बुधवार, 20 सितंबर 2017

राजस्थान में डेयरी बूथों पर क्या नहीं बिकेगा-उच्च न्यायालय का आदेश

राजस्थान हाईकोर्ट ने डेयरी बूथों पर किसी भी तरह की कुकिंग कर बिकने वाली खाद्य सामग्री पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही अदालत ने सिगरेट व तबांकू उत्पाद के बेचान पर भी पाबंदी लगाते हुए कियोस्क के बाहर सामान रखने पर रोक लगाई है।

अदालत ने डेयरी और राज्य सरकार की ओर से स्वीकृत पदार्थों की बिक्री की छूट दी है। मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नान्द्रजोग और न्यायाधीश डीसी सोमानी की खंडपीठ ने यह आदेश कौस्तुभ दाधीच की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।

याचिका में कहा गया कि डेयरी उत्पाद बेचने के लिए आरसीडीएफ की ओर से अधिकार पत्र जारी किया जाता है। वहीं नगर निगम बूथ के लिए जगह देती है। नियमानुसार इन बूथों पर केवल डेयरी उत्पादों की बिक्री ही की जा सकती है। इसके बावजूद भी शहर में बड़े पैमाने पर बूथ संचालक गैर डेयरी उत्पादों के साथ-साथ तंबाकू उत्पाद भी बेच रहे हैं। इन बूथों पर बिना लाइसेंस खाद्य पदार्थ बिकते हैं। इसके साथ ही बूथ के बाहर सामान रखने से यातायात के संचालन में भी व्यवधान पैदा होता है। जिस पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने बूथ में कुकिंग कर बनाए प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कुकिंग किए गए खाद्य सामग्री, सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर भी रोक रहेगी। हाईकोर्ट ने कहा कि डेयरी बूथ पर केवल सरस प्रोडक्ट, पानी की बोतल, कोल्ड ड्रिंक, चायपत्ती और आटे के अलावा अन्य कोई सामान नहीं रखा जाए। कोर्ट ने डेयरी बूथ के बाहर भी सामान रखने पर रोक लगा दी है।


सीमा सुरक्षा बल और वायुसेना की महिला केमल सफारी का संदेश


श्रीगंगानगर, 20 सितम्बर। सीमा सुरक्षा बल एवं भारतीय वायुसेना की ओर से बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश देने वाली महिला केमल सफारी श्रीगंगानगर पहुंची। प्रातः 9.30 बजे जिला कलक्टर श्री ज्ञानाराम, बीएसएफ के डीआईजी सेवानिवृत श्री सुभाषचंद्र घाटपण्डे, कमाण्डेंट श्री कुलवंत कुमार, नगरपरिषद के सभापति श्री अजय चांडक तथा श्री प्रहलाद राय टॉक ने हरी झण्डी दिखाकर केमल सफारी को रवाना किया। देश के प्रधानमंत्री माननीय नरेन्द्र मोदी द्वारा प्रारम्भ किये गये बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम के आगे बढ़ाने एवं जनजाग्रति के लिये महिला केमल सफारी का आयोजन किया गया, जो गत दिनों से विभिन्न शहरों, गांवों से होते हुए श्रीगंगानगर पहुंची है। बीएसएफ ग्राउंड में शहर के गणमान्य नागरिक, महिलाएं तथा छात्रा वर्ग उपस्थित थे। भारत माता की जयघोष से वातावरण गुंजायमान हुआ। महिला केमल सफारी को लेकर नागरिकों में भारी उत्साह देखा गया। बीएसएफ ग्रांउड से केमल सफारी रवाना होकर श्रीगंगानगर शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए कार्यक्रम का समापन होगा। 




राजस्थान के सूरतगढ़ इलाके में डेरा प्रेमियों के देहदान होते रहे हैं

डेरा सच्चा सौदा प्रेमियों द्वारा सूरतगढ़ तहसील क्षेत्र में भी देहदान हुए हैं। चक  2 के एस आर व सरदारगढ़ में देहदान हुए है। देह रखे ट्रक की रवानगी के फोटो सहित समाचार भी लगते रहे हैं।

डेरा प्रेमी श्योपारी की देहदान

Bhaskar News Network | Feb 05,2016 11:31 AM IST

भास्कर संवाददाता, श्योपुराकस्सी

गांव2 केएसआर में गुरुवार को डेरा प्रेमी श्योपारी देवी की मरणोपरांत देहदान की गई। मां की अंतिम इच्छा बड़े बेटे हंसराज, शिशपाल और बेटी कंचन ने डेरा सच्चा सौदा के अनुयायियों को देह सुपुर्द कर की। हंसराज ने बताया कि 5 वर्ष पहले डेरे के आग्रह पर उसकी मां श्योपारी ने देहदान करने का प्रण लिया पर्चा भर दिया। 26 जनवरी को मां के हृदय आघात होने पर उसे सूरतगढ़ एक निजी अस्पताल ले गए। 2 फरवरी को घर ले आए। फरवरी को वापस तबीयत खराब होने पर उसे गुरुसर मोडिया अस्पताल ले गए। तबीयत ज्यादा खराब होने पर गुरुवार को मां को श्रीगंगानगर ले जा रहे थे, कि रास्ते में निधन हो गया। सूचना मिलने पर सूरतगढ़ ब्लाक से राजेंद्र बराड़ डेरा प्रेमियों के साथ गांव पहुंचे देहदान की प्रक्रिया पूरी की। देह को जोधपुर एम्स के लिए भेज दिया। बेटे शीशपाल पोते सुभाष, राजेश, संजय हिमांशु ने अश्रुपुरित नेत्रों से दादी को अंतिम विदाई दी।

ग्रामीणक्षेत्र में दूसरी देहदानी

सुखनामसिंह ने बताया कि सूरतगढ़ ब्लाक ग्रामीण क्षेत्र में देहदान का यह दूसरा मामला है इससे पूर्व सरदारगढ़ में पहली देहदान हुई थी। सूरतगढ़ को मिलाकर अब तक 8 देहदान की जा चुकी हैं। अंतिम स्नान प्रक्रिया के बाद ‘‘जे नाम ना जपा बंदे तो बंदा क्यूं बन आया, शब्दो गुरु भजनों के बीच डेरा सच्चा सौदा ग्रीन ब्रिगेड सदस्यों ने श्योपारी इंसा अमर रहे जब तक सूरज चांद रहेगा श्योपारी का नाम रहेगा के जयकारों के साथ अंतिम विदाई दी।

श्योपुराकस्सी. बेटा-बेटी पोतियों के कंधों पर अंतिम यात्रा निकाली। 

डेरा सच्चा सौदा सिरसा में 600 शव गाड़े होना: एसआईटी पूछताछ

बाबा गुरमीत राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा सिरसा में जमीन में नरकंकाल दफन होने का असली सच सामने आया है, जो होश उड़ा देगा।  एसआईटी से पूछताछ में मंगलवार 19 सितंबर को डेरा सच्चा सौदा प्रबंधन कमेटी के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉ. पीआर नैन ने बड़ा खुलासा किया है। नैन ने एसआईटी को बताया है कि डेरे की जमीन में 600 लोगों की अस्थियां दबी हैं। नैन ने इससे जुड़ा सारा रिकॉर्ड एसआईटी को सौंप दिया है। पीआर नैन मंगलवार शाम 5.40 बजे शहर थाने में आया था।

एसआईटी इंचार्ज डीएसपी कुलदीप बेनीवाल ने उससे रात आठ बजे तक करीब ढाई घंटे में 50 सवाल किये। एसआईटी ने एक दिन पहले सोमवार को डेरा सच्चा सौदा की चेयरपर्सन विपसना इंसा से करीब सवा तीन घंटे तक पूछताछ की थी। एसआईटी ने मंगलवार शाम डॉ. पीआरनैन से शहर थाने में पूछताछ की। एसआईटी ने पीआर नैन को नोटिस भेजकर जांच में शामिल होने का निर्देश दिया था।

बताया जाता है कि डेरा सच्चा सौदा में खेती की देखरेख का जिम्मा पीआर नैन का है। इसलिए एसआईटी ने उनसे पहला सवाल किया कि डेरे की जमीन में पेड़-पौधों के नीचे क्या नर कंकाल दबे हैं? इस पर नैन ने जवाब दिया कि डेरा अनुयायियों का ऐसा विश्वास है कि मौत के बाद अगर उनकी अस्थियां डेरे की जमीन में दबाई जाएंगी तो उन्हें मोक्ष मिलेगा।अनुयायियों की इच्छा के चलते डेरा प्रबंधन ने जर्मनी के एक वैज्ञानिक से इस बारे में सलाह ली तो उसने बताया कि हड्डियों में फास्फोरस की मात्रा अधिक होती है, जो जमीन की उपजाऊ शक्ति को कई गुणा बढ़ा देगी। जर्मन वैज्ञानिक के कहने पर डेरा प्रबंधन ने अनुयायियों की अस्थियों को डेरे की जमीन में दबाना शुरू किया। पीआर नैन पहले गुरूसर मोडिया में डेरा चिकित्सालय में थे। ढाई घंटे की पूछताछ में एसआईटी ने पीआर नैन से 50 सवाल किए. इन सवालों में पंचकुला हिंसा और मेडिकल कॉलेज भेजे गए शवों से संबंधित सवाल भी शामिल थे.

नैन ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों को शव लोग सीधे ही भेजते थे। नैन ने कुछ सवालों के जवाब दिए, जबकि बाकी सवालों पर वह खामोश रहे. पेशे से चाइल्ड स्पेशलिस्ट 76 साल के डॉक्टर पीआर नैन ने एसआईटी से कहा कि वह हार्ट पेशेंट है और उन्हें शुगर और लो ब्लड प्रेशर की भी बीमारी है.नैन ने एसआईटी को बताया कि वह डेरे से कई सालों से जुड़े हैं. वह डेरा मुखी गुरमीत राम रहीम के गांव गुरुसर मोडिया में बने डेरे के अस्पताल में सीओ थे. बाद में डेरा प्रमुख ने उन्हें सिरसा डेरे की खेतीबाड़ी की जिम्मेदारी सौंप दी.

पूर्व सेवादारों का आरोप है कि हत्या करने के बाद शव डेरे की जमीन में गाड़ दिए जाते थे और ऊपर पेड़ लगा दिए जाते थे। इन पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं थी। एसआईटी इन आरोपों पर भी जांच कर रही है।

सूरतगढ़ में क्रिकेट बुकिंग पकड़ी गई

सूरतगढ़ 19 सितंबर एवरग्रीन होटल के रूम नंबर 103 में क्रिकेट बुकिंग संचालित करते हुए 3 लोगों को सिटी थाना पुलिस ने पकड़ा।

 पकड़े गए लोगों में यहां के वार्ड नंबर 30 आदर्श कॉलोनी निवासी अमित उर्फ सन्नी उम्र 32 वर्ष पुत्र विश्वेश्वर अरोड़ा, रोहिताश उम्र 40 वर्ष पुत्र नेकी राम धानक  और वार्ड 17 निवासी दीपक उर्फ दीपू उम्र 25 पुत्र रणजीत चौहान मौके पर पकड़े गए।

पुलिस ने 8 मोबाइल फोन एक लैपटॉप एक led स्क्रीन एक रजिस्टर जिसमें बुकी का ब्यौरा है और करीब ₹10000 मौके से बरामद किए।

 थाना अधिकारी नारायण सिंह के अनुसार कर्नाटक प्रीमियर लीग की मैसूर वह मना शिवम मोगा टीम के बीच चल रहे क्रिकेट मैच पर सट्टे की सूचना मिली थी।इस पर पुलिस ने कार्यवाही की मौके से बरामद रजिस्टर में सट्टा लगाने वालों के नामों पर भीजांच की जाएगी।

मंगलवार, 19 सितंबर 2017

मोबाइल काल 1अक्टूबर2017 से क्या होगी-आवश्यक सूचना:जरूर जान लें



‌आपका मोबाइल बिल आगामी माह 1 अक्टूबर से और भी कम हो सकता है। टेलिकॉम रेग्युलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने मोबाइल से मोबाइल कॉलिंग पर इंटरकनेक्शन यूसेज चार्ज (आईयूसी) को घटाने का ऐलान कर दिया है। 1 अक्टूबर से 14 पैसे प्रति मिनट की बजाय यह सिर्फ 6 पैसे प्रति मिनट चार्ज किया जाएगा। इसके अलावा 1 जनवरी 2020 से इसे पूरी तरह खत्म कर दिया जाएगा। हालांकि रिलायंस जियो को छोड़कर दूसरी कंपनियां इसे बढ़ाने की मांग कर रही थीं।आईयूसी वह फीस होती है, जिसे टेलिकॉम कंपनियां उस दूसरी कंपनी को देती है, जिसके नेटवर्क पर कॉल खत्म होती है। यह चार्ज फिलहाल 14 पैसे प्रति मिनट है यानी मौजूदा टेलिकॉम कंपनियों की एवरेज कॉल कॉस्ट का तकरीबन आधा। भारती एयरटेल, आइडिया और वोडाफोन जैसी कंपनियां इंटरकनेक्शन शुल्क को बढ़ाने की मांग कर रहीं थीं, जबकि रिलायंस जियो ने इसे खत्म करने की मांग की थी। एयरटेल सहित दूसरी कंपनियों ने अंतर मंत्रालयी समूह के सामने भी इस मुद्दे को उठाया था। प्रतिद्वंद्वी जियो के खिलाफ एकजुट तीनों दूरसंचार कंपनियों (एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया सेल्यूलर) ने कहा था कि मौजूदा आईयूसी 14 पैसे प्रति मिनट है जो लागत से कम है और इसे ठीक किए जाने की जरूरत है। पिछले साल सितंबर में जब मुकेश अंबानी ने अपने रिलायंस जियो के जरिये लाइफटाइम मुफ्त कॉल का प्लान लॉन्च किया, तब से लगातार आईयूसी एक मुद्दा बना हुआ था। जियो, जो उपभोक्ताओं को फ्री कॉल की सुविधा देता है पर आईयूसी का भार बढ़ता जा रहा था। कंपनी आईयूसी की दरों में कमी चाहती थी। जियो की नजर में आईयूसी वर्तमान ऑपरेटरों द्वारा बनाई गई कृत्रिम बाधा है। माना जा रहा है कि TRAI के फैसले से सीधा फायदा जियो को पहुंचेगा, क्योंकि उसका इस बाबत खर्च कम हो जाएगा। दरअसल, एयरटेल, वोडाफोन इंडिया और आइडिया जैसे बड़े टेलिकॉम ऑपरेटर्स पर जियो की काफी आउटगोइंग कॉल जाती है। जियो 'बिल ऐंड कीप' (BAK) तरीका अपनाने की पक्षधर है। इसमें कंपनियां एक-दूसरे के बजाय ग्राहकों से वसूली कर सकती है। जियो वाइस कॉल के लिए 4जी आधारित (VoLTE) तकनीक का इस्तेमाल करती है। कंपनी का कहना है कि आईयूसी की कोई प्रासंगिकता नहीं है चूंकि सारी इंडस्ट्री आईपी-आधारित (इंटरनेट प्रोटोकॉल) मॉडल्स की ओर बढ़ रही है। इस तरह होती गई कटौती

आईयूसी की शुरुआत 2003 में हुई थी जब इनकमिंग कॉल फ्री होने के बाद ट्राई ने कॉल करने वाले ऑपरेटर से भुगतान करने का नियम बनाया था। शुरुआत में इसकी दर 15 पैसे प्रति मिनट से 50 पैसे प्रति मिनट तक थी। यह दर दूरी पर आधारित होती थी। इसके अलावा 20 पैसे से लेकर 1.10 प्रति मिनट तक कैरिज चार्ज भी रखा गया था। ट्राई ने फरवरी 2004 में इस दर को घटाकर 20 पैसे प्रति मिनट किया और अंत में 1 मार्च 2015 को इस दर को 14 पैसे प्रति मिनट कर दिया गया। ट्राई का  अच्छा निर्णय है और इसको पूरी तरह से खतम कर देना चाहिये था। 

नई दिल्ली
19.9.2017.

कांग्रेस ने दाम बढ़ाए तो सड़क पर उतरी थी भाजपा, अब कहते हैं भूखा नहीं मर रहा कोई



शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर मुद्रास्फीति और तेल के बढ़ते दाम पर जोरदार निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा प्रतिदिन ‘अच्छे दिन’ की ‘हत्या’ हो रही है। केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) सरकार में शामिल शिवसेना ने केंद्रीय मंत्री केजी अल्फोंस के पेट्रोलियम पदार्थो के मूल्य में बढ़ोतरी संबंधी बयान की आलोचना करते हुए इसे बेहद ‘गैर जिम्मेदाराना’ बताया। गौरतलब है कि अल्फोंस ने बीते शनिवार को कहा था कि ‘जो पेट्रोल और डीजल के बढ़े मूल्यों को वहन कर रहें हैं, वह भूखे नहीं मर रहें हैं।’ शिवसेना ने कहा कि कैबिनेट का यह नवरत्न पेट्रोलियम पदार्थो के बढ़े मूल्य का समर्थन कर रहा है क्योंकि उसे कभी भी अपने जेब से पैसे नहीं देने पड़ते। यह गरीबों के चेहरे पर थूकने जैसी बात है जिन्हें कांग्रेस के कार्यकाल में भी ऐसा अपमान नहीं सहना पड़ा था। पार्टी के मुखपत्र ‘सामना’ और ‘दोपहर का सामना’ में शिवसेना ने कड़े संपादकीय में लिखा कि यह बहुत आश्चर्यजनक है कि अल्फोंस अपने बयान को सही ठहराते हुए कह रहे हैं कि कैसे ईंधन के दाम बढ़ने के बाद भी लोग मर नहीं रहे हैं। संपादकीय में कहा गया है कि इनकी सुनो! बिना किसी राजनीतिक अनुभव वाले नौकरशाह से मंत्री बने इनमें ही शायद वह तमाम ‘गुण’ हैं जिनकी बकौल अमित शाह, कांग्रेस में कमी है।

सामना में पूछा गया कि क्या वह भूल गए हैं कि संयुक्त प्रगतिशील गंठबंधन (यूपीए) सरकार के कार्यकाल में पेट्रोल, डीजल के दाम बढ़ने के विरोध में राजनाथ सिंह, सुषमा स्वराज, स्मृति ईरानी और धर्मेद्र प्रधान जैसे भाजपा नेताओं ने कैसे खाली सिलेंडरों के साथ सड़कों पर प्रदर्शन किए थे। अब जब वे सत्ता में आ गए हैं तो गरीबों का मजाक उड़ाया जा रहा है और अल्फोंस जैसे लोग मुद्रास्फीति को सही बता रहे हैं। यह सच में बहुत दुखद है। महाराष्ट्र और भारत में भी किसानों की मौतों की बड़ी वजह ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी है। यहां लगातार बिजली नहीं रहने से समस्या बनी रहती है, जिस वजह से किसानों को डीजल से चलने वाले जेनरेटर पर निर्भर रहना पड़ता है और बाजार तक अपनी फसलों को पहुंचाने के लिए भी उन्हें बढ़े हुए वाहन मूल्य देने पड़ते हैं। कई किसान बढ़े मूल्य को चुका नहीं पाते और आत्महत्या कर लेते हैं। सामना ने ईंधन कीमतों की बढ़ोतरी पर हमला करते हुए कहा कि पेट्रोल, ईंधन और गैस मूल्यों में हुई वृद्धि से सामान्य लोग मुश्किलों का सामना कर रहे हैं। संपादकीय में कहा गया है कि अच्छे दिन की रोजाना हत्या हो रही है।

शिवसेना ने कहा कि लोगों के पास खाने के लिए अन्न नहीं है, किसान लगातार संकट में जी रहे हैं, मुद्रास्फीति और बेरोजगारी लोगों की चिंताओं को बढ़ा रही है। जब इन सब चीजों के बारे में महाराष्ट्र के एक उत्तेजित भाजपा विधायक पाशा पटेल से प्रश्न पूछा गया तो उन्होंने सवाल पूछने वाले संवाददाता को धमकाया और उसे दिमागी इलाज कराने के लिए कहा। शिवसेना ने कहा कि बुलेट ट्रेन परियोजना में करोड़ों रुपए खर्च किए जाएंगे। अगर यह 30,000 से 40,000 करोड़ रुपए महंगाई से निपटने में लगाए जाते तो सभी लोगों को भला होता। शिवसेना ने संपादकीय में लिखा है, ‘पटेल ने संवाददाता को पागल कहा और दिमागी इलाज कराने को कहा। जबकि, सच तो यह है कि बुलेट ट्रेन की तारीफें करने वाले पागल हैं और उन्हें दिमाग का इलाज करने वाले अस्पतालों में भर्ती कराए जाने की जरूरत है।’

(सामना)
19.9.2017.

किसान अधिकार यात्रा का टैगोर आईटीआई ने किया भावभीना स्वागत


प्रदेश भर में चल रही किसान अधिकार यात्रा कल गंगानगर में किसानों के हक़ , न्याय और अधिकार के लिए अभूतपूर्व प्रदर्शन करने के बाद जब राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं  62 पर सूरतगढ के चक 28PBN  पर पहुंची।

वहां तकनीकी शिक्षा संस्थान' टैगोर आईटीआई' के प्रिंसिपल इं अटल त्रिखा तथा स्टाफ ने आगुन्तक सदस्यों का भावभीना स्वागत किया।

 किसान अधिकार यात्रा के प्रदेश संयोजक पंकज धनकड़ ने बताया की किसान किस प्रकार अपने हक़ और न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। यात्रा के अग्रणी सदस्य रणजीत सिंह राजू आल इंडिया किसान मोर्चा तथा आम आदमी पार्टी के नेता सत्यप्रकाश सिहाग  , राजू जाट , रमेश बिश्नोई राजवीर भजिया ने किसानो के हक़ के लिए आवाज उठाई। इस अवसर पर इं अटल त्रिखा ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था पूर्णत किसान के सशक्तिकरण पर निर्भर करती है। आईटीआई में अध्ययनरत अधिकांश प्रशिक्षु किसानों की संताने है इसीलिए टैगोर आईटीआई भी हमेशा किसानों के साथ है। आईटीआई प्रशिक्षुओं गुरसेवक विजय तथा संदीप ने सभी का धन्यवाद दिया।

(प्रस्तुतकर्ता-करणीदानसिंह राजपूत)

राजस्थान में बालवाहिनी के संचालन निर्देश: अभिभावक जरूर पढ़ें

जयपुर। राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एवं राजस्थान राज्य विविध सेवा प्राधिकारण के कार्यकारी अध्यक्ष, के.एस. झवेरी ने बच्चों के कल्याण को सर्वोपरि विषय मानते हुए बाल-वाहिनियों के संचालन के संबंध में दिशा निर्देश जारी किये है। दिशा-निर्देशों के अनुसार जो भी वाहन (बस मिनी बस वैन ऑटो एवं रिक्शा) बाल-वाहिनी के रुप में उपयोग में लाया जाए, वह वाहन पीले रंग से रंगा हुआ हो ताकि दूर से ही देखकर यह पहचाना जा सके कि वह वाहन बाल-वाहिनी के रूप में उपयोग में आ रहा है।  बाल-वाहिनी के ऊपर स्पष्ट रुप से यह अंकित हो कि वह वाहन बाल-वाहिनी के रूप में परिवहन कर रहा है यथा बाल-वाहिनी पर ऑन स्कूल ड्यूटी अंकित किया जा सकता है।

बाल-वाहिनी के पीछे वाले हिस्से पर संबंधित विद्यालय का नाम, दूरभाष नंबर, पता एवं वाहन चालक तथा परिचालक का नाम अंकित होना चाहिए।  बस बाल-वाहिनी पर होरिजॉन्टल रुप से लोहे का पाईप लगा हो तथा ऑटो/ वैन/ मैजिक में दरवाजों पर गेट पर लॉक होना चाहिए तथा ऑटो के ड्राईवर वाली साइड वह पीछे ऎसी ग्रिल होनी चाहिए जिससे कोई बालक गिर ना सके ।


बस बाल-वाहिनी पर गेट होना चाहिए और जब वह बस सड़क पर संचालित हो तो उसका गेट आवश्यक रूप से बंद होना चाहिए। बाल-वाहिनी की स्पीड अधिकतम 40 किलोमीटर प्रति घंटे की होनी चाहिए। बस/मिनीबस/ वैन बाल-वाहिनी में अग्निशमन यंत्र आवश्यक रूप से लगा हुआ हो।  जो बाल-वाहिनी स्कूल प्रबंधन द्वारा संचालित की जा रही है उनमें आवश्यक रूप से जीपीएस लगा हो तथा चालू स्थिति में हो। बाल-वाहिनी में प्रथम चिकित्सा बॉक्स एवं पीने के पानी की व्यवस्था होनी चाहिए।  बाल-वाहिनी की खिड़कियों के शीशों पर किसी प्रकार की कोई फिल्म चढ़ी हुई नहीं हो, जिसके फलस्वरुप सड़क से ही बाल-वाहिनी के अंदर की स्थिति देख सकें।

बाल-वाहिनी के भीतर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था हो, ताकि अंधेरे में उसका उपयोग किया जा सके। विशेष योग्यजन बालकों के चढ़ते-उतरने के लिए समुचित व्यवस्था हो तथा बाल-वाहिनी में उनके बैठने के लिए एक निश्चित स्थान आरक्षित किया जाए।

जो भी बाल-वाहिनी चाहे वो स्कूल प्रबंध नेे द्वारा संचालित की जा रही हो या किसी अन्य व्यक्ति के द्वारा अपने स्तर पर संचालित की जा रही हो, उसके वाहन चालक तथा परिचालक का नाम, मोबाइल नम्बर तथा लाईसेन्स की प्रति स्कूल प्रबंधन, यातायात पुलिस,संबंधित पुलिस थाने तथा परिवहन विभाग के पास आवश्यक रूप से होनी चाहिए।

दिशा निर्देशानुसार सड़क पर बाल-वाहिनी के संचालन हेतु वाहन चालक की नियुक्ति के लिए आवश्यक है कि चालक के पास भारी वाहन चलाने का 5 वर्षीय अनुभव हो। यदि चालक के विरुद्ध लाल बत्ती को क्रोस करने/गलत जगह पर पाकिर्ंग करने/स्टॉप लाइन का उल्लंघन करने में/वाहन को चलाने की लेन का उल्लंघन करने में/वाहन को चलाते समय ओवरटेक करने के लिए अप्राधिकृत व्यक्ति को चलाने के संबंध में दो से अधिक बार कोई चालान एक ही साल में पेश हो चुका है तो उसे चालक के रूप में बाल- वाहिनी चलाने की अनुमति नहीं दी जाए।  यदि किसी चालक के विरुद्ध तेज गति से वाहन चलाने/नशे में वाहन चलाने/उपेक्षापूर्ण तरीके से वाहन चलाने या धारा 279, 336, 337, 338 व 304ए भारतीय दंड संहिता, 1860 तहत एक बार चालान पेश हो चुका है या आरोप लग चुका है तो ऎसी स्थिति में उसे चालक के रूप में बाल-वाहिनी चलाने की अनुमति नहीं दी जाए ।  यह स्कूल प्रशासन एवं पुलिस विभाग परिवहन विभाग यातायात विभाग का कठोर दायित्व है कि वह सुनिश्चित करें कि प्रत्येक बाल-वाहिनी में एक परिचालक आवश्यक रूप से हो।

दि. 18.9.2017.


सोमवार, 18 सितंबर 2017

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने जीएसटी व नोटबंदी पर फिर चेताया

पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक बार फिर चेताया है कि जीएसटी और नोटबंदी का जल्‍दबाजी में क्रियान्‍वयन आर्थ‍िक प्रगति पर नकरात्‍मक असर जरूर डालेगा। CNBC-TV18 के साथ इंटरव्‍यू में मनमोहन सिंह ने कहा, ”नोटबंदी और जीएसटी, दोनों का कुछ प्रभाव रहा है। जीएसटी को जल्‍दबाजी में लागू कर दिया गया, और अब कई सारी दिक्‍कतें सामने आ रही हैं। चालू वित्त वर्ष की जून में खत्म हुई तिमाही के दौरान देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई और यह वित्त वर्ष 2016-17 की चौथी तिमाही के 6.1 फीसदी से घटकर 5.7 फीसदी पर आ गई। पिछले साल इसी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.9 फीसदी थी। पूर्व प्रधानमंत्री ने पिछले साल नोटबंदी के बाद संसद में भविष्‍यवाणी की थी कि जीडीपी में दो प्रतिशत की गिरावट होगी। उन्‍होंने कहा था कि नोटबंदी एक ‘ऐतिहासिक आपदा, संगठित और कानूनी लूट’ है।

नोटबंदी के 10 महीने बाद, एक बार फिर मनमोहन सिंह ने इसे और जीएसटी के जल्‍द क्रियान्‍वयन को अनौपचारिक या लघु क्षेत्र पर बुरा प्रभाव डालने वाला बताया है। इस क्षेत्र से भारत में 90 फीसदी रोजगारों का सृजन होता है। सिंह ने कहा, ”दोनों (नोटबंदी और जीएसटी) अनौपचारिक, लघु क्षेत्र पर असर डालेंगे। यही दोनों जीडीपी में गिरावट के लिए जिम्‍मेदार हैं। हमारा 90 फीसदी रोजगार अनौपचारिक सेक्‍टर में है, और 86 फीसदी मुद्रा वापस मंगाना, साथ में जीएसटी क्‍योंकि इसे आपने जल्‍दबाजी में लागू किया, मिलकर जीडीपी वृद्धि पर बुरा असर डालेंगे।”


अप्रैल में, जब जीएसटी बिल संसद से पास हुआ तो मनमोहन सिंह ने भले ही इसे ‘गेम-चेंजर’ बताया हो, मगर वह यह भी बताने से नहीं चूके थे कि इसे लागू करने में मुश्किलें आएंगी। 30 अगस्‍त को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा कि 500 और 1,000 रुपये के 99 फीसदी नोट बैंकिंग व्‍यवस्‍था में वापस लौट आए हैं, जिसके बाद मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले पर सवाल उठने लगे थे।


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