रविवार, 9 जुलाई 2017

वसुंधरा का राजस्थान में 2018 के चुनाव का नारा: होगी नैया पार!



राजस्थान में विधानसभा चुनाव अगले साल है। भाजपा ने नया नारा दिया है, हर बूथ भाजपा को, हर वोट भाजपा का। साथ ही तीन सी के साथ एक सी और जोड़ा है। इसका मतलब है कांग्रेस को हटाना। 

जयपुर में इंद्रलोक सभागार में  भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक हुई। इस बैठक में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर रणनीति पर विचार हुआ। दिनभर चले इस कार्यक्रम में मुख्य फोकस कांग्रेस मुक्त राजस्थान रहा। समापन सत्र में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने कहा कि प्रदेश में तीन ‘सी’ के साथ काम करके चौथे ‘सी’ यानि काँग्रेस को हटाना है। ये तीन ‘‘सी’’ है कनेक्शन (यानि आपसी जुड़ाव), को-ऑपरेशन (यानि सहयोग) और कनवेन्स (यानि समझाईश) यही मूल मंत्र है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आम जन तक पहुंचने का आह्वान किया। राजे ने इस मौके पर ‘हर बूथ भाजपा का, हर वोट भाजपा का नारा दिया। 

इससे पहले भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी ने कहा कि जनहित के लिए काम करने वाली सरकार जनसाधारण के दिल में जगह बना चुकी है और सभी को यह स्वीकार है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के कुप्रचार को सुप्रचार में बदलना ही भाजपा कार्यकर्ता का लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस पर दुष्प्रचार का आरोप लगाते इन्हें साबित करने की चुनौति दी।  भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने कहा कि विपक्षी नेताविहीन, मुद्दाविहीन एवं दिशाविहीन है। केन्द्र एवं राज्य सरकार की योजनाओं का जनता में सुप्रचार से मुद्दाविहीन व दिशाविहीन विपक्षी जीरो पर आ जाएगा।


शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

फर्जी प्रमाणपत्र से प्राप्त नौकरी कानून की नजरों में वैध नहीं- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार   6-7-2017 को दिए फैसले में कहा है कि फर्जी जाति प्रमाणपत्र के आधार पर आरक्षण लेकर ली गई सरकारी नौकरी या दाखिले को कानून की नजरों में वैध नहीं ठहराया जा सकता। 

मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर और न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया। इसमें कहा गया था कि यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से नौकरी कर रहा है और बाद में उसका प्रमाणपत्र फर्जी पाया जाता है तो उसे सेवा में बने रहने की अनुमति दी जा सकती है। 

महाराष्ट्र में जाति प्रमाण पत्र बनवाकर सरकारी नौकरी लेने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर किसी कर्मी का जाति प्रमाणपत्र अवैध पाया गया, तो उसकी सरकारी नौकरी चली जाएगी। चाहे उसने 20 साल की सेवा क्यों न की हो। उसके अवैध प्रमाणपत्र पर शिक्षा और डिग्री भी रद्द हो जाएगी।

( टिप्पणी-फर्जीवाड़ा किसी भी स्तर का हो और चाहे कितने भी साल बीत जाए मगर जब भी पकड़ा जाता है तब नौकरी जाती है और फर्जीवाड़ा मुकदमे में जेल मिलती है अक्सर लोग फर्जीवाड़ा करते समय यही सोचते हैं कि किसी को भी मालूम नहीं पड़ेगा और वह नौकरी करते जाते हैं। बचने के लिए नाम बदल कर दूसरा नाम धारण कर लेते हैं लेकिन यह कटु सत्य है कि 20 -25 साल बाद भी फर्जीवाड़ा पकड़ा जा सकता है।चाहे नौकरी करने वाला ऊंचे पद पर बैठ गया हो चाहे एसडीएम बन जाए चाहे कलेक्टर बन जाए चाहे पुलिस का अधिकारी बन जाए। चाहे नाम बदल ले।वह कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता।)


आनंदपाल की पत्नी ने एनकाउंटर फर्जी होने के आरोप में FIR दर्ज करने का आवेदन थाने में दिया

- करणीदानसिंह राजपूत-

 आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर में हत्या किए जाने के आरोप में उस- करणीदानसिंह राजपूत-

 आनंदपाल सिंह के एनकाउंटर में हत्या किए जाने के आरोप में उसकी पत्नी ने राजस्थान और हरियाणा पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध रतनगढ़ पुलिस थाने में FIR दर्द करने का आवेदन पत्र दिया है। उसमें आरोप लगाया गया है कि आनंदपाल सिंह के सरेंडर किए जाने के बाद उसकी हत्या की गई। उसे राजनीतिक कुचक्र का शिकार बनाया गया।

पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम लिखे गए हैं तथा यह लिखा गया है कि अनुसंधान में जिन राजनीतिज्ञों के नाम हैं उन्हें भी अपराधियों में जोड़ दिया जाए यह आवेदन पत्र 6 जुलाई को पुलिस थाने में दिया गया।की पत्नी ने राजस्थान और हरियाणा पुलिस अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध रतनगढ़ पुलिस थाने में FIR दर्द करने का आवेदन पत्र दिया है। उसमें आरोप लगाया गया है कि आनंदपाल सिंह के सरेंडर किए जाने के बाद उसकी हत्या की गई। उसे राजनीतिक कुचक्र का शिकार बनाया गया।

पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के नाम लिखे गए हैं तथा यह लिखा गया है कि अनुसंधान में जिन राजनीतिज्ञों के नाम हैं उन्हें भी अपराधियों में जोड़ दिया जाए।यह आवेदन पत्र 6 जुलाई को पुलिस थाने में दिया गया।



बुधवार, 5 जुलाई 2017

ग्राम सचिव ₹10 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया



भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की टीम ने 5 जुलाई को ग्राम सचिव राजकुमार चौहान को 10 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। एसीबी के महानिरीक्षक वीके सिंह के अनुसार गिरफ्तार आरोपी ग्राम सचिव  ग्राम पंचायत घवा, तहसील लूणी, जिला जोधपुर में पदस्थापित है। जोधपुर निवासी परिवादी श्रवन दास ने एसीबी में यह शिकायत दर्ज करवाई थी कि उसने मकान का पट्टा बनाने के लिए ग्राम पंचायत घवा के आॅफिस में आवेदन किया था। ग्राम सचिव राजकुमार चौहान ने पट्टा बनाने की एवज में श्रवनदास से 10 हजार रुपए रिश्वत मांगी। 

जोधपुर के एसीबी में पुलिस निरीक्षक गोविंद सिंह चारण द्वारा शिकायत का सत्यापन किया गया। उसके बाद आज ग्राम पंचायत घवा के ग्राम सचिव राजकुमार चौहान के पास परिवादी श्रवनदास को रिश्वत की रकम लेकर भेजा।  एसीबी ने ग्राम सचिव राजकुमार को  10 हजार रुपए रिश्वत लेते ही रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। 


मंगलवार, 4 जुलाई 2017

सूरतगढ रेलवे स्टेशन: झुलसाती गर्मी और लू में सन्नाटा:



फोटो- करणीदानसिंह राजपूत-
दि.4-7-2017.
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राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ़ में राजस्थानी भाषा विषय शुरू करने की मांग






सूरतगढ 4 जुलाई  2017.

अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता समिति ने उच्च शिक्षा मंत्री राजस्थान सरकार के नाम राजकीय महाविद्यालय के प्राचार्य  को एक ज्ञापन सौंपा।

 ज्ञापन में  राजकीय महाविद्यालय सूरतगढ में बीए प्रथम वर्ष से राजस्थानी साहित्य पाठयक्रम शुरू करने की मांग की। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि राजस्थानी साहित्य की समृद्धता किसी से छुपी नहीं है। लेकिन राजकीय  महाविद्यालय सूरतगढ़ में यह विषय नहीं होने से प्रतिवर्ष सैकड़ों छात्र इस महान भाषा के साहित्य के अध्ययन से वंचित रह जाते हैं।

 सूरतगढ़ उपखण्ड क्षेत्र के पांच उच्च माध्यमिक विद्यालयों जानकीदासवाला, मालेर, बख्तावरपुरा, सरदारपुरा खर्था, 12 जीबी में राजस्थानी साहित्य विषय का अध्ययन करने वाले सैकड़ों छात्र बीए में राजस्थानी साहित्य में अध्ययन करना चाहते है। इन छात्रों की भावनाओं को समझते हुए राजकीय महाविद्यालय में बीए से राजस्थानी साहित्य का अध्ययन शुरू किया जाए। मान्यता समिति ने यह भी उल्लेखित किया है कि मान्यता समिति की ओर से यह विषय शुरू करवाए जाने पर जब तक व्याख्याता की नियुक्ति नहीं हो जाती तबतक समिति अपने स्तर पर निःशुल्क व्याख्याता मुहैया करवाएगी। ज्ञापन देने वालों में मान्यता समिति जिलाध्यक्ष परसराम भाटिया, जिला परिषद सदस्य डूंगरराम गेदर, बसपा नगर अध्यक्ष पवन सोनी, अमित कल्याणा, श्रवण सिंगाठिया, राजस्थानी साहित्यकार मनोजकुमार स्वामी, जसवंत फुलका, राजेन्द्र गेदर, रजविन्द्र सिंह, विनोद विश्नोई, सुरेन्द्र घोडे़ला, राजपाल झटवाल, राकेश मेघवाल, कुलदीप कुमावत,  मायड़ भाषा राजस्थानी लोककला रंगमच के अध्यक्ष ओमसाबणियां शामिल थे।



सहायक उपनिरीक्षक को रिश्वत लेते एसीबी ने पकड़ा

भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आज  एक सहायक उपनिरीक्षक (एएसआई) को पांच हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया। आरोपी ने रिश्वत अपने ही पुलिस थाना परिसर में ली। जहां एसीबी टीम ने उसे रंगे हाथों धरदबोचा। एसीबी के आईजी सचिन मित्तल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी एएसआई भवानी सिंह है। वह जयपुर ग्रामीण जिले के शाहपुरा थाने में पदस्थापित है। परिवादी ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवाई थी, कि उसने शाहपुरा थाने में सड़क दुर्घटना का मुकदमा दर्ज करवाया था। जिसमें आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और चालान पेश करने की एवज में आरोपी एएसआई भवानी सिंह ने परिवादी से पांच हजार रुपए की रिश्वत मांगी।

केस की जांच एएसआई भवानी सिंह के पास ही थी। काफी दबाव बनाने पर परिवादी ने एसीबी में शिकायत दर्ज करवा दी। सत्यापन होने के बाद जयपुर ग्रामीण एसीबी की टीम के प्रभारी एएसपी नरोत्तम वर्मा के नेतृत्व में गठित टीम ने जाल फैलाया। आज परिवादी रिश्वत की राशि लेकर शाहपुरा थाने पहुंचा। जहां पांच हजार रुपए रिश्वत लेते ही एसीबी ने एएसआई भवानी सिंह को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। एसीबी की टीम को पुलिस थाने में देखते ही वहां मौजूद पुलिसकर्मियों में अफरा—तफरी का माहौल पैदा हो गया।


राजस्थान की उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी पर पुलिस में मुकदमा दर्ज

राजस्थान की उच्च शिक्षा मंत्री और राजसमंद विधायक किरण माहेश्वरी के खिलाफ जिला एवं सत्र न्यायालय में दायर परिवाद के बाद राजसमंद के राजनगर थाने दर्ज हआ है।विधानसभा-2013 चुनाव में नाम निर्देशन पत्र में रही खामियों पर यह मामला दर्ज किया गया है। वर्ष 2013 से ही इस मामले का चुनौती देने वाले अधिवक्ता दिनेश खटीक के अनुसार विधानसभा चुनाव में किरण माहेश्वरी की ओर से पेश नाम निर्देशन पत्र पर पेश किए जाने की टिप्पणी तो थी, लेकिन स्वीकार करने की टिप्पणी नहीं लिखी गई थी। इस मामले में खटीक ने राज्य के उच्च न्यायालय में रिट दायर कर गई थी। उच्च न्यायालय ने उन्हें इसके लिए इलेक्शन पिटिशन दायर करने को कहा था।

खटीक के अनुसार जब इलेक्शन पिटिशन कोर्ट में विचाराधीन थी, इस दौरान दस्तावेजों में हेरफेर की गई। इस पर खटीक ने सूचना के अधिकार के तहत दस्तावेज निकलवाए। नाम निर्देशन पत्र में पेश किए गए दस्तावेजों में शपथ पत्र और शपथ प्रतिज्ञान शामिल थे, लेकिन आरटीआई के तहत मिले दस्तावेजो में यह गायब थे।

रविवार, 2 जुलाई 2017

आपातकाल लगाया तब कांग्रेस के सिद्धांत कहां चले गए थे- नायडू

गांधीनगर:2-7-2017. 

केंद्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने राष्ट्रपति चुनाव को सैद्धांतिक लड़ाई बताने वाली कांग्रेस से आज सवाल किए कि जब इंदिरा सरकार ने देश में आपातकाल लगाया था, उस वक्त उसके सिद्धांत कहां चले गए थे?


नायडू ने टेक्सटाइल इंडिया 2017 के समापन समारोह के बाद मीडिया कर्मियों के एक सवाल के जवाब में कहा कि कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रपति चुनाव को सामाजिक न्याय की सैद्धांतिक लड़ाई करार दिया है, जो महज राजनीतिक दुष्प्रचार है।


उन्होंने कहा कि कांग्रेस को यह  बताए कि जब उसकी सरकार ने देश में आपातकाल की घोषणा की थी, विपक्षी नेताओं को जेल के सींखचों में डाल दिया , मीडिया पर सेंसरशिप लगाया , खिलाफ में फैसला देने वाले  न्यायालय के एक न्यायाधीश की वरीयता की अनदेखी की थी और देश के लाखों लोगों को परिवार नियोजन के लिए मजबूर कर दिया था, उस वक्त उसके सिद्धांत कहां चले गये थे?


केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश में छह दशक तक राज करने वाली कांग्रेस आज सामाजिक न्याय के नाम पर राष्ट्रपति चुनाव लड़ रही है, लेकिन उसने सामाजिक न्याय के लिए यदि कुछ किया होता तो देश के निचले वर्गों की स्थिति कब की बदल चुकी होती।


उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के उम्मीदवार रामनाथ कोविंद की जीत का दावा करते हुए कहा कि कोविंद को उनकी कार्यदक्षता और पृष्ठभूमि तथा संविधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के आधार पर उम्मीदवार बनाया गया है और यही वजह है कि उन्हें चौतरफा समर्थन मिल रहा है।


नायडू ने कहा कि कोविंद को राजग का उम्मीदवार जाति के आधार पर नहीं, बल्कि क्षमता और संविधान के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के आधार पर चुना गया है और यही कारण है कि राजग के घटक दलों के अलावा जनता दल यू, बीजू जनता दल, तेलंगाना राष्ट्र समिति, वाईएसआर कांग्रेस और इंडियन नेशनल लोकदल का भी समर्थन मिल रहा है। 

शनिवार, 1 जुलाई 2017

अनूपगढ़ में अधिकारी पृथ्वीराज जाखड़ के सूरतगढ़ में निजी आवास के आगे अतिक्रमण

- करणीदानसिंह राजपूत -



 सूरतगढ़ 1 जुलाई 2017.

 अनूपगढ़ में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही में लगे पृथ्वीराज जाखड़ की सूरतगढ़ आवासन मंडल कॉलोनी में सड़क हक की भूमि पर निवास के आगे काफी बड़ा अतिक्रमण चारदीवारी बनाकर और दरवाजा लगाकर किया हुआ है।अनूपगढ़ के अतिक्रमण नगरपालिका अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आते हैं तो वहीं नियम सूरतगढ़ में भी लागू है।पृथ्वी राज जाखड़ का जाखड़ निवास का अतिक्रमण कई सालों से है।पूर्व में भी इस अतिक्रमण के समाचार प्रकाशित किए हुए हैं। पृथ्वीराज जाखड़ अनूपगढ़ में अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही शुरु करते हैं तो उनको सूरतगढ़ आवास के आगे का कब्जा पहले हटा लेना चाहिए। नैतिकता यही कहती है। एक अधिकारी को इस प्रकार से अपने आवास के आगे अतिक्रमण करना शोभा नहीं देता और यह भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है। जब दूसरों पर कार्यवाही करने के लिए सरकार के नियम लागू होते हैं तब वही नियम संबंधित अधिकारी के ऊपर भी लागू होते हैं, अगर अनूपगढ़ के अंदर अतिक्रमण करना दंडनीय अपराध है तो वहीं नियम पृथ्वीराज जाखड़ पर सूरतगढ में लागू होता है।



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