शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

पूर्व विधायक राजेंद्रसिंह भादू का कटला सीज- सील मोहर लगाई गई।पालिका की कार्यवाही

 


* करणी दान सिंह राजपूत *


सूरतगढ़ 13 दिसंबर 2019.

नगर पालिका सूरतगढ़ की ओर से आज दोपहर बाद पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह भादू और उनके दो भाइयों देवेंद्र और रविंद्र द्वारा बनाया जा रहा कटला सील मोहर के साथ 6 माह के लिए सीज कर दिया गया।

अधिशासी अधिकारी लालचंद सांखला के नेतृत्व में नगरपालिका अधिकारियों व कर्मचारियों का बड़ा दल आज कार्यवाही के लिए पहुंचा।


 अधिशासी अधिकारी एवं प्राधिकृत अधिकारी लालचंद सांखला के निर्देशन में एक लंबी रस्सी ताले लगाए जाने वाले स्थानों को लपेटते हुई सभी सटरों के साथ बांधी गई और बाद में चपड़ी मोहर करके और जब्ती की कार्यवाही की गई।

 नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी की ओर से तीनों भाइयों के नाम से निर्माणाधीन कटले पर नोटिस चिपकाए गए हैं। उनमें लिखा गया है कि मानचित्र के अनुसार निर्माण नहीं हुआ। 

यह जानते हुए सीज की यह कार्यवाही नगरपालिका की ओर से की गई है। नगरपालिका की कार्रवाई के समय कार्यवाही की रिकॉर्डिंग और फोटोग्राफी के लिए समाचार पत्रों से चैनल से जुड़े हुए पत्रकार और कैमरामैन मौके पर पहुंच गए। लालचंद सांखला के बयान भी लिए गए जिसमें उन्होंने कहा कि सभी कार्यवाही नियमानुसार की गई है।  पूर्व में नोटिस दिये गये और अवैध निर्माण रोका नहीं गया तब नगरपालिका ने नियमानुसार कार्रवाई की है।

 कार्रवाई के समय उत्सुकता से भारी भीड़ इकट्ठे हो गई थी जो काफी देर तक वहां जमी भी रही।

भादू सूरतगढ़ की राजनीति में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं इसलिए पालिका की इस कार्यवाही  पर जनता की ओर से आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा था,और कहां जा रहा था कि समय समय की बात है  जो पालिका ने इतने बड़े नेता पर हाथ डाला है। राजेंद्र सिंह भादू 2013 से 18 तक सूरतगढ़ से भाजपा टिकट पर जीते विधायक रहे हैं। भादू राज में नगरपालिका में भाजपा का बोर्ड रहा व काजल छाबड़ा अध्यक्ष रहीं।अब कांग्रेस का बोर्ड है तथा 2 दिसंबर को ही ओमप्रकाश कालवा ने अध्यक्ष पद पर कार्य शुरू किया है।

समझा जा रहा है कि राजेंद्र सिंह भादू व भाइयों की ओर से नगरपालिका की कार्यवाही के बाद अब अदालत का सहारा लिया जाएगा।




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गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

श्रीगंगानगर के नए मास्टर प्लान का प्रारूप जारी-30 दिन में सुझाव व आपतियां दी जा सकती है


श्रीगंगानगर, 11 दिसम्बर 2019.

जिला कलक्टर श्री शिवप्रसाद मदन नकाते ने कहा कि श्रीगंगानगर के नवीन मास्टर प्लान 2035 की राज्य सरकार के निर्देशानुसार प्रारूप प्रकाशन जारी कर दिया है। इस संबंध में किसी नागरिक को सुझाव देना हो या किसी प्रकार की आपत्ति हो तो तीस दिवस का समय दिया गया है। 

जिला कलक्टर श्री नकाते बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाहाॅल में गंगानगर शहर के नवीन मास्टर प्लान 2017-2035 के प्रारूप प्रकाशन के अवसर पर ये बात कही। उन्होंने कहा कि नगर विकास न्यास कार्यालय, एसडीएम कार्यालय में मास्टर प्लान का अवलोकन किया जा सकता है। नगर विकास न्यास में नागरिकों के सुझाव लेने के लिये काउंटर की व्यवस्था करनी होगी तथा किसी नागरिक द्वारा सुझाव या आपत्ति दी जाती है तो उसकी रसीद भी देनी होगी। नये मास्टर प्लान में संस्थागत क्षेत्र, ओपन एरिया तथा जनसुविधओं का विशेष ध्यान रखा गया है। जिला कलक्टर ने कहा कि शहर की शैक्षणिक एवं चिकित्सीय संस्थाएं भी मास्टर प्लान का अवलोकन करें। निर्धारित तीस दिवस के पश्चात सुझाव व आपत्तियों पर विचार नही किया जायेगा। 

जिला कलक्टर ने न्यास अधिकारियों को निर्देश दिये कि जिन निजी काॅलोनियों में ओपन एरिया रिजर्व रखा जाता है, उस पर अतिक्रमण न हो तथा वह गैर कानूनी तरीके से बेचान न हो, इसका ध्यान रखें। उन्होंने शहर की विभिन्न काॅलोनियों में रिजर्व किये गये ओपन एरिया की रिपोर्ट मांगी है। जिला कलक्टर ने कहा कि मास्टर प्लान में नगरपरिषद के मिनी डम्पिंग प्वाईंट के स्थान का भी ध्यान रखा जाये। 

उल्लेखनीय है कि शहर की जनसंख्या वर्ष 1923 में 1700, दसकीय वर्ष 1931 में 9943 एवं वर्ष 1941 में 16136 हो गई। बढ़ती जनसंख्या के कारण बस्तियों के फैलाव, अवैध निर्माण, अव्यवस्थित व अनियोजित विकास की समस्याओं के कारण तथ्यों को ध्यान में रखते हुए श्रीगंगानगर शहर का प्रथम मास्टर प्लान वर्ष 1981-2001 में तैयार किया गया। इसके पश्चात वर्ष 2003-2023 तक के लिये नवीन मास्टर प्लान तैयार किया गया था, जिसमें तीस राजस्व ग्रामों, चकों को सम्मिलित किया गया। शहर के चारों तरफ हो रहे निरंतर विकास के कारण आवासीय शैक्षणिक एवं व्यवसायिक गतिविधियों पर दवाब रहा। वर्तमान में श्रीगंगानगर के आसपास क्षेत्रवासियों के लिये औद्योगिक, व्यवसायिक, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवाओं का प्रमुख केन्द्र बन गया है। 

बढ़ती जनसंख्या के दवाब के कारण मूलभूत सुविधाओं की कमी के साथ ही शहर में अनियोजित रूप से बसावट हो रही है। 

वर्तमान मास्टर प्लान वर्ष 2023 तक बनाये गये मास्टर प्लान में नगरीकरण योग्य क्षेत्र व विकास की दृष्टि को मध्यनजर रखते हुए नया मास्टर प्लान 2035 तैयार किये जाने की आवश्यकता महसूस हुई। वर्ष 2017 के सर्वे के अनुसार श्रीगंगानगर का विकसित क्षेत्र 2741 हैक्टर है। श्रीगंगानगर मास्टर प्लान क्षैतिज वर्ष 2035 के लिये शहरी क्षेत्र के विस्तार एवं भविष्य में होने वाली जनसंख्या वृद्धि शहर के भावी विकास तथा अन्य बिन्दुओं को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान 2035 का प्रारूप तैयार किया गया है। 


राज्य सरकार द्वारा श्रीगंगानगर के नगरीय क्षेत्र में श्रीगंगानगर सहित 52 राजस्व ग्राम, चक सम्मिलित करते हुए 3 दिसम्बर 2015 को अधिसूचना जारी करते हुए अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक को मास्टर प्लान बनाने के लिये अधिकृत किया गया। इस मास्टर प्लान का आधार वर्ष 2017-2035 रखा गया है। अनुमान है कि वर्ष 2035 तक शहर की अनुमानित जनसंख्या 5 लाख 45 हजार हो जायेगी। इस अनुमानित जनसंख्या के लिये 9133 हैक्टर भूमि नगरीयकरण योग्य भूमि के रूप में प्रस्तावित की गई है, जो अधिसूचित नगरीय क्षेत्र 16540 हैक्टर का 55.21 प्रतिशत है। 

अधिसूचित राजस्व ग्रामों की सूची

मास्टर प्लान 2017-2035 में राजस्व ग्राम, चक 3वाई, 1वाई, 1डीछोटी, 2 डी छोटी, 4 डी छोटी, 2बी छोटी, 1 बी छोटी, 1 जैड,4 जैड, 2 जैड, 3 जैड, 5 जैड, 7 जैड, 9 जैड, 6 जैड, 8 जैड, 10 जैड, 6 जैडए, 1एछोटी, 3एछोटी, 4एछोटी, 5एछोटी, 6एछोटी, 7एछोटी प्रथम, 1ई छोटी, 2ई छोटी, 3 ई छोटी, 6 ईछोटी, 5ई छोटी, 7ई छोटी, 4ई छोटी, 1 एफ छोटी 3एफ छोटी, 2 एफछोटी, 4एफ छोटी, 1 जी छोटी, 2एमएल, 3 एमएल, 4 एमएल, 16एमएल, 15एमएल, 17 एमएल, 5 एमएल, 6 एलएनपी, 11 एलएनपी, 12 एलएनपी, 13 एलएनपी द्वितीय, पतीखियां द्वितीया, पतीखियां प्रथम, चक श्यामसिंहवाला, 1एमएल और 4 एलएनपी को शामिल किया गया है। 

इस अवसर पर मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सौरभ स्वामी, एडीएम प्रशासन डाॅ. गुंजन सोनी, एसीटीपी जयपुर श्री वी.के.दलेला, एसटीपी श्री राकेश मालक, न्याय सचिव डाॅ. हरितिमा, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ. गिरधारी लाल, टाउन प्लानर श्री मनीश कुमार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। 

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मंगलवार, 10 दिसंबर 2019

राजस्थानी साहित्यकार डा.आईदान सिंह भाटी की महानता पर फारूख आफरीदी का यह वृत्तांत.

(जन्म दिन 10 दिसंबर पर)

#बधाई_डॉ_आईदानसिंह_भाटी_साहब

आज हमारे परम मित्र राजस्थानी आधुनिक कविता के अप्रतिम हस्ताक्षर, आलोचक डॉ आईदान सिंह भाटी का आज जन्म दिन (10 दिसंबर 1952) है.बधाई और अनंत शुभकामनाएँ.(हाल ही जिन्हें बिहारी पुरस्कार दिए जाने की घोषणा हुई है) 


#एक_अधूरे_लेख_की_कुछ_पंक्तियां

डॉ. आईदान सिंह भाटी से मेरा सत्तर के दशक से दोस्ताना रहा है जब वे पोस्टल विभाग में सेवारत थे और मैं दैनिक ‘जलतेदीप’ में समाचार सम्पादक होते हुए भी जोधपुर विश्वविद्यालय (अब जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय ) में हिंदी स्नातक और  स्नातकोत्तर  का विद्यार्थी था। ये वह ज़माना था स्टेशन रोड स्थित जब रेलवे इंस्टीट्यूट के बाहर मंगलसिंह बुकसेलर के यहाँ साहित्यकारों का जमघट लगता था ।यह बुक स्टाल एक मायने में साहित्यकारों का स्थायी प्लेटफॉर्म था । इसमें वरिष्ठ, युवा  साहित्यकार और पत्रकार साथ होते थे । आईदान सिंह भाटी, अक्षय गोजा, हबीब कैफ़ी,  नन्द भारद्वाज, तेजसिंह जोधा पारस अरोड़ा,  हसन जमाल, चैनसिंह परिहार, फारूक आफरीदी, जगमोहन सिंह परिहार, सुशील पुरोहित, सुशील व्यास, मीठेश निर्मोही, हरिदास व्यास, उषा माहेश्वरी,चंद्रशेखर अरोड़ा, योगेन्द्र दवे, शिव प्रेमी, यश गोयल आदि सभी थे। कुछ लोगों की साहित्यिक जमीन जड़ पकड़ चुकी थी तो कुछ अपनी जमीन तलाश रहे थे । गणपतिचन्द्र कोठारी,विजयदान देथा बिज्जी, मरुधर मृदुल, कोमल कोठारी, डॉ मदन डागा, डॉ सावित्री डागा, शीन काफ निजाम, राज जोधपुरी, हबीब कैफ़ी  बड़े नाम थे । बीकानेर से नन्द किशोर आचार्य और हरीश भादानी का भी  अक्सर जोधपुर आना-जाना बना रहता था । उन दिनों जोधपुर से प्रोफ़ेसर जोशी (डॉ ताराप्रकाश जोशी के बड़े भाई ) जोधपुर से हरी प्रकाश पारीक जी की प्रेस से राजस्थानी मासिक ‘हरावल’ पत्रिका निकलते थे जिसके संपादन से डॉ तेजसिंह जोधा और नन्द भारद्वाज भी जुड़े हुए थे । तेज सिंघजी की राजस्थानी कविताओं का तीखा तेवर  सबको प्रभावित करता था और वे नई जमीन की और नव जागरण की आधुनिक कवितायेँ थी । युवाकाल में उनकी कविताओं का जैसा असर था लगभग वैसा ही असर डॉ भाटी की कविताओं में दिखाई देने लगा और और उनकी खास पहचान बनने लगी ।उनके इस तेवर के करण ही शायद ‘परम्परा’ (राजस्थानी पत्रिका) के समर्थ संपादक और मान्य कवि  डॉ नारायण सिंह भाटी ने डॉ. आईदान सिंह को आधुनिक राजस्थानी कविता विशेषांक का संपादन करने के लिए कहा ।    

यह वह दौर था जब जोधपुर विश्वविद्यालय में अज्ञेय से लेकर प्रगतिशील और जनवादी  विचारकों  डॉ नामवर सिंह, मैनेजर पाण्डेय, डॉ विमल जैसे का बोलबाला था । साथ ही  डॉ डॉ रमासिंह, डॉ नित्यानंद शर्मा भी विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अंग थे । ऐसे समय  जब युवाओं के मन में कुछ करने की तमन्ना प्रस्फुटित हो रही थी । जनवादी और प्रगतिशील विचारों को लेकर जोश था । जनवाद के प्रति एक अतिरिक्त उत्साह दिखाई दे रहा था । डॉ आईदान सिंह उन उभरते हुए हुए युवाओं में से एक थे जो ये समझ रहे थे कि जनवाद से ही सामाजिक स्थितियों में परिवर्तन लाया जा सकता है ।  जनवादी विचारधारा के मित्र इसी सोच के साथ तब साहित्यिक गोष्ठियों में वे अपना प्रबल पक्ष रखते थे । उनकी इस विचारधारा ने उस समय के सभी युवाओं को गहरे तक प्रभावित किया, उनमें से मैं भी एक था । तब तक प्रगतिशील लेखक संघ से अलग होकर शायद जनवादी लेखक संघ अस्तित्व में नहीं आया था।अखिल भारतीय साहित्य परिषद का तो कोई नामलेवा भी नहीं था लेकिन दक्षिणपंथी विचार के लोग अवश्य मौजूद थे । मैं ही नहीं मेरे साथ का युवा वर्ग भी  उन लोगों को पहचान रहा था । सामंतवाद के साए में पले-बढे आईदान भी उनमें से एक थे जो दक्षिणपंथी सोच को समाज के लिए खतरा मानते थे । उस समय प्रगतिशील विचारधारा के अध्येताओं के संपर्क में आने से युवा पीढ़ी को छद्म राष्ट्रवाद, साम्प्रदायिकता, संकीर्णतावाद को गहराई से समझने का अवसर मिला और प्रगतिशीलता का जो बीजारोपण हुआ वह आगे चलकर सामाजिक सरोकारों के प्रति आस्था का सुदृढ़ आधार बना । 

यह वह समय था जब सांप्रदायिक संगठन अपनी जड़ें ज़माने के लिए कड़ी जद्दोजहद कर रहे थे । और ऐसे राजनीतिक संगठन कम ताकत होने के बावजूद अपने अस्तित्व के लिए सांप्रदायिक दंगे करवाने में भी नहीं  चूक रहे थे । युवा वर्ग यह सब अपनी नंगी आँखों से देख रहा था । यहाँ तक कि विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनावों में भी जातिवाद हावी था । ऐसे समय में प्रगतिशील और जनवादी विचार अपने प्रारंभिक दौर से गुजरते हुए अपनी जड़ें जमाने के लिए प्रयास कर रहा था । भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी का स्टूडेंट फैडरेशन और युवा कांग्रेस अपनी संक्षिप्त उपस्थिति दर्ज करा रहा था । समाजवादी सोच के विज्ञानं मोदी, सोहन मेहता के साथ दक्षिणपंथी सोच के युवा भी थे । उस समय भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन नया नया ही अस्तित्व में आया था जिसकी युवाओं में कोई ख़ास पहचान नहीं थी । यह तो अशोक गहलोत ही थे जिसने सत्तर के दशक में इस संगठन को युवाओं के बीच एक नई पहचान दिलाई और जातिवाद एवं सामन्तवाद के खिलाफ लड़ाई की शुरुआत की । प्रारम्भ में भले ही उन्हें इसमें आशातीत सफलता नहीं मिली हो, लेकिन जिस प्रगतिशील विचार और आदर्श आचार संहिता के साथ भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने धमाकेदार एंट्री ली वह आज भी याद की जाती है । 

बहरहाल डॉ. भाटी ने जोधपुर विश्वविद्यालय से हिंदी विभाग से स्नातकोत्तर करने के बाद पीएचडी कर ली और जल्दी ही पोस्टल विभाग से विदाई लेकर  हिंदी के कालेज व्याख्याता के रूप में अपनी नई पारी की शुरुआत कर दी थी । वर्ष  उन्नीस सौ अस्सी के प्रारंभ में अच्छी खासी पत्रकारिता छोड़कर में राज्य जनसंपर्क सेवा में चला गया । इस प्रकार कुछ वर्षों तक के लिए डॉ भाटी से मुलाकातें लम्बी हो गयी । बरसों पहले जोधपुर से भाई मीठेश निर्मोही ने राजस्थानी पत्रिका ‘आगूंच’ प्रकाशित  करना प्रारंभ किया । पत्रिका के पहले ही अंक में डॉ आईदान सिंह भाटी और मेरी राजस्थानी कविताएं साथ-साथ छपी । मीठेश जी ने मेरा नाम पत्रिका के सहायक संपादक के रूप में भी सम्मिलित किया । इससे पहले हम तीन जनों वरिष्ठ कथाकार हसन जमाल ,फारूक आफरीदी और डॉ यश गोयल ने हिंदी कथा साहित्य की एक पत्रिका ‘शेष’ निकाली जिसे हसन जमाल ने मेरे और डॉ  गोयल के जोधपुर छोड़ने पर नागरी लिपि में उर्दू साहित्य  की पत्रिका के रूप में बदल दिया जो हाल ही तक निकलती रही और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खूब शोहरत हासिल की । हसन जी ने अपने धन,परिश्रम और साधना से पत्रिका को जो ऊँचाइयाँ  प्रदान की उससे साहित्य समाज कभी उऋण नहीं हो सकता ।  

उम्र में मुझ से 14 दिन (10 दिसंबर 1952) बड़े डॉ आईदान सिंहजी अनुभव में भी मुझसे कई गुना बड़े हैं । आज वे आधुनिक राजस्थानी कविता के बड़े हस्ताक्षरों में से एक हैं। उन्होंने उच्च कोटि के अनुवाद किये हैं तो प्रौढ़ों के लिए भी अनमोल साहित्य रचा है बल्कि उनकी पहचान एक लब्ध प्रतिशत रिसोर्स पर्सन के रूप में है । राजस्थानी भाषा के एक सबल आलोचक होने के साथ हिन्ढी आलोचना और साहित्य में भी उनका उतना ही अधिकार है 

राजस्थानी कविता संग्रह  ‘हंसतोड़ा होठा रौ सांच’, रात कसूंबल’,’आँख हीयै रा हरियल सपना’ और ‘खोल पंख खोल चिडकली’ उनकी अनमोल कृतियाँ हैं । इन कविताओं  में राजस्थानी जनजीवन की वे अद्भुत छवियाँ हैं जिनमें जनमन के दर्द, उनकी आशाएं निराशाएं, हताशा, उनकी जीवटता और खुद्दारी मुंह से बोलती है । इनमें मरुभूमि  के तमाम वे रंग मौजूद हैं, जो इन्द्रधनुषी रंगों से भी विरले हैं ।  डॉ. भाटी इन रंगों में जीए हैं, इन रंगों से सदा सराबोर रहे हैं, इनकी खुशबू से सुवासित रहे हैं।इन कृतियों में जो भी कविताएं और गीत हैं वे किसी जनमन के गीत है , बल्कि इन्हें मरुभूमि के आधुनिक लोकजीवन के  गीत कहना उचित होगा। ये रचनाएं  डॉ भाटी को अपने समकालीन कवियों से अलग खड़ा करती है । 

जो लोग जोधपुर  के जनकवि  डॉ नारायणसिंह भाटी और बीकानेर के जनवादी कवि हरीश भादानी के कंठों से उनके गीत और कविता का रसास्वादन कर चुके हैं उन्हें डॉ. आईदान को सुनते हुए यह एहसास हो सकता है कि वे उस परम्परा के समृद्ध कवि हैं । डॉ नारायण सिंह भाटी डिंगल और आधुनिक राजस्थानी कविता के सेतु माने जाते हैं । सौभाग्य से डॉ आईदान ने हाल ही उनकी कविताओं का संपादन किया, जो 2018 में गिरधर प्रकाशन जोधपुर से प्रकाशित हुआ ।  

सामंतवादी  विचारों के कट्टर विरोधी और जनवाद में अटूट आस्था रखने वाले  डॉ. आईदान सिंह भाटी मनुष्य की मनुष्य से अधीनता को सिरे से ख़ारिज करते हैं । वे अपने बचपन के किस्से सुनाते हुए कहते हैं कि मनुष्य मात्र  को सम्मान देना उन्होंने अपने पुरखों से सीखा है ।उन्होंने गैर बराबरी और गैर बिरादरी के लोगों की इज्जत करना अपने परिवार से सीखा है।बचपन में एक बार किसी गैर समाज के अपने गाँव के बुजुर्ग के प्रति आदरसूचक व्यवहार ना करने की सजा के रूप में अपने पिता से चांटा खाने के बाद वे ऐसे संभले कि उसे हमेशा याद रखते हैं। मुझे लगता है डॉ भाटी को जनवाद की पहली सीख अपने पिता से मिली। 

डॉ भाटी  जैसे मित्र के साथ 1993 से 1995 तक  बाड़मेर में निभाए गए तीन साल मेरे जीवन की अमूल्य थाती है। डॉ भाटी के संग इतनी निकटता से रहने के कारण मेरी साहित्यिक दृष्टि न केवल विकसित हुई बल्कि मेरी एक आधार भूमि भी तैयार हुई।  बाड़मेर में साहित्यिक जमीन तैयार करने में उन्होंने जो भूमिका निभाई है वह अविस्मरनीय और अतुलनीय  है। उनके समय जिला प्रशासन द्वारा  बाड़मेर समारोह की शुरुआत हुई। ऐसे समारोह दृष्टि सम्पन्नता के अभाव में अक्सर नीरस या भौंडे रूप में बदल जाते हैं किंतु डॉ भाटी ने ऐसा नहीं होने दिया और गोपाल दास नीरज, हरीश भादानी, मोहम्मद सद्दीक और समर्थ गीतकारों को बुलाकर सरकारी आयोजनों को नई गरिमा दिलवाई। उन्होंने  देश के मूर्धन्य विद्वान साहित्यकारों विभूतिनारायण राय,कृष्ण कल्पित,  से.रा. यात्री,  शिव नारायण, कुशवाहा, शैलेन्द्र चौहान, और कई नामवर विभूतियों  से बाड़मेर वासियों को परिचित कराया।  उन्होंने बाड़मेर और जैसलमेर में सृजनात्मक संसार की संरचना की और उसे निरंतरता प्रदान की। बाड़मेर में उच्च कोटि का साहित्यिक माहौल बनाने में उनका अनुपम योगदान है. मैं और आकाशवाणी दूरदर्शन के कृष्ण कल्पित इसके साक्षी रहे हैं । सूचनाकेन्द्र को साहित्यिक सांस्कृतिक अनुष्ठान का केंद्र बनाने में उनकी भूमिका अतुलनीय है। उन्होंने बाड़मेर में सुरुचिपूर्ण थियेटर को पनपाने में भी अपना अमूल्य योगदान दिया। शाम को जब वे कालेज से और मैं और कल्पित अपने अपने दफ्तर से लौटते तो मेरा या उनका घर संहित्यिक सदन में बदल जाया करता था और रात रात भर गोष्ठियां चलती थी। मेरे तीन साल कब बीत गए, कभी पता ही नहीं चला।अपने ट्रांसफर पर जयपुर लौटते हुए मुझे बाड़मेर छोड़ने का उतना  गम नहीं था जितना डॉ भाटी जैसे मित्र से बिछुड़ने का था। डॉ.भाटी का अनुभव संसार बहुत बड़ा है और इसे बांटकर वे इसे और बड़ा बना देने का हुनर रखते हैं। वे धाराप्रवाह बोलते हैं तो लगता हैं नदी कलकल बाह रही है। ज्ञान का अथाह सागर उनके भीतर समाया हुआ प्रतीत होता है। वे  संस्कृति,समाज और परंपरा से गहरे जुड़े हुए  होते भी आधुनिक सोच के सशक्त पहरुए हैं। राजस्थानी भाषा के एक उद्भट विद्वान भाटी जी से मिलने का अर्थ स्वयं को समृद्ध करने जैसा है। इस प्रज्ञावान से मित्रता  मैं अपना सौभाग्य मानता हूं। वे उदासियों को भी हर लेते हैं और संकट के समय संकटमोचक बनकर चट्टान की तरह खड़े रहते हैं। मैने उन्हें ऐसे पलों में भी मित्रों के साथ खड़ा देखा है जब लोग अक्सर मित्र धर्म को छोड़ अपनी अस्मिता की लाज बचने को परम धर्म मानने लगते हैं ।


वैसे तो डॉ भाटी ने रचनाधर्मिता में कई कीर्तिमान स्थापित किये हसीन लेकिन राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी  की जीवनी ' मेरे सत्य के प्रयोग ' का राजस्थानी भाषा में अनुवाद कर  उन्होंने राजस्थानी समाज को  एक अमूल्य सम्पदा सौंपी है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी और स्पष्टवादी  डॉ भाटी का मित्र होने का मुझे फख्र है। उनकी अनेक रचनाएं स्पष्टवादिता की साक्षी और लोगों  के चेहरे पर लगे मुखोटों को उखाड़ फेंकती है ।


( माननीय फारूख आफरीदी के फेसबुक से यह लेख लेकर और मेरे  ब्लॉग www.karnipressindia.com पर लगाकर और मेरे फेसबुक पर लिंक देकर मैं बहुत खुशी अनुभव कर रहा हूं। असीमित खुशी. करणीदानसिंह राजपूत, पत्रकार,

सूरतगढ़.

94143 81356.)

सोमवार, 9 दिसंबर 2019

छात्रा युवती दीप्ति गोयल संगरिया की हत्या का राज ?


*हरियाणापुलिस मोबाइल कॉल व अन्य सूत्रों से खोलेगी*

 संगरिया की दीप्ति गोयल (पुत्री हनुमान गोयल आढत व्यापारी) की लाश हरियाणा की धारुहेड़ा में शनिवार 7 दिसंबर 2019 की अलसुबह मिली।  धारूहेड़ा पुलिस ने अपहरण व हत्या के अपराध में मुकदमा दर्ज किया है।दीप्ति के मोबाइल कॉल तथा अन्य सूत्रों से यह राज खोला जाएगा कि दीप्ति की हत्या किसने और क्यों की? हत्या कहां हुई थी और धारुहेड़ा में उसकी डेड बॉडी कैसे पहुंची? दीप्ति के सिर पेट और जननांग पर 4 गोलियां मारी गई।

 21 वर्षीय दीप्ति गोयल दिल्ली के साकेत नगर में ननिहाल में रहकर पढ़ाई कर रही थी। वह कुछ समय से मानसिक रोग से विचलित थी जिसका ईलाज चल रहा था।

दीप्ति की लाश के पहनने कपड़ों में संगरिया के एक ब्यूटी पार्लर का कार्ड मिला। हरियाणा पुलिस ने संगरिया पुलिस को फोटो व कार्ड भेजकर मालूम करने का कहा।ब्यूटी पार्लर से पता लगा कि उक्त लाश  दीप्ति गोयल की है।

दीप्ति गोयल के परिवार जनों को सूचित किया गया। उन्होंने भी फोटो से पहचाना। परिवार जन सकते में आ गए की दिल्ली के अंदर ननिहाल में रह कर पढ रही उनकी पुत्री की हत्या हो गई तथा उसकी लाश धारूहेड़ा गांव कैसे पहुंची?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दीप्ति गोयल शुक्रवार को  3:04 बजे के करीब बाजार जाने का कहकर ननिहाल के घर से गई थी। उसके बाद से कोई संपर्क नहीं हुआ,रात्रि 11:00 बजे के करीब 2 सेकंड के लिए उससे बात हुई। उसके बाद उसका मोबाइल स्वीच आफ मिला। 

इसके अलावा कोई बात नहीं हुई। काफी देर बाद में उसके मोबाइल से मैसेज आया कि मैं जा रही हूं। संभव है कि यह मैसेज अपहरणकर्ता हत्यारों की तरफ से दिया गया हो।

दीप्ति गोयल की हत्या का राज हरियाणा पुलिस खोलेगी।

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रविवार, 8 दिसंबर 2019

सूरतगढ़ तापीय विद्युत परियोजना के पर्यावरण कार्यों में घोटालों से जनजीवन को खतरा


* करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ़ तापीय विद्युत परियोजना राजस्थान की सबसे बड़ी परियोजना है जिसके आसपास पर्यावरण शुद्ध रखने की जिम्मेवारी है।

आस-पास के गांव वर्षों से परियोजना के कारण वातावरण की शुद्धता खत्म होती जाने और श्वास रोग सहित विभिन्न बीमारियां बढ़ने के आरोप लगाते रहे हैं। स्पष्ट रूप से पर्यावरण शुद्ध करने और रखने के मामले में कोई कार्यवाही सिरे नहीं चढ़ी तथा कोई न कोई कमी कायम रही व अधिकारी अनदेखी करते रहे। सच्चाई यह है कि पर्यावरण कितना दूषित हुआ है, इसकी जांच कैसे होती है और वह जांच रिपोर्ट क्या है, वह सार्वजनिक नहीं होती। लोगों के आरोप लगते रहे लेकिन अधिकारियों की ओर से कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं हुई।

सूरतगढ़ तापीय परियोजना की अभी 6 दिसंबर 2019 को कारपोरेट सामाजिक दायित्व की बैठक जिला कलेक्टर शिवप्रसाद मदन नकाते की अध्यक्षता में हुई। इस बैठक में सूरतगढ़ के विधायक रामप्रताप कासनिया में थर्मल प्रशासन द्वारा पर्यावरण के नाम पर की जा रही कार्यवाही और खर्च होने वाली राशि को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसकी जांच होनी चाहिए। कासनिया का आरोप था कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर पौधारोपण का जो कार्य हो रहा है वह धरती पर कुछ और है कागजों में कुछ और है। इसका मतलब समझ में नहीं आता हो,ऐसा नहीं है। पौधरोपण आदि पर जो खर्च कागजात में दिखाया जा रहा है वह धरती पर दिखाई नहीं दे रहा। सबसे बड़ा सवाल तो था कि जो रकम पौधारोपण आदि पर खर्च दिखाई गई है उसकी जांच होनी चाहिए। यह सवाल पिछले कुछ सालों से मीडिया में भी आता रहा है। थर्मल के यूनियन के प्रतिनिधि भी यह सवाल उठाते रहे हैं कि पौधारोपण कितना हुआ और किस तरह से पौधों पेड़ों को काट दिया जाता है। पर्यावरण का मामला बहुत गंभीर है। इस बैठक में बताया गया कि पर्यावरण के लिए फिलहाल 2 करोड़ 60 लाख रुपए अआंवटित किए गए हैं लेकिन यह भी बताया गया कि इसके खर्च करने के लिए दिशा-निर्देश मांगे गए हैं। यहां आश्चर्य होता है कि जब बजट आवंटित किया जाता है तो उसकी कार्य सूची पहले से ही निर्धारित हो जाती है, जो स्थिति बताई गई है उसके अनुसार तो बजट आवंटन के बाद भी महीने दिशा निर्देश मांगने में लग जाएंगे। पर्यावरण के लिए कितना बजट चाहिए और कितना आवंटित किया गया है? इस पर भी ध्यान देना आवश्यक है। आवश्यकता 10 करोड़ की हो और आवंटन चौथा हिस्सा मतलब ढाई करोड़ ही हो तो पर्यावरण कैसे शुद्ध रह पाएगा?

 पर्यावरण के लिए थर्मल का विशाल भूभाग पेड़ पौधे लगाने के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है।  यहां कार्बन डाइऑक्साइड गैस ग्रहण करने वाले और ऑक्सीजन छोड़ने वाले पेड़ों को लगाना अधिक लाभदायक हो सकता है। इसके लिए पीपल बड़ और नीम आदि के वृक्ष लगाना उपयुक्त हो सकता है।  इसके लिए वन विभाग के विशेषज्ञों से राय ली जा सकती है। इस राय में 8-10 दिन से अधिक लगने की कोई संभावना नहीं है। तापीय विद्युत परियोजना क्षेत्र में जो पेड़ लगाए जा रहे हैं वे छायादार होने के साथ ही फलदार हो तो आने वाले समय में करोड़ों रुपए की आमदनी भी हो सकती है। इस और अभी तक कोई उचित ध्यान नहीं दिया गया है। इस मामले में भी वन विभाग की राय ली जा सकती है। 

इस अभियान में पौधा रोपण पेड़ लगाने से लेकर फल प्राप्त करने और उचित समय पर पेड़ों से लकड़ी प्राप्त करने में करोड़ों रुपए की आमदनी होगी। वहीं इलाके के लोगों को विभिन्न प्रकार के रोजगार तथा उद्योग के लाभ मिलेंगे तथा आर्थिक उन्नति भी संभव होगी। 

पर्यावरण के मामले में सूरतगढ़ तापीय विद्युत परियोजना में चल रही ढील को और अव्यवस्था को तुरंत ही खत्म करना होगा।सबसे बड़ी बात यह है कि पर्यावरण के मामले में होने वाली हर कार्यवाही के बारे में जो भी रिपोर्ट मिलती रहे वह सार्वजनिक करनी होगी ताकि अधिकारी और जनता दोनों ही जागरूक रह सकें।००

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शनिवार, 7 दिसंबर 2019

23 करोड़ की सूरतगढ़ की नई पेयजल परियोजना- जिला कलेक्टर का निरीक्षण



* जिला कलक्टर  शिवप्रसाद मदन नकाते ने किया निरीक्षण*

* करणीदानसिंह राजपूत *


सूरतगढ में प्रगतिरत पुर्नगठित पेयजल परियोजना का जिला कलक्टर ने  निरीक्षण किया। उन्होंने  गुणवत्ता के साथ विकास कार्यों  को निर्धारित समय में पूर्ण करने के निर्देश दिए। पुर्नगठित पेयजल परियोजना के पूर्ण होने पर सूरतगढ शहरवारियों को पर्याप्त एवं शुद्ध पेयजल मिलेगा।


यह परियोजना 23 करोड़ रूपये की है, जिसमें 18.5 करोड़ रूपये की राशि के कार्य प्रगतिरत है।

इस परियोजना में 4.30 लाख किलोलीटर के दो स्टोरेज टैंक, 12 एमएलडी में आरजीएफ, 2 सीडब्ल्यूआर, पम्प हाऊस, चारदीवारी तथा पाईपलाईन के कार्य करवाए जाएंगे। 

निरीक्षण के दौरान पेयजल विभाग के अधीक्षण अभियन्ता  बलराम शर्मा भी थे। 

जिला कलक्टर ने गांव भगवानसर में संचालित पेयजल परियोजना के प्रथम चरण के सुदृढीकरण के कार्यो का निरीक्षण किया। इस पेयजल परियोजना के नवीनीकरण पर एक करोड 24 लाख रूपये की राशि व्यय की गई है। आरजीएफ निर्माण के साथ पूर्व में निर्मित पेयजल परियोजना का सुदृढीकरण किया गया है। 

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गुरुवार, 5 दिसंबर 2019

आपातकाल 1975-77 में जेलों में बंद किए गए लोकतंत्र रक्षकों का राजघाट और जंतर मंतर पर मौनधरना.




^ लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान हो तथा केन्द्र एक कानून बनाए*


* करणीदानसिंह राजपूत*

आपातकाल 1975 से 77 तक देश में भयानक अत्याचार हुए हजारों लाखों लोगों को जेल में बंद किया गया अखबारों पर पाबंदियां लगाई गई। उस समय विरोध करने वालों को भी जेलों में ठूंस दिया गया था।

मिसा,रासुका,सीआरपीसी धाराओं 107,151,116  व विभिन्न कानूनों में महीनों तक लोग जेलों में बंद रहे। सब कुछ अर्थव्यवस्था तहस-नहस हो गई थी। 

गैर कांग्रेसी सरकारों द्वारा ऐसे लोकतंत्र सेनानियों को कुछ राज्यों में सम्मान निधि और सम्मान प्रदान किया गया। जहां पर कांग्रेस दुबारा आई वहां फिर यह सम्मान छीन लिया गया और सम्मान निधि बंद कर दी गई।

राजस्थान में भी विजय राजे सिंधिया के मुख्यमंत्री काल में सम्मान निधि और सम्मान प्रदान किया गया जो अशोक गहलोत की सरकार आते ही 16 अक्टूबर 2019 से बंद कर दिया गया। 

संपूर्ण देश में आपातकाल का विरोध किया गया था। सारे देश से अब एक मांग उठी है के आपातकाल का विरोध करने वाले सत्याग्रह और जेल में बंद रखे गए लोगों को लोकतंत्र सेनानी सम्मान और सुविधाएं प्रदान की जाए और इन लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समकक्ष दर्जा दिया जाए।

अखिल भारतीय लोकतंत्र सेनानी संयुक्त समिति की ओर से इस मांग को लेकर 4 दिसंबर 2019 को राजघाट पर मौन प्रदर्शन धरना दिया गया और 5 दिसंबर को जंतर मंतर पर 1 दिन का उपवास रखते हुए धरना दिया गया है।क

लोकतंत्र सेनानियों की मांग है कि केंद्रीय सरकार की ओर से सारे देश में एक कानून बनाकर समस्त जगह एक जैसी सुविधाएं प्रदान की जाए और जो बार-बार बंद नहीं हो।लोकतंत्र सेनानियों की यह मांग भी है कि सांसद गण महत्वपूर्ण विषय पर लोकसभा राज्यसभा में विधेयक लाएं और कानून बनाएं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और  गृहमंत्री राजनाथ सिंह से भी यह मांग की गई है कि वे आपातकाल में जो लोग जेलों में बंद रहे आपातकाल का विरोध किया वे लोग आज 70,80, 90, 95 साल के उम्र तक हैं,अत्यंत वृद्ध हो चुके हैं,इसलिए उन्हें हर तरह से सम्मानित किया जाए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल लगाए जाने वाले दिन26 जून 1975 को काला दिवस बताते हुए 26 जून 2019 को लोकसभा में अपना भाषण दिया था जिसमें कहा था कि आपातकाल में जिन लोगों ने कुर्बानियां दी उन लोगों के कारण ही आज लोकतंत्र बचा हुआ है। ऐसे लोगों का सम्मान किया जाना चाहिए।०० 

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सोमवार, 2 दिसंबर 2019

सूरतगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष कालवा,उपाध्यक्ष कुरेशी का कार्यभार ग्रहण समारोह


* करणी दान सिंह राजपूत*

 सूरतगढ़ 2 दिसंबर, 2019.

 नगर पालिका सूरतगढ़ में नवनिर्वाचित कांग्रेस बोर्ड की ओर से अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा और उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी का कार्यभार ग्रहण भव्य समारोह के रूप में आयोजित किया गया।

इस समारोह में नगर में विकास कार्य, कार्यों की पारदर्शिता,सड़कों के अतिक्रमण हटाने, शहर को निराश्रित पशुओं से मुक्त करने,सड़क बिजली पानी आदि की समस्याओं को दूर करने की महत्वपूर्ण बातों के साथ कहा गया कि पिछले बोर्ड के द्वारा की गई गलतियों को खंगाला नहीं जाएगा।

इस समारोह में पूर्व विधायक गंगाजल मील,प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य हनुमान मील,अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा,उपाध्यक्ष सलीम कुरेशी, कांग्रेस के ब्लॉक अध्यक्ष परसराम भाटिया,कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष स.गुरदर्शन सिंह सोढी,पीलीबंगा नगर पालिका के अध्यक्ष राजकुमार फंडा आदि ने वक्तव्य दिए और सभी ने नवनिर्वाचित पार्षदों से वार्डों में समस्याएं देखने और कार्य करने में आगे रहने की बातें कहीं। मंच पर पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष इकबाल मोहम्मद कुरैशी भी थे। मंच संचालन एडवोकेट नोटेरी साहबराम स्वामी और एडवोकेट सहदेव जोशी की ओर से हुआ। शहर के विभिन्न संगठनों, व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी, गणमान्य ने भाग लिया।

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को माल्यार्पण से स्वागत सम्मान करने की होड़ सी लगी रही।

(सभी के भाषण बड़े महत्वपूर्ण रहे, उनके समाचार अलग अलग देंगे.

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पालिका को चोर मानने वाली भावना को बदल डालें- राजकुमार फंडा, सूरतगढ़ पालिका समारोह-


* करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 2 दिसंबर2019.


पीलीबंगा के नगर पालिका अध्यक्ष राजकुमार फंडा ने सूरतगढ़ नगरपालिका के नये पार्षदों से अपील की कि वे जनभावना को बदल डालें। उन्होंने कहा की नगर पालिका को सभी चोर मानते हैं इस भावना को बदला जाना चाहिए पार्षदों के द्वारा की जाने वाली ठेकेदारी भी बंद होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अतिक्रमण एक समस्या है अतिक्रमण हटाने चाहिए। अतिक्रमण हटने के बाद में लोग बहुत खुशहाल होते हैं,अतिक्रमण एक का हटता है लेकिन लाभ हजारों लाखों को मिलता है। उन्होंने कहा कि पीलीबंगा में अतिक्रमण हटाते वक्त लोगों की अलग सोच थी और जब अतिक्रमण हटाने के बाद में लाभ मिला सड़कें चौड़ी हुई तो लोग बधाइयां देने लगे।

पीलीबंगा के नगर पालिका अध्यक्ष राज कुमार फंडा ने यहां सूरतगढ़ में नवनिर्वाचित नगर पालिका अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा के कार्य ग्रहण समारोह में आमंत्रण पर अपना भाषण दिया। फंडा ने कहा कि वे और कालवा दोनों ही अध्यापक रहे हैं। वे फंडा दूसरी बार पीलीबंगा में पालिका अध्यक्ष का कार्यकाल चला रहे हैं तथा कालवा जी पहली बार चुने गए हैं। 

फंडा ने सूरतगढ़ वासियों को बधाई दी कि उन्होंने एक अध्यापक रहे व्यक्ति को पालिका अध्यक्ष चुना। इसके लिए पूर्व विधायक गंगाजल मील और कांग्रेस पार्टी को भी धन्यवाद दिया कि उनके कारण यह संभव हो सका है।

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सूरतगढ़ पालिका समारोह-पीसीसी सदस्य हनुमान मील का राजस्थानी भाषण सराहनीय रहा-युवाओं को प्रोत्साहन.

 * करणीदानसिंह राजपूत *

सूरतगढ़ 2 दिसंबर 2019.

नगर पालिका सूरतगढ़ के अध्यक्ष ओमप्रकाश कालवा और उपाध्यक्ष सलीम कुरैशी के कार्यभार ग्रहण करने के समारोह में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य हनुमान मील ने राजस्थानी में अपना वक्तव्य देकर एक गहरी छाप छोड़ी।

 हनुमान मील ने कहा कि नागरिकों  ने कांग्रेस पार्टी को बोर्ड बनाने के लिए पूरा सहयोग दिया है।  

पूर्व विधायक गंगाजल मील के बारे में कहा कि "ताऊजी गंगाजल जी ने पार्टी की कार्यप्रणाली और जन भावना को नजर में रखते हुए युवाओं को प्रोत्साहन देने वास्ते 43 टिकटों में से 15 टिकटें युवाओं को दी जिसमें 10 पार्षद चुन करके आए हैं। ये पार्षद भी शहर के विकास में पूरा सहयोग प्रदान करेंगे।

हनुमान मील ने कहा कि ताऊ जी गंगाजल जी के विधायक कार्यकाल में बहुत से विकास कार्य हुए हैं और कुछ कार्य जो बीच में रहे उन्हें पिछले बोर्ड ने पूरा करने की कोई कोशिश नहीं की उन सभी कार्यों को दुरुस्त करवाने में नया बोर्ड कार्य करेगा,शहर के विकास में हर कदम पर सहयोग प्राप्त कर आगे बढ़ाएगा।

उन्होंने नवनिर्वाचित पार्षदों को और अध्यक्ष व उपाध्यक्ष को चुने जाने पर बधाई दी। उन्होंने शहर वासियों से भी आग्रह किया कि शहर के विकास में सहयोग देने के लिए आगे बढ़े।

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