मंगलवार, 18 जुलाई 2017

भाजपा विधायक राजेंद्र भादू व पूर्व कांग्रेसी विधायक गंगाजल मील में दोस्ताना व्यवहार जनता हैरान

विधायक राजेंद्र भादू व पूर्व विधायक गंगाजल मील की कुश्ती बंद:


कासनिया की स्कूली जमीन प्रकरण को हाई कोर्ट में ले जाने वाला मील भादू की कोठी कटलों पर चुप्प:
मील के प्रकरणों पर भादू का मौन: 
भाजपा कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं।  

विशेष रपट- करणीदानसिंह राजपूत

गंगाजल मील ने रामप्रताप कासनिया की स्कूली जमीन का मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश किया लेकिन भादू परिवार के कटलों कोठियों के तथ्य खुल जाने के बाद उस पर मौन है और कोई भी कार्यवाही नहीं करने जैसी चर्चाएं आम हैं। रामप्रताप कासनिया परिवार द्वारा संचालित स्कूल जाखड़ावाली में सेम में आ गया। मंडी समिति ने उसके लिए स्थानान्तरण में सूरतगढ़ कस्बे में अपने मंडी क्षेत्र में भूखंड आवंटित करने का निर्णय किया। उस स्थान पर अतिक्रमण होने की वजह से फिर बदलाव चाहा गया। नई धान मंडी व आवासन मंडल कॉलोनी के बीच की कीमती जमीन चिन्हित की गई और नगरपालिका द्वारा कार्यवाही की जाने वाली थी। उस समय स्कूल के 2 लाख रूपयों के बदले में जो जमीन दी जाने वाली थी,उसकी कीमत करीब 2 करोड़ रूपए के लगभग मानी जा रहा थी।
नगरपालिका में इस भूमि को देने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसके बाद गंगाजल मील ने 1 साल बाद प्रेस वार्ता बुलाई जिसमें कासनिया परिवार पर भूमि लेने के आरोप लगाए। कागजात भी बांटे। पत्रकारों के प्रश्र उठाए जाने पर मील ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रकरण पेश किया जाएगा। मील ने बाद में बताया कि प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश कर दिया गया है।
अब मील आरोपों और सवालों के घेरे में इसलिए है कि स्कूल की जमीन जो उस समय लगभग 2 करोड़ की मानी जा रही
थी उसके लिए तो विरोध किया लेकिन भादू परिवार के कोठी कटले जो कई कई करोड़ रूपयों के हैं तथा उनके अनेक तथ्य सामने आ जाने के बाद भी मील कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं?
राजेन्द्र भादू जिस कोठी में निवास कर रहे हैं वह सड़क पर बनी होने का आरोप है और ऐसा दिखाई भी देता है। इसके अलावा प्रधानजी बीरबल की कोठी में आसपास की सड़कें शामिल किए जाने के आरोप व नक्से तक छप चुके हैं। मनफूलसिंह भादू के परिवार वाले सिनेमा व आवास का मामला भी आरोपों में घिरा है। इसके भी अनेक प्रमाण सामनें आ चुके हैं।
कासनिया परिवार की स्कूली जमीन के प्रकरण पर बोलने वाले मील साहेब अब कोमा में चले जाने जैसी चुप्पी साध गए हैं।
एक ही वर्ग के दो दिग्गज राजनेताओं में कुछ तो है। न तुम बोलो न मैं बोलूं। इसके पीछे कुछ और भी पक रहा है।
पीलीबंगा में गंगाजल मील कासनिया और भादू में चुनावी घमासान होता है। एक ही वर्ग के तीनों में से कोई एक तो जीतना ही था। कासनिया जीत गए। इसके बाद सूरतगढ़ में घमासान हुआ। मील साहेब जीते विधायक बने। वर्ग की जीत कायम रहनी ही थी। इसके बाद फिर चुनाव हुए और राजेन्द्र भादू विधायक बने। यही वर्ग मुख्य रूप में खड़ा था सो एक तो जीतना ही था। यहां इस वर्ग की आलोचना करना विषय नहीं है। यह वर्ग राजनीति में सूझबूझ से सदा बने रहने के लिए अपने ही वर्ग को पक्ष विपक्ष में रखता रहा है। कोई भी जीते। लोगों को अन्य वर्गों को लगता है कि ये लड़ रहे हैं झगड़ रहे हैं। लेकिन जो सच्च है वो भी सामने है कि मील भादू दोनों चुप्प हैं। 
भादू काल में सामने आए प्रकरणों पर कोई कार्यवाही नहीं हो और आगे और भी प्रकरण हों तो भी कोई कार्यवाही न हो। यह राजनैतिक खेल बड़ी चतुराई से चल रहा है। मील व भादू दो प्रतिद्वंदी नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों एक जोड़ी के रूप में नजर आ रहे हैं। अपनी अपनी संपत्तियों और जमीनों की सुरक्षा का ध्येय साफ झलक रहा है।

 राजेन्द्र भादू ने मील की संपत्तियों निर्माणों आदि पर कोई कार्यवाही शुरू नहीं करवाई है और मील ने राजेन्द्र भादू की संपत्ति व कोठी कटलों जमीनों पर कोई शिकायत या प्रकरण कहीं दर्ज नहीं करवाया है। दोनों की ओर से पहले नूरा कुश्ती चलने के जो संकेत थे अब वे भी खत्म हो गए हैं। नूरा कुश्ती भी बंद हो गई है। अब दिखावटी लड़ाई भी नहीं करेंगे।
यह गौर करने वाले तथ्य हैं कि मील और कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भादू व भाजपा के मामले में समझौता जैसी प्रणाली से चल रहे हैं। पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व जिला प्रमुख पृथ्वीराज मील, शहर  ब्लॉक अध्यक्ष,राजियासर ब्लॉक अध्यक्ष, युवा कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र गगनदीप आदि किसी ने भी विधायक राजेन्द्रसिंह भादू के निवास और भादू परिवार के कटलों के प्रकरण सामने आने के बाद कोई मामली विरोध तक दर्ज नहीं करवाया कहीं बयान तक नहीं दिया। 

सत्ता पक्ष भाजपा के विरूद्ध कार्यवाही हो सकने वाले प्रमाण सामग्री मिलने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं,भाजपा के पक्ष में मौन रहते भाजपा के विधायक के विरूद्ध चुप रहते क्या कांग्रेस हवाई बातों से उभर पाएगी? 

कांग्रेसी नेताओं पदाधिकारियों की शक्ति पर भरोसा ही नहीं होगा तब लोग वोट कांग्रेसी प्रत्याशी को क्यों देंगे? कांग्रेसी
 टिकट वाले क्या कह कर वोट मांगेंगे? नेता  ही आवाज नहीं उठाऐंगे तब आम जनता सत्ताधारी पार्टी भाजपा प्रत्याशी का विरोध कर बैर क्यों मोल लेगी? 
 कांग्रेस को यह तो दिल दिमाग से निकाल ही देना होगा कि सूरतगढ़ में कांग्रेस की जीत संभव हो पाएगी।
अभी तो किसी भी वार्ड से कांग्रेस की आवाज ही निकलनी शुरू नहीं हुई है। भादू और मील की चुप्पी का एक असर जरूर सामने आ रहा है। भाजपा के अनेक लोग मील से नाराज थे। मील काल पालिका क्षेत्र में पीड़ाएं झेलने वालों को जबसे मालूम हुआ कि भादू तो मील के विरूद्ध कोई कदम ही नहीं उठा रहा और उठाना चाहता भी नहीं। तब लोगों ने कासनिया की कोठी का रास्ता पकड़ लिया । भाजपा के पुराने नए कार्यकर्ताओं को  वहां देखा जा रहा है। भादू के खास खास लोग तक यह मानने लगे हैं और स्वीकारने लगे हैं कि कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं। 
कांग्रेसी लोग भी मान रहे हैं कि कासनिया के पास लोगों का आना जाना बढ़ा है और निरंतर बढ़ रहा है। बात अकेले शहर की नहीं ग्रामीण लोग भी कहने लगे हैं कि भादू काम ही नहीं करता। भादू ने विधायक सेवा केन्द्र खोला जहां भीड़ छोड़, पांच दस कार्यकर्ता ही बड़ी मुश्किल से सारे दिन में पहुंचते हैं। हां कहीं चुनाव में जीत हो जाए तो पटाखे फोडऩे के लिए फोटो खिंचवाने के लिए कार्यकर्ता जरूर पहंच जाते हैं। 
लोगों को कासनिया की ताकत का अहसास होने के कारण भी लोग भादू के बजाय कासनिया को अहमियत दे रहे हैं। 
-------------प्रथम बार  26-10-2014.
अपडेट 18-7-2017.



अपडेट  18-7-2017

विधायक राजेंद्र भादू व पूर्व विधायक गंगाजल मील की कुश्ती बंद:


कासनिया की स्कूली जमीन प्रकरण को हाई कोर्ट में ले जाने वाला मील भादू की कोठी कटलों पर चुप्प:
मील के प्रकरणों पर भादू का मौन: 
भाजपा कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं। 

विशेष रपट- करणीदानसिंह राजपूत

गंगाजल मील ने रामप्रताप कासनिया की स्कूली जमीन का मामला राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश किया लेकिन भादू परिवार के कटलों कोठियों के तथ्य खुल जाने के बाद उस पर मौन है और कोई भी कार्यवाही नहीं करने जैसी चर्चाएं आम हैं। रामप्रताप कासनिया परिवार द्वारा संचालित स्कूल जाखड़ावाली में सेम में आ गया। मंडी समिति ने उसके लिए स्थानान्तरण में सूरतगढ़ कस्बे में अपने मंडी क्षेत्र में भूखंड आवंटित करने का निर्णय किया। उस स्थान पर अतिक्रमण होने की वजह से फिर बदलाव चाहा गया। नई धान मंडी व आवासन मंडल कॉलोनी के बीच की कीमती जमीन चिन्हित की गई और नगरपालिका द्वारा कार्यवाही की जाने वाली थी। उस समय स्कूल के 2 लाख रूपयों के बदले में जो जमीन दी जाने वाली थी,उसकी कीमत करीब 2 करोड़ रूपए के लगभग मानी जा रहा थी।
नगरपालिका में इस भूमि को देने का प्रस्ताव पारित नहीं हो सका। इसके बाद गंगाजल मील ने 1 साल बाद प्रेस वार्ता बुलाई जिसमें कासनिया परिवार पर भूमि लेने के आरोप लगाए। कागजात भी बांटे। पत्रकारों के प्रश्र उठाए जाने पर मील ने कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय में प्रकरण पेश किया जाएगा। मील ने बाद में बताया कि प्रकरण राजस्थान उच्च न्यायालय में पेश कर दिया गया है।
अब मील आरोपों और सवालों के घेरे में इसलिए है कि स्कूल की जमीन जो उस समय लगभग 2 करोड़ की मानी जा रही

थी उसके लिए तो विरोध किया लेकिन भादू परिवार के कोठी कटले जो कई कई करोड़ रूपयों के हैं तथा उनके अनेक तथ्य सामने आ जाने के बाद भी मील कोई कार्यवाही क्यों नहीं कर रहे हैं?
राजेन्द्र भादू जिस कोठी में निवास कर रहे हैं वह सड़क पर बनी होने का आरोप है और ऐसा दिखाई भी देता है। इसके अलावा प्रधानजी बीरबल की कोठी में आसपास की सड़कें शामिल किए जाने के आरोप व नक्से तक छप चुके हैं। मनफूलसिंह भादू के परिवार वाले सिनेमा व आवास का मामला भी आरोपों में घिरा है। इसके भी अनेक प्रमाण सामनें आ चुके हैं।
कासनिया परिवार की स्कूली जमीन के प्रकरण पर बोलने वाले मील साहेब अब कोमा में चले जाने जैसी चुप्पी साध गए हैं।
एक ही वर्ग के दो दिग्गज राजनेताओं में कुछ तो है। न तुम बोलो न मैं बोलूं। इसके पीछे कुछ और भी पक रहा है।
पीलीबंगा में गंगाजल मील कासनिया और भादू में चुनावी घमासान होता है। एक ही वर्ग के तीनों में से कोई एक तो जीतना ही था। कासनिया जीत गए। इसके बाद सूरतगढ़ में घमासान हुआ। मील साहेब जीते विधायक बने। वर्ग की जीत कायम रहनी ही थी। इसके बाद फिर चुनाव हुए और राजेन्द्र भादू विधायक बने। यही वर्ग मुख्य रूप में खड़ा था सो एक तो जीतना ही था। यहां इस वर्ग की आलोचना करना विषय नहीं है। यह वर्ग राजनीति में सूझबूझ से सदा बने रहने के लिए अपने ही वर्ग को पक्ष विपक्ष में रखता रहा है। कोई भी जीते। लोगों को अन्य वर्गों को लगता है कि ये लड़ रहे हैं झगड़ रहे हैं। लेकिन जो सच्च है वो भी सामने है कि मील भादू दोनों चुप्प हैं।
भालू कालू  में सामने आए प्रकरणों पर कोई कार्यवाही नहीं हो और आगे और भी प्रकरण हों तो भी कोई कार्यवाही न हो। यह राजनैतिक खेल बड़ी चतुराई से चल रहा है। मील व भादू दो प्रतिद्वंदी नजर नहीं आ रहे हैं। दोनों एक जोड़ी के रूप में नजर आ रहे हैं। अपनी अपनी संपत्तियों और जमीनों की सुरक्षा का ध्येय साफ झलक रहा है।

 राजेन्द्र भादू ने मील की संपत्तियों निर्माणों आदि पर कोई कार्यवाही शुरू नहीं करवाई है और मील ने राजेन्द्र भादू की संपत्ति व कोठी कटलों जमीनों पर कोई शिकायत या प्रकरण कहीं दर्ज नहीं करवाया है। दोनों की ओर से पहले नूरा कुश्ती चलने के जो संकेत थे अब वे भी खत्म हो गए हैं। नूरा कुश्ती भी बंद हो गई है। अब दिखावटी लड़ाई भी नहीं करेंगे।
यह गौर करने वाले तथ्य हैं कि मील और कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ता भादू व भाजपा के मामले में समझौता जैसी प्रणाली से चल रहे हैं। पूर्व विधायक गंगाजल मील,पूर्व जिला प्रमुख पृथ्वीराज मील, शहर  ब्लॉक अध्यक्ष,राजियासर ब्लॉक अध्यक्ष, युवा कांग्रेस विधानसभा क्षेत्र गगनदीप आदि किसी ने भी विधायक राजेन्द्रसिंह भादू के निवास और भादू परिवार के कटलों के प्रकरण सामने आने के बाद कोई मामली विरोध तक दर्ज नहीं करवाया कहीं बयान तक नहीं दिया। 

सत्ता पक्ष भाजपा के विरूद्ध कार्यवाही हो सकने वाले प्रमाण सामग्री मिलने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं,भाजपा के पक्ष में मौन रहते भाजपा के विधायक के विरूद्ध चुप रहते क्या कांग्रेस हवाई बातों से उभर पाएगी? 

कांग्रेसी नेताओं पदाधिकारियों की शक्ति पर भरोसा ही नहीं होगा तब लोग वोट कांग्रेसी प्रत्याशी को क्यों देंगे? कांग्रेसी
 टिकट वाले क्या कह कर वोट मांगेंगे? नेता  ही आवाज नहीं उठाऐंगे तब आम जनता सत्ताधारी पार्टी भाजपा प्रत्याशी का विरोध कर बैर क्यों मोल लेगी? 
 कांग्रेस को यह तो दिल दिमाग से निकाल ही देना होगा कि सूरतगढ़ में कांग्रेस की जीत संभव हो पाएगी।
अभी तो किसी भी वार्ड से कांग्रेस की आवाज ही निकलनी शुरू नहीं हुई है। भादू और मील की चुप्पी का एक असर जरूर सामने आ रहा है। भाजपा के अनेक लोग मील से नारा
ज थे। मील काल पालिका क्षेत्र में पीड़ाएं झेलने वालों को जबसे मालूम हुआ कि भादू तो मील के विरूद्ध कोई कदम ही नहीं उठा रहा और उठाना चाहता भी नहीं। तब लोगों ने कासनिया की कोठी का रास्ता पकड़ लिया । भाजपा के पुराने नए कार्यकर्ताओं को  वहां देखा जा रहा है। भादू के खास खास लोग तक यह मानने लगे हैं और स्वीकारने लगे हैं कि कार्यकर्ता कासनिया के पास भरोसा देख रहे हैं। 
कांग्रेसी लोग भी मान रहे हैं कि कासनिया के पास लोगों का आना जाना बढ़ा है और निरंतर बढ़ रहा है। बात अकेले शहर की नहीं ग्रामीण लोग भी कहने लगे हैं कि भादू काम ही नहीं करता। भादू ने विधायक सेवा केन्द्र खोला जहां भीड़ छोड़, पांच दस कार्यकर्ता ही बड़ी मुश्किल से सारे दिन में पहुंचते हैं। हां कहीं चुनाव में जीत हो जाए तो पटाखे फोडऩे के लिए फोटो खिंचवाने के लिए कार्यकर्ता जरूर पहंच जाते हैं। 
लोगों को कासनिया की ताकत का अहसास होने के कारण भी लोग भादू के बजाय कासनिया को अहमियत दे रहे हैं। 
प्रथम 26-10-2014.
अपडेट  18-7-2017.

हम चाहती थीं, पंख लगा कर,आकाश में उडऩा,तुमने छीन लिया, हम से संसार


मैं बेटी हूं ,मुझे भी जीने का अधिकार दो - मंजु रांगेरा

देव भूमि भारत में कन्याओं की भ्रूण में हत्या होना चिंताजनक

सेठ राम दयाल राठी राजकीय उ.मा. विद्यालय में गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति का आयोजन

करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़, 13 अगस्त। सेठ राम दयाल राठी राजकीय उ.मा. विद्यालय में गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति की ओर से  भ्रूण में हत्या रोकने पर विचार गोष्ठी का आयेजन किया गया। गोष्ठी की अध्यक्षता प्रधानाचार्य पृथ्वीराज धांधल ने की। गोष्ठी में विद्यार्थियों ने खुले रूप में विचार रखते हुए हत्या के अपराध में कड़ी सजा दिए जाने की मांग की।

    छात्र देवेन्द्र ने अपराधियों का सामाजिक बहिष्कार करने की मांग की। अजय ने एक कविता सुनाई जिसके बोल थे, मत मारो कन्या को। सुनील ने कन्या हत्या को रोकने पर सुझाव दिए। दीपचंद ने एक कविता सुनाई, नन्ही बेटी को जीवन का वरदान दो। छात्र पूनम पूनिया ने देव भूमि भारत में कन्याओं की हत्या पर चिंता प्रगट की। छात्र हरप्रीत सिंह ने अग्रेजी कविता के माध्यम से कन्या को बचाने का आह्वान किया। 



छात्र बबलू ने  एक कवित सुनाई जो कन्या के बोल पर थी। जिसके बोल थे- हम चाहती थीं, पंख लगा कर,आकाश में उडऩा,तुमने छीन लिया, हमसे संसार।



    विनय वधवा ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या का एक कारण दहेज की कुप्रथा है, मगर कोई बड़ी समस्या नहीं है कि, समाज चाहे और वह खत्म ना हो सके। व्याख्याता जयसिंह शेखावत ने कहा कि सबसे अधिक भ्रूण हत्याएं भारत में हो रही है, जबकि कन्या की मानसिक शक्ति लडक़े के मुकाबले में कई गुना अधिक होती है।

    व्याख्याता मंजु रांगेरा ने कविता के माधम से कहा कि, मैं बेटी हूं ,मुझे भी जीने का अधिकार दो। समिति के सदस्य हेमंत चांडक ने कहा कि जिस घर में बेटी ना हो उस घर का पानी तक पीना पाप समझा जाता है। मुरलीधर पारीक ने छात्रों को कन्या भ्रूण हत्या रोकने का संकल्प दिलवाया। समिति के अध्यक्ष परस राम भाटिया ने कन्या भ्रूण हत्या रोक पर हो रहे कार्य का विवरण दिया। व्याख्याता प्रवीण भाटिया ने इस कार्यक्रम का संयोजन किया।



प्रथम प्रकाशन 13-8-2011. कार्यक्रम 11-8-2011

अपडेट 18-7-2017

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रविवार, 16 जुलाई 2017

तुम लिपटकर मेरे तन से,चढ़ जाती शिखर- कविता


तुम लता होती और मैं हरियाला पेड़

तुम लिपटकर मेरे तन से,चढ़ जाती शिखर पर,

मैं कोशिश कर तुम्हें दिखलाता नीलगगन

 और दूर की पर्वत श्रृंखला।

तुम्हारे मद मस्त पुष्पों को छूने का

मेरा मन करता।

मेरे छूने की अभिलाषा

तुम्हारे लोच से रह जाती अपूर्ण।

मगर,मैं तुम्हारे पुष्पों की 

मधु गंध को खींच लेता

श्वास से भीतर अंतर मन तक।

तुम सावन की बादली सी

उड़ती निकल जाती।

मगर मैं तृप्त हो जाता

मोती सरीखी बूंदों से,

यह भीगना और सुगंध से

भीतर तक गद गद होना

मेरा तुम्हारा मिलन ही कहलाता।

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करणीदानसिंह राजपूत,

 पत्रकार,सूरतगढ़।

9414381356.

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शनिवार, 15 जुलाई 2017

सीता के मन भाए गौरी पुत्र गणेश-गणेश की सज्जा से मिलता है आत्मसुख और समाज को प्रेरणा




प्रेरणा नई दिशा:सड़कें साफ और शुद्ध पर्यावरण


- करणीदानसिंह राजपूत -

 गणेश की सज्जा से मिलता है आत्मसुख और समाज को प्रेरणा ताकि  पर्यावरण रह सके शुद्ध और सभी को मिलें साफ सुथरे मार्ग और शुद्ध वातावरण-

गणेश छपे निमंत्रण पत्र ही नहीं कोई भी निमंत्रण पत्र सड़कों पर न फेंके। उनको विभिन्न रूप देकर घर को सजाएं।
     बीकानेर के जूनागढ़ के सामने मुख्य डाक घर के पीछे पुरबिया राजपूत मोहल्ले में रहने वाली सेवा निवृत अध्यापिका सीता देवी जनवार को पिछले कुछ वर्षों से एक अजीब लगन लगी है। वे ब्याह शादियों में बांटे जाने वाले निमंत्रण पत्रों को एकत्रित करती हैं और उनको कार्ड शीट पर चिपका कर सजा कर नयनाभिराम नया रूप प्रदान कर देती हंै। कितनी ही फाईलें बनाई जा चुकी हैं जिनमें कितने ही रूप रंग के गणेश सजाए हुए हैं। दीवारों पर टांगने वाली झालरें भी आकर्षक लगती हैं।
सीता देवी इसे कला का ही एक रूप मानती हैं, जो आत्म सुख प्रदान करता है व अन्य लोगों को साफ सुथरे जीवन की प्रेरणा देता है।
शादियों व अन्य समारोहों में बांटे जाने वाले निमंत्रण पत्रों पर गणेश की तस्वीर प्राय: होती है। लोग कुछ दिन तक इन निमंत्रण पत्रों को संभाल कर रखते हैं और बाद में सड़कों पर या कचरे में फेंक देते हैं।
सीता देवी के सामने निमंत्रण पत्र सड़क पर फेंके जाने की एक घटना हुई। उन्होंने जिस खिड़की से निमंत्रण फेंका गया था उधर देखा लेकिन वह बंद हो चुकी थी। उन्होंने निमंत्रण पत्र उठाया और अपने मस्तक से लगाया तथा अपने घर ले आई। उसको आदर के साथ रखा। यह आध्यात्मिक पक्ष था। प्रथम पूज्य गणेश छपे कार्ड को फेंका क्यों जाए?
सीतादेवी ने विचार किया कि गणेश की तस्वीर को सजाया जाए और शीट पर नाना रूप दिए जाएं। बस। जब यह विचार आया तब वे शिक्षिका थी और जूनून में लग गई समाज को नई दिशा देने में। ज्यों ज्यों यह कार्य आगे बढ़ता गया त्यों त्यों मालूम पड़ता गया कि गणेश छपे कार्डों ïïको सड़कों पर फेंके जाने से बचाने के पीछे तो अनेक लाभ प्राप्त हो सकते हैं।
सीतादेवी का अनुभव बताता है कि अध्यापिका सेवानिवृति के बाद के जीवन में गणेश के कार्ड एकत्रित करने में टहलने से और सजाने के कार्य में लगे रहने से उनका स्वास्थ्य ठीक ठाक है। किसी प्रकार की चिंता नहीं। मन में विचार आते हैं तो गणेश छपे कार्डों को सड़कों से उठाने के आते हैं।


देश भर में स्वच्छता का अभियान चल रहा है। उसमें इसका लाभ मिल सकता है कि लोग किसी भी प्रकार का निमंत्रण पत्र सड़कों पर नहीं फेंके और उनसे सजावट की वस्तुएं बनाएं।
सीता देवी का मानना है कि स्कूलों में बच्चों को प्रेरित किया जाए तो वे कितनी ही प्रकार की सामग्री बना सकेंगे।
सीतादेवी ने पेंसिल तराशने से बनते छिलकों से और चूडिय़ों से भी गणेश की तस्वीरें बनाकर घर में सजा रखी हैं।


 

शुक्रवार, 14 जुलाई 2017

सूरतगढ़ में गोयल कॉम्लेक्स दुकानों का निर्माण अवैध: पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा का नाम घपले में क्यों आने लगा?


पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा के नाम एक दुकान के तीन हिस्सों में से एक रजिस्ट्र्ड हिस्सा होने से ही -इसका अवैध निर्माण सीज नहीं हुआ? जबकि  करणी प्रेस इंडिया में निर्माण के दौरान ही समाचार छप गये थे। अब सारा निर्माण हो चुका है तथा सभी में शो रूम वह दुकानें चल रही हैं।

- करणीदानसिंह राजपूत -


सूरतगढ़ 4 अक्टूबर 2016.



अपडेट 14 जुलाई 2017.



गोयल कॉम्लेक्स दुकानों के अवैध निर्माण में पालिकाध्यक्ष काजल छाबड़ा का नाम क्यों आने लगा है? मुख्य बाजार में इस निर्माण में एक



नहीं कई  घपले हैं और सड़क की करोड़ों रूपए की जमीन हथिया ली जाने के बाद अब फुटपाथ भी नहीं छोड़ा गया । इस घोटाले में  इसका निर्माण नहीं रोका जाना और निर्माण को सीज नहीं किया जाना एक महत्वपूर्ण प्रमाण है। इस निर्माण को काजल छाबड़ा की अध्यक्षता में इस तरह से बेरोकटोक बनवाया जा रहा  मानों काजल छाबड़ा का खुद का कोई हिस्सा हो? ( यह सच है)जो भी घपला है वह सामने तो आकर रहेगा। यह घपला जिस तरह से किया गया है उससे तो पालिकाध्यक्ष का पद भी खतरे में पड़ सकता है और पालिकाध्यक्ष सस्पैंड तक हो सकती है। आखिर पालिकाध्यक्ष की कोई जिम्मेदारी होती है।

इस जगह का एक पट्टा यहां पर एक बार फिर दे रहे हैं। यह पहले कई बार छापा जा चुका है। महाजन डेरे के नाम से यह भूखंड था।

इसमें से आधा हिस्सा श्रीमती गोयल व आधा  डागा ने खरीदा। गोयल व डागा दोनों सड़क की तरफ करीब 10 फुट आगे बढ़ गए। इनको सड़क की भूमि खांचा भूमि के नाम से भी किसने दी? सड़क की जमीन तो किसी भी रूप में दी ही नहीं जा सकती। अब देखिए कि जहां इनकी आगे बढ़ी हुई दुकानें थी उसके आगे पुुटपाथ पर पेडिय़ां बना दी गई है। मतलब की सड़क को और अधिक कब्जे में ले लिया गया है। पालिकाध्यक्ष का इसमें हिस्सा है तभी तो पालिका की ओर से सीज नहीं किया गया।

 

श्रीमती काजल छाबड़ा पर पद से सस्पेंड होने तथा मुकदमे का खतरा इस अवैध निर्माण को लेकर पैदा हो गया है कोई भी व्यक्ति या दल इस अवैध निर्माण को लेकर कार्यवाही कर सकता है।

 राजनैतिक दलों के मुखिया कार्यकर्ता, वह लोग जो आगामी विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, वह लोग तथा संगठन जो अतिक्रमण हटाने की मांग को लेकर प्रशासनिक कार्यालयों के आगे धरणा व प्रदर्शन करते हैं उन सबके चेहरे अवैध निर्माणों पर सीधी कार्यवाही नहीं करने से बेनकाब हो रहे हैं । मुख्य मार्गों पर होते अवैध निर्माण प्रभावशाली लोगों के निर्माण राजनीतिक दलों के मुखिया व कार्यकर्ताओं को दिखाई नहीं पड़ते हैं तो यह मानकर चलना चाहिए कि वह भी भ्रष्टाचार के बढ़ावे में कहीं ना कहीं शामिल है या शह दे रहे हैं।

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नाथवाला में नशा मुक्ति कार्यशाला

 पुलिस विभाग के सहयोग से जिला स्तर पर चलाये जा रहे नशा मुक्ति अभियान के अन्तर्गत नशा मुक्ति जन जागृति कार्यशाला का आयोजन बाबा हरद्वारी नाथ पब्लिक स्कूल ,नाथवाला श्री गंगानगर में पुलिस थाना सदर द्वारा पुलिस चौकी रिको एवं राजकीय माध्यमिक विद्यालय 2 एम एल के माध्यम से किया गया। 


कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉ रविकांत गोयल ने उपस्थित विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि नशे का सेवन मानव के लिए घातक होता है, नशा व्यक्ति की अच्छाईयों को मिटा देता है तथा बुराइयों को पैदा कर देता है। नशे का निरंतर सेवन व्यक्ति को रोगी, असहाय, लाचार तथा कंगाल बना देता है। डॉ रविकांत गोयल ने नशीले पदार्थों के दोषों - दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए नशें से बचने, बचाने , नशा छोडने व छुडवाने के सरल वैज्ञानिक उपायों की जानकरी देते हुए उपस्थित जन सभा को नशा मुक्त जीवन जीने का आह्वान किया ।


इस अवसर पर सामाजिक कार्यकर्ता इन्द्र मोहन सिंह जुनेजा ने छात्र छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि नशा व्यक्ति के जीवन से धैर्य , शांति, व्यक्तित्व, उन्नति ,समृद्धि को समाप्त कर देता है। जुनेजा ने पुलिस द्वारा चलाये जा रहे नशा मुक्ति अभियान की जानकारी देते हुए इसके महत्व व सफलताओं पर प्रकाश डाला। सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत सिंह ने विद्यार्थियों को उदाहरणों के माध्यम से नशे से दूर रहने हेतु प्रेरित किया । 


पुलिस थाना सदर के थानाधिकारी कुलदीप सिंह वालिया ने अपने सम्बोधन में कहा कि नशे की एक लत ही व्यक्ति के जीवन को दुश्वार बना देती है , नशा करने वाला व्यक्ति परिवार, समाज और व्यवस्था पर बोझ बन जाता है, जिसका नुकसान अनेकों को उठाना पडता है । 


 इस अवसर पर बाबा हरद्वारी नाथ पब्लिक स्कूल ,नाथवाला के प्रधानाध्यापक भूपेन्द्र सिंह सोनी ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि नशे का सेवन व्यक्ति की सोच को नकारात्मक बना देता है, नशा करने वाला व्यक्ति अन्य दुख तो भोगता ही है, साथ ही जीवन में पिछड़ जाता है। नशे से बचना ही व्यक्ति के जीवन के लिए उत्तम है । 


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे महन्त बाबा शुभनाथ जी ने बच्चों को सम्बोधित करते हुए कहा कि मानव जीवन अनमोल है, यह जीवन व्यर्थ ही नशे, कुरीतियों व अन्य बुराइयों में न गवा कर अपने कर्तव्य का पालन करते हुए, सदकर्म व परहित करते हुए समाज में व्याप्त नशे व अन्य समस्याओं को मिटाने में अपना हरसंभव सहयोग देना चाहिए । 


कार्यक्रम में सरपंच श्रीमती दर्शना देवी ने अपने विचार  व्यक्त करते हुए कहा कि नशे का प्रकोप महिला वर्ग को ही मारपीट, गाली-गलोच, अपमान, आर्थिक तंगी व परिवार के बिखरने के रूप में झेलना पडता है। अतः महिलाओं को आगे आकर नशे को मिटा देना चाहिये, जिससे पूरा समाज लाभान्वित हो सके। कार्यक्रम में राजकिय माध्यमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापिका श्रीमती अनीता चड्ढाअपने विचार व्यक्त किये। पुलिस चौकी रिको के प्रभारी बलवंत राम ने विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने हेतु पेरित किया। कार्यक्रम में बाबा हरद्वारी नाथ पब्लिक स्कूल ,नाथवाला व राजकीय माध्यमिक विद्यालय 2 एम एल के विद्यार्थियों, अध्यापक गणों व ग्रामवासियों ने भाग लिया। इस अवसर पर सभी ने जीवन भर नशा न करने की शपथ ग्रहण की। कार्यक्रम का मंच संचालन सीता राम गक्खड व.अ. व दिनेश वर्मा ने किया। डॉ गोयल द्वारा नशे के आदी रोगियों की मोके पर ही जांच कर परामर्श प्रदान किया गया। 


मंगलवार, 11 जुलाई 2017

आय से अधिक संपत्ति: 2 मामले: एसीबी कोर्ट से सालों बाद सजा

- करणीदान सिंह राजपूत  -

नगरपालिका बिजली बोर्ड पुलिस और राजस्व विभाग के सर्वाधिक मामले रिश्वत लेते आय से अधिक संपत्ति के दर्ज होते हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की  अदालत के दो फैसलों से रिश्वतखोरों को अकल आ जानी चाहिए कि सालों बाद ढलती उम्र में भी कठोर सजा भुगतनी पड़ जाती है। फर्जी परीक्षा, फर्जी डिग्री, फर्जी प्रमाण पत्र के मामले भी सालों बाद जेल में पहुंचा सकते हैं।


पढ़ें दो फैसले।


कोटा। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की अदालत ने आज 11जुलाई 2017 को एक फैसले में आय से अधिक सम्पत्ति रखने के 25 साल पुराने मामले में तत्कालीन सहायक अभियंता को पांच साल के कठोर कारावास ओर 20 लाख रूपए जुर्माने से दंडित किया है। विशिष्ट लोक अभियोजक अहसान अहमद ने बताया की आरोपी मोहनदास मरचुनिया 1992 में नगर निगम में सहायक अभियंता के पद पर कार्यरत था। जिसने अपने कार्यकाल के दौरान आय से अधिक संपत्ति इकठ्ठी कर ली थी। जिसपर एसीबी ने कार्रवाही की थी। कोर्ट में आरोपी के खिलाफ केस चल रहा था। वहीं कोर्ट ने सजा ओर जुर्माने के साथ आरोपी की संपत्ति कुर्क कर करोड़ों रूपए वसुलने के भी आदेश दिए है। विशिष्ट लोक अभियोजक का कहना है की ये राजस्थान का पहला मामला है जिसमें कोर्ट ने करोड़ों की संपत्ति कुर्क करने के आदेश दिए हैं। मोहन दास मरचूनिया की उम्र 82 साल है  व 25 साल पुराने मामले में आज 11 जुलाई 2017 को फैसला आया है जिसके बाद उसे अब बुढ़ापे में जेल की हवा खानी पड़ेगी। 

विशिष्ट लोक अभियोजक एहसान अहमद खान ने बताया कि मामला साल 1992 का है, जब आरोपी मोहनदास मरचुनिया नगर निगम में सहायक अभियंता के पद पर तैनात था। उस दौरान एसीबी ने आय से 23 लाख रुपए अधिक पाए जाने पर केस दर्ज किया था। 

 अदालत ने 20 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इसके अलावा कोर्ट ने आरोपी की संपति से चक्रवृद्धि ब्याज सहित तकरीबन 80 लाख रुपए की राशि वसूलने के भी आदेश दिए हैं।

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इससे पहले 6-6-2017 को भी हुआ एक फैसला: अधीक्षण अभियंता को हु सजा


कोटा की एसीबी कोर्ट ने मंगलवार 

6- 6-2017 को 18 साल पुराने आय से अधिक सम्पति रखने के मामले में फैसला सुनाते हुए विद्युत विभाग के रिटायर्ड अधीक्षण अभियंता को 4 साल कैद की सजा सुनाई  व साथ ही 15 लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया। मामला सन 1999 का था जब आरोपी आंनदी लाल माथुर ने बिजली विभाग में अधीक्षण अभियंता के पद पर रहते हुए इन्द्रसिंह नाम के ठेकेदार से 3 हजार रूपए  कमीशन के रूप में रिश्वत ली थी। एसीबी ने माथुर को रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इसके बाद घर पर दबिश के दौरान एसीबी को आय से अधिक सम्पति भी मिली थी।जिसके बाद से मामला कोर्ट में विचाराधीन था अब भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम कोर्ट ने आय से अधिक सम्पति मामले 4 साल कठोर कारावास की सजा सुनाई  और 15 लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया । यहीं नहीं कोर्ट ने चल अचल संपति 11 लाख 96 हजार 459 रूपए भी जमा कराने के आदेश दिए।

आरोपी आनंदी लाल को सजा सुनाएं जाने के बाद जेल जाया जा रहा था तब वे लड़खड़ाते हुए पुलिस वाहन में बैठे।  रिश्वत के मामले में पूर्व में हो चुके हैं दोषमुक्त सरकारी वकील अहसान अहमद ने बताया कि 1999 में रिश्वत के मामले में एसीबी द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद कोर्ट ने आरोपी आनंदी लाल माथुर को रिश्वत लेने के आरोप में दोषमुक्त कर दिया था लेकिन 18 साल तक कोर्ट में आय से अधिक सम्पति रखने का मामला चला, जिसमें कोर्ट ने अब फैसला सुनाया है।

भादू परिवार के कटलों कोठियों भूखंडों का राज? विधायक राजेन्द्र भादू निवास सड़क पर होने का आरोप:अपडेट

 पहले यह रिपोर्ट 10-8-2014 को दी गई थी।
 अपडेट 8-12-2015.
अपडेट 15-6-2016.
अपडेट 19-7-2016.
अपडेट 24-11-2016
अपडेट 6-5-2017.
अपडेट 11-7-2017.


विशेष रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत


गंगाजल मील,पृथ्वीराज मील व बनवारीलाल मेघवाल तो नहीं बोले और भादू पर जबानी आरोप लगा कर चुप हो गए।


पूर्व विधायक स.हरचंदसिंह सिद्धु ने राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को शिकायत की और उसके बाद अभी तक सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की। 

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माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र जी मोदी ने काले धन व भ्रष्टाचार पर पर रोक लगाने व कालाबाजायिों भ्रष्टाचारियों को दंडित करने की घोषणा की है। बेनामी और नियम विरूद्ध प्राप्त या कब्जेशुदा जमीनों पर भी कार्यवाही करने की घोषणा है।
भादू परिवार की इन संपत्तियों का जो विवरण उपलब्ध है वह सामने हैं।
सवाल केवल इतना है कि चाहे जो कानून हो,चाहे सशक्त लोकपाल बना दिया जाए जाँच कार्यवाही तो तभी शुरू होगी जब कोई शिकायत करेगा।
भाजपा के विरूद्ध कांग्रेस है। कांग्रेस बसपा माकपा आप जमींदारा सभी खामोश हैं।


सोमवार, 10 जुलाई 2017

आदमी हो तो सोचो: किसकी गलती है ओर सजा कौन भुगत रहा है: पशु मुकद्दमा करते तो क्या होता

 खुली सड़कों पर ही बची है जगह- फोटो करणीदानसिंह राजपूत

खुली सड़कों पर ही बची है जगह- फोटो करणीदानसिंह राजपूत

जरा बचके : कोई गौ वंश चपेट में आ गया तो लेने के देने देने पड़ जाएंगे- आदमी भी मौत के मुंह में जा सकता  है- राजपूत

सावधानी से चलो-करणीदानसिंह राजपूत

आदमी हो तो सोचो: किसकी गलती है और सजा कौन भुगत रहा है: पशु मुकद्दमा करते तो क्या होता?

गौ वंश का सड़कों पर आराम : ना जाने कब हो जाए दुर्घटना : दुर्घटना पर हो जाती है भीड़: पहले कोई करता नहीं उपाय
नगरपालिका प्रशासन की ड्यूटी में आता है कि वे इन असहाय गौ वंश की सुरक्षा करें और किसी स्थान पर रखें
इनको आवारा पशु भी क्यों कहा जाता है? ना किसी को छेड़ा ना कोई आवारागर्दी की, उल्टे इनके चारागाह और गुवाड़ पर तो आदमी ने कब्जे कर लिए।
करणीदानसिंह राजपूत
 11~10~2014
अपडेट 10-7-2017.
शहर में असहाय छोड़ा हुआ गौ वंश रात को सड़कों को आराम दायक मानता हुआ, उस पर विचरण करता है, खड़ा रहता है और सोता है।

 गौ वशं तो आराम करता है मगर उनके इस तरह से सड़कों के बीच में आराम करने और टहलने से वाहन चालकों की नींद हराम रहती है। ना जाने कब कोई गौ वंश चपेट में आ जाए या उसकी चपेट में पैदल चलता या वाहन चलाता नआदमी आ जाए,और लेने के देने पड़ जाए।

गौ वंश के चोट लग जाए तो उन हालातों में पुलिस मामलों से बचना कठिन होता है और भीड़ जो ना करे वो थोड़ा। आदमी की जान जाना वाहन का क्षतिग्रस्त हो जाना भी संभव। ऐसा हो भी रहा है।



यहां पर सवाल यह भी पैदा होता है कि आखिर गो वंश कहां जाए? ग्रामों में चारागाह नहीं रहे। जहां थे वहां प्रभावशाली लोगों ने खुद के अतिक्रमण करवा लिये और सांझे में बड़े बड़े नेताओं के परिवारों के भी कब्जे करवा दिए। वहां पर चरने की कोई जगह नहीं रही। खेती के लिए और बढ़ते शहरों के लिए जमीनें बिकती रहीं। शहर में भी गुवाड़ नहीं रहे। 

गो वंश को खासकर बैल को नाकारा मान कर खिलाना पिलाना बंद करके शहर में ला कर छोडऩा शुरू कर दिया 
गया। इन गौ वंश को शहर में भी जगह नहीं मिलती। तो ये सड़क को खुली पाकर पसर जाते हैं। 

शिक्षित लोग, प्रशासन आदि इन गौ वंश को आवारा कहते हैं। 

सवाल यह पैदा होता है कि आवारा कैसे हुए? इन्होंने तो किसी को छेड़ा नहीं कोई आवारागर्दी की नहीं। इनको तो लोगों ने ही असहाय हाल में छोड़ दिया। इनके लिए शासन प्रशासन ने क्या किया है? 

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