बालिका रेप केस: कब होगी होटल वालों की गिरफ्तारी.लेटेस्ट स्पेशल रिपोर्ट.
* सूरतगढ़ के नेता नेतियां सब चुप सब लापता *
रेप केस:होटल संचालकों सहित सभी की गिरफ्तारी हो: उपखंड कार्यालय परबेमियादी धरणा.
* करणीदानसिंह राजपूत *
सूरतगढ़ 9 अगस्त 2026.
अनैतिक कार्य कराने में सूरतगढ़ के कुछ होटलों के नाम एक बालिका के रेप मुकदमें में सामने आए हैं। बालिका ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए बयान में सूरतगढ़ के होटलों और कुछ बाहर के स्थानों का वर्णन किया है जहां उसके साथ बलात्कार किया गया। महीनों बीत गये मगर पुलिस ने सभी आरोपियों को व बलात्कार में शामिल, उपस्थित आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया। सूरतगढ़ शहर में कुछ होटल अय्याशियों के अड्डे बन चुके हैं जहां व्याभिचार के लिए घंटों के हिसाब से कमरे किराए पर देकर अनैतिक कमाई करने में लगे हुए हैं। बालिका रेप केस में होटल संचालकों को महीनों के बाद भी गिरफ्तार नहीं किया जाना शहर के हित में नहीं है। ऐसे कांड फिर होंगे और फिर किसी प्रभावशाली की संतान के साथ हुआ तब क्या होगा? शहर के नेता सभी गायब हैं। भाजपा का राज है और भाजपा के सभी नेता चुप हैं।
अवयस्क बालिका से बलात्कार के मुकदमें में सभी आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर जागरुक नागरिकों स्त्रियों पुरुषों का अनिश्चितकालीन धरणा उपखंड अधिकारी कार्यालय के आगे चल रहा है।
* बलात्कारियों को पकड़ने की मांग को लेकर धरणा लगे तो समझ लेना चाहिए की सूरतगढ़ में नेता नेतियां और लोकतांत्रिक राजनैतिक संगठन खत्म हो चुके हैं। कागजी संगठन और कागजी नेता।
* सूरतगढ़ में टाईगर कम बैक और शेर कभी बुड्ढा नहीं होता का सोशल मीडिया पर भाजपा नेता कासनिया का प्रचार और हवा से नेतागिरी कायम रखने का काम चल रहा है। वो शेर कहां है?अल्प व्यस्क बालिका से रेप हो जाए और शेर व शेर की टीम महीनों से चुप रहे। कब बोलेंगे शेर और कब होगी सभी आरोपियों की गिरफ्तारी?
* भाजपा में मंत्रियों आदि के स्वागत में फोटो खिंचवाकर नेता और नेतियां बनने की होड़ रहती है लेकिन वे सभी इस गंभीर मामले पर चुप हैं। एक भी महिला नेता ने इस पर सीएम को शिकायत नहीं की और न मुख खोला।
👍 विधायक डुंगरराम गेदर को लोगों ने 50 हजार से अधिक वोटों से जो भरोसा किया वह भरोसा एक रेप पर ही नहीं भ्रष्टाचार के विरूद्ध आवाज उठाने शिकायत करने में हर क्षेत्र से लापता है।
👍 सूरतगढ़ में कोई किसान नेता, कोई क्रांतिकारी नेता बने हुए हैं, वे सभी गायब हैं। बीसियों सामाजिक नेता और संस्थाएं हैं वे भी चुप हैं।
०0०