गुरुवार, 2 जुलाई 2015

पट्टाघोटाला:बनवारी की शिकायत में 61 नाम:ईओ मदन बुडानिया पर आरोप:



पूर्व पालिकाध्यक्ष ने जाँच व पट्टा निरस्त करने का मांग पत्र दिया था:

बनवारीलाल ने लिखा कि ईओ मदनसिंह बुडानिया ने भ्रमित कर पट्टे जारी करवाए:
5 साल बाद पत्र परेशानी का कारण बनेगा:लोग नकलें निकलवाऐंगे और जाँच करवाऐंगे:

स्पेशल रिपोर्ट-करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,2 जुलाई।
बनवारीलाल मेघवाल ने अपने पालिका अध्यक्ष काल में जो शिकायत पत्र जयपुर भेजा उसमें लिखा कि नया अध्यक्ष बना था और ईओ मदनसिंह बुडानिया ने भ्रमित कर पट्टे जारी करवाए। बुडानिया ने पूछने पर इन पट्टों को नियमानुसार सही बतलाया। अगर ये पट्टे गलत हैं तो बुडानिया के विरूद्ध कार्यवाही की जाए तथा पट्टों को निरस्त किया जाए। बुडानिया के बाद ईओ पद पर आए भंवरलाल सोनी ने बनवारीलाल को बताया कि पट्टे नियम विरूद्ध हैं। विदित रहे कि मदनसिंह बुडानिया यहां दुबारा और आए या लाए गए। सेवानिवृति पर शानदार समारोह हुआ और अब उनकी बेटी प्रियंका बुडानिया ईओ पद आई हैं या लाई गई हैं।
बनवारीलाल मेघवाल ने जिन लोगों के नाम लिखे हैं वे यहां दिए जा रहे हैं।
1.दुर्गादेवी पत्नी श्यामसुंदर खंडेलवाल नगरपालिका में भूमि शाखा इंचार्ज।
2.अशोक कुमार पुत्र श्यामसुंदर खंडेलवाल नगरपालिका में भूमि शाखा इंचार्ज।
3.कृष्ण तरड़
4.करूणा रत्न पत्नी विजयकुमार शर्मा। विजयकुमार शर्मा आरसीपी कर्मचारी थे।
5.हंसराज पुत्र नन्दलाल यादव
6.जयदेव पुत्र रघुनाथ सहाय
7.आनन्द पुत्र रघुनाथ सहाय
8.हनुमान पुत्र हीरालाल पुत्र रघुनाथ सहाय
9.देवेन्द्र वर्मा पुत्र राजेन्द्र वर्मा
10.फकीरचंद नाई पुत्र प्रभाती लाल नाई
11.चेतराम पुत्र सुरजाराम आसेरी
12.कलावन्ती पत्नी भागीरथ सुथार
13.मुरलीधर पुत्र किशनलाल पारीक
14.जसवीरसिंह पुत्र स्वर्णसिंह रामगढिया
15.बाबूलाल पुत्र छबीलाराम
16.सुभाष पुत्र छबीलाराम
17.मदनलाल पुत्र लछमन राम मेघवाल
18.जयभगवान पुत्र कस्तूरीलाल
19.नंदलाल पुत्र मंहगाराम
20.राजकुमारी पत्नी रघुनाथ राम
21.बन्तासिंह पुत्र मालासिंह
22.गुड्डीदेवी / रतनलाल
23.मीरादेवी पत्नी कृष्णचन्द्र गोदारा
24.मक्खूशाह पीर पुत्र मिल्लूशाह पीर
25.सुभाषचन्द्र /अशोककुमार/सुरेशकुमार/महेशकुमार/संजयकुमार/दिनेशकुमार  पिसरान नन्दकिशोर
26.नन्दराम पुत्र चेतराम
27.पार्वतीदेवी पत्नी शंकरलाल
28.परमेश्वरीदेवी पत्नी छगनलाल
29.विजय शंकर पुत्र शिवपतराय मून्धड़ा
30.नरेन्द्रकुमार पुत्र सोहनलाल गोलछा
31.संपतलाल पुत्र सोहनलाल गोलछा
32.पवन ओझा पुत्र शंकरलाल उस समय इनकी पत्नी पार्षद थी।
33.मंगतराय अग्रवाल पुत्र गजानन्द अग्रवाल
34.पूनमचंद जैन वार्ड नं 17 पुराना
35.संतोषदेवी पत्नी दलेलसिंह। पति एमइएस में नौकरी। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर।
36.सौरभकुमारी पत्नी अनिलकुमार अग्रवाल। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर।
37.हीरालाल पुत्र ओमप्रकाश राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर।
38.दलीपकुमार पुत्र हरसुखराम राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर।
39.संजयकुमार पुत्र पूनमचंद राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर।
40.जितेन्द्र कांडा पुत्र छगनलाल कांडा राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर।
41.रामचन्द्र पुत्र होलाराम अरोड़ा राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर।
42.हेतराम पुत्र लूणा राम
43.केहरसिंह पुत्र लूणा राम
45.आत्मचन्द्र पुत्र श्योजी राम
46.छोटू खां पुत्र सन्तू खां
47.राजू खां पुत्र छोटू खां
48.सोना पत्नी बून्दी राम
49.कलाली देवी प्तनी स्व.नानुराम
50.लूणाराम पुत्र कल्याणा राम
51.मनजीतकौर पत्नी अजैबसिंह
52.गजेन्द्रसिंह पुत्र सोहनसिंह
53.मुन्नी देवी पत्नी रामेश्वर लाल
54. महावीरसिंह पुत्र लालसिंह
55.मानक पुत्र नत्थूराम
56.विनोद कुमार पुत्र उत्तमचन्द्र
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भंवरलाल सोनी

मदनसिंह बुडानिया के स्थानानतरण के बाद यहां आए भंवरलाल सोनी ईओ ने यह तो साफ कर दिया कि पट्टे नियम विरूद्ध जारी हुए हैं तब बनवारीलाल ने अपना बचाव करने की सोच के साथ यह पत्र लिखा। लेकिन जब पट्टे नियम विरूद्ध जारी हुए तो बनवारीलाल व मदनसिंह बुडानिया ने साधुत्व के नाते तो इनको जारी नहीं किया होगा। इनमें भारी भरकम डील हुई होगी और किस किस रूपए लिए गए होंगे? यह जाँच में ही उजागर हो सकेगा।  आखिर उस डील की रकम का हिस्सेदार कौन कौन रहा होगा? इस पत्र ने लोगों के लिए भारी परेशानी पैदा करदी है। मदनसिंह बुडानिया की पुत्री प्रियंका बुडानिया अब यहां ईओ आई है या लाई गई है लेकिन क्या वह जाँच को प्रभावित नहीं करेगी।
बनवारीलाल मेघवाल का पत्र 8 पेज फोटो देखने के लिए यहां क्लिक करें।

सूरतगढ़ में बनवारी के पत्र से पट्टे वालों में खलबली:8 पेज:

मंगलवार, 30 जून 2015

मील होटल टी पोईंट का रिकार्ड एसीबी ने मांगा:



सूरतगढ़,30 जून। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की गंगानगर चौक ने मील के थर्मल टी पोईंट पर राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 पर बनाए गए होटल का रिकार्ड मांगा है। कृषि भूमि पर होटल अवैध रूप से बनाए जाने की शिकायत है। कृषि भूमि का भू उपयोग परिवर्तन कराना था लेकिन मील के सत्ता में होने के वक्त बिना नियम पूरे किए होटल बनाया गया। राजस्व विभाग का कोई अधिकारी पटवारी,तहसीलदार,उपखंड अधिकारी आदि ने खबरें छपती रहने के बावजूद वहां देखने की आवश्यकता नहीं समझी। 
इसकी शिकायत विभिन्न स्तरों पर हुई।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में इसकी शिकायत वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु की ओर की गई।
ताजा सूचना है कि ब्यूरो ने तहसीलदार व उपखंड अधिकारी से संबंधित रिकार्ड मांगा है। इसके लिए दोनों स्थानों से रिकार्ड उपलब्ध कराने के लिए तीन दिन का समय मांगा है। तीन दिनों में दोनों अधिकारी रिकार्ड उपलब्ध करवाऐंगे।

रविवार, 28 जून 2015

दो नामों से रहता अध्यापक:एक पीएचडी दोनों नामों पर इस्तेमाल:


बीएड की डिग्री में भी है शंका:
सूरतगढ़,28 जून। संपूर्ण देश में मंत्रियों की फर्जी डिग्रियों पर शोर मचा है तथा आम आदमी पार्टी का कानून मंत्री जितेन्द्र तोमर जेल में है।
सूरतगढ़ में भी पिछले कुछ सालों से एक सरकारी अध्यापक शंका के दायरे में घिरा है।
एक नाम सरकारी स्कूल में है और कोचिंग में दूसरा नाम है।
असली नाम से शोध कर पीएचडी ली जो फर्जी नाम के साथ इस्तेमाल व प्रचारित की जा रही है। फर्जी नाम के साथ उक्त पीएचडी दर्शाते हुए विज्ञापन अखबारों में छपवाए जा रहे हैं।
अध्यापक नाम दो रख कर फर्जीवाड़ा करते हुए सरकार को गुमराह कर रहा है मगर उसका मुखड़ा एक ही है जो दो जगहों पर दो प्रकार का नहीं हो सकता।
उसकी बीएड की डिग्री शंकाओं में है जो नियमित छात्र के रूप में ली गई आरोप है कि उस समय वह किसी संस्थान में अंशकालीन भुगतान पर नौकरी कर रहा था। एक ही समय दो अलग अलग शहरों में कोई कैसे रह सकता है? शंका यह है कि बीएड की नियमित कक्षाओं में हाजिरी का फर्जीवाड़ा रहा। जिस स्थान पर पढ़ाने का पारिश्रमिक लिया वहां तो हाजिर होना जरूरी था।

शनिवार, 27 जून 2015

भूखंड महाघोटाला:ब्यूरो में पूर्व विधायक सिद्धु के बयान हुए:


सूरतगढ़,27 जून 2015.
नगरपालिका सूरतगढ़ में औद्योगिक भूखंड नं 174 और 175 की खरीद में घोटाले में पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु की शिकायत पर
एसीबी में जयपुर थाने में एफआइआर नं 78:15. दर्ज होकर जांच श्रीगंगानगर चौकी के सुपुर्द की गई है। ब्यूरो ने 26 जून को सिद्धु के बयान दर्ज किए हैं तथा इसके बाद की कार्यवाही भी जल्दी होने वाली है।
पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने बताया कि गंगाजल मील के विधायक काल में यह घोटाला हुआ जिसमें मील भी आरोपी है। इसमें भूखंडों की खरीद में महाघोटाला हुआ। उन लोगों को खरीदार बताया गया जो पहले शामिल ही नहीं थे। मनमर्जी से नाम डाले गए और हलफनामों से मनमर्जी से निकाले गए। इसके बाद गैर कानूनी रूप से टुकड़े करके आगे बेचान किया गया। इसमें गैर कानूनी रूप से टुकड़े खरीद करने वाले भी आरोपी हैं और सभी आरोपी संख्या करीब 40 के हो सकती है। सिद्धु का आरोप है कि इसमें सब रजिस्ट्रार भी आरोपी है।


शुक्रवार, 26 जून 2015

स्टेडियम और सड़क घोटाले एसीबी में ताजा आदेश:


अधिकारी मौके पर आकर हालात देखेंगे और उसके बाद पी दर्ज करेंगे
एडीएम सूरतगढ़ ने जांच कर सौंपी थी:
स्पेशल रिपोर्ट - करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 26 जून 2015.
नगरपालिका स्टेडियम और आवासन मंडल के पास बनी सड़क में हुए घोटाले पर हुई शिकायतों की जांच कर उच्च प्रशासन को सौंपी गई थी।
वे जाँचें भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को प्रकरण दर्ज करने के लिए भिजवा दी गई थी।
अब ताजा स्थिति यह है कि उच्च आदेश के अनुसार श्रीगंगानगर एसीबी चौकी के अधिकारी स्वयं एक बार मौका देखेंगे। मौका देखने के लिए 10 दिन के भीतर पहुंचेंगे। मौका देखने के बाद आवश्यक समझा गया तब पी दर्ज कर जाँच शुरू की जाएगी।
स्टेडियम के निर्माण में घोटाला होने की शिकायत वर्तमान विधायक राजेन्द्रसिंह भादू ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के आगमन पर की थी व स्टेडियम का मौका भी दिखलाया था।

पूर्व विधायक मील,पुत्र महेन्द्र,बनवारी,धुआ पर एसीबी में मुकद्दमा:



गंगाजल मीलमहेन्द्र मील बनवारीलाल मेघवाल संजय धुआ राकेश मेंहदीरत्ता पृथ्वीराज जाखड़


एफआइआर नं 78:15. जाँच एसीबी चौकी श्रीगंगानगर आनन्द स्वामी को सौंपी गई:
पूर्व विधायक वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु की एसीबी को शिकायत थी।
खरीदने वाले भी अपराधी:करीब 40 लोग भी फंसेंगे:
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़,26 जून 2015.
नगरपालिका सूरतगढ़ में औद्योगिक भूखंड नं 174 और 175 की खरीद में घोटाला और उसके बाद गैर कानूनी रूप में टुकड़े कर बेचने में भी घोटाला हुआ जिसमें नगरपालिका के तत्कालीन अध्यक्ष,ईओ,खरीदार व आगे टुकड़े कर खरीदने वाले,हलफनामें देने वाले आरोपित हैं। पूर्व विधायक गंगाजल मील का नाम भी शिकायत में था और समाचार है कि अब उन पर भी आरोप हैं।
एसीबी में जयपुर थाने में एफआइआर नं 78:15. दर्ज होकर जांच श्रीगंगानगर चौकी के सुपुर्द की गई है। जांच अधिकारी आनन्द स्वामी को नियुक्त किया गया है।
पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने बताया कि गंगाजल मील विधायक काल में यह घोटाला हुआ जिसमें मील भी आरोपी है। इसमें भूखंडों को गैर कानूनी रूप से टुकड़े करके आगे बेचान नहीं किया जा सकता। इसमें गैर कानूनी खरीद करने वाले भी आरोपी हैं और सभी आरोपी संख्या करीब 40 के हो सकती है।
इस संबंध में पहले जो खबर दी गई थी वह यहां दी जा रही है। ::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::::



पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु

महेन्द्र मील बनवारीलाल मेघवाल संजय धुआ राकेश मेंहदीरत्ता 

महेन्द्र मील,बनवारी मेघवाल,राकेश मेंहदीरत्ता,संजय धुआ के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो में प्रकरण


सूरतगढ़ वर्कशॉप योजना के भूखंड 174 व 175 खरीद कर नियम विरूद्ध टुकड़े कर बेचान का आरोप:

भूखंडों की खरीद बेचान में नगरपालिका सूरतगढ़ को 2 करोड़ की हानि पहुंचाने का आरोप:


खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत

सूरतगढ़,22 अगस्त 2014. नगरपालिका में औद्योगिक भूखंड नं 174 व 175 की नीलामी और उनके रिकार्ड में गलत इन्द्राज व बाद में उनके नियम विरूद्ध टुकड़े कर बेचने आदि में भ्रष्टाचार व सरकार को करोड़ों रूपयों का नुकसान पहुंचाने वाले प्रकरण में पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की श्रीगंगानगर चौकी में बयान हुए। पालिका के कुछ कर्मचारियों को भी ब्यूरो में बुलाया हुआ था।
वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु ने पहले यह प्रकरण मार्च 2013 में भ्रष्टाचार निवारण अदालत श्रीगंगानगर में दायर किया था। सर्वाच्च न्यायालय के निर्देश पर अदालत में सीधे इस्तगासे पर प्रकरण की सुनवाई होने पर रोक लग जाने के कारण बाद में यह प्रकरण ब्यूरो के जयपुर मुख्यालय में दर्ज कराया गया जहां से इसकी प्राथमिक जांच यानि पी दर्ज हुई।
अब इस प्राथमिक जांच प्रक्रिया में ब्यान दर्ज हुए हैं।
सिद्धु ने बयान देने के बाद यहां बताया कि इनमें दो पत्रकारों पर आरोप है।
सिद्धु का आरोप
 

 नगरपालिका सूरतगढ़ की मास्टर प्लान के तहत वर्कशॉप टांसपोर्ट योजना वार्ड नं 6 में भूखंड नं 174 और 175 की खरीद और उसके नियम विरूद्ध टुकड़े कर आगे बेचान करने तथा लीज को भी नियम विरूद्ध संशोधित किए जाने से राजकोष को 2 करोड़ रूपए की हानि पहुंचाने का आरोप लगाते हुए महेन्द्र मील पुत्र गंगाजल मील, पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,अधिशाषी अधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता,संजय धुआ पुत्र फतेहचंद के विरूद्ध पूर्व विधायक वरिष्ठ वकील स.हरचंदसिंह सिद्धु ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7-3 ए, बी, सी, डी,भारतीय दंड संहिता की धाराओं 167,218,219,467,468,471,474 व 120 बी के तहत यह वाद दायर किया । इसमें सब रजिस्ट्रार पर भी मिली भगत का आरोप लगाया गया ।

    आरोप लगाया गया है कि वार्ड नं 6 में वर्कशॉप ट्रक ट्रांसपोर्ट योजना के प्लॉट नं 174 व 175 की नीलामी निकाली गई। इनके साईज 120 गुणा 150 फुट थे।

प्लॉट नं 174 की नीलामी में बोलीदाता रिंकलकुमार पुत्र देसराज,राजेन्द्रकुमार पुत्र गिरधारीलाल,नवलकिशोर पुत्र ओमप्रकाश,ओमप्रकाश पुत्र भूरा राम,इन्द्रादेवी पत्नी कृष्णदेव व महेन्द्रकुमार पुत्र गंगाजल मील ने अलग दो बोलियां लगाई। जिसमें अंतिम बोली 40 लाख 50 हजार रूपऐ राजेन्द्रकुमार की थी। अपराधिक षडय़ंत्र के तहत अध्यक्ष बनवारीलाल अधिशाषी अधिकारी राकेश मेंहदीरत्ता,सहायक अभियंता व प्रतिनिधि जिला कलक्टर ने उक्त बोली को संयुक्तरूप से राजेन्द,रिंकलकुमार,महेन्द्रकुमार,नवलकिशोर,ओमप्रकाश व इन्द्रादेवी की मान कर दर्ज की जो कानून विरूद्ध है।

    इसी प्रकार प्लॉट नं 175 की नीलामी में बोलीदाता जगदीश पुत्र सुरजाराम,संजयकुमार पुत्र फतेहचंद,राधेश्याम पुत्र गुरादित्ता,सुरेन्द्रकुमार पुत्र रामकिशन व महेन्द्रकुमार पुत्र गंगाजल मील ने बोली दी। इसमें संजयकुमार व महेन्द्रकुमार मील को एक पक्ष व सुरेन्द्रकुमार को दूसरा पक्ष मानकर बोली लगाई गई। यह अंतिम बोली संजयकुमार की 52 लाख 50 हजार की स्वीकृत हुई।

    प्लॉट नं 174 की लीज तैयार करते समय सफल बोली दाता नवलकिशोर व भूराराम का नाम वापिस ले लिया गया और अवैध रूप से भ्रष्टाचार करके 6 व्यक्तियों की एवजी में 4 की मानकर लीज तैयार की गई। और उक्त प्लॉट नं 174 को उपविभाजित करके 20 दुकानों का साइज बताकर लीज तस्दीक करवाई। जो कानून विरूद्ध थी।

इसी प्रकार प्लॉट नं 175 को अवैध रूप से उपविभाजित कर 20 दुकानों की लीज तस्दीक करवाई। सब रजिस्ट्रार सूरतगढ़ इस भ्रष्टाचार में लिप्त रहा।

इसके बाद दोनों मूल लीज को संशोधित करवाकर 4 भागों में उप विभाजित करवाकर उन 4 हिस्सों का अग्रेतर उपविभाजन कर लीज संशोधित करवाई गई। यही प्रक्रिया प्लॉट नं 175 में अपनाई गई।

उक्त प्लॉटों के उपविभाजन से बनी दुकानों को स्वीकृति देकर आरोपी पृथ्वीराज जाखड़ ने नामांतरण खरीदारान के नाम से किया तथा राजकोष को 2 करोड़ से अधिक का नुकसान पहुंचाया।

इसमें विधायक गंगाजल मील पर भी आरोप लगाया गया है कि विधायक गंगाजल मील ने बनवारीलाल मेघवाल को अपना उम्मीदवार बताया जिसने पालिकाध्यक्ष सूरतगढ़ का चुनाव जीता। राकेश मेंहदीरत्ता जो नगरपालिका सूरतगढ़ में लेखाधिकारी पद पर कार्यरत था को विधायक गंगाजल मील और पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल ने सूरतगढ़ नगरपालिका में अधिशाषी अधिकारी पद पर नियुक्त करवाया।



आपातकाल लोकतंत्र सेनानी संगठन प्रदेश कार्यसमिति घोषित:


राष्ट्रीय संयोजक पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा हैं:
प्रदेश अध्यक्ष प्रभात रांका ने की है घोषणा:
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 25 जून 2015.
आपातकाल 1975 के 40 साल पूर्ण हो गए लेकिन उस समय आम नागरिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले जेलों में बंद रह अत्याचार सहन करने वाले लोकतंत्र सेनानियों को वर्तमान केन्द्र की भाजपा सरकार व राजस्थान की भाजपा सरकार ने अनदेखा कर रखा हे।
राजस्थान की वसुंधरा राजे सरकार ने तो जो वादे किए उनको पूरा करने में भी पीछे हट रही है और कोई घोषणा करने में कतरा रही है।
ऐसी स्थिति में सूरतगढ़ से 1977 में जनता पार्टी के विधायक रहे गुरूशरण छाबड़ा ने एक संगठन बनाया है। उसी की राजस्थान कार्यकारिणी की घोषणा हुई है। छाबड़ा आपातकाल में श्रीगंगानगर जेल में बंदी रहे और 15 अगस्त 1975 को स्वतंत्रता दिवस के दिन जेल में आमरण अनशन शुरू किया था। 


बुधवार, 24 जून 2015

करोड़ों की भूमि खांचा में दे डाली:पालिका में महा घोटाला:


एक एक व्यक्ति को देदी करोड़ों की भूमि: जमीन जितनी जमीन देदी:एक मामला बिना मालिक के ही देदी खांचा भूमि।
सूरतगढ़।
नगरपालिका में खांचा भूमि देने के मामले में कई करोड़ की भूमि खास लोगों को लुटा दी गई। अपना घर भरा गया लेकिन राजकोष को करोडों रूपए की चपत लगा दी गई। पालिका के नियमों तोड़ डाला गया।
सड़कों के किनारे व्यावसायिक भूमि देदी गई।
भूखंड जितनी ही जमीन खांचे में देदी गई और वह भी उसको जिसने खांचा मांगा लेकिन आवंटन से पहले अपनी भूमि बेच चुका था। कानून के अनुसार जब भूमि ही नहीं है तो उसको खांचा कैसे दिया जा सकता है?
राजनैतिक गर्माहट पालिका में भ्रष्टाचार को लेकर बढ़ी है।

मंगलवार, 23 जून 2015

बनवारीलाल काल की अंतिम बैठक की रिपोर्ट महाघोटाला?



पार्षदों को आजतक नहीं दी गई नकल:

सूरतगढ़ 23 जून।
नगरपालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल के कार्यकाल में बोर्ड की अंतिम बैठक की कार्यवाही प्रोसिडिंग गंभीर रहस्य बनी हुई है। उसका ऐजेंडा क्या था और उसमें क्या लिखा गया? वह बैठक और उसकी कार्यवाही महाघोटाला आरोपों में घिरी हुई है जिसकी नकल आजतक पार्षदों को नहीं दी गई है।
नियमानुसार तो बैठक की कार्यवाही की नकल बिना मांगे ही पार्षदों को 48 घंटों में दे दी जानी चाहिए लेकिन नगरपालिका सूरतगढ़ में कभी भी नियम का पालन नहीं हुआ।
बनवारीलाल की अध्यक्षता वाली अंतिम बैठक में आखिर क्या है जिसको पार्षदों को नहीं दिया गया। उस समय जो पार्षद थे उनको नकल मिल जानी चाहिए थी।
बनवारलाल मेघवाल के कार्यकाल की उक्त बैठक का महत्व अन्य प्रकार से भी है। उस समय प्रदेश में कांग्रेस का राज बदल कर भाजपा की सरकार बन गई थी लेकिन नगरपालिका में कांग्रेस का ही बोर्ड था। बनवारीलाल की अध्यक्षता वाली बैठक में विधायक भी सदस्य बन चुके थे। इस बैठक के बाद पालिका चुनाव हुए तो भाजपा का बोर्ड बन गया व श्रीमती काजल छाबड़ा अध्यक्ष बन गई। काजल छाबड़ा की अध्यक्षता में नए बोर्ड की पहली बैठक हुई तब पिछली बैठक की पुष्टि करने से नए सदस्यों ने इन्कार कर दिया था। नए पार्षदों का कहना था कि हम सदस्य ही नहीं थे न हमारी उपस्थिति में बैठक हुई तब हम पुष्टि क्यों करें? इसके बाद पुष्टि के प्रस्ताव पर चर्चा ही नहीं हुई। उसी बैठक में गंभीरता वाली गड़बड़ होने की शंका है जिसके कारण पार्षदों को उसकी नकल नहीं दी गई।
उच्च स्तरीय जाँच में ही असलीयत सामने आ सकेगी।






रविवार, 21 जून 2015

सुहाना सा स्पर्श उसका-कविता



आधी रात को उसका आना
तन मन भिगो जाना
आनन्द में तन्द्रा आती रही
आँख जब खुली तब
वह सपना सी लगी।
लेकिन बिछौना भीगा
सलवटें लिए सच्च था।
कई दिन रात की लुका छिपी
नींद में खत्म कर गई
सुहाना सा स्पर्श
रोमांचित कर रहा है
फिर से आ जाए
तो रंग छा जाए।


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करणीदानसिंह राजपूत
पत्रकार,
सूरतगढ़।
94143 81356
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