सूरतगढ़:अभी जीत का दावा नहीं कर सकती भाजपा.स्पेशल रिपोर्ट.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 21 अगस्त 2026. नगरपालिका चुनाव में अपना वार्ड आरक्षित होने के बाद दूसरे वार्डों में जमीन तलाश में लगे बड़ी पार्टी भाजपा के कार्यकर्ताओं के चेहरों पर हवाईयां उड़ रही है।
दूसरे वार्ड के चेहरों को तवज्जो नहीं दी जा रही। भाजपा की पूर्व पालिकाध्यक्ष आरती शर्मा का निवास वार्ड आरक्षित होने के बाद वे दूसरे वार्ड में जमीन तलाश रही है जहां भाजपा की तरफ से बहुत पुराने नेता जयप्रकाश सरावगी परिवार द्वारा टिकट की मांग है। वार्ड वासी के अनुसार सरावगी को टिकट से हटाना असंभव है। वहीं कोठारी परिवार की ओर से कांग्रेस के टिकट का दावा है।
* भाजपा की संगठनात्मक बैठक बाहर से आए आकलन कर्ता पर्यवेक्षक के नेतृत्व में बैठक भी हुई है। कुछ नेता नेतियां और वार्ड अध्यक्षों ने भाग लिया। बात भाजपा का बोर्ड बनाने की हुई। मगर आज की तारीख में भाजपा बोर्ड बनाने की घोषणा करने की स्थिति में पावरफुल नहीं है। अमूमन पार्टी में चारों दिशाओं में चलने वाली स्थिति होती है मगर यहां तो पार्टी नेता नेतियां संगठन पदाधिकारी दस दिशाओं में चल रहे हैं। एक दूसरे को सुहाते नहीं। इस कड़वा सच्च को भाजपा को मानना ही होगा कि किसी भी नेता नेतियों ने नगरपालिका में भ्रष्टाचार पर कभी मुंह नहीं खोला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का स्वच्छ भारत अभियान यहां बुरी तरह से फेल कर दिया गया। पूजा शर्मा यहां 27 महीने रही लेकिन उसने शहर को साफ नहीं कराया। उसके भ्रष्टाचार और अपनी सग्गी भाभी बबीता शर्मा के अवैध प्रमोशन पर भाजपा पूरी चुप रही। उसकी जांच के बजाय किशनगगढ बास नगरपालिका में ईओ पद पर नियुक्ति मिल गई। भाजपा के अध्यक्ष पद के चेहरों के लिए स्वच्छ भारत अभियान का फेल होना बड़ी बाधा है। पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया, जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान,पूर्व विधायक अशोक नागपाल एक ने भी स्वच्छ भारत अभियान को फेल होते देखकर भी नगरपालिका प्रशासन को सचेत नहीं किया। समाचारों में हालात आते रहने पर भी परवाह नहीं की गई। यह लिखा जाता रहा कि नगरपालिका चुनाव में ये लापरवाहियां सवाल बनेगी, फिर भी नहीं जागे। अब भी प्रेशर पर किसी सामान्य वार्ड में ओबीसी या दूसरे वार्ड वासी को टिकट दिया तो बाहरी का जीतना संभव नहीं।
👍 कुछ वर्ष पहले 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले संघ के अंग्रेजी के मुखपत्र ओर्गनाईजर में लेख था कि पुराने वरिष्ठ कार्यकर्ताओं को पूछते रहें सलाह लेते रहें। तब एक सहभोज हुआ था लेकिन उसके बाद सब बातें हवा हो गई। भाजपा में लोकतंत्र सेनानी भी हैं लेकिन 1975 में इंदिरा गांधी द्वारा लगाए आपातकाल में विरोध कर जेलों में जाने वालों की किसी भी कार्यक्रम में पूछ नहीं और न निमंत्रण। मंचासीन करना तो बहुत पीछे। सवाल है कि इसमें पूर्व राज्यमंत्री रामप्रताप कासनिया और भाजपा जिलाध्यक्ष शरणपालसिंह मान और पूर्व विधायक अशोक नागपाल सबसे बड़े दोषी हैं। आज भाजपा सूरतगढ़ में जिस स्थान पर खड़ी है उसमें ये दोनों जवाबदेह हैं। ०0०