शुक्रवार, 16 अक्तूबर 2015

गुरूशरण छाबड़ा के आमरण अनशन पर भाजपा व कांग्रेस में राजनीति:


चिकित्सालय से छूटते ही आमरण अनशन पर बैठ गए:
कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाया:
भाजपा ने छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा बताया:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 16 अकटूबर। पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा को आमरण अनशन से उठा कर पुलिस ने चिकित्सालय में भर्ती कराया था मगर 15 अक्टूबर शाम को चिकित्सकों ने फिट करार देकर डिस्चार्ज कर दिया और छाबड़ा वापस शहीद स्मारक पर पहुंचे तथा आमरण अनशन पर बैठ गए।
छाबड़ा के अनशन पर कांग्रेस और भाजपा में जमकर राजनीति शुरू हो गई है।
कांग्रेस नेताओं ने छाबड़ा के अनशन पर गौर नहीं करने पर भाजपा सरकार को संवेदनहीन बताया है। इस पर भाजपा ने छाबड़ा को कांग्रेस का मुखौटा करार दिया है। मामला समाचारों के कारण और गरमा गया है जिसका कारण यह रहा है कि छाबड़ा के चिकित्सालय से छूटते ही पुन: शहीद स्मारक पर पहुंच कर अनशन शुरू कर देने की भनक पड़ते ही चौदह पन्द्रह चैनल रिपोर्टर वहां पहुंच गए तथा अचानक सभी चैनलों पर यह समाचार और दृश्य दिखलाए जाने लगे।
छाबड़ा ने मोबाइल पर शाम को पांच बजे वार्ता में बताया कि भाजपा नेता अनशन से बौखलाए हुए हैं। छाबड़ा ने कहा कि 2 अक्टूबर को शहीद समारक जयपुर में अनशन शुरू किया था। पुलिस ने 6 अक्टूबर को उठाकर चिकित्सालय में गहन चिकित्सा इकाई में भर्ती करा दिया जहां पर अनशन जारी था। इसके बाद सरकार के निर्देश पर पुलिस ने उनको ऐसे वार्ड में अपराधियों के साथ रखा जहां पर उनका ईलाज किया जाता है। सरकार डराना व झुकाना चाहती थी लेकिन जब कुछ भी नहीं कर पाई तब 15 अक्टूबर को चिकित्सकों से फिट की रिपोर्ट करवाई और चिकित्सालय से डिस्चार्ज करवा दिया।
छाबड़ा ने कहा कि उन पर कांग्रेस का मुखौटा होने का आरोप लगाना अनुचित है क्योंकि शराबबंदी और शक्तिशाली लोकपाल की मांग को लेकर आमरण अनशन अशोक गहलोत की सरकार में शुरू किया था।
नोट: गुरूशरण छाबड़ा आरएसएस के कार्यकर्ता हैं। जनसंघ से राष्ट्रीय पार्टी के सदस्य रहे हैं।आपातकाल 1975 के विरोध में जेल गए और जेल में भी आमरण अनशन किया था। जनता पार्टी के टिकट पर 1977 में सूरतगढ़ से विधायक चुने गए थे। उस समय जनता युवा संघ में जब वसुंधरा राजे उपाध्यक्ष थी तब छाबड़ा भी उपाध्यक्ष ही थे।
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