सोमवार, 26 दिसंबर 2022

सूरतगढ़:पूर्व विधायक सिद्धु की माता बसकौर की पुण्यतिथि पर अरदास व लंगर.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 26 दिसंबर 2022.

पूर्व विधायक स.हरचंद सिंह सिद्धु की माता बसकौर पत्नी बदनसिंह की पुणयतिथि 26 दिसंबर को गुरूद्वारा गुरूसिंह सभा में अरदास एवं लंगर सेवा की गई। हरचंद सिंह की पत्नी श्रीमती निर्मलकौर ने बताया कि बसकौर जी धार्मिक वृत्ति की पुण्यात्मा थी।०0०


भूमाफिया अलग थलग पड़े। पालिका घेरने की घोषणा वाले फड़फड़ाते नेता डरे.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *


* भूमाफिया संग फोटो खिंचवाने से डरे टिकटार्थी  नेता।*


सूरतगढ़ नगर पालिका क्षेत्र में अतिक्रमण के विरुद्ध लगातार हो रही कार्यवाहियों के चलते कुछ दिनों से कुछ नेता फड़फड़ा रहे थे।उनकी घोषणाएं सोशल मीडिया पर हो रही थी कि नगर पालिका ने अतिक्रमण तोड़ने में भाई भतीजावाद किया है, दोहरी नीति अपनाई है, अनेक भूखंड तोड़े नहीं है,रंजिश से अतिक्रमण तोड़े हैं। इसलिए नगरपालिका का घेराव किया जाएगा। ऐसे वक्तव्य सोशल मीडिया पर नेताओं के फोटो सहित भी आ रहे थे लेकिन 25 दिसंबर से अचानक उन पर ब्रेक लग गया।

* नए चेहरों के रूप में अगला चुनाव लड़ने के इच्छुक कुछ नेता भाग भाग कर भूमाफिया संग अपने फोटो खिंचवा रहे थे। वक्तव्य दे रहे थे। प्रदर्शन कर रहे थे।ज्ञापन दे रहे थे। वे सब डर से भाग गए।

* भू माफिया के अतिक्रमण को गरीबों के बता रहे थे लेकिन अचानक सभी गायब हो गए। विधानसभा का चुनाव उनको दूर भगा ले गया।


 उन नेताओं को मालूम हो गया कि भू माफिया के साथ में किसी प्रदर्शन में उग्रता आ गई। कहीं सरकारी कार्यवाही का विरोध हो गया।कहीं झगड़ा बढ़ गया तो उसमें फंस जाएंगे। मुकदमा होने पर चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। इसलिए नए-नए नेता अब नजर नहीं आए हैं और आगे भी नजर नहीं आएंगे।

*कुछ नेताओं को लग रहा था कि सोशल मीडिया में नगरपालिका का घेराव करने के समाचारों से उनका कद बढ़ जाएगा उनके वोट बढ़ जाएंगे सूरतगढ़ में चुनाव लड़ने के रास्ते खुल जाएंगे। वे सभी नेता रातों-रात गायब हो गए।वे डर गए या उनको शुधि आ गई,अकल आ गई। 


* भूमाफिया संग खड़े होने से उनकी बदनामी होने लगी और छवि धूलधूसरित होने लगी।

भू माफिया अलग-थलग पड़़ गये हैं। आम लोग पहले भी भूमाफिया के साथ नहीं थे। यदि कोई पार्षद भूमाफिया के संग खड़ा हुआ और सबूत बन गये कि नगरपालिका की भूमि को खुर्द बुर्द कर रहे हैं, अवैध मलबा दिखा कर बेच रहे हैं तो शिकायत और जांच के बाद पार्षद पद भी गंवा देंगे। नगरपालिका की कार्यवाही सीख दे रही है।


* अब सूरतगढ़ में भूमाफिया के अतिक्रमण और करवाए  अतिक्रमण बड़े-बड़े भूखंड निरंतर ध्वस्त होने की कार्यवाही होगी,ऐसी संभावना है।०0०

26 दिसंबर 2022.


करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

(राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत) 

सूरतगढ़ (राजस्थान)

******





सूरतगढ़ वार्ड 1 में विशाल भूखंड पर अतिक्रमण नोहरा किस भूमाफिया का है?कब ध्वस्त होगा?

 

विशाल नोहरा किसकी शह पर बना।


* करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ़ 26 दिसम्बर 2022.


नगर पालिका द्वारा अतिक्रमण तोड़ने के फोटो समाचारों के छपने प्रसारित होने से हड़कंप मचा है मगर नगरपालिका प्रतिनिधियों की शह पर  भू माफिया निरंतर अतिक्रमण कर रहे हैं। क्योंकि अभी तक भू माफियाओं के विरुद्ध कोई मुकदमा नहीं हुआ और कहीं भी हजारों लाखों रुपए का मलबा जब्त नहीं हुआ। 


वार्ड नंबर 1 में भू माफिया टिब्बे तक जा पहुंचे हैं। गरीब आदमी सिर छिपाने तक का छोटा सा  कब्जा भी इस महंगाई के जमाने में बड़ी मुश्किल से कर पाता है।

 बहुत बड़े बड़े नोहरे जिनमें बीसियों हजार इंटे लगती है। विशाल भूखंड आधा लाख से एक लाख रू से कम में घेरा नहीं जा सकता। ऐसे बड़े-बड़े नोहर भू माफिया ही बना सकते हैं जिनकी भूमि कीमत ही दस पंद्रह लाख या और अधिक होती है।

 वार्ड नंबर 1 में एक बहुत बड़े नोहरे के निर्माण के समाचार हैं। यह वार्ड नगरपालिका के उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी का है। वार्ड पार्षद को अतिक्रमण का समाचार तो देर सवेर मिलता ही है। वार्ड नंबर 1 में बहुत बड़े नोहरे के बनने के समाचार है और उसके फोटो यहां दिए जा रहे हैं। यदि यह नोहरा पट्टे सुदा जमीन पर है तो इसका मालिक घंटे 2 घंटे में बोल जाएगा।

 लेकिन ऐसा कुछ है नहीं। भयानक सर्दी के अंदर जहां लोग रजाईयों में दुबके हैं। सूरज के दर्शन कुछ घंटे के लिए होते हैं।वहां ऐसे मौसम में विशाल क्षेत्र में बड़े-बड़े नोहरों का निर्माण किया जाना किसी एक गरीब का खेल नहीं हो सकता। गरीब अपने हाथ से जैसे-तैसे निर्माण करता है लेकिन यह नोहरा देखकर लगता है कि अनेक मिस्त्रीयों की ओर से दबादब चिनाई करके यह खड़ा किया गया है। यहां पर कोई रहता नहीं है। रहने के कोई सबूत नहीं है।

* उपाध्यक्ष के क्षेत्र में या पास में भी या नगर पालिका क्षेत्र में कब्जा होता है तो उनकी ड्यूटी और फर्ज बनता है कि उस कब्जे को तड़वाया जाए। अध्यक्ष और उपाध्यक्ष संपूर्ण नगर पालिका क्षेत्र के होते हैं और संपूर्ण नगर पालिका क्षेत्र उनका है, इसलिए अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष को भी यह मालूम करना चाहिए कि यह अतिक्रमण किस भूमाफिया ने करवाया है। यह तुरंत तोड़ा जाना चाहिए इसकी कार्यवाही भी नगरपालिका से तुरंत करवाई जानी चाहिए।

एक दिन का भी समय अतिक्रमण करने वाले  भूमाफिया को नहीं दिया जाना चाहिए। नगर पालिका प्रशासन सरकार का प्रतिनिधि होता है और कोई जनप्रतिनिधि सूचना नहीं दे तब भी अतिक्रमण तुड़वाने की कार्यवाही करनी चाहिए।

पालिका प्रशासन और अतिक्रमण निरोधक दस्ते को तुरंत इस नोहरे का  मालूम करना चाहिए और भूमाफिया का हो और उसे किसी का संरक्षण हो तब भी बिना विलंब किए ध्वस्त कर नगरपालिका की कीमती भूमि को मुक्त कराना चाहिए। भूमाफिया के विरुद्ध मुकदमा और इसकी इंटे आदि जब्त करने की कार्यवाही भी की जानी चाहिए।०0०




रविवार, 25 दिसंबर 2022

पाकिस्तान की घुसपैठ अभी जारी है। 'दिनमान' 1986 में मेरी रिपोर्ट:करणीदानसिंह राजपूत

 

पाकिस्तान की ओर से घुसपैठ कोहरे और आंधी में बहुत बढ़ जाती है। पाकिस्तान ने अपनी स्थापना के बाद से ही भारत में घुसपैठ तस्करी जासूसी आतंक फैलाने में कोई कसर बाकी नहीं रखी है। पाकिस्तानी सरकार चाहे चुनी हुई हो चाहे सैनिक रही हो उसकी सोच किसी न किसी तरह से भारत को अस्थिर करने की रही है और वह हर हरकत में असफल रही है। 

पाकिस्तान के जन्म के बाद  सबसे पहला कदम कबायलियों को जम्मू कश्मीर में भेजकर एक प्रकार से युद्ध घोषित किया था। 22 अक्टूबर 1947 को इस आक्रमण में पाक सेना भी थी।

उसके बाद सन् 1965 और 1971 के युद्ध भी हुए जिनमें पाकिस्तान को पराजय का बहुत गहरा धक्का लगा था। राजनीतिक गतिविधियों के कारण भारत ने जीते हुए इलाके भी लौटा दिए थे। पाकिस्तान को सीधे रूप से कुछ समझाया नहीं जा सकता। 

पाकिस्तान की घुसपैठ जासूसी तस्करी आतंकवादी नशीले पदार्थ भेजने की हरकतें पूरे सीमा क्षेत्र में यत्र तत्र होती रही है और अभी भी हो रही है।

वर्तमान में पाकिस्तान की ओर से आतंकियों को भेजने की कार्रवाई।विस्फोटक भेजने की कार्रवाई और नशीले पदार्थ भेजने की कार्रवाई जोरों पर है। आजकल पाकिस्तान नशीले पदार्थ भेजने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी कर रहा है। हिंदुस्तान में आने वाले पाकिस्तानी ड्रोन मुकाबले से नष्ट भी होते हैं भाग भी जाते हैं।

हमारे संपूर्ण सीमा क्षेत्र पर सीमा सुरक्षा बल की अग्रिम पंक्ति के जवान सुरक्षा के लिए हर मौसम में सजगता के साथ अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं।


 पाकिस्तान की घुसपैठ जासूसी तस्करी आदि पर मैं करीब सन् 1972  के आसपास से लिखने लगा था। मैं भारत जन साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन करता था तब सन् 1973 में तो एक विशेषांक भी निकाला था। 

पाकिस्तान के दुष्कर्म के विरुद्ध मेरे लेख रिपोर्ट आदि सचित्र देश के प्रमुख समाचार पत्रों में पत्रिकाओं में छपते रहे हैं। अभी भयानक कोहरा चल रहा है। इन दिनों पाकिस्तान की घुसपैठ विभिन्न तरीके से बढ़ जाती है।

इसी अवसर पर मैं 11 मई 1986 में दिनमान में प्रकाशित मेरी रिपोर्ट यहां चित्र के रूप में प्रस्तुत कर रहा हूं। दिनमान महत्वपूर्ण सप्ताहिक रहा। टाइम्स ऑफ इंडिया का यह प्रकाशन बहुत बड़ा प्रकाशन माना जाता रहा। मेरे लेख रिपोर्ट आदि साप्ताहिक दिनमान में बहुत छपी थी।

यहां पाकिस्तान से संबंधित एक रिपोर्ट है जिसका शीर्षक है सावधान:सीमा पर घुसपैठ अभी जारी है। 

नए एवं वरिष्ठ पत्रकार राजनीतिज्ञों के ध्यान के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।






25 दिसंबर 2022.

 करणी दान सिंह राजपूत,

 स्वतंत्र पत्रकार,

(राजस्थान राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ (राजस्थान)

*******



मील की चुनौती:हमारे अतिक्रमण हैं तो बताओ और तुड़वाओ।भूमफिया संग नये नेता फंस रहे.

 


* करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ़ नगर पालिका के अतिक्रमण ध्वस्त करने के अभियान से भूमाफिया और सहयोगी वार्ड प्रतिनिधि की नींद हराम हो रही है वहीं अतिक्रमणकारियों का साथ देने की चक्कर में नए मूर्खानंद नेता अपना नाम और अपनी गर्दन फंसा रहे हैं।

 नए नेताओं को लग रहा है कि अतिक्रमणकारियों का साथ देने उपखंड कार्यालय के बाहर भीतर जोर शोर से हंगामा करने से उनके वोट बढ़ रहे हैं जो आगामी विधानसभा चुनाव 2023 में उनको विजय श्री दिला देंगे।

* नगर पालिका प्रशासन पर आरोप लगाया जा रहा है कि रंजिश से अतिक्रमण को तोड़ा जा रहा है। जब यह साबित हो रहा है कि अतिक्रमण है तो नगरपालिका को तोड़ने का अधिकार है। किसी अतिक्रमणकारी का नंबर पहले आया और किसी का अब आगे आ सकता है।

 जिनके अतिक्रमण टूटे जिनके पक्ष में नए नेता उपखंड कार्यालय पर पहुंचे उनका नाम लोग भू माफिया के रूप में लेते हैं। एक मलबा खरीदा और उसमें लाभ कमाया और फिर मलबा बेचा। इस तरह से जिनके अतिक्रमण टूटे और नये नेताओं का समर्थन हुआ उनके पास अनेक कब्जे और होने के भी चर्चाएं हैं।

* नए नेता जिनको वोटों की आशा है वे कम से कम यह तो पता कर ही सकते हैं कि क्या संबंधित व्यक्ति उस मकान में रहता था या उसका  और किसी स्थान पर बसेरा है। कुछ भी देखा भाला नहीं और अतिक्रमणकारी के साथ नारे लगाते पहुंच गए। ऐसे नए नेताओं को क्या कहा जाए जो बिना सोचे समझे अपना भविष्य खुद बिगाड़ने में लगे हैं।

* नये नेता उत्तेजित होकर भाषण भी देते हैं कि सरकार से टक्कर ले लेंगे नगरपालिका प्रशासन से टक्कर ले लेंगे। अतिक्रमणकारी को बचाने के चक्कर में रास्ते रोकने सरकारी कार्य में बाधा डालने,कर्मचारियों से मारपीट जैसे आरोप के किसी मुकदमे में फंस गए जो नाकाबिले जमानत हो, तब चुनाव के नामांकन में भी संकट आ सकता है। ऐसी धाराएं भी है जिनमें फंसने के बाद में जेल जाने के बाद में नामांकन निरस्त हो जाता है।

** समझदार नेता कभी भी अतिक्रमणकारी के साथ नहीं देखा जाता इसलिए यह जो शोर मचाने वाले हैं इनको मूर्खानंद कहना सही लगता है। इसे जानबूझकर अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना कहते हैं। यहां एक स्थिति स्पष्ट मुकदमा स्वयं को लड़ना होता है। 

विधानसभा क्षेत्र सूरतगढ़ के अंदर लाखों वोटर हैं वहां पर चंद  अतिक्रमणियों के वोटों पर अपनी जीत संभावित मानना खुद को चुनाव से पहले मार लेना है। सोचे समझे कोई मौत को गले नहीं लगाता। कोई दलदल में भी फंसना नहीं चाहता। वहां पर यह नए नेता फंस रहे हैं। 

* कुछ लोग तो कहीं भी धरना प्रदर्शन हो वहां पर अपनी उपस्थिति के लिए घंटे 2 घंटे बैठ जाते हैं क्योंकि उनके घर पर कोई काम नहीं है। दुकानों पर व्यवस्था है या बच्चे बैठते हैं।पिता को काउंटर पर या गले पर बैठने की जिम्मेदारी नहीं है। वे उपखंड कार्यालय पर सामने मौजूद रहते हैं।ये टाईम पास नेता हरेक धरने प्रदर्शन में उपस्थित हो जाते हैं। समाचार पत्रों में अगर 1 साल के 100  फोटो छपे हुए होतो 70- 80 फोटो में ऐसे नेताओं के चेहरे नजर आते हैं। 

** जहां पर असल में काम करने की आवश्यकता है।  जहां असल में जरूरत है।जहां असल में सैकड़ों लोग और उससे भी अधिक लोग पीड़ित हैं। सार्वजनिक कार्य है,असल में वहां पर चुनाव लड़ने के ईच्छुक नेताओं को पहुंचना चाहिए और उसमें कोई हर्ज भी नहीं है। वहां पर तो एक कर्तव्य माना जा सकता है लेकिन भूमाफिया को बचाने के चक्कर में यदि कोई नेता पहुंचता है तो वह उसका कर्तव्य नहीं है। ऐसे आरोपी अपराधी चुनाव में कोई काम नहीं आते और चुनाव जीत जाते हैं तो प्रतिदिन संकट पैदा करेंगे। उनके काम नहीं होंगे तो बदनाम करेंगे।

*  नगर पालिका प्रशासन द्वारा पिछले दिनों सड़कों के पास,उच्च मार्ग के पास,व्यावसायिक क्षेत्र के पास कुछ बेशकीमती अतिक्रमण तोड़े गए जिनमें नगर पालिका बोर्ड के कुछ पार्षदों के नाम चर्चाओं में हैं। जनता में खुले रूप से आरोप लग रहे हैं कि फलां फलां पार्षद के ये अतिक्रमण थे।  अभी आने वाले दिनों में ऐसे अतिक्रमण और भी टूटने की पक्की उम्मीद की जाती है। नगरपालिका के पार्षद शहर को विकसित करने के लिए आए थे या फिर अतिक्रमण करके अपनी जेबें भरने आए थे?

* नगर पालिका के चेयरमैन और वाइस चेयरमैन को भी इस अभियान में आगे रहना चाहिए क्योंकि वे भी प्रभावित होते हैं। ऐसी स्थिति में बोर्ड के प्रत्येक पार्षद का कर्तव्य बनता है कि वह अतिक्रमण करने वाले सीमित संख्या के पार्षदों का साथ नहीं दें। नगरपालिका में चैयरमैन ओमप्रकाश कालवा,वाईसचैयरमैन सलीम कुरैशी सहित 45 पार्षद हैं,सभी जनता के बीच में स्पष्ट करें कि उनका कोई अतिक्रमण नहीं है और वे किसी भी अतिक्रमणकारी का साथ नहीं देंगे, नगरपालिका की संपत्ति का सरंक्षण करेंगे बचाव करेंगे और विकास करेंगे। 

नगर पालिका में 45 पार्षद हैं और केवल पांच सात  पार्षदों ने ही भ्रष्टाचारों के विरुद्ध संघर्ष का बीड़ा उठा रखा है। वे चाहते हैं कि नगर पालिका में भ्रष्टाचार ने हो नगर पालिका में भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन हो तो बाकी पार्षद इसमें साथी क्यों नहीं है? उनकी आवाज शामिल क्यों नहीं होती।


नगर पालिका बोर्ड के 3 साल पूरे हो चुके हैं इन तीन सालों में केवल चार पांच पार्षदों की आवाज गूंजती रही है तो बाकी चुप क्यों है? 

*  नगर पालिका सूरतगढ़ के पास में जमीन है।  उसमें केवल चारदीवारी करके और लाखों करोड़ों की जमीन को सड़कों के किनारे अतिक्रमण करना और उसको आगे से आगे बेचना धंधा बन गया है और ऐसे धंधे वालों को बेशर्मी से साथ देना अनुचित है। नगरपालिका प्रशासन को अभी सख्त रवैया के हिसाब से निरंतर अभियान चलाना ही चाहिए। चाहे अतिक्रमणकारियों का साथ देने वाले उपखंड कार्यालय पर प्रदर्शन धरना करते रहें। 

* कितने पार्षद गुप्त रूप से ठेकेदार बने हुए हैं और सारे दिन पालिका में चैयरमैन कक्ष में मौजूद रहते हैं। कितने महिला पार्षदों के परिवार जन हर समय पालिका में उपस्थित रहते हैं? इस स्थिति कर भी गौर किया जाना चाहिए।


**पहले बड़े जोर शोर से और चर्चाओं में आरोप लगते रहे कि मील परिवार सड़कों के किनारे अतिक्रमण करवा रहा है जमीन हड़प रहा है। मील परिवार ने आगे बढ़कर कहा कि हमारे नाम से कहीं अतिक्रमण है तो वह तुड़वा दिया जाए। जहां भी हमारे नाम से कोई अतिक्रमण हो रहा है वह तुड़वा दिया जाए। इस बाबत पत्रकारों को नेशनल हाईवे पर बुला कर बताया गया। उसके बाद में एक पत्रकार वार्ता में पूर्व विधायक गंगाजल मील और पंचायत समिति डायरेक्टर हेतराम मील ने स्पष्ट कहा कि मील परिवार का कोई कब्जा है अतिक्रमण है तो बताएं और तुड़वाई। 

इतनी स्पष्ट चुनौती से मील परिवार अतिक्रमण की कार्रवाई अभियान से क्लीन चिट हो रहे हैं।ना कहीं गंगाजल मील का नाम आ रहा है ना कहीं हनुमान मील का नाम आ रहा है लेकिन नगरपालिका के जनप्रतिनिधियों के नाम चर्चाओं में गर्म है। 

*अतिक्रमणकारियों के अतिक्रमण तोड़ने पर नगर पालिका प्रशासन को किसी भी पार्षद की ओर से सहयोग की बधाई नहीं दी गई। एक भी पार्षद ने यह घोषणा नहीं की कि यह कार्य बहुत अच्छा हो रहा है। 

नगर पालिका की जमीन पर और भी कहीं कब्जे हैं तो उनको ध्वस्त किया जाना चाहिए। किसी भी पार्षद ने आगे बढ़कर अतिक्रमण का स्थान और अतिक्रमण बताकर हटाने की अपील भी नहीं की है।

* पार्षद एक वार्ड से एकबार ही चुना जाता है, बार-बार नहीं चुना जा सकता। पार्षद को  भविष्य का भी पता है लेकिन फिर भी चुप रहना अपने कर्तव्य से दूर भागना है।

* अभी अतिक्रमण के आरोपों से मील क्लीन चिट हो रहे हैं वहीं नये नाम उजागर हो रहे हैं और कुछ नये नेता अपनी गर्दन आरोपों में फंसा रहे हैं। नये नेताओं को चुनाव लड़ना है तो खुद को भूमाफिया लोगों और बेवजह के मुकदमों से बचाकर रखना चाहिए।०0०

25 दिसंबर 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार.

( राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ (राजस्थान)






शनिवार, 24 दिसंबर 2022

टैगोर यूथ फेस्टिवल ’युवा जोश का उत्सव' खेलकूद. सृजनात्मक. गीत संगीत नृत्य.

 





* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 24 दिसंबर 2022.


 टैगोर पी जी कॉलेज में तीन दिवसीय यूथ फेस्टिवल के दौरान खेल कूद, सांस्कृतिक एवं सृजनात्मक 150 से अधिक प्रतियोगितायों का आयोजन हुआ।   

* यूथ फेस्टिवल के प्रथम दिन टैगोर कॉलेज स्पोर्ट्स ग्राउंड में आयोजित खेल कूद प्रतियोगिता का उद्घाटन अतिथि इंटरनेशनल बॉक्सिंग एवं फिटनेस कोच श्री गुरप्रेम मान ने अंतर सदनीय खेल कूद प्रतियोगिता ध्वज फहरा कर किया।  

इस अवसर पर महाविद्यालय के डी.पी.ई. शब्बीर मोहम्मद को राजकीय सेवा में चयनित होने पर सम्मानित किया गया।

* यूथ फेस्टिवल संयोजक गगन सिंह के अनुसार 30 से अधिक खेल कूद प्रतियोगिताएं आयोजित हुई जिसमें बॉक्सिंग प्रतियोगिता छात्रा वर्ग में छेलू कँवर छात्र वर्ग में विजेंद्र विजेता रहे।   

200 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में छात्रा अनिता प्रथम आरजू द्वितीय, छात्र वर्ग में अमन दीप प्रथम तोला राम द्वितीय 400 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में आकाशदीप कौर प्रथम प्रियंका द्वितीय, स्पून रेस प्रतियोगिता में आस्था प्रथम नवनीत द्वितीय, थ्री लेग रेस प्रतियोगिता में आस्था अनामिका प्रथम मनीषा रेखा द्वितीय, केरम प्रतियोगिता में आदित्य विकास प्रथम सुदीप लोकेश द्वितीय, छात्रा वर्ग में पूनम बिंदु प्रथम उषा आरजू द्वितीय, शॉट पुट प्रतियोगिता में सोनाली प्रथम छेलू कँवर द्वितीय म्यूजिकल चेयर में अलका प्रथम जसंप्रीत द्वितीय, शतरंज प्रतियोगिता में उदय प्रथम चिराग द्वितीय, छात्रा वर्ग में मुस्कान प्रथम तनिषा द्वितीय टेबल टेनिस प्रतियोगिता में अनिरुद्ध प्रथम गजानद द्वितीय, छात्रा वर्ग में लक्ष्या गोदारा प्रथम इशिता द्वितीय, बैडमिंटन में कन्हैया प्रथम, दिशान्त द्वितीय स्थान पर रहे। कबड्डी प्रतियोगिता में टैगोर इण्डियंस विजेता, सोहेल टीम उपविजेता, छात्रा वर्ग कबड्डी प्रतियोगिता में अक्षरा टीम विजता रहे। रस्सा-कस्सी प्रतियोगिता में आस्था टीम विजेता, अलीशा टीम उपविजेता रहे। महाविद्यालय कोच अतुल यादव के निर्देशन में खेलकूद प्रतियोगिताओं का सफल आयोजन हुआ। 


💐 द्वितीय दिवस पर आयोजित सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं में अतिथि निर्णायक के रूप में महाविद्यालय एकेडमिक एडवाइजर श्रीमती मोनिका शर्मा उपस्थित रही। 

*एकल गायन में मनीषा स्वामी प्रथम, इक्षित द्वितीय, स्वरचित कविता पाठ में रमन प्रथम, कौशल्या द्वितीय, ग्रुप डांस प्रतियोगिता में वीनस एण्ड ग्रुप प्रथम, अक्षरा एण्ड गु्रप द्वितीय, सोलो डांस प्रतियोगिता में प्रेरणा प्रथम, रक्षा द्वितीय, स्किट प्रतियोगिता में सोनाली एण्ड ग्रुप विजेता रहे। ट्रेडिशनल फैशन शो में शिवानी प्रथम, भावना द्वितीय, छात्र वर्ग में दलजीत प्रथम, कुलदीप द्वितीय, इण्डो वेस्टर्न फैशन शो में देव प्रथम, लक्ष्य द्वितीय, छात्रा वर्ग में अमीषा प्रथम, ममता द्वितीय स्थान पर रहे। एकेडमिक उप प्राचार्य डाॅ0 प्रीति चुघ के निर्देशन में सांस्कृतिक प्रतियोगिताऐं आयोजित हुयी।    

* तृतीय दिवस पर आयोजित सृजनात्मक प्रतियोगिताओं साइंस एवं आर्टस एक्सिबिशन आयोजित की गई। कार्यक्रम  मेंअतिथि एवं निर्णायक राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ के असिस्टेण्ट प्रो0 श्री महबूब मुगल, शिक्षाविद् श्री राजेन्द्र छीम्पा एवं नोटेरी एडवोकेट श्रीकान्त सारस्वत एवं व्याख्याता सुरेन्द्र लेघा थे।  अध्यक्षता डॉ सुशील जेतली प्रबंध निदेशक ने की।

महाविद्यालय निदेशक डाॅ0 सचिन जेतली ने बताया कि महाविद्यालय की स्थापना से लेकर प्रतिवर्ष आयोजित होने वाले यूथ फेस्टीवल का उदेश्य विद्यार्थियों में शिक्षा के साथ-साथ अन्य प्रतिभाओं को निखारकर विद्यार्थियों का सर्वागींण विकास करना है।

* इस अवसर पर आयोजित बेस्ट फोटोजैनिक फैस प्रतियोगिता में सोनाली, स्नेहा द्वितीय, रंगोली प्रतियोगिता में अनामिका ग्रुप प्रथम, मारवाडी ग्रुप द्वितीय, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता में ज्योतिरादित्य प्रथम, राधा द्वितीय, कोलाज मेकिंग प्रतियोगिता में रितु प्रथम, अलीशा एण्ड सेविंदा द्वितीय, बेस्ट आउट आफ वेस्ट प्रतियोगिता में सोनाली एण्ड सेविंदा प्रथम, अलीशा द्वितीय, मेंहदी प्रतियोगिता में अल्का प्रथम, जश्नप्रीत द्वितीय स्थान पर रहे। सांइस वर्किंग माॅडल में साॅलर वाटर प्यूरीफायर माॅडल प्रथम, स्मार्ट स्टीक फाॅर ब्लाइण्ड द्वितीय, नाॅन- वर्किंग माॅडल में हरबेरियम माॅडल प्रथम, फोटो सिंथेसिस माॅडल द्वितीय स्थान पर रहे। उप्रप्राचार्य (एडमिन) पुरूषोतम सिंह, विभागाध्यक्ष नुपूर सचदेवा एवं मदन लाल के निर्देशन में यूथ फैस्टीवल के तृतीय दिवस पर सृजनात्मक प्रतियोगिताऐं तथा साइंस एवं आर्टस फेयर का आयोजन हुआ। 

* समापन अवसर पर प्राचार्य डाॅ0 राजेश मिश्रा ने आभार प्रकट किया। 

यूथ फेस्टीवल के सफल आयोजन में छात्रसंघ अध्यक्ष निलेश चैधरी, उपाध्यक्ष सैजल सेतिया, संयुक्त सचिव मनीषा, विभागाध्यक्ष श्री अश्वनी सोनी, इंजी. संजय जैन, महावीर भाम्भू, व्याख्याता सुरेश जांगिड, जितेन्द्र योगी, मेघा गुप्ता, छगन लाल, मुस्कान सोलंकी, रिया मोदी, योगेश बिश्नोई, करण शर्मा, सुमन कुमारी, कृपा जोशी, मनीष भोजक, सुशील कुमार, मीनू कुमारी, योगेश भार्गव स्टाफ सदस्य रामप्रताप, रघुवीर शर्मा इत्यादि का सराहनीय सहयोग रहा। ०0०     







शहीद उधमसिंह जयंती पर समारोह होगा. 26 दिसंबर: जलियांवाला हत्याकांड का बदला लिया. डायर को मारा.

 


* करणीदानसिंह राजपूत *

    

 शिरोमणि शहीद उधम सिंह मंच सूरतगढ़ द्वारा दिनांक 26 दिसंबर 2022 को 11 बजे शहीद उधम सिंह का जन्म दिवस हर्ष उल्लास से मनाया जाएगा।

मंच अध्यक्ष गुरचरण सिंह  ने बताया कि क्षेत्र के समस्त जनप्रतिनिधियों व आम नागरिकों को इस कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने का आव्हान मंच द्वारा किया गया है। 

* शहीद उधम सिंह चौक उपकारागृह के सामने सूरतगढ़ पर  पहुंचकर शहीद उधम सिंह को पुष्पांजलि अर्पित करें।

  

उधम सिंह: भारत का वो 'शेर', जिसकी 6 गोलियों ने लिया जलियांवाला बाग हत्याकांड का बदला


1919 में रॉलेट एक्ट के तहत कांग्रेस के सत्य पाल और सैफुद्दीन किचलू को अंग्रेजों द्वारा गिरफ्तार करने के बाद पंजाब के अमृतसर में हजारों की तादाद में लोग जलियांवाला बाग में जमा हुए थे। उन लोगों का उद्देश्य रॉलेट एक्ट का

शांति से विरोध प्रदर्शन करना था। 

अंग्रेजों के जनरल रेजिनाल्ड डायर ने अपनी फौज के साथ उन लोगों को गोलियों मार गिराया। उसका साथ उस समय पंजाब के गवर्नर रहे मिचेल ओ डायर ने दिया था।  उस नरसंहार को जलियांवाला बाग हत्याकांड का नाम दिया गया। उधम सिंह 1919 में हुए जलियांवाला बाग नरसंहार के साक्षी थे। इस नरसंहार को देखने के बाद उधम सिंह ने स्वतंत्रता की लड़ाई में कूदने और रेजिनाल्ड डायर और मिचेल ओ डायर  से बदला लेने की प्रतिज्ञा की।


कौन थे उधम सिंह?


सरदार उधम सिंह का जन्म 26 दिसंबर 1899 को पंजाब के संगरूर जिले के सुनाम गांव में हुआ था। उनके पिता सरदार तेहाल सिंह जम्मू उपल्ली गांव में रेलवे चौकीदार थे।  उधम सिंह का असली नाम शेर सिंह था। उनका एक भाई भी था, जिसका नाम मुख्ता सिंह था। सात साल की उम्र में उधम अनाथ हो गए थे। पहले उनकी मां चल बसीं और फिर उसके 6 साल बाद पिता ने दुनिया को अलविदा कह दिया था। मां-बाप के मरने के बाद उधम और उनके भाई को अमृतसर के सेंट्रल खालसा अनाथालय में भेज दिया गया था।


अनाथालय में लोगों ने दोनों भाइयों को नया नाम दिया। शेर सिंह बन गए उधम सिंह और मुख्ता सिंह बन गए साधु सिंह। सरदार उधम सिंह ने भारतीय समाज की एकता के लिए अपना नाम बदलकर राम मोहम्मद सिंह आजाद रख लिया था, जो भारत के तीन प्रमुख धर्मों का प्रतीक है। साल 1917 में उधम के भाई साधु की भी मौत हो गई। 1918 में उधम ने मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की। साल 1919 में उन्होंने अनाथालय छोड़ दिया। उधम सिंह, शहीद भगत सिंह को अपना गुरु मानते थे।

अनाथालय से निकलने के बाद उसी साल जालियांवाला बाग का नरसंहार देखा। डायर के इस करतूत पर बौखलाए उधम सिंह पर अब खून के बदले खून सवार हो चुका था और वह आक्रोश में धधक रहे थे। कहते हैं कि उधम सिंह ने जलियांवाला बाग की मिट्टी हाथ में लेकर जनरल डायर और तत्कालीन पंजाब के गर्वनर माइकल ओ ड्वायर को सबक सिखाने की शपथ ली कि जब तक इस नरसंहार के असली गुनहगार को मौत की नींद नहीं सुला दूंगा, तब तक चैन से नहीं बैठूंगा। डायर को मौत की नींद सुलाना उनका मुख्य लक्ष्य बन गया।


देश के इस नरसंहार का बदला लेने के लिए क्रांतिकारी उधमसिंह ने विदेश की तरफ रुख किया। साल 1920 में वे अफ्रीका पहुंचे। वर्ष 1921 में नैरोबी के रास्ते संयुक्त राज्य अमेरिका जाने की कोशिश की लेकिन वीजा न मिलने के कारण ऐसा हो नहीं पाया और उन्हें स्वदेश लौटना पड़ा। उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार कोशिश करते रहे और आखिरकार 1924 में वे अमेरिका पहुंचने में कामयाब हो गए। वह यहां पहुंचकर अमेरिका में सक्रिय गदर पार्टी में शामिल हो गए और फिर क्रांतिकारियों से मजबूत सम्पर्क मजबूत बनाते चले गए। उन्होंने फ्रांस, इटली, जर्मनी, रूस आदि कई देशों की यात्राएं करके क्रांतिकारियों को जोड़ा। साल 1927 में वह वापस भारत लौटे। भारत लौटकर उन्होंने भगत सिंह से मुलाकात की और इसके कुछ महीने बाद ही वे ़अवैध हथियारों और प्रतिबन्धित क्रांतिकारी साहित्य के साथ पुलिस के हत्थे चढ़ गए। उन्ह 5 साल की सजा हो गई।



इसी दौरान 1927 में जेनरल डायर की मौत ब्रेन हेमरेज से हो गई और अब उधम सिंह की निगाह माइकल फ्रेंसिस ओ ड्वायर पर थी। साल 1931 में उधम सिंह जेल से रिहा हुए। पुलिस की कड़ी निगाहें उनपर थीं और उन्हें हर दिन हाजिरी देने के नाम पर काफी प्रताड़ित भी किया जाता था।


सजा पूरी होने के बाद वे अमृतसर पहुंच गए और अपना नाम बदलकर मोहमद सिंह आजाद रख लिया। साल 1933 में पुलिस को झांसा देकर वह कश्मीर पहुंच गए और 1934 में वे इंग्लैंड पहुंचने में कामयाब हो गए।

इंग्लैंड में उधम सिंह ने किराए पर एक घर लिया और जनरल डायर को मारने की तैयारियां करने लगे। 

 


उधम सिंह के लंदन पहुंचने से पहले जनरल रेजिनाल्ड डायर की ब्रेन हैमरेज के कारण मौत हो गई।  ऐसे में उधम सिंह ने   जान को मारने पर लगाया और उसे पूरा भी किया।

*  13 मार्च 1940 को रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी की लंदन के काक्सटन हॉल में बैठक थी। वहां मिचेल ओ डायर भी भाषण कर्ताओं  में से एक था। उधम सिंह वहां समय पर पहुंच गए।


 उधम ने अपनी पिस्तौल को एक मोटी किताब में छुपाया हुआ था। पुस्तक के पन्ने काट कर उसमें पिस्तौल रखा था। मौका लगने पर उन्होंने निशाना लगाया।  मिचेल ओ डायर को 6 गोलियां लगी जिससे उसकी तुरंत मौत हो गई। 

 उधम सिंह वहीं पकड़े गए। इसके बाद उनके ऊपर मुकदमा चला और कोर्ट में उनकी पेशी भी हुई। 


4 जून 1940 को उधम सिंह को मिचेल ओ डायर की हत्या का दोषी ठहराया गया। 31 जुलाई 1940 को उन्हें पेंटनविले जेल में फांसी दे दी गई। इस तरह उधम सिंह भारत की आजादी की लड़ाई के इतिहास में अमर हो गए. 1974 में ब्रिटेन ने उनके अवशेष भारत को सौंप दिए। अंग्रेजों को उनके घर में घुसकर मारने का जो काम सरदार उधम सिंह ने किया था, उसकी हर जगह प्रशंसा हुई। वे अमर हो गए।०0०








बुधवार, 21 दिसंबर 2022

सफाई (वाल्मीकि)व चतुर्थ श्रेणी कार्मिकों के दूसरे जिलों में स्थानांतरण:गहलौत अंधेरे में रहेंगे तो खतरा।

 



* करणी दान सिंह राजपूत *


राजस्थान के स्वायत्त शासन विभाग द्वारा पिछले कुछ महीनों से नगर पालिकाओं से सफाई कर्मचारियों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों व अन्य के स्थानांतरण एक जिले से दूसरे जिले में काफी संख्या में हुए हैं और अभी भी हो रहे हैं।

* सफाई कर्मचारी लगभग सभी बाल्मीकि अनुसूचित जाति से संबंधित है और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी अधिकांश अनुसूचित जाति जनजाति या ओबीसी वर्ग के हैं। 

इनका स्थानांतरण गहलोत सरकार के लिए भारी पड़ेगा। एक जिले से दूसरे जिले में स्थानांतरण करना मतलब उस सबसे छोटी पोस्ट के कर्मचारी को जानते बुझते हुए दंडित करना है। उसके परिवार घर के  दो चुल्हे करना है। 

* ऐसा लगता है कि यह बहुत सोच और समझ कर नेतागिरी करने वाले लोग अभिशंषा या दंड देने के लिए करवाने पर तुले हुए हैं और निदेशक स्वायत शासन विभाग का इस ओर कोई ध्यान नहीं है या फिर वह ध्यान होते हुए भी कुछ सोच कर के ऐसा कर रहे हैं या उनसे करवाया जा रहा है। निदेशक से ऊपर तो स्थानांतरण करवाने का अधिकार है तो स्वायत्त शासन मंत्री ही सक्षम हैं।


** स्थानांतरण पर सरकार सवालों के घेरे में।


सफाई कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी इनसे अगर कोई भूल चूक हुई है या कोई काम नहीं करने वाला है तो क्या उसे कभी नगर पालिका के प्रशासन अधिशासी अधिकारी द्वारा नोटिस दिया गया? उससे पूछा गया? उसका जवाब अनुचित लगा हो तो उसके ऊपर कार्रवाई हो सकती है। कर्मचारी से कितनी बार पूछा गया?  यदि सफाई कर्मचारी एक जगह काम नहीं कर रहा है तो स्थानीय स्तर पर उसका स्थानांतरण दूसरी जगह किया जा सकता था। यदि कर्मचारी जानबूझकर काम नहीं कर रहा है और उसका जवाब भी सही नहीं है तो उसका स्थानांतरण जिले में कहीं किया जा सकता है।

 एक छोटे कर्मचारी को इससे छोटी कोई पोस्ट नहीं है उसको सैकड़ों किलोमीटर दूर दूसरे जिले में स्थानांतरण करना दंड देना है। 

अनेक का तो स्थानांतरण चार सौ पांच सौ किलोमीटर दूर  दूसरे जिलों में किया गया है।

दूसरे जिलों में ये स्थानांतरण हुए हैं उनकेआदेश प्रमाणित करते हैं कि जो अधिकारी स्थानांतरण आदेश पर हस्ताक्षर कर रहा है वह भी आंख मीच कर या फिर अंधेरे में स्थानांतरण कर रहा है। उस अधिकारी यानि निदेशक को खुद को कर्मचारी के पद के बारे में कोई पता नहीं है ।

स्थानांतरण आदेश पर निर्देश प्रमाणित करते हैं कि सब अंधेरे में ही किया जा रहा है।


* एक आदेश जो 1373 दिनांक 23 नवंबर 2022 को जारी हुआ। इसका नमूना उदाहरण और सबूत है। 

 यह आदेश हृदेश कुमार शर्मा निदेशक एवं संयुक्त सचिव की ओर से जारी किया गया।

इसमें एक से सात निर्देश हैं उनसे ही ऐसा स्पष्ट होता है कि श्रीमान निदेशक महोदय को कुछ मालूम नहीं है और वह केवल किसी की रड़क निकलवाने के लिए ऐसा कर रहे हैं। कौन किसकी रड़क निकलवा रहा है। यह फाइलों से मालूम पड़ सकता है जो निर्देश हैं उनसे लगता है कि सब कुछ बदले की भावना से किया जा रहा है।

1- पदनाम में कोई परिवर्तन हो तो विभाग को तुरंत अवगत कराएं अन्यथा आपकी व्यक्ति से जिम्मेवारी होगी. (मतलब स्थानांतरण तो निदेशक करें अंधेरे में करें और जिम्मेवारी नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी की होगी) 2- स्थानांतरित कर्मचारी का सेवाभिलेख प्राप्त होने के उपरांत ही इन्हें वेतन भत्ते का भुगतान किया जाए।

 3-कर्मचारी दैनिक वेतन भोगी या संविदा पर नियुक्त हो तो उसका स्थानांतरण नहीं माना जाए एवं कार्यमुक्त नहीं किया जाकर विभाग को अवगत कराएं। (यह भी अंधेरे में मतलब मालूम ही नहीं है कि जिसका स्थानांतरण किया गया है वह किस प्रकार का कर्मचारी है)

4- यदि कोई कर्मचारी सेवानिवृत्त या किसी कारण से सेवा से पृथक हो गया हो तो उसका स्थानांतरण नहीं माना जाए।( मतलब यहां भी अंधेरा. उसका निदेशालय में रिकॉर्ड ही नहीं।)

5- रिक्त पद होने पर ही संबंधित कर्मचारी को ज्वाइन कराया जाए।(यह भी अंधेरे में)

6- कार्मिक को अपने मूल पद पर ही कार्य ग्रहण कराया जाए।

7- माननीय माननीय न्यायालय के स्थगन आदेश होने पर उक्त स्थानांतरण लागू नहीं होंगे। ( निदेशालय के पास यह महत्वपूर्ण रिकॉर्ड भी नहीं)

 ** स्थानांतरण आदेश पर  एक लाइन का महत्वपूर्ण संदेश  लिखा गया है।

"यह सक्षम स्तर से अनुमोदित है।" यह दबाव कि इतना पढने के बाद कोई भागदौड़ पूछताछ तक नहीं करे। मतलब यह स्थानांतरण करवाने करने की अनुमति प्रदान की हुई है तो यह सक्षम स्तर कौन सा है?  निदेशक से बड़ा तो फिर  स्वायत्त शासन मंत्री ही होता है। 

नगरपालिकाओं में कुछ महीनों से यह खेल चल रहा है जितने स्थानांतरण किये गये हैं,उनमें सफाई कर्मचारी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कनिष्ठ सहायक स्वास्थ्य निरीक्षक फायरमैन  के स्थानांतरण भी शामिल हैं। क्या किसी को गलतियों पर कभी नोटिस दिया गया? कभी पूछा गया कोई गलती बताई गई? इसका जवाब आएगा कि नहीं। 

* अब सवाल यह सबसे बड़ा है कि सफाई कर्मचारियों में संपूर्ण राजस्थान में हजार के पीछे कोई एक कर्मचारी गैर वाल्मीकि होगा। मतलब संपूर्ण राजस्थान में सभी कर्मचारी बाल्मीकि अनुसूचित जाति के कर्मचारी हैं जिनको कभी नोटिस नहीं दिया गया।  अगर पूछा नहीं गया तो उन्होंने कोई गलती भी नहीं की। 

* ऐसे स्थानांतरण कौन करवा रहा है यह राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को मालूम नहीं है?  अशोक गहलोत की सरकार अंधेरे में है और इसका बहुत बड़ा नुकसान सरकार को हो सकता है। 

👍 मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को खुद को इस बारे में तुरंत हस्तक्षेप करते हुए पिछले तीन-चार महीनों से अब तक हुए सभी स्थानांतरण आदेशों पर तुरंत गौर करना चाहिए। सभी स्थानांतरण की जांच करवानी चाहिए कि क्या ये स्थानांतरण कर्मचारियों से जवाब तलब करने के बाद में हुए हैं? प्रत्येक कर्मचारी की स्थानांतरण फाईल में यह देखना जरूरी है कि किसने अभिशंषा की और उसमें क्या लिखा? 

👍 अगर बिना किसी कारण के ये स्थानांतरण किए गए हैं,तो मुख्यमंत्री स्वयं को इस पर समुचित और सही निर्णय तुरंत बिना देरी किए लेना चाहिए, जब तक निर्णय नहीं हो तब तक इस प्रकार के स्थानांतरण पर रोक लगाई जानी चाहिए।

 ** निदेशक का स्थानांतरण अन्यत्र करके और डीएलबी में कोई अनुभवी अधिकारी को लगाया जाना चाहिए।

* सरकार ने कोई फैसला तुरंत नहीं लिया तो इस अंधेरे का नुकसान निश्चित रूप से होने की संभावना रहेगी।०0०

21 दिसंबर 2022.

करणीदानसिंह राजपूत,

स्वतंत्र पत्रकार,

23 करनाणी धर्मशाला,

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

*******

राजस्थान पत्रिका ने छापा था सिरमौर रहे ये पत्रकार: पूरे पृष्ठ में छपे थे फोटो विवरण.

 

* करणीदानसिंह राजपूत.

राजस्थान पत्रिका के स्थापना के 50 वर्ष में सन् 2005 में पत्रिका के हर संस्करण में उन संवाददाताओं के फोटो और विवरण छपे थे जिन्होंने राजस्थान पत्रिका के समाचार संकलन प्रकाशन में सर्वोत्तम सहयोग दिया हुआ था। 

राजस्थान पत्रिका ने एक पृष्ठ पर उन संवाददाताओं के फोटो प्रकाशित किए थे और लिखा था यह हमारे सिरमौर हैं।इनके बलबूते पर चलती है पत्रिका।

 श्रीगंगानगर संस्करण में भी पूरे पृष्ठ में 7 सिरमौर  संवाददाताओं के फोटो व विवरण छपा था। इनका फोटो यहां दिया है।

बाएं से दाएं देखें करणी दान सिंह राजपूत,कृष्ण कुमार आशु,राजकुमार जैन,पृथ्वीराज शर्मा, सोमप्रकाश पारीक,मंगेश कौशिक एवं अमरपाल सिंह वर्मा।

सभी वरिष्ठ पत्रकार सेवानिवृत्त हो चुके हैं। इनमें से कुछ अभी भी पत्रकारिता एवं लेखन क्षेत्र में कार्यरत हैं।( करणीदानसिंह राजपूत के रिकॉर्ड में यह फोटो.) ०0०

सूरतगढ़:सूर्योदय नगरी का विकसित सुविधापूर्ण हरियाली कल्याण भूमि.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

 विकसित और निरंतर फल रहे सूरतगढ़ शहर में सूर्योदय नगरी भी निरंतर लगातार विकास की ओर बढ़ रही है।

 सूर्योदयनगरी क्षेत्र में वर्तमान में लगभग आधी आबादी रहती है। इस आबादी क्षेत्र में कल्याण भूमि की भी आवश्यकता रही। 

सूर्योदय नगरी में रेतीले टीलों को कट करते हुए शमशान भूमि निरंतर विकास और सुविधाओं की ओर बढ़ रही है। 

*सूर्योदय नगरी में बड़े समाज सेवक पशु सेवक समझे जाने वाले माने जाने वाले पूर्व पार्षद राजाराम गोदारा की देखरेख में पार्षद परमेश्वरी देवी की देखरेख में निर्देश में सूर्योदय नगरी के कल्याण भूमि में बहुत कुछ सुविधाएं शुरू हो चुकी है। 


* जहां रेत के टीले और सूखी धरती ही थी वहां पर सैकड़ों पेड़ हरियाली दूब फूलों के पौधे लहलहा रहे हैं।

*अंतिम संस्कार मैं सुविधाजनक शैड निर्मित है। पीने के पानी और हाथ धोने के पानी लिए भी उचित व्यवस्था है।पास में ही भव्य मंदिर है।

















पार्षद महेंद्र गोदारा ने बताया कि अभी और विकास के कार्य और सुविधाएं भी शुरू होंगी। महेंद्र ने बताया कि गर्मी के दिनों में दो वक्त सिंचाई कर पेड़ पौधे बचाए जाते हैं। पानी टैंकरों से भी मंगवाया जाता है। अभी और पेड़ लगाए जाएंगे। ०0०







यह ब्लॉग खोजें