गुरुवार, 9 अप्रैल 2015

पीएम नरेन्द्र मोदी फंसे:बोले लड़की अचार बेचे तो कीमत और ज्यादा मिलेगी:


क्या महिला आयोग मोदी की निन्दा करेगा और जवाब मांगेगा?
भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी मोदी के शर्मनाक भाषण पर इस्तीफे की मांग कर पाएगी?
भाजपा के मंत्री सांसद अन्य पार्टियों के नेताओं की महिलाओं पर की गई शर्मनाक टिप्पणियों पर निन्दा करती रहे हैं और इस्तीफा मांगते रहे हैं।
मुद्रा कोष उदघाटन का यह भाषण टीवी चैनलों पर लाइव प्रसारित हो रहा था। तोड़ मरोड़ कर प्रसारित करने का भी नहीं कह सकते।
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत
भारत के प्रधानमंत्री संघ के संस्कारित नारी का सम्मान करने का दावा करते रहने वाली राजनैतिक पार्टी के नेता अपने भाषण से बुरी तरह से फंस गए हैं। नरेन्द्र मोदी की जबान भी फिसल गई। उनके कहने का लहजा नारी का सम्मान करने वाला नहीं रहा बल्कि नारी को सजावट की सामान जैसी वस्तु मान लेने वाला रहा। प्रधानमंत्री से इस प्रकार के भाषण की कोई भी उम्मीद नहीं कर सकता जब देश में नारी पर दिए जा रहे भाषणों से आए दिन बवाल मचता रहा हो तथा संसद तक में भाजपा के मंत्री ही आग बबूला होते रहे हों।
भारतीय जनता पार्टी के नेता खासकर महिला नेता अन्यों को सावधानी का पाठ पढ़ाते रहे और उन्हीं के प्रधानमंत्री ही सावधान नहीं रह पाए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 अप्रेल को मुद्रा कोष का उदघाटन भाषण में जो कहा उस पर बहस छिड़ी है तथा पूरे देश में बवाल मचा है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी किसान की फसल की बिक्री बाबत भाषण कर रहे थे।
उनका कहना था कि बाजार में किसान को कीमत कम मिलती है वह खुद बेचे तो लाभ अधिक मिलता है।
मोदी ने कहा कि किसान खुद कच्चा आम केरी बेचे तो आमदनी अच्छी होगी।
उसका आचार बना कर बेचे तो अधिक कीमत मिलेगी।
उसी आचार को बोतल में पैक कर बेचे तो कीमत और अधिक मिलेगी।
उसी बोतल को लड़की लेकर खड़ी हो जाए तो बिक्री और अधिक बढ़ जाएगी।
आचार की बोतल लड़की बेचे तो बिक्री और ज्यादा बढऩे के शब्दों पर कोहराम मच गया है।
इस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल अन्य दलों के नेता करें तो आपत्ति और प्रधानमंत्री करें तो?
देश को नारी सम्मान की सीख देते रहने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं नारी का सम्मान कैसा करते हैं?
हरियाणा में महिलाओं ने एक आंदोलन छेड़ रखा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी पत्नी को साथ रखें जो एकाकी जीवन बीता रही हैं।

शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015

राजस्थानी साहित्य अकादमी का अध्यक्ष सरकारी नौकरी वाला न हो


राजस्थानी भाषा मान्यता का प्रस्ताव पारित हुए 12 साल बीत गए अब तो देरी न हो।
राजस्थानी की संवैधानिक मान्यता के इंतजार में अनेक राजस्थानी साहित्यकार स्वर्ग सिधार गए और कई इस पंक्ति में पहुंचे हुए हें। कम से कम इस आस में जी रहे लोगों की आत्मा को अब आनन्दित कर दिया जाना चाहिए।
                - करणीदानसिंह राजपूत
राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी एक बार फिर कई महीनों से अध्यक्ष बिना लावारिस सी पड़ी है और इसकी समस्त गतिविधियां शून्य पड़ी है। राज्य सरकार द्वारा अध्यक्ष का मनोनयन होता है  और वह मनोनयन उसका होगा जिसकी सिफारिश होगी या कहना चाहिए कि जिसे सरकार अपना खास मानेगी। सरकार के मर्जीदान जो भी हों उनके कार्य कभी स्वतंत्र नहीं माने जा सकते,लेकिन इसके बारे में विचार अवश्य किया जाना चाहिए कि स्वतंत्र कार्यशैली के लिए अध्यक्ष उस व्यक्ति को मनोनीत किया जाना चाहिए जो सरकार में किसी भी पद पर नियुक्त न हो। सरकारी व्यक्ति चाहे किसी बड़े पद पर हो,राजस्थान प्रशासनिक सेवा में हो,उसकी कार्यप्रणाली सरकारी तरीके से ही चलती है। उसकी सोच ही अकादमी वाली नहीं होती है तब वह कितना ही अच्छा हो,वह अकादमी का कार्य रूचि से नहीं कर सकता। इस प्रकार के व्यक्ति का मनोनयन होने पर साहित्यकार बंधु स्वयं को असहाय लुटा पिटा सा अनुभव करते हैं और गतिशील रहने के बजाय शांत हो जात हैं। साहित्यकारों की शांति का फल यह होता है कि अकादमी का उद्देश्य ही शून्य होकर रह जाता है।
सुनने में आ रहा है कि सरकारी व्यक्ति भी अकादमी में मनोनयन के लिए प्रयासरत हैं। सरकारी नौकरी वालों के भी पिछलग्गु जरूर होंगे और वे चाहते भी होंगे कि उनके व्यक्ति का मनोनयन हो जाए। सरकारी नौकरी वाले की राजनैतिक पहुंच भी जरूर होगी लेकिन सरकार को इस प्रकार की गैर राजनैतिक संस्थाओं को स्वतंत्र रूप में ही देखना चाहिए। संभव है कि मेरे इन विचारों को अन्य साहित्यकार व राजस्थानी भाषा प्रेमी मानेंगे और समर्थन देंगे।
वर्तमान में राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे जब चाहेंगी तब यह मनोनयन होगा। इसकी स्वतंत्र कार्य शैली रखने से जो लाभ होगा उस पर भी विचार करना चाहिए।
राजस्थानी साहित्यकारों एवं भाषा प्रेमियों ने एक तरफ राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता के लिए संघर्ष छेड़ रखा है, मगर दूसरी ओर उनकी निष्क्रियता और किसी न किसी कारण से चुप रहने की प्रवृति के कारण राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी शून्य में तड़प रही है। समस्त गतिविधियां ठप्प पड़ी है। 
अकादमी का बजट अध्यक्ष के बिना लेप्स होता रहा है तथा एकमात्र राजस्थानी पत्रिका जागती जोत का प्रकाशन भी ठप्प पड़ा रहा है। अभी भी बुरा हाल है। इस पत्रिका का संपादक भी गैर सरकारी ही होना चाहिए।
राजस्थानी भाषा साहित्य का कोई भी कार्य नहीं हो, केवल कर्मचारियों को वेतन देने के लिए ही बजट उठाया जाए तो इसके लिए अकादमी की मौत के अलावा कोई अन्य शब्द नहीं कहा जा सकता। अध्यक्ष के बिना प्रस्तकों का प्रकाशन,पुरस्कार और सम्मेलन आदि सभी बंद पड़े रहते हैं।
    मैं पहले सन् 2009 में भी कह चुका हूं कि जागती जोत के प्रसार के बारे में भी कभी कोई प्रयास नहीं हुआ। इसके प्रचार प्रसार के लिए जो कदम उठाए जा सकते हैं, उनके बारे में भी सुझाव दे चुका हूं तथा वे समस्त सुझाव उस समय विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में छपते भी रहे हैं।
राजस्थानी भाषा एवं साहित्य के विकास व समृद्धि के लिए इस पत्रिका का प्रदेश के हर उच्च प्राथमिक विद्यालय से ऊपर तक के हर शिक्षण संस्थान में,ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, जिला परिषद के कार्यालयों में और नगरपालिका नगर निगम के कार्यालयों पुस्तकालयों में सरकारी स्तर पर पहुंचाया जाना अनिवार्य किया जाना चाहिए। इसके लिए बजट सीधा शिक्षा विभाग, पंचायत राज विभाग और स्वायत शासन विभाग से ही अकादमी के पास पहुंचाने का कार्यक्रम बनाया जाना चाहिए। राजस्थानी को संवैधानिक मान्यता देर सवेर निश्चित ही मिलेगी इसलिए राजस्थानी को हर कार्यालय में विकसित करना भी जरूरी है।
    अकादमी की स्थापना भाषा साहित्य व संस्कृति के विकास व समृद्धि के लिए की जाती है। राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी की स्थापना का भी यही उद्देश्य था, लेकिन इस उद्देश्य का बीच बीच में अनेक बार विभिन्न तरह से गला घोंटा जाता रहा। राजस्थान सरकार अध्यक्ष के मनोनयन में ढील करे तो कोई प्रश्र करने वाला नहीं। राजस्थान के कण कण में वीरता और रण बांकुरों का इतिहास रमा हुआ है तथा हिन्दी का भक्ति व वीर रस तो राजस्थानी का ही है। रण बांकुरे राजस्थान के वर्तमान राजस्थानी साहित्यकारों ने चुपी क्यों धारण कर रखी है? कहा जाता है कि बीकानेर के महाराजा पृथ्वीराज की कविता ने महाराणा प्रताप को अकबर से युद्ध करने के लिए जोश भर दिया था। अब राजस्थानी साहित्यकार राजस्थान सरकार को क्यों नहीं जगा सकते? आखिर वे किन स्वार्थों व कारणों से चुप हैं? क्या इसके पीछे पुरस्कारों का   या भविष्य में कभी मिलने वाला अध्यक्ष पद व सदस्यता का लालच छिपा है। ये शब्द कड़वे माने जा सकते हैं मगर सच्च तो यही है।
    राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता के लिए राजस्थान विधान सभा में राज्य सरकार ने 25 अगस्त 2003 को एक प्रस्ताव पारित कर केन्द्र सरकार को भिजवाया था जिसके तहत राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल किए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ था।  उस समय प्रदेश में अशोक गहलोत मुख्यमंत्री थे। अब तक 12 साल बीत गए लेकिन संवैधानिक मान्यता नहीं मिल पाई। अब केन्द्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार है और भारत के हर क्षेत्र के विकास की चाहत है तो फिर देरी करने के बजाए राजस्थानी को संविधान की आठवीं अनुसूचि में शामिल किए जाने का प्रस्ताव भी पारित कर दिया जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने कई भाषणों में इस प्रकार के वकतव्य दिए हैं कि काल करे सो आज कर,आज करे सो अब,पल में प्रलय होएगी,फिर करेगो कब? जो कार्य करना ही है तब उसे टालते रहने से कोई लाभ मिलने वाला नहीं है। राजसथानियों को तो लाभ उस दिन मिलने लगेगा जब राजस्थानी को मान्यता मिल जाएगी।
राजस्थानी की संवैधानिक मान्यता के इंतजार में अनेक राजस्थानी साहित्यकार स्वर्ग सिधार गए और कई इस पंक्ति में पहुंचे हुए हें। कम से कम इस आस में जी रहे लोगों की आत्मा को अब आनन्दित कर दिया जाना चाहिए।

सोमवार, 30 मार्च 2015

पीएम की सभा हुई वहां की हाईमास्क लाईट टावर 33 हजार केवी बिजली लाइन पर गिरा:नट निकाले हुए थे?


सूरतगढ़ स्टेडियम में पीएम का मंच व ऑफिस करीब 100 मीटर दूरी पर थे। 19 फरवरी को सभा हुई थी।
अगर टावर सभा वाले दिन गिरता तो क्या होता?
पूरा मामला बेहद गंभीर जांच का। नगरपालिका  सवालों में घिर गई
स्पेशल रिपोर्ट - करणीदानसिंह राजपूत
सूरतगढ़, 30 मार्च 2015.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 19 फरवरी को नगरपालिका स्टेडियम में जहां सभा हुई थी वहां पर लगाया हुआ हाई मास्क लाइट का टावर आज अचानक शाम को वहां से निकली हुई 33 हजार केवी की बिजली लाइन पर गिर गया। उससे बिजली लाइन के टावर टेढ़े हो गए व भयानक आग लगने का खतरा पैदा हो गया। यहां बिजली लाइन बस्ती के पास से व ऊपर से गुजरती है वहां बुरा हाल होता। स्टेडियम में कुछ ही दूरी पर पचासों बच्चे व युवक खेलने में लगे हुए थे।
जोधपुर विद्युत वितरण निगम के कर्मचारी टावर को बिजली की तारों पर से हटाने में लगे व नगरपालिका कर्मचारी व जेसीबी मशीन भी थी।


वहां पर पालिका कर्मचारियों के मुंह से निकल रहा था कि टावर जिस सीमेंट के आधार पर टिका था के बोल्टों के कई नट गायब थे। ये नट कब और किसके द्वारा खोले गए थे?
अगर सच्च में नट खोले जाने से यह घटना हुई है तो गंभीर मामले की ओर संकेत करती है। जहां से नट खोले गए वहां के बोल्ट की चूडिय़ां जंग लगी है। मतलब ताजा दो चार दिनों में खोले हुए नहीं थे?
मामला जो कुछ भी हो गंभीर जरूर हो गया है।
करीब सवा महीना पहले 19 फरवरी को प्रधानमंत्री की स्टेडियम में सभा हुई थी। उसमें हजारों लोग शामिल हुए थे। सभा में 9 राज्यों के मुख्यमंत्री आने वाले थे जिनमें 2 के मुख्यमंत्री आए। वसुंधरा राजे व प्रकाशसिंह बादल आए थे। मृदा स्वास्थ्य कार्ड का लोकार्पण हुआ था जिसमें 9 राज्यों के उच्च स्तरीय अधिकारी व प्रगतिशील किसान आए थे।








प्रधानमंत्री की सभा की सुरक्षा वास्ते 33 हजार वाली बिजली लाइन में बिजली का प्रवाह बंद किया गया था लेकिन टावर गिरता तब भगदड़ तो मच ही जाती और उस समय भीड़ को नियंत्रित करना कठिन होता और वह सुरक्षा को खतरा होता।
प्रधानमंत्री की सभा सुख शांति से हो गई लेकिन नगरपालिका पर इस हादसे के बाद कई सवालों में घिर गई
है ।
नगरपालिका  सवालों में घिर गई

शनिवार, 28 मार्च 2015

करणी माता मंदिर सूरतगढ़ :नवमी पूजन हवन:


सूरतगढ़,28 मार्च 2015.
चैत्रीय नवरात्रों पर मां करणी मंदिर में नवमी पर देवी दुर्गा और करणी माता देशनोक वाली का पूजन अर्चन किया गया। इस अवसर पर हवन किया गया। राजपूत सरदारों व उनके परिवारों व अन्य श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। लालसिंह बीका सपत्नीक श्रीमती प्रेमकंवर और पत्रकार करणीदानसिंह राजपूत ने सपत्नीक श्रीमती विनीता सूर्यवंशी पूजन अर्चन व हवन किया। राजपूत क्षत्रिय धर्मशाला प्रांगण में कन्याओं को जिमाया गया और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया।

=========================
विजयश्री करणी भवन में नवमी पर पूजन और कन्याओं को जीमण:
सूर्योदय नगरी में विजयश्री करणी भवन में मां दुर्गा,काली मां व करणी माता का नवमी पर पूजन हुआ।
माँ की जोत की गई। कन्याओं को जीमण कराया गया। करणीदानसिंह राजपूत एवं पत्नी विनीता सूर्यवंशी और योगेन्द्र प्रतापसिंह एवं पत्नी रीतिका भाटी ने पूजन किया।
पूजन के बाद कन्याओं को जीमण कराया गया।




गुरुवार, 26 मार्च 2015

मौत की खाने मौत के कारखाने:टीबी और सिलिकोसिस की पैदावार:



राजसमंद जिले में जिंदगी को तड़पते हजारों परिवार: खामोशी से मौतें देखता शासन प्रशासन:
40 साल तक का जीवन आगे बीमारियां न खून न मांस:बस तड़पते कंकाल:
राजनीतिक दलों और ट्रेड यूनियनों के नेता और कार्यकर्ता, एनजीओ, सामाजिक और मानवाधिकार कार्यकर्ता उदासीन बने हुये हैं
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत


मील के पैट्रोल पंप की जमीन निरस्ती की खबर पर बवाल:


श्रीगंगानगर के एक सांध्य दैनिक में 25 मार्च  को खबर-
मील ने बताया झूठा समाचार:
सूरतगढ़,26 मार्च 2015.
पूर्व विधायक गंगाजल मील के परिवार का सूरतगढ़ में राष्ट्रीय उच्च मार्ग नं 15 अब 62 पर पैट्रोल पंप है जिसमें प्रमुख कंपनी के ब्रांड का पैट्रोल बिकता है।
इस पंप की जमीन का गलत आवंटन लोकायुक्त द्वारा खारिज किए जाने का समाचार छपा है। समाचार में यह भी लिखा है कि लोकायुक्त को विधायक राजेन्द्र भादू ने शिकायत की थी।
पूर्व विधायक गंगाजल मील ने इस समाचार को आधारहीन व बदनामी करने वाला बताया है। उन्होंने कहा है कि लोकायुक्त की ओर से जांच के लिए कभी कोई पत्र तक नहीं आया। मील ने इस बाबत यह सूचना जारी की है।

सूरतगढ दिनांक 25.3.2015, एक सांध्य दैनिक समाचार पत्र में सरकारी भूमि का गलत तरीके से आबंटन करवाकर उस भूमि पर लगे हुए पैट्रोल पम्प को हटाने के लोकायुक्त के जारी आदेष के समाचार को पूर्व विधायक गंगाजल मील ने बिल्कुल असत्य एवं निराधार बताते हुए किसी द्वारा सिर्फ बदनाम करने के लिए ये झूठा समाचार छपवाया है। उक्त प्रकरण के सम्बन्ध में आज तक लोकायुक्त से जॉच सम्बन्धित कोई सूचना या नोटिस प्राप्त नहीं हुआ, बल्कि मेरे पुत्र महेन्द्र एवं भाई हजारीराम के नाम से लगभग 10  वर्ष पूर्व उक्त साढे पांच बीघा जमीन खसरा न. 326 में तरमीमषुदा खरीदी थी, जिसका इंतकाल  हमारे नाम से है। इसी भूमि में से 170 फुट गुणा 170 फुट भूमि का पैट्रोल पम्प के लिए 90 बी की कार्यवाही करवाकर विधि सम्वत पैट्रोल पम्प लगवाया है।

उक्त समाचार पत्र ने इस भूमि को गलत आबंटन बताया है, बल्कि यह भूमि आबंटन ना होकर हमारी खातेदारी भूमि है।



 


बुधवार, 25 मार्च 2015

पूर्व विधायक गुरूशरण छाबड़ा आदि:पुलिस पर पथराव का मुकद्दमा वापस:






रजनी मोदी,बलराम वर्मा,मदन औझा,विजय कुमार लाहोटी,भवानीशंकर उर्फ राधाकिशन सोनी निवासी सूरतगढ़। प्रदीप नायक निवासी रंगमहल-सूरतगढ़: जगदीश धनावंशी,गजानन्द सोनी,हजारीलाल,महेन्द्र सोनी,मुस्ताक निवासी सरदारशहर। हजारीलाल मेघवाल हरियासर-सरदारशहर। भी अभियुक्तों में थे।

मुकद्दमा 19 मार्च 2008 को सरदारशहर में दर्ज हुआ था और सरकार के निवेदन पर 27 फरवरी 2015 को अदालत ने वापस किया।
स्पेशल रिपोर्ट- करणीदानसिंह राजपूत


मंगलवार, 24 मार्च 2015

इंटरनेट सोशल मीडिया पर सुप्रीमकोर्ट का बड़ा फैसला:66ए खत्म की:


आईआईटी की धारा 66 ए हटाई:पुलिस आनन फानन में गिरफ्तारी नहीं कर पाएगी:
भारतीय दंड संहिता के कानून लागू रहेंगे:
सूरतगढ़ 24 मार्च 2015.
फेस बुक व अन्य इंटरनेट की सोशल मीडिया साइटों पर अपने कमेंट्स करने,कार्टून बनाने पर मुकद्दमा दर्ज कराने पर पुलिस आनन फानन में गिरफ्तार कर लेती थी जिस पर देश भर में हल्ला मचा था कि संविधान में दी गई अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर यह कुठाराघात है। पुलिस ने आइआईटी की धारा 66 ए के तहत कई गिरफ्तारियां भी की थी। इन गिरफ्तारियों में कार्टूनिस्ट,विद्यार्थी व सामान्य युवक आदि शामिल रहे हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस धारा के हटाने से सोशल मीडिया पर लिखने वालों को बड़ी राहत मिली है।
हालांकि इससे मनमाने लिखने की छूट नहीं है। किसी को आपत्ति होगी तो वह मुकद्दमा तो कर ही सकेगा व भारतीय कानूनों के तहत,भारतीय दंड संहिता की धाराओं पर कार्यवाही होगी।


रविवार, 22 मार्च 2015

डांडिया नृत्य संग चेटिचंड महोत्सव सूरतगढ़ की शोभा:


सूरतगढ़,22 मार्च 2015.
सिंधी समुदाय ने 21 मार्च को चेटिचंड महोत्सव झूलेलाल मंदिर प्रांगण में हर्षाेललास से मनाया। झूलेलाल का सत्संग और प्रसाद वितरण के बाद संध्या में डांडिया नृत्य के साथ बहराणा साहिब की झांकी की शोभा यात्रा निकाली गई। यह शोभा यात्रा नगर में कई मार्गों से होती हुई शहीद हेमू कल्याणी चौक पर पहुंची जहां काफी 


शनिवार, 21 मार्च 2015

रेलगाड़ी घास लकडिय़ां ढोने का जुगाड़: अधिकारी कर्मचारी शामिल:रेल आमदनी को चपत:


डिब्बों में लकडिय़ां घास भरे होने से यात्रियों को परेशानी:




सूरतगढ़ पहुंचने वाली गाडिय़ों में मिली भगत से चलता धंधा:
टीटी और सुरक्षा बल करते हैं कौनसी ड्यूटी?
- खास खबर -


यह ब्लॉग खोजें