो बहुमत से 1 कम रहे मगर ओमप्रकाश कालवा अध्यक्ष चुने गये। कालवा ने बाद में रामप्रताप कासनिया की अगुवाई में भाजपा की सदस्यता ले ली और बोर्ड भाजपा की अध्यक्षता का बन गया। अब ओमप्रकाश कालवा भी भाजपा की जीत और भाजपा का बोर्ड बनाने को सक्रिय हैं। पिछले चुनाव से अब स्थिति काफी बदल चुकी है।
* भाजपा की चुनावी टक्कर किससे है यह जानलेना भी जरूरी है। भाजपा की टक्कर कांग्रेस से है बड़े रूप में यही दिखता है लेकिन जनता की चर्चाओं में आ रहा है कि लगभग 10 वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों से टक्कर होगी। पिछले चुनाव में भी निर्दलीय काफी जीते लेकिन अधिकांश अध्यक्ष के साथ हो गये थे। आकलन अभी भी यह आ रहा है कि जो संभावित 10 निर्दलीय जीतेंगे,उनमें से अधिक भाजपा के साथ होंगे। वैसे भी सत्ता धारी पार्टी के साथ रहकर ही हर कार्य कराने में सफलता मिलती है और यही रास्ता अपनाने की बुद्धिमत्ता व चतुरता होती है। भाजपा से चेयरमैन के लिए प्रयासरत आरती शर्मा अपना वार्ड आरक्षित होने के बाद दूसरे वार्ड से ईच्छुक है लेकिन वहां सबसे बड़ा प्रश्न भी लोगों में घूम रहा है कि जो परिवार सामने खड़े हैं,कुछ कांग्रेस की टिकट मांग रहे हैं, तब उनमें वोटों के बंटवारे में आरती शर्मा को जीत के वोट कहां से मिलेंगे? जो लोग आरती शर्मा ( नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष 1994-1999)को अपने वार्ड से लड़ाना चाहते हैं वे कांग्रेस के वोट नहीं तोड़ सकते। भाजपा वार्डवासी टिकटार्थी को टिकट नहीं देकर बाहरी वार्ड की आरती शर्मा को टिकट देने से नाराजगी होगी और वह घातक होगी व आरतीशर्मा के विरूद्ध जाएगी। इससे पहले भाजपा नेता पहले लोगों को राजी करें। यदि राजी नहीं कर पाते हैं तो वहां आरतीशर्मा को भाजपा की टिकट पर सभी भाजपाई मिल कर भी जीता नहीं पाएंगे। आरतीशर्मा के लिए बड़ा विचारणीय काल है और देखते हैं उनका अपना निर्णय क्या होता है। नगरपालिका की पूर्व अध्यक्ष काजल छाबड़ा भी इस चुनाव में चेयरमैन की आशा में हैं लेकिन उनको भी अपने वार्ड में कड़ी टक्कर कांग्रेस से है। वैसे चेयरमैन पद के लिए और परिवार भी प्रयास में हैं लेकिन उनकी प्रसिद्धि नहीं है।
* भाजपा की टक्कर कांग्रेस से होगी और उस कांग्रेस में नगरपालिका के इस चुनाव की गतिविधियों में कितनी तूफानी है? ऐसा लग रहा है कि कांग्रेस में बैठकें तो हुई हैं मगर काम ढीला ढाला सा दिखाई दे रहा है। कुल 45 वार्डों में से 30 में टिकट फार्म भरने के प्रति कुछ उत्साह है और 10-12 में खामोशी सी चल रही है। जहां तेजी लाना बहुत जरूरी है, तेजी नहीं लाई जाती है तो यह बड़ी कमजोरी रहेगी।
कांग्रेस में टिकट विधायक डुंगरराम गेदर बांटेंगे। गेदर ने पिछले विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा के प्रत्याशी रामप्रताप कासनिया को मोटे तौर पर 55 हजार से अधिक वोटों से हराया था। लेकिन गेदर जीत के वे हालात कायम नहीं रख पाए। ये क्या कारण रहे, उनमें कुछ विचारणीय हैं जो गेदर की स्थिति का परदा हटाते हैं।
रामप्रताप कासनिया के पुत्र संदीपकासनिया की अध्यक्षता का विवेकानंद स्कूल को हुई भूमि आवंटन के बाद मौके पर भूमि दिए जाने के नगरपालिका बैठक में कुछ कांग्रेस पार्षदों ने प्रस्ताव का साथ दिया और कुछ बैठक से अनुपस्थित रहे थे। कांग्रेस की व्हिप का उल्लंघन हुआ। कांग्रेस के सदस्यों से जवाब तलब किया गया लेकिन उन्होंने उत्तर तक नहीं दिया। गेदर ने इस पर कहा था कि प्रस्ताव का पक्ष करने वाले पार्षदों और बैठक से अनुपस्थित रहने वालों को भविष्य में चुनावों में कांग्रेस की टिकट नहीं दी जाएगी। नगरपालिका चुनाव आते ही यह मुद्दा फिर उठ गया। वे प्रस्ताव का साथ देने वाले इतने ताकतवर हैं कि उनकी अपनी कांग्रेस है। वे अपने दम पर जीतते हैं। उनको कांग्रेस की टिकट की जरूरत नहीं। वे निर्दलीय जीत जाएंगे। असल में कांग्रेस को उनकी जरूरत है। विवेकानंद स्कूल को जमीन दिए जाने के प्रस्ताव पर डुंगरराम गेदर की यह घोषणा कितनी कारगर होगी? परसराम भाटिया ने भूमि प्रकरण में विरोध में राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में रिट लगाई और चुपचाप एक तारीख में ही वापस ले ली। डुंगरराम गेदर को भी रिट वापसी का नहीं बताया न सलाह ली। परसराम भाटिया हर समय गेदर के साथ रहते हैं। भाटिया कांग्रेस के सूरतगढ़ ब्लॉक के अध्यक्ष हैं। क्या गेदर भाटिया के विरूद्ध भी कोई निर्णय करेंगे। टिकट नहीं देंगे जैसा कोई और निर्णय ले पाएंगे?
* भाजपा और कांग्रेस की 23 अगस्त 2026 को चुनावी बड़ी बैठकें हुई है। दोनों बैठकों में नेताओं में जोश और टिकटार्थियों की भीड़ रही है। सबसे बड़ा प्रमाण यह भी है कि भाजपा टिकट के लिए लोगों की भीड़ कासनिया की कोठी और उस गली में रोजाना पहुंच रही है। यह भीड़ कांग्रेस से अधिक देखी जा रही है। दि 23 अगस्त 2026.
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