बुधवार, 28 सितंबर 2011

करणी की बात: काल चक्र-1 : नवरात्रा में शक्ति का पूजन : नारी अत्याचारों पर चुप क्यों है आराधना करने वाले

करणी की बात: काल चक्र-1
नवरात्रा में शक्ति का पूजन : 
नारी अत्याचारों पर चुप क्यों है आराधना करने वाले

चैत्रीय नवरात्रों पर इस ब्लॉग करणी प्रेस इंडिया पर कार्य शुरू हुआ था और इतने महीनों में बहुत कुछ देने का प्रयास किया गया जो बड़े कहे जाने वाले समाचार पत्रों में नहीं होता या वे जानते हुए भी छापना नहीं चाहते तथा चैनल वाले भी देने से दूर रहते हैं। आज शारदीय नवरात्रा के प्रारंभ में करणी की बात : काल चक्र नाम से नया लेबल शुरू किया जा रहा है। जिसमें उन विषयों पर लिखा जाएगा या टिप्पणियां होंगी जो अब तक छूटे से रहे हैं। वैसे तो एक लेबल सामयिक तीखे तेवर है लेकिन कुछ विषय हैं जो उसमें लिखे नहीं जा सकते। अब इसको पूरा किया जाएगा इस नए लेबल करणी की बात में ।
    आज का दिन इस लेबल को शुरू करने के लिए सर्व श्रेष्ठ है। शक्ति दिवस और मेरी जननी मां का आशीर्वाद इस लेबल को शक्ति प्रदान करेंगे। आम जन का पठनीय सहयोग मिला है। करणी प्रेस इंडिया के पाठक निरंतर बढ़े हैं। देश में और विदेश में भी।
    आज इस लेबल के शुरू में शक्ति आराधना करने वालों से और नारी सशक्तिकरण का नारा लगाने वालों से कहना जरूरी समझता हूं। नारी अत्याचार दुराचार शीलहरण यौनशोषण पर चुपी क्यों है? घर परिवार में मामूली झगड़ों तक को दहेज अत्याचार और घरेलू हिंसा का रूप देकर तो पुलिस थानों और अदालतों में प्रकरण दर्ज करा दिए जाते हैं। लेकिन जब कोई प्रभावशाली व्यक्ति नेता मंत्री या अध्यक्ष आदि नारी पर अत्याचार करने दुराचार करने यौन शोषण करने में सामने आता है तो सब चुपी धारण कर जाते हैं। शक्ति का पूजन अर्चन करने वाले क्या रस्म अदायगी करते हैं? नारी सशक्तिकरण के नारे मंच पर भाषण और संगठन चलाने वाले सब चुप। राजनैतिक दलों  के नारी प्रकोष्ठ और अन्य नारी संगठन जिनमें पदाधिकारी और संचालक पढ़ी लिखी नारियां ही हैं वे भी चुप। राजस्थान का केबिनेट मंत्री महिपाल मदेरणा का प्रकरण हो चाहे सूरतगढ़ के नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल का यौन शोषण प्रकरण हो या कोटा जिले के थाने में महिला कांस्टेबल के साथ में सहकर्मियों का बलात्कार हत्या प्रकरण हो। सब में नारी संगठन चुप रहे हैं। राजनैतिक दलों के महिला प्रकोष्ठ भी चुप रहे हैं। इनकी दशा को देख कर तो लगता है कि केवल कागजों में ही ये संगठन और प्रकोष्ठ हैं। इनमें जो संचालक या पदाधिकारी बनाए हुए होते हैं वे भी केवल पदों को सुशोभित करने वाले होते हैं।
    एक बात मानी जा सकती है कि पुरूष संगठन चुप हैं। लेकिन महिला संगठनों को तो आवाज उठानी ही चाहिए। नारी की अस्मिता से रोजाना किसी न किसी जगह खिलवाड़ होता रहे तो वह कैसे रूकेगा? कम से कम नारी संगठनों को पत्रों के जरिए तो अभियान चला कर अपनी सजगता का परिचय देना ही चाहिए। नारी संगठन अपना विरोध दर्ज कराएं और दबाव बनाए तो फिर किसी भी राजनेता और प्रभावशाली की हिम्मत नहीं होगी कि वह नारी से दुराचार करे और अपने पद पर बैठा हुआ अध्यक्षता करे और समारोहों में अतिथि बने। सरकार के कार्य भी चलाए।
    आज इस बात के लिखने का एक उद्देश्य है कि नारी संगठन अपनी शक्ति को पहचाने और अपनी चुपी तोड़ें। कलम उठाएं और उसे देवी शक्ति के त्रिशूल तलवार बना कर शक्ति को जताएं।
करणीदानसिंह राजपूत
94143 81356

मंगलवार, 27 सितंबर 2011

भारत विकास परिषद की राष्ट्रीय समूह गान व संस्कृत समूहगान प्रतियोगिता सूरतगढ़


राष्ट्रीय समूह गान प्रतियोगिता में विजेता समूह चल वैजयंती के साथ एवं अतिथि व आयोजक -फोटो सुभाष राजपूत

राष्ट्रीय समूह गान प्रतियोगिता में विजेता समूह ट्राफी के साथ एवं अतिथि व आयोजक -फोटो सुभाष राजपूत


राष्ट्रगान में प्रस्तुति - फोटो करणीदानसिंह राजपूत



राष्ट्रगान में प्रस्तुति - फोटो करणीदानसिंह राजपूत

राष्ट्रगान में प्रस्तुति - फोटो करणीदानसिंह राजपूत

राष्ट्रगान में प्रस्तुति - फोटो करणीदानसिंह राजपूत

संस्कृत गान में प्रस्तुति - फोटो करणीदानसिंह राजपूत

संस्कृत गान में प्रस्तुति - फोटो करणीदानसिंह राजपूत

संस्कृत गान में प्रस्तुति - फोटो करणीदानसिंह राजपूत

संस्कृत गान में प्रस्तुति - फोटो करणीदानसिंह राजपूत
समारोह में संबोधित करते हुए कार्यक्रम अध्यक्ष सुनील लवंगकर, मुख्य अतिथि आर.पी.माथुर, विशिष्ट अतिथि आर.के. मेहता व डा. संजय बजाज एवं प्रांतीय पर्यवेक्षक डा.के.एल.बंसल - फोटो करणीदानसिंह राजपूत

भाररतविकास परिषद के सूरतगढ़ के अध्यक्ष वीरेन्द्र भटेजा, प्रकल्प प्रमुख धर्मेन्द्र सोलंकी, पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत,निर्णायक अशोक राजपुरोहित व श्रीमती संध्या डे।

घनश्याम शर्मा मुख्य अतिथि आर.पी.माथुर को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए। श्रीमती आर.के. मेहता को स्मृति चिन्ह प्रदान करते हुए श्रीमती संध्या डे। सचिव जयकिशन अरोड़ा व उदघोषक संचालक रमेश शर्मा संबोधित करते हुए।
भारत विकास परिषद की राष्ट्रीय समूह गान व संस्कृत समूहगान प्रतियोगिता सूरतगढ़
ब्लॉसम एकेडमी के समूह दोनों में विजेता घोषित
मुख्य अतिथि आर.पी.माथुर व समारोह के अध्यक्ष सुनील लवंगकर
विशिष्ट अतिथि आर.के.मेहता,डा. संजय बजाज, प्रांतीय पर्यवेक्षक डा.के.एल.बंसल
चंदन है इस देश की माटी,तपोवन हर ग्राम है, 
 हर बाला देवी की प्रतिमा, बच्चा बच्चा राम है।
सूरतगढ़, 27 सितम्बर, 2011. भारत विकास परिषद की राष्ट्रीय समूह गान व संस्कृत समूह गान प्रतियोगिताएं 25 सितम्बर को श्री माहेश्वरी भवन में आयोजित हुई। प्रतियोगिताओं में विभिन्न विद्यालयों के समूहों ने अपनी प्रस्तुतियां दी। दोनों ही प्रतियोगिताओं में ब्लॉसम एकेडमी के समूह विजेता घोषित किए गए। विजेता समूह को चल वैजयंती और ट्राफी प्रदान की गई। राष्ट्रीय समूह गान में हरिराम बाबा उच्च माध्यमिक विद्यालय और संस्कृत समूह गान में अंजना पब्लिक स्कूल द्वितीय रहे।
    इस समारोह में मुख्य अतिथि श्री सिमेंट के महाप्रबंधक आर.पी.माथुर ने अपने संबोधन में कहा कि आज बुरे कार्यों का प्रचार व प्रसार बहुत किया जा रहा है, जो उचित नहीं है। जो अच्छे कार्य हैं उनको प्रचारित प्रसारित किया जाने से समाज को नई दिशा कमल सकती है और लोगों की सोच बदल सकती है।
समारोह के अध्यक्ष परिषद के प्रातीय अध्यक्ष सुनील लवंगकर ने कहा कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों से समाज में एकजुटता और समरसता पैदा होती है। प्रांतीय कार्यकारिणी सदस्य डा.के.एल.बंसल ने कहा कि युवाओं में इस प्रकार के कार्यक्रमों से देश प्रेम की भावना जाग्रत होती है। विशिष्ट अतिथि श्री सिमेंट के उप महाप्रबंधक आर.के.मेहता और डा. संजय बजाज और पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत ने अपने विचार रखे।
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शनिवार, 17 सितंबर 2011

सरकार ने मुस्लिम मुसाफिर खाने के नाम से मांगे भूखंड को आवंटित करने से साफ मना कर दिया

राजस्थान सरकार ने भग्गुवाला कुआ के चिपते हुए भूखंड को  आवंटित किए जाने को स्पष्ट रूप से रोक दिया है

राज्य सरकार ने मुस्लिम मुसाफिर खाने के नाम से मांगे जा रहे भूखंड को आवंटित करने से साफ मना कर दिया
जिला कलक्टर श्रीगंगानगर की रिपोर्ट पर हुआ निर्णय
सूरतगढ़ के भग्गुवाला कुआ के चिपते हुए भूखंड का प्रकरण
नागरिक अधिकार मंच के सचिव सुरेश कौल ने किया था मुकद्दमा और शिकायतें
नगरपालिका के उन ईओज पर कार्यवाहियां जिन्होंने तथ्यहीन झूठी रिपोर्टे दी व गुमराह करते रहे- सुरेश कौल
  करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 17 सितम्बर, 2011. राजस्थान सरकार ने भग्गुवाला कुआ के चिपते हुए भूखंड को मुस्लिम मुसाफिर खाने के नाम से एक संस्था को आवंटित किए जाने को स्पष्ट रूप से रोक दिया है कि उक्त भूखंड नहीं दिया जा सकता। यह भूखंड विवादों में घिरा रहा और जिला कलक्टर श्रीगंगानगर की रिपोर्ट के बाद राज्य सरकार ने यह निर्णय किया और साफ मना कर दिया। राज्य सरकार के इस निर्णय कि सूचना अभी दो दिन पूर्व ही यहां पर प्राप्त हुई है।
    यह प्रकरण नागरिक अधिकार मंच के सुरेश कौल ने लगातार शिकायतों व मुकद्दमों में उठा रखा था कि उक्त भूखंड विवादित है और उक्त संस्था को आवंटित नहीं किया जा सकता। संस्था ने यह मामला नगरपालिका के सामने रखते हुए इस पर चालीस साल पुराना कब्जा बताया। कॉल ने नगरपालिका के ही दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप लगाते हुए शिकायतें की कि कब्जा फर्जी बताया जा रहा है। इस पर समस्त कार्यवाहियां और दस्तावेजों के आधार पर जिला कलक्टर श्रीगंगानगर ने इस पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट बना कर राज्य सरकार को भेजी।
    भग्गुवाला कुआ के पास वाला यह स्थान वर्षों से खुला ही पड़ा था और इस तरफ कुए की खेलियां थी। पशु मानव आदि इस खुले स्थान का स्वतंत्रता से उपयोग करते थे। पहले कुए की खिंचाई ऊंट से की जाती थी जिसकी चलाई पूर्व की तरफ हुआ करती थी। बीसवीं शताब्दी के साठ के दशक में नगरपालिका ने इस पर इँजन मोटरें आदि लगा कर पानी की खंचाई की थी। लेकिन संबंधित संस्था का कब्जा नहीं था। नगरपालिका ने 1978- 79 के आसपास यहां पर तारबंदी कर पार्क बनवाए। उस समय प्रदेश में जनता पार्टी का राज था। वहां पर बाद में पालिका दुकानों के रूप में भूखंड बेचने की कोशिश की तब निलामी पर अदालत के माध्यम से रोक लगवाई गई। यह निश्चित था कि उस समय उक्त संस्था का कब्जा नहीं था।
यह मामला भाजपा नगरपालिका बोर्ड में श्रीमती आरती शर्मा के कार्यकाल में 1995-2000 की अवधि में आया। बोर्ड की बैठक में प्रस्ताव आया। बाहर इसका विरोध शुरू हुआ कि कब्जे की बात तथ्यहीन है। इसके बाद में विधायक श्रीमती विजयलक्ष्मी बिश्रोई ने अपने कार्यकाल में यहां पर मुस्लिम मुसाफिर खाने के नाम से विधायक कोटे से राशि तक दिए जाने का प्रस्ताव भेज दिया था, लेकिन शिकायत कायम रही कि संस्था को कब्जे के नाम पर दी नही जा सकती और सच्चाई में वहां कब्जा भी नहीं था जो दस्तावेजों के अधार पर साबित भी किया गया। वह विधायक का प्रस्ताव भी सिरे नहीं चढ सका। उस स्थान को खाली पड़ा देख वहां पर चिनाई मिस्तरियों व मजदूरों आदि ने चिनाई के काम आने वाले सामान को  रखना उठाना शुरू कर दिया और अभी भी यही हालत है। एक बार बिना नगरपालिका की अनुमति के इस भूखंड को चार दीवारी बना कर रोकने की कोशिश की गई, लेकिन जब विरोध हुआ और झगड़े की आशंका हुई तब नगरपालिका ने तुरंत ही वह दो चार फुट का निर्माण गिरा दिया।
    अब राज्य सरकार का साफ इन्कार आ गया है। सुरेश कौल ने बताया कि नगरपालिका के अनेक अधिकारी व कर्मचारी झूठी रिपोर्ट देते रहे और दस्तावेजों तक को अनदेखा करते रहे। राज्य सरकार को गुमराह करते रहे। कौल ने बताया कि झूठी रिपोर्टें देने वालों पर अब कार्यवाही करवाई जाएगी और नगरपालिका के जो भी संबंधित अधिशाषी अधिकारियों ने जानबूझ कर यह किया उनको बख्सा नहीं जाएगा।
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बुधवार, 7 सितंबर 2011

लोकदेवता बाबा रामदेव का प्राचीन जाल मंदिर सूरतगढ़ - विशाल मेला

प्राचीन जाल मंदिर का गोल गुबंद और प्राचीन जाल

लोकदेवता बाबा रामदेव की सजी प्रतिमा

पूजन करते हुए श्रद्धालु

एक श्रद्धालु नारी अपने बच्चे को गोद में लिए जाल के तने का स्पर्श के साथ मनौती करते हुए

जाल के बांधी जाती है मनौतियों के लिए धजाएं



मेले में वेणियां खरीदने का रिवाज बहुत है- सजी हुई वेणियां

खरीदारी



मेले में गोदना गुदवाने का रिवाज- ग्रामीण युवक गोदना गुदवाते हुए

मेले में लक्कड़ी के सजावटी, घरेलू और एक्यूप्रेशर उपकरणों की दुकान

मिट्टी के रंग बिरंगे बर्तनों की बिक्री भी होती है

लोकदेवता बाबा रामदेव का प्राचीन जाल मंदिर सूरतगढ़ - विशाल मेला
बाबा का पूजन और जाल पर मनौतियों की सैंकड़ों धजा बांधी गई
विशेष रिपोर्ट और छाया चित्र :  करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 7 सितम्बर, 2011.लोकदेवता बाबा रामदेव का प्राचीन जाल मंदिर दूर दूर तक प्रसिद्ध है जहां से श्रद्धालु नर नारी आने परिवारों के साथ दर्शन पूजन को मेले पर पहुंचते हैं। यहां पर दसमी को मेला भरता है। दूर से आने वाले श्रद्धालु प्राय रात को ही आ जाते हैं और रात को ही नवमी का पूजन कर रात्रि जागरण में भाग लेकर दसमी की भोर में ही दर्शन कर लौट जाते हैं। दसमी को पूरे दिन मेला रहता है और रात के दस बजे तक चलता रहता है।
    इस प्राचीन मंदिर की प्रसिद्धि का मुख्य कारण आस्था है कि जाल की टहनी के मनोतियों की सफेद धजा यानि फरियां बांधने से वह कार्य पूर्ण होता है। श्रद्धालु चुपचाप बाबा का स्मरण करते हुए धजा बांधते रहते हैं। यह माना जाता है कि धजा बांधने वालों में स्त्रियों की संख्या जयादा होती है। बाबा के दर्शनों के लिए दूर दूर से आने वाले श्रद्धालु जो ध्वज लेकर आते हें वे जाल के तने के आगे उस ध्वज को रखते हैं। इस जाल के तने के पास भी पूजन किया जाता है। मनौतियों के लिए इस तने का स्पर्श करके भी हाथों को नेत्र और भाल के लगाते हुए बाबा भली करी का गुणगान चलता रहता है। बाबा के मंदिर में श्रद्धालु नारियल, खोपरा, लड्डू, पताशा, जलेबी, बूंदी पेड़ों का भोग लगाते हैं। इसके अलावा अनाज और झाड़ू भी चढा़ते हैं।
मेले में नाना प्रकार की दुकानें सजती हैं जिन पर खूब खरीदारी होती है।
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रविवार, 4 सितंबर 2011

 कविता
 सुहानी तुम्हारा सलोना
 - करणीदानसिंह राजपूत
सुहानी तुम्हारा सलोना,
 नन्हें नन्हें डग भरने लगा है
 आंगन से भी बाहर,
 वह निकलने लगा है
 तोषु तुम्हारा प्यारा,
 दादा दादी का दुलारा
 भारत का वह प्यारा,
 मुस्कुराते फूल जैसा
 पिल्ले के कान खेंचता,
 नाचने लगा है
 .....सुहानी तुम्हारा
 दादा दादी मामा पापा,
 तुतलाने लगा है
 भुआ फूफा को वह,
 पहचान ने लगा है
 कुल्फी वाले की घंटी,
 वह जानने लगा है
 बंदर को देख वह,
 खिलखिलाने लगा है
 हाथी है उसका प्यारा,
 गुब्बारा उड़ाने लगा है
 .....सुहानी तुम्हारा
 पेड़ पर बैठी चिडिय़ा को,
 बुलाने लगा है
 फूलों की क्यारी में,
 जाने लगा है
 डाली को पकड़ते,
 कहीं कांटा चुभ ना जाए
 कहीं रो ना जाए प्यारा,
 यह ध्यान रखना
 ..... सुहानी तुम्हारा
 घर के आगे सड़क कंकरीली,
 तोषु के पांव कोमल,
 कहीं  लग ना जाए कंकर
 यह ध्यान रखना
 .......................
 - करणीदानसिंह राजपूत
 स्वतंत्र पत्रकार,
 23, करनाणी धर्मशाला,
 सूरतगढ  -राजस्थान- 335 804
 मो. 94143 81356

शनिवार, 20 अगस्त 2011

माँ बाप का साथ निभाती है बेटियां, नसीब बुलंद हैं उनके, जिनके होती है बेटियां- छात्रा टीना

अल्ट्रा साऊंड मशीन का दुरूपयोग रोका जाने के लिए सख्त कानून बनाया जाए-छात्रा करणजीत कौर
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की विराट हर्ष कान्वेंट सी.सै.स्कूल में 
गर्भस्थ शिशु संरक्षण पर एक विचार गोष्ठी
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 20 अगस्त। गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से 17 अगस्त 2011 को विराट हर्ष कान्वेंट सी.सै.स्कूल में गर्भस्थ शिशु संरक्षण पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।
    छात्रा करणजीत कौर ने कहा कि अल्ट्रा साऊंड मशीन का दुरूपयोग किया जाने से गर्भ में पल रही कन्याओं को मार डालने का सिलसिला चल रहा है। इसके उपयोग के लिए कोई सख्त कानून बनाने की आवश्यकता है। छात्रा टीना ने कविता के माध्यम से अपने विचार प्रगट किए। माँ बाप का साथ निभाती है बेटियां, नसीब बुलंद हैं उनके, जिनके होती है बेटियां,छात्रा सुचित्रा ने कहा कि कन्याओं की भ्रूण हत्या समाज में सबसे घृणित कार्य है। छात्र गौतम ने कहा कि सरकार की समाज की अपीलों को अधिक से अधिक प्रचारित किया जाना चाहिए कि कन्याओं की हत्या किया जाना बंद किया जाए। अभिषेक टाक ने कहा कि शहरी क्षेत्र में शिक्षा अधिक होते हुए भी कन्या भ्रूण हत्या का अपराध सर्वाधिक हो रहा है। छात्रा सिमरन ने कहा कि देवी की पूजा करने वाले समाज में कन्याओं की हत्या क्यों की जा रही है? छात्रा मानवी ने अंग्रेजी माध्यम में सेव गल्र्स सेव फ्यूचर की बात कही। छात्रा प्रियांशी ने भी कन्या भ्रूण हत्या रोकने पर जोर दिया।
    व्याख्याता कुसुम सिंवाल ने कहा कि कन्या के मामले में समाज को और अधिक शिक्षित करने की आवश्यकता है। व्याख्याता जितेन्द्र सारस्वत ने कहा कि देश भर में लिंगानुपात बढ़ता ही जा रहा है जो चिंताजनक है। व्याख्याता राहुल ने कहा कि वक्तव्य दिया व विद्यार्थियों को संकल्प दिलवाया कि वे  भ्रूण हत्या रोकने में मदद करेंगे।
    गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया, राजस्थानी साहित्यकार मनोज स्वामी,प्रयागचंद अग्रवाल ने गर्भ में भ्रूण संरक्षण पर विचार प्रगट किए। प्राचार्य अनिल धानुका ने कहा कि यह गोष्ठी सार्थक रही है। मंच संचालन व्याख्याता संदीप मुंजाल ने किया। रिपोर्ट 17 अगस्त 2011
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शनिवार, 13 अगस्त 2011

रिपोर्ट: 10 अगस्त 2011.
कन्या दो कुलों की विकास यात्रा में अपना योगदान देती है
कन्या को बचाए जाने का संकल्प दिलाया गया
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का आयोजन
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 12 अगस्त। गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने पर दस अगस्त को सूर्यवंशी बाल उच्च माध्यमिक विद्यालय में विचार गोष्ठी हुई जिसमें कन्या और पुत्र को समान बताते हुए विचार आए।
    छात्रा यासमीन ने कहा कि कन्या दो कुलों की विकास यात्रा में अपना योगदान देती है। छात्र गौरी शंकर ने कहा कि प्रकृति ने दोनों को ही सृष्टि के निर्माण के लिए समान रूप में पैदा किया है तो इनके बीच में भेद नहीं किया जाना चाहिए। कुमारी रजत ने कहा कि कन्या नहीं बचायेंगे तो बहु कहां से लाऐंगे। छात्र संदीप कुमार ने कहा कि कन्या को अमंगलकारी मानते हुए उसकी हत्या भ्रूण में ही की जाने लगी है। हमें समाज की सोच बदलनी होगी कि कन्या मंगलकारी है और परिवार की शुभ चिंतक भी। छात्र सूरजभूकर ने कहा कि लडक़ी कुल की मर्यादा रखने वाली होती है। छात्रा हेमलता ने कहा कि कन्या को किस तरह से बचाया जाये पर समाज को सचेत किया जाना चाहिए। दीपिका ने भी कन्या को बचाने की अपील की।
    गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया, साहित्यकार मनोज स्वामी, पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत ने कन्या की समाज में जरूरत पर अनेक उदाहरण दिए। मुरलीधर पारीक ने कन्या को बचाए जाने का संकल्प दिलाया जिसको हाथ उठा कर छात्र छात्राओं ने स्वीकार किया। संरक्षक प्रयागचंद अग्रवाल ने भाषण देने वाले छात्र छात्राओं को पुरस्कार वितरित किए व विचार रखे। विद्यालय के व्यवस्थापक प्रेमसिंह सूर्यवंशी ने विचार रखे एवं कार्यक्रम का संचालन किया।
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया विचार रखते हुए- फोटो करणीदानसिंह राजपूत
अपने विचार रखते हुए मनोज स्वामी, करणीदानसिंह राजपूत, प्रेमसिंह सूर्यवंशी, प्रयागचंद अग्रवाल और मुरलीधर पारीक-  फोटो करणीदानसिंह राजपूत
विचार रखते हुए छात्र छात्राएं- फोटो करणीदानसिंह राजपूत
कार्यक्रम में उपस्थित छात्र छात्राएं - फोटो करणीदानसिंह राजपूत
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शुक्रवार, 12 अगस्त 2011

कन्या दो कुलों की विकास यात्रा में अपना योगदान देती है

रिपोर्ट: 10 अगस्त 2011.
कन्या को बचाए जाने का संकल्प दिलाया गया
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का आयोजन
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 12 अगस्त। गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने पर दस अगस्त को सूर्यवंशी बाल उच्च माध्यमिक विद्यालय में विचार गोष्ठी हुई जिसमें कन्या और पुत्र को समान बताते हुए विचार आए।
    छात्रा यासमीन ने कहा कि कन्या दो कुलों की विकास यात्रा में अपना योगदान देती है। छात्र गौरी शंकर ने कहा कि प्रकृति ने दोनों को ही सृष्टि के निर्माण के लिए समान रूप में पैदा किया है तो इनके बीच में भेद नहीं किया जाना चाहिए। कुमारी रजत ने कहा कि कन्या नहीं बचायेंगे तो बहु कहां से लाऐंगे। छात्र संदीप कुमार ने कहा कि कन्या को अमंगलकारी मानते हुए उसकी हत्या भ्रूण में ही की जाने लगी है। हमें समाज की सोच बदलनी होगी कि कन्या मंगलकारी है और परिवार की शुभ चिंतक भी। छात्र सूरजभूकर ने कहा कि लडक़ी कुल की मर्यादा रखने वाली होती है। छात्रा हेमलता ने कहा कि कन्या को किस तरह से बचाया जाये पर समाज को सचेत किया जाना चाहिए। दीपिका ने भी कन्या को बचाने की अपील की।
    गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया, साहित्यकार मनोज स्वामी, पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत ने कन्या की समाज में जरूरत पर अनेक उदाहरण दिए। मुरलीधर पारीक ने कन्या को बचाए जाने का संकल्प दिलाया जिसको हाथ उठा कर छात्र छात्राओं ने स्वीकार किया। संरक्षक प्रयागचंद अग्रवाल ने भाषण देने वाले छात्र छात्राओं को पुरस्कार वितरित किए व विचार रखे। विद्यालय के व्यवस्थापक प्रेमसिंह सूर्यवंशी ने विचार रखे एवं कार्यक्रम का संचालन किया।

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बुधवार, 10 अगस्त 2011

बोए जाते हैं बेटे, ऊग आती हैं बेटियां, आगे बढ़ाए जाते हैं बेटे, बढ़ जाती हैं बेटियां

रिपोर्ट: 8 अगस्त 2011.
बेटी के रूप में एक फूल तेरी कोख में सोया है मां
बोए जाते हैं बेटे, ऊग आती हैं बेटियां, आगे बढ़ाए जाते हैं बेटे, बढ़ जाती हैं बेटियां
माताओं के मदिरों में जाते और बेटों की कामना करते हैं
गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने पर जागृति उच्च माध्यमिक विद्यालय में विचार गोष्ठी
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का आयोजन
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 10 अगस्त। गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने पर आठ अगस्त को जागृति उच्च माध्यमिक विद्यालय में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता प्रधानाचार्य सुरजाराम कारगवाल ने की। छात्र छात्राओं ने भाषणों व कविता पंक्तियां के माध्यम से कण कण को जगा देने वाले विचार रखे जिनमें यह प्रमाणित किया कि नारी किसी भी रूप में पुरूष से कम नहीं है फिर कोख में कन्याओं की हत्या किया जाना जघन्य पाप है जिसे हर हालत में रोका जाना चाहिए।
    इस गोष्ठी में छात्रा अंजु चाहर ने कहा कि गांव गांव में इस अभियान का प्रचार प्रसार करना चाहिए।
    छात्रा मोनिका ने कन्या हत्या को क्रूर हत्या बताते हुए कहा किस पापी ने बेटी के खून से दामन भिगोया है। उसने कहा कि माताओं के मंदिरों में जाते हैं और वहां पर बेटे की कामना करते हैं कि बेटा नाम रोशन करेगा। उसने कविता के माध्यम से भी बात रखी। कविता की पंक्तियां थी, बेटी के रूप में एक फूल तेरी कोख में खिला है मां।
    छात्र कालूसिंह ने कन्या हत्या को महापाप बताया। छात्र धर्मपाल ने कहा कि प्रकृति ने नर नारी को बराबर स्थापित करते हुए पैदा किया है। इसके बावजूद बेटी बेटे में भेद क्यों किया जाता है? छात्रा किरण कारगवाल ने कहा कि यह महापाप रोकना किसी एक के वश में नहीं है, इसके लिए सभी को मिल जुल कर प्रयास करना चाहिए।
    छात्रा खुशबू ने जोरदार अभिव्यक्ति दी, बोए जाते हैं बेटे,ऊग आती हे बेटियां, आगे बढ़ाए जाते हैं बेटे,आगे बढ़ जाती है बेटियां। छात्रा शकुन्तला ने कहा कि बेटियों को अभिशाप समझना बंद किया जाना चाहिए। छात्र दीपक स्वामी ने कहा कि बेटे निर्थक घूमते फिरते हैं, मगर बेटियां तो हर समय घर के काम में हाथ बंटाती रहती है। छात्रा ममता तंवर ने कहा कि बेटों का है मान जगत में बेटी का कोई मान नहीं, और इसी सोच के कारण कन्या वध हो रहा है। उसने कहा कि इस सोच को बदला जाने से ही कुछ लाभ मिल सकता है। छात्रा सीता नाथ ने कहा कि बेटियां हर परीक्षा परिणाम में बाजी मार ले जाती है, फिर भी उनका तिरस्कार होता है। इस हालत को समाज में बदलना ही होगा।
    प्रधानाचार्य सुरजाराम कारगवाल ने अपने भाषण में नर नारी के बीच में बढ़ रहे अनुपात पर चिंता प्रगट की और विद्यार्थियों को भू्रण हत्या रोकने का संकल्प दिलाया।
    गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से साहित्यकार मनोज स्वामी अपने राजस्थानी अंदाज में दोहों के माध्यम से बात कही। स्वामी ने दोहों में दर्द को उजागर किया। स्वामी ने कहा कि हमें हर स्थान पर कन्या भ्रूण हत्या का विरोध करना चाहिए। समित के संरक्षक प्रयागचंद अग्रवाल और किशन स्वामी ने भी अपने विचार रखे तथा भ्रूण हत्या रोकने की अपील भी की।
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रविवार, 31 जुलाई 2011

गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने पर टैगोर सेन्ट्रल अकादमी सी.सै.स्कूल में विचार गोष्ठी

गर्भस्थ शिशु सरंक्षण समिति का  टैगोर सेन्ट्रल अकादमी सी.सै.स्कूल में विचार गोष्ठी का आयोजन

विचार रखते  समिति अध्यक्ष परसराम भाटिया, करणीदानसिंह राजपूत,मनोज स्वामी, व्याख्याता कर्मसिंह और निदेशक मोहित जेतली

विचार रखते हुए छात्र छात्राएं


रिपोर्ट: 30 जुलाई 2011
आल्ट्रा साऊंड मशीन पर रोक लगाने की मांग और नारी किसी से कम नहीं विचार आए
गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने पर टैगोर सेन्ट्रल अकादमी सी.सै.स्कूल में विचार गोष्ठी
गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का आयोजन
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 31 जुलाई। गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से गर्भ में कन्या भ्रूण की हत्या रोकने पर टैगोर सेन्ट्रल अकादमी सी.सै.स्कूल में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता शिक्षण संस्था के निदेशक मोहित जेतली ने की जिसमें छात्र छात्राओं ने आल्ट्रा साऊंउ मशीन का दुरूपयोग मानते हुए इस पर रोक लगाने की मांग तक कर डाली और नारी किसी से कम नहीं का बखान हुआ जिसमें कहा गया कि गुणों की खान हे नारी तो कन्या भ्रूण हत्या क्यों की जा रही है? इस पर रोक लगाई जाए।
    छात्र विश्वेन्द्रसिंह ने भ्रूण में कन्या की हत्या किए जाने में कहा कि आल्ट्रा साऊंड का दुरूपयोग किया जा रहा है तथा चिकित्सक इसका उपयोग सही नहीं करते हैं। विचार व्यक्त करते हुए छात्र इतना भावुक हो उठा कि मशीन पर रोक लगाए जाने की मांग तक कर डाली। छात्र ललित ने समाज में जागरूकता लाने व नारी शिक्षा को बढ़ावा दिए जाने का सुझाव दिया। आरती पारीक ने कहा कि समाज में पुरानी अवधारणा को बदलना होगा कि केवल बेटे ही सेवा करते हैं तथा बेटियां तो पराए घर में चली जाऐंगी। छात्रा जयश्री बुडानिया ने कहा कि दहेज प्रथा बंद की जाए यह बात भी प्रचारित की जाए की बेटियां निरंतर आगे बढ़ रही हैं तथा कोई भी क्षेत्र उनकी पहुंच से बाकी नहीं रहा है।
    मुख्य वक्ता करणीदानसिंह राजपूत ने मशीन के दुरूपयोग को रोकने का कहा और बताया कि समाज में ब्याह पर दिखावे का चलन बंद किया जाना चाहिए। राजपूत ने कहा कि बेटी को जो उपहार दिए जातें हैं उनका प्रदर्शन पीहर वाले ही करते हैं। इसके अलावा ससुराल में बहु के गुणों का पूछने के बजाय प्रथम परिचय में यह पूछा जाता है कि बहु क्या लाई है? राजपूत ने कहा कि इन दिखावा रिवाजों का चलन बंइद कर दिया जाए तो समाज का बहुत बड़ा हित हो जाएगा। राजपूत ने कहा कि हमारे तो हर त्यौंहार रिश्तों के गीतों संगीतों कथाओं से जुड़े हैं और कन्या ही पैदा नहीं होगी तो वे रिश्ते ही खत्म हो जाऐंगे। हमारे त्यौंहारों का तो कोई महत्व ही नहीं रह जाएगा। राजपूत ने कहा कि बहन नहीं होगी तो राखी किससे बंधवाई जाएगी, दीवारें तो राखी बांधेगी नहीं। राजपूत बताया कि टैगोर महा विद्यालय में एक छात्र ने विचारों में कहा कि राखी क्या कम्प्यूटर से बंधवाओगे। राजपूत ने कहा कि  बुढ़ापे में भी आज बेटियां मा बाप की अधिक सेवा करती पाई गई हैं।
    राजस्थानी साहित्यकार मनोज स्वामी ने राजस्थानी दोहों में दर्द उभारते हुए बेटी का वर्णन किया जिससे परिचर्चा का माहौल एक बार तो बेटी की विदाई जैसा हो गया। स्वामी ने यह भी बतलाया कि भ्रूण में किस तरह से काट कर हत्या की जाती है। उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता लाने से ही कार्य रूक पाएगा।
समिति के अध्यक्ष परसराम भाटिया ने समिति की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि इस कार्यक्रम के तहत ही जल्दी टैगोर महिला शिक्षक प्रशिक्षण महा विद्यालय में विभिन्न महा विद्यालयों की प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।
    संस्था के निदशक मोहित जेतली ने कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए विद्यार्थियों का आह्वान किया तथा सहयोग का संकल्प तक करवाया जिसमें विद्यार्थियों ने अपने हाथ उठा कर स्वीकृति दी।
    इस कार्यक्रम की एक खूबी रही कि संयोजन व्याख्याता कर्म सिंह ने अनेक घटनाओं व कविताओं के मुखड़ों को सुनाते हुए सांगों पांग किया।

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