सोमवार, 8 जून 2026

राजनीति की लालसा में शराब बंदी पर काम नहीं हुआ. सूरतगढ़ में शराब बढी,पीने वाले बढे.

 



करणीदानसिंह राजपूत *

पूर्व विधायक गुरु छाबड़ा ने राजस्थान में संपूर्ण शराब बंदी और.लोकपाल की नियुक्ति की मांग के आमरण अनशन में अपने प्राण उत्सर्ग कर दिये थे लेकिन उनके मुख्य कर्म स्थल सूरतगढ़ में शराबबंदी कार्यक्रम पिछले 3 सालों से संपूर्ण प्रकार से बंद हो गया है। शराबबंदी पर काम करना तो दूर रहा उस पर कहीं बोलना लिखना परिचर्चा करना भी नहीं चाहते। शराबबंदी आंदोलन का नेता घोषित करने और काम नहीं करने का हश्र यह हुआ है कि छाबड़ा के कर्मक्षेत्र सूरतगढ़ में शराब पीने पिलाने वालों की संख्या बढ गई और शराब की बिक्री बहुत अधिक होने से व्यवस्था के लिए सूरतगढ़ में आबकारी विभाग का उपायुक्त का नया पद सृजित कर दिया गया है। श्रीगंगानगर जिले में पहले एक उपायुक्त था जिसका मुख्यालय श्रीगंगानगर जिला मुख्यालय पर था। अब जिले में उपायुक्त नं 2 पद सृजित किया गया है जिसका मुख्यालय सूरतगढ़ रखा गया है। इस उपायुक्त का कार्यक्षेत्र राजस्व विभाग के 5 उपखंडों सूरतगढ़, श्रीबिजयनगर, अनूपगढ़, घड़साना और रायसिंहनगर तक होगा। 

राजनीति की पद लालसा ने  यहां शराबबंदी आंदोलन को खत्म कर दिया। शराबबंदी का नाम लेवा भी कोई दिखाई नहीं देता। शराबबंदी का कहीं नारा सुनाई नहीं देता। दो घोड़ों पर सवार जैसा नाटक कभी सफल नहीं होता। ऐसा ही हुआ। राजनीति में कुछ पाने की लालसा में शराबबंदी में कुछ नहीं हुआ और राजनीति में भी फिसड्डी रहे। राजनीति में फील्ड में जनता के साथ रहकर पीड़ाओं को बराबर भोगना होता है, लेकिन ऐसा दम नहीं था। लोगों का भरोसा टूटा। शराबबंदी को छोड़ा और राजनीति में कुछ मिला नहीं न कुछ अस्तित्व बना। 

👌 राजस्थान में लोकपाल की नियुक्ति की मांग इसलिए थी कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध लोकपाल का कार्य पूर्ण स्वतंत्र होगा जिसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं होगा। लोकपाल नियुक्त नहीं किया गया। सूरतगढ़ शहर और आसपास में भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध भी कोई एक भी काम नहीं हुआ। छाबड़ा जी का नाम लेकर आगे बढ़ना चाहें लेकिन कहीँ एक शिकायत भी भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारी की नहीं की गई। सूरतगढ़ में भ्रष्टाचार दिनरात बढा भ्रष्टाचारी बढे,अखबारों में सोशल मीडिया में मामले और अधिकारियों के नाम उजागर होते रहे मगर इस मुद्दे पर भी जनता का साथ नहीं दिया गया। दोनों ही मोर्चों पर विफलता रही।

👌 छाबड़ा जी भ्रष्टाचार अनाचार रिश्वत आदि के घोर विरोधी रहे लेकिन यहां भ्रष्टाचार से लूट मची है और छाबड़ा जी के नाम लेवा किसी पीड़ित की सहायता करते हुए दिखाई नहीं देते। जनता को लुटता पिटता देख कर आंखें बंद कर लेना कौनसी राजनीति या होशियारी है? भ्रष्टाचार के मामलों को शिकायतों को अनदेखा करना और भ्रष्टाचारियों के विरूद्ध कार्यवाही नहीं करना,सरकार के आगे मंत्रियों के आगे नहीं रखना चुप रहना तो कोई भी राजनीति नहीं सिखाती। राजनीति तो जनता के बीच उनके दुख दर्द में साझीदार होकर ही की जाती है। ये गुण गुरूशरण छाबड़ा में थे लेकिन गुररूशरण के नाम को ओढने वालों में नहीं दिखे।

*शराब पीने वालों के साथ हेलमेल रखकर शराबबंदी कार्यक्रम नहीं चलाए जा सकते और भ्रष्टाचारियों के साथ हेलमेल रखते हुए भ्रष्टाचार के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की जा सकती। भ्रष्टाचारी साथ होंगे तब भ्रष्ट सरकारी अधिकारियों कर्मचारियों के विरुद्ध कार्य नहीं किये जा सकते बल्कि अपने साथ रहने वालों के कहने पर चला जाएगा। अपने साथियों व जानकारों के भ्रष्टाचार सरकारी सम्पत्ति हड़पने के काम दिखाई नहीं देते और भ्रष्टाचार में सहयोगी अधिकारी कर्मचारी भी दिखाई नहीं देते। ऐसा ही सूरतगढ़ में हुआ है। ऐसी नीति के आचरण को बदलती है तथा व्यक्ति को भ्रष्ट बनाती है और वह जनता से दूर होता जाता है। जनता गरीब असहाय पीड़ित दुखों में डूबी हो सकती है लेकिन एक बार के काम पड़ने और काम नहीं करने में ही समझ जाती है। जनता की समझ और अपनी कार्यशैली पर विचार करना उचित होता है। अपने एकदम साथ रहने वाले सहयोगियों के कामों और सुझावों में एक पर भी काम नहीं करवा पाना राजनीति में बड़ी मूर्खता और असफलता होती है। राजनीति में धरती पर काम करने वाले सफल होते हैं और यही शराबबंदी में फील्ड वर्क हो तो सफलता मिलती है। ये गुण गुरूशरण छाबड़ा में थे। गुरूशरण छाबड़ा का नाम और नारा नहीं, उनकी नीतियों का ईमानदारी से अनुशरण होना चाहिए जो यहां सूरतगढ़ में नहीं हुआ।

 गुरूशरण छाबड़ा की जयंती 9 जून को मनाई जाती है। छाबड़ा ने जनता की मांगों के लिए,परेशानियों को दूर करने के लिए अनेक संघर्ष किए थे। अब उनकी तरह काम करने वाला व्यक्ति चाहिए। उनका नाम लेकर न राजनीति की जा सकती है और न शराबबंदी का काम किया जा सकता है। राजनीति और शराबबंदी दोनों में फील्ड में ही काम करने होते हैं जिनको मंचों पर भाषण देकर नहीं किया जा सकता।

गुरूशरण छाबड़ा की जयंती 9 जून पर यह निर्णय करना चाहिए कि किस एक काम को चुना जाए और उस पर कदम बढाए जाएं?

* राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के आगे उनकी आदमकद प्रतिमा है। सूरतगढ़ में उनकी प्रतिमा बड़े बाग में स्थापित होनी चाहिए।०0०

8 जून 2026.

करणीदानसिंह राजपूत,

पत्रकार ( राजस्थान सरकार से अधि स्वीकृत लाईफटाईम)

सूरतगढ़ ( राजस्थान )

94143 81356.

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