शनिवार, 21 जुलाई 2012

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल यौनशोषण मामला:पीडि़ता के वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु महानिरीक्षक से मिले-खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-


महानिरीक्षक गोविंद गुप्ता को लिखित में शिकायत की गई-
सूरतगढ़, 21 जुलाई  2012.पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया व सिपाही रोहताश द्वारा अनुसूचित बाजीगर महिला से बलात्कार यौन शोषण आरोप के प्रकरण में अनुसंधान अधिकारी सीआईरिछपालसिंह चारण द्वारा पीडि़ता से साक्ष्य लेकर उनको गायब करने के गंभीर आरोप में पीडि़ता के वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने 20 जुलाई को पुलिस महानिरीक्षक गोविंद गुप्ता से बीकानेर में भेंट कर लिखित में शिकायत की। उस शिकायत में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल के विरूद्ध भी आरोप लगाए हुए हैं। सिद्धु ने बताया कि पुलिस महानिरीक्षक ने उसी समय जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर को टेलिफोन कर आवश्यक निर्देश दिया। सिद्धु ने बताया कि वे स्वयं शीघ्र ही जिला पुलिस अधीक्षक श्रीगंगानगर से मिलेंगे।
इस प्रकरण में पीडि़ता ने 19 जुलाई को सूरतगढ़ के थानाधिकारी को अनुसंधान कर्ता रिछपालसिंह चारण के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने का आवेदन दिया था, लेकिन पुलिस ने यह प्रकरण दर्ज नहीं किया। इसी शिकायत पर वकील हरचंदसिंह सिद्धु पुलिस महानिरीक्षक से मिले थे।
इस प्रकरण की संपूर्ण रपटें इसी लेबल अपराध और चर्चित प्रकरण में पढ़ें।
-----------------------------------

गुरुवार, 19 जुलाई 2012

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल यौनशोषण मामला:सिपाही रोहिताश के साथ पीडि़ता के ब्याह फोटो नष्ट करने का आरोप-खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-


सूरतगढ़, 19 जुलाई  2012.पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया व सिपाही रोहताश पर अनुसूचित बाजीगर महिला से बलात्कार करने, यौन शोषण करने, मारपीट करने,गर्भपात करवाने,शिव मंदिर में सिपाही को कुंवारा बतलाकर ब्याह करवाने के प्रकरण में पुलिस के फाइनल रिपोर्ट दिए जाने के बाद अब बहुत गंभीर मोड़ आया है। पीडि़ता ने आरोप लगाया है कि अनुसंधान अधिकारी थानाधिकारी रिछपालसिंह चारण ने पीडि़ता के मोबाईल और सिम, सिपाही रोहिताश के साथ ब्याह के फोटो आदि अनुसंधान में लिए मगर उन्हें रिकार्ड में नहीं लिया तथा नष्ट कर दिए। पीडि़ता ने इस बाबत 19 जुलाई को एक आवेदन पुलिस थाना सूरतगढ़ सिटी में प्राथमिकि दर्ज करने के लिए दिया। सूचना है कि सीआई दिनेश राजौरा ने पीडि़ता से कहा कि इस बाबत पहले पुलिस अधीक्षक से बात करके उनका जो भी निर्देश होगा उसका पालन करेंगे। अगर वे प्रकरण दर्ज करने का आदेश देंगे तो प्रकरण दर्ज कर दिया जाएगा अन्यथा जो भी सूचना होगी वह बतला दी जाएगी।
इस आवेदन में रिछपालसिंह पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उसने पीडि़ता के लडक़े का झूठा बयान लिखा कि उसकी माता बदचलन है। पुत्र ने यह आरोप लगाया है कि उसने रिछपालसिंह को कभी कोई बयान नहीं दिया। इसके अलावा पीडि़ता के पति का भी बयान रिछपाल ने दर्ज करना बताया है जिसमें पत्नी पर बदचलनी का आरोप लगाया हुआ है। इस बारे में आरोप लगाया गया है कि पुलिस एक तरफ तो पीडि़ता के पति को अदालती वारंट पर चार साल से लिखती रही है कि वह मिला नहीं और जिस दिन बयान लिखे तब वह वारंट दिया क्यों नहीं? पति के विरूद्ध दो प्रकरण पीडि़ता ने दर्ज करवा रखे हैं।
पीडि़ता ने यह आरो भी लगाया है कि आरोपियों से जो बात मोबाईल आदि पर हुई उसकी सीडी की आवाज की जांच नहीं हुई। आरोपियों और पीडि़ता की आवाजों के नमूने लेकर जांच विधि विज्ञान प्रयोगशाला से करवाए जाने चाहिए थे लेकिन नहीं करवाए गए। ये सब आरोपियों को बचाने के लिए किया गया।
पीडि़ता ने यह प्रकरण अनुसंधान अधिकारी रिछपालसिंह चारण, अपर पुलिस अधीक्षक यादराम फांसल सहित बनवारीलाल मेघवाल, ओम साबनिया व सिपाही रोहिताश पर दर्ज करने का लिखा है।
इसमें यह आरोप भी लगाया है कि रिछपालसिंह चारण स्थानीय विधायक गंगाजल मील की अनुशंसा पर सूरतगढ़ में पद स्थापित रहा और उनके प्रभाव में काम करता रहा। पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल मेघवाल को गंगाजल मील का खास आदमी बताया गया है। वहीं ओम साबनिया के लिए लिखा गया है कि उसकी पत्नी को कांग्रेस की टिकट गंगाजल मील ने दिलवाई थी। -ओम साबनिया की पत्नी सूरतगढ़ में पार्षद है।-यह आरोप लगाया गया है कि अनुसंधान अधिकारी रिछपालसिंह चारण ने इनको बचाने के लिए झूठे साक्ष्य गढ़े और सही तथ्यों को नष्ट किया छिपाया। पीडि़ता ने जब यह आवेदन पुलिस में दिया तब उसके वकील हरचंदसिंह सिद्धु भी साथ थे।
    सिपाही रोहताश ने पीडि़ता से ब्याह किया और बनवारीलाल तथा ओम साबनिया ने यह ब्याह करवाया था। पुलिस इसके लिए इंकार कर रही है, मगर रोहताश के साथ पीडि़ता के ब्याह के बाद के फोटो हैं। एक फोटो पाठकों के लिए यहां दिया जा रहा है। इसमें पहचान को प्रदर्शित नहीं किया जा सकता इसलिए फोटो पर आँखों पर रबड़ का इस्तेमाल किया गया है।
--------------------------

रविवार, 1 जुलाई 2012

पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल यौनशोषण मामला: पुलिस की संपूर्ण अंतिम रिपोर्ट-खास खबर- करणीदानसिंह राजपूत-

पुलिस ने करीब साढ़े अठारह महीना के अनुसंधान में निष्कर्ष निकाला कि पीडि़ता के कब्जे का पट्टा नहीं बनाने व एक ठेकेदार फर्म का भुगतान रोकने की रंजिश से प्रकरण दर्ज कराया गया:
 पुलिस ने लिखा है कि पत्रकार मालचंद जैन व एडवोकेट विष्णु शर्मा दौराने अनुसंधान पीडि़ता की सहायता करते रहे।
 एक मोबाईल सिम रायांवाली की निकली जिससे पीडि़ता को कॉल होती रही लेकिन पुलिस ने यह मालूम नहीं किया कि वह किसने जारी करवाई थी।
सूरतगढ़, 1 जुलाई  2012.पालिका अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल,पार्षद पति ओम साबनिया व सिपाही रोहताश पर अनुसूचित बाजीगर महिला से बलात्कार करने, यौन शोषण करने, मारपीट करने,गर्भपात करवाने,शिव मंदिर में सिपाही को कुंवारा बतलाकर ब्याह करवाने का मामला चर्चित रहा है।
अदालत के आदेश पर 7 अक्टूबर 2010 में मामला दर्ज हुआ। पीडि़ता 3 बार मुख्यमंत्री से मिली। कुछ दिन पहले पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट बना कर अदालत में प्रस्तुत कर दी। पुलिस ने अंतिम रिपोर्ट में पीडि़ता के लिए चरित्रहीन होने के शब्द इस्तेमाल किए हैं, जबकि किसी घटना व प्रकरण का उल्लेख नहीं किया जिनसे यह साबित होता हो। एक सवाल है कि महिला बुरे चरित्र की रही थी तो पुलिस उप अधीक्षक के घर पर झाडू पोंछा करने के लिए कैसे रखी गई थी? पीडि़ता की सहायता करना अपराध नहीं है, मगर पुलिस ने पत्रकार मालचंद जैन व एडवोकेट विष्णु का नाम इस तरह से उल्लेख किया है। अनेक सवाल इस अंतिम रिपोर्ट पर हैं,लेकिन अभी इस रिपोर्ट को पढ़ें।  इस पूरी रिपोर्ट को यहां प्रस्तुत कर रहे हैं। पीडि़ता के वकील पूर्व विधायक हरचंदसिंह सिद्धु ने कहा कि पुलिस की जांच का तरीका इस तरह का रहा है कि पीडि़ता को किसी तरह से झूठा साबित किया जाए। पुलिस की अंतिम रिपोर्ट में यह आभास हो रहा है। सिद्धु ने कहा कि अदालत में पुलिस की अंतिम रिपोर्ट को चुनौती दी जाएगी और उसे मंजूर नहीं करने का निवेदन अदालत से किया जाएगा। सिद्धु ने कहा कि अनेक बिंदु हैं जो पुलिस की जांच को सही नहीं होना साबित करते हैं, तथा अनेक तथ्य हैं जो पीडि़ता के आरोपों की पुष्टि करते हैं, जिन्हें अदालत के समक्ष पेश किया जाएगा। अदालत में इसकी तारीख 30 अगस्त  2012 है।




पुलिस की फाईनल रिपोर्ट से राहत में बनवारीलाल,ओम साबनिया और रोहिताश


पीडि़ता के वकील हरचंदसिंह सिद्धु पूर्व विधायक

---------------------------------

सोमवार, 28 मई 2012

कीड़ा नगरी पर आवास दुकान:हर समय संकट में घिरे होने की आशंका-खास खबर करणीदानसिंह राजपूत-


सूरतगढ़, कीड़ा नगरी उस जगह को कहा जाता है जहां पर धरती में लाखों कीड़े रहते हैं। कीड़ा नगरी को नष्ट करना या वहां मकान दुकान आदि बनाना भी कीड़ा नगरी को नष्ट करने में ही माना जाता है। कीड़ा नगरी पर मकान अथवा दुकान या किसी भी प्रकार का अन्य निर्माण करना मतलब वहां लाखों कीड़ों की मौत। संभव है कि इतने कीड़ों के जीवन को बचाने के लिए यह मान्यता गढ़ी गई हो कि उजाडऩे वाला व्यक्ति और उसका परिवार संकट में घिरे हुए रहेंगे। कीड़ा नगरी को सींचने का कर्म वर्षों से हो रहा है। कीड़ा नगरी स्थल पर आटा,दलिया, या अन्य अन्नाज व शक्कर कीड़ों को खाने के लिए डालने की परंपरा आज भी है।
कीड़ा नगरी को उजाडऩे पर संकट की बात को सही अथवा गलत माना जाए या नहीं, लेकिन आशंका पर सोचा जाए तो सब कुछ सामने आता है कि कीड़ा नगरी पर आवास या व्यावसायिक निर्माण कराने वाले परेशान रहे हैं या फिर परिवार जन असामयिक मौतों जैसे भयानक खतरों को झेलते रहे हैं। जीवन पर और सम्पति पर इस प्रकार के उतार चढ़ाव आए हैं कि करोड़ों की सम्पति जीर्ण शीर्ण हो रही है या उनके दुबारा निर्माण नहीं हो रहे हैं।
एसबीबीजे के पीछे का इलाका जहां पर मोदी सिनेमा होता था। वहां पर बड़े बड़े नोहरे इस समय खाली पड़े हैं और उनमें घास फूस ऊग रहे हैं। मालिक चाहते हुए भी दुबारा निर्माण नहीं करवा पा रहा।
---------------------------------------

रविवार, 1 अप्रैल 2012

गंगाजल मील के नाम से अतिक्रमण आखिर किसने दर्ज करवाए और क्यों करवाए? :खास रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत:


मील उस समय तो विधायक भी नहीं थे-
सूरतगढ़ में गुजर रहे राष्ट्रीय उच्च मार्ग न.15 पर मील के नाम की जगह पर अब कौन काबिज है? मील ने अतिक्रमण की जांच करवाने की मांग की है-
सूरतगढ़, 1 अप्रेल 2012. राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 पर दोनों ओर अतिक्रमणों की दो सूचियां बनी थी जिनमें मील के अलावा अनेक प्रभावशाली लोगों व राजनीतिज्ञों के नाम से करोड़ों रूपयों की जमीन पर अतिक्रमण बताए गए थे। एक पत्रकार कृष्ण सोनी आजाद की लोकायुक्त को की गई शिकायत पर यह जांच हुई थी। इसमें राजस्व तहसीलदार की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई जिसमें उच्च मार्ग के इंजीनियर, पालिका के इंजीनियर आदि व पटवारी आदि थे।
इस जांच में उच्च मार्ग की परिधि को सीमा माना गया व उसके बीच में से नाप लिया गया था। यह सूची 2007 में बनी थी। उस समय गंगाजल मील विधायक नहीं थे, मगर सूरतगढ़ में निवास शुरू हो चुका था।
इस सूची के बारे में ईओ मनीराम सुथार ने यह कहा था कि वे किसी भी रूप में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही करके कोई पंगा नहीं लेना चाहते।
यह भी कहा था कि सूची में जिन लोगों के नाम आए हैं उनको पालिका की ओर से नोटिस जारी कर पूछा गया है कि वे किस अधिकार से इस भूमि पर काबिज हैं। ईओ ने बताया था कि कुछ लोगों ने जवाब दिया है, लेकिन दस्तावेज केवल दो जनों ने ही दिए हैं।
अब सवाल यह पैदा हो रहे हैं
1. गंगाजल मील का नाम सूची में था तो नोटिस उनके नाम से आवश्य जारी हुआ होगा?
उस नोटिस का उत्तर क्या आया था? या उत्तर आया नहीं था। इसके अलावा अन्य लोगों के क्या उत्तर आए थे?
2. गंगाजल मील के नाम से जिन स्थानों पर अतिक्रमण बतलाए गए थे, उन स्थानों पर वर्तमान में कौन काबिज हैं? ये लोग कब से काबिज हैं?
3.इस सूची के समाचार आने लगे तब गंगाल मील विधायक बन चुके थे। नगरपालिका कर्मचारियों को मील साहेब के सामने उसी समय यह तथ्य सामने लाए जाने चाहिए थे कि आपके नाम से अतिक्रमण दर्ज हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मील ने चुनाव जीतने के बाद और नगरपालिका में बनवारीलाल का पहला बोर्ड बनने के बाद स्वयं ने घोषणा की थी कि वे अतिक्रमण के खिलाफ हैं। इतना होते हुए भी नगरपालिका ने उनको यह क्यों नहीं बतलाया? यह मामला केवल गंगाजल मील का नहीं अन्य लोगों का भी है? कई लोगों ने तो पालिका में यह लिख कर दिया कि किराएदारों ने अतिक्रमणों पर आने नाम सर्वे में लिखवा दिए थे। कितना महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है कि सरकारी जमीन को लोगों ने अतिक्रमण करके आगे किराए पर भी चढ़ा दिया और जमीन की मालिक नगरपालिका सोई हुई रही।
4. इयहां पर एक और महत्वपूर्ण सवाल मील पर ही पैदा हो रहा है। मील साहेब ने अपने अतिक्रमण के आरोप को असत्य बतलाते हुए जांच की मांग की है। लेकिन उन्होंने अतिक्रमणों को तुरंत तुड़वाने का नहीं लिखा। अगर अतिक्रमणों को तुड़वाने का लिखा होता तो वह पत्र सराहा जाता और उससे मील की शक्ति ही बनती। राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर केवल आवासीय अतिक्रमण नहीं हैं जिनके पट्टे जारी किए जा सकें, इंदिरा सर्किल से मानकसर तक करोडों रूपयों के व्यावसायिक शो रूम बने हुए हैं। व्यावसायिक जगह का नियमन करने का कोई प्रावधान नहीं है। इसके अलावा जिनके नाम से अतिक्रमण दिखलाए गए वे लोग वहां रहते भी नहीं थे। उनकी रिहायश अन्यत्र रही और केवल चार दीवारियों को सर्वे में अतिक्रमण माना गया।
इसमें सबसे महत्वपूर्ण वह रिपोर्ट है आखिर किस तरह से अतिक्रमण माने गए या लिखे गए? वह रिपोर्ट कोई एक दो पेज की नहीं होगी। इसका पूरा खुलासा होना चाहिए।

गुरुवार, 1 मार्च 2012

सूरतगढ़:राष्ट्रीय उच्च मार्ग के 500-600 करोड़ के अतिक्रमणों की सूची में से राजनीतिज्ञों प्रभावशाली लोगों के नाम किसने हटाए?-करणीदानसिंह राजपूत: करणी की बात- 16:


138 की सूची में से 103 नाम हटा दिए गए: अब 34 लोगों के नाम से 7 दिन का नोटिस जारी किया गया:

सूरतगढ़ में से गुजरता हुआ राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 प्रभावशाली पैसे वालों व राजनीतिज्ञों के लिए हीरों की खान साबित हुआ है तथा यहां पर बहुत बड़े बड़े व्यावसायिक कॉम्पलेक्स बना लिए गए। प्रत्येक कॉम्लेक्स की कीमत एक दो करोड़ से चार पांच करोड़ तक हैं। यहां पालिका की नीलामी में छोटे से छोटी दुकानों के भूखंड बीस से पचीस लाख तक हैं। उच्च मार्ग पर एक भूखंड करीब अस्सी लाख से एक करोड़ तक का है। अतिक्रमण कारियों ने दुगने तिगुने से लेकर दस पन्द्रह गुना तक बड़े बड़े भूखंडों पर शापिंग कॉम्पलेक्स बना रखे हैं। चार दीवारियां बना रखी हैं। इंदिरा सर्किैल से मानकसर तक उच्च मार्ग पर कुल 138 अतिक्रमणों की सूची बनी थी। लोकायुक्त को पत्रकार कृष्ण सोनी आजाद की शिकायत के बाद यह सूची बनाई गई थी। राजस्व तहसीलदार की अध्यक्षता में एक समिति बनाई गई थी जिसने यह सूची तैयार करके नगरपालिका को सौंपी थी। संभागीय आयुक्त को निर्देश था कि अतिक्रमण हटाने के बाद लोकायुक्त को सुचित किया जाए। इस सूची पर नगरपालिका ने सभी को नोटिस दिया था कि आप संबंधित भूखंड पर किस अधिकार से काबिज हैं। उसका जवाब सात आठ ने दिया और दो तीन ने दस्तावेजी सबूत दिए। इसके बाद अतिक्रमण हटाने के बजाय पत्रावली ठंडे बस्ते में डाल दी गई। मनीराम सुथार ईओ के समय मैंने इस फाईल को देखा था। उस समय ईओ ने कहा था कि वह अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरू कर कोई आफत नहीं लेना चाहता। सेवानिवृति होने वाली है। इसके बाद वे सेवानिवृति पर चले गए।
    आश्चर्य अब सामने आता है कि उस समय की सूची जिस पर जिला कलक्टर को स्वायत शासन निदेशालय से भी अतिक्रमण हटा कर पालना रिपोर्ट भिजवाने का आदेश था, रोक दी गई। मतलब की उसकी पालना ही नहीं हुई। अचानक अब सामने आया कि केवल 35 लोगों कूे अतिक्रमण हटाए जाऐंगे। उनमें से भी एक का पट्टा अवैध बना दिया गया है जिसको नोटिस तक नहीं दिया गया है। इस सूची में से 103 लोगों के नाम किसने हटाए, कब हटाए, किसके आदेश से हटाए? सब गोल माल हो गया है। सूरतगढ़ ही नहीं राजस्थान के इतिहास में सबसे बड़ा घोटाला। इसमें साफ है कि सत्ताधरियों का खुला खेल हुआ है।
    इतने बड़े घोटाले में कांग्रेस के विधायक तक का नाम सूची में था जो गायब है। इसके अलावा अनेक कांग्रेस वालों के नाम भी थे। भाजपा इसलिए नहीं बोल रही है कि उसके बड़े बड़े लोगों के नाम भी शामिल हैं।
पूरी सूची में हुए घोटाले के कारण हो सकता है कि मामला कोई नया रंग लाए। सूरतगढ़ से केवल 27 किलोमीटर दूरी पर पीलीबंगा कस्बा हे जहां मास्टर प्लान को नष्ट कर हुए अतिक्रमणों पर जेसीबी चलाई गई अतिक्रमणों को साफ कर दिया गया लेकिन यहां पर अतिक्रमण हटाने के बजाए सूची में से नाम हटा दिए गए।
हालांकि यह घोटाला दबने वाला नहीं है। हमने एक लेख में पहले लिखा था कि सन 2012 सूरतगढ़ के लिए करड़ा होगा तब लोगों ने इसे नहीं समझा। लेकिन इस घोटोले में सूची से हटाए गए भी आगे बच नहीं पाऐंगे।

करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थान सरकार द्वारा अधिस्वीकृत स्वतंत्र पत्रकार,
मोबा. 94143 81356
दिनांक- 1 मार्च 2012.
--------------------------------

देव वृक्ष पीपल की हाथ जोड़ वंदना करते हुए नन्ही सी गिलहरी:शब्द चित्र- करणीदानसिंह राजपूत-


यह चित्र 29 फरवरी 2012 शाम को जीनगर धर्मशाला में लिया गया जब वहां के गणेश मंदिर के सामने पीपल वृक्ष के आगे नमन करती हुई गिलहरी की यह भाव मुद्रा दिखाई दी थी।
----------------------------------------

शनिवार, 25 फ़रवरी 2012

सूरतगढ़:लक्ष्मीनारायण मंदिर नई धान मंडी: दर्शन:रपट व फोटो- करणीदानसिंह राजपूत:








लक्ष्मी नारायण,शिव परिवार और हनुमन्त की भव्य प्रतिमाएं:

लक्ष्मीनारायण का यह भव्य मंदिर राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 पर सूरतगढ़ की नई धानमंडी में बना है जिसका शुभारंभ 24 फरवरी 2012 को हुआ है।
नई धान मंडी में सुंदर बगीचे के बीच में बने इस मंदिर और इसमें स्थापित प्रतिमाओं की भव्यता मन मस्तिष्क में दिव्य रस घोलती है आनन्दित करती है।
मंदिर में प्रवेश करते ही सामने लक्ष्मी और नारायण की प्रतिमाएं हैं। बाईं और हनुमन्त की प्रतिमा है। दाईं ओर शिव परिवार की प्रतिमाएं हैं जिनमें भगवान शिव नन्दी पर सवार हैं तो साथ में शेर पर पार्वती सवार हैं और उनके बीच में बिराज रहे हैं पुत्र गणेश। इसी जगह पर शिव लिंग और नन्दी की प्रतिमाएं भी हैं।
यह मंदिर व्यापार मंडल की ओर से बनवाया गया है।
---------------------------------

शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

बाजीगर महिला से बलात्कार:पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल का मामला पत्रकार वार्ता में प्रभारी मंत्री विनोदकुमार के सामने आया:रपट करणीदानसिंह राजपूत:

पत्रकार सत्यपाल युवक ने कहा क्यों नहीं लगाई जा रही एफआर जब विधायक गंगाजल मील भी मामला झूठा बतला रहे हैं।
 विधायक जी पत्रकारों से तो कह रहे हैं वे एसपी को भी लिखें।
सूरतगढ़, 24 फरवरी, 2012.श्रीगंगानगर जिले के प्रभारी मंत्री विनोदकुमार की पत्रकार वार्ता  23 फरवरी को  हुई तब उसके समापन मोड़ पर पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल पर दर्ज बलात्कार के प्रकरण का मामला पत्रकार सत्यपाल युवक ने उठा दिया। सत्यपाल युवक वरिष्ठ पत्रकार हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से अध्यक्षजी का खून कम हो गया है और विधायक गंगाजल मील इस मामले को झूठा और साजिशपूर्ण बतला रहे हैं तो इस पर एफआर क्यों नहीं लगवाई जा रही। अध्यक्षजी को इस प्रकरण में क्लीनचिट दिलवाई जाए। देरी क्यों की जा रही है? पुलिस इसका निस्तारण क्यों नहीं कर रही है? प्रभारी मंत्री तो नहीं बोले, मगर विधायक गंगाजल मील ने पत्रकारों को एक बार पुन: कहा कि मामला झूठा है और साजिश है। प्रभारी मंत्री की इस प्रेस कान्फें्रस में पालिकाध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल भी उपस्थित थे।
विधायक गंगाजल मील इस मामले को पहले भी झूठा और साजिश बतला चुके हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर एसपी को इस बाबत क्यों नहीं कहा जा रहा और क्यों नहीं लिखा जा रहा? कानूनी पेचीदगी में सीधा क्लीनचिट का नहीं लिखा जा सकता्र मगर विधायक जी की पार्टी के हैं इसलिए उन पर तो कोई रोक नहीं है कि वे क्लीनचिट की मांग ना करें। वे इस मामले में जल्दी से फाईल के निस्तारण का लैटर तो एसपी को लिख ही सकते हैं। किसी मामले का जल्दी निस्तारण किए जाने की मांग विधायक द्वारा करना तो गलत नहीं बताया जा सकता। किसी मामले में देरी करना भी तो अन्याय है।
विधायक मील ने इससे पहले तीन दिसम्बर 2011 को सुबह 11-28 बजे मोबाईल फोन पर यह महत्वपूर्ण जानकारी दी कि बनवारीलाल निर्दाेष है। मील ने स्वयं कॉल करके उक्त जानकारी दी थी। उस समय भी विधायकजी से कहा गया कि बनवारीलाल निर्दोष है तो इस मामले का निस्तारण जल्दी से करवाएं। यह मामला रूका सा पड़ा है। बनवारीलाल निर्दाेष है तो फिर पुलिस ने बनवारीलाल पर तलवार क्यों लटका रखी है? यह तलवार उसके सिर के ऊपर से जल्दी से जल्दी हटाई जानी चाहिए। जिला पुलिस अधीक्षक से कह कर जांच का परिणाम आऊट करवाएं।
मील साहेब ने कहा कि वे इस बाबत एसपी से बात करेंगे और आपके सामने बात कर लेंगे।
यह प्रकरण अदालत के आदेश पर सूरतगढ़ सिटी थाने में 7 अक्टूबर 2010 को दर्ज हुआ था और उस समय भी मील साहेब  ने 12 अक्टूबर को प्रेस कान्फें्रस में बनवारीलाल मेघवाल को निर्दोष बताया था। मील ने कहा था कि बनवारीलाल को तो फंसाया गया है।
अब भी यही बात मील साहेब ने फिर से कही है।
पीडि़ता ने खुद ने ही अदालत में दायर किए अपने इस्तगासे में निष्पक्ष जांच का लिखा था। इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग बार बार दोहराई जाती रही है। भाजपा ने भी निष्पक्ष जांच करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था, और 3 जनवरी 2011 को धरना उठाने के बाद से उसके नेता चुप हैं तथा आगे कोई मांग नहीं कर रहे हैं। ऐसी हालत में बनवारीलाल निर्दाेष है तो सिर पर तलवार लटकाए रखना भी गलत है। विधायक जी पत्रकारों को जो कह रहे हैं वह एसपी से कहें तो मामला निस्तारित होने में जल्दी होगी।
-----------------------------------------------------------------------

बुधवार, 8 फ़रवरी 2012

देह शोषण जयपुर मुकद्दमें में 17 आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग प्रदर्शन:विशेष खबर-करणीदानसिंह राजपूत:











सूरतगढ़ में बिश्रोई महासभा का प्रदर्शन:उपखंड अधिकारी को मुख्यमंत्री के नाम चेतावनी का ज्ञापन सौंपा:भंवरी प्रकरण में वृद्धा अमरीदेवी को सीबीआई की प्रताडऩा का भी विरोध:
सूरतगढ़,8 फरवरी 2012. देह शोषण के जयपुर के मामले में राजस्थान की राजनीति में भूचाल आया हुआ है जो थमने का नाम नहीं ले रहा है। श्रीगंगानगर हनुमानगढ़ व जयपुर में आक्रोष फैल रहा है कि वैशालीनगर थाना जयपुर में 21 नवम्बर सन 2011 को पीडिता ने प्रकरण संख्या 679 दर्ज करवाया जिसमें 17 लोगों के नाम है उनको आजतक गिरफ्तार नहीं किया गया है। बिश्रोई महासभा ने संगरिया में 27 जनवरी को प्रदर्शन किया और उसके बाद रायसिंहनगर, हनुमानगढ़ श्रीगंगानगर में एकजुटता दिखाते हुए आठ फरवरी को सूरतगढ़ में प्रदर्शन करते हुए उपखंड अधिकारी को ज्ञापन दिया।
    भाजपा के एक कार्यकर्ता ओमप्रकाश गोदारा की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने उसका देह शोषण करवाया जिसमें उसकी ओर से दायर प्रकरण में सतरह नाम हैं जिनमें भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी हैं। एक आरोपी को तो मुख्यमंत्री के घर व कार्यालय तक आना जाना बताया जा रहा है।
    सूरतगढ़ के प्रदर्शन में अशोक गहलोत मुर्दाबाद और अशोक गहलोत तेरी कब्र खुदेगी नारे लगते हुए बिश्रोई समाज के लोग बाजारों में से होते हुए उपखंड कार्यालय पहुंचे। उपखंड अधिकारी मदनलाल सिहाग को ज्ञापन दिए गए। माकपा नेता हेतराम बिश्रोई और संघर्ष समिति के सचिव इन्द्रजीत बिश्रोई ने उपखंड अधिकारी को ज्ञापन देने के बाद कहा कि अशोक गहलोत सरकार के ईशारे पर एक तरफ तो भंवरी कांड में लोगों को प्रताडि़त किया जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर सतरह आरोपियों के दर्ज मामले में कोई कार्यवाही नहीं हो रही है। ज्ञापन में चेतावनी दी गई है कि आंदोलन के लिए विवश होना पड़ा तो उसकी समस्त जिम्मेवारी राज्य सरकार की होगी।
आरोपों में घिरे पति ओमप्रकाश गोदारा ने साफ शब्दों में खंडन कर दिया था कि ना तो पत्नी के अश£ील क्लिप लिए और ना ही किसी के पास में यौन शोषण करवाया।
  निहालचंद ने 22 नवम्बर 2011 को पूछने पर बताया -आरोपी किसी सीडी के होने का प्रचारित कर रहे हैं। अगर कोई सीडी है तो मीडिया से सामने ले आए। दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा। मैंने इस प्रकार के घटिया आरोप वाला कोई काम आज तक नहीं किया जिससे मेरी व पार्टी की छवि पर किसी प्रकार की आंच आए और कोई दाग लगे। जयपुर में बैठे कांग्रेस के एक वर्ग के नेता ये करवा रहे हैं और यह सब राजनैतिक द्वेषता से किया जा रहा है। ओमप्रकाश पार्टी का कार्यकर्ता है सो उसकी शादी में जरूर गया था लेकिन उसके बाद कभी उसके जयपुर आवास पर नहीं गया। उसके साथ कोई मोबाईल कॉल से बात भी नहीं हुई। मेरे और उनके मोबाइलों की कॉल डिटेल निकलवा कर जांच की जा सकती है।राधेराम से भी 22 नवम्बर 2011 को पूछने पर बताया - यह आरोप तो मंदिर में बकरा काटने जैसा गंभीर दोष मंढ़ा जा रहा है। आरोप झूठा है तथा कुछ लोग अपनी राजनैतिक गोटियां इधर उधर करने के लिए ये सब करने में लगे हैं, लेकिन इसकी सच्चाई जल्दी ही सामने आ जाएगी। 

राधेराम सूरतगढ़ तहसील में अमरपुराजाटान के निवासी हैं जिन्होंने जाट महासभा के कुछ नेताओं को चुनौती देते हुए करीब ढ़ाई साल पहले अलग झंडा उठा लिया था। उस अलग गठन कर लेने से चर्चित हो गए थे और पहले के कुछ  नेता अपने वर्चस्व पर चोट मानते हुए नाराज हुए। जिसमें वे लोग शामिल हैं जिन पर अभी इशारा हो रहा।   
    राजस्थान में अशोक गहलोत की सरकार के कार्यकाल में महिलाओं पर अत्याचार के आरोपों और पुलिस मुकद्दमों की बढ़ती संख्या से सरकार की छवि प्रभावित हो रही थी कि भंवरी नर्स की सीडी प्रकरण में आए भूचाल में सरकार की किरकिरी हुई व मंत्रिमंडल में परिवर्तन करना पड़ा। कुछ मंत्रियों को हटाया गया व उससे एक जाति वर्ग के लोग मुख्यमंत्री से नाराज भी हुए। अभी वह अशांत वातावरण थमा नहीं है कि,जयपुर के इस प्रकरण का तूफान बढ़ता जा रहा है।  इस मामले में भाजपा के नेताओं पर आरोप है लेकिन भाजपा के कुछ नेताओं ने इस मामले के उठते ही जोरदार खंडन कर दिया था,तथा आरोप लगाया था कि कांग्रेस की किरकिरी के बाद यह षडय़ंत्र हो रहा है। 

हालांकि इस पूरे प्रकरण की तस्वीर साफ  नहीं हो पाई है। भाजपा के एक कार्यकर्ता ओमप्रकाश गोदारा की पत्नी ने आरोप लगाया है कि उसके पति ने उसका देह शोषण करवाया जिसमें उसकी ओर से दायर प्रकरण में सतरह नाम हैं जिनमें भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के नाम भी उछाले जा रहे हैं।
    इस प्रकरण में जो भी सच्चाई है वो जनता के सामने आनी ही चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर है कि वे इस समय गृहमंत्री भी हैं। यह जांच आम जनता तो करवा नहीं सकती। सरकार ही करवा सकती है,तब इसको तेज गति से करवा कर दूध का दूध पानी का पानी सामने लाने में किस बात की हिचक हो रही है?
अशोक गहलोत की सरकार शुद्धता का अभियान चलाती रही है, जिसे शुद्ध के लिए युद्ध का नारा दिया गया। इस मामले में यह नारा क्यों नहीं लगाया जा रहा?
यहां पर एक और बहु चर्चित प्रकरण का उल्लेख करना उचित रहेगा। सूरतगढ़ में अनुसूचित  बाजीगर जाति की एक औरत ने कांग्रेस के नगरपालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष बनवारीलाल मेघवाल पर यौन शोषण के आरोप में मामला दर्ज करवा रखा है। उक्त पीडि़ता तीन बार अशोक जी के आवास पर मिल आई। फरियाद कर आई। कांग्रेस के विधायक गंगाजल मील मामला दर्ज होने से ही बनवारीलाल को निर्दाेष बता रहे हैं।

यह ब्लॉग खोजें