मंगलवार, 4 अप्रैल 2023
सोमवार, 3 अप्रैल 2023
सूरतगढ:आमरण अनशन पर जुलेखां और हरबक्सकौर बराड़ बैठीः।
*करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ 3 अप्रैल 2023.
सूरतगढ जिला बनाओ अभियान में आज दोपहर में आमरण अनशन पर जिला परिषद सदस्य जुलेखां पत्नी फलकशेर राठ निवासी
करम अली की ढाणी ( सूरतगढ तहसील) और हरबक्सकौर बराड़ ( सूरतगढ)
बलराम वर्मा को आज आमरण अनशन से पुलिस उठा ले गई। उसके बाद जुलेखां और हरबक्सकौर बराड़ को आमरण अनशन पर बैठाया।।०0०
आमरणअनशनकारी बलराम वर्मा की हालत बिगड़ी.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ 3 अप्रैल 2023.
सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान के तहत आमरण अनशन पर बैठे कांग्रेसी नेता बलराम वर्मा की पांचवें दिन आज तबीयत बिगड़ गई। पुलिस ने वर्मा को अनशन स्थल से उठाया और राजकीय चिकित्सालय में भर्ती करवा दिया।
बलराम वर्मा ने 30 मार्च को आमरण अनशन शुरू किया था। ०0०
रविवार, 2 अप्रैल 2023
सूरतगढ जिला बनाओ: सातों टंकी से उतरे: प्रशासन से सोमवार को वार्ता
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ 2 अप्रैल 2023.
सूरतगढ जिला बनाओ मांग को लेकर पानी की टंकी पर चढेंं सातों जने वार्ता के आश्वासन पर नीचे उतरे।
सूरतगढ जिला बनाओ अभियान समिति के 11 सदस्यीय दल की सोमवार 3 अप्रैल को 11 बजे प्रशासन शासन से पहली वार्ता होगी।
सूरतगढ जिला बनाओ की मांग को लेकर
क्रांतिकारी छात्र नेता रामू छिंपा, कमल रेगर,शक्ति सिंह भाटी,अशोक कड़वासरा,अजय सहारण, सुमित चौधरी और भाजपा नेता राकेश बिश्नोई शनिवार को टंकी पर चढ गये थे जिससे पूरे शहर में हलचल मच गई थी। सातों 24 घंटे बाद वार्ता का आश्वासन मिलने पर उतरे। ०0०
ब्लॉसम अकादमी शिक्षण संस्था में चित्र प्रदर्शनी 400 चित्र.जीवन प्रकृति दर्शन।
* सचित्र रिपोर्ट:करणीदानसिंह राजपूत *
जीवन और प्रकृति को संपूर्ण रूपों में चित्रों में ब्लॉसम अकादमी शिक्षण संस्था माणकसर में प्रदर्शनी को देखा और देखता रहा।
* अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री अरविंद जाखड़ ने प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। एक रेखांकन उन्होंने भी किया और संस्था को भेंट किया।
ब्लॉसम के संचालक श्री अनिल चुघ और हेमा चुघ से बात हुई। वर्ष में एक बार ऐसी
प्रदर्शनी लगाई जाती है। इस वर्ष की प्रदर्शनी में 400 से अधिक चित्र शामिल किए गए।
मेरे साथ राजस्थानी के प्रसिद्ध साहित्यकार मनोजकुमार स्वामी सूरतगढ, राजस्थानी की साहित्यकार रेखा स्वामी मेड़ता, मनरेगा श्री गंगानगर के लोकपाल अनिल धानुका भी थे।
(2 अप्रैल 2023.)
सात भगतसिंह रूप टंकी पर: सूरतगढ को जिंदा बनाने को कुर्बानी को तैयार.
* करणीदानसिंह राजपूत *
शहीदे आजम भगतसिंह के सात क्रांतिकारी रूप सूरतगढ में नये तौरतरीकों से जान डालने के लिए अपने को मिटाने का निर्णय करके पानी की टंकी पर चढे और सर्दी बरसात तूफानी हवाओं में
रात काट कर बता भी दिया।
क्रांतिकारी छात्र नेता रामू छिंपा, कमल रेगर,शक्ति सिंह भाटी,अशोक कड़वासरा,अजय सहारण, सुमित चौधरी और राकेश बिश्नोई की ताकत ने मार्ग तो दिखा दिया जिस पर चलना है ताकि सूरतगढ जिला घोषित हो।
इन सातों युवाओं ने घोषणा की है कि वे शहीद-ए-आजम भगत सिंह के मार्ग पर चलते हुए सूरतगढ़ को जिला बनाने के लिए अपनी कुर्बानी देंगे। उनकी कुर्बानी को याद रखा जाए। इसी मांग को लेकर वे 1 अप्रैल की शाम को हाउसिंग बोर्ड पुरानी कॉलोनी की पानी की टंकी पर चढ़ गए। सूरतगढ को जिला बनाओ के नारे लगाते हुए दृश्य बदल डाला।
👍 यह एक्शन फिल्म की शूटिंग नहीं हो रही थी। यह तमाशा भी नहीं था। सब कुछ सच्च सबके सामने हो रहा था।
👍 नेता कहूं तो जंचता नहीं अभिनेता ही सही शब्द और आचरण है कि आए यह सब देखा और फिर एक एक कर चले गए।
👍 नेताओं और अन्य नेतागिरी करने वाले जिला बनाओ अभियान समिति के सदस्यों पदाधिकारियों और लोगों के परिवार है बाल बच्चे हैं काम है सो एक एक लौट गए। आधी रात के बाद केवल पन्द्रह होंगे जो मौजूद रहे।
👍 भगतसिंह के सात क्रांतिकारी रूप रामू छिंपा, कमल रेगर,शक्ति सिंह भाटी,अशोक कड़वासरा,अजय सहारण, सुमित चौधरी और राकेश बिश्नोई के परिवार माता पिता भाई बहन घर नहीं हैं जो वे टंकी पर चढे और उसे क्रांति स्थल बनाया। ताकि मरते जा रहे शहर सूरतगढ में नयी जान पैदा हो जाए और बीमार नेता बीमार लोग स्वस्थ हो जाएं और जोश भरे निर्णय ले सकें। लेकिन जो आचरण नेताओं का और अन्य लोगों का सामने आता रहा है उससे तो लगता है कि अनेक नेताओं की बीमारी ठीक नहीं हो पाएगी। बीमार स्वस्थ होना चाहे तभी डाक्टर की वैद्य की दवाईयां काम करती है।
* क्रांतिकारियों को टंकी पर चढे रात बीत गई। नेता रात को सो गए। रविवार का दिन निकल आया सूर्य निकल आया। यह पूरा दिन सोचने समझने और नये कदम उठाने के लिए है। सूरतगढ के नेता, संचालन समिति, व्यापारी दुकानदार सोच लें और मन मजबूत कर निर्णय कर आगे बढेंं। हवाई बातें नहीं करें भाषाओं से घरौंदे नहीं बनाएं। जीवित हैं तो जीवित फैसले लें। कठोर फैसले से मर नहीं जाएंगे। नाटक नहीं हों बहाने नहीं हों। स्टेयरिंग कमेटी में साठ सत्तर नही होते। स्टेयरिंग तो एक के ही हाथ में होता है जो वाहन चलाना जानता हो। संचालन समिति में संघर्ष समिति यानि एक्शन कमेटी में पांच सात ही हो जो कड़े फैसले लेने वाले हो जिनके आचरण में किंतु परंतु बहाने नहीं हों। नेताओं को भी टालना हो तो एक्शन कमेटी में लेना जरूरी नहीं, उसी को लिया जाए जो बोल्ड हो। इतने दिनों की बैठकों और कार्यक्रमों से मालुम हो ही गया होगा सच्चे नेताओं का। एक्शन कमेटी का अध्ययक्ष भी दूसरा हो जो ताकतवर हो। आंदोलन अब नये रूप में बदल गया है क्रांतिकारी रूप में। अब ढीले रूप में नहीं चलाया जा सकता। एक्शन कमेटी सूरतगढ बाजार शहर के लिए भी जो फैसले ले वे ताकतवर हों दुकानों और घरों में बैठे आंदोलन नहीं चलाए जा सकते।
टुकड़े टुकड़े थकाने वाले फैसले ंर कलम नहीं हो जिनका शासन प्रशासन पर कोई असर नहीं हो। सरकार की नीति होती है अनदेखा करतज हुए आंदोलनों को थका थका कर खत्म कर देना और इस स्थिति में कुछ लोग उनके साथ शामिल भी हो जाते हैं।
* क्रांतिकारी निर्णय और कदम उठाने के लिए भगतसिंह का रूप बन जाना होगा और जीवित भी रहना होगा।
* आमरण अनशनकारियों को भी ध्यान में रखें।
** सात क्रांतिकारियों की सेल्फी फोटो सुबह करीब साढे आठ बजे की है। जोश है। यह फोटो रामू छींपा को फोन कर मंगवाई थी०0०
काम करो बुद्धि से जीवन जियो शुद्धि से:अब तो कर्म और जीवन में से खोट त्याग दें
* करणीदानसिंह राजपूत *
आपाधापी वाले आधुनिक कलयुग में व्यक्तितंत्र और सरकारीतंत्र का कर्म और जीवन चल रहा है ऐसे में हीराबेन का यह संदेश काम करो बुद्धि से और जीवन जियो सुधि से संपूर्ण बदलाव करने वाला संदेश है।
हीराबेन ने यह संदेश मृत्यु से कुछ दिन पहले ही अपने पुत्र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। यह पवित्र संदेश नरेंद्र मोदी ने आमजन के सामने प्रस्तुत कर दिया।
हीराबेन का अपने पुत्र को दिया यह संदेश संपूर्ण भारत का संदेश बन गया है। सभी लोगों को विचार करना चाहिए कि हमारे कर्म और जीवन में क्या सत्य है या कुछ भी नहीं बचा है। कर्म में पवित्रता नहीं रही बल्कि खोट घुसा ली है। जीवन भी शुद्धता के बजाय कालिमायुक्त हो चुका है। जब कर्म और जीवन में खोट हो तो वहां अपना पराया समाज और राष्ट्र सभी से खोटा व्यवहार ही किया जाता है। ऐसा ही हो रहा है। हर तरफ भ्रष्टाचार व्याप्त है एवं फैलता जा रहा है और भ्रष्टाचार करने वाले समाजसेवा का ढोंग करते हुए भी हर स्थान पर उपस्थित रहते हैं। सभी यह देख भी रहे हैं।
कर्म में बुद्धि और जीवन में शुचिता का यह संदेश उन लोगों के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो नरेंद्र मोदी का जयकारा लगाते हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी के आचरण का पालन नहीं करते हैं।
* प्रजातंत्र में राजनैतिक दल और निर्वाचन महत्वपूर्ण होते हैं। यही देश का संचालन और हर व्यवस्था करते हैं। इन पर ध्यान आवश्यक है।
कैसे हैं राजनैतिक दल और कैसे हो गए हैं उनके पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता?
सभी दल और उनके पदाधिकारी व कार्यकर्ता संस्कारवान और पवित्र होने का प्रचार करते हैं। क्या उसमें कर्म और जीवन शुद्ध है? यह बहुत बड़ा प्रश्न है?
राजनैतिक दलों के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता साधन संपन्न हैं जिनके पास में पर्याप्त और पीढ़ियों तक की पूंजी है। उनके कर्म कैसे हैं? उनका जीवन कैसा है?वे देश के लिए और अपने लिए कैसा सोचते हैं तथा करते हैं।? दलों के प्रमुख कुछ भी कहें लेकिन जनता को उनके कर्म और जीवन में पवित्रता दिखाई नहीं देती। सच्च तो यह है कि पवित्रता होगी तभी तो दिखाई देगी।
हीराबेन ने यह संदेश मोदी जी को दिया और मोदी जी ने यह जनता के बीच पहुंचा दिया। इस
संदेश के बाद हरेक को अपने भीतर झांक लेना चाहिए कि शुद्धता में कितने प्रतिशत मिलावट वाला जीवन अपनाए हुए हैं?
* स्वयं अपनी शुद्धता का कितना ही प्रचार करें लेकिन अन्य लोगों को तो मालूम होता है कि कितना खोटा जीवन जी रहे हैं और कितने खोटे कर्म है।!
👍 हीराबेन के इस संदेश के बाद सभी दलों के कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों में चाहे वे किसी गांव में ढाणी में हो चाहे देश की राजधानी दिल्ली में ऊंचे से ऊंचे पद पर बैठे हों, सभी को चिंतन कर लेना चाहिए।
👌 हीराबेन का यह संदेश आज राष्ट्र का संदेश बन गया है और इसका पालन देश को और अधिक ऊंचाइयों पर पहुंचाएगा।०0०
30 दिसंबर 2022.
करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
( सन् 1966 से पत्रकारिता)
* राजस्थान सरकार के सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय से अधिस्वीकृत*
सूरतगढ़ ( राजस्थान )
94143 81356
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अपडेट 2-4-2023.
शनिवार, 1 अप्रैल 2023
सूरतगढ:छात्रों युवाओं ने मोर्चा संभाला:टंकी निर्णय:नेता फेल.समिति में बदलाव जरूरी.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ 1 अप्रैल 2023.
सूरतगढ़ जिला बनाओ मांग को लेकर छात्रों और युवाओं ने क्रांतिकारी कदम उठाते हुए पानी की टंकी पर चढ़ गए। सूरतगढ जिला बनाओ नारे लगाते हुए सरकार को चेतावनी दी।
पानी की टंकी पर चढने वाले क्रांतिकारियों में
रामू छिंपा, कमल रेगर,शक्ति सिंह भाटी,अशोक कड़वासरा,अजय सहारण, सुमित चौधरी और राकेश बिश्नोई हैं।
इन सातों युवाओं ने घोषणा की है कि वे शहीद-ए-आजम भगत सिंह के मार्ग पर चलते हुए सूरतगढ़ को जिला बनाने के लिए अपनी कुर्बानी देंगे। उनकी कुर्बानी को याद रखा जाए। इसी मांग को लेकर वे 1 अप्रैल को शाम को हाउसिंग बोर्ड पुरानी कॉलोनी की पानी की टंकी पर चढ़ गए। यह एक्शन शुरू होने की सूचना बिजली करंट की तरह फैली।
लोगों को मीडिया को मालुम होते ही लोग टंकी के पास पहुंच गए। फोटो नेता भी पहुंचे जो कभी पांच छह आदमी नहीं लेकर आए। कुछ लोग उनकी फोटो लेने में लगे और वे फोटो खिंचवा भी रहे थे।
सूरतगढ जिला बनाओ समिति के सदस्य भी पहुंच गये। वहां भाषण शुरू हो गए। रात को दस बजे भाषण हो रहे थे।
एकदम से बदले घटनाक्रम से नेतगिरी करने वाले हैरान हुए हैं जो चेहरे बता रहे थे।
* छात्र युवा ने मोर्चा संभाला वहीं नेता व्यापारी दुकान दार संचालन समिति सदस्य कमजोर रहे और आज सुबह दो घंटे चली बैठक में कोई निर्णय नहीं ले पाए। अध्यक्ष भी कमजोर रहे जो कोई कदम उठा नहीं पाए। अध्यक्ष और समिति में आंदोलन के लिए बदलाव जरूरी है और वे लोग पांच सात हो जो संघर्ष के लिए निर्णय करने की क्षमता रखें। अब तक के हर निर्णय कमजोर रहे जिन पर छात्र और युवा बार बार कहते रहे। आखिर आज सरकार को ताकत दिखाने का कदम उठाया गया।
आमरण अनशन पर पूजा छाबड़ा के 12 वें दिन और उमेश मुद्गल के 10 वें दिन नाजुक दशा में जब कोई नहीं बोला तब यह कदम उठाना सब को जगाने वाला रहा। टंकी के पास भाषाओं में सरकार को चुनौती दी जा रही है कि सूरतगढ को जिला घोषित करे।
नरेन्द्र घिंटाला से रात को मौके की स्थिति पूछी तब यह रहस्य उजागर हुआ कि टंकी पर चढने की योजना 31 को तैयारी में थी और आज जब जिला बनाओ समिति ने कोई निर्णय नहीं किया न कोई रणनीति बनाई तब छात्रों युवाओं ने गुप्त रखते हुए शाम को टंकी पर चढ सभी को चौंका दिया। सूरतगढ को जिला बनाओ अभियान में बड़े नेताओं का रवैया और एक पखवाड़े से चल रही कार्यक्रमों में उदासीनता ने उनको कमजोर साबित किया।
अब इस मांग में तूफानी तेजी आई है जो सूरतगढ को जिला बनाओ आंदोलन को शक्तिशाली बनाएगी और नेताओं दुकानदारों समिति को बड़ा निर्णय लेना होगा तथा समिति में भी अध्यक्ष सहित बदलाव करने होंगे। छात्रों युवाओं को आंदोलन में कूदने के बाद लोगों को हर मोर्चे पर तेजी लानी होगी वहीं शासन प्रशासन को सरकार को मुख्यमंत्री तक सकारात्मक निर्णय घोषित करना होगा।०0०
सूरतगढ जिला बनाओ मांग 7 युवक टंकी पर चढे।
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ सूरतगढ़ 1 अप्रैल 2023 सूरतगढ़ को जिला बनाने की मांग को लेकर छात्र युवक हाउसिंग बोर्ड डिस्ट्रिक्ट जलदाय विभाग की टंकी के ऊपर चढ़े नारेबाजी हो रही है टंकी पर चढ़े हुए युवक जिला बनाने की मांग कर रहे हैं नीचे भीड़ लगी हुई है शहर में चिंता का वातावरण है पुलिस आई हुई है मौके से करने जान सिंह राजपूत
पूजा छाबड़ा और उमेश मुद्गल का जीवन बचाने का निर्णय हां ना में करें.बहाने बहुत हो गए.
* करणीदानसिंह राजपूत *
पूजा छाबड़ा और उमेश मुद्गल ने सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान में आमरण अनशन का हलाहल पी लिया।
दोनों ने यह मरण व्रत सूरतगढ़ की जनता के लिए इलाके की जनता के लिए किया। इन दोनों के प्राण जीवन बचाने के लिए सूरतगढ़ जिला बनाओ अभियान समिति को हां और ना में ही फैसला करना है।
बहुत हो गई बातें। बहुत हो गई मीटिंगें। कोई फैसला नहीं हो पाया या फैसला करना नहीं चाहते। निर्णय लेना नहीं चाहते।
👍 यह अध्यक्ष की भी कमजोरी है और संचालन समिति की भी कमजोरी है।
अब सीधी सी बात है कोई बहाना नहीं कोई गली निकालने की कोशिश भी नहीं।
एकदम हां और ना में उत्तर दिया जाए। संचालन समिति इनके जीवन के लिए फैसला करे।
👍 यदि किसी की बच्चे को खांसी जुकाम हो जाए तो डॉक्टर के पास तुरंत भागते हैं कि उसका रोग ठीक हो जाए।
👍👍 बच्चे ने गलती से कीटनाशक पी लिया हो जहर पी लिया हो जहरीली दवा पी ली हो तो उसकी प्राण रक्षा के लिए जीवन रक्षा के लिए सब कुछ दांव पर लगाने के लिए तैयार रहते हैं। क्योंकि वह अपना बेटा है अपनी संतान है।
पूजा छाबड़ा और उमेश मुद्गल कौन हैं किसके बच्चे किसकी संतान हैं?
👍पूजा छाबड़ा ने और उमेश मुद्गल ने यह आमरण अनशन का हलाहल सूरतगढ़ के लोगों के लिए पिया। चाहे उन्होंने जोश में पीया है लेकिन आज वे नाजुक स्थिति के अंदर हैं तब हमारा क्या फर्ज बनता है?
* संचालन समिति के अध्यक्ष संचालन समिति के सदस्य अपना निर्णय तुरंत करें और लागू करें। इनकी जीवन रक्षा के लिए वे नया कदम कड़ा निर्णय क्यों नहीं दे रहे। हर निर्णय को टाल रहे हैं।
👍अब मौका टालने का नहीं है जनता को बताएं निर्णय लागू करें हां और ना में निर्णय करें कि उनकी जीवन रक्षा तुम्हें करनी है या बहाने बनाने गलियां निकालनी है?
एक बात याद रखें कि समय समिति के अध्यक्ष और सदस्यों को माफ नहीं करेगा।
1 अप्रैल 2023.
करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार,
सूरतगढ.
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