शुक्रवार, 27 जनवरी 2012

बड़े भाई की मृत्यु के अगले दिन दूसरा व पांचवें दिन तीसरा भाई चल बसा: रिपोर्ट:करणीदानसिंह राजपूत:

-- छगनलाल स्वामी            बल्लुराम स्वामी      बजरंगदास स्वामी-

सूरतगढ़ में 20 जनवरी को छगनलाल स्वामी के निधन पर उसी के घर में आया छोटा भाई बजरंगदास स्वामी 21 को चल बसा: दोनों की चिताएं एक साथ ही जली:परिवार इस शोक में खोया था कि पांचवें दिन 24 जनवरी को एक और भाई बल्लुराम भी चल बसा: ईश्वर की लीला-विधि का विधान-
तीनों के मरणोपरांत किया गया नेत्रदान:

सूरतगढ़ 27 जनवरी 2012. ईश्वर कई बार चमत्कारिक खेल दिखलाता है। देवी देवता तक अनेक घटनाओं को विधि का विधान टाला नहीं जा सकता कहते हुए सहन करते रहे हैं। ऐसा ही विधि का विधान या ईश्वरीय लीला या खेल में स्वामी समाज में तीन सग्गे भाई एक एक कर पांच दिन में यह संसार छोड़ गए।
    यहां वार्ड नं 13 में 83 उम्र में छगनलाल स्वामी का 20 जनवरी की रात्रि में करीब 10-30 पर स्वर्गवास हो गया। अगले दिन 21 जनवरी को सुबह अंतिम यात्रा की तैयारी की जा रही थी। सभी उसी में व्यस्त थे कि अपने भाई की देह को देखते देखते छोटे भाई बजरंगदास स्वामी ने भी यह संसार छोड़ दिया। बजरंगदास स्वामी की वार्ड नं 4 के निवासी व 78 साल के थे। दोनों भाईयों की अर्थियां एक साथ उठी। दोनों को एक समय में ही मुखाग्रि दी गई। कल्याण भूमि में सैंकड़ों लोगों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया। यह घटना शहर और आसपास के इलाके में चर्चा का विषय बन गई। अपने अपने हिसाब से लोग बताने लगे। कितना प्यार प्रेम रहा दोनों में कि भाई की मृत्यु को दूसरा भाई सहन नहीं कर सका। ईश्वर के घर भाई के साथ ही चला गया। अभी इस घटना की चर्चा चल ही रही थी कि पांचवें दिन 24 जनवरी को दोपहर में करीब 1-30 बजे तीसरा भाई बल्लुराम भी यह संसार छोड़ दोनों भाईयों की राह पर निकल गया। बल्लुराम की उम्र करीब 80 वर्ष थी। वार्ड नं 13 में बड़े भाई छगनलाल स्वामी के घर के पास में ही घर बनाया हुआ।
    छगनलाल स्वामी राजकीय सेवा में सूरतगढ़ तहसील में जमादार के पद से सेवा निवृत हुए थे। बहुत लोकप्रिय थे। विशेष अवसरों पर साफा बंधवाने के लिए उनको आमंत्रित किया जाता था। उनका एक पुत्र तोला राम स्वामी धर्म प्रचारक के नाम से विख्यात है। तोला राम स्वामी धार्मिक आयोजनों मेले व जागरणों में,रक्तदान शिविरों आदि में उल्लेखनीय सेवाएं देने में अग्रणी है।
    धर्म प्रचारक तोला राम स्वामी इस संपूर्ण घटनाक्रम को ईश्वर की लीला और विधि का विधान मानते हुए सांसारिक कार्यों में लगे हैं जो मृत्यु के बाद समाज में निभाए जाते हैं। शोक व्यक्त करने वालों की संख्या अपार।
    तीनों भाईयों के मरणोपरांत नेत्रदान किया गया। महावीर इंटरनेशनल सूरतगढ़ प्रेरणा देने में अग्रणी।
    बड़े भाई छगनलाल स्वामी की मृत्यु के तुरंत बाद महावीर इंटरनेशनल की प्रेरणा से उनके पुत्रों जगदीश, तोलाराम,राजाराम व रविकांत ने उनके नेत्रदान की स्वीकृति दे दी। महावीर इंटरनेशनल के अध्यक्ष नरेन्द्र चाहर ने उनके नेत्र उत्सारित किए।
    मध्यम भाई बल्लुराम जी की मृत्यु पर उनके पुत्रों महावीर, पृथ्वीराज, मांगीलाल,और चन्द्रेश की स्वीकृति के बाद नरेन्द्र चाहर ने ही उनके नेत्रों का उत्सारित किया। 
    बजरंगदास स्वामी की मृत्यु के बाद महावीर इंटरनेशनल की नेत्रदान कराने के लिए पुन: प्रेरणा रही। उनके पुत्रों राम स्वरूप, मनीराम,किशनलाल व लूणाराम की स्वीकृति के बाद नरेन्द्र चाहर ने नेत्र उत्सारित किए।
तीनों के नेत्रों को श्री जगदम्बा धर्मार्थ नेत्र चिकित्सालय श्रीगंगानगर भिजवा दिया गया।
ये कुल पांच भाई थे। जिनमें एक भाई करीब एक साल पहले चल बसा था।
पन्नाराम भी अपने तीन भाईयों को इस तरह से संसार छोड़ देने को ईश्वर की लीला और विधि का विधान ही मानते हैं।

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गुरुवार, 26 जनवरी 2012

कवि सम्मेलन में राजनेताओं की खूब उतारी गई आरती-रिपोर्ट: करणीदानसिंह राजपूत-




गुलाब से स्वागत और शॉल ओढ़ा कर किया गया सम्मान:
जय हिन्द लगाओ नारा:इतनी मिली आजादी कि कॉलर पकड़ कर नेताओं से होते हैं सवाल:
आज गधे भी मिलेंगे सरकार में:
सूरतगढ़, 26 जनवरी, 2012. गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर महाराजा में हुए कवि सम्मेलन में राजनेताओं जम कर आरती उतारी गई औा किसी को भी सूखा नहीं रहने दिया गया। कवियों ने प्रतातंत्र के गुणगान किए मगर देश की आजादी में जो कुछ हो रहा है, उसका चित्रण भी जम कर किया।
    संदेश त्यागी की कविताओं का रंग खूब जमा.....आज गधे भी मिलेंगे सरकार में। कविता यह थी कि विदेशों में कहीं कुत्तों को प्यार किया जाता है तो कहीं किसी और जानवर से। कवि ने बताया कि हिन्दुस्तान में सबसे अधिक प्यार किया जाता है कि गधे भी सरकार में मिलते हैं।
    रूपसिंह राजपुरी जिन्हें हास्य का कवि कहा जाता है। राजपुरी ने कहा कि पहले हर कवि सम्मेलन में उनको रात के बारह बजे ही बुलाया जाता था। उन्होंने कहा कि सरदार के आगे अ लगा दिया जाए तो वह असरदार हो जाता है। उन्होंने अध्यापक,महिलाओं, छात्रों, पुलिस व ग्रामीणों व राजनैतिक पार्टियों को खूब उछाला। दावे से कहा कि उनको पाजामा खेंच कर नीचे नहीं बैठाया जा सकता क्यों कि उन्होंने पाजामा ही नहीं पहना है।
    वरिष्ठ कहे जाने वाले कवि मोहन आलोक ने तीर तुकों पर बनी अपनी तीस साल पुरानी विधा राजस्थानी डांखले सुनाए। आलोंक ने पंजाबी में भी खूब डके तोड़े।
लाज पुष्प ने जय हिन्द लगाओ नारा से समा बांधा।
    राजेश चड्ढा के संयोजन में चले कवि सम्मेलन में दीनदयाल हास्य कवि ने भी खूब रंग जमाया। ओम पुरोहित कागद,सुरेन्द्र सुन्दरम, जनकराज पारीक,डा. अरूण सोहरिया,नन्द किशोर सोमानी ने अपनी रचनाएं सुनाई।
महाराजा मल्टीपलेक्स सिनेमा के शानदार हॉल में प्रशाशन की ओर से कवियों कर ही नहीं हर श्रोता का सवागत गुलाब के फूल भेंट कर स्वागत किया गया। कवियों का सम्मान श्रीफल व शॉल ओढ़ाकर किया गया।
इस अवसर पर विधायक गंगाजल मील, पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल,प्रशासन की ओर से एडीएम एस.के.बुडानिया,एसडीएम मदनलाल सिहाग,तहसीलदार कुंजबिहारी शर्मा, अधिशाषी अधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता व शहर की सामाजिक संस्थाओं व राजनैतिक सगठनों के पदाधिकारी कार्यकर्ता मौजूद थे। कवि सम्मेलन में शौर्य, श्रंगार,हास्य आदि सभी रसों को परोसा गया जिसमें गीत,कविताएं गजलें परोसी गई।
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गुरुवार, 19 जनवरी 2012

प्राचीन सूरतेश्वर महादेव मंदिर सूरतगढ़: विशेष लेख व चित्र- करणीदानसिंह राजपूत:











सूरतगढ़ के गढ़ के सामने यह मंदिर सूरतगढ़ की स्थापना के समय का बताया जाता है:
मंदिर का भवन और गर्भगृह आदि सब जीर्ण शीर्ण हो चुके हैं-जिनके जीर्णाेद्धार की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

सूरतगढ़ के गढ़ के सामने बना है सूरतेश्वर महादेव का मंदिर। इस मंदिर की प्राचीनता का इतिहास यह बताया जाता है कि गढ़ के निर्माण के साथ ही इस मंदिर का निर्माण हुआ था। पहले यह एक ही मंदिर था और इसी में स्थापित शिव लिंग पर लोग दुग्ध व जल का अभिषेक किया करते थे। इसी का पूजन अर्चन होता था। यह क्षेत्र बीकानेर रियासत में था। बीकानेर के महाराजा सूरतसिंह के नाम पर प्राचीन ग्राम सोढ़ल का नया नाम रखा गया था। बीकानेर महाराजा की तरफ से ही मंदिर के रखरखाव आदि के लिए माफी की कृषि भूमि भी दी गई थी। कुछ वर्ष पहले पुजारी के अभाव व स्थानीय रख रखाव में और कुछ विवाद के कारण दूर रहने के कारण यह सार संभाल देव स्थान विभाग के अधीन करदी गई।
    मंदिर के जीर्ण हालत में जाते रहने के कारण श्रद्धालुओं को मानसिक पीड़ा भी होने लगी और इसके जीर्णाेद्धार की मांग की जाने लगी। इसके समाचार रपटें समाचार पत्रों में छपी। सामाजिक संगठनों व श्रद्धालुओं ने यह मांग देव स्थान विभाग से की। इसका सुखद परिणाम आया। देव स्थान विभाग ने इसके जीर्णाेद्धार के लिए बजट निश्चित किया। यह जीर्णाेद्धार सार्वजनिक निर्माण विभाग के माध्यम से होगा।
    मंदिर में शिवलिंग और नन्दी की प्रतिमाएं पुरानी व क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इनको हरद्वार में विसर्जित किया जाएगा। मंदिर के गर्भगृह के जीर्णाेद्धार के बाद नया शिवलिंग व नन्दी स्थापित होंगे व प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। यह कार्य यहां की समिति करेगी। इसके लिए श्रद्धालु जुट गए हैं। नई स्थापना के बाद में पुराने शिवलिंग व नन्दी की प्रतिमा को विर्सजन के लिए ले जाया जाएगा। अभी ये प्रतिमाएं शिव बगीची में ही एक पेड़ के नीचे विराजमान रहेंगी।
शिवलिंग व नन्दी की प्रतिमा को हटाए जाने से पूर्व पश्चाताप पूजा 18 जनवरी 2012 को यजमान महावीर प्रसाद सेखसरिया सूरतगढ़ ने की एवं यह पूजा पंडित जगदीश प्रसाद कौशिक हनुमानगढ़ जंकशन ने करवाई।
    मंदिर के जीर्णाेद्धार बाबत एक बैठक मंदिर प्रांगण में 19 जनवरी 2012 को हुई जिसमें देव स्थान विभाग के हनुमानगढ़ टाऊन स्थित कार्यालय के सेवागिर राजेन्द्रप्रसाद शर्मा भी उपस्थित थे। समिति के संयोजक दिलात्मप्रकाश जैन सहित इस बैठक में गणमान्य श्रद्धालुओं ने भी भाग लिया। यह कार्य जल्दी ही आजकल में ही शुरू हो जाएगा।

- करणीदानसिंह राजपूत,
स्वतंत्र पत्रकार,
सूरतगढ़।
मोबाईल  94143 81356

गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

अरोड़वंश व सारस्वत ब्राह्मण धर्मशालाओं दुकानों का अवैध निर्माण:अवैध निर्माण तोडऩे की मांग:विशेष खबर - करणीदानसिंह राजपूत

अरोड़वंश की धर्मशाला का हो रहा गलत निर्माण

अरोड़वंश धर्मशाला आगे अतिक्रमण करके बनाई जा रही है। पास में मेढ़ क्षत्रिय स्वर्णकार संघ की धर्मशाला की चारदीवारी से कितनी आगे है अरोड़वंश धर्मशाला।

सारस्वत ब्राह्मण धर्मशाला के आगे की ओर दुकानों का निर्माण

सारस्वत ब्राह्मण धर्मशाला की दुकानों का पिछे का बंद हिस्सा।
दोनों ही धर्मशालाओं पर अवैध निर्माण का आरोप:
कार्यवाहक अधिशाषी अधिकारी राकेश अरोड़ा पर शह देने के आरोप:
नगरपालिका बोर्ड की बैठक में पार्षदों ने घेरा व जवाब देना पड़ा:

सूरतगढ़, 22 दिसम्बर,2011. अरोड़ा व सारस्वत कुंडिया ब्राह्मण समाज की धर्मशालाओं के स्वीकृत और आवंटित भूखंडों पर गैर कानूनी रूप से सड़क की ओर दुकानों के निर्माण को लेकर नगरपालिका बोर्ड की बैठक में हंगामा हो गया। पार्षदों ने अधिशाषी अधिकारी राकेश अरोड़ा पर आरोप लगया कि उनकी शह और मिली भगती से ये अवैध निर्माण हो रहे हैं। नगरपालिका शहर में गरीबों के घरों को अतिक्रमण बतला कर तोड़ रही है, मगर धर्मशालाओं में बन रही दुकानों पर ना कोई रिपोर्ट है और ना कोई कार्यवाही है। पार्षदों राजाराम गोदारा,धर्मेन्द्र सोलंकी,परमजीतसिंह पम्मी,सत्यनारायण छींपा,नत्थूराम भाटिया ने आरोप लगाया कि धर्मशालाओं के नाम पर दुकानें बन रही है और अखबारों में समाचार छप रहे हैं। इतना कुछ होने के बावजूद नगरपालिका प्रशासन कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहा है? गरीबों के मकानों को नगरपालिका अतिक्रमण बता कर तोड़ती रहती है और यहां पर कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही है?
    पार्षदों का यह भी कहना था कि बीकानेर रोड अत्यंत व्यस्त रोड है जिस पर धर्मशालाओं के आगे दुकानों के निर्माण से सड़क पर वाहनों आदि के खड़े होने से यातायात बाधित होगा व दुर्घटनाएं होंगी।
पार्षद इस बात को लेकर अड़ गए कि अधिशाषी अधिकारी साफ साफ जवाब दे और गुमराह करने की कोई बात नहीं कहे। पार्षदों के अड़ जाने पर और अधिशाषी अधिकारी से जवाब तलबी पर मेजों को थप थपाया गया और मांग कर रहे पार्षदों का समर्थन किया गया।
अधिशाषी अधिकारी राकेश अरोड़ा को इसका जवाब देना पड़ा।
अधिशाषी अधिकारी ने कहा कि निर्माण की स्वीकृति आवासीय और चेरिटेबल संस्थाओं को धर्मशाला निर्माण की स्वीकृति दी गई है और वहां पर गलत निर्माण हो रहा है तो उनके विरूद्ध कार्यवाही की जावेगी। पार्षदों का कहना था कि गलत निर्माण आगे तुरंत बंद करवाया जाए व जो गलत हुआ है वह तुड़वाया जावे। इस बैठक की अध्यक्षता पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल कर रहे थे।
    शहर की अत्यंत व्यस्त प्रमुख बीकानेर रोड पर धर्मशालाओं में सड़क की ओर अवैध रूप में दुकानें बनाने का प्रकरण साप्ताहिक समाचार पत्र ब्लास्ट की आवाज ने 19 दिसम्बर के अंक में सचित्र प्रकाशित किया था जिसमें अधिशाषी अधिकारी पर आरोप लगाया गया था।
    नगरपालिका की बैठक के बाद शाम को भी इन धर्मशालाओं में दुकानों का निर्माण चल ही रहा था।
    अरोड़वंश धर्मशाला में दुकानों के निर्माण का आरोप तो लगा ही है। यह धर्मशाला सड़क की ओर सेटबैक खाली छोड़े जाने वाले स्थान पर अतिक्रमण करते हुए भी बनाई जा रही है। इससे सड़क के आगे की जगह और संकड़ी हो गई है। इसके पास में ही मेढ़ स्र्वणकारों की धर्मशाला के भूखंड की चारदीवारी बनी हुई है। उससे करीब दस फुट आगे तक लेते हुए अरोड़ वंश धर्मशाला का अवैध निर्माण चल रहा है। इस प्रकार से अरोड़वंश धर्मशाला में सड़क की तरफ की करीब आठ सौ वर्ग फुट भूमि पर अतिक्रमण किया गया है। नगरपालिका की इस सड़क पर आगे हाल ही में हुई दुकानों की नीलामी की बोली के हिसाब से अतिक्रमण की जगह की कीमत ही करीब 8-10 करोड़ बनती है। आरोप है कि कार्यवाहक अधिशाषी अधिकारी राकेश अरोड़ा की शह पर ही यह हो रहा है।
    इस अतिक्रमण को रूकवाने और जानते हुए भी नगरपालिका को करोड़ों रूपयों का नुकसान पहुंचा रहे कार्यवाहक अधिशाषी अधिकारी को निलंबित कर जांच करने की मांग उठने लगी है। यह मांग इसलिए भी उठने लगी है कि पूर्व में नगरपालिका में भूमि घोटाले करने वाले अधिशाषी अधिकारी को भ्रष्टाचार निरोधक विभाग ने 21 दिसम्बर को गिरफ्तार न्यायालय में पेश किया जहां से उन्हे न्यायिक हिरासत में जेल भिजवाया गया है। इसके अलावा पूर्व में अधिशाषी अधिकारी रहे भंवरलाल सोनी पर भी भ्रष्टाचार के आरोप में प्रकरण दर्ज हैं। इसी तर्ज पर कार्यवाहक अधिशाषी अधिकारी राकेश अरोड़ा पर भी कार्यवाही की मांग उठने लग गई है।

रविवार, 11 दिसंबर 2011

कश्मीरी सेव जैसी सुंदरता का अहसास कराती नयनों को लुभाती लाल सुंदर बड़ बंटियां:



कश्मीरी सेव जैसी सुंदरता का अहसास कराती नयनों को लुभाती लाल  सुंदर बड़ बंटियां:
सूरतगढ़ में अनेक जगह ये शानदार बड़ बंटियां:
बड़ की छाया का, हवा का और इन बड़बंटियों को देखने का आनन्द लीजिए
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 11 दिसम्बर 2011. कश्मीरी सेव जैसी सुंदरता अहसास कराती नयनों को लुभाती  लाल सुदर बड़ बंटियां सूरतगढ़ में अनेक स्थानों पर बड़ के पेड़ों पर लदी हुई हैं। उपखंड कार्यालय के आगे,कल्याण भूमि में व अन्य स्थानों पर बड़ के पेड़ों की दाया, हवा, और इन बंटियों को देखने का आनन्द लिया जा सकता है। बरगद, वट और बड़ के नाम से जाना जाने वाला यह पेड़ अनेक रोगों के ईलाज में काम आता है। इसके पास में बैठना भी बहुत लाभकारी है।
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मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

दारूडिय़ो -1

दारूडिय़ो
दारूडिय़ो कीं और ज्यादा भड़क ग्यौ-दारूडिय़ो तूं। दारूडिय़ो तेरो ईओ। दारूडिय़ो तेरो चेरमैन। दारूडिय़ो तेरो एमल्यो। साळौ सफेदपोस। आगै सूं मनै ना छेड़ी। बता दूंगा हां तेरी बणयौड़ी सीडी री बात। बलेकमेल करै।
बीचारो नेतो आपरो मूंडो ले र बेगो सो टप ग्यौ।
पतरकार बींरै खनै सूं दूर हटण लाग्यो जणा फेरूं बोल पड्यौ- अरे। पतरकार तूं कठै छापसी। तेरे खनै तो अखबार कठै है?


रेलवाई ठेसण रै सामी नेताजी री मूरती रै लारै पीरूं सिंझया रे बख्त री बात।
बठै जमावड़ो देख म्हूं भी जा र खड्यो हो ग्यौ। अेक जणो मूंधो पड्यौ कीं बड़ बड़ान लाग रयौ हो। बीं रै चारूं मेर खड्या लोग हँसी उडावता बातां करण लाग रया हा। अेक जणो बाईसीकल माथै अेक पग सड़क पर मेल्योड़ो खड्यो हो अर मोबाईल सूं फोटू लेवण लाग रयौ हो।
एक जणे सड़क माथै मूंधे पड्यै आदमी नै सीधो करयौ अर बोल्यो-देख तेरी फोटू उतारै है। मूंडो सावळ कर बैठ। तेरी फोटू छपसी।
बो अेक बार सामी झांक्यो अर बोल्यौ- अरे पतरकार। तूं म्हारी फोटू उतारै ह रै। थारै पतरकारां री फोटू छापसी म्हारै जिसा। छाप पतरकारां इैयो सागै सैटिंग करी।
बाईसिकल माथै खड्यो पतरकार बाईसिकल नै स्टैंड माथै खड़ी करी अर दारूडिय़े रै खनै जार कयौ-ओय दारूडिय़ा के बोले है रे। कुण लीया रै पीसा। कुण करी सैटिंग। थारै बाप करी कै।
दारूडिय़ो-पतरकार तूं है कै म्हूं हूं? अरे। तूं कींरो पतरकार। थनै सहर मांय री खबर भी पतौ नीं है। आच्छा आच्छा। आपरै बेली साथियां री फोटू कोनी छापै। तनै सरम आवै। नेड़े आजा बता दूं। मेरो नाम ना छाप दीजै।
पतरकार नेड़े ग्यौ।
दारूडिय़ै कयौ। कान लगा। अ लोग बाग सुण लैसी।
अेक जणे कहयौ- तेरो कै बिगडै है? नाम तो पतरकारां रा सामी आसी।
दारूडिय़ै- ना। मेरे चढ्योड़ी कोनी। सगळा रे सामी कोनी बताऊं।
दो चार जणा- सगळा रै सामी क्यूं नीं बतावै?
दारूडिय़ौ-ईज्जत है बींयारी ईज्जत है। इत्ती कोनी पीयोड़ी।
पतरकार दारूडिय़े रै मूंडै सारै कान लगायो।
दारूडिय़ो- बडा बडा अखबार। बडी बडी खबरां गा यब। समूची गा यब। ना फोटू ना खबर। करोड़ां रा महळ अर बाजार खड्या होवण लाग रैया है। गरीब री झोंपड़ी गिरावै जणा छापै कै करोड़ां रो कबजो छुडायौ। झौंपड़ी करोड़ां री अर महळ बाजार धेले रा। सुण पिछाण लै पतरकारां नै।
इतै म एक सफेद झक चोळे पाजामै आळो नेतो पूंच्यो अर पतरकार नै कयौ- पतरकार जी थै तो समझदार हो कठै दारूडिय़े सागै मगजमारी करण लाग रया हो।
दारूडिय़ो भडक ग्यौ-ओ। ओ। नेता। दारूडियौ कींया कयौ?
नेता- साळा चुप कर। दारूडियो और कहसूं दारूडिय़ो।
दारूडिय़ो कीं और ज्यादा भड़क ग्यौ-दारूडिय़ो तूं। दारूडिय़ो तेरो ईओ। दारूडिय़ो तेरो चेरमैन। दारूडिय़ो तेरो एमल्यो। साळौ सफेदपोस। आगै सूं मनै ना छेड़ी। बता दूंगा हां तेरी बणयौड़ी सीडी री बात। बलेकमेल करै।
बीचारो नेतो आपरो मूंडो ले र बेगो सो टप ग्यौ।
पतरकार बींरै खनै सूं दूर हटण लाग्यो जणा फेरूं बोल पड्यौ- अरे। पतरकार तूं कठै छापसी। तेरे खनै तो अखबार कठै है?
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दारूडिय़ा घणी बार इसी इसी बातां कह जावै जिका दूजा नीं कह सकै। दारूडिय़ा रै खनै ना जाणै कठै कठै सूं आ जावै अंदर की बातां। नुंई नुंई बातां। उडीक राखां हो क अगळी मुलाकात दारूडिय़े रै सागै कठै होवे? कीसे सहर मांय होवै।
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करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार सूं अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार
23, करनाणी धरमशाला,
सूरतगढ़। राजस्थान
पिन 335 804
मो- 94143 81356
दिनांक 6 दिसम्बर 2011.

रविवार, 4 दिसंबर 2011

पालिकाध्यक्ष बनवारी निर्दोष-सीडी तो सिपाही रोहिताश की है- विधायक गंगाजल मील

अनुसूचित जाति बाजीगर महिला से बलात्कार,यौन शोषण, गर्भपात का मामला:
नगरपालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया और सिपाही रोहिताश आरोपी है:

इस प्रकरण में सबसे कमजोर कड़ी सिपाही रोहिताश है:
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 4 दिसम्बर 2011.विधायक गंगाजल मील ने कहा कि नगरपालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल तो निर्दोष है, लैब में भेजी गई सीडी तो सिपाही रोहिताश की है। विधायक मील ने तीन दिसम्बर को सुबह 11-28 बजे मोबाईल फोन पर यह महत्वपूर्ण जानकारी दी। मील ने स्वयं कॉल करके उक्त जानकारी देते हुए नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल को निर्दोष  बताया ।
विधायकजी से जब कहा गया कि बनवारीलाल निर्दोष है तो इस मामले का निस्तारण जल्दी से करवाएं। यह मामला रूका सा पड़ा है। बनवारीलाल निर्दोष है तो फिर पुलिस ने बनवारीलाल पर तलवार क्यों लटका रखी है? यह तलवार उसके सिर के ऊपर से जल्दी से जल्दी हटाई जानी चाहिए। जिला पुलिस अधीक्षक से कह कर जांच का परिणाम आऊट करवाएं।
मील साहेब ने कहा कि वे इस बाबत एसपी से बात करेंगे- आपके सामने बात कर लेंगे।
यह प्रकरण अदालत के आदेश पर सूरतगढ़ सिटी थाने में 7 अक्टूबर 2010 को दर्ज हुआ था और मील ने 12 अक्टूबर को प्रेस कान्फें्रस में बनवारीलाल मेघवाल को निर्दोष बता दिया था। मील ने कहा था कि बनवारीलाल को तो फंसाया गया है।
    विधायक मील ने मोबाईल पर बताया कि बलात्कार प्रकरण में जो सीडी है वह तो उस सिपाही रोहिताश की है। जिसको लैब में जांच के लिए भेजा हुआ है।
 इस बात से एक संभावना नजर आ रही है कि इस सारे प्रकरण में उक्त सिपाही ही सबसे कमजोर कड़ी है। पीडि़ता के इस्तगासे में भी सबसे अधिक आरोप सिपाही पर ही लगाये हुए हैं। हालांकि बनवारीलाल व ओम साबनिया को भी यौन शोषण में बराबर का भागीदार बताया गया है। इसमें बनवारीलाल मेघवाल और पार्षद पति ओम साबनिया दोनों राजनैतिक व्यक्ति है। बनवारीलाल के निर्दोष होने का मील कह ही रहे हैं और ओम साबनिया के कहने पर ही पीडि़ता ने यह प्रकरण दर्ज करवाया था। ओम साबनिया के कहने का उल्लेख पीडि़ता ने खुद ने ही अदालत में दायर किए अपने इस्तगासे में लिखा है। इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग बार बार दोहराई जाती रही है। भाजपा ने भी निष्पक्ष जांच करने और दोषी पर मुकद्दमा चलाने की मांग को लेकर आंदोलन किया था, और 3 जनवरी को धरना उठानेके बाद से उसके नेता चुप हैं।
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शनिवार, 3 दिसंबर 2011

करणी की बात:12- रेलें जनता के लिए है या जनता रेलों के लिए है?

रेलों को तानाशाही तरीके से बंद करने की घोषणाओं के बाद यह प्रश्र पैदा हुआ है?
ऐसा लगता है कि ये आदेश भारतीय रेल विभाग की ओर से जारी नहीं हुए बल्कि अंग्रेजी शासन के रेल विभाग ने भारतीयों के लिए जारी किए हैं।

करणीदानसिंह राजपूत

राजस्थान के सीमांत जिले श्रीगंगानगर से हरिद्वार और इंटरसिटी और दिल्ली आवागमन की आभा तूफान रेलों को धुंध के कारण बंद करने का रेलवे विभाग का आदेश इस वर्ष भी जारी हो गया है जिसका विरोध हो रहा है। जनता के विरोध को रेल विभाग हर साल अनसुना करता है, इसलिए इस बार भी वहीं करेगा। रेलों को तानाशाही तरीके से बंद करने की घोषणाओं के बाद यह प्रश्र पैदा हुआ है, कि रेलें जनता की सुख सविधा से यात्रा करने के लिए है या जनता रेल विभाग की सुख सुविधा के लिए है? यह प्रश्र मैं जनता के बीच में तथा राजनैतिक व सामाजिक संगठनों के बीच में इसलिए रख रहा हूं कि आजतक इस मूल महत्वपूर्ण प्रश्र पर मंथन नहीं हुआ और ऐसा सोचते हुए कोई कार्यवाही नहीं हुई। हर साल रेल विभाग बिना किसी से विचार विमर्श किए तानाशाही तरीके से आदेश जारी कर देता है। ये आदेश रेल विभाग के चंद अधिकारियों कील सोच पर आधारित होते हैं।
ऐसा लगता है कि ये आदेश भारतीय रेल विभाग की ओर से जारी नहीं हुए बल्कि अंग्रेजी शासन के रेल विभाग ने भारतीयों के लिए जारी किए हैं। इन आदेशों से रेलें बंद कर दिए जाने के बाद आम जनता किन साधनों से यात्रा करेगी और वह कितनी महंगी होगी? यह सोचना इन अग्रेजों  के लिए जरूरी नहीं है। हमारे प्रशासनिक अधिकारियों की सोच आज भी नहीं बदली। वे लोकतांत्रिक भारत के होते हुए नहीं सोचते। इन अधिकारियों की सोच बदलने की कार्यवाही हमारे चुने हुए जनप्रतिनिधि भी नहीं करते। जन प्रतिनिधियों की राय लेना तक रेल अधिकारी उचित नहीं मानते। इसलिए रेलवे के अधिकारियों को उस स्तर तक मजबूर किया जाना चाहिए कि वे जब भी कभी रेलों के बारे में निर्णय करें तो उससे पहले जन प्रतिनिधियों व उस इलाके की जनता और संगठनों से राय जरूर करे।
रेल विभाग के एक तरफा आदेश निरस्त होने चाहिए और इन रेलों का संचालन पूर्व की भांति शुरू होना चाहिए।
करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
मोबा. 94143 81356
दिनांक- 3 दिसम्बर 2011.

मंगलवार, 29 नवंबर 2011

देवी रो रूप राजस्थानी कहाणी करणीदानसिंह राजपूत

राजस्थानी कहाणी

        देवी रो रूप

        करणीदानसिंह राजपूत

राममूरती रे देवी रूप रा दरसण करण री होड़ मचरी। गांव का घणसरा लोग लुगाई अर टाबर टिंगर राम मूरती रे घर की लांबी चौड़ी बाखळ में एक दूजे रै उपरोथळी होवता सगळा सूं आगै जार राममूरती ने नेड़े सूं देखण री जुगत में लाग्योड़ा हा।
राता गाभा में राममूरती हाथ में जोत लियोड़ी देवी री मूरती रै आगै नाचण लाग रैयी ही। जोत की ऊंची ऊंची उठती लपटां  में बींरो चेरो लाल अर आंख्या भी लोई सी राती दीख री। बींरै सिर पर सूं ओढ़णी उतर गई अर केस खुला हो र बिखर ग्या हा ।
राममूरती रै नेड़े बैठ्या लोग लुगाई ढ़ोल नगाड़ा ताल चिमटा डेरू बजावण लाग रैया हा।
चाणचकै रामूरती जोर जोर सूं फूंकारा मारण लागी। बींरो नाच गेड़ चढ़ग्यो हो । बा जोत नै जोरां सूं घुमावण लागी।
लोग एकै सागै ही चिल्लाया।
देवी आयगी। देवी आयगी। राममूरती में देवी आयगी।
राममूरती रै हाथ सूं  एक जणै जोत झाल ली। राममूरती रे नाच रो गेड़ घणी दूरी तक हो गयो । बा पसीना पसीना हुयगी ही।
बींरै घाघरै री फटकार लोगां कै लागती अर जोरा सूं जैकारो लागतो।
देवी मैया की जै हो  राममूरती मैया की जै हो।
आधै घंटे ताईं नाच चालतो रैयो अर ढोल डेरू बाजता रैया।
राममूरती देवी मूरत रे सामीं बैठगी पण बींगो झूमणों चालू रैयो।
एक आदमी जैकारो लगा र चिल्लायो, बूझो बूझो राममूरती मैया में देवी की छाया आ गई है। बेगा बेगा बूझ ल्यो।
लोग लुगायां राम मूरती रै नेड़े जावण लाग्या।
बो आदमी एकर फेरूं जोरां सूं चिल्लातो सो बोल्यो,कोई रह ज्यावैला तो आगले अदीतवार ताईं अडीकणो पड़ेगो।
लोग अर लुगाईयां एक एक कर आप आपरी समस्यावां राखण लाग्या।
लोग राममूरती रै आगै सिर निवाता अर सवाल पूछता। कई सुबकता सुबकता तो कई  रोवता रोवता आंगणे माथे सिर रगड़ता रगड़ता सवाल राख्ता। कोई खेती रो। कोई काम धंधे रो। कोई अदालत कचहरी री समस्या रो हल पूछतो। लुगाईयां रा घणकरा सवाल छोरे छोरी रे ब्याव सारूं हा। कई लोगां तो काम धंधे रै होवण सारूं मन्नत भी मानी।
    राममूरती री चरचा सुण पड़ोस आळै गांव सूं आयोड़ी सांतीदेवी भी दरसण सारूं भीड़ में मौजूद बैठी ही। सांतीदेवी भी भीड़ रे सागै सागै जैकारा लगावण लाग रैयी ही।
घणकसरा सवाल हो ग्या।
एक आवाज ओरूं आई। कोई बूझणे सूं बाकी रह ग्यो होवे तो आपरी समस्या सामी राखदो।
सांतीदेवी डरती डरती सी आगै आई। उण राममूरती रै पगां रै धोक लगायो।
बा बोली-देवी मां मेरे बेटे रो दारू छुड़ा दे। म्हूं थारै आगै सवा सौ रिपीयां रो सीरो परसाद में चढ़ाऊंली अर चूणरी गाभा भेंट करूंली। बा एक ताळ बोलगी।
राममूरती सांतीदेवी सांमी झांक्यो। बींरी आंख्या री ललाई अर बिखरोयाड़ा केसां सूं एकर कर सांतीदेवी डर गई।
सांती देवी पाछी नै खिसक गई।
राममूरती चिल्लाई,कांई कैयो? तेरे बेटे रो दारू छुडावणो है। राममूर्ती हा हा कर हंसण लागी।
तेरे बेटे रो दारू.... म्हूं तेरे बेटे रो छोड़ पड़ोसियां ताईं रो दारू छुड़वा दूं। तूं कुणै में जा र बैठ ज्या। जोत री बभूती ले र जाई। तनै म्हारे हाथ सूं बभूती देस्यूं।
राममूरती सूं सवाल करण वाळा लोग लुगाई एक एक कर निकळता रैया। भीड़ छंटगी।
राममूरती भी झूमणो बंद कर सुस्तावण लागी। देवी री छाया हटगी। आंगणै मांय भभूती लेवण सारूं सांतीदेवी बैठी ही अर राममूरती रो पड़ोसी इमरताराम बैठ्यो हो।
इणी बगत एक जवान छोरो दारू में टिल्ला खांवतो आयो। छोरै रै दारू कीं घणी पीयोड़ी ही।
छोरो राममूरती खनै गयो। उण राम मूरती रो बुकियो झाल र कैयो - माऊ, ऐ माऊ।  तेरी देवी चली गई हुवै तो मनै रोटी घाल दे। घणी जोरां सूं  भूख लाग रैयी है।
छोरो झूमतो फेर बोल्यो,देख लेई। कोई चूरमो चारमे रो परसाद आयो हुवै तो मीठे रो भोग भी लगा लेस्यूं।
राममूरती न बोली न चाली। आपरै दारूडिय़े बेटे ने थाम दूजे कोठडिय़े में लेगी।
    सांतीदेवी राममूरती अर बींरै बेटे नै कोठडिय़े में जांवतां नै देखती रैयी। बिंयारै कोठडिय़े में जाणै रे पाछेै सांतीदेवी  इमरताराम खानी झांक्यो। पड़ोसी नै साांतीदेवी री आंख्यां में सवाल तिरतो दिख्यो।
पड़ोसी सांतीदेवी सांमी देख्तो बोल्यो - आ राममूरती तेरे बेटे री दारू कियां छुड़ासी। इंगो खुद रो घर तो दारूडिय़ां सूं भरयो है। घर मांयने सगळा दस जीवां में राम मूरती अर बेटे री बहु, एक चार साल रे नानिये अर अस्सी साल रे डोकरे सुसरे नै छोड़ सगळा दारूडिय़ा है। एक तो आपणै सांमी टिल्ला खांवतो आयो है। बाकी रा टिल्ला खांवता थोड़ी ताळ में आ ज्यासी। ईं घर में तो सिंझया रै बख्त रोजीनां रा खेल होवे है।
सांतीदेवी बोली-म्हूं घणी आस लेर आई ही,पण म्हारा करम फूट्योड़ा है।
बा थकी हारी सी राममूरती रै घर सूं बारै निकळी। बींरै सागै ही पड़ौसी भी बारै निकल्यो।
गळी में सिंझ्या रो अंधकार घिरणो सरू हो ग्यो हो।
इमरताराम बोल्यो, ऐ भाण,अंधकार मांयनै झाड़ झंखाड़ रै रास्ते दस किलोमीटर दूरी किंयां जावैगी। फेर भूखी तीसी। कोई सांप परड़ोट डस डसा लेसी। ईंयां कर। म्हारै घर चाल र रोटी टुकड़ो खा र रात बांसिंदो करलै। झांझरके तेरे गांव नै निकळ जाई।
सांतीदेवी रै बात जंचगी- आच्छो बीरा,तूं कहवै तो ठीक है।
बा पड़ौसी रै घर मांयनै रोटी टुकड़ो कर बाखळ में चारपाई माथै पसरगी। थकी हारी नै थोड़ी  ताळ में नींद फिरगी, पण नजीक सोर सराबो होवण लाग्यो जणां नींद उचटगी। बा बैठगी। सोर सराबो राममूरती रै आंगणे खानी सूं आ रैयो हो।
राममूरती रो आंगणो पड़ोसी इमरताराम री बाखळ की बाड़ रै ऊपर स्यूं दिखतो हो।
सांती देवी बाड़ रै खनै जा र खड़ी हो राममूरती रै आगणै में झांकण लागी। इमरताराम री नींद उचटी अर बो भी सांतीदेवी रै खनै जा खड़्यो हो र राममूरती रै आंगणै में झांकण लाग्यो।
राममूरती अर दस पन्द्रह आदमी लालटेन रे चांदणै मांय देवी मूरती रै आगै खड्या हा। आदमी एक एक कर देवी मूरती  रै ऊपर बोतल उल्टी करता जिण सूं एक धार मूरती  रै ऊपर गिरती दिखती। राममूरती आपरै हाथां सूं मूरती नै असनान करावण लागरी ही।
सांतीदेवी आपरै हिरदै मांय सोचण लागी-ओ। देवी नै रात नै असनान। कोई खास पूजा होवेली
बा सोच रैयी ही कै हवा रै एक फटकारेै सागै एक भभको आयो अर बींरै बाद तो लगोतार बास ई बास आवण लागी।
सांतीदेवी बास सूं पिछाणगी।
लोग देवी री मूरती नै दारू रो असनान करा दारू रो इज भोग लगावण लाग रैया हा। एक कटोरै में दारू घालर देवी रै होठां खनै ले जावता।
अरोगो। माई। अरोगो।
दारू रो भोग लगायां बाद में कटोरो खनै पड़ी एक टोकणी  में मूंधा देता।
मूरती नै असनान करायां सूं आगै भेळै  होते दारू नै लोग आपरै चळू में भरता अर जैकारो लगा र पीता जावता।
जै देवी मैया री।
जैकारे री आवाज रै सागै परसाद रूप  मांयनै दारू पीवण वाळा में राममूरती रा बेटा भी सामल दिख्या। जका नै इमरताराम पिछाण रैयो हो। बो सांती देवी नै बतावण लाग्यो।
सांतीदेवी इमरताराम सूं बोली- देवी नै दारू रो असनान अर भोग।
इमरताराम  बोल पड़्यो- बाई तूं तो बावळी है। तूं तो एक रात मांयनै दारू रो भोग ही देख्यौ है। म्हूं तो अठै आधी आधी रात नै घणकरी बार मिमयाणै री आवाजां रै सागै लोगां री आवाजां भी सुणी है।
सांतीदेवी पूरै टोर सूं सुण रैयी ही।
इमरता राम आगे बोल्यो- देवी मैया भख ले, देवी मैया भख ले री आवाजां आंवती जणा मूरती रै चारूं खानी लोगां रो घेरो होवतो। घेरे मांयनै लोग देवी नै जिकौ भख देता बो निजरां मांयनै तो नईं आवंतो। पण मिमयाणे री आवाजां सूं अड़ोस पड़ोस अर सगळै गांव नै मालम है कै रात मांय कांई कांई होवै।
इमरताराम राज खोलतो सो बोल्यो-गांव आळा राममूरती अर देवी परकोप सूं डरता बोलणो टोकणो तो दूर कोई झांकण री कोसिस भी नीं करै। राममूरती इतौ डर लोगां मांयनै बिठा राख्यौ है।
सांतीदेवी ठेठ गांवरी लुगाई पण उमर रै तकाजै सूं जाणकारी राखण सारूं पूछ्यो-अठै सरकारी ओहदेदार है जका तो कीं कर सकै है, तो बै सगळा कींकर चुप है।
इमरताराम फेरूं राज खोल्यो- सरकारी ओहदेदार आधा पड़ता तो परसाद लेवण में सामल हो जावै अर कीं दो चार हैँ जिका कुळमुळावै जरूर है पण राममूरती सागै कोई पंगो नीं लेणो चावै। सुण्यो है कै पुलिसवाळा भी परसाद लेर जावै।
सांती देवी फेरूं पूछ्यो- आ किसी देवी है। इण देवी रो कांई नांव है। जबर देवी है जिकै सूं सगळो गांव डरै है।
इमरताराम बोल्यो- इण देवी रो नांव रो तो मालम नईं। राममूरती आज तांई नांव नईं बतायो। हां। इतरो जाणूं हूं कै आ देवी मूरती सात आठ साल पैल्यां राममूरती ही थरपी ही। ईं मूरती री किरपा सूं राममूरती अर ढोल डेरू बजावणियां रे घरबार रा आच्छाा खरचाा चालै।
इमरताराम कीं सुस्तायो अर बाद मांय बोल्यौ- मनै तो गांव मांय बस्या नै पांच साल हुया है। मनै तो आ जाणकारी मिळी ही कै राममूरती रै घर मांय पैल्यां भूख रो बासो हो। घर रा मरद निकम्मा अर काम धंधे सूं सौ कोस दूर भागणिया हा। ईं मूरती री थरपना रै बाद सूं राम मूरती रै धर सागै घणकरा घरां सूं भूख भाग गी।
बो सांतीदेवी नै समझावतो बोल्यो- जिकी राममूरती खुद देवी नै दारू रो भोग लगावै अर लोगों सूं भी लगवावै बा तेरे बेटे री दारू कीयां छुडवा देसी। राममूरती रा बेटा दारू रो परसाद लेवता लेवता दारूडिय़ा बण ग्या।
इमरताराम बाल्यो- आधी रात हुयगी। अब सो ज्या।
थकी हारी सांती देवी बाड़ कानी पुठ कर चारपाई माथै पसरगी। थोळी ताळ मांय बींगै अधकचरी नींद फिरगी।
बींनै सुपणो आवण लाग्यौ। बीं रै बेटे दारू छोड दी है। बा खुसी खुसी हंसती गावती लाडू बाटण लागरी है।
बींरी नींद खुली जणा मालम पड्यौ। इमरताराम बीं ने जगावण लाग रयौ हो। झांझरको हो ग्यो हो।
बा बोली- इमरता भाई, मनै तो सुपनो आ रयो हो कै मेरे बेटे दारू छोड दी है। सुण्यो है कै झांझरके रो सुपनो सांचो हुवै है।
बा खुसी खुसी आगै बोली- मनै लागै है के आ देवी मां रे दरसणा री किरपा है। मेरी मन्नत इतरी बेगी पूरी हुयगी।
इमरताराम बींरै मुंडे सामीं देखण लाग्यौ। बींरै मूंडे सूं रोकता रोकता निकळ ही गया- इण तरियां रै भोळा भाळा लोगां रे ताण राममूरती री देवी रो जयकारो होवतो रैसी।
करणीदानसिंह राजपूत   
स्वतंत्र पत्रकार,
23, करनाणी धर्मशाला,
सूरतगढ़  राजस्थान
मोबा.  94143 81356                     
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सोमवार, 28 नवंबर 2011

शक्करकंद का नागिन स्वरूप : शिवलिंग पर चढ़ाई गई
करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 28 नवम्बर 2011. अनेक बार प्रकृति में अजब गजब विचित्र और आश्यर्चजनक घटनाएं होती हैं और इसी प्रकार की वस्तुएं मिलती हैं। इसी तरह के चित्र बनते हैं। फलो व सब्जियों में भी अनेक बार विचित्रता देखने को मिलती है।
    करीब दस बारह दिन पहले शक्करकंद खरीदी गई। उसमें एक शक्करकंद का स्वरूप नागिन का था। धार्मिक आस्था स्वरूप श्रीमती विनीता सूर्यवंशी ने पूजन अर्चन के साथ वार्ड नं 14 के हनुमान मंदिर में स्थापित शिव लिंग पर चढ़ाया। उस नागिन सवरूप शक्करकंद के दोनों ओर के चित्र यहां पर प्रदर्शित हैं।

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