सोमवार, 6 नवंबर 2023

मील और कालवा को साथ मिलाए कासनीया का चुनाव परिणाम क्या होगा!

 


खास रपट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़ विधानसभा का पिछले 50 सालों का सन् 1967 से 2018 तक का रिकार्ड रहा है कि लगातार दुसरी बार कोई भी विधायक नहीं बन पाया। कांग्रेस के सुनील बिश्नोई दूसरी बार लगातार खड़े हुए तो हारे। वे दो बार जीते लेकिन लगातार खड़े हुए तो जीत नहीं पाए। पावर रसूख सब था लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा के रामप्रताप कासनीया सन् 2018 में जीते और अब सन् 2023 में लगातार दूसरी बार चुनाव में खड़े हैं। कासनीया पिछला इतिहास दोहराएंगे या  जीत कर नया इतिहास रचेंगे। आरोपों से घिरी मील टीम का कासनीया को साथ मिला है मगर शहर की पीड़ित जनता इस पर राजी नहीं हुई है।  इनके मिलने से रामप्रताप कासनीया को कितने वोट मिलेंगे और कितने छिटक जाएंगे? जनता के मूड का संकेत शुभ नजर नहीं दिख रहा।  मील तीन आए लेकिन साथ में कार्यकर्ता कितने आए?
पूर्व विधायक गंगाजल मील, पंचायत समिति प्रधान हजारीराम मील और पंचायत समिति के डायरेक्टर हेतराम मील वोट भाजपा के रामप्रताप कासनीया को वोट देने का कहने के लिए कासनीया के साथ घूमेंगे? नगरपालिका की अध्यक्षता और सदस्यता से सस्पेंड ओमप्रकाश कालवा को साथ देखकर लोग वोट देंगे? इसपर मील साथ हों तो लोग कहेंगे कि इनसे तो बचना चाहते थे और कासनीया इन्हीं को साथ लेकर घूम रहे हैं। इन लोगों की मांग से वोट देना चाहिए या नहीं। जब क्रिकेट खेल में एम्पायर निर्णय नहीं  कर पाते तब थर्ड एम्पायर का निर्णय मान्य होता है। यहां जनता थर्ड एम्पायर है और उसका निर्णय एकदम सटीक होगा।
* सीवरेज घोटाले में सस्पेंड कालवा को साथ घुमाते जनसंपर्क करना वोट मांगना और जनता की नाराजगी से घिरे पूर्व विधायक मील के साथ आने का प्रचार करना आने वाले भूकंप का खतरा है। कोई एक दो मसले हों तो गिनलें लेकिन जब मसले अधिक हों और कीमती वोट जीत को दूर फेंक रहे हों तब खतरों को दूर रखना समझदारी होती है। अगर इनको आराम करने का नहीं कहा गया दूर नहीं रखा गया तो सूरतगढ़ सीट का वही इतिहास होगा जो पहले बताया जा चुका है।
* कासनीया के खैरख्वाहों को,भाजपा और मोर्चों  के नगर जिला पदाधिकारियों को शहर की जनता से पूछ लेना चाहिए कि पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा को साथ लेने से साथ घूमने से हर रोज कितने वोट बढ रहे हैं या घट रहे हैं। जनता की सुन लेना चाहिए या फिर राज्य की मिलने वाली सीटों में सूरतगढ़ सीट को जोड़कर नहीं देखना चाहिए। यह भी ध्यान रखना होगा कि कासनीया सबसे कमजोर टिकटार्थी और लोगों की नये चेहरे की मांग थी।
* गंगाजल मील सन् 2008 में जीते विधायक बने मगर सन् 2013 में 32593  वोटों से हारे और तीसरे क्रम पर धकेल दिए गए। 32 हजार593  वोटों की हार कम नहीं होती और उससे भी ज्यादा पीड़ा तीसरे नम्बर पर लगा दिए जाने की जिंदगी भर सालती रहेगी। यह उदाहरण ताजा है।
 यह भी इतिहास में लिखा जा चुका है और इसे कोई बदल भी नहीं सकता। कमजोर बीज और मिलावटी खाद हो तो फसल का अनुमान किसानों को पहले से ही लग जाता है। यही हाल सूरतगढ़ सीट का है।
राजनीति में यही सच्च है कि जनता चाहती है तब सिर पर बैठाती है और मारती है तब बहुत बुरी तरह से मारती है।  
6 नवंबर 2023.
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रविवार, 5 नवंबर 2023

गंगाजल मील द्वारा भाजपा कासनीया का समर्थन:हनुमानमील का गेदर पर आरोप

  



* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 5 नवंबर 2023.

पूर्व विधायक गंगाजल मील परिवार हजारीराम मील,हेतराम मील और उनके अनेक समर्थकों ने आज सूरतगढ़ से भाजपा प्रत्याशी रामप्रताप कासनीया का समर्थन किया। महाराजा बाग में पहले मील ने अपने समर्थकों के साथ सभा की जिसमें यह निर्णय सुनाया गया। 

* सभा में पिछले चुनाव में उम्मीदवार रहे हनुमानमील उपस्थित नहीं थे। यह खास चर्चा का विषय रहा।

हनुमानमील ने फोन संपर्क पर बताया कि वे श्रीगंगानगर में कांंग्रेसी कार्यक्रम में गये हुए थे। वे अन्यत्र कांंग्रेसी प्रत्याशियों के सहयोग के लिए शीघ्र ही जाएंगे।

हनुमान मील से पूछा गया कि  कासनीया तो भाजपा का बेहद कमजोर  उम्मीदवार है मील के साथ होने का कितना असर कासनीया के चुनाव पर पड़ेगा?

हनुमानमील ने उत्तर दिया कि कासनीया के पास अपने वर्ग के बीस हजार वोटों के अलावा 15 हजार ऐसे विभिन्न समुदायों के कार्यकर्ता हैं जो कासनीया के लिए हर वक्त तैयार रहते हैं और एक आवाज पर कार्य कर सकते है।

हनुमानमील ने कहा कि कासनीया को चुनाव लड़ने का तरीका आता है। हनुमान मील.कासनीया की जीत पक्की मान कर चल रहे हैं। 

हनुमानमील कांंग्रेसी प्रत्याशी डुंगराम गेदर से नाराजगी प्रगट करते कहा कि नगरपालिका और  पंचायत समिति चुनावों में किसी भी उम्मीदवार से सहयोग छोड़ बात तक नहीं की। कांंग्रेस के कार्यक्रमों में भी नहीं आए। 

उन्होंने कहा कि मैं बराबर का टिकटार्थी था लेकिन टिकट मिलने के बाद मेरे से मिलने तक नहीं आए। नैतिकता तक नहीं रखी। टिकट मिलने की घोषणा पर खुशियां मनाते रहे। सन् 2008 से सूरतगढ़ में मील परिवार कांंग्रेस के कार्यक्रम करता रहा हर तरह के खर्च कर कांंग्रेस को चलाता रहा तो उससे मिलने का फर्ज बनता था।

* हनुमानमील मील ने कहा कि मील परिवार ने कांंग्रेस नहीं छोड़ी है केवल रामप्रताप कासनीया को समर्थन ही दिया है। मील का कासनीया को समर्थन देने का एक ही उद्देश्य कांंग्रेसी उम्मीदवार को हराना है। गंगाजल मील ने कार्यकर्ता राय में कहा कि कांंग्रेस की राजस्थान में 200 में से केवल 50 सीटें ही आ रही है। सभी सर्वे और रिपोर्ट्स में यह है। मील ने इसलिए कांंग्रेस के बजाय भाजपा को समर्थन देना बताया। असल में सूरतगढ़ से हनुमानमील को टिकट नहीं मिलने के कारण नाराज हें। मील के समर्थन से भाजपा के रामप्रताप कासनीया को कितना लाभ और मील कार्यो का कितना नुकसान होगा यह कुछ दिनोंं  में सामने आने तगेगा। आम लोग मील जन से भी खुश नहीं है। 

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सूरतगढ़: कांंग्रेस के मील और भाजपा के भादू चुनाव युद्ध करेंगे या डरेंगे?

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

कांंग्रेस ने हनुमान मील और भाजपा ने राजेंद्र भादू की टिकट पर उस्तरा चला दिया। इलाके के दिग्गज माने जाने वाले नेताओं के सीने पर घाव सहन तो नहीं होता लेकिन इनको सोचना है कि पार्टी के नाम पर कुछ नेताओं के थोपे गये निर्णय को जहर का घूंट पीकर अपनी राजनीति की हत्या करलें या फिर जहर का प्याला कठोर संदेश के साथ जयपुर दिल्ली लौटा दें। 

* मील और भादू चुनाव रण में अपने लाव लशकर साजो सामान के साथ उतरेंगे या युद्ध में हार जाने की आशंका से डर जाएंगे। युद्ध में लड़ते हुए हार जाना भी बहादुराना मर्दानगी कहलाती है लेकिन डर कर भाग जाना कायरता। युद्ध में हार जाने वाला दूसरे होने युद्ध में जीत भी सकता है लेकिन मैदान छ़ोड़ने वाला तो फिर लौट नहीं पाता। 

मील ने 5 नवंबर 2023 को और भादू ने 6 नवंबर 2023 को अपने सेनानियों को बुलाया है। 

युद्ध करेंगे। युद्ध से डरेंगे मैदान छोड़ देंगे।किसी अन्य दल के आगे सरेंडर करके सदा के लिए नंंबर दो का बनना स्वीकार करेंगे, यह निर्णय करना है। युद्ध करना चाहिए। आखिर सारे साजो सामान युद्ध सामग्री अकूत संपदा फिर किस काम की। मील के लिए यह पहला निर्णय हो सकता है लेकिन भादू तो ऐसे युद्ध लड़ने का अनुभवी योद्धा रहा है.०0०

5 नवंबर 2023.







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शनिवार, 4 नवंबर 2023

पार्टी के बड़े नेताओं ने कहा कुए में छलांग लगालो,लेकिन खुद नहीं लगाते.सोचो.

 



* करणीदानसिंह राजपूत *

भाजपा और कांंग्रेस (इंडियन नेशनल कांंग्रेस) पार्टी मतलब दिल्ली में रहने के कारण बड़े समझे जाने वाले कुछ नेता फैसला करें और छोटे नेताओं से कहें कि पार्टी के लिए कुए में कूद जाओ। पार्टी के ये नेता कभी भी कुए में नहीं कूदे। पार्टी के लिए कभी पद तक नहीं छोड़ा। प्रजातंंत्रीय तरीके से चुनाव कराना तक छोड़ दिया। पार्टी संविधान को छोड़ दिया और मनोनीत प्रणाली अपना ली। 

* वर्षों तक पार्टी के लिए दिनरात मेहनत करने लाखों रूपये खर्च करने वालों को फैसला सुनाया जाए। तुम कुए में छलांग लगालो हमने तो पार्टी में जिसे घुसाया है उसको टिकट देकर विधायक सांसद बनाने का फैसला कर लिया है। 

* आखिर इन बड़े नेताओं से कोई नहीं कहता कि   पार्टी आपके कारण भी कमजोर हुई सो आप भी कुए में छलांग हमारे साथ ही लगालो। आपके पद का कार्यकाल विस्तार क्यों हो रहा है? आप तो पद ही नहीं छोड़ना चाहते। 

पार्टी के नाम पर कुए में छलांग लगाने का फैसला कोई एक क्यों माने? यदि किसी क्षेत्र में काम नहीं हुआ तो उसके लिए एक दोषी क्यों? संगठन के सभी पदाधिकारियों को जिले के पदाधिकारियों को भी तो जिम्मेदार माना जाना चाहिए क्योंकि उनका निरीक्षण देखरेख भी तो रही। लेकिन कुए में कूद जाने का फैसला एक के लिए।

* दो चार नेताओं का यह फैसला क्यों माना जाए? उनके कहने पर कुए में क्यों कूदा जाए? असल में बड़े नेताओं को यह प्रश्न कब पूछा जाएगा और उनसे कब कहा जाएगा कि चलो कुए में मत कूदो लेकिन समय काल उम्र और लोगों के आगे बढने के लिए पद छोड़ो। सब के लिए नियम कानून कायदे पार्टियों में हैं लेकिन अध्यक्ष आदि के लिए नहीं। यदि प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री बन जाए तो उसके लिए भी नहीं। अगली बार मैं ही बनूंगा, मैं ही आऊंगा। प्रजातंंत्रीय प्रणाली के एकदम विपरीत। राजतंत्र से भी अधिक राजाओं की घोषणाओं को पीछे छोड़ देने की अहंकारी घोषणा। आप बने रहना चाहें और आगे भी बनने की घोषणा करें तो फिर पार्टी के नाम पर कोई भी अपने आपकी राजनीति की आत्महत्या क्यों करले?

4 नवंबर 2023.

* करणीदानसिंह राजपूत,

( पत्रकारिता 60 वर्ष)

पत्रकार ( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ (राजस्थान)

94143 81356

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शुक्रवार, 3 नवंबर 2023

भाजपा टिकट रामप्रताप कासनिया को मिलने पर शहर का साथ नजर नहीं आया.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 3 नवंबर 2023.

भाजपा का शहर कहलाने वाले सूरतगढ़ में भाजपा टिकट वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया को घोषित होने के 24 घंटे बाद भी शहर का साथ नजर नहीं आ रहा। टिकट घोषणा पर बाजारों की सड़कें गुलाल उड़ने से लाल नजर आने के बजाय बाजार में उदासी है। 

* रामप्रताप कासनिया ने पिछले चुनाव सन् 2018 में आमसभा में संकल्प से कहा था कि यह आखिरी चुनाव लड़ रहा हूं,मेरा साथ दें,आगे नहीं लडूंगा। नाराज लोग भी मंच पर आ गये थे। कासनिया ने पांच साल में जनता के काम नहीं किए और चुनाव नहीं लड़ने वाला भरोसा तोड़ा और पार्टी नेताओं तक को इस भरोसे बाबत अंधेरे में रखा।

* भाजपा के कार्यकर्ताओं में घोर नाराजगी सामने आई है। अन्य टिकटार्थी कासनिया से मिलने नहीं पहुंचे। विधानसभा क्षेत्र में बदलाव और नये चेहरे की माग थी लेकिन 72 साल के कासनिया को टिकट दिए जाने से कार्यकर्ता पार्टी नेताओं से भी नाराज हैं। 

* कासनिया के साथ भीतरघात के बजाय खुले विरोध की आशंका हो रही है। 

* गांवों की रिपोर्ट में भी कासनिया की हवा मामूली सी चल रही है जो वोट को नहीं खींच पाएगी। नेता कासनिया के साथ नहीं लग रहे।

* भाजपा नेता राजेन्द्र सिंह भादू पूर्व विधायक ने टिकट न मिलने पर रोष प्रगट किया है और 6 नवंबर को लोगों को फैसला करने के लिए बुलाया है कि आगे क्या कदम उठाना है। भादू कासनीया के साथ नहीं है। पूर्व विधायक अशोकनागपाल ने भी कुछ कहा नहीं है। हालात कासनीया को अलगथलग जैसा बनाए हुए हैं। मीडिया से भी कोई संपर्क कर कासनीया ने बताया नहीं है कि क्या करने वाले हैं। मीडिया के तीखे सवाल, काम नहीं करने के सवाल और अधिक उलझन में डाल सकते हैं। नगरपालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा को भाजपा में प्रवेश कराने का आरोप भी है। कालवा बाद में सस्पेंड कर दिए गये। 

* भाजपा प्रत्याशी कासनीया की कमजोर हालात  के कारण लोग कांग्रेस के प्रत्याशी डुंगराम गेदर के साथ लोग जुड़ रहे हैं क्योंकि वह मूल ओबीसी कुम्हार है और यह कांग्रेस को यहाँ मजबूत बना रही है।०0०







लोक सीख:डूंगर पर चढ़ लो



* करणीदानसिंह राजपूत *

 गांव गांव ढ़ाणी ढ़ाणी डूंडी सी पिट गई।
बरखा आवण आली है। अपणी अपणी जान माल बचालो।

 ढ़ोर जिनावरां ने बचालो।
अपणे अपणे घर बचालो। पाणी ते कच्ची बस्तियां तिरिया मिरियां भर जावैली अर कच्चे कोठे मकान ढ़ह जावेंगे।

 गरीबां की नीची बस्तियां वालां की कुण सुनण वाले। टूटण बाद दुबारा बणावण में सौ सौ पंगे। जमीन खरीद ना सकै अर दुबारा तीबारा किसी एक चौधरी के पांव अर किसी दूसरे चौधरी के पावां में पडऩा पडै़।
 आच्छी आच्छी जमीन चौधरियां के कब्जे में होती जावै। गरीब तो तड़प तड़प मरण के भाग के। गरीब तो जूते खावण के भाग के।
 कोई ना कोई चौधरी झांसा दे दा के ठग ले।
अब गांव गांव डूंडी पिट री है।

 आपणै आपणै टापरै बचालो।
बुड्ढे बडेरे चौपाल चौक पर बातां करण लाग रै। घरां में लुगाईयां टाबरां जवानां में चिंता लागी।

एक बडेरा बोल्या। देखो जवानों मरदों। हम तो चालीस पचास सालां ते पिट रयां हा। कोई सुनण वाला नहीं आया। पण अबकी धरती माता ठूठी है। धरती माता वरदान देण ने अपना रूप बदल्या है। 

आपणै गांवा नेड़ै धरती फाड़ डूंगर निकल्या है। बार बार उजडऩे से बचणा है तो डूंगर ऊपर नुंवा मकान आसरा बना लो अर गांव गांव ढ़ाणी उस पर बसालो। डूंगर चढ़ जावो। डूंगर घणा ऊंचा है। बरखा कितनी आवै बाढ़ कितनी आवै। आपां आपां रा परिवार गांव सारा बस्या बस्या रह जावैगा।

बडेरा बोल्या। म्हारै टैम चालीस पचास सालां पहलै जे डूंगर निकल्या होता तो बार बार उजणना ना पड़ता। हर साल उजड़णा अर बसणा।
चौधरियां से जमीन मांगण वास्तै जाणा नहीं पड़ता। 

हाथा जोड़ी अर बेगारां में पूरी जिंनगानी बीत गई। हम तो सारा चौधरियां नै पितायोड़ा है। सारे एक सूं एक बते। जो भी नई चौधर करै वो बेसी लुटेरा ही निकल्या।
सुनण वालों ने बडेरे की सीख पर हुंकारे भरण लागे। लोग बागां ने बड़ेरे की सीख में दम लाग्या। 

बडेरे की सीख एक से दूजे गांव तीजे गांव अर ढ़ाणी ढ़ाणी पूंचगी।
लोगां नै अक्ल आगी। लोग लुगायां बातां करते करते नुवे मकानां बस्तियां गांवां के जोड़ तोड़ बिठावण लागै। 

सारे अपने अपने ढ़ोर डांगरा ने ले डूंगर चढ़ग्ये अर नुंवा नुंवा मकान बणावण जुट गये।
बरखा आई अर घणी तगड़ी आई। 

चौधरी तो अपने अपने घरां ने अर कोठियां नै बचावण लाग्या। बरखा ऐसी आई के चौधरी तो आपस में लड़ पड़्या।
 चौधरी आपस में लड़े जिका गरीबां ने कियां बसावे परोटे।
आच्छा होया चौधरियां के भरोसे ना रिया अर डूंगर चढ़ ग्या।

 कोई गांव उज्ड़्या ना कोई घर उज्ड़्या।
सारां तै आच्छी बात आ होई कै किसी भी चौधरी के आगै हाथ ना फैलाणा पड्या। 

गरीब गुरबां नै अपणी ताकत का पैली बार मालम होया।
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प्रथम लेखन 11 नवंबर  2013.
अपडेट 3 नवंबर 2023.
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करणीदानसिंह राजपूत,
पत्रकार लेखक,
विजयश्री करणी भवन,
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सूरतगढ़ ( राजस्थान)
94143 81356.
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गुरुवार, 2 नवंबर 2023

डुंगराम गेदर की जीत से खत्म हो जाएगी बड़े नेताओं की राजनीति

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ विधानसभा क्षेत्र में कांंग्रेस और भाजपा दोनों बड़ी पार्टियों में बदलाव की मांग शहर और गांवों से उठी जिसको कांंग्रेस ने समझा और नया चेहरा उतारा मूल ओबीसी कुम्हार डुंगराम गेदर को उम्मीदवार घोषित कर दिया। 

राजनीतिक कोई बड़ा घटनाक्रम नहीं हुआ तो डुंगराम गेदर जनता की सोच में बड़ा वजनदार उम्मीदवार माना जा रहा है।

डुंगरराम गेदर की जीत से लगातार दो बार हारी  (2013 और सन् 2018 में हारी) हुई कांग्रेस भारी बहुमत से जीत जाएगी। लोगों का मानना है कि डुंगराम गेदर की जीत से बड़े नेताओं की राजनीति पर असर होगा और उनकी राजनीति खत्म सी हो जाएगी। बीसियों सालों से राजनीति के दिग्गज कहलाने वाले और विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेताओं भाजपा के रामप्रताप कासनिया,राजेंद्र सिंह भादु,कांंग्रेस के गंगाजल मील,हनुमानमील,बसपा के महेंद्र भादू,जननायक जनता पार्टी के पृथ्वीराज मील पर डुंगराम गेदर की जीत से असर पड़ेगा। इनकी राजनीति खत्म हो जाएगी लोग डुंगर के दरवाजे पर जाएंगे जब भी कोई काम पड़ेगा।

चूंकि डुंगराम गेदर कांंग्रेस का उम्मीदवार है इसलिए उसकी जीत को रोकने के लिए भाजपा, बसपा और जननायक जनता पार्टी कितना जोर लगा पाएगी वह फिलहाल नजरों में नहीं आ रहा है। सभी मिलकर एक होकर डुंगराम को रोक सकते हैं मगर सभी राजनेताओं के विचार और पार्टियां भिन्न हैं। सभी एक हो जाएं तो डुंगर को रोक कर अपने अस्तित्व को बचाने में कामयाब हो सकते हैं। लेकिन यह आसान नहीं लगता।

भाजपा में भी बदलाव और नये चेहरे की मांग उठी थी लेकिन भाजपा ने जनबल को ठुकरा कर विधायक रामप्रताप कासनिया को ही पुनः उम्मीदवार घोषित कर दिया। लोगों का मानना है कि भाजपा की इस घोषणा से डुंगराम गेदर की स्थिति और मजबूत हो गई है। ०0० 2 नवंबर 2023.


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सूरतगढ़ भाजपा:रामप्रताप कासनिया के नाम पर मोदीजी की मुहर लगी.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 2 नवंबर 2023.

भाजपा केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में वर्तमान विधायक रामप्रताप कासनिया को ही 2023 के लिए उम्मीदवार चुना गया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने कासनिया के नाम पर मुहर लगाई। 

कासनिया ने 2018 में कांग्रेस के हनुमानमील को 10 हजार से अधिक वोटों से हराया था।

इस बार विधानसभा क्षेत्र से नये चेहरे की मांग उठी थी। लेकिन यह मानी नहीं गयी।

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करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार ( राजस्थान सरकार से अधिस्वीकृत)

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

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सूरतगढ़ दोराहे पर फंसे मील : डुंगर को हराना है मगर किसके साथ जाना है?

 

* करणीदानसिंह राजपूत * 

सूरतगढ़ 2 नवंबर 2023.

कांंग्रेस पार्टी को सन 2008 से शासनिक और खर्चे से वास्तविक रूप में संचालित कर रहे गंगाजल मील परिवार को 2023 में टिकट नहीं मिला। मील कांंग्रेस का हर कार्यक्रम करते रहे और बड़े खर्चों में भी बताए अनुसार पांति भेजते रहे लेकिन भरोसे और गफलत में मारे गये। ऐसे में आक्रोश होना स्वाभाविक है। टिकट नहीं देनी थी तो पहले ही कहला देते कि आवेदन मत करो लेकिन यह भी नहीं किया। कांग्रेस की अशोक गहलोत की योजनाओं का ढोल मील से बजवाते रहे। 

* मील का निर्णय मीडिया में आया कि डूंगरराम गेदर को हराना है। मील गेदर को कांग्रेस का ही नहीं मानते। बसपा में रहते डुंगराम ने कांंग्रेस का विरोध किया तो अब वह कांग्रेसी कैसे हो गया?

* मील डुंगर को हराना चाहते हैं मगर दोराहे पर फंसे हैं कि किसके साथ लगें जिससे सफलता मिले। किसी कमजोर के साथ लगने या साथ देने से डुंगर नहीं हारा तब क्या होगा?

* भाजपा की सरकार बनने की आशा में  भाजपा या जननायक जनता पार्टी को खुला साथ देने के अलावा कोई और रास्ता नहीं। जननायक जनता पार्टी को साथ देने का निर्णय करते हैं तो भी वह रास्ता आगे भाजपा में ही मिलता है। जननायक जनता पार्टी में गंगाजल मील का भतीजा पृथ्वीराज मील ही उम्मीदवार है। यह रास्ता सुगम है और इससे मील कुटुंब का एकीकरण भी होगा। बड़े राजनीतिक समझौते होते रहते हैं और यह भी हो सकता है। प्रश्न यह है कि मील इसमें देरी क्यों कर रहे है.

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सूरतगढ़ भाजपा सीट:नाम का चमत्कार होगा.

 

* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 2 नवंबर 2023.

राजस्थान की 76 सीटों में सूरतगढ़ सीट पर नाम का चमत्कार होगा। जिनके नाम तय होते हैं उनको सूचना फोन से मिल जाती है।* विधायक रामप्रताप कासनिया का नाम था और उस पर एकमत नहीं होने व और नाम भी लिए जाने से पेच फंसा।

 सूरतगढ़ के टिकटार्थियों को कोई सूचना नहीं है। अमितशाह और जेपी नड्डा के पास सीधे भी नाम आवेदन सिफारिश नाम पहुंचे हुए हैं।

* सूरतगढ़ में अभी आज 2 नवंबर को सुबह साढे नौ बजे तक किसी को भी फोन नहीं मिला है। सभी सूची की प्रतीक्षा कर रहे हैं। फोन आता तो आधी रात को ही लोग उम्मीदवार के निवास पर एकत्रित हो जाते। नाचते गाते।

* राजस्थान संसदीय बोर्ड की 1 नवंबर की बैठक और उसके बाद केंद्रीय संसदीय बोर्ड की बैठक में भी सूरतगढ़ तय नहीं हुआ। फिर रात को ही तय करना जरूरी था। 

*सूरतगढ़ पर पेच या तो रात को खुला नहीं। खुल जाता तो रात को ही फोन आता। 

* विशेष स्थिति में अब जो नाम अमित शाह के पास सर्वे और सूचनाओं में हैं, उनमें से पावरफुल नाम जुड़ जाएगा। सोशल मीडिया में प्रचलित कराए जा रहे नामों से अलग नाम भी हो सकता है।०0०


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