गुरुवार, 31 दिसंबर 2015

नए साल पर नेताजी की बधाई:कविता


नेताजी की नए साल की बधाई आई है
अब क्या लेना चाहते हैं नेताजी
अभी भी कुछ बचा रह गया हैï
सारा तो ले लिया बीते सालों में।
नेताजी बड़े पक्के पारखी हैं
अब किसी खास पर नजर है
तो जरूर कोई चीज बची है
जो उनकी नजर में चढ़ी है।
मोहल्ले में इंटरलोकिंग बनाई
तब अपना हाल पूछ रहे थे
अपनी झोंपड़ी और खुला चौगान
घूम घूम कर देख रहे थे।
साल का पहला दिन आया
नेताजी ने कोठी पर बुलवाया
अरे,तूं और तेरी घरवाली
कितनी जमीन दाबी सरकारी।
ना जी ना दाबी नहीं माई बाप
इसका पट्टा बना है पक्का
बीस साल से निवास है।
मुझे कानून सिखलाता है
फर्जी कागजातों से बनाये
पट्टे का रौब दिखाता है
बोल जेसीबी कब भिजवाऊं?
माई बाप ऐसा क्यों करते हो
हम तो तुम्हारे रहम पर हैं
खुद खाली कर देंगे जब कहें
आप कोठी बनाएं 

मैं कहीं झोंपड़ी बना लूंगा
/ मन ही मन/
जहां आपकी नजरें नहीं पड़ें।
 

- करणीदानसिंह राजपूत -
स्वतंत्र पत्रकार,
विजयश्री करणी भवन,
सूर्योदयनगरी,
सूरतगढ़।
94143 81356
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रविवार, 27 दिसंबर 2015

सूरतगढ़ पुस्तक प्रदर्शनी में राजस्थानी 2 पोथियों का विमोचन भी होगा


2 जनवरी से 6 जनवरी तक पांच दिन चलेगा कार्यक्रम
                  सूरतगढ़ । राजस्थानी व हिंन्दी के जाने माने लेखकों की पुस्तकों की विशाल प्रदर्शनी का पांच दिन का यहां आयोजन किया गया है। नववर्ष की 2 जनवरी से 6 जनवरी तक पुस्तक प्रदर्शनी रहेगी। पुस्तक प्रदर्शनी का उदघाटन मायड़ भाषा प्रेमी दिलात्मप्रकाश जैन, जेलर प्रभु सिंह, डाक्टर एसके जेतली व व्याख्याता राजेन्द्र छींपा करेंगे।
इसके बाद मनोज कुमार स्वामी की आत्मकथ्य राजस्थानी पुस्तक खेचळ अर खेचळ का विमोचन समारोह होगा। जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार समालोचक करणीदानसिंह राजपूत करेगे। मुख्य अतिथि प्रकाशक बोधि प्रकाशन जयपुर संदीप मायामृग होंगे। विशिष्ठ अतिथि अभिनव अनिल सैनी, राजस्व बारसंध अध्यक्ष साहबराम स्वामी, सीताराम शर्मा, अनिल चुघ व डाक्टर गोरीशंकर निमिवाल होंगे। इस पुस्तक पर पत्र वाचन सुमन शेखावत द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा।
इसी कड़ी में 3 जनवरी को रचनाकार आकाशवाणी के उदद्योषक बीरूराम चावरियां के राजस्थानी उपन्यास खिण्डता मोती का विमोचन समारोह आयोजित होगा जिसमें अध्यक्षता करणीदानसिंह राजपूत करेगे। मुख्य अतिथि डाक्टर जितेन्द्र बोगिया विशिष्ठ अतिथी मनोजकुमार स्वामी व प्रहलाद राय पारीक होंगे। इस उपन्यास का पत्रवाचन शिक्षाविद मांगीलाल शर्मा करेंगे।
ये कार्यक्रम नगरपालिका के समीप की चौपड़ा धर्मशाला में होंगे।


पत्रकार वार्ता में शालीनता और मर्यादा भी जरूरी


- करणीदानसिंह राजपूत -
पहले बड़े बड़े शहरों में ही पत्रकार वार्ताओं का आयोजन होता था लेकिन समय की करवट और अखबारों के जिला व उपखंड तथा तहसील सतर पर प्रकाशन होने के कारण जानकारी देने लेने के लिए राजनैतिक सामाजिक समाजसेवी संगठनों की ओर से,कभी कभी पीडि़त जन की ओर से और कभी प्रशासन व पुलिस की ओर से भी प्रेस वार्ताओं का आयोजन कर लिया जाता है। इनका एक खास उद्देश्य होता है अधिक से अधिक जानकारी देना और अधिक से अधिक जानकारी लेना।
कई बार ऐसा होता है कि उतावले पन में या किसी अन्य सोच से कुछ पत्रकार अपने अपने दो चार सवाल पूछ कर खिसकते हैं और कुछ दूर जाकर बतियाने लगते हैं। इससे निश्चित रूप से प्रेसवार्ता में खलल पड़ता है। उचित होता है कि आने पूछ लिया तो अन्य कोई पूछे तो उसको जवाब मिले उसका भी इंतजार करलें। संभव है आपके सवाल से अनय का सवाल अधिक वजनदार हो और वह प्रकाशन करने से अखबार की शोभा बढ़े और आपका रूतबा भी बढ़े।
कई पत्रकार प्रेसवार्ता में अन्य पत्रकार के सवाल पर मिली जानकारी या जवाब को अपने अखबार में नहीं छापते। केवल अपने सवाल का ही उत्तर छाप कर कर्तव्य पूरा कर लेते हैं। पाठकों के सामने जानकारी को जानबूझ कर छुपाने से चाहे पत्रकार अपने को बड़ा और चतुर समझे लेकिन जो उत्तर देने वाला है उसके मन में घृणा तो हो ही जाती है। यह भी होता है कि किसी राजनेता को खुश करने के लिए ऐसा कर लिया गया। लेकिन जब दूसरा अखबार वह जवाब या जानकारी छाप देता है तो पाठकों के मन में आता ही है कि जिसने छुपाया वह खरा नहीं है। आम जनता के बीच में अपने खरेपन पर धूल डालने का यह कार्य अच्छा नहीं माना जाता। आयोजक जब कहें कि अब बस है तब उठना ही उचित होता है।
सूरतगढ़ बाबत भी लिखा जाए तो अनुचित नहीं होगा।
गंगाजल मील के विधायक काल की पत्रकार वार्ताओं में यही हुआ कि एक दो सवाल के जवाब लिए और खड़े होकर नास्ते पानी में लग गए। मील से सवाल होते रहते मील जानकारियां देते रहते लेकिन वे उनके अखबारों में नहीं छपी। मील की बातें न छपने का कितना नुकसान मील को हुआ है वह मील ही जान सकते हैं। नास्ता पानी रखा है तो वह दस पन्द्रह मिनट बाद भी खाया पीया जा सकता है।
पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु की पत्रकार वार्ताओं में भी यही रूख रहा। बीच में उठना और जो टाईप मैटर दिया वह नहीं छापना। राज्य सतर के मुद्दे भी गायब किए जाते रहे।
विधायक राजेन्द्रसिंह भादू की पत्रकार वार्ता में भी यही हुआ। पत्रकार दो चार सवालों बाद उठ कर पीछे जाकर खड़े हो गए। भादू बैठे रहे लेकिन पत्रकारवार्ता छिन्न भिन्न करदी गई। वार्ता में केवल सूरतगढ़ के ही नहीं विधानसभा क्षेत्र के जैतसर व राजियासर आदि के पत्रकार भी आए हुए थे। उनको भी जानकारियां लेनी थी। सवाल करने थे लेकिन कुछ पत्रकारों को इसमें कोई रूचि नहीं थी। जो उठे उनके सवाल भी विधानसभा क्षेत्र के लायक नहीं थे। उनको इतना तो इंतजार करना ही चाहिए था कि अन्य छोटे स्थानों के पत्रकार आए हैं तो वे क्या पूछते हैं। वहां पर कोई विकास हुआ या नहीं या कोई कमी रही। उन पत्रकारों की जिज्ञासा धरी रह गई। उन्होंने क्या सोचा होगा बड़ी जगह के पत्रकारों के बारे में। जैतसर के एक पत्रकार ने तो कह भी दिया था कि उनके सवाल तो बाकी ही रह गए। भादू पूरी तैयारी के साथ आए थे और विभागों का रिकार्ड भी लाए थे। उसमें बिना महत्व का तो नहीं होगा लेकिन सवाल यह है कि पत्रकारवार्ता में बीच में उठने वालों ने उस रिकार्ड में से बाद में भी कोई सामग्री छापी नहीं।
राजेन्द्र भादू की पत्रकारवार्ता में किए गए दावों के विरूद्ध जवाब में बहुजन समाज पार्टी की पत्रकार वार्ता हुई। उसमें भी कुछ पत्रकारों ने अपना सदा वाला रूख अपनाया। खड़े हुए और पीछे जाकर खड़े हो गए। एक बढ़े अखबार के पत्रकार बीमार हो गए। लेकिन जो प्रिंट मैटर दिया गया उसमें पानी सेम सड़क शिक्षा सहित भादू की कोठी बाबत भी था लेकिन वह सारा ही पाठकों से छुपा लिया गया।
प्रेसवार्ता की उपयोगिता पत्रकारों को समझनी ही चाहिए और आयोजकों से संपन्न की घोषणा का इंतजार भी करना ही चाहिए।

तुम्हारे दिल में बस जाऐं---कविता-



तुम्हें सताने वाले
सभी विदा हो गए
हम खैर ख्वाह
तुम्हारे करीब हैं।
केवल आवाज सुन
तुम्हारे दिल की धड़कन
महसूस हो जाती है।
न जाने कौनसी पैथी है
आवाज के सहारे
हम तुम्हारे दिल में
उतर जाते हैं।
यह अजब संपर्क
कब से हो रहा है
तुमको मालूम होगा
हम तो बेसुध हो जाते हैं।
तुम कब चुप हुई
सोचते हैं मन में
हम तो होश आता है
तब संभलते हैं।
आवाज के सहारे
ऐसा कब तक चलेगा
कुछ तुम बदलो
कुछ हम बदलें।
हम तुम्हें पुकारें
अपने दिल में उतारें
फिर चुप होकर
दिल में बंद करलें।
यह तो कैद सी होगी
जिंदगी तुम्हारी
हम नहीं चाहते तुम्हें
यूं कैद करना।
हम तुम्हें पुकारें
उतरें तुम्हारे दिल में
तब तुम बंद करलो
जब मन में हो तुम्हारे।
ऐसा पल कब आएगा
यह तुम्हारी सोच पर
निर्भर होगा जब
तुम पुकारोगी हमें।
हम चाहते
हैं कि
फिर कोई सताने वाले
आसपास न हों तुम्हारे
यही अरमान हैं हमारे।
आशा करते हैं कि
सुरक्षा कवच बन जाऐं
तुम्हारे दिल में उतरें
और वहीं बस जाऐं।
- करणीदानसिंह राजपूत
स्वतंत्र पत्रकार,
विजयश्री करणी भवन,
सूर्यवंशी विद्यालय के पास,
मिनि मार्केट,सूर्याेदयनगरी,
सूरतगढ़।

शनिवार, 26 दिसंबर 2015

राजेन्द्र भादू का राजनैतिक ग्राफ गिरा:पत्रकार वार्ता में उठाया गया सवाल:




भादू का यह ग्राफ कैसे नापा गया? अखबारों व चैनलों में खबरें तो उनके विरूद्ध आई नहीं:
बसपा के डूंगर राम गेदर और कांग्रेस के गंगाजल मील का ग्राफ नापा गया?

प्रेस वार्ता में विधायक राजेन्द्र भादू ने 2 साल का ब्यौरा पूरी तैयारी से दिया:
सवालों के जवाब वास्ते भी पूरे तैयार होकर आए लेकिन जिन्होंने कुछ छापा नहीं वे पत्रकार क्या पूछते?
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़। राजनीति के धुरंधर परिवार से प्रयासों के बाद जीत हासिल करने वाले विधायक राजेन्द्र भादू ने अपने कार्यकाल के 2 सालों के कामों का ब्यौरा कम्प्यूटर टाईप से तैयार किया हुआ पत्रकार वार्ता में दिया और स्वयं ने एक घंटे से अधिक बोलते हुए विवरण दिया। सवाल जवाब में एक दूर की कौड़ी खोज कर लाने जैसा सवाल उठाया गया।
आपका ग्राफ नीचे गिरता जा रहा है। ऐसा क्यों हो रहा है? सवाल में केवल इतना सवाल ही था। ग्राफ कैसे गिरा? कितना गिरा? कौनसा कार्य नहीं किया जिससे ग्राफ गिरा। इसका कोई ब्यौरा नहीं। केवल सवाल ही पूछा गया।
ग्राफ गिरने का मालूम कैसे पड़ा? किसने मापा और किस तरीके से मापा? कितना गिरा? यह बता दिया जाता तो अच्छा रहता। पत्रकारों को चिंता है तो यह भी मालूम जरूर पड़ा होगा कि चुनाव में दूसरे क्रम पर रहे बसपा के डूंगर राम गेदर और तीसरे क्रम पर रहे कांग्रेस के गंगाजल मील का ग्राफ इन 2 सालों में क्या रहा? वे ऊंचे चढ़े या और नीचे चले गए?
पत्रकार का सवाल है तो निश्चित है कि उनसे समीक्षा करके ही सवाल दागा होगा?
राजेन्द्र भादू ने कभी जवाब दिया नहीं इसलिए इसका उत्तर भी नहीं दिया।
राजेन्द्र भादू के दो सालों के कुल दिन होते हैं। इन 730 दिनों में दैनिक समाचार पत्रों में 30 समाचार भी उनके विरूद्ध नहीं छपे जिनसे ग्राफ नीचे गिरने का आंकलन किया जा सके।
हम भादू के पक्षकार नहीं हैं लेकिन एक साधारण जानकारी तो रखने की ईच्छा होती है कि आखिर ग्राफ कैसे गिरा?
भादू ने जब अपने कार्यकाल का इतना बड़ा रिकार्ड दिया है तो उसका एक एक विभाग की रिपोर्ट का अध्ययन कर और मौके की हालात को देख कर पत्रकार वार्ता के अगले दिन से ही बहुत कुछ छापा जाना शुरू किया जा सकता था लेकिन कोई मीनमेख निकाली नहीं गई।
राजेन्द्र भादू के विरूद्ध जो अखबार छापते रहे,उनको तो सवाल करने की जरूरत ही नहीं थी लेकिन जो प्रकाशन और प्रसारण में पीछे रहे वे सवाल दाग कर अपनी जिज्ञासा शांत कर सकते थे और पत्रकार वार्ता के बाद भी कर सकते थे। लेकिन इतने दिन बाद भी कुछ छपा नहीं और आगे उम्मीद नहीं। कलम और कैमरे 2 सालों तक काम करते रहते तो ग्राफ नीचे जाने का प्रमाण भी होता। पत्रकार तो इनसे ही समीक्षा करता है

डूंगर राम गेदर

सूरतगढ़ में विधानसभा चुनाव में नजदीकी क्रमों पर रहे डूंगर राम गेदर और गंगाजल मील का ग्राफ कहां है? आज चुनाव कराए जाएं तो गेदर और मील को उतने वोट नहीं मिल सकेंगे जितने विधानसभा चुनाव में मिले थे।
सत्ताधारी के कार्यकाल की समीक्षा कार्यों से और विपक्ष की समीक्षा उसके विरोध प्रदर्शन और लगातार इलाके पर नजर रखने और सत्ताधारी के कार्यों पर नजर रखने से की जाती है।
डूंगरराम गेदर और गंगाजल मील तथा उनके दलों की ओर से कितने विरोध प्रदर्शन धरने हुए और कितनी लिखित शिकायतें आदि सीधी विधायक के कार्यों बाबत हुई? हालात इनके भी कोई अच्छे नहीं रहे हैं।
विधायक के 2 सालों के ब्यौरे पर अभी बसपा ने ही जवाबी पत्रकार वार्ता की है। बसपा ने भी 730 दिनों में 30 दिन भी कोई कार्य नहीं किया जो एकदम निकटतम को करना चाहिए था। बसपा को  या कहें कि डूंगर राम गेदर को जो 39 हजार वोट मिले थे तो उसके हिसाब की जितनी जिम्मेदारी बनती थी उसे तो निभाते। 39 हजार मतदाताओं के प्रति कुछ तो जिम्मेदारी बनती होगी?
विधायक भादू के 2 सालों के ब्यौरे पर अभी गंगाजल मील ने केवल प्रेस बयान ही जारी किया है कि भादू की पोल खोलेंगे। भादू के विरूद्ध इतना सशक्त मैटर कुछ पत्रों में रिकार्ड सहित छपता रहा मगर 2 सालों तक कहीं शिकायत करने जाँच कराने की बात तक नहीं की। अब भी केवल बयानबाजी ही।
वैसे मील का कार्य भी 730 दिनों में 20 दिन भी सामने नहीं आया। बस यही दिमाग में संभवत:एक धारणा है कि भाजपा शासन से दुखी लोग अपने आप कांग्रेस को चुनेंगे और वह टिकट मील के पास में होगी। राजनीति में इतना तो सभी जानते हैं कि नीचे वाले को ऊपर न आने दो और जो ऊपर है उसे कंडम करते रहो व नीचे लाओ। मील और गेदर दोनों के पास में ऐसा मैटर था और अब भी है लेकिन उनको न जाने कौनसा डर सता रहा है? इन दोनों जनों डूंगर राम गेदर और गंगाजल मील ने भादू को नीचे गिराने के लिए कोई कार्य ही नहीं किय


 
गंगाजल मील तो अकेले नहीं उनके साथ उनके भतीजे पृथ्वीराज मील भी हैं। अब बात आती है कि हमारे कहने से भादू का विरोध नहीं करना चाहते हो,यह बड़ी अच्छी बात है। हमारे कहने व लिखने छापने से भादू का विरोध किया भी नहीं जाना चाहिए।
हां,राजनीति में जीवित रहना है और आगे चुनाव भी लडऩा है तो यह विरोध शक्तिशाली रूप में करना ही होगा वरना कोई जरूरी नहीं है कि पार्टी 
टिकट पर मील परिवार की ही मोहर लगी है और कोई दूसरा ले नहीं सकता।

भाजपा राजेन्द्र भादू सूरतगढ़ के विधायक:खूब जीते

 

सूरतगढ़ विधान सभा चुनाव 2013 का संपूर्ण परिणाम

गुरुवार, 24 दिसंबर 2015

भाजपा के 2 सालों का भादू राज पूरी तरह से फेल-बसपा नेता डूंगराम गेदर:


ना ग्रामों में कोई खुश न शहरों में कोई खुश: जनता की कोई सुनने वाला ही नहीं:
प्रदेश में बुरा हाल है तो सूरतगढ़ के दावे भी खोखले ही हैं:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़ 24 दिसम्बर  2015. बसपा की प्रेसवार्ता में डूंगर राम गेदर ने भाजपा सरकार के कार्यकाल को पूरी तरह से फेल बताया और कहा कि यही हाल सूरतगढ़ विधानसभा क्षेत्र में विकास कार्यों के भादू दावे का है। गेदर ने कहा कि शहर और ग्राम दोनों ही भाजपा राज को रोते हुए मिलते हैं। आम नागरिकों की कहीं सुनवाई ही नहीं है।
बीपीएल राशन कार्ड
गेदर ने कहा तक गरीब वर्ग बीपीएल राशन कार्डों के चक्कर में सरकारी कार्यालयों और ई मित्रा की चक्की में पिस रहा है। ग्रामीण इलाकों में अभियानों में हजारों आवेदन दिए गए लेकिन 5 माह में किसी का भी निस्तारण नहीं हुआ। ये आवेदन रद्दी बनते जा रहे हैं। डिपो पर नए कार्ड के बिना राशन नहीं मिलता।
मुख्यमंत्री विद्युत योजना 2013 से बंद:ढाणियों के कनेक्सन की फाइलें लेना बंद:
गेदर ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री विद्युत योजना 2013 से बंद कर दिए जाने के बाद से पांच पांच के समूह में ढाणियों में मिलने वाले कनेक्सन पर रोक लगादी गई है। नई योजना आज तक आई नहीं है। पिछले 2 सालों से ढाणियों के कनेक्सन की फाइलें लेना बंद कर दिया गया है। कृषि कनेक्सन 31-10-2009 तक जारी हुए डिमांड नोट वालों को ही दिए जा रहे हैं। इन 2 वर्षों में 10 माह की फाइलें निस्तारण का कार्य ही चल रहा है। जो दावे किए जा रहे हैं वे इस गति से पूरे कैसे होंगे?
जो कृषि कनेक्सन हें उन्हें थ्री फेज बिजली 6 घंटों के बजाय केवल 4 घंटे ही दी जा रही है तथा उसमें भी कई बार कट लगते हैं जिनके कारण मोटरें जलने का नुकसान भी किसानों को भोगना पड़ रहा है।
डिग्गी अनुदान कम कर किसानों के छुरा घोंपा:
कृषि के लिए डिग्गी निर्माण का अनुदान 3 लाख रूपए से कम करके 2 लाख कर दिया। ड्रिप व फव्वारा सिंचाई पद्धति का अनुदान 90 प्रतिशत से घटा कर 60 प्रतिशत कर दिया गया है।
गेदर ने आरोप लगाया कि चिकित्सालयों में ईलाज के लिए न दवाईयां न डाक्टर और नर्सिंग कर्मचारी। यही हाल पशु चिकित्सालयों का है। स्कूलों में भी अध्यापकों की कमी है। आदर्श स्कूल घोषित किए गए हें लेकिन उनमें कोई सुविधा नहीं है केवल नाम ही बदले गए हैं।
नई सड़कों के निर्माण के दावे भी खोखले हैं।
सिंगरासर वितरिका बाबत आरोप में गेदर ने भादू  के साथ पूर्व विधायक मील को भी घसीड़ा।
गेदर ने कहा कि सिंगरासर वितरिका का मुद्दा दोनों ने केवल चुनाव जीतने के लिए ही बनाया। मील साहेब ने दावा किया था कि 22 करोड़ रूपए मंजूर करवाए आखिर वह बजट कहां गया? उससे क्या काम करवाए गए? इसके बाद राजेन्द्र भादू बतलाएं कि जीतने के बाद इन 2 सालों में सिंगरासर वितरिका के लिए क्या किया या करवायाï?

नगरपालिका सूरतगढ़ में सर्वाधिक भ्रष्टाचार:बसपा की प्रेसवार्ता:

डूंगर राम गेदर का विधायक भादू की उपलब्धियों पर आरोप


छाया प्रशासन बनाकर नजर रखी जागी और कार्यवाही की जाएगी:
अमित कल्याणा की अध्यक्षता में छाया प्रशासन बनेगा:
अमित कल्याणा
- करणीदानसिंह राजपूत-
सूरतगढ़ 24 दिसम्बर 2015. बसपा की प्रेसवार्ता में डूंगर राम गेदर ने कहा कि विधायक राजेन्द्र भादू ने 2 सालों के विकास का पुलिंदा दिया है वह झूठ का पुलिंदा है।
गेदर ने आरोप लगाया कि नगरपालिका सूरतगढ़ में सर्वाधिक भ्रष्टाचार फैला हुआ है जिसे खत्म करने के लिए कदम उठाया जाएगा। गेदर ने कहा कि पालिका कार्यों पर नजर रखने व कार्यवाही कराने के

लिए एक छाया प्रशासन बनाया जाएगा। बसपा नेता अमित कल्याणा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाएगी जो पालिका पर नजर रखेगी। गेदर ने राजेन्द्र उपाध्याय के सवाल पर यह उत्तर दिया। उपाध्याय ने पूछा कि 2 सालों में आपकी पार्टी ने क्या किया? इसके जवाब में उन्होंने अपने धरना प्रदर्शन के कार्य गिनाए और कहा कि और कार्यवाही करनी पड़ी तो वह भी की जाएगी।



सोमवार, 21 दिसंबर 2015

पत्रकार करणीदानसिंंह राजपूत विनीता सूर्यवंशी की पौत्री का नामकरण:


योगेन्द्र प्रतापसिंह रीतिका भाटी की पुत्री नाम चेष्टा चेतना हुआ:
सूरतगढ़,
पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत विनीता सूर्यवंशी की पौत्री योगेन्द्रप्रतापसिंह रीतिका भाटी की पुत्री का नामकरण चेष्टा चेतना आए: पंडित चम्पालाल ने पूजापाठ हवन के साथ नामकरण किया। नामकरण संस्कार श्रीगंगानगर में दिनांक 20 दिसम्बर 2015 को हुआ।
नामकरण संस्कार में दोनों पक्षों के निकटतम परिजन उपस्थित थे।
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शुक्रवार, 18 दिसंबर 2015

हनुमान दीक्षित नोहर निर्भीक विचारों के धनी का स्वर्गवास:



विचार किरण पाक्षिक के संपादक प्रकाशक रूप में धाक थी:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़,18 दिसम्बर 2015.
सूरतगढ़,18 दिसम्बर 2015.
वरिष्ठ रचनाकार निर्भीक विचारों के धनी हनुमान दीक्षित नोहर का कल 17 दिसम्बर की शाम को स्वर्गवास हो गया। उनकी उम्र करीब 74 वर्ष थी। उनके विचार ना काहु से दोस्ती ना काहु से बैर के रूप में बड़े खुले प्रकाशित होते रहे। आजकल खुले दबंग विचार प्रगट करने में सामान्यत: लोग पीछे रहना चाहते हैं लेकिन दीक्षित जी सदा आगे दिखाई दिए। उनकी विचार धारा में राष्ट्रीयता भरी हुई थी।
यह वर्ष जाते जाते राजस्थानी और हिन्दी में लिखने वाले इस सुप्रसिद्ध रचनाकार को भी ले गया। नोहर रचनाकारों का धनी क्षेत्र रहा है।
सादर नमन


बुधवार, 16 दिसंबर 2015

विधायक राजेन्द्रसिंह भादू ने 2 साल के विकास कार्य बतलाए.प्रेसवार्ता:

पहली प्रेसवार्ता में जम कर बोले: अपनी राजनैतिक टीम के साथ आए:
पालिकाध्यक्ष श्रीमती काजल छाबड़ा,पंचायत सतिति प्रधान श्रीमती बिरमा देवी और भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष महेशकुमार सेखसरिया व देहात अध्यक्ष पेपसिंह राठौड़ भी उपस्थित थे:
विकास कार्यों के कागजात विभागानुसार दिए:
- करणीदानसिंह राजपूत -
सूरतगढ़, 16 दिसम्बर 2015.
भाजपा के राज के 2 साल पूर्ण होने पर जयपुर में उत्सव मनाए जाने के बाद विधायक राजेन्द्रसिंह भादू ने भी अपने विधानसभा क्षेत्र सूरतगढ़ में करवाए गए कार्यों का विवरण कागजातों के साथ पत्रकार वार्ता में सौंपा। भादू एक घंटे से अधिक समय तक धारा प्रवाह एक एक विकास कार्य की जानकारी देते हुए बोले।
नगरपालिका द्वारा शहर में करवाए गए कार्यों की जानकारी दी वहीं ग्रामीण इलाकों में हुए कार्यों की जानकारी भी दी। रेलवे,सड़क,कृषि उपज मंडी,बिजली,सिंचाई,राजस्व,शिक्षा व चिकित्सा का विवरण दिया। उन्होंने यह बेबाक माना कि अभी शिक्षा व चिकित्सा में बहुत पिछड़े हुए हैं क्योंकि अध्यापकों व डाक्टरों आदि की भारी कमी है जो पूरे प्रदेश में ही चल रही है। लेकिन इन परेशानियों को भी दूर करने के प्रयास सफल होंगे।
सेम समस्या हल के लिए भी कार्य किए जाने का पूरा विश्वास दिलाया कि यह समस्या रहने नहीं दी जाएगी।
शहर के रेलवे पुलों व मोकलसर पुल बाबत भी जानकारी दी।  पत्रकारों ने प्रश्र किए जिनका समुचित उत्तर भी दिया गया।
प्रेस वार्ता में सूरतगढ़ के अलावा जैतसर व राजियासर के पत्रकार भी शामिल हुए।
जो विकास कार्य कराए गए हैं उनकी रिपोर्ट अलग अलग दी जाएगी।

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